देवताओं से माँगा जाता है म अब ेत हो चुका हँ, िबनती!”
30
च दर अब एका त चाहता था और वह च दर को िमल गया था परू ा घर खाली, एक
महरािजन, माली और नौकर और सारे घर म िसफ स नाटा और उस स नाटे का ेत च दर
च दर चाहे िजतना टू ट जाये, चाहे िजतना िबखर जाये, लेिकन च दर हारने वाला नह था
वह हार भी जाये लेिकन हार वीकार करना उसे नह आता था उसके मन म अब स नाटा था,
अपने मन के पजू ागहृ म थािपत सुधा क पावन, ांजल देवमिू त को उसने कठोरता से उठाकर
बाहर फक िदया था मि दर क मिू तमयी पिव ता, िबनती को अपमािनत कर िदया था और
मि दर के पजू ा-उपकरण को, अपने जीवन के आदश और मानदंड को उसने चरू -चरू कर डाला
था, और बुतिशकन िवजेता क तरह ू रता से हँसते हए मि दर के भ नावशेष पर कदम
रखकर चल रहा था उसका मन टू टा हआ खँडहर था िजसके उजाड़, बेछत कमर म चमगादड़
बसेरा करते ह और िजसके वंसावशेष पर िगरिगट पहरा देते ह काश िक कोई उन खँडहर
क ईटं उलटकर देखता तो हर प थर के नीचे पजू ा-म िससकते हए िमलते, हर धलू क पत म
घंिटय क बेहोश विनयाँ िमलत , हर कदम पर मरु झाये हए पजू ा के फू ल िमलते और हर शाम-
सवेरे भ न देवमिू त का क ण दन दीवार पर िसर पटकता हआ िमलता...लेिकन च दर ऐसा-
वसै ा दु मन नह था उसने मि दर को चरू -चरू कर उस पर अपने गव का पहरा लगा िदया था
िक कभी भी कोई उस पर खँडहर के अवशेष कु रे दकर पुराने िव ास, पुरानी अनुभिू तयाँ, पुरानी
पजू ाएँ िफर से न जगा दे बुतिशकन तो मि दर तोडऩे के बाद सारा शहर जला देता ह,ै तािक
शहर वाले िफर उस मि दर को न बना पाएँ-ऐसा था च दर अपने मन को सुनसान कर लेने
के बाद उसने अपनी िजंदगी, अपना रहन-सहन, अपना मकान और अपना वातावरण भी
सुनसान कर िलया था अगहन आ गया था, लेिकन उसके चार ओर जेठ क दुपहरी से भी
भयानक स नाटा था
िबनती जब से गयी उसने कोई खत नह भेजा था सुधा के भी प ब द हो चुके थे प मी के
दो खत आये प मी आजकल िद ली घमू रही थी, लेिकन च दर ने प मी को कोई जवाब नह
िदया अके ला...अके ला...िब कु ल अके ला...सहारा म थल क नीरस भयावनी शाि त और
वह भी जब तक िक काँपता हआ लाल सरू ज बालू के ि ितज पर अपनी आिखरी साँस तोड़ रहा
हो और बालू के टील क अधमरी छायाएँ लहरदार बालू पर धीरे -धीरे रग रही ह
िबनती के याह को प ह िदन रह गये थे िक सुधा का एक प आया...
“मेरे देवता, मेरे नयन, मेरे पंथ, मेरे काश!
आज िकतने िदन बाद तु ह खत िलखने का मौका िमल रहा है सोचा था, िबनती के याह के
महीने-भर पहले गाँव आ जाऊँ गी तो एक िदन के िलए तु ह आकर देख जाऊँ गी लेिकन इरादे
इरादे ह और िजंदगी िजंदगी अब सुधा अपने जेठ और सास के लड़के क गलु ाम है याह के
दसू रे िदन ही चला जाना होगा तु ह यहाँ बुला लेती, लेिकन यहाँ ब धन और परदा तो
ससुराल से भी बदतर है
मने िबनती से तु हारे बारे म बहत पछू ा वह कु छ नह बतायी पापा से इतना मालमू हआ िक
तु हारी थीिसस छपने गयी है क वोके शन नजदीक है तु ह याद ह,ै वायदा था िक तु हारा
गाउन पहनकर म फोटो िखंचवाऊँ गी वह िदन याद करती हँ तो जाने कै सा होने लगता ह!ै
एक क वोके शन क फोटो िखंचवाकर ज र भेजना
या तमु ने िबनती को कोई दु:ख िदया था? िबनती हरदम तु हारी बात पर आँसू भर लाती है
मने तु हारे भरोसे िबनती को वहाँ छोड़ा था म उससे दरू , माँ का सुख उसे िमला नह , िपता मर
गये या तमु उसे इतना भी यार नह दे सकते? मने तु ह बार-बार सहेज िदया था मेरी
त दु ती अब कु छ-कु छ ठीक ह,ै लेिकन जाने कै सी है कभी-कभी िसर म दद होने लगता
है जी िमचलाने लगता है आजकल वह बहत यान रखते ह लेिकन वे मझु को समझ नह
पाये सारे सुख और आजादी के बीच म िकतनी अस तु हँ म िकतनी परे शान हँ लगता
है हजार तफू ान हमेशा नस म घहराया करते ह
च दर, एक बात कहँ अगर बुरा न मानो तो आज शादी के छह महीने बाद भी म यही कहँगी
च दर िक तमु ने अ छा नह िकया मेरी आ मा िसफ तु हारे िलए बनी थी, उसके रे शे म वे त व
ह जो तु हारी ही पजू ा के िलए थे तमु ने मझु े दरू फक िदया, लेिकन इस दरू ी के अँधेरे म भी
ज म-ज मा तर तक भटकती हई िसफ तु ह को ढूँढूँगी, इतना याद रखना और इस बार अगर
तमु िमल गये तो िजंदगी क कोई ताकत, कोई आदश, कोई िस ा त, कोई वंचना मझु े तमु से
अलग नह कर सके गी लेिकन मालमू नह पुनज म सच है या झठू ! अगर झठू है तो सोचो
च दर िक इस अनािदकाल के वाह म िसफ एक बार...िसफ एक बार मने अपनी आ मा का
स य ढूँढ़ पाया था और अब अन तकाल के िलए उसे खो िदया अगर पुनज म नह है तो
बताओ मेरे देवता, या होगा? करोड़ सिृ याँ ह गी, लय ह गे और म अतृ िचनगारी क तरह
असीम आकाश म तड़पती हई अँधेरे क हर परत से टकराती रहँगी, न जाने कब तक के िलए
य - य दरू ी बढ़ती जा रही ह,ै य - य पजू ा क यास बढ़ती जा रही ह!ै काश म िसतार के
फू ल और सरू ज क आरती से तु हारी पजू ा कर पाती! लेिकन जानते हो, मझु े या करना पड़ रहा
ह?ै मेरे छोटे भतीजे नीलू ने पहाड़ी चहू े पाले ह उनके िपंजड़े के अ दर एक पिहया लगा है और
ऊपर घंिटयाँ लगी ह अगर कोई अभागा चहू ा उस च म उलझ जाता है तो य - य छू टने के
िलए वह परै चलाता है य - य च घमू ने लगता ह;ै घंिटयाँ बजने लगती ह नीलू बहत खुश
होता है लेिकन चहू ा थककर बेदम होकर नीचे िगर पड़ता है कु छ ऐसे ही च म फँ स गयी हँ,
च दर! स तोष िसफ इतना है िक घंिटयाँ बजती ह तो शायद तमु उ ह पजू ा के मि दर क घंिटयाँ
समझते होगे लेिकन खरै ! िसफ इतनी ाथना है च दर! िक अब थककर ज दी ही िगर जाऊँ !
मेरे भा य! खत का जवाब ज दी ही देना प मी अभी आयी या नह ?
तु हारी, ज म-ज म क यासी-सुधा ”
च दर ने खत पढ़ा और फौरन िलखा-
“ि य सुधा,
तु हारी प बहत िदन के बाद िमला तु हारी भाषा वहाँ जाकर बहत िनखर गयी है म तो
समझता हँ िक अगर खत कह छु पा िदया जाये तो लोग इसे िकसी रोमांिटक उप यास का अशं
समझ, य िक उप यास के ही पा ऐसे खत िलखते ह, वा तिवक जीवन के नह
खरै , म अ छा हँ हरे क आदमी िजंदगी से समझौता कर लेता है िक तु मने िजंदगी से समपण
कराकर उसके हिथयार रख िलये ह अब िकले के बाहर से आनेवाली आवाज अ छी नह
लगत , न खत के पाने क उ सुकता, न जवाब िलखने का आ ह अगर मझु े अके ला छोड़ दो
तो बहत अ छा होगा म िवनती करता हँ, मझु े खत मत िलखना-आज िवनती करता हँ य िक
आ ा देने का अब साहस भी नह , अिधकार भी नह , यि व भी नह खत तु हारा तु ह
भेज रहा हँ
कभी िजंदगी म कोई ज रत आ पड़े तो ज र याद करना-बस, इसके अलावा कु छ नह
अपने म स तु -च कु मार कपरू ”
उसके बाद िफर वही सुनसान िजंदगी का ढरा खँडहर के स नाटे म भलू कर आयी हई बाँसुरी
क आवाज क तरह सुधा का प , सुधा का यान आया और चला गया खँडहर का स नाटा,
स नाटे के उ ल,ू िगरिगट और प थर काँपे और िफर मु तदै ी से अपनी जगह पर जम गये और
उसके बाद िफर वही उदास स नाटा, टू टता हआ-सा अके लापन और मिू छत दोपहरी के फू ल-सा
च दर...
31
नव बर का एक खुशनुमा िवहान; सोने के काँपते तारे सुबह क ठ डी हवाओं म उलझे हए थे
आकाश एक छोटे ब चे के नीलम नयन क तरह भोला और व छ लग रहा था या रयाँ
शरद के फू ल से भर गयी थ और एक नयी ताजगी मौसम और मन म पुलक उठी थी च दर
अपना पुराना क थई वेटर और पीले रं ग के प मीने का ल बा कोट पहने लॉन पर टहल रहा
था छोटे-छोटे िप ले दबू पर िकलोल कर रहे थे सहसा एक कार आकर क और प मी
उसम से कू द पड़ी और वाँरी िहरणी क तरह दौडक़र च दर के पास पहँच गयी-”हलो माई
वॉय, म आ गयी!”
च दर कु छ नह बोला, “आओ, ाइगं म म बठै ो!” उसने उसी मदु ा-सी आवाज म कहा उसे
प मी के आने क कोई स नता नह थी प मी उसके उदास चेहरे को देखती रही, िफर उसके
क धे पर हाथ रखकर बोली, “ य कपरू , कु छ बीमार हो या?”
“नह तो, आजकल मझु े िमलना-जुलना अ छा नह लगता अके ला घर भी ह!ै ” उसने उसी
फ क आवाज म कहा
“ य , िमस सुधा कहाँ ह?ै और डॉ टर शु ला!”
“वे लोग िमस िबनती क शादी म गये ह ”
“अ छा, उसक शादी भी हो गयी, डमै इट जसै े ये लोग पागल हो गये ह, बट , सुधा,
िबनती!... य , िमलते-जुलते य नह तमु ?”
“य ही, मन नह होता ”
“समझ गयी, जो मझु े तीन-चार साल पहले हआ था, कु छ िनराशा हई है तु ह!” प मी बोली
“नह , ऐसी तो कोई बात नह ”
“कहना मत अपनी जबान से, वीकार कर लेने से पु ष का गव टू ट जाता है ...यही तो तु हारे
च र म मझु े यारा लगता है खरै , यह ठीक हो जाएगा...! म तु ह ऐसे नह रहने दँगू ी ”
“मसरू ी म इतने िदन या करती रह ?” च दर ने पछू ा
“योग-साधन!” प मी ने हँसकर कहा, “जानते हो, आजकल मसरू ी म बफ पड़ रही है मने
कभी बफ के पहाड़ नह देखे थे अँगरे जी उप यास म बफ पड़ने का िज सुना बहत था
सोचा, देखती आऊँ या कपरू ! तमु खत य नह िलखते थे?”
“मन नह होता था अ छा बट क शादी कब होगी?” च दर ने बात टालने के िलए कहा
“हो भी गयी म आ भी नह पायी िक सुनते ह जेनी एक िदन बट को पकड़क़र ख च ले गयी
और पादरी से बोली, 'अभी शादी करा दो ' उसने शादी करा दी लौटकर जेनी ने बट का
िशकारी सटू फाड़ डाला और अ छा-सा सटू पहना िदया बड़े िविच ह दोन एक िदन सद
के व बट वेटर उतारकर जेनी के कमरे म गया तो मारे गु से के जेनी ने िसवा पतलनू के
सारे कपड़े उतारकर बट को कमरे से बाहर िनकाल िदया म तो जब से आयी हँ, रोज नाटक
देखती हँ हाँ, देखो यह तो म भलू ही गयी थी...” और उसने अपनी जेब से पीतल क एक
छोटी-सी मिू त िनकालकर मेज पर रखी-”एक भोिटया औरत इसे बेच रही थी मने इसे माँगा तो
वह बोली-यह िसफ मद के िलए है ' मने पछू ा, ' य ?' तो बोली-'इसे अगर मद पहन ले तो उस
पर िकसी औरत का जादू नह चलता वह औरत या तो मर जाती है या भाग जाती है या उसका
याह िकसी दसू रे से हो जाता है ' तो मने सोचा, तु हारे िलए लेती चलँू ”
च दर ने देखा वह अवलोिकते र क महायानी मिू त थी उसने हँसकर उसे ले िलया िफर
बोला, “और या लायी अपने िलए?”
“अपने िलए एक नया रह य लायी हँ ”
“ या?”
“इधर देखो, मेरी ओर, म सु दर लगती हँ?”
च दर ने देखा प मी अठारह साल क लड़क -सी लगने लगी है चेहरे के कोने भी जसै े
गोल हो गये थे और महँु पर बहत ही भोलापन आ गया था, आँख म वाँरापन आ गया था, चेहरे
पर सोना और के सर, च पा, हरिसंगार घुल-िमल गये थे
“सचमचु प मी, लगता है जसै े कौमाय लौट आया है तमु पर तो! प रय के कंु ज से अपना बचपन
िफर चुरा लायी या?”
“नह कपरू , यही तो रह य लायी हँ, हमेशा सु दर बने रहने का और प रय के कुं ज से नह ,
गनु ाह के कुं ज से मने िहमालय क छाँह म एक नया संगीत सुना कपरू , मांसलता का
संगीत मसरू ी के समाज म घुल-िमल गयी और मादक अनुभिू तयाँ बटोरती रही-िबना िकसी
प ा ाप के और मने देखा िक िदन -िदन िनखरती जा रही हँ कपरू , से स इतना बुरा नह
िजतना म समझती थी तु हारी या राय ह?ै ”
“हाँ, म देख रहा हँ, से स लोग को उतना बुरा नह लगता, िजतना म समझता था ”
“नह च दर, िसफ इतना ही नह , अ छा मान लो जसै े तमु आजकल उदास हो और तु हारा िसर
इस तरह अपनी गोद म रख लँू तो कु छ स तोष नह होगा तु ह?” और प मी ने च दर का िसर
सचमचु अपने ासा दोिलत व से िचपका िलया च दर झ लाकर अलग हट गया कै सी
अजब लड़क ह!ै थोड़ी देर चुप बठै ा रहा, िफर बोला-
“ य प मी, तमु एक लड़क हो, म तु ह से पछू ता हँ- या लड़िकय के ेम म से स अिनवाय
ह?ै ”
“हाँ ” प मी ने प वर म जोर देकर कहा
“लेिकन प मी, म तमु से नाम तो नह बताऊँ गा लेिकन एक लड़क है िजसको मने यार िकया
है लेिकन शायद वह मझु से शादी नह कर पाएगी मेरे उसके कोई शारी रक स ब ध भी नह
ह या तमु इसे यार नह कहोगी?”
“कु छ िदन बाद जब उसक शादी हो जाये तब पछू ना, तु हारा सारा ेम मर जाएगा पहले म भी
तमु से कहती थी-पु ष और नारी के स ब ध म एक अ तर ज री है अब लगता है यह सब
एक भुलावा है ” अपने से प मी ने कहा
“लेिकन दसू री बात तो सुनो, उसी क एक सखी है वह जानती है िक म उसक सखी को
यार करता हँ, उसे नह कर सकता कह से स क तिृ का सवाल नह िफर भी वह मझु े
यार करती है इसे तमु या कहोगी?” च दर ने पछू ा
“यह और दसू रे ढंग क प रि थित है देखो कपरू , तमु ने िह नोिट म के बारे म नह पढ़ा
ऐसा होता है िक अगर कोई िह नोिट ट एक लड़क को िह नोटाइज कर रहा है और बगल म एक
दसू री लड़क बठै ी है जो चुपचाप यह देख रही है तो वातावरण के भाव से अकसर ऐसा देखा
जाता है िक वह भी िह नोटाइज हो जाती ह,ै लेिकन वह एक िणक मानिसक मू छा होती है जो
टू ट जाती है ” प मी ने कहा
च दर को लगा जसै े बहत कु छ सुलझ गया एक ण म उसके मन का बहत-सा भार उतर
गया
“प मी, मझु े तु ह एक लड़क िमली जो साफ बात करती हो और एक शु तक और बुि के
धरातल से बस, म आजकल बुि का उपासक हँ, भगवान से िचढ़ है ”
“बुि और शरीर बस यही दो आदमी के मलू त व ह दय तो दोन के अ त:संघष क उलझन
का नाम है ” प मी ने कहा और सहसा घड़ी देखते हए बोली, “नौ बज रहे ह, चलो साढ़े नौ से
मिै टनी है आओ, देख आएँ!”
