इतनी आजाद ह,ै उसने सोचा और प मी िकतनी अ छी है उसक बेतक लुफ म भोलापन तो
नह ह,ै पर सरलता बेहद है बड़ा साफ िदल ह,ै कु छ िछपाना नह जानती और सुधा से िसफ
पाँच-छह साल बड़ी ह,ै लेिकन सुधा उसके सामने ब ची लगती है िकतना जानती है प मी और
िकतनी अ छी समझ है उसक और च दर क तारीफ करते नह थकती च दर के िलए
उसने िसगरे ट छोड़ दी च दर उसका दो त ह,ै इतनी पढ़ी-िलखी लड़क के िलए रोशनी का
देवदतू है सचमचु च दर पर सुधा को गव है और उसी च दर से वह लड़-झगड़ लेती ह,ै
इतनी मान-मनुहार कर लेती है और च दर सब बदा त कर लेता है वरना च दर के इतने बड़े-
बड़े दो त ह और च दर क इतनी इ जत है अगर च दर चाहे तो सुधा क र ी भर परवाह न
करे लेिकन च दर सुधा क भली-बुरी बात बदा त कर लेता है और वह िकतना परे शान करती
रहती है च दर को
कभी अगर सचमचु च दर बहत नाराज हो गया और सचमचु हमेशा के िलए बोलना छोड़ दे तब
या होगा? या च दर यहाँ से कह चला जाए तब या होगा? खरै , च दर जाएगा तो नह
इलाहाबाद छोडक़र, लेिकन अगर वह खुद कह चली गयी तब या होगा? वह कहाँ जाएगी! अरे
पापा को मनाना तो बाय हाथ का खेल ह,ै और ऐसा यार वह करे गी नह िक शादी करनी पड़े
लेिकन यह सब तो ठीक है पर च दर ने िच ी य नह भेजी? या नाराज होकर गया ह?ै
जाते व सुधा ने परे शान तो बहत िकया था होलडॉल क पेटी का ब सुआ खोल िदया था
और उठाते ही च दर के हाथ से सब कपड़े िबखर गये च दर कु छ बोला नह लेिकन जाते
समय उसने सुधा को डाँटा भी नह और न यही समझाया िक घर का खयाल रखना, अके ले
घमू ना मत, महरािजन से लड़ना मत, पढ़ती रहना इससे सुधा समझ तो गयी थी िक वह
नाराज ह,ै लेिकन कु छ कहा नह
लेिकन च दर को खत तो भेजना चािहए था चाहे गु से का ही खत य न होता? िबना खत
के मन उसका िकतना घबरा रहा है और या च दर को मालमू नह होगा यह कै से हो
सकता ह?ै जब इतनी दरू बठै े हए सुधा को मालमू हो गया िक च दर नाखुश है तो या च दर
को नह मालमू होगा िक सुधा का मन उदास हो गया है ज र मालमू होगा सोचते-सोचते
उसे जाने कब न द आ गयी और न द म उसे पापा या च दर क िच ी िमली या नह , यह तो नह
मालमू , लेिकन इतना ज र है िक जसै े यह सारी सिृ एक िब दु से बनी और एक िब दु म समा
गयी, उसी तरह सुधा क यह भाद क घटाओं जसै ी फै ली हई बेचनै ी और गीली उदासी एक
च दर के यान से उठी और उसी म समा गयी
8
दसू रे िदन सुबह सुधा आँगन म बठै ी हई आलू छील रही थी और च दर का इ तजार कर रही
थी उसी िदन रात को पापा आ गये थे और दसू रे िदन सुबह बुआजी और िबनती
“सुधी!” िकसी ने इतने यार से पुकारा िक हवाओं म रस भर गया
“अ छा! आ गये च दर!” सुधा आलू छोडक़र उठ बठै ी, “ या लाये हमारे िलए लखनऊ से?”
“बहत कु छ, सुधा!”
“के है सुधा!” सहसा कमरे म से कोई बोला
“च दर ह ” सुधा ने कहा, “च दर, बुआ आ गय ” और कमरे से बुआजी बाहर आय
“ णाम, बुआजी!” च दर बोला और परै छू ने के िलए झकु ा
“हाँ, हाँ, हाँ!” बुआजी तीन कदम पीछे हट गय “देख य न हम पजू ा क धोती पहने ह ई
के ह,ै सुधा!”
सुधा ने बुआ क बात का कु छ जवाब नह िदया-”च दर, चलो अपने कमरे म; यहाँ बुआ पजू ा
करगी ”
च दर अलग हटा बुआ ने हाथ के पंचपा से वहाँ पानी िछडक़ा और जमीन फँू कने लग
“सुधा, िबनती को भेज देव ” बुआजी ने धपू दानी म महरािजन से कोयला लेते हए कहा
सुधा अपने कमरे म पहँचकर च दर को खाट पर िबठाकर नीचे बठै गयी
“अरे , ऊपर बठै ो ”
“नह , हम यह ठीक ह ” कहकर वह बठै गयी और च दर क पट पर पेि सल से लक र
ख चने लग
“अरे यह या कर रही हो?” च दर ने परै उठाते हए कहा
“तो तमु ने इतने िदन य लगाये?” सुधा ने दसू रे पाँयचे पर पेि सल लगाते हए कहा
“अरे , बड़ी आफत म फँ स गये थे, सुधा लखनऊ से हम लोग गये बरे ली वहाँ एक उ सव म
हम लोग भी गये और एक िमिन टर भी पहँचे कु छ सोशिल ट, क युिन ट, और मजदरू ने
िवरोध दशन िकया िफर तो पुिलसवाल और मजदरू म जमकर लड़ाई हई वह तो कहो एक
बेचारा सोशिल ट लड़का था कै लाश िम ा, उसने हम लोग क जान बचायी, वरना पापा और
हम, दोन ही अ पताल म होते...”
“अ छा! पापा ने हम कु छ बताया नह !” सुधा घबराकर बोली और बड़ी देर तक बरे ली, उप व
और कै लाश िम ा क बात करती रही
“अरे ये बाहर गा कौन रहा ह?ै ” च दर ने सहसा पछू ा
बाहर कोई गाता हआ आ रहा था, “आँचल म य बाँध िलया मझु परदेशी का यार....आँचल म
य ...” और च दर को देखते ही उस लड़क ने च ककर कहा, “अरे ?” ण-भर त ध, और
िफर शरम से लाल होकर भागी बाहर
“अरे , भागती य ह?ै यही तो ह च दर ” सुधा ने कहा
लड़क बाहर क गयी और गरदन िहलाकर इशारे से कहा, “म नह आऊँ गी मझु े शरम लगती
है ”
“अरे चली आ, देखो हम अभी पकड़ लाते ह, बड़ी झ क है यह ” कहकर सुधा उठी, वह िफर
भागी सुधा पीछे-पीछे भागी थोड़ी देर बाद सुधा अ दर आयी तो सुधा के हाथ म उस लड़क
क चोटी और वह बेचारी बुरी तरह अ त- य त थी दाँत से अपने आँचल का छोर दबाये हए थी
बाल क तीन-चार लट महँु पर झकु रही थ और लाज के मारे िसमटी जा रही थी और आँख थ
िक मु काये या रोये, यह तय ही नह कर पायी थ
“देखो...च दर...देखो ” सुधा हाँफ रही थी-”यही है िबनती मोटक कह क , इतनी मोटी है िक
दम िनकल गया हमारा ” सुधा बुरी तरह हाँफ रही थी
च दर ने देखा-बेचारी क बुरी हालत थी मोटी तो बहत नह थी पर हाँ, गाँव क त दु ती
थी, लाल चेहरा, िजसे शरम ने तो दनू ा बना िदया था एक हाथ से अपनी चोटी पकड़े थी, दसू रे
से अपने कपड़े ठीक कर रही थी और दाँत से आँचल पकड़े
“छोड़ दो उसे, यह या है सुधा! बड़ी जंगली हो तमु ” च दर ने डाँटकर कहा
“जंगली म हँ या यह?” चोटी छोड़कर सुधा बोली-”यह देखो, दाँत काट िलया है इसने ”
सचमचु सुधा के क धे पर दाँत के िनशान बने हए थे
च दर इस स भावना पर बेतहाशा हँसने लगा िक इतनी बड़ी लड़क दाँत काट सकती ह-ै ” य
जी, इतनी बड़ी हो गयी और दाँत काटती हो?” उसक हँसी क नह रही थी “सचमचु यह तो
बड़े मजे क लड़क है िबनती है इसका नाम? य रे , महआ बीनती थी या वहाँ, जो बुआजी
ने िबनती नाम रखा ह?ै ”
वह प ला ठीक से ओढ़ चुक थी बोली, “नम ते ”
च दर और सुधा दोन हँस पड़े “अब इतनी देर बाद याद आयी ” च दर और भी हँसने लगा
“िबनती! ए िबनती!” बुआ क आवाज आयी िबनती ने सुधा क ओर देखा और चली गयी
“और कहो सुधी,” च दर बोला-” या हाल-चाल रहा यहाँ?”
“िफर भी एक िच ी भी तो नह िलखी तमु ने ” सुधा बड़ी िशकायत के वर म बोली, “हम रोज
लाई आती थी और तु हारी वो आयी थी ”
“हमारी वो?” च दर ने च ककर पछू ा
“अरे हाँ, तु हारी प मी रानी ”
“अ छा वो आयी थ या बात हई?”
“कु छ नह ; तु हारी तसवीर देख-देखकर रो रही थ ” सुधा ने उँगिलयाँ नचाते हए कहा
“मेरी तसवीर देखकर! अ छा, और थी कहाँ मेरी तसवीर?”
“अब तमु तो बहस करने लगे, हम कोई वक ल ह! तमु कोई नयी बात बताओ ” सुधा बोली
“हम तो तु ह बहत-बहत बात बताएँगे परू ी कहानी है ”
इतने म िबनती आयी उसके हाथ म एक त तरी थी और एक िगलास त तरी म कु छ िमठाई
थी, और िगलास म शरबत उसने लाकर त तरी च दर के सामने रख दी
“ना भई, हम नह खाएँगे ” च दर ने इनकार िकया
िबनती ने सुधा क ओर देखा
“खा लो लगे नखरा करने लखनऊ से आ रहे ह न, तक लुफ न कर तो मालमू कै से हो?”
सुधा ने महँु िचढ़ाते हए कहा च दर मसु कराकर खाने लगा
“दीदी के कहने पर खाने लगे आप!” िबनती ने अपने हाथ क अँगठू ी क ओर देखते हए
कहा
च दर हँस िदया, कु छ बोला नह िबनती चली गयी
“बड़ी अ छी लड़क मालमू पड़ती है यह ” च दर बोला
“बहत यारी है और पढऩे म हमारी तरह नह ह,ै बहत तेज है ”
“अ छा! तु हारी पढ़ाई कै सी चल रही ह?ै ”
“मा टर साहब बहत अ छा पढ़ाते ह और च दर, अब हम खबू बात करते ह उनसे दुिनया-भर
क और वे बस हमेशा िसर नीचे िकये रहते ह एक िदन पढ़ते व हम गरी पास म रखकर
खाते गये, उ ह मालमू ही नह हआ उनसे एक िदन किवता सुनवा दो ” सुधा बोली
च दर ने कु छ जवाब नह िदया और डॉ. साहब के कमरे म जाकर िकताब उलटने लगा
इतने म बुआजी का तेज वर आया-”हम मालमू होता िक ई महँु -झ सी हमके ऐसी नाच नचइहै
तौ हम पदै ा होतै गला घ ट देइत हरे राम! अ काश िसर पर उठाये है कै घंटे से न रयात-
न रयात गटई फट गयी ई बोलतै नाह जसै े साँप सँघू गवा होय ”
ोफे सर शु ला के घर म वह नया सां कृ ितक त व था िकतनी शालीनता और िश ता से वह
रहते थे कभी इस तरह क भाषा भी उनके घर म सुनने को िमलेगी, इसक च दर को जरा भी
उ मीद न थी च दर च ककर उधर देखने लगा डॉ. शु ला समझ गये कु छ लि जत-से
और मसु कराकर लािन िछपाते हए-से बोले, “मेरी िवधवा बहन ह,ै कल गाँव से आयी है लड़क
को पहँचाने ”
उसके बाद कु छ पटकने का वर आया, शायद िकसी बरतन के इतने म सुधा आयी, गु से से
लाल-”सुना पापा तमु ने, बुआ िबनती को मार डालगी ”
“ या हआ आिखर?” डॉ. शु ला ने पछू ा
“कु छ नह , िबनती ने पजू ा का पंचपा उठाकर ठाकु रजी के िसंहासन के पीछे रख िदया था
उ ह िदखाई नह पड़ा, तो गु सा िबनती पर उतार रही ह ”
इतने म िफर उनक आवाज आयी-”पदै ा करते बखत बहत अ छा लाग रहा, पालत बखत ट बोल
गये मर गये र ो तो आपन स तानौ अपने साथ लै जा यौ हमारे मड़ू पर ई ह या काहे डाल
गयौ ऐसी कु ल छनी है िक पदै ा होतेिहन बाप को खाय गयी ”
“सुना पापा तमु ने?”
“चलो हम चलते ह ” डॉ. शु ला ने कहा सुधा वह रह गयी च दर से बोली, “ऐसा बुरा
वभाव है बुआ का िक बस िबनती ऐसी है िक इतना बदा त कर लेती है ”
बुआ ने ठाकु रजी का िसंहासन साफ करते हए कहा, “रोवत काहे हो, कौन तु हारे माई-बाप को
ग रयावा है िक ई अँसुआ ढरकाय रही हो ई सब चोचला अपने ओ को िदखाओ जायके दुई
महीना और ह-अबिहन से उिधयानी न जाओ ”
अब अभ ता सीमा पार कर चुक थी
“िबनती, चलो कमरे के अ दर, हटो सामने से ” डॉ. शु ला ने डाँटकर कहा, “अब ये चरखा
ब द होगा या नह कु छ शरम-हया है या नह तमु म?”
िबनती िससकते हए अ दर गयी टडी म म देखा िक च दर है तो उलटे पाँव लौट आयी सुधा
के कमरे म और फू ट-फू टकर रोने लगी
डॉ. शु ला लौट आये-”अब हम ये सब कर िक अपना काम कर! अ छा कल से घर म महाभारत
मचा रखा है कब जाएँगी ये, सुधा?”
“कल जाएँगी पापा अब िबनती को कभी मत भेजना इनके पास ” सुधा ने गु सा-भरे वर म
कहा
“अ छा-जाओ, हमारा खाना परसो च दर, तमु अपना काम यहाँ करो यहाँ शोर यादा हो तो
तमु लाइ रे ी म चले जाना आज भर क तकलीफ है ”
च दर ने अपनी कु छ िकताब उठाय और उसने चला जाना ही ठीक समझा सुधा खाना
परोसने चली गयी िबनती रो-रोकर और तिकये पर िसर पटककर अपनी कुं ठा और दु:ख उतार
रही थी बुआ घंटी बजा रही थ , दबी जबान जाने या बकती जा रही थ , यह घंटी के भि -
भावना-भरे मधुर वर म सुनायी नह देता था
9
लेिकन बुआजी दसू रे िदन गय नह जब तीन-चार िदन बाद च दर गया तो देखा बाहर के
सेहन म डॉ. शु ला बठै े हए ह और दरवाजा पकडक़र बुआजी खड़ी बात कर रही ह लेिकन इस
व बुआजी काफ ग भीर थ और िकसी िवषय पर म णा कर रही थ च दर के पास पहँचने
पर फौरन वे चुप हो गय और च दर क ओर सशंिकत ने से देखने लग डॉ. शु ला बोले,
“आओ च दर, बठै ो ” च दर बगल क कु स ख चकर बठै गया तो डॉ. साहब बुआजी से बोले,
“हाँ, हाँ, बात करो, अरे ये तो घर के आदमी ह इनके बारे म सुधा ने नह बताया तु ह? ये
च दर ह हमारे िश य, बहत अ छा लड़का है ”
“अ छा, अ छा, भइया बइठो, तू तो एक िदन अउर आये र ो, बी. ए. म पढ़त हौ सुधा के संगे ”
“नह बुआजी, म रसच कर रहा हँ ”
“वाह, बहत खुशी भई तोको देख के -हाँ तो सुकु ल!” वे अपने भाई से बोल , “िफर यही ठीक
होई िबनती का िबयाह टाल देव और अगर ई लड़का ठीक हई जाय तो सुधा का िबयाह अषाढ़-
भर म िनपटाय देव अब अ छा नाह लागत ठूँठ ऐसी िबिटया, सनू ी माँग िलये छररावा करत
है एहर-ओहर!” बुआ बोल
“हाँ, ये तो ठीक है ” डॉ. शु ला बोले, “म खुद सुधा का याह अब टालना नह चाहता बी.ए.
तक क िश ा काफ है वरना िफर हमारी जाित म तो लड़के नह िमलते लेिकन ये जो
लड़कातमु बता रही हो तो घर वाले कु छ एतराज तो नह करगे! और िफर, लड़का तो हम अ छा
लगा लेिकन घरवाले पता नह कै से ह ?”
“अरे तो घरवालन से का करै का है तोको लड़कातो अलग ह,ै अपने-आप पढ़ रहा है और
लड़क अलग रिहए, न सास का डर, न ननद क ध स हम प ी मगँ वाये देइत ही, िमलवाय
लेव ”
डॉ. शु ला ने वीकृ ित म िसर िहला िदया
“तो िफर िबनती के बारे म का कहत हौ? अगहन तक टाल िदया जाय न?” बुआजी ने पछू ा
“हाँ हाँ,” डॉ. शु ला ने िवचार म डू बे हए कहा
“तो िफर तमु ही इन जतू ािपटऊ, बड़न कू से कह िदयौ; आय के कल से हमरी छाती पर मगँू
दलत ह ” बुआजी ने च दर क ओर िकसी को िनदिशत करते हए कहा और चली गय
च दर चुपचाप बठै ा था जाने या सोच रहा था शायद कु छ भी नह सोच रहा था! मगर िफर
भी अपनी िवचार-शू यता म ही खोया हआ-सा था जब डॉ. शु ला उसक ओर मड़ु े और कहा,
“च दर!” तो वह एकदम से च क गया और जाने िकस दुिनया से लौट आया डॉ. साहब ने
कहा, “अरे ! तु हारी तबीयत खराब है या?”
“नह तो ” एक फ क हँसी हँसकर च दर ने कहा
“तो मेहनत बहत कर रहे होगे िकतने अ याय िलखे अपनी थीिसस के ? अब माच ख म हो
रहा है और परू ा अ लै तु ह थीिसस टाइप कराने म लगेगा और मई म हर हालत म जमा हो जानी
चािहए ”
“जी, हाँ ” बड़े थके वर म च दर ने कहा, “दस अ याय हो ही गये ह तीन अ याय और होने
ह और अनु मिणका बनानी है अ लै के पहले स ाह तक ख म हो ही जायेगा अब िसवा
थीिसस के और करना ही या ह?ै ” एक बहत गहरी साँस लेते हए च दर ने कहा और माथा
थामकर बठै गया
“कु छ तबीयत ठीक नह है तु हारी चाय बनवा लो! लेिकन सुधा तो है नह , न महरािजन
है ” डॉ टर साहब बोले
अरे सुधा, सुधा के नाम पर च दर च क गया हाँ, अभी वह सुधा के ही बारे म सोच रहा था, जब
बुआजी बात कर रही थ या सोच रहा था देखो...उसने याद करने क कोिशश क पर कु छ
याद ही नह आ रहा था, पता नह या सोच रहा था पता नह था...कु छ सुधा के याह क
बात हो रही थी शायद या बात हो रही थी...?
“कहाँ गयी है सुधा?” च दर ने पछू ा
“आज शायद सािबर साहब के यहाँ गयी है उनक लड़क उनके साथ पढ़ती है न, वह गयी है
िबनती के साथ ”
“अब इ तहान को िकतने िदन रह गये ह, अभी घमू ना ब द नह हआ उनका?”
“नह , िदन-भर पढ़ने के बाद उठी थी, उसके भी िसर म दद था, चली गयी घमू -िफर लेने दो
बेचारी को, अब तो जा ही रही है ” डॉ. शु ला बोले, एक हँसी के साथ िजसम आँसू छलके पड़ते
थे
“कहाँ तय हो रही है सुधा क शादी?”
“बरे ली म अब उसक बुआ ने बताया है ज मप ी दी है िमलवा लो, िफर तमु जरा सब बात
देख लेना तमु तो थीिसस म य त रहोगे; म जाकर लड़का देख आऊँ गा िफर मई के बाद
जुलाई तक सुधा का याह कर दगे तु ह डॉ टरे ट िमल जाए और यिू नविसटी म जगह िमल
जाए बस हम तो लड़का-लड़क दोन से फा रग ” डॉ. शु ला बहत अजब-से वर म बोले
च दर चुप रहा
“िबनती को देखा तमु ने?” थोड़ी देर बाद डॉ टर ने पछू ा
“हाँ, वही न िजनको डाँट रही थ ये उस िदन?”
“हाँ, वही उसके ससुर आये हए ह; उनसे कहना है िक अब शादी अगहन-पसू के िलए टाल
द पहले सुधा क हो जाए, वह बड़ी है और हम चाहते ह िक िबनती को तब तक िवदुषी का
दसू रा खंड भी िदला द आओ, उनसे बात कर ल अभी ” डॉ. शु ला उठे च दर भी उठा
और उसने अ दर जाकर िबनती के ससुर के िद य दशन ा िकये वे एक पलँग पर बठै े थे,
लेिकन वह अभागा पलँग उनके उदर के ही िलए नाकाफ था वे िचत पड़े थे और साँस लेते थे
तो पुराण क उस कथा का दशन हो जाता था िक धीरे -धीरे पृ वी का गोला वाराह के महँु पर
कै से ऊपर उठा होगा िसर पर छोटे-छोटे बाल और कमर म एक अँगोछे के अलावा सारा शरीर
िदग बर सुबह शायद गगं ा नहाकर आये थे य िक पेट तक म च दन, रोली लगी हई थी
डॉ. शु ला जाकर बगल म कु स पर बठै गये; “किहए दुबेजी, कु छ जलपान िकया आपने?”