“मझु े कॉलेज जाना ह,ै म जाऊँ गा नह कह !”
“आज इतवार ह,ै ोफे सर कपरू ?” प मी च दर को उठाकर बोली, “म तु ह उदास नह होने दँगू ी,
मेरे मीठे सपने! तमु ने भी मझु े इस उदासी के इ जाल से छु ड़ाया था, याद है न?” और च दर के
माथे पर अपने गरम मलु ायम होठ रख िदये
माथे पर प मी के होठ क गलु ाबी आग च दर क नस को गदु गदु ा गयी वह ण-भर के
िलए अपने को भलू गया...प मी के रे शमी ॉक के गदु गदु ाते हए पश, उसके व क अल य
गरमाई और उसके पश के जादू म खो गया उसके अगं -अगं म सुबह क शबनम ढलकने
लगी प मी उसके बाल को अँगिु लय से सुलझाती रही िफर कपरू के गाल थपथपाकर बोली,
“चलो!” कपरू जाकर बठै गया “तमु ाइव करो ” प मी बोली च दर ाइव करने लगा
और प मी कभी उसके कॉलर, कभी उसके बाल, कभी उसके होठ से खेलती रही
सात चाँद क रानी ने आिखर अपनी िनगाह के जादू से स नाटे के ेत को जीत िलया पश
के सुकु मार रे शमी तार ने नगर क आग को शबनम से स च िदया ऊबड़-खाबड़ खंडहर को
अंग के गलु ाब क पाँखु रय से ढँक िदया और पीड़ा के अँिधयारे को सीिपया पलक से झरने
वाली दिू धया चाँदनी से धो िदया एक संगीत क लय थी िजसम वग देवता खो गया,
संगीत क लय थी या उ ाम यौवन का भरा हआ वार था जो च दर को एक मासमू फू ल क
तरह बहा ले गया...जहाँ पजू ा-दीप बुझ गया था, वहाँ त णाई क साँस क इ धनुषी समाँ
िझलिमला उठी थी, जहाँ फू ल मरु झाकर धलू म िमल गये थे वहाँ पुखराजी पश के सुकु मार
हरिसंगार झर पड़े....आकाश के चाँद के िलए िजंदगी के आँगन म मचलता हआ क हयै ा, थाली
के ितिब ब म ही भलू गया...
च दर क शाम प मी के अद य प क छाँह म मु करा उठ ठीक चार बजे प मी आती, कार
पर च दर को ले जाती और च दर आठ बजे लौटता यार के िबना िकतने महीने कट गये,
प मी के िबना एक शाम नह बीत पाती, लेिकन अब भी च दर ने अपने को इतना दरू रखा था
िक कभी प मी के होठ के गलु ाब ने च दर के होठ के मगँू े से बात भी नह क थ
32
एक िदन रात को जब वह लौटा तो देखा िक अपनी कार आ गयी है उसका मन फू ल उठा
जसै े कोई अनाथ भटका हआ ब चा अपने संर क क गोद के िलए तड़प उठता ह,ै वसै े ही वह
िपछले डेढ़ महीने से डॉ टर साहब के िलए तरस गया था जहाँ इस व उसके जीवन म िसफ
नशा और नीरसता थी, वह दय के एक कोने म िसफ एक सुकु मार भावना शेष रह गयी थी,
वह थी डॉ टर शु ला के ित वह भावना कृ त ता क भावना नह थी, डॉ टर शु ला इतने
दरू नह थे िक अब वह उनके ित कृ त हो, इतने बड़े हो जाने पर भी वह जब कभी डॉ टर को
देखता था तो लगता था जसै े कोई न हा ब चा अपने अिभभावक क गोद म आकर िनि त हो
जाता हो
उसने पास आकर देखा, डॉ टर साहब बरामदे म टहल रहे थे च दर दौडक़र उनके पाँव पर
िगर पड़ा डॉ टर साहब ने उसे उठाकर गले से लगा िलया और बड़े यार से उसक पीठ पर
हाथ फे रते हए बोले-”क वोके शन हो गया? िड ी जीत लाये?”
“जी हाँ!” बड़ी िवन ता से च दर ने कहा
“बहत ठीक, अब डी. िलट् . क तयै ारी करो तु ह ज दी ही स ल गवनमट म जाना है ”
डॉ टर साहब बोले, “म तो पं ह जनवरी को िद ली जा रहा हँ कम-से-कम साल भर के
िलए?”
“इतनी ज दी; ऑफर कब आया?” च दर ने अचरज से पछू ा
“म उन िदन िद ली गया था न, तभी एजुके शन िमिन टर से बात हई थी!” डॉ टर साहब ने
च दर को देखते हए कहा, “अरे , तमु कु छ दुबले हो रहे हो! य महरािजन ने ठीक से काम नह
िकया?”
“नह !” च दर हँसकर बोला, “िबनती क शादी ठीक-ठाक हो गयी?”
“िबनती क शादी!” डॉ टर साहब ने िसर झकु ाये हए, टहलते हए एक बड़ी फ क हँसी हँसकर
कहा, “िबनती और तु हारी बुआजी दोन अ दर ह ”
“अ दर ह!” च दर को यह रह य कु छ समझ म ही नह आता था “इतनी ज दी िबनती लौट
आयी?”
“िबनती गयी ही कहाँ?” डॉ टर साहब ने बहत चुपचाप िसर झकु ा कर कहा और बहत क ण
उदासी उनके महँु पर छा गयी वह बेचनै ी से बरामदे म टहलने लगे च दर का साहस नह
हआ कु छ पछू ने का कु छ अमगं ल अव य हआ है
वह अ दर गया बुआजी अपनी कोठरी म सामान रख रही थ और िबनती बठै ी िसल पर उरद
क भीगी दाल पीस रही थी! िबनती ने च दर को देखा, दाल म सने हए हाथ जोड़कर णाम
िकया, िसर को आँचल से ढँककर चुपचाप दाल पीसने लगी, कु छ बोली नह च दर ने णाम
िकया और जाकर बुआ के परै छू िलये
“अरे च दर ह,ै आओ बेटवा, हम तो लुट गये!” और बुआ वह देहरी पर िसर थामकर बठै गय
“ या हआ, बुआजी?”
“होता का भइया! जौन बदा रहा भाग म ओ ही भवा ” और बुआ अपनी धोती से आँसू प छकर
बोल , “ई ं हमरी छाती पर मगँू दरै के िलए बदी रही तौन जमी है भगवान कौन को ऐसी
कलंिकनी िबिटया न दे तीन भाँवरी के बाद बारात उठ गयी, भइया! हमारा तो कु ल डू ब
गया ” और बुआजी ने उ च वर म दन शु िकया िबनती ने चुपचाप हाथ धोये और
उठकर छत पर चली गयी
“चुप रहो हो अब रोय-रोय के काहे िजउ ह कान करत हउ गनु व ती िबिटया बाय, ह जारन
आय के िबिटया के िलए गोड़े िग रह अपना एका त होई के बठै ो!” महरािजन ने पड़ू ी उतारते
हए कहा
“आिखर बात या हई, महरािजन?” च दर ने पछू ा
महरािजन ने जो बताया उससे पता लगा िक लड़के वाले बहत ही संक णमना और वाथ थे
पहले मालमू हआ िक लड़काउ ह ने ेजुएट बताया था वह था इटं र फे ल िफर दरवाजे पर
झगड़ा िकया उ ह ने डॉ टर साहब बहत िबगड़ गये, अ त म मड़वे म लोग ने देखा िक लड़के
के बाय हाथ क अँगिु लयाँ गायब ह डॉ टर साहब इस बात पर िबगड़े और उ ह ने मड़वे से
िबनती को उठवा िदया िफर बहत लड़ाई हई लाठी तक चलने क नौबत आ गयी जसै े-तसै े
झगड़ा िनपटा तीन भाँवर के बाद याह टू ट गया
“अब बताओ, भइया!” सहसा बुआ आँसू प छकर गरज उठ -”ई इ ह का हइ गवा रहा, इनक मित
मारी गयी गु से म आय के िबनती को उठवाय िलिहन अब हम ए ी बड़ी िबिटया लै के कहाँ
जाई?ं अब हमरी िबरादरी म कौन पछू ी एका? ए ा पढ़-िलख के इ ह का सझू ा? अरे लड़क वाले
हमेशा दब के चलै चाह ”
“अरे तो या आँख ब द कर लेते? लँगड़े-ललू े लड़के से कै से याह कर देते, बुआ! तमु भी गजब
करती हो!” च दर बोला
“भइया, जेके भाग म लँगड़ा-ललू ा बदा होई ओका ओही िमली लड़िकयन को िनबाह करै चाही
िक सकल देखै चाही अबिहन याह के बाद कौन के हाथ-गोड़ टू ट जाये तो औरत अपने
आदमी को छोड़ के गली-गली क हाँड़ी चाट?ै हम रहे तो जब िबनती तीन बरस क हई गयी, तब
उनक सकल उजेले म देखा रहा जसै ा भाग म रहा तसै ा होता!”
च दर ने िविच दय-हीन तक को सुना और आ य से बुआ क ओर देखने लगा ....बुआजी
बकती जा रही थ -
“अब कहते ह िक िबनती को पढ़उब!ै याह न करब!ै रही-सही इ जत भी बेच रहे ह हमार तो
िक मत फू ट गयी...” और वे िफर रोने लग , “पदै ा होते काहे नह मर गयी
कु लबोरनी...कु ल छनी...अभािगन!”
सहसा िबनती छत से उतरी और आँगन म आकर खड़ी हो गयी, उसक आँख म आग भरी
थी-”बस करो, माँजी!” वह चीखकर बोली, “बहत सुन िलया मने अब और बदा त नह
होता तु हारे कोसने से अब तक नह मरी, न म ँ गी अब म सुनँगू ी नह , म साफ कह देती
हँ तु ह मेरी श ल अ छी नह लगती तो जाओ तीरथ-या ा म अपना परलोक सुधारो! भगवान
का भजन करो समझी िक नह !”
च दर ने ता जुब से िबनती क ओर देखा वह वही िबनती है जो माँजी क जरा-जरा-सी बात
से िलपटकर रोया करती थी िबनती का चेहरा तमतमाया हआ था और गु से से बदन काँप रहा
था बुआ उछलकर खड़ी हो गय और दुगनु ी चीखकर बोल , “अब बहत जबान चलै लगी है
कौन है तोर जे के बल पर ई चमक िदखावत ह?ै हम काट के धर देब,ै तोके बताय देइत हई
महँु झ सी! ऐसी न होती तो काहे ई िदन देखै पड़त उ ह तो खाय गयी, हमहँ का खाय लेव!”
अपना महँु पीटकर बुआ बोल
“तमु इतनी मीठी नह हो माँजी िक तु ह खा लँ!ू ” िबनती ने और तड़पकर जवाब िदया
च दर त ध हो गया यह िबनती पागल हो गयी है अपनी माँ को या कह रही ह!ै
“िछः, िबनती! पागल हो गयी हो या? चलो उधर!” च दर ने डाँटकर कहा
“चुप रहो, च दर! हम भी आदमी ह, हमने िजतना बदा त िकया ह,ै हम जानते ह हम य
बदा त कर! और तमु से या मतलब? तमु कौन होते हो हमारे बीच म बोलने वाले?”
“ या है यह सब? तमु लोग सब पागल हो गये हो या? िबनती, यह या हो रहा ह?ै ” सहसा
डॉ टर साहब ने आकर कहा
िबनती दौडक़र डॉ टर साहब से िलपट गयी और रोकर बोली, “मामाजी, मझु े दीदी के पास भेज
दीिजए! म यहाँ नह रहँगी ”
“अ छा बेटी! अ छा! जाओ च दर!” डॉ टर साहब ने कहा िबनती चली गयी तो बुआ जी से
बोले, “तु हारा िदमाग खराब हो गया है उस पर गु सा उतारने से या फायदा? हमारे सामने
ये सब बात करोगी तो ठीक नह होगा ”
“अरे हम काहे बोलब!ै हम तो मर जाई ं तो अ छा ह.ै ..” बुआजी पर जसै े देवी माँ आ गयी ह इस
तरह से झमू -झमू कर रो रही थ ...”हम तो वृ दावन जाय के डू ब मर ! अब हम तमु लोगन क
सकल न देखबै हम मर जाई ं तो चाहे िबनती को पढ़ायो चाहे नचायो-गवायो हम अपनी
आँख से न देखबै ”
उस रात को िकसी ने खाना नह खाया एक िविच -सा िवषाद सारे घर पर छाया हआ था
जाड़े क रात का गहन अँधेरा खामोश छाया हआ था, महज एक अमगं ल छाया क तरह कभी-
कभी बुआजी का दन अँधेरे को झकझोर जाता था
सभी चुपचाप भखू े सो गये...
33
दसू रे िदन िबनती उठी और महरािजन के आने के पहले ही उसने चू हा जलाकर चाय चढ़ा दी
थोड़ी देर म चाय बनाकर और टो ट भनू कर वह डॉ टर साहब के सामने रख आयी डॉ टर
साहब कल क बात से बहत ही यिथत थे रात को भी उ ह ने खाना नह खाया था, इस व
भी उ ह ने मना कर िदया िबनती च दर के कमरे म गयी, “च दर, मामाजी ने कल रात को
भी कु छ नह खाया, तमु ने भी नह खाया, चलो चाय पी लो!”
च दर ने भी मना िकया तो िबनती बोली, “तमु पी लोगे तो मामाजी भी शायद पी ल ” च दर
चुपचाप गया िबनती थोड़ी देर म गयी तो देखा दोन चाय पी रहे ह वह आकर मेवा
िनकालने लगी
चाय पीते-पीते डॉ टर साहब ने कहा, “च दर, यह पास-बुक लो पाँच सौ िनकाल लो और दो
हजार का िहसाब अलग करवा दो ...अ छा देखो, म तो चला जाऊँ गा िद ली, िबनती को
शाहजहाँपुर भेजना ठीक नह है वहाँ चार र तेदार ह, बीस तरह क बात ह गी लेिकन म
चाहता हँ अब आगे जब तक यह चाहे, पढ़े! अगर कहो तो यहाँ छोड़ जाऊँ , तमु पढ़ाते रहना!”
िबनती आ गयी और त तरी म भुना मेवा रखकर उसम नमक िमला रही थी च दर ने एक
लाइस उठायी और उस पर नमक लगाते हए बोला, “वसै े आप यहाँ छोड़ जाएँ तो कोई बात नह
ह,ै लेिकन अके ले घर म अ छा नह लगता दो-एक रोज क बात दसू री होती है एकदम से
साल-भर के िलए...आप समझ ल ”
“हाँ बेटा, कहते तो तमु ठीक हो! अ छा, कॉलेज के हो टल म अगर रख िदया जाए!” डॉ टर
साहब ने पछू ा
“म लड़िकय को हो टल म रखना ठीक नह समझता हँ ” च दर बोला, “घर के वातावरण
और वहाँ के वातावरण म बहत अ तर होता है ”
“हाँ, यह भी ठीक है अ छा तो इस साल म इसे िद ली िलये जा रहा हॅ ँ अगले साल देखा
जाएगा...च दर, इस महीने-भर म मेरा सारा िव ास िहल गया सुधा का िववाह िकतनी अ छी
जगह िकया गया, मगर सुधा पीली पड़ गयी है िकतना दु:ख हआ देखकर! और िबनती के
साथ यह हआ! सचमचु यह जाित, िववाह सभी पर पराएँ बहत ही बुरी ह बुरी तरह सड़ गयी
ह उ ह तो काट फकना चािहए मेरा तो वसै े इस अनुभव के बाद सारा आदश ही बदल
गया ”
च दर बहत अचरज से डॉ टर साहब क ओर देखने लगा यही जगह थी, इसी तरह बठै कर
डॉ टर साहब ने जाित-िबरादरी, िववाह आिद सामािजक पर पराओं क िकतनी शंसा क थी!
िजंदगी क लहर ने हर एक को दस महीने म कहाँ से कहाँ लाकर पटक िदया है डॉ टर
साहब कहते गये...”हम लोग िजंदगी से दरू रहकर सोचते ह िक हमारी सामािजक सं थाएँ वग
ह, यह तो जब उनम धँसो तब उनक गदं गी मालमू होती है च दर, तमु कोई गरै जात का
अ छा-सा लड़काढूँढ़ो म िबनती क शादी दसू री िबरादरी म कर दँगू ा ”
िबनती, जो और चाय ला रही थी, फौरन बड़े ढ़ वर म बोली, “मामाजी, आप जहर दे दीिजए
लेिकन म शादी नह क ँ गी या आपको मेरी ढ़ता पर िव ास नह ?”
“ य नह , बेटी! अ छा, जब तक तेरी इ छा हो, पढ़!”
दसू रे िदन डॉ टर साहब ने बुआजी को बुलाया और पये दे िदये
“लो, यह पाँच सौ पहले खच के ह और दो हजार म से तु ह धीरे -धीरे िमलता रहेगा ”
दो-तीन िदन के अ दर बुआ ने जाने क सारी तयै ारी कर ली, लेिकन तीन िदन तक बराबर
रोती रह उनके आँसू थमे नह िबनती चुप थी वह भी कु छ नह बोली, चौथे िदन जब वह
सामान मोटर पर रखवा चुक तो उ ह ने च दर से िबनती को बुलवाया िबनती आयी तो
उ ह ने उसे गले से लगा िलया-और बेहद रोय लेिकन डॉ टर साहब को देखते ही िफर बोल
उठ -”हमरी लड़क का िदमाग तमु ही िबगाड़े हो दुिनया म भाइयौ अपना नै होत अपनी
लड़क को िबया िदयौ! हमरी लड़क ...” िफर िबनती को िचपटाकर रोने लग
च दर चुपचाप खड़ा सोच रहा था, अभी तक िबनती खराब थी अब डॉ टर साहब खराब हो
गये बुआ ने पये सँभालकर रख िलये और मोटर पर बठै गय सम त लांछन के बावजदू
डॉ टर साहब उ ह पहँचाने टेशन तक गये
िबनती बहत ही चुप-सी हो गयी थी वह िकसी से कु छ नह बोलती और चुपचाप काम िकया
करती थी जब काम से फु रसत पा लेती तो सुधा के कमरे म जाकर लेट जाती और जाने या
सोचा करती च दर को बड़ा ता जुब होता था िबनती को देखकर जब िबनती खुश थी,
बोलती-चालती थी तो च दर िबनती से िचढ़ गया था, लेिकन िबनती के जीवन का यह नया प
देखकर पहले क सभी बात भलू गया और उससे िफर बात करने क कोिशश करने लगा
लेिकन िबनती यादा बोलती ही नह
एक िदन दोपहर को च दर यिू नविसटी से लौटकर आया और उसने रे िडयो खोल िदया िबनती
एक त तरी म अम द काटकर ले आयी और रखकर जाने लगी “सुनो िबनती, या तमु ने
मझु े माफ नह िकया? म िकतना यिथत हँ, िबनती! अगर तमु को भलू से कु छ कह िदया तो तमु
उसका इतना बुरा मान गय िक दो-तीन महीने बाद भी नह भलू !”
“नह , बुरा मानने क या बात ह,ै च दर!” िबनती एक फ क हँसी-हँसकर बोली, “आिखर
नारी का भी एक वािभमान ह,ै मझु े माँ बचपन से कु चलती रही, मने तु ह दीदी से बढक़र
माना तमु भी ठोकर लगाने से बाज नह आये, िफर भी म सब सहती गयी उस िदन जब
मडं प के नीचे मामाजी ने जबरद ती हाथ पकड़कर खड़ा कर िदया तो मझु े उसी ण लगा िक
मझु म भी कु छ स व ह,ै म इसीिलए नह बनी हँ िक दुिनया मझु े कु चलती ही रहे अब म िवरोध
करना, िव ोह करना भी सीख गयी हँ िजंदगी म नेह क जगह ह,ै लेिकन वािभमान भी
कोई चीज है और तु ह अपनी िजंदगी म िकसी क ज रत भी तो नह ह!ै ” कहकर िबनती
धीरे -धीरे चली गयी
अपमान से च दर का चेहरा काला पड़ गया उसने रे िडयो ब द कर िदया और त तरी उठाकर
नीचे रख दी और िबना कपड़े बदले प मी के यहाँ चल िदया
मनु य का एक वभाव होता है जब वह दसू रे पर दया करता है तो वह चाहता है िक याचक
परू ी तरह िवन होकर उसे वीकार करे अगर याचक दान लेने म कह भी वािभमान
िदखलाता है तो आदमी अपनी दानविृ और दयाभाव भलू कर नशृ ंसता से उसके वािभमान को
कु चलने म य त हो जाता है आज ह त के बाद च दर के मन म िबनती के िलए कु छ नेह,
कु छ दया जागी थी, िबनती को उदास मौन देखकर; लेिकन िबनती के इस वािभमान-भरे उ र
ने िफर उसके मन का सोया हआ साँप जगा िदया था वह इस वािभमान को तोड़कर रहेगा,
उसने सोचा
34
प मी के यहाँ पहँचा तो अभी धपू थी जेनी कह गयी थी, बट अपने तोते को कु छ िखला रहा
था कपरू को देखते ही हँसकर अिभवादन िकया और बोला, “प मी अ दर ह!ै ” वह सीधा
अ दर चला गया प मी अपने शयन-क म बठै ी हई थी कमरे म ल बी-ल बी िखड़िकयाँ थ
िजनम लकड़ी के चौखट म रं ग-िबरं गे शीशे लगे हए थे िखड़िकयाँ ब द थ और सरू ज क
िकरण इन शीश पर पड़ रही थ और प मी पर सात रं ग क छायाएँ खेल रही थ वह झकु हई
सोफे पर अधलेटी कोई िकताब पढ़ रही थी च दर ने पीछे से जाकर उसक आँख ब द कर ल
और बगल म बठै गया
“कपरू !” अपनी सुकु मार अँगिु लय से च दर के हाथ को आँख पर से हटाते हए प मी बोली और
पलक म बेहद नशा भरकर सोनजुही क मु कान िबखेरकर च दर को देखने लगी च दर ने
देखा, वह ाउिनंग क किवता पढ़ रही थी वह पास बठै गया
प मी ने उसे अपने व पर ख च िलया और उसके बाल से खेलने लगी च दर थोड़ी देर चुप
लेटा रहा, िफर प मी के गलु ाबी होठ पर अँगिु लयाँ रखकर बोला, “प मी, तु हारे व पर िसर
रखकर म जाने य सबकु छ भलू जाता हँ? प मी, दुिनया वासना से इतना घबराती य ह?ै म
ईमानदारी से कहता हँ िक अगर िकसी को वासनाहीन यार करके , िकसी के िलए याग करके
मझु े िजतनी शाि त िमलती ह,ै पता नह य मांसलता म भी उतनी ही शाि त िमलती है ऐसा
लगता है िक शरीर के िवकार अगर आ याि मक ेम म जाकर शा त हो जाते ह तो लगता है
आ याि मक ेम म यासे रह जाने वाले अभाव िफर िकसी के मांसल-ब धन म ही आकर बुझ
पाते ह िकतना सुख है तु हारी ममता म!”
“शी!” च दर के होठ को अपनी अँगिु लय से दबाती हई प मी बोली, “चरम शाि त के ण को
अनुभव िकया करो बोलते य हो?”
च दर चुप हो गया चुपचाप लेट रहा
प मी क के सर ास उसके माथे को रह-रहकर चमू रही थ और च दर के गाल को प मी के
व म धड़कता हआ संगीत गदु गदु ा रहा था च दर का एक हाथ प मी के गले म पड़ी
इमीटेशन हीरे क माला से खेलने लगा सारस के पंख से भी यादा मलु ायम सुकु मार गरदन
से छू टने पर अँगिु लयाँ लाजव ती क पि य क तरह सकु चा जाती थ माला खोल ली और
उसे उतारकर अपने हाथ म ले िलया प मी ने माला लेने के िलए हाथ बढ़ाया ही था िक गले के
बटन टच-से टू ट गये...बफानी चाँदनी उफनकर छलक पड़ी च दर को लगा उसके गाल के
नीचे िबजिलय के फू ल िसहर उठे ह और एक मदमाता नशा टू टते हए िसतार क तरह उसके
शरीर को चीरता हआ िनकल गया वह काँप उठा, सचमचु काँप उठा नशे म चरू वह उठकर
बठै गया और उसने प मी को अपनी गोद म डाल िलया प मी अनंग के धनुष क यंचा क
तरह दोहरी होकर उसक गोद म पड़ रही त णाई का चाँद टू टकर दो टु कड़े हो गया था और
वासना के तफू ान ने झीने बादल भी हटा िदये थे जहरीली चाँदनी ने नािगन बनकर च दर
को लपेट िलया च दर ने पागल होकर प मी को अपनी बाँह म कस िलया, इतनी यास से
लगा िक प मी का दीपिशखा-सा तन च दर के तन म समा जाएगा प मी िन े आँख ब द
िकये थी लेिकन उसके गाल पर जाने या िखल उठा था! च दर के गले म उसने मणृ ाल-सी
बाँह डाल दी थ च दर ने प मी के होठ को जसै े अपने ह ठ म समेट लेना चाहा...इतनी
आग...इतनी आग...नशा...
“ठाँय!” सहसा बाहर ब दकू क आवाज हई च दर च क उठा उसने अपने बाहपाश ढीले
कर िदये लेिकन प मी उसके गले म बाँह डाले बेहोश पड़ी थी च दर ने ण-भर प मी के
भरपरू प यौवन को आँख से पी लेना चाहा प मी ने अपनी बाँह हटा ल और नशे म
मखमरू -सी च दर क गोद से एक ओर लुढ़क गयी उसे अपने तन-बदन का होश नह था
च दर ने उसके व ठीक िकये और िफर झकु कर उसक नशे म चरू पलक चमू ल
“ठाँय!” ब दकू क दसू री आवाज हई च दर घबराकर उठा
“यह या ह,ै प मी?”
“होगा कु छ, जाओ मत ” अलसायी हई नशीली आवाज म प मी ने कहा और उसे िफर ख चकर
िबठा िलया और िफर बाँह म उसे समेटकर उसका माथा चमू िलया
“ठाँय!” िफर तीसरी आवाज हई
च दर उठ खड़ा हआ और ज दी से बाहर दौड़ गया देखा बट क ब दकू बरामदे म पड़ी ह,ै
और वह िपंजड़े के पास मरे हए तोते का पंख पकडक़र उठाये हए है उसके घाव से बट के
पतलनू पर खनू चू रहा था च दर को देखते ही बट हँस पड़ा, “देखा! तीन गोली म इसे
िब कु ल मार डाला, वह तो कहो िसफ एक ही लगी वरना...” और पंख पकड़कर तोते क लाश
को झलु ाने लगा
“िछः! फको उसे; ह यारे कह के ! मार य डाला उसे?” च दर ने कहा
“तमु से मतलब! तमु कौन होते हो पछू ने वाले? म यार करता था उसे, मने मार डाला!” बट
बोला और आिह ते से उसे एक प थर पर रख िदया माल िनकालकर फाड़ डाला आधा
माल उसके नीचे िबछा िदया और आधे से उसका खनू प छने लगा िफर च दर के पास
आया च दर के क धे पर हाथ रखकर बोला, “कपरू ! तमु मेरे दो त हो न! जरा माल दे
दो ” और च दर का माल लेकर तोते के पास खड़ा हो गया बड़ी हसरत से उसक ओर
देखता रहा िफर झकु कर उसे चमू िलया और उस पर माल ओढ़ा िदया और बड़े मातम क
मु ा म उसी के पास िसर झकु ाकर बठै गया
“बट , बट , पागल हो गये या?” च दर ने उसका क धा पकड़ाकर िहलाते हए कहा, “यह या
नाटक हो रहा ह?ै ”
बट ने आँख खोल और च दर को भी हाथ पकडक़र वह िबठा िलया और बोला, “देखो कपरू ,
एक िदन तमु आये थे तो मने तोता और जेनी दोन को िदखाकर कहा था िक जेनी से म नफरत
करता हँ, उससे शादी कर लँगू ा और तोते से म यार करता हँ, इसे मार डालँगू ा कहा था िक
नह ? कहो हाँ ”
“हाँ, कहा था ” च दर बोला, “लेिकन य कहा था?”
“हाँ, अब पछू ा तमु ने! तमु पछू ोगे 'मने य मार डाला' तो म कहँगा िक इसे अब मर जाना चािहए
था, इसिलए इसे मार डाला तमु पछू ोगे, 'इसे य मर जाना चािहए?' तो म कहँगा, 'जब कोई
जीवन क पणू ता पर पहँचा जाता है तो उसे मर जाना चािहए अगर वह अपनी िजंदगी का
ल य परू ा कर चुका है और नह मरता तो यह उसका अ याय है वह अपनी िजंदगी का ल य
परू ा कर चुका था, िफर भी नह मरता था म इसे यार करता था लेिकन यह अ याय नह सह
सकता था, अत: मने इसे मार डाला!”
“अ छा, तो तु हारे तोते क भी िजंदगी का कोई ल य था?”
“हरे क क िजदगी का ल य होता है और वह ल य होता है स य को, चरम स य को जान
जाना वह स य जान लेने के बाद आदमी अगर िज दा रहता ह,ै तो उसक यह असीम बेहयाई
है मने इसे वह स य िसखा िदया िफर भी यह नह मरा तो मने मार डाला िफर तमु पछू ोगे
िक वह चरम स य या ह?ै वह स य है िक मौत आदमी के शरीर क ह या करती है और
आदमी क ह या गला घ ट देती है मसलन तमु अगर िकसी औरत के पास जा रहे हो या िकसी
औरत के पास से आ रहे हो और स भव है उसने तु हारी आ मा क ह या कर डाली हो...”
“ऊँ ह! अब तमु ज दी ही परू े पागल हो जाओगे?” च दर ने कहा और िफर वह प मी के पास लौट
गया प मी उसी तरह मदहोश लेटी थी उसने जाते ही िफर बाँह फै लाकर च दर को समेट
िलया और च दर उसके व क रे शमी गरमाई म डू ब गया
जब वह लौटा तो बट हाथ म खुरपा िलये एक गड् ढï ब द कर रहा था “सुनो, कपरू ! यहाँ मनै े
उसे गाड़ िदया यह उसक समािध है और देखो, आते-आते यहाँ िसर झकु ा देना वह बेचारा
जीवन का स य जान चुका है समझ लो वह सट परै ट (स त शुकदेव) हो गया ह!ै ”
“अ छा, अ छा!” च दर िसर झकु ाकर हँसते हए आगे बढ़ा
“सुनो, को कपरू !” िफर बट ने पुकारा और पास आकर च दर के क धे पर हाथ रखकर
बोला, “कपरू , तमु मानते हो िक नह िक पहले म एक असाधारण आदमी था ”
“अब भी हो ” च दर हँसते हए बोला
“नह , अब म असाधारण नह हँ, कपरू ! देखो, तु ह आज रह य बताऊँ वही आदमी असाधारण
होता है जो िकसी प रि थित म िकसी भी त य को वीकार नह करता, उनका िनषधे करता
चलता है जब वह िकसी को भी वीकार कर लेता ह,ै तब वह परािजत हो जाता है म तो
कहँगा असाधारण आदमी बनने के िलए स य को भी वीकार नह करना चािहए ”
“ या मतलब, बट ! तमु तो दशन क भाषा म बोल रहे हो म अथशा का िव ाथ हँ, भाई!”
च दर ने कौतहू ल से कहा
“देखो, अब मने िववाह वीकार कर िलया जेनी को वीकार कर िलया चाहे यह जीवन का
स य ही य न हो पर मह ा तो िनषधे म होती है सबसे बड़ा आदमी वह होता है जो अपना
िनषधे कर दे...लेिकन म अब साधारण आदमी हँ स ती िक म का अदना यि मझु े
िकतना दुख है आज मेरा तोता भी मर गया और मेरी असाधारणता भी ” और बट िफर तोते
क क के पास िसर झकु ाकर बठै गया
35
वह घर पहँचा तो उसके पाँव जमीन पर नह पड़ रहे थे उसने उफनी हई चाँदनी चमू ी थी, उसने
त णाई के चाँद को पश से िसहरा िदया था, उसने नीली िबजिलयाँ चमू ी थ ाण क
िसहरन और गदु गदु ी से खेलकर वह आ रहा था, वह प मी के होठ के गलु ाब को चमू -चमू कर
गलु ाब के देश म पहँच गया था और उसक नस म बहते हए रस म गलु ाब झमू उठे थे वह िसर
से परै तक एक मदहोश यास बना हआ था घर पहँचा तो जसै ा उ लास से उसका अंग-अंग
नाच रहा हो िबनती के ित दोपहर को जो आ ोश उसके मन म उभर आया था, वह भी शा त
हो गया था
िबनती ने आकर खाना रखा च दर ने बहत हँसते हए, बड़े मीठे वर म कहा, “िबनती, आज
तमु भी खाओ ”
“नह , म नीचे खाऊँ गी ”
“अरे चल बठै , िगलहरी!” च दर ने बहत िदन पहले के नेह के वर म कहा और िबनती के पीठ
म एक घँसू ा मारकर उसे पास िबठा िलया-”आज तु ह नाराज नह रहने दगे ले खा, पगली!”