पलँग चरमराया उस िवशाल मांस-िपंड म एक भडू ोल आया और दुबेजी जलपान क याद करके
ग द होकर हँसने लगे एक थलथलाहट हई और कमरे क दीवार िगरते-िगरते बच दुबेजी
ने उठकर बठै ने क कोिशश क लेिकन असफल होकर लेटे-ही-लेटे कहा, “हो-हो! सब आपक
कृ पा है खबू छकके िम ा न पाया अब जरा सरबत-उरबत कु छ िमलै तो जो कु छ पेट म
जलन ह,ै सो शा त होय!” उ ह ने पेट पर अपना हाथ फे रते हए कहा
“अ छा, अरे भाई जरा शरबत बना देना ” डॉ. शु ला ने दरवाजे क ओट म खड़ी हई बुआजी से
कहा बुआजी क आवाज सुनाई पड़ी, “बाप रे ! ई ढाई मन क लहास कम-से-कम मसक-भर
के शरबत तो उलीचै लईै हं ” च दर को हँसी आ गयी, डॉ. शु ला मसु कराने लगे लेिकन दुबेजी
के िद य मखु मडं ल पर कह ोभ या उ लास क रे खा तक न आयी च दर मन-ही-मन
सोचने लगा, ाचीन काल के ान द िस महा मा ऐसे ही होते ह गे
बुआ एक िगलास म शरबत ले आय दुबेजी काँख-काँखकर उठे और एक साँस म शरबत गले
से नीचे उतारकर, िगलास नीचे रख िदया
“दुबेजी, एक ाथना है आपसे!” डॉ. शु ला ने हाथ जोडक़र बड़े िवनीत वर म कहा
“नह ! नह !” बात काटकर दुबेजी बोले, “बस अब हम कु छ न खाव आप बहत स कार
िकये हम एही से छक गये आपको देखके तो हम बड़ी स नता भई आप सचमचु िद य
पु ष हौ! और िफर आप तो लड़क के मामा हो, और िबयाह-शादी म जो है सो मामा का प
देखा जाता है ई तो भगवान् ऐसा जोड़ िमलाइन ह िक वरप अउर क याप दुइन के मामा
बड़े ानी ह आप ह तौन कािलज म पुरफे सर और ओहर हमार सार-लड़काके र मामा जौन ह
तौन डाकघर म मशुं ी ह, आपक िकरपा से ” दुबेजी ने गव से कहा च दर मसु कराने लगा
“अरे सो तो आपक न ता है लेिकन म सोच रहा हँ िक गरिमय म अगर याह न रखकर जाड़े
म रखा जाए तो यादा अ छा होगा तब तक आपके स कार क हम कु छ तयै ारी भी कर
लगे ” डॉ. शु ला बोले
दुबेजी इसके िलए तयै ार नह थे वे बड़े अचरज म भरकर उनक ओर देखने लगे लेिकन
बहत कहने-सुनने के बाद अ त म वे इस शत पर राजी हए िक अगहन तक हर तीज- यौहार पर
लड़के के िलए कु रता-धोती का कपड़ा और यारह-बारह पये नजराना जाएगा और अगहन म
अगर याह हो रहा है तो सास-ननद और िजठानी के िलए गरम साड़ी जाएगी और जब-जब
दुबेजी गगं ा नहाने यागराज आएँगे तो उनका रोचना एक थाल, कपड़े और एक वणमि डत जौ
से होगा जब डॉ. शु ला ने यह वीकार कर िलया तो दुबेजी ने उठकर अपना झालम-झोला
कु रता गले म अटकाया और अपनी गठरी हाथ म उठाकर बोले-
“अ छा तो अब आ ा देव, हम चली अब, और ई िपया लड़क को दै िदयो, अब बात प क है ”
और अपनी टट से उ ह ने एक मड़ु ा-मड़ु ाया तेल लगा हआ पाँच पये का नोट िनकाला और डॉ.
साहब को दे िदया
“च दर एक ताँगा कर दो, दुबेजी को अ छा, आओ हम भी चल ”
जब ये लोग लौटे तो बुआजी एक थलै ी से कु छ धर-िनकाल रही थ डॉ. शु ला ने नोट बुआजी
को देते हए कहा, “लो, ये दे गये तु हारे समधी जी, लड़क को ”
पाँच का नोट देखा तो बुआजी सुलग उठ -”न गहना न गु रया, िबयाह प का कर गये ई कागज
के टु कड़े से अपना-आप तो सोना और िपया और कपड़ा सब लीलै को तयै ार और देत के दाँई
पेट िपराता है जतू ा-िपटऊ का अरे राम चाही तो जमदतू ई लहास क बोटी-बोटी करके रामजी
के कु न को िखलइह ”
च दर हँसी के मारे पागल हो गया
बुआजी ने थलै ी का महँु बाँधा और बोल , “अबिहन तक िबनती का पता न,ै और ऊ तरु कन-
मले छन के िहयाँ कु छ खा-पी िलिहस तो िफर हमरे िहयाँ गजु ारा नािह ना ओका बड़ी आजाद
हई गयी है सुधा क सह पाय के आवै देव, आज हम भ ा उता रत ही ”
डॉ. शु ला अपने कमरे म चले गये च दर को यास लगी थी उसने बुआजी से एक िगलास
पानी माँगा बुआ ने एक िगलास म पानी िदया और बोल , “बठै के िपयो बेटा; बठै के कु छ
खाय का देई?”
“नह , बुआजी!” बुआ बठै कर हँिसया से कटहल छीलने लग और च दर पानी पीता हआ सोचने
लगा, बुआजी सभी से इतनी मीठी बात करती ह तो आिखर िबनती से ही इतनी कटु य ह?
इतने म अ दर च पल क आहट सुनाई पड़ी च दर ने देखा, सुधा और िबनती आ गयी थ
सुधा अपनी च पल उतारकर अपने कमरे म चली गयी और िबनती आँगन म आयी बुआजी के
पास आकर बोली, “लाओ, हम तरकारी काट द ”
“चल हट ओहर पिहले नहाव जाय के कु छ खाय तो नै रहयो ए ी देर कहाँ घमू ित रहयो ?
हम खबू अ छी तरह जािनत ही तँू हमार नाक कटाइन के रहबो पतु रयन के ढँग सीखे ह!”
िबनती चुप एक तीखी वेदना का भाव उसके महँु पर आया उसने आँख झकु ा ल रोयी
नह और चुपचाप िसर झकु ाये हए सुधा के कमरे म चली गयी
च दर ण-भर खड़ा रहा िफर सुधा के पास गया सुधा के कमरे म अके ले िबनती खाट पर
पड़ी थी-औधं े महँु , तिकया म महँु िछपाये च दर को जाने कै सा लगा उसके मन म बेहद
तरस आ रहा था इस बेचारी लड़क के िलए, िजसके िपता ह ही नह और िजसे ताडऩा के िसवा
कु छ नह िमला च दर को बहत ही ममता लग रही थी इस अभािगनी के िलए वह सोचने
लगा, िकतना अ तर है दोन बहन म एक बचपन से ही िकतने असीम दुलार, वभै व और
नेह म पली है और दसू री ताड़ना और िकतने अपमान म पली और वह भी अपनी ही सगी माँ
से जो दुिनया भर के ित नेहमयी ह,ै अपनी लड़क को छोडक़र
वह कु स पर बठै कर चुपचाप यही सोचने लगा-अब आगे भी इस बेचारी को या सुख िमलेगा
ससुराल कै सी ह,ै यह तो ससुर को देखकर ही मालमू देता है
इतने म सुधा कपड़े बदलकर हाथ म िकताब िलये, उसे पढ़ती हई, उसी म डू बी हई आयी और
खाट पर बठै गयी “अरे ! िबनती! कै से पड़ी हो? अ छा तमु हो च दर! िबनती! उठो!” उसने
िबनती क पीठ पर हाथ रखकर कहा
िबनती, जो अभी तक िनचे पड़ी थी, सुधा के ममता-भरे पश पर फू ट-फू टकर रो पड़ी तो
सुधा ने च दर से कहा, “ या हआ िबनती रानी को ” और िबनती भी जोर से िससिकयाँ भरने
लगी तो सुधा ने च दर से कहा, “कु छ तमु ने कहा होगा चौदह िदन बाद आये और आते ही
लगे लाने उसे कु छ कहा होगा तमु ने! समझ गये घमू ने के िलए उसे भी डाँटा होगा हम
साफ-साफ बताये देते ह च दर, हम तु हारी डाँट सह लेते ह इसके ये मतलब नह िक अब तमु
इस बेचारी पर भी रोब झाडऩे लगो इससे कभी कु छ कहा तो अ छी बात नह होगी!”
“तु हारे िदमाग का कोई पुरजा ढीला हो गया है या? म य कहँगा िबनती को कु छ!”
“बस िफर यही बात तु हारी बुरी लगती है ” सुधा िबगड़कर बोली, “ य नह कहोगे िबनती
को कु छ? जब हम कहते हो तो उसे य नह कहोगे? हम तु हारे अपने ह तो या वो तु हारी
अपनी नह ह?ै ”
च दर हँस पड़ा-”सो य नह ह,ै लेिकन तु हारे साथ न ऐसे िनबाह, न वसै े िनबाह ”
“ये सब कु छ हम नह जानते! य रो रही है यह?” सुधा बोली धमक के वर म
“बुआजी ने कु छ कहा था ” च दर बोला
“अरे तो उसके िलए या रोना! इतना समझाया तझु े िक उनक तो आदत है हँसकर टाल िदया
कर चल उठ! हँसती है िक गदु गदु ाऊँ ” सुधा ने गदु गदु ाते हए कहा िबनती ने उसका हाथ
पकडक़र झटक िदया और िफर िससिकयाँ भरने लगी
“नह मानेगी त?ू ” सुधा बोली, “अभी ठीक करती हँ तझु े म च दर, पकड़ो तो इसका हाथ ”
च दर चुप रहा
“नह उठे उठो, तमु इसका हाथ पकड़ लो तो हम अभी इसे हँसाते ह ” सुधा ने च दर का
हाथ पकडक़र िबनती क ओर बढ़ते हए कहा च दर ने अपना हाथ ख च िलया और बोला,
“वह तो रो रही है और तमु बजाय समझाने के उसे परे शान कर रही हो ”
“अरे जानते हो, य रो रही ह?ै अभी इसके ससुर आये थे, वो बहत मोटे थे तो ये सोच रही है
कह 'वो' भी मोटे ह !” सुधा ने िफर उसक गरदन गदु गदु ाकर कहा
िबनती हँस पड़ी सुधा उछल पड़ी-”लो, ये तो हँस पड़ी, अब रोओगी?” अब िफर सुधा ने
गदु गदु ाना शु िकया िबनती पहले तो हँसी से लोट गयी िफर प ला सँभालते हए बोली, “िछः,
दीदी! वो बठै े ह िक नह !” और उठकर बाहर जाने लगी
“कहाँ चली?” सुधा ने पछू ा
“जा रही हँ नहाने ” िबनती प लू से िसर ढँकते हए चल दी
“ य , मने तेरा बदन छू िदया इसिलए?” सुधा हँसकर बोली, “ऐ च दर, वो गेसू का छोटा भाई है
न-हसरत, मने उसे छू िलया तो फौरन उसने जाकर अपना महँु साबुन से धोया और अ मीजान से
बोला, “मेरा महँु जठू ा हो गया ” और आज हमने गेसू के अ तर िमयाँ को देखा बड़े मजे के
ह म तो गेसू से बात करती रही लेिकन िबनती और फू ल ने बहत छेड़ा उ ह बेचारे घबरा
गये फू ल बहत चुलबुली है और बड़ी नाजुक है बड़ी बोलने वाली है और िबनती और फू ल का
खबू जोड़ िमला दोन खबू गाती ह ”
“िबनती गाती भी ह?ै ” च दर ने पछू ा, “हमने तो रोते ही देखा ”
“अरे बहत अ छा गाती है इसने एक गाँव का गाना बहत अ छा गाया था ...अरे देखो वह सब
बताने म हम तमु पर गु सा होना तो भलू ही गये कहाँ रहे चार रोज? बोलो, बताओ ज दी
से ”
“ य त थे सुधा, अब थीिसस तीन िह सा िलख गयी इधर हम लगातार पाँच घंटे से बठै कर
िलखते थे!” च दर बोला
“पाँच घंटे!” सुधा बोली, “दधू आजकल पीते हो िक नह ?”
“हाँ-हाँ, तीन गाय खरीद ली ह... ” च दर बोला
“नह , मजाक नह , कु छ खाते-पीते रहना, कह तबीयत खराब हई तो अब हमारा इ तहान ह,ै
पड़े-पड़े म खी मारोगे और अब हम देखने भी नह आ सकगे ”
“अब िकतना कोस बाक है तु हारा?”
“कोस तो ख म था हमारा कु छ किठनाइयाँ थ सो िपछले दो-तीन ह ते म मा टर साहब ने
बता दी थ अब दोहराना है लेिकन िबनती का इ तहान मई म ह,ै उसे भी तो पढ़ाना है ”
“अ छा, अब चल हम ”
“अरे बठै ो! िफर जाने कै िदन बाद आओगे आज बुआ तो चली जाएँगी िफर कल से यह पढ़ो
न तमु ने िबनती के ससुर को देखा था?”
“हाँ, देखा था!” च दर उनक परे खा याद करके हँस पड़ा-”बाप रे ! परू े टक थे वे तो ”
“िबनती क ननद से तु हारा याह करवा द करोगे?” सुधा बोली, “लड़क इतनी ही मोटी
है उसे कभी डाँट लेना तो देखगे तु हारी िह मत ”
याह! एकदम से च दर को याद आ गया अभी बुआ ने बात क थी सुधा के याह क तब
उसे कै सा लगा था? कै सा लगा था? उसका िदमाग घमू गया था लगा जसै े एक असहनीय दद
था या या था-जो उसक नस-नस को तोड़ गया एकदम...
“ या हआ, च दर? अरे चुप य हो गये? डर गये मोटी लड़क के नाम से?” सुधा ने च दर का
क धा पकड़कर झकझोरते हए कहा
च दर एक फ क हँसी हँसकर रह गया और चुपचाप सुधा क ओर देखने लगा सुधा च दर क
िनगाह से सहम गयी च दर क िनगाह म जाने या था, एक अजब-सा पथराया सनू ापन,
एक जाने िकस दद क अमगं ल छाया, एक जाने िकस पीड़ा क मकू आवाज, एक जाने कै सी
िपघलती हई-सी उदासी और वह भी गहरी, जाने िकतनी गहरी...और च दर था िक एकटक
देखता जा रहा था, एकटक अपलक...
सुधा को जाने कै सा लगा ये अपना च दर तो नह , ये अपने च दर क िनगाह तो नह है
च दर तो ऐसी िनगाह से, इस तरह अपलक तो सुधा को कभी नह देखता था नह , यह
च दर क िनगाह तो नह इस िनगाह म न शरारत ह,ै न डाँट न दुलार और न क णा इसम
कु छ ऐसा है िजससे सुधा िब कु ल प रिचत नह , जो आज च दर म पहली बार िदखाई पड़ रहा
है सुधा को जसै ा डर लगने लगा, जसै े वह काँप उठी नह , यह कोई दसू रा च दर है जो उसे
इस तरह देख रहा है यह कोई अप रिचत ह,ै कोई अजनबी, िकसी दसू रे देश का कोई यि जो
सुधा को...
“च दर, च दर! तु ह या हो गया!” सुधा क आवाज मारे डर के काँप रही थी, उसका महँु पीला
पड़ गया, उसक साँस बठै ने लगी थी-”च दर...” और जब उसका कु छ बस न चला तो उसक
आँख म आँसू छलक आये
हाथ पर एक गरम-गरम बँदू आकर पड़ते ही च दर च क गया “अरे सुधी! रोओ मत नह
पगली हमारी तबीयत कु छ ठीक नह ह,ै एक िगलास पानी तो ले आओ ”
सुधा अब भी काँप रही थी च दर क आवाज म अभी भी वह मलु ायिमयत नह आ पायी थी
वह पानी लाने के िलए उठी
“नह , तमु कह जाओ मत, तमु बठै ो यह ” उसने उसक हथेली अपने माथे पर रखकर जोर से
अपने हाथ म दबा ली और कहा, “सुधा!...”
“ य , च दर!”
“कु छ नह !” च दर ने आवाज दी लेिकन लगता था वह आवाज च दर क नह थी न जाने
कहाँ से आ रही थी...
“ या िसर म दद ह?ै िबनती, एक िगलास पानी लाओ ज दी से ”
सुधा ने आवाज दी च दर जसै े पहले-सा हो गया-”अरे ! अभी मझु े या हो गया था? तमु या
बात कर रही थ सुधा?”
“पता नह तु ह अभी या हो गया था?” सुधा ने घबरायी हई गौरे या क तरह सहमकर कहा
च दर व थ हो गया-”कु छ नह सुधा! म ठीक हँ म तो यँू ही तु ह परे शान करने के िलए चुप
था ” उसने हँसकर कहा
“हाँ, चलो रहने दो तु हारे िसर म दद है ज र से ” सुधा बोली िबनती पानी लेकर आ गयी
थी
“लो, पानी िपयो!”
“नह , हम कु छ नह चािहए ” च दर बोला
“िबनती, जरा पेनबाम ले जाओ ” सुधा ने िगलास जबद ती उसके महँु से लगाते हए कहा
िबनती पेनबाम ले आयी थी-”िबनती, तू जरा लगा दे इनके अरे खड़ी य ह?ै कु स के पीछे
खड़ी होकर माथे पर जरा ह क उँगली से लगा दे ”
िबनती आ ाकारी लड़क क तरह आगे बढ़ी, लेिकन िफर िहचक गयी िकसी अजनबी लड़के
के माथे पर कै से पेनबाम लगा दे “चलती है या अभी काट के गाड़ दगे यह मोटक कह
क ! खा-खाकर मटु ानी है जरा-सा काम नह होता ”
िबनती ने हारकर पेनबाम लगाया च दर ने उसका हाथ हटा िदया तो सुधा ने िबनती के हाथ
से पेनबाम लेकर कहा, “आओ, हम लगा द ” िबनती पेनबाम देकर चली गयी तो च दर बोला,
“अब बताओ, या बात कर रही थ ? हाँ, िबनती के याह क ये उनके ससुर तो बहत ही भ े
मालमू पड़ रहे थे या देखकर याह कर रही हो तमु लोग?”
“पता नह या देखकर याह कर रही ह बुआ असल म बुआ पता नह य िबनती से इतनी
िचढ़ती ह, वह तो चाहती ह िकसी तरह से बोझ टले िसर से लेिकन च दर, यह िबनती बड़ी
खुश है यह तो चाहती है िकसी तरह ज दी से याह हो!” सुधा मसु कराती हई बोली
“अ छा, यह खुद याह करना चाहती ह!ै ” च दर ने ता जुब से पछू ा
“और या? अपने ससुर क खबू सेवा कर रही थी सुबह बि क पापा तो कह रहे थे िक अभी
यह बी.ए. कर ले तब याह करो हमसे पापा ने कहा इससे पछू ने को हमने पछू ा तो कहने
लगी बी.ए. करके भी वही करना होगा तो बेकार टालने से या फायदा िफर पापा हमसे बोले
िक कु छ वजह से अगहन म याह होगा, तो बड़े ता जुब से बोली, “अगहन म?”
“सुधी, तमु जानती हो अगहन म उसका याह य टल रहा ह?ै पहले तु हारा याह होगा ”
च दर हँसकर बोला वह पणू तया शा त था और उसके वर म कम-से-कम बाहर िसवा चुहल
के और कु छ भी न था
“मेरा याह, मेरा याह!” आँख फाडक़र, महँु फै लाकर, हाथ नचाकर, कु तहू ल-भरे आ य से
सुधा ने कहा और िफर हँस पड़ी, खबू हँसी-”कौन करे गा मेरा याह? बुआ? पापा करने ही नह
दगे हमारे िबना पापा का काम ही नह चलेगा और बाबसू ाहब, तमु िकस पर आकर रं ग
जमाओगे? याह मेरा हँ!” सुधा ने महँु िबचकाकर उपे ा से कहा
“नह सुधा, म ग भीरता से कह रहा हँ तीन-चार महीने के अ दर तु हारा याह हो
जाएगा ” च दर उसे िव ास िदलाते हए बोला
“अरे जाओ!” सुधा ने हँसते हए कहा, “ऐसे हम तु हारे बनाने म आ जाएँ तो हो चुका ”
“अ छा जाने दो तु हारे पास कोई पो टकाड ह?ै लाओ जरा इस कॉमरे ड को एक िच ी तो
िलख द ” च दर बात बदलकर बोला पता नह य इस िवषय क बात के चलने म उसे
कै सा लगता था
“कौन कामरे ड?” सुधा ने पछू ा, “तमु भी क युिन ट हो गये या?”
“नह , जी, वो बरे ली का सोशिल ट लड़का कै लाश िजसने झगड़े म हम लोग क जान बचायी
थी हमने तु ह बताया नह था सब िक सा उस झगड़े का, जब हम और पापा बाहर गये थे!”
“हाँ-हाँ, बताया था उसे ज र खत िलख दो!” सुधा ने पो टकाड देते हए कहा, “तु ह पता
मालमू ह?ै ”
च दर जब पो टकाड िलख रहा था तो सुधा ने कहा, “सुनो, उसे िलख देना िक पापा क सुधा,
पापा क जान बचाने के एवज म आपक बहत कृ त है और कभी अगर हो सके तो आप
इलाहाबाद ज र आएँ!...िलख िदया?”