नफरत से नफरत बढ़ती ह,ै यार से यार जागता है िबनती के मन का सारा नेह सखू -सा
गया था वह िचड़िचड़ी, वािभमानी, ग भीर और खी हो गयी थी लेिकन औरत बहत
कमजोर होती है ई र न करे , कोई उसके दय क ममता को छू ले वह सबकु छ बदा त कर
लेती है लेिकन अगर कोई िकसी तरह उसके मन के रस को जगा दे, तो वह िफर अपना सब
अिभमान भलू जाती है च दर ने, जब वह यहाँ आयी थी, तभी से उसके दय क ममता जीत
ली थी इसिलए च दर के सामने सदा झकु ती आयी लेिकन िपछली बार से च दर ने ठोकर
मारकर सारा नेह िबखेर िदया था उसके बाद उसके यि व का रस सखू ता ही गया
ोध जसै े उसक भ ह पर रखा रहता था
आज च दर ने उसको इतने दुलार से बुलाया तो लगा वह जाने िकतने िदन का भलू ा वर सुन
रही है चाहे च दर के ित उसके मन म कु छ भी आ ोश य न हो, लेिकन वह इस वर का
आ ह नह टाल सकती, यह वह भली कार जानती थी वह बठै गयी च दर ने एक कौर
बनाकर िबनती के महँु म दे िदया िबनती ने खा िलया च दर ने िबनती क बाँह म चुटक
काट कर कहा-”अब िदमाग ठीक हो गया पगली का! इतने िदन से अकड़ी िफरती थी!”
“हँ!” िबनती ने बहत िदन के भलू े हए नेह के वर म कहा, “खुद ही तो अपना िदमाग िबगाड़े
रहते ह और हम इ जाम लगाते ह तरकारी ठ डी तो नह ह?ै ”
दोन म सुलह हो गयी...जाड़ा अब काफ बढ़ गया था खाना खा चुकने के बाद िबनती शाल
ओढ़े च दर के पास आयी और बोली, “लो, इलायची खाओगे?” च दर ने ले ली छीलकर आधे
दाने खुद खा िलये, आधे िबनती के महँु म दे िदये िबनती ने धीरे से च दर क अँगलु ी दाँत से
दबा दी च दर ने हाथ ख च िलया िबनती उसी के पलँग पर पास ही बठै गयी और बोली,
“याद है तु ह? इसी पलँग पर तु हारा िसर दबा रही थी तो तमु ने शीशी फक दी थी ”
“हाँ, याद ह!ै अब कहो तु ह उठाकर फक दँू ” च दर आज बहत खुश था
“मझु े या फकोगे!” िबनती ने शरारत से महँु बनाकर कहा, “म तमु से उठूँगी ही नह !”
जब अगं का तफू ान एक बार उठना सीख लेता है तो दसू री बार उठते हए उसे देर नह लगती
अभी वह अपने तफू ान म प मी को पीसकर आया था िसरहाने बठै ी हई िबनती, ह का बादामी
शाल ओढ़े, रह-रहकर मु कराती और गाल पर फू ल के कटोरे िखल जाते, आँख म एक नयी
चमक च दर थोड़ी देर देखता रहा, उसके बाद उसने िबनती को ख चकर कु छ िहचकते हए
िबनती के माथे पर अपने होठ रख िदये िबनती कु छ नह बोली चुपचाप अपने को छु ड़ाकर
िसर झकु ाये बठै ी रही और च दर के हाथ को अपने हाथ म लेकर उसक अँगिु लयाँ िचटकाती
रही सहसा बोली, “अरे , तु हारे कफ का बटन टू ट गया ह,ै लाओ िसल दँू ”
च दर को पहले कु छ आ य हआ, िफर कु छ लािन िबनती िकतना समपण करती ह,ै उसके
सामने वह...लेिकन उसने अ छा नह िकया प मी क बात दसू री ह,ै िबनती क बात दसू री
िबनती के साथ एक पिव अ तर ही ठीक रहता-
िबनती आयी और उसके कफ म बटन सीने लगी...सीते-सीते बचे हए डोरे को दाँत से तोड़ती हई
बोली, “च दर, एक बात कह मानोगे?”
“ या?”
“प मी के यहाँ मत जाया करो ”
“ य ?”
“प मी अ छी औरत नह है वह तु ह यार नह करती, तु ह िबगाड़ती है ”
“यह बात गलत ह,ै िबनती! तमु इसीिलए कह रही हो न िक उसम वासना बहत तीखी ह!ै ”
“नह , यह नह उसने तु हारी िजंदगी म िसफ एक नशा, एक वासना दी, कोई ऊँ चाई, कोई
पिव ता नह कहाँ दीदी, कहाँ प मी? िकस वग से उतरकर तमु िकस नरक म फँ स गये!”
“पहले म भी यही सोचता था िबनती, लेिकन बाद म मने सोचा िक माना िकसी लड़क के
जीवन म वासना ही तीखी ह,ै तो या इसी से वह िन दनीय ह?ै या वासना वत: म िन दनीय
ह?ै गलत! यह तो वभाव और यि व का अ तर ह,ै िबनती! हरे क से हम क पना नह माँग
सकते, हरे क से वासना नह पा सकते बादल ह,ै उस पर िकरण पड़ेगी, इ धनुष ही िखलेगा,
फू ल ह,ै उस पर िकरण पड़ेगी, तब सुम ही आएगा बादल से हम माँगने लग तब सुम और फू ल
से माँगने लग इ धनुष, तो यह तो हमारी एक किव वमयी भलू होगी माना एक लड़क के
जीवन म यार आया, उसने अपने देवता के चरण पर अपनी क पना चढ़ा दी दसू री के जीवन
म यार आया, उसने चु बन, आिलंगन और गदु गदु ी क िबजिलयाँ द एक बोली, 'देवता मेरे !
मेरा शरीर चाहे िजसका हो, मेरी पजू ा-भावना, मेरी आ मा तु हारी है और वह ज म-ज मा तर
तक तु हारी रहेगी...' और दसू री दीपिशखा-सी लहराकर बोली, 'दुिनया कु छ कहे अब तो मेरा
तन-मन तु हारा है म तो बेकाबू हँ! म क ँ या? मेरे तो अंग-अगं जसै े अलसा कर चरू हो गये
है तु हारी गोद म िगर पडऩे के िलए, मेरी त णाई पुलक उठी है तु हारे आिलंगन म िपस जाने
के िलए मेरे लाज के ब धन जसै े िशिथल हए जाते ह? म क ँ तो या क ँ ? कै सा नशा िपला
िदया है तमु ने, म सब कु छ भलू गयी हँ तमु चाहे िजसे अपनी क पना दो, अपनी आ मा दो,
लेिकन एक बार अपने जलते हए होठ म मेरे नरम गलु ाबी होठ समेट लो न!' बताओ िबनती,
य पहली क भावना ठीक है और दसू री क यास गलत?”
िबनती कु छ देर तक चुप रही, िफर बोली, “च दर, तमु बहत गहराई से सोचते हो लेिकन म तो
एक मोटी-सी बात जानती हँ िक िजसके जीवन म वह यास जग जाती है वह िफर िकसी भी
सीमा तक िगर सकता है लेिकन िजसने याग िकया, िजसक क पना जागी, वह िकसी भी
सीमा तक उठ सकता है मने तो तु ह उठते हए देखा है ”
“गलत ह,ै िबनती! तमु ने िगरते हए देखा है मझु े! तमु मानोगी िक सुधा से मझु े क पना ही िमली
थी, याग ही िमला था, पिव ता ही िमली थी पर वह िकतनी िदन िटक ! और तमु यह कै से
कह सकती हो िक वासना आदमी को नीचे ही िगराती है तमु आज ही क घटना लो तमु यह
तो मानोगी िक अभी तक मने तु ह अपमान और ितर कार ही िदया था ”
“खरै , उसक बात जाने दो!” िबनती बोली
“नह , बात आ गयी तो म साफ कहता हँ िक आज मने तु हारा ितदान देने क सोची, आज
तु हारे िलए मन म बड़ा नेह उमड़ आया य ? जानती हो? प मी ने आज अपने बाहपाश म
कसकर जसै े मेरे मन क सारी कटु ता, सारा िवष ख च िलया मझु े लगा बहत िदन बाद म िफर
िपशाच नह , आदमी हँ यह वासना का ही दान है तमु कै से कहोगी िक वासना आदमी को
नीचे ही ले जाती ह!ै ”
िबनती कु छ नह बोली, च दर भी थोड़ी देर चुप रहा िफर बोला, “लेिकन एक बात पछू ू ँ,
िबनती?”
“ या?”
“बहत अजब-सी बात है सोच रहा हँ पछू ू ँ या न पछू ू ँ!”
“पछू ो न!”
“अभी मने तु हारे माथे पर होठ रख िदये, तमु कु छ भी नह बोल , और म जानता हँ यह कु छ
अनुिचत-सा था तमु प मी नह हो! िफर भी तमु ने कु छ भी िवरोध नह िकया...?”
िबनती थोड़ी देर तक चुपचाप अपने पाँव क ओर देखती रही िफर शाल के छोर से एक डोरा
ख चते हए बोली, “च दर, म अपने को कु छ समझ नह पाती िसफ इतना जानती हँ िक मेरे
मन म तमु जाने या हो; इतने महान हो, इतने महान हो िक म तु ह यार नह कर पाती,
लेिकन तु हारे िलए कु छ भी करने से अपने को रोक नह सकती लगता है तु हारा यि व,
उसक शि और उसक दुबलताएँ, उसक यास और उसका स तोष, इतना महान ह,ै इतना
गहरा है िक उसके सामने मेरा यि व कु छ भी नह है मेरी पिव ता, मेरी अपिव ता, इन
सबसे यादा महान तु हारी यास है ...लेिकन अगर तु हारे मन म मेरे िलए जरा भी नेह है तो
तमु प मी से स ब ध तोड़ लो दीदी से अगर म बताऊँ गी तो जाने या हो जाएगा! और तमु
जानते नह , दीदी अब कै सी हो गयी ह? तमु देखो तो आँस.ू ..”
“बस! बस!” च दर ने अपने हाथ से िबनती का महँु ब द करते हए कहा, “सुधा क बात मत
करो, तु ह कसम है िजंदगी के िजस पहलू को हम भलू चुके ह, उसे कु रे दने से या फायदा?”
“अ छा, अ छा!” च दर का हाथ हटाकर िबनती बोली, “लेिकन प मी को अपनी िजंदगी से हटा
दो ”
“यह नह हो सकता, िबनती?” च दर बोला, “और जो कहो, वह म कर दँगू ा हाँ, तु हारे ित
आज तक जो दु यवहार हआ ह,ै उसके िलए म तमु से मा माँगता हँ ”
“िछः, च दर! मझु े शिम दा मत करो ” काफ रात हो गयी थी च दर लेट गया िबनती ने
उसे रजाई उढ़ा दी और टेबल पर िबजली का टड रखकर बोली, “अब चुपचाप सो जाओ ”
िबनती चली गयी च दर पड़ा-पड़ा सोचने लगा, दुिनया गलत कहती है िक वासना पाप है
वासना से भी पिव ता और माशीलता आती है प मी से उसे जो कु छ िमला, वह अगर पाप है
तो आज च दर ने जो िबनती को िदया, उसम इतनी मा, इतनी उदारता और इतनी शाि त य
थी?
उसके बाद िबनती को वह बहत दुलार और पिव ता से रखने लगा कभी-कभी जब वह घमू ने
जाता तो िबनती को भी ले जाता था यू ईयस डे के िदन प मी ने दोन क दावत क
िबनती प मी के पीछे चाहे च दर से प मी का िवरोध कर ले पर प मी के सामने बहत िश ता
और नेह का बरताव करती थी
डॉ टर साहब क िद ली जाने क तयै ारी हो गयी िबनती ने काय म म कु छ प रवतन करा
िलया था अब वह पहले डॉ टर साहब के साथ शाहजहाँपुर जाएगी और तब िद ली
िन य करते-करते अ त म पहली फरवरी को वे लोग गये टेशन पर बहत-से िव ाथ और
डॉ टर साहब के िम उ ह िवदा देने के िलए आये थे िबनती िव ािथय क भीड़ से घबराकर
इधर चली आयी और च दर को बुलाकर कहने लगी-”च दर! दीदी के िलए एक खत तो दे दो!”
“नह ” च दर ने बहत खे और ढ़ वर म कहा
िबनती कु छ ण तक एकटक च दर क ओर देखती रही; िफर बोली, “च दर, मन क ा
चाहे अब भी वसै ी हो, लेिकन तमु पर अब िव ास नह रहा ”
च दर ने कु छ जवाब नह िदया, िसफ हँस पड़ा िफर बोली, “च दर, अगर कभी कोई ज रत
हो तो ज र िलखना, म चली आऊँ गी, समझे?” और िफर चुपचाप जाकर बठै गयी
जब च दर लौटा तो उसके साथ कई साथी ोफे सर थे घर पहँचकर वह कार लेकर प मी के
यहाँ चल िदया पता नह य िबनती के जाने का च दर को कु छ थोड़ा-सा दु:ख था
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गरमी का मौसम आ गया था च दर सुबह कॉलेज जाता, दोपहर को सोता और शाम को वह
िनयिमत प से प मी को लेकर घमू ने जाता डॉ टर साहब कार छोड़ गये थे कार प मी और
च दर को लेकर दरू -दरू का च कर लगाया करती थी इस बार उसने अपनी छु याँ िद ली म
ही िबताने क सोची थ प मी ने भी तय िकया था िक मसरू ी से लौटते समय जुलाई म वह एक
ह ते आकर डॉ टर शु ला क मेहमानी करे गी और िद ली के पवू प रिचत से भी िमल लेगी
यह नह कहा जा सकता िक च दर के िदन अ छी तरह नह बीत रहे थे उसने अपना अतीत
भुला िदया था और वतमान को वह प मी क नशीली िनगाह म डु बो चुका था भिव य क उसे
कोई खास िच ता नह थी उसे लगता था िक यह प मी क िनगाह के बादल और पश के
फू ल क जादू भरी दुिनया अमर ह,ै शा त है इस जादू ने हमेशा के िलए उसक आ मा को
अिभभतू कर िलया ह,ै ये होठ कभी अलग न ह गे, यह बाहपाश इसी तरह उसे घेरे रहेगा और
प मी क गरम त ण साँस सदा इसी कार उसके कपोल को िसहराती रहगी आदमी का
िव ास हमेशा सीमाएँ और अ त भलू जाने का आदी होता है च दर भी सबकु छ भलू चुका
था
अ लै क एक शाम िदन-भर लू चलकर अब थक गयी थी लेिकन िदन-भर क लू क वजह
से आसमान म इतनी धलू भर गयी थी िक धपू भी ह क पड़ गयी थी माली बाहर िछड़काव
कर रहा था च दर सोकर उठा था और सु ती िमटा रहा था थोड़ी देर बाद वह उठा, िदशाओं
क ओर िन े य देखने लगा बड़ी उदास-सी शाम थी सड़क भी िब कु ल सनू ी थी, िसफ
दो-एक साइिकल-सवार लू से बचने के िलए कान पर तौिलया लपेटे हए चले जा रहे थे एक
बफ का ठेला भी चला जा रहा था “जाओ, बफ ले आओ?” च दर ने माली को पसै े देते हए
कहा माली ने ठेलावाले को बुलाया ठेलावाला आकर फाटक पर क गया माली बफ
तड़ु वा ही रहा था िक एक र शा, िजस पर परदा बँधा था, वह भी फाटक के पास मड़ु ा और ठेले
के पास आकर क गया ठेलावाले ने ठेला पीछे िकया र शा अ दर आया र शा म कोई
परदानशीन औरत बठै ी थी, लेिकन र शा के साथ कोई नह था, च दर को ता जुब हआ, कौन
परदानशीन यहाँ आ सकती ह!ै र शा से एक लड़क उतरी िजसे च दर नह जानता था,
लेिकन बाहर का परदा िजतना ग दा और पुराना था, लड़क क पोशाक उतनी ही साफ और
चु त वह सफे द रे शम क सलवार, सफे द रे शम का चु त कु रता और उस पर बहत ह के
शरबती फालसई रं ग क चु नी ओढ़े हई थी वह उतरी और र शावाले से बोली, “अब घंटे भर म
आकर मझु े ले जाना ” र शावाला िसर िहलाकर चल िदया और वह सीधे अ दर चल दी
च दर को बड़ा अचरज हआ यह कौन हो सकती है जो इतनी बेतक लुफ से अ दर चल दी
उसने सोचा, शायद शरणािथय के िलए च दा माँगने वाली कोई लड़क हो मगर अ दर तो
कोई है ही नह ! उसने चाहा िक रोक दे िफर उसने नह रोका सोचा, खुद ही अ दर खाली
देखकर लौट आएगी
माली बफ लेकर आया और अ दर चला गया वह लड़क लौटी उसके चेहरे पर कु छ आ य
और कु छ िच ता क रे खाएँ थ अब च दर ने उसे देखा एक साँवली लड़क थी, कु छ उदास,
कु छ बीमार-सी लगती थी आँख बड़ी-बड़ी लगती थ जो रोना भलू चुक ह और हँसने म भी
अश ह चेहरे पर एक पीली छाँह थी ऐसा लगता था, देखने ही से िक लड़क़ दु:खी है पर
अपने को सँभालना जानती है
वह आयी और बड़ी फ क मु कान के साथ, बड़ी िश ता के वर म बोली, “च दर भाई, सलाम!
सुधा या ससुराल म ह?ै ”
च दर का आ य और भी बढ़ गया यह तो च दर को जानती भी ह!ै
“जी हाँ, वह ससुराल म है आप...”
“और िबनती कहाँ ह?ै ” लड़क ने बात काटकर पछू ा
“िबनती िद ली म है ”
“ या उसक भी शादी हो गयी?”
“जी नह , डॉ टर साहब आजकल िद ली म ह वह उ ह के पास पढ़ रही है बठै तो जाइए!”
च दर ने कु स िखसकाकर कहा
“अ छा, तो आप यह रहते ह अब? नौकर हो गये ह गे?”
“जी हाँ!” च दर ने अचरज म डू बकर कहा, “लेिकन आप इतनी जानकारी और प रचय क बात
कर रही ह, मने आपको पहचाना नह , मा क िजएगा...”
वह लड़क हँसी, जसै े अपनी िक मत, िजंदगी, अपने इितहास पर हँस रही हो
“आप मझु को कै से पहचान सकते ह? म ज र आपको देख चुक थी मेरे -आपके बीच म
दरअसल एक रोशनदान था, मेरा मतलब सुधा से ह!ै ”
“ओह! म समझा, आप गेसू ह!”
“जी हाँ!” और गेसू ने बहत तमीज से अपनी चु नी ओढ़ ली
“आप तो शादी के बाद जसै े िब कु ल खो ही गय अपनी सहेली को भी एक खत नह िलखा
अ तर िमयाँ मजे म ह?”
“आपको यह सब कै से मालमू ?” बहत आकु ल होकर गेसू बोली और उसक पीली आँख म और
भी मलै ापन आ गया
“मझु े सुधा से मालमू हआ था म तो उ मीद कर रहा था िक आप हम लोग को एक दावत ज र
दगी लेिकन कु छ मालमू ही नह हआ एक बार सुधाजी ने मझु े आपके यहाँ भेजा तो मालमू
हआ िक आप लोग ने मकान ही छोड़ िदया है ”
“जी हाँ, म देहरादनू म थी अ मीजान वगरै ह सभी वह थ अभी हाल म वहाँ कु छ पनाहगीर
पहँचे...”
“पनाहगीर?”
“जी, पंजाब के िसख वगरै ह कु छ झगड़ा हो गया तो हम लोग चले आये अब हम लोग यह
ह”
“अ तर िमयाँ कहाँ ह?”
“िमरजापुर म पीतल का रोजगार कर रहे ह!”
“और उनक बीवी देहरादनू म थी यह सजा य दी आपने उ ह?”
“सजा क कोई बात नह ” गेसू का वर घुटता हआ-सा मालमू दे रहा था “उनक बीवी
उनके साथ है ”
“ या मतलब? आप तो अजब-सी बात कर रही ह अगर म भलू नह करता तो आपक
शादी...”
“जी हाँ!” बड़ी ही उदास हँसी हँसकर गेसू बोली, “आपसे च दर भाई, म या िछपाऊँ गी, जसै े
सुधा वसै े आप! मेरी शादी उनसे नह हई!”
“अरे ! गु ताखी माफ क िजएगा, सुधा तो मझु से कह रही थी िक अ तर...”
“मझु से महु बत करते ह!” गेसू बात काटकर बोली और बड़ी ग भीर हो गयी और अपनी चु नी
के छोर म टँके हए िसतारे को तोड़ती हई बोली, “म सचमचु नह समझ पायी िक उनके मन म
या था उनके घरवाल ने मेरे बजाय फू ल को यादा पस द िकया उ ह ने फू ल से ही शादी
कर ली अब अ छी तरह िनभ रही है दोन क फू ल तो इतने अरसे म एक बार भी हम लोग
से िमलने नह आयी!”
“अ छा...” च दर चुप होकर सोचने लगा िकतनी बड़ी वंचना हई इस लड़क क िजंदगी म!
और िकतने दबे श द म यह कहकर चुप हो गयी! एक भी आँसू नह , एक भी िससक नह
संयत वर और फ क मु कान, बस च दर चुपचाप उठकर अ दर गया महरािजन आ गयी
थी कु छ ना ता और शरबत भेजने के िलए कहकर च दर बाहर आया गेसू चुपचाप लॉन क
ओर देख रही थी, शू य िनगाह से च दर आकर बठै गया और बोला-”बहत धोखा िदया
आपको!”
“िछः! ऐसी बात नह कहते, च दर भाई! कौन जानता है िक यह अ तर क मजबरू ी रही हो!
िजसको मने अपना सरताज माना उसके िलए ऐसा खयाल भी िदल म लाना गनु ाह है म इतनी
िगरी हई नह िक यह सोचँू िक उ ह ने धोखा िदया!” गेसू दाँत तले जबान दबाकर बोली
च दर दंग रह गया या गेसू अपने िदल से कह रही ह?ै इतना अखंड िव ास है गेसू को
अ तर पर! शरबत आ गया था गेसू ने तक लुफ नह िकया लेिकन बोली, “आप बड़े भाई
ह पहले आप शु क िजए ”
“आपक िफर कभी अ तर से मलु ाकात नह हई?” च दर ने एक घँटू पीकर कहा
“हई य नह ? कई बार वह अ मीजान के पास आये ”
“आपने कु छ नह कहा?”
“कहती या? यह सब बात कहने-सुनने क होती ह! और िफर फू ल वहाँ आराम से ह,ै अ तर
भी फू ल को जान से यादा यार से रखते ह, यही मेरे िलए बहत है और अब कहकर या
क ँ गी! जब फू ल से शादी तय हई और वे राजी हो गये तभी मने कु छ नह कहा, अब तो फू ल क
माँग, फू ल का सुहाग मेरे िलए सुबह क अजान से यादा पाक है ” गेसू ने शरबत म िनगाह
डु बाये हए कहा च दर ण-भर चुप रहा िफर बोला-
“अब आपक शादी अ मीजान कब कर रही ह?”
“कभी नह ! मने क द कर िलया है िक म शादी ताउ नह क ँ गी देहरादनू के मटै िनटी
सटर म काम सीख रही थी कोस परू ा हो गया अब िकसी अ पताल म काम क ँ गी ”
“आप...!”
“ य , आपको ता जुब य हआ? मने अ मीजान को इस बात के िलए राजी कर िलया है म
अपने परै पर खड़ी होना चाहती हँ ”
च दर ने शरबत से बफ िनकालकर फकते हए कहा-
“म आपक जगह होता तो दसू री शादी करता और अ तर से भरसक बदला लेता!”
“बदला!” गेसू मु कराकर बोली, “िछः, च दर भाई! बदला, गरु े ज, नफरत इससे आदमी न कभी
सुधरा है न सुधरे गा बदला और नफरत तो अपने मन क कमजोरी को जािहर करते ह और
िफर बदला म लँू िकससे? उससे, िदल क तनहाइय म म िजसके सजदे पड़ती हँ यह कै से हो
सकता ह?ै ”
गेसू के माथे पर िव ास का तेज दमक उठा, उसक बीमार आँख म धपू लहलहा उठी और
उसका कं चनलता-सा तन जगमगाने लगा कु छ ऐसी ढ़ता थी उसक आवाज म, ऐसी गहराई
थी उसक विन म िक च दर देखता ही रह गया वह जानता था िक गेसू के िदल म अ तर के
िलए िकतना ेम था, वह यह भी जानता था िक गेसू अ तर क शादी के िलए िकस तरह पागल
थी वह सारा सपना ताश के महल क तरह िगर गया और प रि थितय ने नह , खुद
अ तर ने धोखा िदया, लेिकन गेसू है िक माथे पर िशकन नह , भ ह म बल नह , होठ पर
िशकायत नह नारी के जीवन का यह कै सा अिमट िव ास था! यानी िजसे गेसू ने अपने ेम
का वणमि दर समझा था, वह वालामखु ी बनकर फू ट गया और उसने दद क िपघली आग क
धारा म गेसू को डु बो देने क कोिशश क लेिकन गेसू है िक अटल च ान क तरह खड़ी है
च दर के मन म कह कोई टीस उठी उसके िदल क धडक़न ने कह पर उससे पछू ा '...और
च दर, तमु ने या िकया? तमु पु ष थे तु हारे सबल कं धे िकसी के यार का बोझ य नह
ढो पाये, च दर?' लेिकन च दर ने अपनी अ त:करण क आवाज को अनसुनी करते हए पछू ा-
“तो आपके मन म जरा भी दद नह अ तर को न पाने का?”
“दद?” गेसू क आवाज डू बने लगी, िनगाह क जद पाँखु रय पर ह क पानी क लहर दौड़
गयी-”दद, यह तो िसफ सुधा समझ सकती ह,ै च दर भाई! बचपन से वह मेरे िलए या थे, यह
वही जानती है म तो उनका सपना देखते-देखते उनका सपना ही बन गयी थी, लेिकन खरै
दद इसं ान के यक दे को और मजबतू न कर दे, आदमी के कदम को और ताकत न दे, आदमी के
िदल को ऊँ चाई न दे तो इसं ान या? दद का हाल पछू ते ह आप! कयामत के रोज तक मेरी म यत
उ ह का आसरा देखेगी, च दर भाई! लेिकन इसके िलए िजंदगी म तो खामोश ही रहना होगा
बंद घर म जलते हए िचराग क तरह घुलना होगा और अगर मने उनको अपना माना है तो वह
िमलकर ही रहगे आज न सही कयामत के बाद सही महु बत क दुिनया म जसै े एक िदन
उनके िबना कट जाता है वसै े एक िजंदगी उनके िबना कट जाएगी...लेिकन उसके बाद वे मेरे
होकर रहगे ”
च दर का िदल काँप उठा गेसू क आवाज म तारे बरस रहे थे...
“और आपसे या कहँ, च दर भाई! या आपक बात मझु से िछपी ह?ै म जानती हँ सबकु छ
जानती हँ सच पिू छए तो जब मने देखा िक आप िकतनी खामोशी से अपनी दुिनया म आग
लगते देख रहे ह, और िफर भी हँस रहे ह, तो मने आपसे सबक िलया हम नह मालमू था िक
हम और आप, दोन भाई-बहन क िक मत एक-सी है ”
च दर के मन म जाने िकतने घाव कसक उठे उसके मन म जाने िकतना दद उमड़ने-सा
लगा गेसू उसे या समझ रही है मन म और वह कहाँ पहँच चुका ह!ै िजसने च दर क िजंदगी
से अपने मन का दीप जलाया, वह आज देवता के चरण तक पहँच गया, लेिकन च दर के मन
क दीपिशखा? उसने अपने यार क िचता जला डाली च दर के महँु पर लािन क कािलमा
छा गयी गेसू चुपचाप बठै ी थी सहसा बोली, “च दर भाई, आपको याद ह,ै िपछले साल इ ह
िदन म सुधा से िमलने आयी थी और हसरत आपको मेरा सलाम कहने गया था?”
“याद हïै !” च दर ने बहत भारी वर म कहा
“इस एक साल म दुिनया िकतनी बदल गयी!” गेसू ने एक गहरी साँस लेकर कहा, “एक बार ये
िदन चले जाते ह, िफर बेदद कभी नह लौटते! कभी-कभी सोचती हँ िक सुधा होती तो िफर
कॉलेज जाते, लास म शोर मचाते, भागकर घास म लेटते, बादल को देखते, शेर कहते और वह
च दर क और हम अ तर क बात करते...” गेसू का गला भर आया और एक आँसू चू पड़ा...
“सुधा और सुधा क याह-शादी का हाल बताइए कै से ह उनके शौहर?”
च दर के मन म आया िक वह कह दे, गेस,ू य लि जत करती हो! म वह च दर नह हँ मने
अपने िव ास का मि दर कर िदया...म ेत हँ...मने सुधा के यार का गला घ ट िदया
ह.ै ..लेिकन पु ष का गव! पु ष का छल! उसे यह भी नह मालमू होने िदया िक उसका िव ास
चरू -चरू हो चुका है और िपछले िकतने ही महीन से उसने सुधा को खत िलखना भी ब द कर
िदया है और यह भी नह मालमू करने का यास िकया िक सुधा मरती है या जीती!
घंटा-भर तक दोन सुधा के बारे म बात करते रहे इतने म र शावाला लौट आया गेसू ने उसे
ठहरने का इशारा िकया और बोली, “अ छा, जरा सुधा का पता िलख दीिजए ” च दर ने एक
कागज पर पता िलख िदया गेसू ने उठने का उप म िकया तो च दर बोला, “बिै ठए अभी,
आपसे बात करके आज जाने िकतने िदन क बात याद आ रही ह!”
गेसू हँसी और बठै गयी च दर बोला, “आप अभी तक किवताएँ िलखती ह?”
“किवताएँ...” गेसू िफर हँसी और बोली, “िजंदगी िकतनी हमगीर ह,ै िकतनी पुरशोर, और इस
शोर म नगम क हक कत िकतनी! अब हड् िडयाँ, नस, ेशर- वाइटं , प याँ और मरहम म िदन
बीत जाता है अ छा च दर भाई, सुधा अभी उतनी ही शोख ह?ै उतनी ही शरारती ह!ै ”
“नह ” च दर ने बहत उदास वर म कहा, “जाओ, कभी देख आओ न!”
“नह , जब तक कह जगह नह िमल जाती, तब तक तो इतनी आजादी नह िमलेगी अभी
यह हँ उसी को बुलवाऊँ गी और उसके पित देवता को िलखँगू ी िकतना सनू ा लग रहा है घर
जसै े भतू का बसेरा हो जसै े परे त रहते ह !”
“ य 'परे त' बना रही ह आप? म रहता हँ इसी घर म ” च दर बोला
“अरे , मेरा मतलब यह नह था!” गेसू हँसते हए बोली, “अ छा, अब मझु े तो अ मीजान नह
भेजगी, आज जाने कै से अके ले आने क इजाजत दे दी आपको िकसी िदन बुलवाऊँ तो
आइएगा ज र!”
“हाँ, आऊँ गा गेस,ू ज र आऊँ गा!” च दर ने बहत नेह से कहा
“अ छा भाईजान, सलाम!”
“नम ते!”
गेसू जाकर र शा पर बठै गयी और परदा तन गया र शा चल िदया च दर एक अजीब-सी
िनगाह से देखता रहा जसै े अपने अतीत क कोई खोयी हई चीज ढूँढ़ रहा हो, िफर धीरे -धीरे लौट
आया सरू ज डू ब गया था वह गसु लखाना ब द कर नहाने बठै गया जाने कहाँ-कहाँ मन
भटक रहा था उसका च दर मन का अि थर था, मन का बुरा नह था गेसू ने आज उसके
सामने अचानक वह त वीर रख दी थी िजसम वह वग क ऊँ चाइय पर मडँ राया करता था
और जाने कै सा दद-सा उसके मन म उठ गया था, गेसू ने अपने अजाने म ही च दर के
अिव ास, च दर क ितिहंसा को बहत बड़ी हार दी थी उसने िसर पर पानी डाला तो उसे
लगा यह पानी नह है िजंदगी क धारा ह,ै िपघले हए अंगार क धारा िजसम पडक़र के वल वही
िज दा बच पाया ह,ै िजसके अगं म यार का अमतृ है और च दर के मन म या ह?ै महज
वासना का िवष...वह सड़ा हआ, गला हआ शरीर मा जो के वल सि नपात के जोर से चल रहा
है उसने अपने मन के अमतृ को गली म फक िदया ह.ै ..उसने या िकया ह?ै
वह नहाकर आया और शीशे के सामने खड़ा होकर बाल काढऩे लगा-िफर शीशे क ओर एकटक
देखकर बोला, “मझु े या देख रहे हो, च दर बाब!ू मझु े तो तमु ने बबाद कर डाला आज कई
महीने हो गये और तमु ने एक िच ी तक नह िलखी, िछः!” और उसने शीशा उलटकर रख
िदया
महरािजन खाना ले आयी उसने खाना खाया और सु त-सा पड़ रहा “भइया, आज घमू ै न
जाबो?”
“नह !” च दर ने कहा और पड़ा-पड़ा सोचने लगा प मी के यहाँ नह गया
यह गेसू दसू रे कमरे म बठै ी थी इस कमरे म िबनती उसे कै लाश का िच िदखा रही
थी ...िच उसके मन म घमू ने लगे...च दर, या इस दुिनया म तु ह रह गये थे फोटो
िदखाकर पस द कराने के िलए...च दर का हाथ उठा तड़ से एक तमाचा...च दर, चोट तो
नह आयी...मान िलया िक मेरे मन ने मझु से न कहा हो, तमु से तो मेरा मन कोई बात नह
िछपाता...तो च दर, तमु शादी कर य नह लेते? पापा लड़क देख आएँगे...हम भी देख
लगे...तो िफर तमु बठै ो तो हम पढ़गे, वरना हम शरम लगती ह.ै ..च दर, तमु शादी मत करना,
तमु इस सबके िलए नह बने हो...नह सुधा, तु हारे व पर िसर रखकर िकतना स तोष
िमलता ह.ै ..
आसमान म एक-एक करके तारे टू टते जा रहे थे
37
वह प मी के यहाँ नह गया एक िदन...दो िदन...तीन िदन...अ त म चौथे िदन शाम को प मी
खुद आयी च दर खाना खा चुका था और लॉन पर टहल रहा था प मी आयी उसने
वागत िकया लेिकन उसक मु कराहट म उ लास नह था
“कहो कपरू , आये य नह ? म समझी, तमु बीमार हो गये!” प मी ने लॉन पर पड़ी एक कु स
पर बठै ते हए कहा, “आओ, बठै ो न!” उसने च दर क ओर कु स िखसकायी
“नह , तमु बठै ो, म टहलता रहँगा!” च दर बोला और कहने लगा, “पता नह य प मी, दो-
तीन िदन से तबीयत बहत उदास-सी है तु हारे यहाँ आने को तबीयत नह हई!”