“हाँ!” च दर ने पो टकाड जेब म रखते हए कहा
“च दर, हम भी सोशिल ट पाट के मे बर ह गे!” सुधा ने मचलते हए कहा
“चलो, अब तु ह नयी सनक सवार हई तमु या समझ रही हो सोशिल ट पाट को
राजनीितक पाट है वह यह मत करना िक सोशिल ट पाट म जाओ और लौटकर आओ तो
पापा से कहो-अरे हम तो समझे पाट ह,ै वहाँ चाय-पानी िमलेगा वहाँ तो सब लोग ले चर देते
ह”
“धत,् हम कोई बेवकू फ ह या?” सुधा ने िबगडक़र कहा
“नह , सो तो तमु बुि सागर हो, लेिकन लड़िकय क राजनीितक बुि कु छ ऐसी ही होती ह!ै ”
च दर बोला
“अ छा रहने दो लड़िकयाँ न ह तो काम ही न चले ” सुधा ने कहा
“अ छा, सुधा! आज कु छ पये दोगी हमारे पास पसै े खतम ह और िसनेमा देखना है
जरा ” च दर ने बहत दुलार से कहा
“हाँ-हाँ, ज र दगे तु ह मतलबी कह के !” सुधा बोली, “अभी-अभी तमु लड़िकय क बुराई
कर रहे थे न?”
“तो तमु और लड़िकय म से थोड़े ही हो तमु तो हमारी सुधा हो सुधा महान ”
सुधा िपघल गयी-”अ छा, िकतना लोगे?” अपनी पॉके ट म से पाँच पये का नोट िनकालकर
बोली, “इससे काम चल जाएगा?”
“हाँ-हाँ, आज जरा सोच रहे ह प मी के यहाँ जाएँ, तब सेकड शो जाएँ ”
“प मी रानी के यहाँ जाओगे समझ गये, तभी तमु ने चाचाजी से याह करने से इनकार कर
िदया लेिकन प मी तमु से तीन साल बड़ी है लोग या कहगे?” सुधा ने छेड़ा
“ऊँ ह, तो या हआ जी! सब य ही चलता ह!ै ” च दर हँसकर टाल गया
“तो िफर खाना यह खाये जाओ और कार लेते जाओ ” सुधा ने कहा
“मगँ ाओ!” च दर ने पलँग पर परै फै लाते हए कहा खाना आ गया और जब तक च दर
खाता रहा, सुधा सामने बठै ी रही और िबनती दौड़-दौडक़र पड़ू ी लाती रही
10
जब च दर प मी के बँगले पर पहँचा तो शाम होने म देर नह थी लेिकन अभी फ ट शो शु
होने म देरी थी प मी गलु ाब के बीच म टहल रही थी और बट एक अ छा-सा सटू पहने लॉन
पर बठै ा था और घुटन पर ठु ड् डी रखे कु छ सोच-िवचार म पड़ा था बट के चेहरे पर का
पीलापन भी कु छ कम था वह देखने से इतना भयंकर नह मालमू पड़ता था लेिकन उसक
आँख का पागलपन अभी वसै ा ही था और खबू सरू त सटू पहनने पर भी उसका हाल यह था िक
एक कालर अ दर था और एक बाहर
प मी ने च दर को आते देखा तो िखल गयी “ह लो, कपरू ! या हाल है पता नह य
आज सुबह से मेरा मन कह रहा था िक आज मेरे िम ज र आएँगे और शाम के व तमु तो
इतने अ छे लगते हो जसै े वह जगमग िसतारा िजसे देखकर क ट् स ने अपनी आिखरी सानेट
िलखी थी ” प मी ने एक गलु ाब तोड़ा और च दर के कोट के बटन होल म लगा िदया च दर
ने बड़े भय से बट क ओर देखा िक कह गलु ाब को तोड़े जाने पर वह िफर च दर क गरदन पर
सवार न हो जाए लेिकन बट कु छ बोला नह बट ने िसफ हाथ उठाकर अिभवादन िकया
और िफर बठै कर सोचने लगा
प मी ने कहा, “आओ, अ दर चल ” और च दर और प मी दोन ाइगं म म बठै गये
च दर ने कहा, “म तो डर रहा था िक तमु ने गलु ाब तोडक़र मझु े िदया तो कह बट नाराज न हो
जाए, लेिकन वह कु छ बोला नह ”
प मी मसु करायी, “हाँ, अब वह कु छ कहता नह और पता नह य गलु ाब से उसक तबीयत
भी इधर हट गयी अब वह उतनी परवाह भी नह करता ”
“ य ?” च दर ने ता जुब से पछू ा
“पता नह य मेरी तो समझ म यह आता है िक उसका िजतना िव ास अपनी प नी पर था
वह इधर धीरे -धीरे हट गया और इधर वह यह िव ास करने लगा है िक सचमचु वह साजट को
यार करती थी इसिलए उसने फू ल को यार करना छोड़ िदया ”
“अ छा! लेिकन यह हआ कै से? उसने तो अपने मन म इतना गहरा िव ास जमा रखा था िक म
समझता था िक मरते दम तक उसका पागलपन न छू टेगा ” च दर ने कहा
“नह , बात यह हई िक तु हारे जाने के दो-तीन िदन बाद मने एक िदन सोचा िक मान िलया
जाए अगर मेरे और बट के िवचार म मतभेद है तो इसका मतलब यह नह िक म उसके गलु ाब
चुराकर उसे मानिसक पीड़ा पहँचाऊँ और उसका पागलपन और बढ़ाऊँ बुि और तक के
अलावा भावना और सहानुभिू त का भी एक मह व मझु े लगा और मने फू ल चुराना छोड़ िदया
दो-तीन िदन वह बेहद खुश रहा, बेहद खुश और मझु े भी बड़ा स तोष हआ िक लो अब बट
शायद ठीक हो जाए लेिकन तीसरे िदन सहसा उसने अपना खुरपा फक िदया, कई गलु ाब के
पौधे उखाड़कर फक िदये और मझु से बोला, “अब तो कोई फू ल भी नह चुराता, अब भी वह इन
फू ल म नह िमलती वह ज र साजट के साथ जाती है वह मझु े यार नह करती, हरिगज
नह करती, और वह रोने लगा ” बस उसी िदन से वह गलु ाब के पास नह जाता और
आजकल बहत अ छे-अ छे सटू पहनकर घमू ता है और कहता ह-ै या म साजट से कम सु दर हँ!
और इधर वह िब कु ल पागल हो गया है पता नह िकससे अपने-आप लड़ता रहता है ”
च दर ने ता जुब से िसर िहलाया
“हाँ, मझु े बड़ा दु:ख हआ!” प मी बोली, “मने तो, हमदद क िक फू ल चुराने ब द कर िदये और
उसका नतीजा यह हआ पता नह य कपरू , मझु े लगता है िक हमदद करना इस दुिनया म
सबसे बड़ा पाप है आदमी से हमदद कभी नह करनी चािहए ”
च दर ने सहसा अपनी घड़ी देखी
“ य , अभी तमु नह जा सकते बठै ो और बात सुनो, इसिलए मने तु ह दो त बनाया है आज
दो-तीन साल हो गये, मने िकसी से बात ही नह क ह और तमु से इसिलए मनै े िम ता क है िक
बात क ँ गी ”
च दर हँसा, “आपने मेरा अ छा उपयोग ढूँढ़ िनकाला ”
“नह , उपयोग नह , कपरू ! तमु मझु े गलत न समझना िजंदगी ने मझु े इतनी बात बतायी ह
और यह िकताब जो म इधर पढ़ने लगी हँ, इ ह ने मझु े इतनी बात बतायी ह िक म चाहती हँ िक
उन पर बातचीत करके अपने मन का बोझ ह का कर लँू और तु ह बठै कर सुननी ह गी सभी
बात!”
“हाँ, म तयै ार हँ लेिकन िकताब पढ़नी कब से शु कर द तमु ने?” च दर ने ता जुब से पछू ा
“अभी उस िदन म डॉ. शु ला के यहाँ गयी उनक लड़क से मालमू हआ िक तु ह किवता
पस द है मने सोचा, उसी पर बात क ँ और मने किवताएँ पढ़नी शु कर द ”
“अ छा, तो देखता हँ िक दो-तीन ह ते म भाई और बहन दोन म कु छ प रवतन आ गये ”
प मी कु छ बोली नह , हँस दी
“म सोचता हँ प मी िक आज िसनेमा देखने जाऊँ कार है साथ म, अभी प ह िमनट बाक
है चाहो तो चलो ”
“िसनेमा! आज चार साल से म कह नह गयी हँ िसनेमा, हौजी, बाल डांस-सभी जगह जाना
ब द कर िदया है मने मेरा दम घुटेगा हॉल के अ दर लेिकन चलो देख, अभी भी िकतने ही
लोग वसै े ही खुशी से िसनेमा देखते ह गे ” एक गहरी साँस लेकर प मी बोली, “बट को ले
चलोगे?”
“हाँ, हाँ! तो चलो उठो, िफर देर हो जाएगी!” च दर ने घड़ी देखते हए कहा
प मी फौरन अ दर के कमरे म गयी और एक जाजट का ह का भरू ा गाउन पहनकर आयी इस
रं ग से वह जसै े िनखर आयी च दर ने उसक ओर देखा, तो वह लजा गयी और बोली, “इस
तरह से मत देखो म जानती हँ यह मेरा सबसे अ छा गाउन है इसम कु छ अ छी लगती
होऊँ गी चलो!” और आकर उसने बेतक लुफ से उसके क धे पर हाथ रख िदया
दोन बाहर आये तो बट लॉन पर घमू रहा था उसके परै लडख़ड़ा रहे थे लेिकन वह बड़ी
शान से सीना ताने था “बट , आज िम टर कपरू मझु े िसनेमा िदखलाने जा रहे ह तमु भी
चलोगे?”
“हँ!” बट ने िसर िहलाकर जोर से कहा, “िसनेमा जाऊँ गा? कभी नह भलू कर भी नह
तमु ने मझु े या समझा ह?ै म िसनेमा जाऊँ गा?” धीरे -धीरे उसका वर म द पड़ गया...”अगर
िसनेमा म वह साजट के साथ िमल गयी तो! तो म उसका गला घ ट दँगू ा ” अपने गले को
दबाते हए बट बोला और इतनी जोर से दबा िदया अपना गला िक आँख लाल हो गय और
खाँसने लगा खाँसी ब द हई तो बोला, “वह मझु े यार नह करती वह साजट को यार
करती है वह उसी के साथ घमू ती है अगर वह िमल जाएगी िसनेमा म तो उसक ह या कर
डालँगू ा, तो पुिलस आएगी और खेल ख म हो जाएगा तमु जानते हो िम. कपरू , म उससे
िकतना नफरत करता हँ...और...और लेिकन नह , कौन जानता है म नफरत करता होऊँ और
वह मझु े...कु छ समझ म नह आता, म पागल हँ, ओफ ” और वह िसर थामकर बठै गया
प मी ने च दर का हाथ पकडक़र कहा, “चलो, यहाँ रहने से उसका िदमाग और खराब होगा
आओ!”
दोन जाकर कार म बठै े च दर खुद ही ाइव कर रहा था प मी बोली, “बहत िदन से मने
कार नह ाइव क है लाओ, आज ाइव क ँ ”
प मी ने टीय रं ग अपने हाथ म ले ली च दर इधर बठै गया
थोड़ी देर म कार रीजट के सामने जा पहँची िच था-'सेलामी, ेयर शी डां ड' ('सेलामी, जहाँ
वह नाची थी') च दर ने िटकट िलया और दोन ऊपर बठै गये अभी यजू रील चल रही
थी सहसा प मी ने कहा, “कपरू , सेलामी क कहानी मालमू ह?ै ”
“न! या यह कोई उप यास ह!ै ” च दर ने पछू ा
“नह , यह बाइिबल क एक कहानी है असल म एक राजा था हरै ाद उसने अपने भाई को
मारकर उसक प नी से अपनी शादी कर ली उसक भतीजी थी सेलामी, जो बहत सु दर थी
और बहत अ छा नाचती थी हरै ाद उस पर मु ध हो गया लेिकन सेलामी एक पगै बर पर
मु ध थी पगै बर ने सेलामी के णय को ठु करा िदया एक बार हरै ाद ने सेलामी से कहा िक
यिद तमु नाचो तो म तु ह कु छ दे सकता हँ सेलामी नाची और पुर कार म उसने अपना
अपमान करने वाले पगै बर का िसर माँगा! हरै ाद वचनब था उसने पगै बर का िसर तो दे
िदया लेिकन बाद म इस भय से िक कह रा य पर कोई आपि न आये, उसने सेलामी को भी
मरवा डाला ”
च दर को यह कहानी बहत अ छी लगी तब तो िच बहत ही अ छा होगा, उसने सोचा सुधा
क परी ा है वरना सुधा को भी िदखला देता लेिकन या निै तकता है इन पा ा य देश क
िक अपनी भतीजी पर ही हरै ाद मु ध हो गया उसने कहा प मी से-
“लेिकन हरै ाद अपनी भतीजी पर ही मु ध हो गया?”
“तो या हआ! यह तो से स है िम. कपरू से स िकतनी भयंकर शि शाली भावना ह,ै यह भी
शायद तमु नह समझते अभी तु हारी आँख म बड़ा भोलापन है तमु प क आग के संसार
से दरू मालमू पड़ते हो, लेिकन शायद दो-एक साल बाद तमु भी जानोगे िक यह िकतनी भयंकर
चीज है आदमी के सामने व -बेव , नाता- र ता, मयादा-अमयादा कु छ भी नह रह जाता
वह अपनी भतीजी पर मोिहत हआ तो या? मने तो तु हारे यहाँ एक पौरािणक कहानी पढ़ी थी
िक महादेव अपनी लड़क सर वती पर मु ध हो गये ”
“महादेव नह , ा ” च दर बोला
“हाँ, हाँ, ाï म भलू गयी थी तो यह तो से स है आदमी को कहाँ ले जाता ह,ै यह
अ दाज भी नह िकया जा सकता तमु तो अभी ब च क तरह भोले हो और ई र न करे तमु
कभी इस याले का शरबत चखो म भी तो तु हारी इसी पिव ता को यार करती हँ ” प मी
ने च दर क ओर देखकर कहा, “तमु जानते हो, मने तलाक य िदया? मेरा पित मझु े बहत
चाहता था लेिकन म िववािहत जीवन के वासना मक पहलू से घबरा उठी! मझु े लगने लगा, म
आदमी नह हँ बस मांस का लोथड़ा हँ िजसे मेरा पित जब चाहे मसल दे, जब चाहे...ऊब गयी थी!
एक गहरी नफरत थी मेरे मन म तमु आये तो तमु बड़े पिव लगे तमु ने आते ही णय-
याचना नह क तु हारी आँख म भखू नह थी हमदद थी, नेह था, कोमलता थी,
िन छलता थी मझु े तमु काफ अ छे लगे तमु ने मझु े अपनी पिव ता देकर िजला िदया... ”
च दर को एक अजब-सा गौरव अनुभव हआ और प मी के ित एक बहत ऊँ ची आदर-भावना
उसने पिव ता देकर िजला िदया सहसा च दर के मन म आया-लेिकन यह उसके यि व
क पिव ता िकसक दी हई है सुधा क ही न! उसी ने तो उसे िसखाया है िक पु ष और नारी
म िकतने ऊँ चे स ब ध रह सकते ह
“ या सोच रहे हो?” प मी ने अपना हाथ कपरू क गोद म रख िदया
कपरू िसहर गया लेिकन िश ाचारवश उसने अपना हाथ प मी के क धे पर रख िदया प मी
ने दो ण के बाद अपना हाथ हटा िलया और बोली, “कपरू , म सोच रही हँ अगर यह िववाह
सं था हट जाए तो िकतना अ छा हो पु ष और नारी म िम ता हो बौि क िम ता और िदल
क हमदद यह नह िक आदमी औरत को वासना क यास बुझाने का याला समझे और
औरत आदमी को अपना मािलक असल म बँधने के बाद ही, पता नह य स ब ध म िवकृ ित
आ जाती है म तो देखती हँ िक णय िववाह भी होते ह तो वह असफल हो जाते ह य िक
िववाह के पहले आदमी औरत को ऊँ ची िनगाह से देखता ह,ै हमदद और यार क चीज समझता
है और िववाह के बाद िसफ वासना क म तो ेम म भी िववाह-प म नह हँ और ेम म भी
वासना का िवरोध करती हँ ”
“लेिकन हर लड़क ऐसी थोड़े ही होती ह!ै ” च दर बोला, “तु ह वासना से नफरत हो लेिकन हर
एक को तो नह ”
“हर एक को होती है लड़िकयाँ बस वासना क झलक, एक ह क िसहरन, एक गदु गदु ी
पस द करती ह बस, उसी के पीछे उन पर चाहे जो दोष लगाया जाय लेिकन अिधकतर
लड़िकयाँ कम वासनाि य होती ह, लड़के यादा ”
िच शु हो गया वह चुप हो गयी लेिकन थोड़ी ही देर म मालमू हआ िक िच मा मक
था वह बाइिबल क सेलामी क कहानी नह थी वह एक अमे रकन नतक और कु छ
डाकु ओं क कहानी थी प मी ऊब गयी अब जब डाकू पकडक़र सेलामी को एक जंगल म ले
गये तो इटं रवल हो गया और प मी ने कहा, “अब चलो, आधे ही िच से तबीयत ऊब गयी ”
दोन उठ खड़े हए और नीचे आये
“कपरू , अबक बार तमु ाइव करो!” प मी बोली
“नह , तु ह ाइव करो” कपरू बोला
“कहाँ चल,” प मी ने टाट करते हए कहा
“जहाँ चाहो ” कपरू ने िवचार म डू बे हए कहा
प मी ने गाड़ी खबू तेज चला दी सड़क साफ थ प मी का कालर फहराने लगा और उड़कर
च दर के गाल पर थपिकयाँ लगाने लगा च दर दरू िखसक गया प मी ने च दर क ओर
देखा और बजाय कालर ठीक करने के , गले का एक बटन और खोल िदया और च दर को पास
ख च िलया च दर चुपचाप बठै गया प मी ने एक हाथ टीय रं ग पर रखा और एक हाथ से
च दर का हाथ पकड़े रही जसै े वह च दर को दरू नह जाने देगी च दर के बदन म एक ह क
िसहरन नाच रही थी य ? शायद इसिलए िक हवा ठंडी थी या शायद इसिलए िक...उसने
प मी का हाथ अपने हाथ से हटाने क कोिशश क प मी ने हाथ ख च िलया और कार के
अ दर क िबजली जला दी
कपरू चुपचाप ठाकु र साहब के बारे म सोचता रहा कार चलती रही जब च दर का यान टू टा
तो उसने देखा कार मकै फसन लेक के पास क है
दोन उतरे बीच म सड़क थी, इधर नीचे उतरकर झील और उधर गगं ा बह रही थी आठ बजा
होगा रात हो गयी थी, चार तरफ स नाटा था बस िसतार क ह क रोशनी थी
मकै फसन झील काफ सखू गयी थी िकनारे -िकनारे मछली मारने के मचान बने थे
“इधर आओ!” प मी बोली और दोन नीचे उतरकर मचान पर जा बठै े पानी का धरातल
शा त था िसफ कह -कह मछिलय के उछलने या साँस लेने से पानी िहल जाता था पास
ही के नीवाँ गाँव म िकसी के यहाँ शायद शादी थी जो शहनाई का ह का वर हवाओं क तरं ग
पर िहलता-डु लता हआ आ रहा था दोन चुपचाप थे थोड़ी देर बाद प मी ने कहा, “कपरू ,
चुपचाप रहो, कु छ बात मत करना उधर देखो पानी म िसतार का ितिब ब देख रहे हो
चु पे से सुनो, ये िसतारे या बात कर रहे ह ”
प मी िसतार क ओर देखने लगी कपरू चुपचाप प मी क ओर देखता रहा थोड़ी देर बाद
सहसा प मी एक बाँस से िटककर बठै गयी उसके गले के दो बटन खुले हए थे और उसम से
प क चाँदनी फटी पड़ती थी प मी आँख ब द िकये बठै ी थी च दर ने उसक ओर देखा
और िफर जाने य उससे देखा नह गया वह िसतार क ओर देखने लगा प मी के कालर
के बीच से िसतारे टू ट-टू टकर बरस रहे थे
सहसा प मी ने आँख खोल द और च दर का क धा पकडक़र बोली, “िकतना अ छा हो अगर
आदमी हमेशा स ब ध म एक दरू ी रखे से स न आने दे ये िसतारे ह, देखो िकतने नजदीक
ह करोड़ बरस से साथ ह, लेिकन कभी भी एक दसू रे को छू ते तक नह , तभी तो संग िनभ
जाता है ” सहसा उसक आवाज म जाने या छलक आया िक च दर जसै े मदहोश हो गया-
बोली वह-”बस ऐसा हो िक आदमी अपने ेमा पद को िनकटतम लाकर छोड़ दे, उसको बाँधे
न कु छ ऐसा हो िक होठ के पास ख चकर छोड़ दे ” और प मी ने च दर का माथा होठ तक
लाकर छोड़ िदया उसक गरम-गरम साँस च दर क पलक पर बरस गय ...”कु छ ऐसा हो िक
आदमी उसे अपने दय तक ख चकर िफर हटा दे ” और च दर को प मी ने अपनी बाँह म
घेरकर अपने व तक ख चकर छोड़ िदया व क गरमाई च दर के रोम-रोम म सुलग उठी,
वह बेचनै हो उठा उसके मन म आया िक वह अभी यहाँ से चला जाए जाने कै सा लग रहा था
उसे सहसा प मी बोली, “लेिकन नह , हम लोग िम ह और कपरू , तमु बहत पिव हो,
िन कलंक हो और तमु पिव रहोगे म िजतनी दरू ी, िजतना अ तर, िजतनी पिव ता पस द
करती हँ, वह तमु म है और हम लोग म हमेशा िनभेगी जसै े इन िसतार म हमेशा िनभती आयी
है ”
च दर चुपचाप सोचने लगा, “वह पिव है एकाएक उसका मन जसै े ऊबने लगा जसै े एक
िवहग िशशु घबराकर अपने नीड़ के िलए तड़प उठता ह,ै वसै े ही वह इस व तड़प उठा सुधा के
पास जाने के िलए- य ? पता नह य ? यहाँ कु छ है जो उसे जकड़ लेना चाहता है वह या
करे ?