“ य , या हआ?” प मी ने पछू ा और च दर का हाथ पकड़ िलया च दर प मी क कु स के
पीछे खड़ा हो गया प मी ने च दर के दोन हाथ पकडक़र अपने गले म डाल िलये और अपना
िसर च दर से िटकाकर उसक ओर देखने लगी च दर चुप था न उसने प मी के गाल
थपथपाये, न हाथ दबाया, न अलक िबखेर और न िनगाह म नशा ही िबखेरा
औरत अपने ित आने वाले यार और आकषण को समझने म चाहे एक बार भलू कर जाये,
लेिकन वह अपने ित आने वाली उदासी और उपे ा को पहचानने म कभी भलू नह करती
वह होठ पर होठ के पश के गढ़ू तम अथ समझ सकती ह,ै वह आपके पश म आपक नस से
चलती हई भावना पहचान सकती ह,ै वह आपके व से िसर िटकाकर आपके िदल क धड़कन
क भाषा समझ सकती ह,ै यिद उसे थोड़ा-सा भी अनुभव है और आप उसके हाथ पर हाथ रखते
ह तो पश क अनुभिू त से ही जान जाएगी िक आप उससे कोई कर रहे ह, कोई याचना कर
रहे ह, सा वना दे रहे ह या सा वना माँग रहे ह मा माँग रहे ह या मा दे रहे ह, यार का
ार भ कर रहे ह या समा कर रहे ह वागत कर रहे ह या िवदा दे रहे ह यह पुलक का
पश है या उदासी का चाव और नशे का पश है या िख नता और बेमनी का
प मी च दर के हाथ को छू ते ही जान गयी िक हाथ चाहे गरम ह , लेिकन पश बड़ा शीतल ह,ै
बड़ा नीरस उसम वह िपघली हई आग क शराब नह है जो अभी तक च दर के होठ पर
धधकती थी, च दर के पश म िबखरती थी
“कु छ तबीयत खराब है कपरू , बठै जाओ!” प मी ने उठकर च दर को जबरद ती िबठाल िदया,
“आजकल बहत मेहनत पड़ती ह,ै य ? चलो, तमु हमारे यहाँ रहो!”
प मी म के वल शरीर क यास थी, यह कहना प मी के ित अ याय होगा प मी म एक बहत
गहरी हमदद थी च दर के िलए च दर अगर शरीर क यास को जीत भी लेता तो उसक
हमदद को वह नह ठु करा पाता था उस हमदद का ितर कार होने से प मी दु:खी होती थी
और उसे वह तभी वीकृ त समझती थी जब च दर उसके प के आकषण म डू बा रहे अगर
पु ष के होठ म तीखी यास न हो, बाहपाश म जहर न हो तो वासना क इस िशिथलता से
नारी फौरन समझ जाती है िक स ब ध म दरू ी आती जा रही है स ब ध क घिन ता को
नापने का नारी के पास एक ही मापदंड ह,ै चु बन का तीखापन!
च दर के मन म ही नह वरन पश म भी इतनी िबखरती हई उदासी थी, इतनी उपे ा थी िक
प मी ममाहत हो गयी उसके िलए यह पहली पराजय थी! आजकल प मी जान जाती थी िक
च दर का रोम-रोम इस व प मी क साँस म डू बा हआ है
लेिकन प मी ने देखा िक च दर उसक बाँह म होते हए भी दरू , बहत दरू न जाने िकन िवचार
म उलझा हआ है वह उससे दरू चला जा रहा ह,ै बहत दरू प मी क धड़कन अ त- य त हो
गय उसक समझ म नह , आया वह या करे ! च दर को या हो गया? या प मी का जादू
टू ट रहा ह?ै प मी ने अपनी पराजय से कुं िठत होकर अपना हाथ हटा िलया और चुपचाप महँु
फे रकर उधर देखने लगी च दर चाहे िजतना उदास हो लेिकन प मी क उदासी वह नह सह
सकता था बुरी या भली, प मी इस व उसक सनू ी िजंदगी का अके ला सहारा थी और प मी
क हमदद का वह बहत कृ त था वह समझ गया, प मी य उदास ह!ै उसने प मी का हाथ
ख च िलया और अपने होठ उसक हथेिलय पर रख िदये और ख चकर प मी का िसर अपने कं धे
पर रख िलया...
पु ष के जीवन म एक ण आता है जब वासना उसक कमजोरी, उसक यास, उसका नशा,
उसका आवेश नह रह जाती जब वासना उसक हमदद का, उसक सा वना का साधन बन
जाती है जब वह नारी को इसिलए बाँह म नह समेटता िक उसक बाँह यासी ह, वह इसिलए
उसे बाँह म समेट लेता है िक नारी अपना दुख भलू जाए िजस व वह नारी क सीिपया
पलक के नशे म नह वरन उसक आँख के आँसू सुखाने के िलए उसक पलक पर होठ रख
देता ह,ै जीवन के उस ण म पु ष िजस नारी से सहानुभिू त रखता ह,ै उसके मन क पराजय
को भुलाने के िलए वह नारी को बाहपाश के नशे म बहला देना चाहता ह!ै लेिकन इन बाहपाश
म यास जरा भी नह होती, आग जरा भी नह होती, िसफ नारी को बहलावा देने का यास मा
होता है
इसम कोई स देह नह िक च दर के मन पर छाया हआ प मी के प का गलु ाबी बादल उचटता
जा रहा था, नशा उखड़ा-सा रहा था लेिकन च दर प मी को दु:खी नह करना चाहता था,
वह भरसक प मी को बहलाये रखता था...लेिकन उसके मन म कह -न-कह िफर अंत का
एक तफू ान चलने लगा था...
गेसू ने उसके सामने उसक साल-भर पहले क िजंदगी का वह िच रख िदया था, िजसक एक
झलक उस अभागे को पागल कर देने के िलए काफ थी च दर जसै े-तसै े मन को प थर
बनाकर, अपनी आ मा को प क शराब म डु बोकर, अपने िव ास म छलकर उसको भुला
पाया था उसे जीता पाया था लेिकन गेसू ने और गेसू क बात ने जसै े उसके मन म मिू छत
पड़ी अिभशाप क छाया म िफर ाण- ित ा कर दी थी और आधी रात के स नाटे म िफर च दर
को सुनाई देता था िक उसके मन म कोई काली छाया बार-बार िससकने लगती है और च दर के
दय से टकराकर वह दन बार-बार कहता था, “देवता! तमु ने मेरी ह या कर डाली! मेरी ह या,
िजसे तमु ने वग और ई र से बढ़कर माना था...” और च दर इन आवाज से घबरा उठता था
िव मरण क एक तरं ग जहाँ च दर को प मी के पास ख च लायी थी, वहाँ अतीत के मरण क
दसू री तरं ग उसे वेग म उलझाकर जसै े िफर उसे दरू ख च ले जाने के िलए याकु ल हो उठी
उसको लगा िक प मी के िलए उसके मन म जो मादक नशा था, उस पर लािन का कोहरा छाता
जा रहा है और अभी तक उसने जो कु छ िकया था, उसके िलए उसी के मन म कह -न-कह पर
ह क -सी अ िच झलकने लगी थी िफर भी प मी का जादू बद तरू कायम था वह प मी के
ित कृ त था और वह प मी को कह , िकसी भी हालत म दुखी नह करना चाहता था भले
वह गनु ाह करके अपनी कृ त ता जािहर य न कर पाये, लेिकन जसै े िबनती के मन म च दर
के ित जो ा थी, वह निै तकता-अनिै तकता के ब धन से ऊपर उठकर थी, वसै े ही च दर के
मन म प मी के ित कृ त ता पु य और पाप के ब धन से ऊपर उठकर थी िबनती ने एक िदन
च दर से कहा था िक यिद वह च दर को अस तु करती ह,ै तो वह उसे इतना बड़ा गनु ाह
लगता है िक उसके सामने उसे िकसी भी पाप-पु य क परवा नह है उसी तरह च दर सोचता
था िक स भव है िक उसका और प मी का यह स ब ध पापमय हो, लेिकन इस स ब ध को
तोड़कर प मी को अस तु और दु:खी करना इतना बड़ा पाप होगा जो अ य है
लेिकन वह नशा टू ट चुका था, वह साँस धीमी पड़ गयी थी...अपनी हर कोिशश के बावजदू वह
प मी को उदास होने से बचा न पाता था
एक िदन सुबह जब वह कॉलेज जा रहा था िक प मी क कार आयी प मी बहत ही उदास थी
च दर ने आते ही उसका वागत िकया उसके कान म एक नीले प थर का बु दा था, िजसक
ह क छाँह गाल पर पड़ रही थी च दर ने झकु कर वह नीली छाँह चमू ली
प मी कु छ नह बोली वह बठै गयी और िफर च दर से बोली, “म लखनऊ जा रही हँ, कपरू !”
“कब? आजï?”
“हाँ, अभी कार से ”
“ य ?”
“य ही, मन ऊब गया! पता नह , कौन-सी छाँह मझु पर छा गयी है म शायद लखनऊ से
मसरू ी चली जाऊँ ”
“म तु ह जाने नह दँगू ा, पहले तो तमु ने बताया नह !”
“तु ह ने कहाँ पहले बताया था!”
“ या?”
“कु छ भी नह ! अ छा, चल रही हँ ”
“सुनो तो!”
“नह , अब रोक नह सकते तमु ...बहत दरू जाना है च दर...” वह चल दी िफर वह लौटी और
जसै े युग -युग क यास बुझा रही हो, च दर के गले म झलू गयी और कस िलया च दर
को...पाँच िमनट बाद सहसा वह अलग हो गयी और िफर िबना कु छ बोले अपनी कार म बठै
गयी “प मी...तु ह हआ या यह?”
“कु छ नह , कपरू ” प मी कार टाट करते हए बोली, “म तमु से िजतनी ही दरू रहँ उतना ही
अ छा ह,ै मेरे िलए भी, तु हारे िलए भी! तु हारे इन िदन के यवहार ने मझु े बहत कु छ िसखा
िदया ह?ै ”
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च दर िसर से परै तक लािन से कुं िठत हो उठा सचमचु वह िकतना अभागा ह!ै वह िकसी को
भी स तु नह रख पाया उसके जीवन म सुधा भी आयी और प मी भी, एक को उसके पु य
ने उससे छीन िलया, दसू री को उसका गनु ाह उससे छीने िलये जा रहा है जाने उसके ह का
मािलक िकतना ू र िखलाड़ी है िक हर कदम पर उसक राह उलट देता है नह , वह प मी को
नह खो सकता-उसने प मी का कॉलर पकड़ िलया, “प मी, तु ह हमारी कसम ह-ै बुरा मत
मानो! म तु ह जाने नह दँगू ा ”
प मी हँसी-बड़ी ही क ण लेिकन सश हँसी अपने कॉलर को धीमे-से छु ड़ाकर च दर क
अँगिु लय को कपोल से दबा िदया और िफर व के पास से एक िलफाफा िनकालकर च दर के
हाथ म दे िदया और कार टाट कर दी...पीछे मडु क़र नह देखा...नह देखा
कार कड़वे धुएँ का बादल च दर क ओर उड़ाकर आगे चल दी
जब कार ओझल हो गयी, तब च दर को होश आया िक उसके हाथ म एक िलफाफा भी है
उसने सोचा, फौरन कार लेकर जाये और प मी को रोक ले िफर सोचा, पहले पढ़ तो ले, यह है
या चीज? उसने िलफाफा खोला और पढऩे लगा-
“कपरू , एक िदन तु हारी आवाज और बट क चीख सुनकर अपणू वेश म ही अपने शंगृ ार-गहृ से
भाग आयी थी और तु ह फू ल के बीच म पाया था, आज तु हारी आवाज मेरे िलए मकू हो गयी है
और अस तोष और उदासी के काँट के बीच म तु ह छोडक़र जा रही हँ
जा रही हँ इसिलए िक अब तु ह मेरी ज रत नह रही झठू य बोलँ,ू अब या, कभी भी तु ह
मेरी ज रत नह रही थी, लेिकन मने हमेशा तु हारा दु पयोग िकया झठू य बोल, तमु मेरे
पित से भी अिधक समीप रहे हो तमु से कु छ िछपाऊँ गी नह म तमु से िमली थी, जब म
एकाक थी, उदास थी, लगता था िक उस समय तमु मेरी सुनसान दुिनया म रोशनी के देवदतू
क तरह आये थे तमु उस समय बहत भोले, बहत सुकु मार, बहत ही पिव थे मेरे मन म उस
िदन तु हारे िलए जाने िकतना यार उमड़ आया! म पागल हो उठी मने तु ह उस िदन सेलामी
क कहानी सुनायी थी, िसनेमा घर म, उसी अभािगन सेलामी क तरह म भी पगै बर को चमू ने
के िलए याकु ल हो उठी
देखा, तमु पिव ता को यार करते हो सोचा, यिद तमु से यार ही जीतना ह,ै तो तमु से पिव ता
क ही बात क ँ म जानती थी िक से स यार का आव यक अंग है लेिकन मन म तीखी
यास लेकर भी मने तमु से से स-िवरोधी बात करनी शु क महँु पर पिव ता और अ दर म
भोग का िस ा त रखते हए भी मेरा अंग-अंग यासा हो उठा था...तु ह होठ तक ख च लायी
थी, लेिकन िफर साहस नह हआ
िफर मने उस छोकरी को देखा, उस िनता त ितभाहीन दुबलमना छोकरी िमस सुधा को वह
कु छ भी नह थी, लेिकन म देखते ही जान गयी थी िक तु हारे भा य का न ह,ै जाने य
उसे देखते ही म अपना आ मिव ास खो-सा बठै ी उसके यि व म कु छ न होते हए भी कम-
से-कम अजब-सा जादू था, यह म भी वीकार करती हँ, लेिकन थी वह छोकरी ही!