प मी उठी, वह भी उठा बाँस का मचान िहला लहर म हरकत हई करोड़ साल से अलग
और पिव िसतारे िहले, आपसे म टकराये और चरू -चरू होकर िबखर गये
11
रात-भर च दर को ठीक से न द नह आयी अब गरमी काफ पड़ने लगी थी एक सतू ी चादर
से यादा नह ओढ़ा जाता था और च दर ने वह भी ओढ़ना छोड़ िदया था, लेिकन उस िदन रात
को अ सर एक अजब-सी कँ पकँ पी उसे झकझोर जाती थी और वह कसकर चादर लपेट लेता था,
िफर जब उसक तबीयत घुटने लगती तो वह उठ बठै ता था उसे रात-भर न द नह आयी; बार-
बार झपक आयी और लगा िक िखड़क के बाहर सुनसान अँधेरे म से अजब-सी आवाज आती ह
और नािगन बनकर उसक साँस म िलपट जाती ह वह परे शान हो उठता ह,ै इतने म िफर
कह से कोई मीठी सतरं गी संगीत क लहर आती है और उसे सचेत और सजग कर जाती है
एक बार उसने देखा िक सुधा और गेसू कह चली जा रही ह उसने गेसू को कभी नह देखा
था लेिकन उसने सपने म गेसू को पहचान िलया लेिकन गेसू तो प मी क तरह गाउन पहने
हए थी! िफर देखा िबनती रो रही है और इतना िबलख-िबलखकर रो रही है िक तबीयत घबरा
जाए घर म कोई नह है च दर समझ नह पाता िक वह या करे ! अके ले घर म एक
अप रिचत लड़क से बोलने का साहस भी नह होता उसका िकसी तरह िह मत करके वह
समीप पहँचा तो देखा अरे , यह तो सुधा है सुधा लुटी हई-सी मालमू पड़ती है वह बहत
िह मत करके सुधा के पास बठै गया उसने सोचा, सुधा को आ ासन दे लेिकन उसके हाथ
पर जाने कै से सुकु मार जंजीर कसी हई ह उसके महँु पर िकसी क साँस का भार है वह
िन े है उसका मन अकु ला उठा वह च ककर जाग गया तो देखा वह पसीने से तर है
वह उठकर टहलने लगा वह जाग गया था लेिकन िफर भी उसका मन व थ नह था कमरे
म ही टहलते-टहलते वह िफर लेट गया लगा जसै े सामने क खुली िखडक़ से सकै ड़ तारे
टू ट-टू टकर भयानक तेजी से आ रहे ह और उसके माथे से टकरा-टकराकर चरू -चरू हो जाते ह
एक ममा तक पीड़ा उसक नस म खौल उठी और लगा जसै े उसके अंग-अंग म िचताएँ धधक
रही ह
जसै े-तसै े रात कटी और सुबह उठते ही वह यिू नविसटी जाने से पहले सुधा के यहाँ गया सुधा
लेटी हई पढ़ रही थी डॉ. शु ला पजू ा कर रहे थे बुआजी शायद रात को चली गयी थ
य िक िबनती बठै ी तरकारी काट रही थी और खुश नजर आ रही थी च दर सुधा के कमरे म
गया देखते ही सुधा मसु करा पड़ी बोली कु छ नह लेिकन आते ही उसने च दर के अंग-अगं
को अपनी िनगाह के वागत म समेट िलया च दर सुधा के परै के पास बठै गया
“कल रात को तमु कार लेकर वापस आये तो चु पे से चले गये!” सुधा बोली, “कहो, कल कौन-
सा खेल देखा?”
“कल बहत बड़ा खेल देखा; बहत बड़ा खेल, सुधी!” च दर याकु लता से बोला, “अरे जाने कै सा
मन हो गया िक रात-भर न द ही नह आयी ” और उसके बाद च दर सब बता गया कै से वह
िसनेमा गया उसने प मी से या बात क उसके बाद कै से कार पर उसने च दर को पास
ख च िलया कै से वे लोग मकै फसन झील गये और वहाँ प मी पागल हो गयी िफर कै से
च दर को एकदम सुधा क याद आने लगी और िफर रात-भर च दर को कै से-कै से सपने आये
सुधा बहत ग भीर होकर महँु म पेि सल दबाये कु हनी टेके बस चुपचाप सुनती रही और अ त म
बोली, “तो तमु इतने परे शान य हो गये, च दर! उसने तो अ छी ही बात कही थी यह तो
अ छा ही है िक ये सब िजसे तमु से स कहते हो, यह स ब ध म न आए उसम या बुराई ह?ै
या तमु चाहते हो िक से स आए?”
“कभी नह , तमु मझु े अभी तक नह समझ पाय ”
“तो ठीक ह,ै तमु भी नह चाहते िक से स आए और वह भी नह चाहती िक से स आए तो
झगड़ा या ह?ै य , तमु उदास य हो इतने?” सुधा बोली बड़े अचरज से
“लेिकन उसका यवहार कै सा ह?ै ” च दर ने सुधा से कहा
“ठीक तो है उसने बता िदया तु ह िक इतना अ तर होना चािहए समझ गये तमु लालची
आदमी, चाहते होगे यह भी अ तर न रहे! इसीिलए तमु उदास हो गये, िछः!” ह ठ म मसु कराहट
और आँख म शरारत क झलक िछपाते हए सुधा बोली
“तमु तो मजाक करने लग ” च दर बोला
सुधा िसफ च दर क ओर देखकर मसु कराती रही च दर सामने लगी हई तसवीर क ओर
देखता रहा िफर उसने सुधा के कबतू र -जसै े उजले मासमू न हे परै अपने हाथ म ले िलये और
भरायी हई आवाज म बोला, “सुधा, तमु कभी हम पर िव ास न हार बठै ना ”
सुधा ने िकताब ब द करके रख दी और उठकर बठै गयी उसने च दर के दोन हाथ अपने
हाथ म लेकर कहा, “पागल कह के ! हम कहते हो, अभी सुधा म बचपन है और तमु म या ह!ै
वाह रे छु ईमईु के फू ल! िकसी ने हाथ पकड़ िलया, िकसी ने बदन छू िलया तो घबरा गये! तमु से
अ छी लड़िकयाँ होती ह ” सुधा ने उसके दोन हाथ झकझोरते हए कहा
“नह सुधी, तमु नह समझत मेरी िजंदगी म एक ही िव ास क च ान है वह हो तमु म
जानता हँ िक िकतने ही जल- लय ह लेिकन तु हारे सहारे म हमेशा ऊपर रहँगा तमु मझु े
डू बने नह दोगी तु हारे ही सहारे म लहर से खेल भी सकता हँ लेिकन तु हारा िव ास
अगर कभी िहला तो म िकन अँधेरी गहराइय म डू ब जाऊँ गा, यह कभी म सोच नह पाता ”
च दर ने बड़े कातर वर म कहा
सुधा बहत ग भीर हो गयी ण-भर वह च दर के चेहरे क ओर देखती रही, िफर च दर के
माथे पर झलू ती हई एक लट को ठीक करती हई बोली, “च दर, और म िकसके िव ास पर चल
रही हँ, बोलो! लेिकन मने तो कभी नह कहा िक च दर अपना िव ास मत हारना! और या
कहँ मझु े अपने च दर पर परू ा िव ास है मरते दम तक िव ास रहेगा िफर तु हारा मन
इतना डगमगा य गया? बुरी बात है न?”
च दर ने सुधा के क धे पर अपना िसर रख िदया सुधा ने उसका हाथ लेकर कहा, “लाओ,
यहाँ छु आ था प मी ने तु ह!” और उसका हाथ होठ तक ले गयी च दर काँप गया, आज सुधा
को यह या हो गया है लेिकन ह ठ तक हाथ ले जाकर झाड़ने-फँू कनेवाल क तरह सुधा ने
फँू ककर कहा, “जाओ, तु हारे हाथ से प मी के पश का जहर उतर गया अब तो ठीक हो गये!
पिव हो गये! छू -म तर!”
च दर हँस पड़ा उसका मन शा त हो गया सुधा म जादू था सचमचु जादू था िबनती
चाय ले आयी दो याले सुधा बोली, “अपने िलए भी लाओ ” िबनती ने िसर िहलाया
सुधा ने च दर क ओर देखकर कहा, “ये पगली जाने य तमु से झपती ह?ै ”
“झपती कहाँ हँ?” िबनती ने ितवाद िकया और याला भी ले आयी और जमीन पर बठै गयी
सुधा ने याला महँु से लगाया और बोली, “च दर, तमु ने प मी को गलत समझा है प मी बहत
अ छी लड़क है तमु से बड़ी भी है और तमु से यादा समझदार, और उसी तरह यवहार भी
करती है तमु अगर कु छ सोचते हो तो गलत सोचते हो मेरा मतलब समझ गये न ”
“जी हाँ, गु आनीजी, अ छी तरह से!” च दर ने हाथ जोडक़र िवन ता से कहा िबनती हँस
पड़ी और उसक चाय छलक गयी नीचे रखी हई च दर क जरीदार पेशावरी सिडल भीग
गयी िबनती ने झकु कर एक अँगोछे से उसे प छना चाहा तो सुधा िच ला उठी-”हाँ-हाँ, छु ओ
मत कह इनक सिडल भी बाद म आके न रोने लगे सुन िबनती, एक लड़क ने कल इ ह
छू िलया तो आप आज उदास थे अभी तमु सिडल छु ओ तो कह जाके कोतावली म रपट न कर
द”
च दर हँस पड़ा और उसका मन धुलकर ऐसे िनखर गया जसै े शरद का नीलाभ आकाश
“अब प मी के यहाँ कब जाओगे?” सुधा ने शरारत-भरी मसु कराहट से पछू ा
“कल जाऊँ गा! ठाकु र साहब प मी के हाथ अपनी कार बेच रहे ह तो कागज पर द तखत करना
है ” च दर ने कहा, “अब म िनडर हँ कहो िबनती, तु हारे ससुर का या कोई खत नह
आया ”
िबनती झप गयी च दर चल िदया
थोड़ी दरू जाकर िफर मड़ु ा और बोला, “अ छा सुधा, आज तक जो काम हो बता दो िफर एक
महीने तक मझु से कोई मतलब नह हम थीिसस परू ी करगे समझ ?”
“समझे!” हाथ पटककर सुधा बोली
12
सचमचु डेढ़ महीने तक च दर को होश नह रहा िक कहाँ या हो रहा है िबस रया रोज सुधा
और िबनती को पढ़ाने आता रहा, सुधा और िबनती दोन ही का इ तहान ख म हो गया प मी
दो बार सुधा और च दर से िमलने आयी लेिकन च दर एक बार भी उसके यहाँ नह गया िम ा
का एक खत बरे ली से आया लेिकन च दर ने उसका भी जवाब नह िदया डॉ टर साहब ने
अपनी पु तक के दो अ याय िलख डाले लेिकन उसने एक िदन भी बहस नह क िबनती उसे
बराबर चाय, दधू , ना ता, शरबत और खरबजू ा देती रही लेिकन च दर ने एक बार भी उसके
ससुर का नाम लेकर नह िचढ़ाया सुधा या करती ह,ै कहाँ जाती ह,ै च दर से या कहती ह,ै
च दर को कोई होश नह , बस उसका पेन, उसके कागज, टडी म क मेज और च दर है िक
आिखर थीिसस परू ी करके ही माना
7 मई को जब उसने थीिसस का आिखरी प ना िलखकर परू ा िकया और स तोष क साँस ली तो
देखा िक शाम के पाँच बजे ह, सायबान म अभी परदा पड़ा है लेिकन धपू उतार पर है और लू ब द
हो गयी है उसक कु स के पीछे एक चटाई िबछाये हए सुधा बठै ी है गू ो का अधपढ़ा हआ
उप यास बगल म खुला हआ औधं ा पड़ा है और आप च दर क एक मोटी-सी इकनॉिम स क
िकताब खोले उस पर कलम से कु छ गोदा-गोदी कर रही है
“सुधा!” एक गहरी साँस लेकर अँगड़ाई लेते हए च दर ने कहा, “लो, आज आिखरकार जान
छू टी बस, अब दो-तीन महीने म माबदौलत डॉ टर बन जाएँगे!”
सुधा अपने काय म य त च दर ने या कहा, यह सुनकर भी गमु च दर ने हाथ बढ़ाकर
चोटी झटक दी “हाय रे ! हम नह अ छा लगता, च दर!” सुधा िबगडक़र बोली, “तु हारे काम
के बीच म कोई बोलता है तो िबगड़ जाते हो और हमारा काम थोड़े ही मह वपणू ह!ै ” कहकर
सुधा िफर पेन लेकर गोदने लगी
“आिखर कौन-सा उपिनषद िलख रही ह आप? जरा देख तो!” च दर ने िकताब ख च ली
टािजग क इकनॉिम स क िकताब म एक परू े प ने पर सुधा ने एक िब ली बनायी थी और
अगर िनगाह जरा चकू जाए तो आप कह नह सकते थे यह चौरासी लाख योिनय म से िकस
योिन का जीव ह,ै लेिकन चँिू क सुधा कह रही है िक यह िब ली ह,ै इसिलए मानना होगा िक यह
िब ली ही है
च दर ने सुधा क बाँह पकडक़र कहा, “उठ! आलसी कह क , चल उठा ये पोथा! चलके पापा
के परै छू आएँ?”
सुधा चुपचाप उठी और आ ाकारी लड़क क तरह मोटी फाइल उठा ली दरवाजे तक पहँचकर
क गयी और च दर के क धे पर फाइल िटकाकर बोली, “ऐ च दर, तो स ची अब तमु डॉ टर
हो जाओगे?”
“और या?”
“आहा!” कहकर जो सुधा उछली तो फाइल हाथ से िखसक और सभी प ने जमीन पर
च दर झ ला गया उसने गु से से लाल होकर एक घँसू ा सुधा को मार िदया “अरे राम रे !”
सुधा ने पीठ सीधी करते हए कहा, “बड़े परोपकारी हो डॉ टर च दर कपरू ! हम िबना थीिसस
िलखे िड ी दे दी! लेिकन बहत जोर क थी!”
च दर हँस पड़ा
खरै दोन पापा के पास गये वे भी िलखकर ही उठे थे और शरबत पी रहे थे च दर ने जाकर
कहा, “परू ी हो गयी ” और झकु कर परै छू िलये उ ह ने च दर को सीने से लगाकर कहा,
“बस बेटा, अब तु हारी तप या परू ी हो गयी अब जुलाई से यिू नविसटी म ज र आ जाओगे
तमु !”
सुधा ने पोथा कोच पर रख िदया और अपने परै बढ़ाकर खड़ी हो गयी “ये या?” पापा ने
पछू ा
“हमारे परै नह छु एँगे या?” सुधा ने ग भीरता से कहा
“चल पगली! बहत बदतमीज होती जा रही ह!ै ” पापा ने कृ ि म गु से से कहा, “च दर! बहत
िसर चढ़ी हो गयी है जरा दबाकर रखा करो तमु से छोटी है िक नह ?”
“अ छा पापा, अब आज िमठाई िमलनी चािहए ” सुधा बोली, “च दर ने थीिसस ख म क ह?ै ”
“ज र, ज र बेटी!” डॉ टर शु ला ने जेब से दस का नोट िनकालकर दे िदया, “जाओ, िमठाई
मगँ वाकर खाओ तमु लोग ”
सुधा हाथ म नोट िलये उछलते हए टडी म म आयी, पीछे-पीछे च दर सुधा क गयी और
अपने मन म िहसाब लगाते हए बोली, “दस पये प ड ऊन एक प ड म आठ ल छी छह
ल छी म एक शाल बाक बची दो ल छी दो ल छी म एक वेटर बस एक िबनती का
वेटर, एक हमारा शाल ”
च दर का माथा ठनका अब िमठाई क उ मीद नह िफर भी कोिशश करनी चािहए
“सुधा, अभी से शाल का या करोगी? अभी तो बहत गरमी ह!ै ” च दर बोला
“अबक जाड़े म तु हारा याह होगा तो आिखर हम लोग नयी-नयी चीज का इ तजाम कर न
अब डॉ टर हए, अब डॉ टरनी आएँगी!” सुधा बोली
खरै , बहत मनाने-बहलाने-फु सलाने पर सुधा िमठाई मगँ वाने को राजी हई जब नौकर िमठाई
लेने चला गया तो च दर ने चार ओर देखकर पछू ा, “कहाँ गयी िबनती? उसे भी बुलाओ िक
अके ले-अके ले खा लोगी!”
“वह पढ़ रही है मा टर साहब से!”
“ य ? इ तहान तो ख म हो गया, अब या पढ़ रही ह?ै ” च दर ने पछू ा
“िवदुषी का दसू रा ख ड तो दे रही है न िसत बर म!” सुधा बोली
“अ छा, बुलाओ िबस रया को भी!” च दर बोला
“अ छा, िमठाई आने दो ” सुधा ने कहा और फाइल क ओर देखकर कहा, “मझु े इस क ब त
पर बहत गु सा आ रहा है ”
“ य ?”
“इसक वजह से तमु डेढ़ महीने सीधे से बोले तक नह इ तहान वाले िदन सुबह-सुबह तु ह
हाथ जोडऩे आयी तो तमु ने िसर पर हाथ भी नह रखा!” सुधा ने िशकायत के वर म कहा
“तो अब आशीवाद दे द अब तो ख म हई थीिसस अब िजतना चाहो बात कर लो थीिसस
न िलखते तो िफर तु हारे च दर को उपािध कहाँ से िमलती?” च दर ने दुलार से कहा
“तो िफर क वोके शन पर तु हारी गाउन हम पहनकर फोटो िखंचाएँगे!” सुधा मचलकर बोली
इतने म नौकर िमठाई ले आया “जाओ, िबनतीजी को बुला लाओ ” च दर ने कहा
िबनती आयी
“तमु पढ़ चुक !” च दर ने पछू ा
“अभी नह ” िबनती बोली
“अ छा, अब आज पढ़ाई ब द करो, उ ह भी बुला लाओ िमठाई खाई जाए ” च दर ने कहा
“अ छा!” कहकर िबनती जो मड़ु ी तो सुधा बोली, “अरे लालिचन! ये तो पछू ले िक िमठाई काहे
क ह?ै ”
“मझु े मालमू ह!ै ” िबनती मसु कराती हई बोली, “उनके यहाँ आज गये ह गे, प मी के यहाँ िफर
आज कु छ उस िदन जसै ी बात हई होगी ”
सुधा हँस पड़ी च दर झप गया िबनती चली गयी िबस रया को बुलाने
“अब तो ये तमु से बोलने लगी!” सुधा ने कहा
“हाँ, यह है बड़ी सुशील लड़क और बहत शा त हम बहत अ छी लगती है बोलना तो जसै े
आता ही नह इसे ”
“हाँ, लेिकन अब खबू सीख रही है इसक गु िमली है गेसू हमसे भी यादा गेसू से पटने
लगी है इसक दोन याह करने जा रही ह और दोन उसी क बात करती ह जब िमलती ह
तब ” सुधा बोली
“और किवता भी करती है यह, तमु एक बार कह रही थ ?” च दर ने पछू ा
“नह जी, असल म एक बड़ी सु दर-सी नोट-बुक थी, उसम यह जाने या िलखती थी? हम
नह िदखाती थी बाद म हमने देखा िक एक डायरी है उसम धोबी का िहसाब िलखती
थी ”
“तो किवता नह िलखत ! ता जुब ह,ै वरना सोलह बरस के बाद ेम करके किवता करना तो
लड़िकय का फै शन हो गया ह,ै उतना ही यापक िजतना उलटा प ला ओढ़ना ” च दर
बोला
“चला तु हारा नारी-पुराण!” सुधा िबगड़ी
िमठाई खाने वाले आये आगे-आगे िबनती, पीछे-पीछे िबस रया अिभवादन के बाद िबस रया
बठै गया “कहो िबस रया, तु हारी िश या कै सी ह?ै ”
“बस अि तीय ” किव िबस रया ने िसर िहलाकर कहा सुधा मसु करा दी, च दर क ओर
देखकर
“और ये सुधा कै सी थी?”
“बस अि तीय ” िबस रया ने उसी तरह कहा
“दोन अि तीय ह? साथ ही!” च दर ने पछू ा
सुधा और िबनती दोन हँस द िबस रया नह समझ पाया िक उसने कौन-सी हँसने क बात
क थी और जब नह समझ पाया तो पहले िसर खुजलाने लगा िफर खुद भी हँस पड़ा उसक
हँसी पर तीन और हँस पड़े
“च दर, मा टर साहब भी खबू ह एक िदन िबनती को महादेवी क वह किवता पढ़ा रहे थे,
'िवरह का जलजात जीवन,' तो पढ़ते-पढ़ते बड़ी गहरी साँस भरने लगे ”
च दर और िबनती दोन हँस पड़े िबस रया पहले तो खुद हँसा िफर बोला, “हाँ भाई, या कर,
कपरू ! तमु तो जानते ही हो, म बहत भावुक हँ मझु से बदा त नह होता एक बार तो ऐसा
हआ िक पच म एक क ण रस का गीत आ गया अथ िलखने को म उसे पढ़ते ही इतना
यिथत हो गया िक उठकर टहलने लगा ोफे सर समझे म दसू रे लड़के क कॉपी देखने उठा
हँ, तो उ ह ने िनकाल िदया मझु े िनकाले जाने का अफसोस नह हआ लेिकन किवता पढक़र
मझु े बहत लाई आयी ”
सुधा हँसी तो च दर ने आँख के इशारे से मना िकया और ग भीरता से बोला, “हाँ भाई िबस रया,
सो तो सही है ही तमु इतने भावुक न हो तो इतना अ छा कै से िलख सकते हो? तो तमु ने पचा
छोड़ िदया?”
“हाँ, म पच वगरै ह क या परवाह करता हँ? मेरे िलए इन सभी व तओु ं का कु छ भी अथ नह
म भावना क उपासना करता हँ उस समय परी ा देने क भावना से यादा सबल उस किवता
क क ण भावना थी और इस तरह म िकतनी बार फे ल हो चुका हँ मेरे साथ वह पढ़ता था
न ह रहर टंडन, वह अब ब ती कॉलेज का ि ि सपल है एक मेरा सहपाठी था, वह रे िडयो का
ो ाम ए जी यिू टव ह.ै ..”
“और एक तु हारा सहपाठी तो हमने सुना िक असे बली का पीकर भी ह!ै ” च दर बात काटकर
बोला सुधा िफर हँस पड़ी िबनती भी हँस पड़ी
खरै िमठाई का भोग ार भ हआ िबस रया कु छ तक लुफ कर रहा था तो िबनती बोली,
“खाइए, िमठाई तो िवरह-रोग और भावुकता म बहत वा य द होती ह!ै ”
“अ छा, अब तो िबनती का कं ठ फू ट िनकला! अपने गु जी को बना रही है ” च दर बोला
िबस रया थोड़ी देर बाद चला गया “अब मझु े एक पाट म जाना है ” उसने कहा जब
आिखर म एक रसगु ला बच रहा तो िबनती हाथ म लेकर बोली, “कौन लेगा?” आज पता नह
य िबनती बहत खुश थी और बहत बोल रही थी
च दर बोला, “हम दो!”
सुधा बोली, “हम!”
िबनती ने एक बार च दर क ओर देखा, एक बार सुधा क ओर च दर बोला, “देख िबनती
हमारी है या सुधा क है ”
िबनती ने झट रसगु ला सुधा के मखु म रख िदया और सुधा के िसर पर िसर रखकर बोली-
“हम अपनी दीदी के ह!” सुधा ने आधा रसगु ला िबनती को दे िदया तो िबनती च दर को
िदखलाकर खाते हए सुधा से बोली, “दीदी, ये हम बहत बनाते ह, अब हम भी तु हारी तरह
बोलगे तो इनका िदमाग ठीक हो जाएगा ”
“हम-तमु दोन िमलके इनका िदमाग ठीक करगे?” सुधा ने यार से िबनती को थपथपाते हए
कहा, “अब हम त त रयाँ धोकर रख द ” और त त रयाँ उठाकर चल दी
“पानी नह दोगी?” च दर बोला
िबनती पानी ले आयी और बोली, “हम तो आपका इतना काम करते ह और आप जब देखो तब
हम बनाते रहते ह आपको या आन द आता है हम बनाने म?”
च दर ने पल-भर िबनती क ओर देखा और बोला, “असल म बनने के बाद जब तमु झप जाती
हो तो...हाँ ऐसे ही ”
िबनती ने िफर झपकर महँु िछपा िलया और लाज से सकु चाकर इ वधू बन गयी िबनती
देखने-सुनने म बड़ी अ छी थी उसक गठन तो सुधा क तरह नह थी लेिकन उसके चेहरे पर
एक िफरोजी आभा थी िजसम गलु ाल के डोरे थे आँख उसक बड़ी-बड़ी और पलक म इस तरह
डोलती थ जसै े िकसी सुकु मार सीपी म कोई बहत बड़ा मोती डोले झपती थी तो महँु पर साँझ
मसु करा उठती थी और गाल म फू ल के कटोर जसै े दो छोटे-छोटे गड् ढो और िबनती के अगं -
अगं म एक प क लहर थी जो नािगन क तरह लहराती थी और उसक आदत थी िक बात
करते समय अपनी गरदन जरा टेढ़ी कर लेती थी और अँगिु लय से अपने आँचल का छोर उमेठने
लगती थी
इस व च दर क बात पर झप गयी और उसी तरह आँचल के छोर को उमेठती हई, मसु कान
िछपाकर उसने ऐसी िनगाह से च दर क ओर देखा िजसम थोड़ी लाज, थोड़ा गु सा, थोड़ी
स नता और थोड़ी शरारत थी
च दर एकदम बोला उठा, “अरे सुधा, सुधा, जरा िबनती क आँख देखो इस व !”
“आयी अभी ” बगल के कमरे म त तरी रखते हए सुधा बोली
“बड़े खराब ह आप?” िबनती बोली
“हाँ, बनाओगी न आज से हम? हमारा िदमाग ठीक करोगी न? बहत बोल रही थी, अब बताओ!”
“बताएँ या? अभी तक हम बोलते नह थे तभी न?”
“अब अपनी ससुराल म बोलना टु इयाँ ऐसी! वह तु हारे बोल पर रीझगे लोग ” च दर ने िफर
छेड़ा
“िछः, राम-राम! ये सब मजाक हमसे मत िकया क िजए दीदी से य नह कहते िजनक अभी
शादी होने जा रही है ”
“अभी उनक कहाँ, अभी तो तय भी नह हई ”
“तय ही समिझए, फोटो इनक उन लोग ने पस द कर ली अ छा एक बात कह, मािनएगा!”
िबनती बड़े आ ह और दीनता के वर म बोली
“ या?” च दर ने आ य से पछू ा िबनती आज सहसा िकतना बोलने लगी है िबनती बोली,
नीचे जमीन क ओर देखती हई-”आप हमसे याह के बारे म मजाक न िकया क िजए, हम अ छा
नह लगता ”
“ओहो, याह अ छा लगता है लेिकन उसके बारे म मजाक नह गड़ु खाया गलु गलु े से
परहेज!”
“हाँ, यही तो बात है ” िबनती सहसा ग भीर हो गयी-”आप समझते ह गे िक म याह के िलए
उ सुक हँ, दीदी भी समझती ह; लेिकन मेरा ही िदल जानता है िक याह क बात सुनकर मझु े
कै सा लगने लगता है लेिकन िफर भी मने याह करने से इनकार नह िकया खुद दौड़-
दौडक़र उस िदन दुबेजी क सेवा म लगी रही, इसिलए िक आप देख चुके ह िक माँ का यवहार
मझु से कै सा ह?ै आप यहाँ इस प रवार को देखकर समझ नह सकते िक म वहाँ कै से रहती हँ,
कै से माँजी क बात बदा त करती हँ, वह नरक है मेरे िलए, माँ क गोद नरक है और म िकसी
तरह िनकल भागना चाहती हँ कु छ चनै तो िमलेगा!” िबनती क आँख म आँसू आ गये और
िससकती हई बोली, “लेिकन आप या दीदी जब यह कहते ह, तो मझु े लगता है िक म िकतनी
नीच हँ, िकतनी पितत हँ िक खुद अपने याह के िलए याकु ल हँ, लेिकन आप न कहा कर तो
अ छा ह!ै ” िबनती को आँसुओं का तार बँध गया था
सुधा बगल के कमरे से सब कु छ सुन रही थी आयी और च दर से बोली, “बहत बुरी बात ह,ै
च दर! िबनती, य रो रही हो, रानी? बुआ का वभाव ही ऐसा ह,ै उससे हमेशा अपना िदल
दुखाने से या लाभ?” और पास जाकर उसको छाती से लगाकर सुधा बोली, “मेरी राजदुलारी!
अब रोना मत, ऐ!ं अ छा, हम लोग कभी मजाक नह करगे! बस अब चुप हो जाओ, रानी िबिटया
क तरह जाओ महँु धो आओ ”
िबनती चली गयी च दर लि जत-सा बठै ा था
“लो, अब तु ह भी लाई आ रही है या?” सुधा ने बहत दुलार से कहा, “तमु उससे ससुराल का
मजाक मत िकया करो वह बहत दु:खी है और बहत कदर करती है तु हारी और िकसी क
मजाक क बात और है हम या तमु कहते ह तो उसे लग जाता है ”
“अ छा, वो कह रही थी, तु हारी फोटो उन लोग ने पस द कर ली ह”ै -च दर ने बात बदलने के
खयाल से कहा
“और या, कोई हमारी श ल तु हारी तरह है िक लोग नापस द कर द ” सुधा अकड़कर
बोली
“नह , सच-सच बताओ?” च दर ने पछू ा
“अरे जी,” लापरवाही से महँु िबचकाकर सुधा बोली, “उनके पस द करने से या होता ह?ै म
याह-उआह नह क ँ गी तमु इस फे र म न रहना िक हम िनकाल दोगे यहाँ से ”
इतने म िबनती आ गयी वह भी उदास थी सुधा उठी और िबनती को पकड़ लायी और
ढके लकर च दर के बगल म िबठा िदया
“लो, च दर! अब इसे दुलार कर लो तो अभी गरु गरु ाने लगे िब ली कह क !” सुधा ने उसे
ह क -सी चपत मारकर कहा िबनती का महँु अपनी हथेिलय म लेकर अपने महँु के पास
लाकर आँख म आँख डालकर कहा, “पगली कह क , आँसू का खजाना लुटाती िफरती है ”
“च दर!” डॉ. शु ला ने पुकारा और च दर उठकर चला गया
13
सुधा पर इन िदन घमू ना सवार था सुबह हई िक च पल पहनी और गायब गेस,ू कािमनी,
भा, लीला शायद ही कोई लड़क बची होगी िजसके यहाँ जाकर सुधा ऊधम न मचा आती हो,
और चार सुख-दु:ख क बात न कर आती हो िबनती को घमू ना कम पस द था, हाँ जब कभी
सुधा गेसू के यहाँ जाती थी तो िबनती ज र जाती थी, उसे सुधा क सभी िम म गेसू सबसे
यादा पस द थी डॉ टर शु ला के यरू ो म छु ी हो चुक थी पर वे सुधा का याह तय करने
क कोिशश कर रहे थे इसिलए वह बाहर भी नह गये थे च दर डेढ़ महीने तक लगातार
मेहनत करने के बाद पढ़ाई-िलखाई क ओर से आराम कर रहा था और उसने िनि त कर िलया
था िक अब बरसात के पहले वह िकताब छु एगा नह बड़े आराम के िदन कटते थे उसके
सुबह उठकर साइिकल पर गगं ा नहाने जाता था और वहाँ अ सर ठाकु र साहब से भी मलु ाकात
हो जाती थी डॉ टर शु ला ने भी कई दफे इरादा िकया िक वे गगं ाजी चला कर लेिकन एक तो
उनसे िदन म काम नह होता था, शाम को वे घमू ते और सुबह उठकर िकताब िलखते थे
एक िदन सुबह िलख रहे थे िक च दर आया और उनके परै छू कर बोला, “ ा तीय सरकार का
वह पुर कार कल शाम को आ गया!”
“कौन-सा?”
“वह जो उ र ा त म माता और िशशुओं क मृ यु-सं या पर मने िनब ध िलखा था, उसी
पर ”
“तो या पदक आ गया?” डॉ टर शु ला ने कहा
“जी,” अपनी जेब म से एक मखमली िड बा िनकालकर च दर ने िदया पदक बहत सु दर
था जगमगाता हआ वणपदक िजसम ा तीय राजमु ा अिं कत थी
“ई र तु ह बहत यश वी करे जीवन म ” डॉ टर शु ला ने पदक उसक कमीज म अपने हाथ
से लगा िदया, “जाओ, अ दर सुधा को िदखा आओ ”
च दर जाने लगा तो डॉ टर साहब ने बुलाया, “अ छा, अब सुधा क शादी का इ तजाम करना
है हमसे तो कु छ होने से रहा, तु ह को सब करना होगा और सुनो, जेठ दशहरा को लड़के
का भाई और माँ देखने आ रही ह और बहन भी आएँगी गाँव से ”
“अ छा?” च दर बठै गया कु स पर और बोला, “कहाँ है लड़का? या करता ह?ै ”
“लड़का शाहजहाँपुर म है घर के जम दार ह ये लोग लड़का एम. ए. है और अ छे िवचार
का है उसने िलखा है िक िसफ दस आदमी बारात म आएँगे, एक िदन कगे सं कार के
बाद चले जाएँगे िसवा लड़क के गहने-कपड़े और लड़के के गहने-कपड़ के और कु छ भी
नह वीकार करगे ”
“अ छा, ा ण म तो ऐसा कु ल नह िमलेगा ”
“तभी तो! सुधा क िक मत ह,ै वरना तमु िबनती के ससुर को तो देख ही चुके हो अ छा
जाओ, सुधा से िमल आओ ”
वह सुधा के कमरे म आ गया सुधा थी ही नह वह आँगन म आया देखा महरािजन खाना
बना रही है और िबनती बरामदे म बुरादे क अँगीठी पर पकोिड़याँ बना रही है
“आइए,” िबनती बोली, “दीदी तो गयी ह गेसू को बुलाने आज गेसू क दावत है ...पीढ़े पर
बिै ठएगा, लीिजए ” एक पीढ़ा च दर क ओर िबनती ने िखसका िदया च दर बठै गया
िबनती ने उसके हाथ म मखमली िड बा देखा तो पछू ा, “यह या लाये? कु छ दीदी के िलए है
या? यह तो अँगठू ी मालमू पड़ती है ”
“अँगठू ी, वह या दाल म िमला के खाएगी! जंगली कह क ! उसे या तमीज है अँगठू ी पहनने
क !”
“हमारी दीदी के िलए ऐसी बात क तो अ छा नह होगा, हाँ!” उसे िबनती ने उसी तरह गरदन
टेढ़ी कर आँख डु लाते हए धमकाया-”उ ह नह अँगठू ी पहननी आएगी तो या आपको आएगी?
अब याह म सोलह िसंगार करगी! अ छा, दीदी कै सी लगगी घँघू ट काढ़ के ? अभी तक तो िसर
खोले चकई क तरह घमू ती-िफरती ह ”
“तमु ने तो डाल ली आदत, ससुराल म रहने क !” च दर ने िबनती से कहा
“अरे हमारा या!” एक गहरी साँस लेते हए िबनती ने कहा, “हम तो उसी के िलए बने थे
लेिकन सुधा दीदी को याह-शादी म न फँ सना पड़ता तो अ छा था दीदी इन सबके िलए नह
बनी थ आप मामाजी से कहते य नह ?”
च दर ने कु छ जवाब नह िदया चुपचाप बठै ा हआ सोचता रहा िबनती भी कड़ाही म से
पकौिड़याँ िनकाल-िनकालकर थाली म रखने लगी थोड़ी देर बाद जब वह घी म पकौिड़याँ
डाल चुक तब भी वह वसै े ही गमु सुम बठै ा सोच रहा था
“ या सोच रहे ह आप? नह बताइएगा िफर अभी हम दीदी से कह दगे िक बठै -बठै े सोच रहे
थे ” िबनती बोली
“ या तु हारी दीदी का डर पड़ा ह?ै ” च दर ने कहा
“अपने िदल से पिू छए हमसे नह बन सकते आप!” िबनती ने मसु कराकर कहा और उसके
गाल म फू ल के कटोरे िखल गये-”अ छा, इस िड बे म या ह,ै कु छ ाइवेट!”
“नह जी, ाइवेट या होगा, और वह भी तमु से? सोने का मेडल है िमला है मझु े एक लेख
पर ” और च दर ने िड बा खोलकर िदखला िदया
“आहा! ये तो बहत अ छा है हम दे दीिजए ” िबनती बोली
“ या करे गी त?ू ” च दर ने हँसकर पछू ा
“अपने आनेवाले जीजाजी के िलए कान के बु दे बनवा लगे ” िबनती बोली, “अरे हाँ, आपको
एक चीज िदखाएँगे ”
“ या?”
“यह नह बताते देिखएगा तो उछल पिड़एगा ”
“तो िदखाओ न!”
“अभी तो दीदी आ रही ह गी दीदी के सामने नह िदखाएँगे ”
“सुधा से िछपाकर हम कु छ नह कर सकते, यह तमु जानती हो ” च दर बोला
“िछपाने क बात थोड़े ही है देखकर तब उ ह बता दीिजएगा वसै े वह खुद ही सुधा दीदी से
या िछपाते ह? लो, सुधा दीदी तो आ गय ...”
च दर ने पीछे मडु क़र देखा सुधा के हाथ म एक ल बा-सा सरकं डा था और उसे झडं े क तरह
फहराती हई चली आ रही थी च दर हँस पड़ा
“िखल गये दीदी को देखते ही!” िबनती बोली और एक गरम पकौड़ी च दर के ऊपर फक दी
“अरे , बड़ी शतै ान हो गयी हो तमु इधर! पाजी कह क !” च दर बोला
सुधा च पल उतारकर अ दर आयी झमू ती-इठलाती हई चली आ रही थी
“कहो, सेठ वाथ मल!” उसने च दर को देखते ही कहा, “सुबह हई और पकौड़ी क महक लग
गयी तु ह!” पीढ़ा ख चकर उसके बगल म बठै गयी और सरकं डा च दर के हाथ पर रखते हए
बोली, “लो, यह ग ना घर म बो देना और गडँ ेरी खाना! अ छा!” और हाथ बढ़ाकर वह
िडिबया उठा ली और बोली, “इसम या ह?ै खोल या न खोल?”
“अ छा, खत तक तो हमारे िबना पछू े खोल लेती हो इसे पछू के खोलोगी!”
“अरे हमने सोचा शायद इस िडिबया म प मी का िदल ब द हो तु हारी िम ह,ै शायद मिृ त-
िच ï म वही दे िदया हो ” और सुधा ने िडिबया खोली तो उछल पड़ी, “यह तो उसी िनब ध पर
िमला है िजसका चाट तमु बनाये थे!”
“हाँ!”
“तब तो ये हमारा है ” िडिबया अपने व म िछपाकर सुधा बोली
“तु हारा तो है ही म अपना कब कहता हँ?” च दर ने कहा
“लगाकर देख!” और उठकर सुधा चल दी
“िबनती, दो पकौड़ी तो दो ” और दो पकौिड़याँ लेकर खाते हए च दर सुधा के कमरे म गया
देखा, सुधा शीशे के सामने खड़ी है और मेडल अपनी साड़ी म लगा रही है वह चुपचाप खड़ा
होकर देखने लगा सुधा ने मेडल लगाया और ण-भर तनकर देखती रही िफर उसे एक हाथ
से व पर िचपका िलया और महँु झकु ाकर उसे चमू िलया
“बस, कर िदया न ग दा उसे!” च दर मौका नह चकू ा
और सुधा तो जसै े पानी-पानी गाल से लाज क रतनारी लपट फू ट और एड़ी तक धधक
उठ फौरन शीशे के पास से हट गयी और िबगड़कर बोली, “चोर कह के ! या देख रहे थे?”
िबनती इतने म त तरी म पकौड़ी रखकर ले आयी सुधा ने झट से मेडल उतार िदया और बोली,
“लो, रखो सहेजकर ”
“ य , पहने रहो न!”
“ना बाबा, परायी चीज, अभी खो जाये तो डाँड़ भरना पड़े ” और मेडल च दर क गोद म रख
िदया
िबनती ने धीमे से कहा, “या मरु ली मरु लीधर क अधरा न धरी अधरा न धर गी ”
च दर और सुधा दोन झप गये “लो, गेसू आ गयी ”
सुधा क जान म जान आ गयी च दर ने िबनती का कान पकडक़र कहा, “बहत उलटा-सीधा
बोलने लगी ह!ै ”
िबनती ने कान छु ड़ाते हए कहा, “कोई झठू थोड़े ही कहती हँ!”
च दर चुपचाप सुधा के कमरे म पकौिडय़ाँ खाता रहा बगल के कमरे म सुधा, गेस,ू फू ल और
हसरत बठै े बात करते रहे िबनती उन लोग को ना ता देती रही उस कमरे म ना ता
पहँचाकर िबनती एक िगलास म पानी लेकर च दर के पास आयी और पानी रखकर बोली,
“अभी हलुआ ला रही हँ, जाना मत!” और पल-भर म त तरी म हलुआ रखकर ले आयी
“अब म चल रहा हँ!” च दर ने कहा
“बठै ो, अभी हम एक चीज िदखाएँगे जरा गेसू से बात कर आएँ ” िबनती बड़े भोले वर म
बोली, “आइए, हसरत िमयाँ ” और पल-भर म न ह-मु ने-से छह वष के हसरत िमयाँ तनजेब
का कु रता और चड़ू ीदार पायजामे पर पीले रे शम क जाके ट पहने कमरे म खरगोश क तरह
उछल आये
“आदाबज ” बड़े तमीज से उ ह ने च दर को सलाम िकया
च दर ने उसे गोद म उठाकर पास िबठा िदया “लो, हलुआ खाओ, हसरत!”
हसरत ने िसर िहला िदया और बोला, “गेसू ने कहा था, जाकर च दर भाई से हमारा आदाब
कहना और कु छ खाना मत! हम खाएँगे नह ”
च दर बोला, “हमारा भी नम ते कह दो उनसे जाकर ”
हसरत उठ खड़ा हआ-”हम कह आएँ ” िफर मडु क़र बोला, “आप तब तक हलुआ ख म कर
दगे?”
च दर हँस पड़ा, “नह , हम तु हारा इ तजार करगे, जाओ ”
हसरत िसर िहलाता हआ चला गया
इतने म सुधा आयी और बोली, “गेसू क गजल सुनो यहाँ बठै कर आवाज आ रही है न! फू ल भी
आयी है इसिलए गेसू तु हारे सामने नह आएगी वरना फू ल अ मीजान से िशकायत कर देगी
लेिकन वह तमु से िमलने को बहत इ छु क ह,ै अ छा यह से सुनना बठै े-बठै े...”