तु ह न पाने क िनराशा और तु ह न पाने क असीम यास, दोन के पीस डालने वाले संघष से
भागकर, म िहमालय म चली आयी िजतना तीखा आकषण होता है कपरू कभी-कभी नारी
उतनी ही दरू भागती है अगर कोई याला महँु से न लगाकर दरू फक दे, तो समझ लो िक वह
बेहद यासा ह,ै इतना यासा िक तिृ क क पना से भी घबराता है िदन-रात उस पहाड़ी क
धवल चोिटय म तु हारी िनगाह मु कराती थ , पर म लौटने का साहस न कर पाती थी
लौटी तो देखा िक तमु अके ले हो, िनराश हो और थोड़ा-थोड़ा उलझे हए भी हो पहले मने तमु
पर पिव ता क आड़ म िवजय पानी चाही थी, अब तमु पर वासना का सहारा लेकर छा गयी
तमु मझु े बुरा समझ सकते हो, लेिकन काश िक तमु मेरी यास को समझ पाते, कपरू ! तमु ने मझु े
वीकार िकया वसै े नह जसै े कोई फू ल शबनम को वीकार करे तमु ने मझु े उस तरह
वीकार िकया जसै े कोई बीमार आदमी मािफया (अफ म) के इ जे शन को वीकार करे
तु हारी यासी और बीमार विृ याँ बदली नह , िसफ बेहोश होकर सो गय
लेिकन कपरू , पता नह िकसके पश से वे एकाएक िबखर गय म जानती हँ, इधर तमु म या
प रवतन आ गया है म तु ह उसके िलए अपराधी नह ठहराती, कपरू ! म जानती हँ तमु मेरे
ित अब भी िकतने कृ त हो, िकतने नेहशील हो लेिकन अब तमु म वह यास नह , वह नशा
नह तु हारे मन क वासना अब मेरे िलए एक तरस म बदलती जा रही है
मझु े वह िदन याद ह,ै अ छी तरह याद है च दर, जब तु हारे जलते हए होठ ने इतनी गहरी
वासना से मेरे होठ को समेट िलया था िक मेरे िलए अपना यि व ही एक सपना बन गया
था लगता था, सभी िसतार का तेज भी इसक एक िचनगारी के सामने फ का है लेिकन
आज होठ होठ ह, आग के फू ल नह रहे-पहले मेरी एक झलक से तु हारे रोम-रोम म सकै ड़
इ छाओं क आँिधयाँ गरज उठती थ ...आज तु हारी नस का खनू ठंडा है तु हारी िनगाह
पथरायी हई ह और तमु इस तरह वासना मेरी ओर फक देते हो, जसै े तमु िकसी पालतू िब ली को
पावरोटी का टु कड़ा दे रहे हो
म जानती हँ िक हम दोन के स ब ध क उ णता ख म हो गयी है अब तु हारे मन म महज
एक तरस ह,ै एक कृ त ता ह,ै और कपरू , वह म वीकार नह कर सकँू गी मा करना, मेरा
भी वािभमान है
लेिकन मने कह िदया िक म तमु से िछपाऊँ गी नह ! तमु इस म म कभी मत रहना िक मने तु ह
यार िकया था पहले म भी यही सोचती थी कल मझु े लगा िक मने अपने को आज तक
धोखा िदया था मने इधर तु हारी िख नता के बाद अपने जीवन पर बहत सोचा, तो मझु े लगा
िक यार जसै ी थायी और गहरी भावना शायद मेरे जसै े रं गीन बिहमखु वभावशाली के िलए है
ही नह यार जसै ी ग भीर और खतरनाक तफू ानी भावना को अपने क ध पर ढोने का
खतरा देवता या बुि हीन ही उठा सकते ह-तमु उसे वहन कर सकते हो (कर रहे हो यार क
िति या भी यार क ही प रचायक है कपरू ), मेरे िलए आँसुओं क लहर म डू ब जाना स भव
नह या तो यार आदमी को बादल क ऊँ चाई तक उठा ले जाता ह,ै या वग से पाताल म फक
देता है लेिकन कु छ ाणी ह, जो न वग के ह न नरक के , वे दोन लोक के बीच म अ धकार
क परत म भटकते रहते ह वे िकसी को यार नह करते, छायाओं को पकड़ने का यास
करते ह, या शायद यार करते ह या िनर तर नयी अनुभिू तय के पीछे दीवाने रहते ह और यार
िब कु ल करते ही नह उनको न दु:ख होता है न सुख, उनक दुिनया म के वल संशय,
अि थरता और यास होती ह.ै ..कपरू , म उसी अभागे लोक क एक यासी आ मा थी अपने
एका त से घबराकर तु ह अपने बाहपाश म बाँधकर तु हारे िव ास को वग से ख च लायी
थी तमु वग- देवता, भलू कर मेरे अिभश लोक म आ गये थे
आज मालमू होता है िक िफर तु हारे िव ास ने तु ह पुकारा है म अपनी यास म खुद धधक
उठूँ, लेिकन तु ह मने अपना िम माना था तमु पर म आँच नह आने देना चाहती तमु मेरे
यो य नह , तमु अपने िव ास के लोक म लौट जाओ
म जानती हँ तमु मेरे िलए िचि तत हो लेिकन मने अपना रा ता िनि त कर िलया है ी
िबना पु ष के आ य के नह रह सकती उस अभागी को जसै े कृ ित ने कोई अिभशाप दे िदया
है ...म थक गयी हँ इस ेमलोक क भटकन से ...म अपने पित के पास जा रही हँ वे मा
कर दगे, मझु े िव ास है
उ ह के पास य जा रही हँ? इसिलए मेरे िम , िक म अब सोच रही हँ िक ी वाधीन नह रह
सकती उसके पास प नी व के िसवा कोई चारा नह जहाँ जरा वाधीन हई िक बस उसी
अ धकू प म जा पड़ती है जहाँ म थी वह अपना शरीर भी खोकर तिृ नह पाती िफर यार से
तो मेरा िव ास जसै े उठा जा रहा ह,ै यार थायी नह होता म ईसाई हँ, पर सभी अनुभव के
बाद मझु े पता लगता है िक िह दुओं के यहाँ ेम नह वरन धम और सामािजक प रि थितय के
आधार पर िववाह क रीित बहत वै ािनक और नारी के िलए सबसे यादा लाभदायक है उसम
नारी को थोड़ा ब धन चाहे य न हो लेिकन दािय व रहता ह,ै स तोष रहता ह,ै वह अपने घर
क रानी रहती है काश िक तमु समझ पाते िक खुले आकाश म इधर-उधर भटकने के बाद,
तफू ान से लड़ने के बाद म िकतनी आतरु हो उठी हँ ब धन के िलए, और िकसी सश डाल पर
बने हए सुखद, सुकोमल नीड़ म बसेरा लेने के िलए िजस नीड़ को म इतने िदन पहले उजाड़
चुक थी, आज वह िफर मझु े पुकार रहा है हर नारी के जीवन म यह ण आता है और शायद
इसीिलए िह दू ेम के बजाय िववाह को अिधक मह व देते ह
म तु हारे पास नह क म जानती थी िक हम दोन के स ब ध म ार भ से इतनी
िविच ताएँ थ िक हम दोन का स ब ध थायी नह रह सकता था, िफर भी िजन ण म हम
दोन एक ही तफू ान म फँ स गये थे, वे ण मेरे िलए अमू य िनिध रहगे तमु बुरा न मानना
म तमु से जरा भी नाराज नह हँ म न अपने को गनु हगार मानती हँ, न तु ह, िफर भी अगर
तमु मेरी सलाह मान सको तो मान लेना िकसी अ छी-सी सीधी-सादी िह दू लड़क से अपना
िववाह कर लेना िकसी बहत बौि क लड़क , जो तु ह यार करने का दम भरती हो, उसके
फ दे म न फँ सना कपरू , म उ और अनुभव दोन म तमु से बड़ी हँ िववाह म भावना या
आकषण अकसर जहर िबखेर देता है याह करने के बाद एक-आध महीने के िलए अपनी
प नी सिहत मेरे पास ज र आना, कपरू म उसे देखकर वह स तोष पा लँगू ी, जो हमारी
स यता ने हम अभाग से छीन िलया है
अभी म साल भर तक तमु से नह िमलँगू ी मझु े तमु से अब भी डर लगता है लेिकन इस बीच म
तमु बट का खयाल रखना कभी-कभी उसे देख लेना पये क कमी तो उसे न होगी
बीवी भी उसे ऐसी िमल गयी ह,ै िजसने उसे ठीक कर िदया ह.ै ..उस अभागे भाई से अलग होते हए
मझु े कै सा लग रहा ह,ै यह तमु जानते, अगर तमु बहन होते
अगला प तु ह तभी िलखँगू ी जब मेरे पित से मेरा समझौता हो जाएगा...नाराज तो नह हो?
- िमला िड ू ज ”
च दर प मी को लौटाने नह गया कॉलेज भी नह गया एक ल बा-सा खत िबनती को
िलखता रहा और इसक ितिलिप कर दोन न थी कर भेज िदये और उसके बाद थककर सो
गया...िबना खाना खाये!
ततृ ीय ख ड
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गिमय क छु याँ हो गयी थ और च दर छु याँ िबताने िद ली गया था सुधा भी आयी हई
थी लेिकन च दर और सुधा म बोलचाल नह थी एक िदन शाम के व डॉ टर साहब ने
च दर से कहा, “च दर, सुधा इधर बहत अनमनी रहती ह,ै जाओ इसे कह घुमा लाओ ” च दर
बड़ी मिु कल से राजी हआ दोन पहले कनॉट लेस पहँचे सुधा ने बहत फ क और टू टती
हई आवाज म कहा, “यहाँ बहत भीड़ ह,ै मेरी तबीयत घबराती है ” च दर ने कार घुमा दी शहर
से बाहर रोहतक क सड़क पर, िद ली से प ह मील दरू च दर ने एक बहत हरी-भरी जगह
म कार रोक दी िकसी बहत पुराने पीर का टू टा-फू टा मजार था और क के चबतू रे को फोडक़र
एक नीम का पेड़ उग आया था चबतू रे के दो-तीन प थर िगर गये थे चार-पाँच नीम के पेड़
लगे थे और क के प थर के पास एक िचराग बुझा हआ पड़ा था और कई एक सखू ी हई फू ल-
मालाएँ हवा से उड़कर नीचे िगर गयी थ क के आस-पास ढेर नीम के ितनके और सखू े हए
नीम के फू ल जमा थे
सुधा जाकर चबतू रे पर बठै गयी दरू -दरू तक स नाटा था न आदमी न आदमजाद िसफ
गोधिू ल के अलसाते हए झ क म नीम चरमरा उठते थे च दर आकर सुधा क दसू री ओर बठै
गया चबतू रे पर इस ओर सुधा और उस ओर च दर, बीच म िचर-नीरव क ...
सुधा थोड़ी देर बाद मड़ु ी और च दर क ओर देखा च दर एकटक क क ओर देख रहा था
सुधा ने एक सखू ा हार उठाया और च दर पर फककर कहा, “च दर, या हमेशा मझु े इसी
भयानक नरक म रखोगे? या सचमचु हमेशा के िलए तु हारा यार खो िदया है मने?”
“मेरा यार?” च दर हँसा, उसक हँसी उस स नाटे से भी यादा भयंकर थी...”मेरा यार! अ छी
याद िदलायी तमु ने! म आज यार म िव ास नह करता या यह कहँ िक यार के उस प म
िव ास नह करता!”
“िफर?”
“िफर या, उस समय मेरे मन म यार का मतलब था याग, क पना, आदश आज म समझ
चुका हँ िक यह सब झठू ी बात ह, खोखले सपने ह!”
“तब?”
“तब! आज म िव ास करता हँ िक यार के माने िसफ एक ह;ै शरीर का स ब ध! कम-से-कम
औरत के िलए औरत बड़ी बात करे गी, आ मा, पुनज म, परलोक का िमलन, लेिकन उसक
िसि िसफ शरीर म है और वह अपने यार क मिं जल पार कर पु ष को अ त म एक ही चीज
देती ह-ै अपना शरीर म तो अब यह िव ास करता हँ सुधा िक वही औरत मझु े यार करती है जो
मझु े शरीर दे सकती है बस, इसके अलावा यार का कोई प अब मेरे भा य म नह ” च दर
क आँख म कु छ धधक रहा था...सुधा उठी, और च दर के पास खड़ी हो गयी-”च दर, तमु भी
एक िदन ऐसे हो जाओगे, इसक मझु े कभी उ मीद नह थी काश िक तमु समझ पाते िक...”
सुधा ने बहत दद भरे वर म कहा
“ नेह ह!ै ” च दर ठठाकर हँस पड़ा-और उसने सुधा क ओर मडु क़र कहा, “और अगर म उस
नेह का माण माँगँू तो? सुधा!” दाँत पीसकर च दर बोला, “अगर तमु से तु हारा शरीर माँगँू
तो?”
“च दर!” सुधा चीखकर पीछे हट गयी च दर उठा और पागल क तरह उसने सुधा को पकड़
िलया, “यहाँ कोई नह ह-ै िसवा इस क के तमु या कर सकती हो? बहत िदन से मन म एक
आग सुलग रही है आज तु ह बबाद कर दँू तो मन क नारक य वेदना बुझ जाए....बोलो!”
उसने अपनी आँख क िपघली हई आग सुधा क आँख म भरकर कहा
सुधा ण-भर सहमी-पथरायी ि से च दर क ओर देखती रही िफर सहसा िशिथल पड़ गयी
और बोली, “च दर, म िकसी क प नी हँ यह ज म उनका है यह माँग का िस दरू उनका
है इस शरीर का शंगृ ार उनका है मझु गला घ टकर मार डालो मने तु ह बहत तकलीफ दी
है लेिकन...”
“लेिकन...” च दर हँसा और सुधा को छोड़ िदया, “म तु ह नेह करती हँ, लेिकन यह ज म
उनका है यह शरीर उनका ह-ै ह:! ह:! या अ दाज ह वंचना के जाओ सुधा...म तमु से
मजाक कर रहा था तु हारे इस जठू े तन म रखा या ह?ै ”
सुधा अलग हटकर खड़ी हो गयी उसक आँख से िचनगा रयाँ झरने लग , “च दर, तमु
जानवर हो गये; म आज िकतनी शिम दा हँ इसम मेरा कसरू ह,ै च दर! म अपने को दंड दँगू ी,
च दर! म मर जाऊँ गी! लेिकन तु ह इसं ान बनना पड़ेगा, च दर!” और सुधा ने अपना िसर एक
टू टे हए ख भे पर पटक िदया
च दर क आँख खुल गयी, वह थोड़ी देर तक सपने पर सोचता रहा िफर उठा बहत अजब-
सा मन था उसका बहत परािजत, बहत खोया हआ-सा, बेहद िखिसयाहट से भरा हआ था
उसके मन म एकाएक खयाल आया िक वह िकसी मनोरं जन म जाकर अपने को डु बो दे-बहत
िदन से उसने िसनेमा नह देखा था उन िदन बनाड शॉ का 'सीजर ऐडं ि लयोपे ा' लगा
हआ था, उसने सोचा िक प मी क िम ता का प रपाक िसनेमा म हआ था, उसका अ त भी वह
िसनेमा देखकर मनाएगा उसने कपड़े पहने, चार बजे से मिै टनी थी, और व हो रहा था
कपड़े पहनकर वह शीशे के सामने आकर बाल सँवारने लगा उसे लगा, शीशे म पड़ती हई
उसक छाया उससे कु छ िभ न ह,ै उसने और गौर से देखा-छाया रह यमय ढंग से मु करा रही
थी; वह सहसा बोली-
“ या देख रहा ह?ै ” 'मखु ड़ा या देखे दरपन म ' एक लड़क से परािजत और दसू री से सपने
म ितिहंसा लेने का कलंक नह िदख पड़ता तझु े? अपनी छिव िनरख रहा ह?ै पापी! पितत!”
कमरे क दीवार ने दोहराया-”पापी! पितत!”
च दर तड़प उठा, पागल-सा हो उठा कं घा फककर बोला, “कौन है पापी? म हँ पापी? म हँ
पितत? मझु े तमु नह समझते म िचर-पिव हँ मझु े कोई नह जानता ”
“कोई नह जानता! हा, हा!” ितिब ब हँसा, “म तु हारी नस-नस जानता हँ तमु वही हो न
िजसने आज से डेढ़ साल पहले सपना देखा सुधा के हाथ से लेकर अमतृ बाँटने का, दुिनया को
नया स देश देकर पगै बर बनने का नया स देश! खबू नया स देश िदया मसीहा!
प मी...िबनती...सुधा...कु छ और छोक रयाँ बटोर ले च र हीन!”
“मने िकसी को नह बटोरा! जो मेरी िजंदगी म आया, अपने-आप आया, जो चला गया, उसे मने
रोका नह मेरे मन म कह भी अहम क यास नह थी, कभी भी वाथ नह था या म
चाहता तो सुधा को अपने एक इशारे से अपनी बाँह म नह बाँध सकता था!”
“शाबाश! और नह बाँध पाये तो सुधा से भी जी भरकर बदला िनकाल रहा है वह मर रही है
और तू उस पर नमक िछड़कने से बाज नह आया और आज तो उसे एका त म करने का
सपना देख अपनी पलक को देवमि दर क तरह पिव बना िलया तनू े! िकतनी उ नित क है
तेरी आ मा ने! इधर आ, तेरा हाथ चमू लँू ”
“चुप रहो! पराजय क इस वेला म कोई भी यं य करने से बाज नह आता म पागल हो
जाऊँ गा ”
“और अभी या पागल से कम है त?ू अहंकारी पशु! तू बट से भी गया-गजु रा है बट पागल
था, लेिकन पागल कु क तरह काटना नह जानता था तू काटना भी जानता है और अपने
भयानक पागलपन को साधना और याग भी सािबत करता रहता है द भी!”
“बस करो, अब तमु सीमा लाँघ रहे हो ” च दर ने मिु याँ कसकर जवाब िदया
“ य , गु सा हो गये, मेरे दो त! अहंवादी इतने बड़े हो और अपनी त वीर देखकर नाराज होते
हो! आओ, तु ह आिह ते से समझाऊँ , अभागे! तू कहता है तनू े वाथ नह िकया िवकलांग
देवता! वही वाथ है जो अपने से ऊपर नह उठ पाता! तेरे िलए अपनी एक साँस भी दसू रे के
मन के तफू ान से भी यादा मह वपणू रही है तनू े अपने मन क उपे ा के पीछे सुधा को भ ी
म झ क िदया प मी के अ व थ मन को पहचानकर भी उसके प का उपभोग करने म नह
िहचका, िबनती को यार न करते हए भी िबनती को तनू े वीकार िकया, िफर सब का
ितर कार करता गया...और कहता है तू वाथ नह बट पागल हो लेिकन वाथ नह है ”
“ठहरो, गािलयाँ मत दो, मझु े समझाओ न िक मेरे जीवन-दशन म कहाँ पर गलती रही ह!ै
गािलय से मेरा कोई समझौता नह ”
“अ छा, समझो! देखो, म यह नह कहता िक तमु ईमानदार नह हो, तमु शि शाली नह हो,
लेिकन तमु अ तमखु ी रहे, घोर यि वादी रहे, अहंकार त रहे अपने मन क िवकृ ितय को
भी तमु ने अपनी ताकत समझने क कोिशश क कोई भी जीवन-दशन सफल नह होता अगर
उसम बा यथाथ और यापक स य धपू -छाँह क तरह न िमला हो म मानता हँ िक तनू े सुधा
के साथ ऊँ चाई िनभायी, लेिकन अगर तेरे यि व को, तेरे मन को, जरा-सी ठेस पहँचती तो तू
गमु राह हो गया होता तनू े सुधा के नेह का िनषधे कर िदया तनू े िबनती क ा का
ितर कार िकया तनू े प मी क पिव ता क ...और इसे अपनी साधना समझता ह?ै तू याद
कर; कहाँ था तू एक वष पहले और अब कहाँ ह?ै ”
च दर ने बड़ी कातरता से ितिब ब क ओर देखा और बोला, “म जानता हँ, म गमु राह हँ
लेिकन बेईमान नह ! तमु मझु े य िध कार रहे हो! तमु कोई रा ता बता दो न! एक बार उसे भी
आजमा लँू ”
“रा ता बताऊँ ! जो रा ता तमु ने एक बार बनाया था, उसी पर तमु मजबतू रह पाये? िफर या
एक के बाद दसू रे रा ते पर चहलदमी करना चाहते हो? देखो कपरू , यान से सुनो तमु से
शायद िकसी ने कभी कहा था, शायद बट ने कहा था िक आदमी तभी तक बड़ा रहता है जब
तक वह िनषधे करता चलता है पता नह िकस मानिसक आवेश म एक के बाद दसू रे त व का
िव वंस और िवनाश करता चलता है हर च ान को उखाड़क फकता रहता है और तमु ने यही
जीवन-दशन अपना िलया था, भलू से या अपने अनजाने म ही तु हारी आ मा म एक शि
थी, एक तफू ान था लेिकन यह ल य था तु हारी िजंदगी म लहर उठने लग लेिकन
गहराई नह और याद रखो च दर, स य उसे िमलता है िजसक आ मा शा त और गहरी होती
है समु क गहराई क तरह समु क ऊपरी सतह क तरह जो िव ु ध और तफू ानी होता ह,ै
उसके अंत म चाहे िकतनी गरज हो लेिकन स य क शा त अमतृ मयी आवाज नह होती ”
“लेिकन वह गहराई मझु े िमली नह ?”