सुधा चली गयी गेसू ने गाना शु िकया बहत महीन, पतली लेिकन बेहद मीठी आवाज म
िजसम कसक और नशा दोन घुले-िमले थे च दर एक तिकया टेककर बठै गया और उन दा-
सा सुनने लगा गजल ख म होते ही सुधा भागकर आयी-”कहो, सुन िलया न!” और उसके
पीछे-पीछे आया हसरत और सुधा के परै म िलपटकर बोला, “सुधा, हम हलुआ नह खाएँगे!”
सुधा हँस पड़ी, “पागल कह का ले खा ” और उसके महँु म हलुआ ठूँस िदया हसरत को
गोद म लेकर वह च दर के पास बठै गयी और गेसू के बारे म बताने लगी, “गेसू गिमयाँ िबताने
ननै ीताल जा रही है वह अ तर क अ मी भी आएँगी और मगँ नी क र म वह परू ी करगी
अब वह पढ़ेगी नह जुलाई तक उसका िनकाह हो जाएगा कल रात क गाड़ी से जा रहे ह ये
लोग वगरै ह-वगरै ह ”
िबनती बठै ी-बठै ी गेसू और फू ल से बात करती रही थोड़ी देर बाद सुधा उठकर चली गयी तमु
जाना मत, आज खाना यह खाना, म िबनती को तु हारे पास भेज रही हँ, उससे बात करते
रहना ”
थोड़ी देर बाद िबनती आयी उसके हाथ म कु छ था िजसे वह अपने आँचल से िछपाये हई थी
आयी और बोली, “अब दीदी नह ह, ज दी से देख लीिजए ”
“ या ह?ै ” च दर ने ता जुब से पछू ा
“जीजाजी क फोटो ” िबनती ने मसु कराकर कहा और एक छोटी-सी बहत कला मक फोटो
च दर के हाथ म रख दी
“अरे यह तो िम है कॉमरे ड कै लाश िम ” और च दर के िदमाग म बरे ली क बात, लाठी
चाज...सभी कु छ घमू गया च दर के मन म इस व जाने कै सा-सा लग रहा था कभी बड़ा
अचरज होता, कभी एक स तोष होता िक चलो सुधा के भा य क रे खा उसे अ छी जगह ले गयी,
िफर कभी सोचता िक िम इतना िविच वभाव का ह,ै सुधा क उससे िनभेगी या नह ? िफर
सोचता, नह सुधा भा यवान है इतना अ छा लड़का िमलना मिु कल था
“आप इ ह जानते ह?” िबनती ने पछू ा
“हाँ, सुधा भी उ ह नाम से जानती है श ल से नह लेिकन अ छा लड़का ह,ै बहत अ छा
लड़का ” च दर ने एक गहरी साँस लेकर कहा और िफर चुप हो गया िबनती बोली, “ या
सोच रहे ह आप?”
“कु छ नह ” पलक म आये हए आँसू रोककर और होठ पर मसु कान लाने क कोिशश करते
हए बोला, “म सोच रहा हँ, आज िकतना स तोष है मझु े, िकतनी खुशी है मझु े, िक सुधा एक ऐसे
घर जा रही है जो इतना अ छा ह,ै ऐसे लड़के के साथ जा रही है जो इतना ऊँ चा”...कहते-कहते
च दर क आँख भर आय
िबनती च दर के पास खड़ी होकर बोली, “िछः, च दर बाब!ू आपक आँख म आँस!ू यह तो
अ छा नह लगता िजतनी पिव ता और ऊँ चाई से आपने सुधा के साथ िनबाह िकया ह,ै यह तो
शायद देवता भी नह कर पाते और दीदी ने आपको जसै ा िन छल यार िदया है उसको पाकर तो
आदमी वग से भी ऊँ चा उठ जाता ह,ै फौलाद से भी यादा ताकतवर हो जाता ह,ै िफर आज इतने
शुभ अवसर पर आप म कमजोरी कहाँ से? हम तो बड़ी शरम लग रही है आज तक दीदी तो दरू ,
हम तक को आप पर गव था अ छा, म फोटो रख तो आऊँ वरना दीदी आ जाएँगी!” िबनती ने
फोटो ली और चली गयी
िबनती जब लौटी तो च दर व थ था िबनती क ओर ण भर च दर ने देखा और कहा, “म
इसिलए नह रोया था िबनती, मझु े यह लगा िक यहाँ कै सा लगेगा खरै जाने दो ”
“एक िदन तो ऐसा होता ही है न, सहना पड़ेगा!” िबनती बोली
“हाँ, सो तो ह;ै अ छा िबनती, सुधा ने यह फोटो देखी ह?ै ” च दर ने पछू ा
“अभी नह , असल म मामाजी ने मझु से कहा था िक यह फोटो िदखा दे सुधा को; लेिकन मेरी
िह मत नह पड़ी मने उनसे कह िदया िक च दर आएँगे तो िदखा दगे आप जब ठीक समझ
तो िदखा द जेठ दशहरा अगले ही मगं ल को है ” िबनती ने कहा
“अ छा ” एक गहरी साँस लेकर च दर बोला
िबनती थोड़ी देर तक च दर क ओर एकटक देखती रही च दर ने उसक िनगाह चुरा ली और
बोला, “ या देख रही हो, िबनती?”
“देख रही हँ िक आपक पलक झपकती ह या नह ?” िबनती बहत ग भीरता से बोली
“ य ?”
“इसिलए िक मने सुना था, देवताओं क पलक कभी नह िगरत ”
च दर एक फ क हँसी हँसकर रह गया
“नह , आप मजाक न समझ मने अपनी िजंदगी म िजतने लोग देखे, उनम आप-जसै ा कोई भी
नह िमला िकतने ऊँ चे ह आप, िकतना िवशाल दय है आपका! दीदी िकतनी भा यशाली
ह”
च दर ने कु छ जवाब नह िदया “जाओ, फोटो ले आओ ” उसने कहा, “आज ही िदखा दँू
जाओ, खाना भी ले आओ अब घर जाकर या करना है ”
पापा को खाना िखलाने के बाद च दर और सुधा खाने बठै े महरािजन चली गयी थी
इसिलए िबनती सक-सककर रोटी दे रही थी सुधा एक रे शमी सिनया पहने चौके के अ दर
खा रही थी और च दर चौके के बाहर सुबह के क चे खाने म डॉ टर शु ला बहत छू त-छात
का िवचार रखते थे
“देखो, आज िबनती ने रोटी बनायी है तो िकतनी मीठी लग रही ह,ै एक तमु बनाती हो िक
मालमू ही नह पड़ता रोटी है िक सो ता!” च दर ने सुधा को िचढ़ाते हए कहा
सुधा ने हँसकर कहा, “हम िबनती से लड़ाने क कोिशश कर रहे हो! िबनती क हमसे िजंदगी-
भर लड़ाई नह हो सकती!”
“अरे हम सब समझते ह इनक बात!” िबनती ने रोटी पटकते हए कहा और जब सुधा िसर
झकु ाकर खाने लगी तो िबनती ने आँख के इशारे से पछू ा, “कब िदखाओगे?”
च दर ने िसर िहलाया और िफर सुधा से बोला, “तमु उ ह िच ी िलखोगी?”
“िक ह?”
“कै लाश िम ा को, वही बरे ली वाले? उ ह ने हम खत िलखा था उसम तु ह णाम िलखा था ”
च दर बोला
“नह , खत-वत नह िलखते उ ह एक दफे बुलाओ तो यहाँ ”
“हाँ, बुलाएँगे अब महीने-दो महीने बाद, तब तमु से खबू प रचय करा दगे और तु ह उसक पाट
म भी भरती करा दगे ” च दर ने कहा
“ या? हम मजाक नह करते? हम सचमचु समाजवादी दल म शािमल ह गे ” सुधा बोली, “अब
हम सोचते ह कु छ काम करना चािहए, बहत खेल-कू द िलये, बचपन िनभा िलया ”
“उ ह ने अपना िच भेजा है देखोगी?” च दर ने जेब म हाथ डालते हए पछू ा
“कहाँ?” सुधा ने बहत उ सुकता से पछू ा, “िनकालो देख ”
“पहले बताओ, हम या इनाम दोगी? बहत मिु कल से भेजा उ ह ने िच !” च दर ने कहा
“इनाम दगे इ ह!” सुधा बोली और झट से झपटकर िच छीन िलया
“अरे , छू िलया चौके म से?” िबनती ने दबी जबान से कहा
सुधा ने थाली छोड़ दी अब छू गयी थी वह; अब खा नह सकती थी
“अ छी फोटो देखी दीदी सामने क थाली छू ट गयी!” िबनती ने कहा
14
सुधा ने हाथ धोकर आँचल के छोर से पकडक़र फोटो देखी और बोली, “च दर, सचमचु देखो!
िकतने अ छे लग रहे ह िकतना तेज है चेहरे पर, और माथा देखो िकतना ऊँ चा है ” सुधा
फोटो देखती हई बोली
“अ छी लगी फोटो? पस द ह?ै ” च दर ने बहत ग भीरता से पछू ा
“हाँ, हाँ, और समाजवािदय क तरह नह लगते ये ” सुधा बोली
“अ छा सुधा, यहाँ आओ ” और च दर के साथ सुधा अपने कमरे म जाकर पलँग पर बठै गयी
च दर उसके पास बठै गया और उसका हाथ अपने हाथ म लेकर उसक अँगठू ी घुमाते हए बोला,
“सुधा, एक बात कह, मानोगी?”
“ या?” सुधा ने बहत दुलार और भोलेपन से पछू ा
“पहले बता दो िक मानोगी?” च दर ने उसक अँगठू ी क ओर एकटक देखते हए कहा
“िफर, हमने कभी कोई बात तु हारी टाली ह!ै या बात ह?ै ”
“तमु मानोगी चाहे कु छ भी हो?” च दर ने पछू ा
“हाँ-हाँ, कह तो िदया अब कौन-सी तु हारी ऐसी बात है जो तु हारी सुधा नह मान सकती!”
आँख म, वाणी म, अंग-अंग से सुधा के आ मसमपण छलक रहा था
“िफर अपनी बात पर कायम रहना, सुधा! देखो!” उसने सुधा क उँगिलयाँ अपनी पलक से
लगाते हए कहा, “सुधी मेरी! तमु उस लड़के से याह कर लो!”
“ या?” सुधा चोट खायी नािगन क तरह तड़प उठी-”इस लड़के से? यही शकल है इसक
हमसे याह करने क ! च दर, हम ऐसा मजाक नापस द करते ह, समझे िक नह ! इसिलए बड़े
यार से बुला लाये, बड़ा दुलार कर रहे थे!”
“तमु अभी वायदा कर चुक हो!” च दर ने बहत आिजजी से कहा
“वायदा कै सा? तमु कब अपने वायदे िनभाते हो? और िफर यह धोखा देकर वायदा कराना या?
िह मत थी तो साफ-साफ कहते हमसे! हमारे मन म आता सो कहते हम इस तरह से बाँध कर
य बिलदान चढ़ा रहे हो!” और सुधा मारे गु से के रोने लगी
च दर त ध उसने इस य क क पना ही नह क थी वह ण भर खड़ा रहा वह या
कहे सुधा से, कु छ समझ ही म नह आता था वह गया और रोती हई सुधा के कं धे पर हाथ रख
िदया “हटो उधर!” सुधा ने बहत खाई से हाथ हटा िदया और आँचल से िसर ढकती हई
बोली, “म याह नह क ँ गी, कभी नह क ँ गी िकसी से नह क ँ गी तमु सभी लोग ने
िमलकर मझु े मार डालने क ठानी है तो म अभी िसर पटककर मर जाऊँ गी ” और मारे तशै
के सचमचु सुधा ने अपना िसर दीवार पर पटक िदया “अरे !” दौडक़र च दर, ने सुधा को पकड़
िलया मगर सुधा ने गरजकर कहा, “दरू हटो च दर, छू ना मत मझु े ” और जसै े उसम जाने
कहाँ क ताकत आ गयी ह,ै उसने अपने को छु ड़ा िलया
च दर ने दबी जबान से कहा, “िछः सुधा! यह तमु से उ मीद नह थी मझु े यह भावुकता तु ह
शोभा नह देती बात कै सी कर रही हो तमु ! हम वही च दर ह न!”
“हाँ, वही च दर हो! और तभी तो! इस सारी दुिनया म तु ह एक रह गये हो मझु े फोटो िदखाकर
पस द कराने को ” सुधा िससक-िससककर रोने लगी-”पापा ने भी धोखा दे िदया हम पापा
से यह उ मीद नह थी ”
“पगली! कौन अपनी लड़क को हमेशा अपने पास रख पाया ह!ै ” च दर बोला
“तमु चुप रहो, च दर हम तु हारी बोली जहर लगती है 'सुधा, यह फोटो तु ह पस द ह?ै '
तु हारी जबान िहली कै से? शरम नह आयी तु ह हम िकतना मानते थे पापा को, िकतना
मानते थे तु ह? हम यह नह मालमू था िक तमु लोग ऐसा करोगे ” थोड़ी देर चुपचाप िससकती
रही सुधा और िफर धधककर उठी-”कहाँ है वह फोटो? लाओ, अभी म जाऊँ गी पापा के पास! म
कहँगी उनसे हाँ, म इस लड़के को पस द करती हँ वह बहत अ छा ह,ै बहत सु दर है
लेिकन म उससे शादी नह क ँ गी, म िकसी से शादी नह क ँ गी! झठू ी बात ह.ै ..” और उठकर
पापा के कमरे क ओर जाने लगी
“खबरदार, जो कदम बढ़ाया!” च दर ने डाँटकर कहा, “बठै ो इधर ”
“म नह कँू गी!” सुधा ने अकडक़र कहा
“नह कोगी?”
“नह कँू गी ”
और च दर का हाथ तशै म उठा और एक भरपरू तमाचा सुधा के गाल पर पड़ा सुधा के गाल पर
नीली उँगिलयाँ उपट आय वह त ध! जसै े प थर बन गयी हो आँख म आँसू जम गये
पलक म िनगाह जम गय होठ म आवाज जम गय और सीने म िससिकयाँ जम गय
च दर ने एक बार सुधा क ओर देखा और कु स पर जसै े िगर पड़ा और िसर पटककर बठै गया
सुधा कु स के पास जमीन पर बठै गयी च दर के घुटन पर िसर रख िदया बड़ी भारी
आवाज म बोली, “च दर, देख तु हारे हाथ म चोट तो नह आयी ”
च दर ने सुधा क ओर देखा, एक ऐसी िनगाह से िजसम क महँु फाड़कर जमहु ाई ले रही थी
सुधा एकाएक िफर िससक पड़ी और च दर के परै पर िसर रखकर बोली, “च दर, सचमचु मझु े
अपने आ य से िनकालकर ही मानोगे! च दर, मजाक क बात दसू री ह,ै िजंदगी म तो दु मनी
मत िनकाला करो ”
च दर एक गहरी साँस लेकर चुप हो गया और िसर थामकर बठै गया पाँच िमनट बीत
गये कमरे म स नाटा, गहन खामोशी सुधा च दर के पाँव को छाती से िचपकाये सनू ी-
सनू ी िनगाह से जाने कु छ देख रही थी दीवार के पार, िदशाओं के पार, ि ितज से परे ...दीवार
पर घड़ी चल रही थी िटक...िटक...
च दर ने िसर उठाया और कहा, “सुधा, हमारी तरफ देखो-” सुधा ने िसर ऊपर उठाया च दर
बोला, “सुधा, तमु हम जाने या समझ रही होगी, लेिकन अगर तमु समझ पाती िक म या
सोचता हँ! या समझता हँ ” सुधा कु छ नह बोली, च दर कहता गया, “म तु हारे मन को
समझता हँ, सुधा! तु हारे मन ने जो तमु से नह कहा, वह मझु से कह िदया था-लेिकन सुधा, हम
दोन एक-दसू रे क िजंदगी म या इसीिलए आये िक एक-दसू रे को कमजोर बना द या हम
लोग ने वग क ऊँ चाइय पर साथ बठै कर आ मा का संगीत सुना िसफ इसीिलए िक उसे अपने
याह क शहनाई म बदल द?”
“गलत मत समझो च दर, म गेसू नह िक अ तर से याह के सपने देखँू और न तु ह अ तर
हो, च दर! म जानती हँ िक म तु हारे िलए राखी के सतू से भी यादा पिव रही हँ लेिकन म
जसै ी हँ, मझु े वसै ी ही य नह रहने देते! म िकसी से शादी नह क ँ गी म पापा के पास
रहँगी शादी को मेरा मन नह कहता, म य क ँ ? तमु गु सा मत हो, दुखी मत हो, तमु
आ ा दोगे तो म कु छ भी कर सकती हँ, लेिकन ह या करने से पहले यह तो देख लो िक मेरे
दय म या ह?ै ” सुधा ने च दर के पाँव को अपने दय से और भी दबाकर कहा
“सुधा, तमु एक बात सोचो अगर तमु सबका यार बटोरती चलती हो तो कु छ तु हारी
िज मेदारी है या नह ? पापा ने आज तक तु ह िकस तरह पाला अब या तु हारा यह फज है
िक तमु उनक बात को ठु कराओ? और एक बात और सोचो-हम पर कु छ िव ास करके ही
उ ह ने कहा है िक म तमु से फोटो पस द कराऊँ ? अगर अब तमु इनकार कर देती हो तो एक
तरफ पापा को तमु से ध का पहँचेगा, दसू री ओर मेरे ित उनके िव ास को िकतनी चोट
लगेगी हम उ ह या महँु िदखाने लायक रहगे भला! तो तमु या चाहती हो? महज अपनी
थोड़ी-सी भावुकता के पीछे तमु सभी क िजंदगी चौपट करने के िलए तयै ार हो? यह तु ह शोभा
नह देता है या कहगे पापा, िक च दर ने अभी तक तु ह यही िसखाया था? हम लोग या
कहगे? बताओ आज तमु शादी न करो उसके बाद पापा हमेशा के िलए दु:खी रहा कर और
दुिनया हम कहा करे , तब तु ह अ छा लगेगा?”
“नह ” सुधा ने भराये हए गले से कहा
“तब, और िफर एक बात और है न सुधी! सोने क पहचान आग म होती है न! लपट म अगर
उसम और िनखार आये तभी वह स चा सोना है सचमचु मने तु हारे यि व को बनाया है
या तमु ने मेरे यि व को बनाया ह,ै यह तो तभी मालमू होगा जबिक हम लोग किठनाइय से,
वेदनाओं से, संघष से खेल और बाद म िवजयी ह और तभी मालमू होगा िक सचमचु मने तु हारे
जीवन म काश और बल िदया था अगर सदा तमु मेरी बाँह क सीमा म रह और म तु हारी
पलक क छाँव म रहा और बाहर के संघष से हम लोग डरते रहे तो कायरता है और मझु े
अ छा लगेगा िक दुिनया कहे िक मेरी सुधा, िजस पर मझु े नाज था, वह कायर ह?ै बोलो तमु
कायर कहलाना पस द करोगी?”
“हाँ!” सुधा ने िफर च दर के घुटन म महँु िछपा िलया
“ या? यह म सुधा के महँु से सुन रहा हँ! िछः पगली! अभी तक तेरी िनगाह ने मेरे ाण म
अमतृ भरा है और मेरी साँस ने तेरे पंख म तफू ान क तेजी और हम-तु ह तो आज खुश होना
चािहए िक अब सामने जो रा ता है उसम हम लोग को यह िस करने का अवसर िमलेगा िक
सचमचु हम लोग ने एक-दसू रे को ऊँ चाई और पिव ता दी है मने आज तक तु हारी सहायता
पर िव ास िकया था आज या तमु मेरा िव ास तोड़ दोगी? सुधा, इतनी ू र य हो रही हो
आज तमु ? तमु साधारण लड़क नह हो तमु ुवतारा से यादा काशमान हो तमु यह य
चाहती हो िक दुिनया कहे, सुधा भी एक साधारण-सी भावुक लड़क थी और आज म अपने कान
से सुनँ!ू बोलो सुधी?” च दर ने सुधा के िसर पर हाथ रखकर कहा
सुधा ने आँख उठाय , बड़ी कातर िनगाह से च दर क ओर देखा और िसर झकु ा िलया सुधा
के िसर पर हाथ फे रते हए च दर बोला-
“सुधा, म जानता हँ म तमु पर शायद बहत स ती कर रहा हँ, लेिकन तु हारे िसवा और कौन है
मेरा? बताओ तु ह पर अपना अिधकार भी आजमा सकता हँ िव ास करो मझु पर सुधा,
जीवन म अलगाव, दरू ी, दुख और पीड़ा आदमी को महान बना सकती है भावुकता और सुख
हम ऊँ चे नह उठाते बताओ सुधा, तु ह या पस द ह?ै म ऊँ चा उठूँ तु हारे िव ास के सहारे ,
तमु ऊँ ची उठो मेरे िव ास के सहारे , इससे अ छा और या है सुधा! चाहो तो मेरे जीवन को एक
पिव साधन बना दो, चाहो तो एक िछछली अनुभिू त ”
सुधा ने एक गहरी साँस ली, ण-भर घड़ी क ओर देखा और बोली, “इतनी ज दी या है अभी,
च दर? तमु जो कहोगे म कर लँगू ी!” और िफर वह िससकने लगी-”लेिकन इतनी ज दी या
हïै ? अभी मझु े पढ़ लेने दो!”
“नह , इतना अ छा लड़का िफर िमलेगा नह और इस लड़के के साथ तमु वहाँ पढ़ भी सकती
हो म जानता हँ उसे वह देवताओ-ं सा िन छल है बोलो, म पापा से कह दँू िक तु ह पस द
ह?ै ”
सुधा कु छ नह बोली
“मौन का मतलब हाँ है न?” च दर ने पछू ा
सुधा ने कु छ नह कहा झकु कर च दर के परै को अपने होठ से छू िलया और पलक से दो
आँसू चू पड़े च दर ने सुधा को उठा िलया और उसके माथे पर हाथ रखकर कहा, “ई र
तु हारी आ मा को सदा ऊँ चा बनाएगा, सुधा!” उसने एक गहरी साँस लेकर कहा, “मझु े तमु पर
गव ह,ै ” और फोटो उठाकर बाहर चलने लगा
“कहाँ जा रहे हो! जाओ मत!” सुधा ने उसका कु रता पकडक़र बड़ी आिजजी से कहा, “मेरे पास
रहो, तबीयत घबराती ह?ै ”
च दर पलँग पर बठै गया सुधा तिकये पर िसर रखकर लेट गयी और फटी-फटी पथराई आँख
से जाने या देखने लगी च दर भी चुप था, िब कु ल खामोश कमरे म िसफ घड़ी चल रही
थी, िटक...िटक...
थोड़ी देर बाद सुधा ने च दर के परै को अपने तिकये के पास ख च िलया और उसके तलव पर
होठ रखकर उसम महँु िछपाकर चुपचाप लेटी रही िबनती आयी सुधा िहली भी नह ! च दर
ने देखा वह सो गयी थी िबनती ने फोटो उठाकर इशारे से पछू ा, “मजं रू ?” “हाँ ” िबनती ने
बजाय खुश होने के च दर क ओर देखकर िसर झकु ा िलया और चली गयी
सुधा सो रही थी और च दर के तलव म उसक नरम वाँरी साँस गजँू रही थ च दर बठै ा रहा
चुपचाप उसक िह मत न पड़ी िक वह िहले और सुधा क न द तोड़ दे थोड़ी देर बाद सुधा ने
करवट बदली तो वह उठकर आँगन के सोफे पर जाकर लेट रहा और जाने या सोचता रहा
जब उठा तो देखा धपू ढल गयी है और सुधा उसके िसरहाने बठै ी उसे पंखा झल रही है उसने
सुधा क ओर एक अपराधी जसै ी कातर िनगाह से देखा और सुधा ने बहत दद से आँख फे र ल
और ऊँ चाइय पर आिखरी साँस लेती हई मरणास न धपू क ओर देखने लगी
च दर उठा और सोचने लगा तो सुधा बोली, “कल आओगे िक नह ?”
“ य नह आऊँ गा?” च दर बोला
“मने सोचा शायद अभी से दरू होना चाहते हो ” एक गहरी साँस लेकर सुधा बोली और पंखे क
ओट म आँसू प छ िलये
15
च दर दसू रे िदन सुबह नह गया उसक थीिसस का बहत-सा भाग टाइप होकर आ गया था
और उसे बठै ा वह सुधार रहा था लेिकन साथ ही पता नह य उसका साहस नह हो रहा था
वहाँ जाने का लेिकन मन म एक िच ता थी सुधा क वह कल से िब कु ल मरु झा गयी थी
च दर को अपने ऊपर कभी-कभी ोध आता था लेिकन वह जानता था िक यह तकलीफ का
ही रा ता ठीक रा ता है वह अपनी िजंदगी म स तेपन के िखलाफ था लेिकन उसके िलए
सुधा क पलक का एक आँसू भी देवता क तरह था और सुधा के फू ल -जसै े चेहरे पर उदासी क
एक रे खा भी उसे पागल बना देती थी सुबह पहले तो वह नह गया, बाद म वयं उसे पछतावा
होने लगा और वह अधीरता से पाँच बजने का इ तजार करने लगा
पाँच बजे, और वह साइिकल लेकर पहँचा देखा, सुधा और िबनती दोन नह ह अके ले
डॉ टर शु ला अपने कमरे म बठै े ह च दर गया “आओ, सुधा ने तमु से कह िदया, उसे
पस द ह?ै ” डॉ टर शु ला ने पछू ा
“हाँ, उसे कोई एतराज नह ” च दर ने कहा
“म पहले से जानता था सुधा मेरी इतनी अ छी ह,ै इतनी सुशील है िक वह मेरी इ छा का
उ लंघन तो कर ही नह सकती लेिकन च दर, कल से उसने खाना-पीना छोड़ िदया है
बताओ, इससे या फायदा? मेरे बस म या ह?ै म उसे हमेशा तो रख नह सकता लेिकन,
लेिकन आज सुबह खाते व वह बठै ी भी नह मेरे पास बताओ...” उनका गला भर
आया-”बताओ, मेरा या कसरू ह?ै ”
च दर चुप था
“कहाँ है सुधा?” च दर ने पछू ा
“गरै े ज म मोटर ठीक कर रही है म इतना मना िकया िक धपू म तप जाओगी, लू लग जाएगी-
लेिकन मानी ही नह ! बताओ, इस झ लाहट से मझु े कै सा लगता ह?ै ” वृ िपता के कातर वर
म डॉ टर ने कहा, “जाओ च दर, तु ह समझाओ! म या कहँ?”
च दर उठकर गया मोटर गरै े ज म काफ गरमी थी, लेिकन िबनती वह एक चटाई िबछाये पड़ी
सो रही थी और सुधा इजं न का कवर उठाये मोटर साफ करने म लगी हई थी िबनती बेहोश सो
रही थी तिकया चटाई से हटकर जमीन पर चला गया था और चोटी फश पर सोयी हई नािगन
क तरह पड़ी थी िबनती का एक हाथ छाती पर था और एक हाथ जमीन पर आँचल, आँचल
न रहकर चादर बन गया था च दर के जाते ही सुधा ने महँु फे रकर देखा-”च दर, आओ ”
ीण मसु कराहट उसके होठ पर दौड़ गयी लेिकन इस मसु कराहट म उ लास लुट चुका था,
रे खाएँ बाक थ सहसा उसने मडु क़र देखा-”िबनती! अरे , कै से घोड़ा बेचकर सो रही ह!ै उठ!
च दर आये ह!” िबनती ने आँख खोल , च दर क ओर देखा, लेटे-ही-लेटे नम ते िकया और
आँचल सँभालकर िफर करवट बदलकर सो गयी
“बहत सोती है क ब त!” सुधा बोली, “इतना कहा इससे कमरे म जाकर पंखे म सो! लेिकन
नह , जहाँ दीदी रहेगी, वह यह भी रहेगी म गरै े ज म हँ तो यह कै से कमरे म रहे वह मरे गी
जहाँ म म ँ गी ”
“तो तु ह य गरै े ज म थ ! ऐसी या ज रत थी अभी ठीक करने क !” च दर ने कहा, लेिकन
कोिशश करने पर भी सुधा को आज डाँट नह पा रहा था पता नह कहाँ पर या टू ट गया
था
“नह च दर, तबीयत ही नह लग रही थी या करती! ोिसया उठायी, वह भी रख िदया
किवता उठायी, वह भी रख दी किवता वगरै ह म तबीयत नह लगी मन म आया, कोई कठोर
काम हो, कोई नीरस काम हो लोहे-ल कड़, पीतल-फौलाद का, तो मन लग जाए तो चली
आयी मोटर ठीक करने ”
“ य , किवता म भी तबीयत नह लगी? ता जुब ह,ै गेसू के साथ बठै कर तमु तो किवता म घंट
गजु ार देती थ !” च दर बोला
“उन िदन शायद िकसी को यार करती रही होऊँ तभी किवता म मन लगता था!” सुधा उस
िदन क पुरानी बात याद करके बहत उदास हँसी हँसी-”अब यार नह करती होऊँ गी, अब
तबीयत नह लगती बड़ी फ क , बड़ी बेजार, बड़ी बनावटी लगती ह ये किवताएँ, मन के दद
के आगे सभी फ क ह ” और िफर वह उ ह पुरज म डू ब गयी च दर भी चुपचाप मोटर क
िखडक़ से िटककर खड़ा हो गया और चुपचाप कु छ सोचने लगा
सुधा ने िबना िसर उठाये, झकु े -ही-झकु े , एक हाथ से एक तार लपेटते हए कहा-
“च दर, तु हारे िम का प रवार आ रहा ह,ै इसी मगं ल को तयै ारी करो ज दी ”
“कौन प रवार, सुधा?”
“हमारे जेठ और सास आ रही ह, इसी बसै ाखी को हम देखने उ ह ने ितिथ बदल दी है तो
अब छह ही िदन रह गये ह ”
च दर कु छ नह बोला थोड़ी देर बाद सुधा िफर बोली-
“अगर उिचत समझो तो कु छ पाउडर- म ले आना, लगाकर जरा गोरे हो जाएँ तो शायद पस द
आ जाएँ! य , ठीक है न!” सुधा ने बड़ी िविच -सी हँसी हँस दी और िसर उठाकर च दर क
ओर देखा च दर चुप था लेिकन उसक आँख म अजीब-सी पीड़ा थी और उसके माथे पर बहत
ही क ण छाँह
सुधा ने कवर िगरा िदया और च दर के पास जाकर बोली, “ य च दर, बुरा मान गये हमारी
बात का? या कर च दर, कल से हम मजाक करना भी भलू गये मजाक करते ह तो यं य
बन जाता है लेिकन हम तमु को कु छ कह नह रहे थे, च दर उदास न होओ ” बड़े ही
दुलार से सुधा बोली, “अ छा, हम कु छ नह कहगे ” और उसने अपना आँचल सँभालने के िलए
हाथ उठाया हाथ म काल च लग गयी थी च दर समझा मेरे क धे पर हाथ रख रही है
सुधा वह अलग हटा तो सुधा अपने हाथ देखकर बोली, “घबराओ न देवता, तु हारी उ वल
साधना म कािलख नह लगाऊँ गी अपने आँचल म प छ लँगू ी ” और सचमचु आँचल म हाथ
प छकर बोली, “चलो, अ दर चल, उठ िबनती! िबलयै ा कह क !”
च दर को सोफे पर िबठाकर उसी क बगल म सुधा बठै गयी और अँगिु लयाँ तोड़ते हए कहा,
“च दर, िसर म बहत दद हो रहा है मेरे ”
“िसर म दद नह होगा तो या? इतनी तिपश म मोटर बना रही थ ! पापा िकतने दुखी हो रहे थे
आज? तु ह इस तरह करना चािहए? िफर फायदा या हआ? न ऐसे दु:खी िकया, वसै े दु:खी कर
िलया बात तो वही रही न? तारीफ तो तब थी िक तमु अपनी दुिनया म अपने हाथ से आग लगा
देती और चेहरे पर िशकन न आती अभी तक दुिनया क सभी ऊँ चाई समेटकर भी बाहर से
वही बचपन कायम रखा था तमु ने, अब दुिनया का सारा सुख अपने हाथ से लुटाने पर भी वही
बचपन, वही उ लास य नह कायम रखती!”
“बचपन!” सुधा हँसी-”बचपन अब ख म हो गया, च दर! अब म बड़ी हो गयी ”
“बड़ी हो गयी! कब से?”
“कल दोपहर से, च दर!”
च दर चुप थोड़ी देर बाद िफर वयं सुधा ही बोली, “नह च दर, दो-तीन िदन म ठीक हो
जाऊँ गी! तमु घबराओ मत म मृ यु-शै या पर भी होऊँ गी तो तु हारे आदेश पर हँस सकती हँ ”
और िफर सुधा गमु सुम बठै गयी च दर चुपचाप सोचता रहा और बोला, “सुधी! मेरा तु ह कु छ
भी यान नह ह?ै ”
“और िकसका ह,ै च दर! तु हारा यान न होता तो देखती मझु े कौन झकु ा सकता था आज से
साल पहले जब म पापा के पास आयी थी तो मने कभी न सोचा था िक कोई भी होगा िजसके
सामने म इतना झकु जाऊँ गी ...अ छा च दर, मन बहत उचट रहा ह!ै चलो, कह घमू आएँ!
चलोगे?”
“चलो!” च दर ने कहा
“जाएँ िबनती को जगा लाएँ वह कमब त अभी पड़ी सो रही है ” सुधा उठकर चली गयी
थोड़ी देर म िबनती आँख मलते बगल म चटाई दाबे आयी और िफर बरामदे म बठै कर ऊँ घने
लगी पीछे-पीछे सुधा आयी और चोटी ख चकर बोली, “चल तयै ार हो! चलगे घमू ने ”
थोड़ी देर म तयै ार हो गये सुधा ने जाकर मोटर िनकाली और बोली च दर से-”तमु चलाओगे
या हम? आज हम चलाएँ चलो, िकसी पेड़ से लड़ा द मोटर आज!”
“अरे बाप रे ” पीछे िबनती िच लायी, “तब हम नह जाएँगे ”
सुधा और च दर दोन ने मडु क़र उसे देखा और उसक घबराहट देखकर दंग रह गये
“नह मरे गी नह त!ू ” सुधा ने कहा और आगे बठै गयी
“िबनती, तू पीछे बठै ेगी?” सुधा ने पछू ा
“न भइया, मोटर चलेगी तो म िगर जाऊँ गी ”
“अरे कोई मोटर के पीछे बठै ने के िलए थोड़ी कह रही हँ पीछे क सीट पर बठै ेगी?” सुधा ने
पछू ा
“ओ! म समझी तमु कह रही हो पीछे बठै ने के िलए जसै ी ब घी म साईस बठै ते ह! हम तु हारे पास
बठै गे ” िबनती ने मचलकर कहा
“अब तेरा बचपन इठला रहा ह,ै िब ली कह क , चल आ मेरे पास!” िबनती मसु कराती हई
जाकर सुधा के बगल म बठै गयी सुधा ने उसे दुलार से पास ख च िलया च दर पीछे बठै ा तो
सुधा बोली, “अगर कु छ हज न समझो तो तमु भी आगे आ जाओ या दरू ी रखनी हो तो पीछे ही
बठै ो ”
च दर आगे बठै गया बीच म िबनती, इधर च दर उधर सुधा
मोटर चली तो िबनती चीखी, “अरे मेरे मा टर साहब!”
च दर ने देखा, िबस रया चला जा रहा था, “आज नह पढ़गे...” च दर ने िच लाकर कहा
सुधा ने मोटर रोक नह
च दर को बेहद अचरज हआ जब उसने देखा िक मोटर प मी के बँगले पर क “अरे यहाँ
य ?” च दर ने पछू ा
“य ही ” सुधा ने कहा “आज मन हआ िक िमस प मी से अँगरे जी किवता सुन ”
“ य , अभी तो तमु कह रही थ िक किवता पढऩे म आज तु हारा मन ही नह लग रहा ह!ै ”
“कु छ कहो मत च दर, आज मझु े जो मन म आये, कर लेने दो मेरा िसर बेहद दद कर रहा है
और म कु छ समझ नह पाती या क ँ च दर तमु ने अ छा नह िकया?”
च दर कु छ नह बोला चुपचाप आगे चल िदया सुधा के पीछे-पीछे कु छ संकोच करती हई-सी
िबनती आ रही थी
प मी बठै ी कु छ िलख रही थी उसने उठकर सब का वागत िकया वह कोच पर बठै गयी
दसू री पर सुधा, च दर और िबनती सुधा ने िबनती का प रचय प मी से कराया और प मी ने
िबनती से हाथ िमलाया तो िबनती जाने य च दर क ओर देखकर हँस पड़ी शायद उस िदन
क घटना क याद म
सहसा सुधा को जाने या खयाल आ गया, िबनती क शरारत-भरी हँसी देखकर िक उसने
फौरन कहा च दर से-”च दर, तमु प मी के पास बठै ो, दो िम को साथ बठै ना चािहए ”
“हाँ, और खास तौर से जब वह कभी-कभी िमलते ह ”-िबनती ने मसु कराते हए जोड़ िदया
प मी ने मजाक समझ िलया और िबना शरमाये बोली-
“हम लोग को म य थ क ज रत नह , ध यवाद! आओ च दर, यहाँ आओ ” प मी ने च दर
को बुलाया च दर उठकर प मी के पास बठै गया थोड़ी देर तक बात होती रह मालमू
हआ, बट अपने एक दो त के साथ तराई के पास िशकार खेलने गया है आजकल वह िदल
क श ल का एक पाननुमा द ती का टु कड़ा काटकर उसम गोली मारा करता है और जब िकसी
िचिड़या वगरै ह को मारता है तो िशकार को उठाकर देखता है िक गोली दय म लगी है या
नह वा य उसका सुधर रहा है सुधा कोच पर िसर टेके उदास बठै ी थी सहसा प मी ने
िबनती से कहा, “आपको पहली दफे देखा मने आप बात य नह करत ?”
िबनती ने झपकर महँु झकु ा िलया बड़ी िविच लड़क थी हमेशा चुप रहती थी और कभी-
कभी बोलने क लहर आती तो गटु रगँू करके घर गजँु ा देती थी और िजन िदन चुप रहती थी उन
िदन यादातर आँख क िनगाह, कपोल क आशनाई या अधर क मसु कान के ारा बात
करती थी प मी बोली, “आपको फू ल से शौक ह?ै ”
“हाँ, हाँ” िबनती िसर िहलाकर बोली
“च दर, इ ह जाकर गलु ाब िदखा लाओ इधर िफर खबू िखले ह!”
िबनती ने सुधा से कहा, “चलो दीदी ” और च दर के साथ बढ़ गयी
फू ल के बीच म पहँचकर, िबनती ने च दर से कहा, “सुिनए, दीदी को तो जाने या होता जा
रहा है बताइए, ऐसे या होगा?”
“म खुद परे शान हँ, िबनती! लेिकन पता नह कहाँ मन म कौन-सा िव ास है जो कहता है िक
नह , सुधा अपने को सँभालना जानती ह,ै अपने मन को स तिु लत करना जानती है और सुधा
सचमचु ही याग म यादा गौरवमयी हो सकती है ” इसके बाद च दर ने बात टाल दी वह
िबनती से यादा बात करना नह चाहता था, सुधा के बारे म
िबनती ने च दर को मौन देखा तो बोली, “एक बात कह आपसे? मािनएगा!”
“ या?”
“अगर हमसे कभी कोई अनिधकार चे ा हो जाए तो मा कर दीिजएगा, लेिकन आप और दीदी
दोन मझु े इतना चाहते ह िक हम समझ नह पाते िक यवहार को कहाँ सीिमत रखँ!ू ” िबनती
ने िसर झकु ाये एक फू ल को नोचते हए कहा
च दर ने उसक ओर देखा, ण-भर चुप रहा, िफर बोला, “नह िबनती, जब सुधा तु ह इतना
चाहती है तो तमु हमेशा मझु पर उतना ही अिधकार समझना िजतना सुधा पर ”
उधर प मी ने च दर के जाते ही सुधा से कहा, “ या आपक तबीयत खराब ह?ै ”
“नह तो ”
“आज आप बहत पीली नजर आती ह!” प मी ने पछू ा
“हाँ, कु छ मन नह लग रहा था तो म आपके पास चली आयी िक आपसे कु छ किवताएँ सुनँ,ू
अँगरे जी क दोपहर को मने किवता पढऩे क कोिशश क तो तबीयत नह लगी और शाम को
लगा िक अगर किवता नह सुनँगू ी तो िसर फट जाएगा ” सुधा बोली
“आपके मन म कु छ संघष मालमू पड़ता ह,ै या शायद...एक बात पछू ू ँ आपसे?”
“ या, पिू छए?”
“आप बुरा तो नह मानगी?”
“नह , बुरा य मानँगू ी?”
“आप कपरू को यार तो नह करत ? उससे िववाह तो नह करना चाहत ?”
“िछः, िमस प मी, आप कै सी बात कर रही ह उसका मेरे जीवन म कोई ऐसा थान नह
िछः, आपक बात सुनकर शरीर म काँटे उठ आते ह म और च दर से िववाह क ँ गी! इतनी
िघनौनी बात तो मने कभी नह सुनी!”
“माफ क िजएगा, मने य ही पछू ा था या च दर िकसी को यार करता ह?ै ”
“नह , िब कु ल नह !” सुधा ने उतने ही िव ास से कहा िजतने िव ास से उसने अपने बारे म
कहा था
इतने म च दर और िबनती आ गये सुधा बोली अधीरता से, “मेरा एक-एक ण कटना
मिु कल हो रहा ह,ै आप शु क िजए कु छ गाना!”
“कपरू , या सुनोगे?” प मी ने कहा
“अपने मन से सुनाओ! चलो, सुधा ने कहा तो किवता सुनने को िमली!”
प मी ने आलमारी से एक िकताब उठायी और एक किवता गाना शु क -अपनी हेयर िपन
िनकालकर मेज पर रख दी और उसके बाल मचलने लगे च दर के क धे से वह िटककर बठै
गयी और िकताब च दर क गोद म रख दी िबनती मसु करायी तो सुधा ने आँख के इशारे से
मना कर िदया प मी ने गाना शु िकया, लेडी नाटन का एक गीत-
म तु ह यार नह करती हँ न! म तु ह यार नह करती हँ
िफर भी म उदास रहती हँ जब तमु पास नह होते हो!
और म उस चमकदार नीले आकाश से भी ई या करती हँ
िजसके नीचे तमु खड़े होगे और िजसके िसतारे तु ह देख सकते ह...”
च दर ने प मी क ओर देखा सुधा ने अपने ही व म अपना िसर छु पा िलया प मी ने एक
पद समा कर एक गहरी साँस ली और िफर शु िकया-
“म तु ह यार नह करती हँ-िफर भी तु हारी बोलती हई आँख;
िजनक नीिलमा म गहराई, चमक और अिभ यि ह-ै
मेरी िनिनमेष पलक और जागते अधराि के आकाश म नाच जाती ह!
और िकसी क आँख के बारे म ऐसा नह होता...”
सुधा ने िबनती को अपने पास ख च िलया और उसके क धे पर िसर टेककर बठै गयी प मी
गाती गयी-
“न मझु े मालमू है िक म तु ह यार नह करती हँ, लेिकन िफर भी,
कोई शायद मेरे साफ िदल पर िव ास नह करे गा
और अकसर मने देखा ह,ै िक लोग मझु े देखकर मसु करा देते ह
य िक म उधर एकटक देखती हँ, िजधर से तमु आया करते हो!”
गीत का वर बड़े वाभािवक ढंग से उठा, लहराने लगा, काँप उठा और िफर धीरे -धीरे एक क ण
िससकती हई लय म डू ब गया गीत ख म हआ तो सुधा का िसर िबनती के कं धे पर था और
च दर का हाथ प मी के क धे पर च दर थोड़ी देर सुधा क ओर देखता रहा िफर प मी क
एक ह क सुनहरी लट से खेलते हए बोला, “प मी, तमु बहत अ छा गाती हो!”
“अ छा? आ यजनक! कहो च दर, प मी इतनी अ छी है यह तमु ने कभी नह बताया था, हम
िफर कभी सुनाइएगा?”
“हाँ, हाँ िमस शु ला! काश िक बजाय लेडी नाटन के यह गीत आपने िलखा होता!”
सुधा घबरा गयी, “चलो च दर, चल अब! चलो ” उसने च दर का हाथ पकडक़र ख च
िलया-”िमस प मी, अब िफर कभी आएँगे आज मेरा मन ठीक नह है ”
16
च दर ाइव करने लगा िबनती बोली, “हम आगे हवा लगती ह,ै हम पीछे बठै गे ”
कार चली तो सुधा बोली, “अब मन कु छ शा त ह,ै च दर इसके पहले तो मन म कै से तफू ान
आपस म लड़ रहे थे, कु छ समझ म नह आता अब तफू ान बीत गये तफू ान के बाद क
खामोश उदासी है ” सुधा ने गहरी साँस ली, “आज जाने य बदन टू ट रहा है ” बठै े ही बठै े
बदन उमेठते हए कहा
दसू रे िदन च दर गया तो सुधा को बुखार आ गया था अंग-अंग जसै े टू ट रहा हो और आँख म
ऐसी तीखी जलन िक मानो िकसी ने अगं ारे भर िदये ह रात-भर वह बेचनै रही, आधी पागल-
सी रही उसने तिकया, चादर, पानी का िगलास सभी उठाकर फक िदया, िबनती को कभी
बुलाकर पास िबठा लेती, कभी उसे दरू ढके ल देती डॉ टर साहब परे शान, रात-भर सुधा के
पास बठै े, कभी उसका माथा, कभी उसके तलव म बफ मलते रहे डॉ टर घोष ने बताया यह
कल क गरमी का असर है िबनती ने एक बार पछू ा, “च दर को बुलवा द?” तो सुधा ने कहा,
“नह , म मर जाऊँ तो! मेरे जीते जी नह !” िबनती ने ाइवर से कहा, “च दर को बुला लाओ ”
तो सुधा ने िबगडक़र कहा, “ य तमु सब लोग मेरी जान लेने पर तलु े हो?” और उसके बाद
कमजोरी से हाँफने लगी ाइवर च दर को बुलाने नह गया
जब च दर पहँचा तो डॉ टर साहब रात-भर के जागरण के बाद उठकर नहाने-धोने जा रहे थे
“पता नह सुधा को या हो गया कल से! इस व तो कु छ शा त है पर रात-भर बुखार और
बेहद बेचनै ी रही है और एक ही िदन म इतनी िचड़िचड़ी हो गयी है िक बस...” डॉ टर साहब
ने च दर को देखते ही कहा
च दर जब कमरे म पहँचा तो देखा िक सुधा आँख ब द िकये हए लेटी है और िबनती उसके िसर
पर आइस-बगै रखे हए है सुधा का चेहरा पीला पड़ गया है और महँु पर जाने िकतनी ही
रे खाओं क उलझन ह,ै आँख ब द ह और पलक के नीचे से अँगार क आँच छनकर आ रही है
च दर क आहट पाते ही सुधा ने आँख खोल अजब-सी आ नेय िनगाह से च दर क ओर
देखा और िबनती से बोली, “िबनती, इनसे कह दो जाएँ यहाँ से ”
िबनती त ध, च दर नह समझा, पास आकर बठै गया, बोला, “सुधा, य , पड़ गयी न, मने
कहा था िक गरै े ज म मोटर साफ मत करो परस इतना रोयी, िसर पटका, कल धपू खायी
आज पड़ रही! कै सी तबीयत ह?ै ”
सुधा उधर िखसक गयी और अपने कपड़े समेट िलये, जसै े च दर क छाँह से भी बचना चाहती है
और तेज, कड़वी और हाँफती हई आवाज म बोली, “िबनती, इनसे कह दो जाएँ यहाँ से ”
च दर चुप हो गया और एकटक सुधा क ओर देखने लगा और सुधा क बात ने जसै े च दर का
मन मरोड़ िदया िकतनी गै रयत से बात कर रही है सुधा! सुधा, जो उसके अपने यि व से
यादा अपनी थी, आज िकस वर म बोल रही ह!ै “सुधी, या हआ तु ह?” च दर ने बहत आहत
हो बहत दुलार-भरी आवाज म पछू ा
“म कहती हँ जाओगे नह तमु ?” फु फकारकर सुधा बोली, “कौन हो तमु मेरी बीमारी पर
सहानुभिू त कट करने वाले? मेरी कु शल पछू ने वाले? म बीमार हँ, म मर रही हँ, तमु से मतलब?
तमु कौन हो? मेरे भाई हो? मेरे िपता हो? कल अपने िम के यहाँ मेरा अपमान कराने ले गये
थे!” सुधा हाँफने लगी
“अपमान! िकसने तु हारा अपमान िकया, सुधा? प मी ने तो कु छ भी नह कहा? तमु पागल तो
नह हो गय ?” च दर ने सुधा के परै पर हाथ रखते हए कहा
“पागल हो नह गयी तो हो जाऊँ गी!” उसने परै हटा िलये, “तमु , प मी, गेस,ू पापा डॉ टर सब
लोग िमलकर मझु े पागल कर दोगे पापा कहते है याह करो, प मी कहती है मत करो, गेसू
कहती है तमु यार करती हो और तमु ...तमु कु छ भी नह कहते तमु मझु े इस नरक म बरस से
सुलगते देख रहे हो और बजाय इसके िक तमु कु छ कहो, तमु ने मझु े खुद इस भ ी म ढके ल
िदया!...च दर, म पागल हँ, म या क ँ ?” सुधा बड़े कातर वर म बोली च दर चुप था
िसफ िसर झकु ाये, हाथ पर माथा रखे बठै ा था सुधा थोड़ी देर हाँफती रही िफर बोली-
“तु ह या हक था कल प मी के यहाँ ले जाने का? उसने य कल गीत म कहा िक म तु ह
यार करती हँ?” सुधा बोली च दर ने िबनती क ओर देखा-” य िबनती? िबनती से म कु छ
नह िछपाता!” “ य प मी ने कल कहा, म तु ह यार नह करती! मेरा मन मझु े धोखा नह दे
सकता म तमु से िसफ जाने या करती हँ...िफर प मी ने कल ऐसी बात य कही? मेरे रोम-
रोम म जाने कौन-सा वालामखु ी धधक उठता है ऐसी बात सुनकर? तमु य प मी के यहाँ ले
गये?”
“तमु खुद गयी थ , सुधा!” च दर बोला
“तो तमु रोक नह सकते थे! तमु कह देते मत जाओ तो म कभी जा सकती थी? तमु ने य नह
रोका? तमु हाथ पकड़ लेते तमु डाँट देते तमु ने य नह डाँटा? एक ही िदन म म तु हारी
गरै हो गयी? गरै हँ तो िफर य आये हो? जाओ यहाँ से म कहती हँ; जाओ यहाँ से?” दाँत
पीसकर सुधा बोली
“सुधा...”
“म तु हारी बोली नह सुनना चाहती जाते हो िक नह ...” और सुधा ने अपने माथे पर से
उठाकर आइस-बगै फक िदया िबनती च क उठी च दर च क उठा उसने मडु क़र सुधा क
ओर देखा सुधा का चेहरा डरावना लग रहा था उसका मन रो आया वह उठा, ण-भर
सुधा क ओर देखता रहा और धीरे -धीरे कमरे से बाहर चला गया
बरामदे के सोफे पर आकर िसर झकु ाकर बठै गया और सोचने लगा, यह सुधा को या हो गया?
परस शाम को वह इसी सोफे पर सोया था, सुधा बठै ी पंखा झल रही थी कल शाम को वह हँस
रही थी, लगता था तफू ान शा त हो गया पर यह या? अ त ने यह प कै से ले िलया?
और य ले िलया? जब वह अपने मन को शा त रख सकता ह,ै जब वह सभी कु छ हँसते-हँसते
बरदा त कर सकता है तो सुधा य नह कर सकती? उसने आज तक अपनी साँस से सुधा का
िनमाण िकया है सुधा को ितल-ितल बनाया, सजाया, सँवारा है िफर सुधा म यह कमजोरी
य?
या उसने यह रा ता अि तयार करके भलू क ? या सुधा भी एक साधारण-सी लड़क है
िजसके ेम और घणृ ा का तर उतना ही साधारण ह?ै माना उसने अपने दोन के िलए एक ऐसा
रा ता अपनाया है जो िवल ण है लेिकन इससे या! सुधा और वह दोन ही या िवल ण नह
ह? िफर सुधा य िबखर रही ह?ै लड़िकयाँ भावना क ही बनी होती ह? साधना उ ह आती ही
नह या? उसने सुधा का गलत मू यांकन िकया था? या सुधा इस 'तलवार क धार' पर चलने
म असमथ सािबत होगी? यह तो च दर क हार थी
और िफर सुधा ऐसी ही रही तो च दर? सुधा च दर क आ मा ह;ै इसे अब च दर खबू अ छी तरह
पहचान गया तो या अपनी ही आ मा को घ ट डालने क ह या का पाप च दर के िसर पर
ह?ै
तो या याग मा नाम ही ह?ै या पु ष और नारी के स ब ध का एक ही रा ता ह-ै णय,
िववाह और तिृ ! पिव ता, याग और दरू ी या स ब ध को, िव ास को िज दा नह रहने दे
सकते? तो िफर सुधा और प मी म या अ तर ह?ै या सुधा के दय के इतने समीप रहकर,
सुधा के यि व म घुल-िमलकर और आज सुधा को इतने अ तर पर डालकर च दर पाप कर
रहा ह?ै तो या फू ल को तोड़कर अपने ही बटन होल म लगा लेना ही पु य है और दसू रा रा ता
गिहत ह?ै िवनाशकारी ह?ै य उसने सुधा का यि व तोड़ िदया ह?ै
िकसी ने उसके क धे पर हाथ रखा िवचार-शंखृ ला टू ट गयी...िबनती थी “ या सोच रहे ह
आप?” िबनती ने पछू ा, बहत नेह से
“कु छ नह !”
“नह बताइएगा? हम नह जान सकते?” िबनती के वर म ऐसा आ ह, ऐसा अपनापन, ऐसी
िन छलता रहती थी िक च दर अपने को कभी नह रोक पाता था िछपा नह पाता था
“कु छ नह िबनती! तमु कहती हो, सुधा को इतने अ तर पर मने रखा तो म देवता हँ! सुधा
कहती ह,ै मने अ तर पर रखा, मने पाप िकया! जाने या िकया है मने? या मझु े कम तकलीफ
ह?ै मेरा जीवन आजकल िकस तरह घायल हो गया ह,ै म जानता हँ एक पल मझु े आराम नह
िमलता या उतनी सजा काफ नह थी जो सुधा को भी िक मत यह द ड दे रही ह?ै मझु ी को
सभी बचनै ी और दु:ख िमल जाता सुधा को मेरे पाप का द ड य िमल रहा ह?ै िबनती, तमु से
अब कु छ नह िछपा िजसको म अपनी साँस म दुबकाकर इ धनुष के लोक तक ले गया,
आज हवा के झ के उसे बादल क ऊँ चाई से य ढके ल देना चाहते ह? और म कु छ भी नह कर
सकता?” इतनी देर बाद िबनती के ममता-भरे पश म च दर क आँख छलछला आय
“िछः, आप समझदार ह! दीदी ठीक हो जाएँगी! घबराने से काम नह चलेगा न! आपको हमारी
कसम है उदास मत होइए कु छ सोिचए मत दीदी बीमार ह, आप इस तरह से करगे तो कै से
काम चलेगा! उिठए, दीदी बुला रही ह ”
च दर गया सुधा ने इशारे से पास बुलाकर िबठा िलया “च दर, हमारा िदमाग ठीक नह
है बठै जाओ लेिकन कु छ बोलना मत, बठै े रहो ”
उसके बाद िदन भर अजब-सा गजु रा जब-जब च दर ने उठने क कोिशश क , सुधा ने उसे
ख चकर िबठा िलया घर तो उसे जाने ही नह िदया िबनती वह खाना ले आयी सुधा
कभी च दर क ओर देख लेती िफर तिकये म महँु गड़ा लेती बोली एक श द भी नह ,
लेिकन उसक आँख म अजब-सी कातरता थी पापा आये, घंट बठै े रहे; पापा चले गये तो
उसने च दर का हाथ अपने हाथ म ले िलया, करवट बदली और तिकये पर अपने कपोल से
च दर क हथेली दबाकर लेटी रही पलक से िकतने ही गरम-गरम आँसू छलककर गाल पर
िफसलकर च दर क हथेली िभगोते रहे
च दर चुप रहा लेिकन सुधा के आँसू जसै े नस के सहारे उसके दय म उतर गये और जब
दय डू बने लगा तो उसक पलक पर उतर आये सुधा ने देखा लेिकन कु छ भी नह बोली
घंटा-भर बहत गहरी साँस ली; बेहद उदासी से मसु कराकर कहा, “हम दोन पागल हो गये ह,
य च दर? अ छा, अब शाम हो गयी जरा लॉन पर चल ”
सुधा च दर के क धे पर हाथ रखकर खड़ी हो गयी िबनती ने दवा दी, थमामीटर से बुखार
देखा बुखार नह था च दर ने सुधा के िलए कु रसी उठायी सुधा ने हँसकर कहा, “च दर,
आज बीमार हँ तो कु रसी उठा रहे हो, मर जाऊँ गी तो अरथी उठाने भी आना, वरना नरक िमलेगा!
समझे न!”
“िछः, ऐसा कु बोल न बोला करो, दीदी?”
सुधा लॉन म कु रसी पर बठै गयी बगल म नीचे च दर बठै गया सुधा ने च दर का िसर
अपनी कु रसी म िटका िलया और अपनी उँगिलय से च दर के सखू े होठ को छू ते हए कहा,
“च दर, आज मने तु ह बहत दु:खी िकया, य ? लेिकन जाने य , दु:खी न करती तो आज
मझु े वह ताकत न िमलती जो िमल गयी ” और सहसा च दर के िसर को अपनी गोद म ख चती
हई-सी सुधा ने कहा, “आरा य मेरे ! आज तु ह बहत-सी बात बताऊँ गी बहत-सी ”
िबनती उठकर जाने लगी तो सुधा ने कहा, “कहाँ चली? बठै तू यहाँ तू गवाह रहेगी तािक बाद
म च दर यह न कहे िक सुधा कमजोर िनकल गयी ” िबनती बठै गयी सुधा ने ण-भर
आँख ब द कर ल और अपनी वेणी पीठ पर से ख चकर गोद म ढाल ली और बोली, “च दर,
आज िकतने ही साल हए, जबसे मने तु ह जाना ह,ै तब से अ छे-बुरे सभी काम का फै सला
तु ही करते रहे हो आज भी तु ह बताओ च दर िक अगर म अपने को बहत सँभालने क
कोिशश करती हँ और नह सँभाल पाती हँ, तो यह कोई पाप तो नह ? तमु जानते हो च दर, तमु
िजतने मजबतू हो उस पर मझु े घमडं है िक तमु िकतनी ऊँ चाई पर हो, म भी उतना ही मजबतू
बनने क कोिशश करती हँ, उतने ही ऊँ चे उठने क कोिशश करती हँ, अगर कभी-कभी िफसल
जाती हँ तो यह अपराध तो नह ?”
“नह ” च दर बोला
“और अगर अपने उस अ त के ण म तमु पर कठोर हो जाती हँ, तो तमु सह लेते हो म
जानती हँ, तमु मझु े िजतना नेह करते हो, उसम मेरी सभी दुबलताएँ धुल जाती ह लेिकन
आज म तु ह िव ास िदलाती हँ च दर िक मझु े खुद अपनी दुबलताओं पर शरम आती है और
आगे से म वसै ी ही बनँगू ी जसै ा तमु ने सोचा ह,ै च दर ”
च दर कु छ नह बोला िसफ घास पर रखे हए सुधा के पाँव पर अपनी काँपती उँगिलयाँ रख द
सुधा कहती गयी, “च दर, आज से कु छ ही महीने पहले जब गेसू ने मझु से पछू ा था िक तु हारा
िदल कह झकु ा था तो मने इनकार कर िदया था, कल प मी ने पछू ा, तमु च दर को यार करती
हो तो मने इनकार कर िदया था, म आज भी इनकार करती हँ िक मने तु ह यार िकया ह,ै या
तमु ने मझु े यार िकया है म भी समझती हँ और तमु भी समझते हो लेिकन यह न तमु से िछपा है
न मझु से िक तमु ने जो कु छ िदया है वह यार से कह यादा ऊँ चा और यार से कह यादा
महान है ...म याह नह करना चाहती थी, मने परस इनकार कर िदया था, इतनी रोयी थी,
खीझी थी, बाद म मने सोचा िक यह गलत ह,ै यह वाथ है जब पापा मझु े इतना यार करते ह
तो मझु े उनका िदल नह दुखाना चािहए पर मन के अ दर क जो खीझ थी, जो कु ढऩ थी,
वह कह तो उतरती ही वह म अपने पर उतार देना चाहती थी, मन म आता था अपने को
िकतना क दे डालँू इसीिलए अपने गरै े ज म जाकर मोटर सँभाल रही थी, लेिकन वहाँ भी
असफल रही और अ त म वह खीझ अपने मन पर भी न उतारकर उस पर उतारी िजसको मने
अपने से भी बढ़कर माना है वह खीझ उतरी तमु पर!”
च दर ने सुधा क ओर देखा सुधा मसु कराकर बोली, “न, ऐसे मत देखो यह मत समझो िक
अपने आज के यवहार के िलए म तमु से मा मागगँू ी म जानती हँ, माँगने से तमु दु:खी भी
होगे और डाँटने भी लगोगे खरै , आज से म अपना रा ता पहचान गयी हँ म जानती हँ िक
मझु े िकतना सँभलकर चलना है तु हारे सपने को परू ा करने के िलए मझु े अपने को या
बनाना होगा, यह भी म समझ गयी हँ म खुश रहँगी, सबल रहँगी और सश रहँगी और जो
रा ता तमु िदखलाओगे उधर ही चलँगू ी लेिकन एक बात बताओ च दर, मने याह कर िलया
और वहाँ सुखी न रह पायी, िफर और उ ह वह भावना, उपासना न दे पायी और िफर तु ह दु:ख
हआ, तब?”
च दर ने घास का एक ितनका तोडक़र कहा, “देखो सुधा, एक बात बताओ अगर म तु ह कु छ
कह देता हँ और उसे तमु मझु ी को वापस दे देती हो तो कोई बहत ऊँ ची बात नह हई अगर मने
तु ह सचमचु ही नेह या पिव ता जो कु छ भी िदया ह,ै उसे तमु उन सभी के जीवन म ही य
नह ितफिलत कर सकती जो तु हारे जीवन म आते ह, चाहे वह पित ही य न ह तु हारे
मन के अ य नेह-भंडार के उपयोग म इतनी कृ पणता य ? मेरा सपना कु छ और ही ह,ै सुधा
आज तक तु हारी साँस के अमतृ ने ही मझु े यह साम ी दी िक म अपने जीवन म कु छ कर सकँू
और म भी यही चाहता हँ िक म तु ह वह नेह दँू जो कभी घटे ही न िजतना बाँटो उतना बढ़े
और इतना मझु े िव ास है िक तमु यिद नेह क एक बँदू दो तो मनु य या से या हो सकता
है अगर वही नेह रहेगा तो तु हारे पित को कभी कोई अस तोष या हो सकता है और िफर
कै लाश तो इतना अ छा लड़का ह,ै और उसका जीवन इतना ऊँ चा िक तमु उसक िजंदगी म ऐसी
लगोगी, जसै े अँगठू ी म हीरा और जहाँ तक तु हारा अपना सवाल ह,ै म तमु से भीख माँगता हँ
िक अपना सब कु छ खोकर भी अगर मझु े कोई स तोष रहेगा तो यह देखकर िक मेरी सुधा अपने
जीवन म िकतनी ऊँ ची है म तमु से इस िव ास क भीख माँगता हँ ”
“िछः, मझु से बड़े हो, च दर! ऐसी बात नह कहते! लेिकन एक बात है म जानती हँ िक म
च मा हँ, सयू क िकरण से ही िजसम चमक आती है तमु ने जसै े आज तक मझु े सँवारा ह,ै
आगे भी तमु अपनी रोशनी अगर मेरी आ मा म भरते गये तो म अपना भिव य भी नह पहचान
सकँू गी समझे!”
“समझा, पगली कह क !” थोड़ी देर च दर चुप बठै ा रहा िफर सुधा के पाँव से िसर िटकाकर
बोला-”परे शान कर डाला, तीन रोज से सरू त तो देखो कै सी िनकल आयी है और बसै ाखी को
कु ल चार रोज रह गये अब मत िदमाग िबगाड़ना! वे लोग आते ही ह गे!”
“िबनती! दवा ले आ...” िबनती उठकर गयी तो सुधा बोली, “हटो, अब हम घास पर बठै गे!” और
घास पर बठै कर वह बोली, “लेिकन एक बात ह,ै आज से लेकर याह तक तमु हर अवसर पर