“बताता हँ-घबराते य हो! देखो, तमु म बहत बड़ा अधयै रहा है शि रही, पर धयै और ढ़ता
िब कु ल नह तमु ग भीर समु तल न बनकर एक सश लेिकन अशा त लहर बन गये जो
हर िकनारे से टकराकर उसे तोड़ने के िलए य हो उठी तमु म ठहराव नह था साधना नह
थी! जानते हो य ? तु ह जहाँ से जरा भी तकलीफ िमली, अवरोध िमला वह से तमु ने अपना
हाथ ख च िलया! वह तमु भाग खड़े हए तमु ने हमेशा उसका िनषधे िकया-पहले तमु ने समाज
का िनषधे िकया, यि को साधना का के बनाया; िफर यि का भी िनषधे िकया अपने
िवचार म, अ तमखु ी भावनाओं म डू ब गये, कम का िनषधे िकया िफर तो कम म ऐसी
भागदौड़, ऐसी िवमखु ता शु हई िक बस! न मानवता का यार जीवन म ितफिलत कर सका,
न सुधा का प मी हो या िबनती, हरे क से तू िनि य िखलौने क तरह खेलता गया काश
िक तनू े समाज के िलए कु छ िकया होता! सुधा के िलए कु छ िकया होता लेिकन तू कु छ न कर
पाया िजसने तझु े िजधर चाहा उधर उ े रत कर िदया और तू अधं े और इ छािवहीन परतं
अंधड़ क तरह उधर ही ह-ह करता हआ दौड़ गया माना मने िक समाज के आधार पर बने
जीवन-दशन म कु छ किमयाँ ह: लेिकन अशं त: ही उसे वीकार कर कु छ काम करता, माना िक
सुधा के यार से तझु े तकलीफ हई पर उसक मह ा के ही आधार पर तू कु छ िनमाण कर ले
जाता लेिकन तू तो जरा-से अवरोध के बहाने स पणू का िनषधे करता गया तेरा जीवन
िनषधे क िनि यता क मानिसक िति याओं क शंखृ ला रहा है अभागे, तनू े हमेशा
िजंदगी का िनषधे िकया है दुिनया को वीकार करता, यथाथ को वीकार करता, िजंदगी को
वीकार करता और उसके आधार पर अपने मन को, अपने मन के यार को, अपने जीवन को
स तिु लत करता, आगे बढ़ता लेिकन तनू े अपनी मन क गगं ा को यि क छोटी-सी सीमा म
बाँध िलया, उसे एक पोखरा बना िदया, पानी सड़ गया, उसम गधं आने लगी, सुधा के यार क
सीपी िजसम स य और सफलता का मोती बन सकता था, वह मर गयी और के हए पानी म
िवकृ ित और वासना के क ड़े कु लबुलाने लगे शाबाश! या अमतृ पाया है तनू े! ध य ह,ै अमतृ -
पु !”
“बस करो! यह यं य म नह सह सकता! म या करता!”
“कै सी लाचारी का वर ह!ै िछः, असफल पगै बर! साधना यथाथ को वीकार करके चलती ह,ै
उसका िनषधे करके नह हमारे यहाँ ई र को कहा गया है नेित नेित, इसका मतलब यह नह
िक ई र परम िनषधे व प है गलत, नेित म 'न' तो के वल एक वण है 'इित' दो वण ह
एक िनषधे तो कम-से-कम दो वीकृ ितयाँ इसी अनुपात म क पना और यथाथ का सम वय
य नह िकया तनू े?”
“म नह समझ पाता-यह दशन मेरी समझ म नह आता!”
“देखो, इसको ऐसे समझो घबराओ मत! कै लाश ने अगर नारी के यि व को नह समझा,
सुधा क पिव ता को ितर कृ त िकया, लेिकन उसने समाज के िलए कु छ तो िकया गेसू ने
अपने िववाह का िनषधे िकया, लेिकन अ तर के ित अपने यार का िनषधे तो नह िकया
अपने यि व का िनमाण िकया अपने च र का िनमाण िकया यानी गेस,ू एक लड़क से
तमु हार गये, िछः!”
“लेिकन म िकतना थक गया था, यह तो सोचो मन को िकतनी ऊँ ची-नीची घािटय से, मौत
से भी भयानक रा त से गजु रने म और कोई होता तो मर गया होगा म िजंदा तो हँ!”
“वाह, या िजंदगी ह!ै ”
“तो या क ँ , यह रा ता छोड़ दँ?ू यह यि व तोड़ डालँ?ू ”
“िफर वही िनषधे और िव वंस क बात िछः देखो, चलने को तो गाड़ी का बलै भी रा ते पर
चलता ह!ै लेिकन सकै ड़ मील चलने के बाद भी वह गाड़ी का बलै ही बना रहता है या तमु
गाड़ी के बलै बनना चाहते हो? नह कपरू ! आदमी िजंदगी का सफर तय करता है राह क
ठोकर और मसु ीबत उसके यि व को पु ता बनाती चलती ह, उसक आ मा को प रप व
बनाती चलती ह या तमु म प रप वता आयी? नह म जानता हँ, तमु अब मेरा भी िनषधे
करना चाहते हो तमु मेरी आवाज को भी चुप करना चाहते हो आ म- वंचना तो तेरा पेशा
हो गया है िकतना खतरनाक है तू अब...तू मेरा भी...ितर कार...करना...चाहता...है ” और
छाया, धीरे -धीरे एक वह िब दु बनकर अ य हो गयी
च दर चुपचाप शीशे के सामने खड़ा रहा
िफर वह िसनेमा नह गया
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च दर सहसा बहत शा त हो गया एक ऐसे भोले ब चे क तरह िजसने अपराध कम िकया,
िजससे नुकसान यादा हो गया था, और िजस पर डाँट बहत पड़ी थी अपने अपराध क चेतना
से वह बोल भी नह पाता था अपना सारा दुख अपने ऊपर उतार लेना चाहता था वहाँ एक
ऐसा स नाटा था जो न िकसी को आने के िलए आमि त कर सकता था, न िकसी को जाने से
रोक सकता था वह एक ऐसा मदै ान था िजस पर क सारी पगडंिडयाँ तक िमट गयी ह ; एक
ऐसी डाल थी िजस पर के सारे फू ल झर गये ह , सारे घ सले उजड़ गये ह मन म उसके असीम
कुं ठा और वेदना थी, ऐसा था िक कोई उसके घाव छू ले तो वह आँसुओं म िबखर पड़े वह
चाहता था, वह सबसे मा माँग ले, िबनती से, प मी से, सुधा से और िफर हमेशा के िलए उनक
दुिनया से चला जाए िकतना दुख िदया था उसने सबको!
इसी मन:ि थित म एक िदन गेसू ने उसे बुलाया वह गया गेसू क अ मीजान तो सामने
आय पर गेसू ने परदे म से ही बात क गेसू ने बताया िक सुधा का खत आया है िक वह ज दी
ही आएगी, गेसू से िमलने गेसू को बहत ता जुब हआ िक च दर के पास कोई खबर य नह
आयी!
च दर जब घर पहँचा तो कै लाश का एक खत िमला-
“ि य च दर,
बहत िदन से तु हारा कोई खत नह आया, न मेरे पास न इनके पास या नाराज हो हम दोन
से? अ छा तो लो, तु ह एक खुशखबरी सुना दँू म सां कृ ितक िमशन म शायद ऑ ेिलया
जाऊँ डॉ टर साहब ने कोिशश कर दी है आधा पया मेरा, आधा सरकार का
तु ह भला या फु रसत िमलेगी यहाँ आने क ! म ही इ ह लेकर दो रोज के िलए आऊँ गा इनक
कोई मसु लमान सखी है वहाँ, उससे ये भी िमलना चाहती ह हमारी खाितर का इ तजाम
रखना-म 11 मई को सुबह क गाड़ी से पहँचँगू ा
तु हारा-कै लाश ”
सुधा के आने के पहले च दर ने घर क ओर नजर दौड़ायी िसवा ाइगं म और लॉन के
सचमचु बाक घर इतना ग दा पड़ा था िक गेसू सच ही कह रही थी िक जसै े घर म ेत रहते
ह आदमी चाहे िजतना सफाई-पस द और सु िचपणू य न हो, लेिकन औरत के हाथ म
जाने या जादू है िक वह घर को छू कर ही चमका देती है औरत के िबना घर क यव था
सँभल ही नह सकती सुधा और िबनती कोई भी नह थी और तीन ही महीने म बँगले का प
िबगड़ गया था
उसने सारा बँगला साफ कराया हालाँिक दो ही िदन के िलए सुधा और कै लाश आ रहे थे,
लेिकन उसने इस तरह बँगले क सफाई करायी जसै े कोई नया समारोह हो सुधा का कमरा
बहत सजा िदया था और सुधा क छत पर दो पलँग डलवा िदये थे लेिकन इन सब इतं जाम के
पीछे उतनी ही िनि य भावहीनता थी जसै े िक वह एक होटल का मनै ेजर हो और दो आग तकु
का इ तजाम कर रहा हो बस
मानसनू के िदन म अगर कभी िकसी ने गौर िकया हो तो बा रश होने के पहले ही हवा म एक
नमी, पि य पर एक ह रयाली और मन म एक उमगं -सी छा जाती है आसमान का रं ग बतला
देता है िक बादल छानेवाले ह, बँदू रमिझमाने वाली ह जब बादल बहत नजदीक आ जाते ह,
बँदू पड़ने के पहले ही दरू पर िगरती हई बँदू क आवाज वातावरण पर छा जाती ह,ै िजसे धुरवा
कहते ह
य - य सुधा के आने का िदन नजदीक आ रहा था, च दर के मन म हवाएँ करवट बदलने लग
गयी थ मन म उदास सुनसान म धुरवा उमड़ने-घुमड़ने लगा था मन उदास सुनसान
आकु ल ती ा म बेचनै हो उठा था च दर अपने को समझ नह पा रहा था नस म एक
अजीब-सी घबराहट मचलने लगी थी, िजसका वह िव े षण नह करना चाहता था उसका
यि व अब पता नह य कु छ भयभीत-सा था
इ तहान ख म हो रहे थे, और जब मन क बेचनै ी बहत बढ़ जाती थी तो परी क क आदत के
मतु ािबक वह कािपयाँ जाँचने बठै जाता था िजस समय परी क के घर म पा रवा रक कलह
हो, मन म अंत हो या िदमाग म िफतरू हो, उस समय उ ह कॉिपयाँ जाँचने से अ छा
शरण थल नह िमलता अपने जीवन क परी ा म फे ल हो जाने क खीझ उतारने के िलए
लडक़ को फे ल करने के अलावा कोई अ छा रा ता ही नह है च दर जब बेहद दु:खी होता तो
वह कॉिपयाँ जाँचता
िजस िदन सुबह सुधा आ रही थी, उस रात को तो च दर का मन िब कु ल बेकाब-ू सा हो गया
लगता था जसै े उसने सोचने-िवचाने से ही इनकार कर िदया हो उस िदन च दर एक ण को
भी अके ला न रहकर भीड़-भाड़ म खो जाना चाहता था सुबह वह गगं ा नहाने गया, कार
लेकर कॉलेज से लौटकर दोपहर को अपने एक िम के यहाँ चला गया लौटकर आया तो
नहाकर एक िकताब क दुकान पर चला गया और शाम होने तक वह खड़ा-खड़ा िकताब
उलटता और खरीदता रहा वहाँ उसने िबस रया का गीत-सं ह देखा जो 'िबनती' नाम बदल
उसने 'िव लव' नाम से छपवा िलया था और मखु गितशील किव बन गया था उसने वह
सं ह भी खरीद िलया
अब सुधा के आने म मिु कल से बारह घंटे क देर थी उसक तबीयत बहत घबराने लगी थी
और वह िबस रया के का य-सं ह म डू ब गया उन सड़े हए गीत म ही अपने को भुलाने क
कोिशश करने लगा और अ त म उसने अपने को इतना थका डाला िक तीन बजे का अलाम
लगाकर वह सो गया सुधा क गाड़ी साढ़े चार बजे आती थी
जब वह जागा तो रात अपने मखमली पंख पसारे न द म डू बी हई दुिनया पर शाि त का
आशीवाद िबखेर रही थी ठंडे झ के लहरा रहे थे और उन झ क पर पिव ता छायी हई थी यह
पछु आ के झ के थे ा महु त म ाचीन आय ने जो रह य पाया था, वह धीरे -धीरे च दर क
आँख के सामने खुलने-सा लगा उसे लगा जसै े यह उसके यि व क नयी सुबह है एक
बड़ा शा त संगीत उसक पलक पर ओस क तरह िथरकने लगा
ि ितज के पास एक बड़ा-सा िसतारा जगमगा रहा था! च दर को लगा जसै े यह उसके यार का
िसतारा है जो जाने िकस अ ात पाताल म डू ब गया था और आज से वह िफर उग गया है उसने
एक अ धिव ासी भोले ब चे क तरह उस िसतारे को हाथ जोडक़र कहा, “मेरी कं चन जसै ी
सुधा रानी के यार, तमु कहाँ खो गये थे? तमु मेरे सामने नह रहे, म जाने िकन तफू ान म
उलझ गया था मेरी आ मा म सारी गु ता सुधा के यार क थी उसे मने खो िदया उसके
बाद मेरी आ मा पीले प े क तरह तफू ान म उड़कर जाने िकस क चड़ म फँ स गयी थी तमु
मेरी सुधा के यार हो न! मने तु ह सुधा क भोली आँख म जगमगाते हए देखा था वेदमं -
जसै े इस पिव सुबह म आज िफर मेरे पाप म िल तन को अमतृ से धोने आये हो म िव ास
िदलाता हँ िक आज सुधा के चरण पर अपने जीवन के सारे गनु ाह को चढ़ाकर हमेशा के िलए
मा माँग लँगू ा लेिकन मेरी साँस क साँस सुधा! मझु े मा कर दोगी न?” और िविच -से
भावावेश और पुलक से उसक आँख म आँसू आ गये उसे याद आया िक एक िदन सुधा ने
उसक हथेिलय को होठ से लगाकर कहा था-जाओ, आज तमु सुधा के पश से पिव हो...काश
िक आज भी सुधा अपने िमसरी-जसै े होठ से च दर क आ मा को चमू कर कहे-जाओ च दर,
अभी तक िजंदगी के तफू ान ने तु हारी आ मा को बीमार, अपिव कर िदया था...आज से तमु
वही च दर हो अपनी सुधा के च दर ह रणी-जसै ी भोली-भाली सुधा के महान पिव
च दर...
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तयै ार होकर च दर जब टेशन पहँचा तो वह जसै े मोहािव -सा था जसै े वह िकसी जादू या
टोना पढ़ा-हआ-सा घमू रहा था और वह जादू था सुधा के यार का पुनरावतन
गाड़ी घंटा-भर लेट थी च दर को एक पल काटना मिु कल हो रहा था अ त म िसगनल
डाउन हआ कु िलय म हलचल मची और च दर पटरी पर झकु कर देखने लगा सुबह हो गयी
थी और इजं न दरू पर एक काले दाग-सा िदखाई पड़ रहा था, धीरे -धीरे वह दाग बड़ा होने लगा
और ल बी-सी हरी पँछू क तरह लहराती हई ेन आती िदखाई पड़ी च दर के मन म आया,
वह पागल क तरह दौड़कर वहाँ पहँच जाए िजस िदन एक घोर अिव ासी म िव ास जाग
जाता ह,ै उस िदन वह पागल-सा हो उठता है उसे लग रहा था जसै े इस गाड़ी म सभी िड बे
खाली ह िसफ एक िड बे म अके ली सुधा होगी जो आते ही च दर को अपनी यार-भरी
िनगाह म समेट लेगी
गाड़ी के लेटफाम पर आते ही हलचल बढ़ गयी कु िलय क दौड़धपू , मसु ािफर क हड़बड़ी,
सामान क उठा-धरी से लेटफॉम भर गया च दर पागल -सा इस सब भीड़ को चीरकर िड बे
देखने लगा एक दफे परू ी गाड़ी का च कर लगा गया कह भी सुधा नह िदखाई दी जसै े
आँसू से उसका गला ँ धने लगा या आये नह ये लोग! िक मत िकतना यं य करती है
उससे! आज जब वह िकसी के चरण पर अपनी आ मा उ सग कर िफर पिव होना चाहता था
तो सुधा ही नह आयी उसने एक च कर और लगाया और िनराश होकर लौट पड़ा सहसा
सेकड लास के एक छोटे-से िड बे म से कै लाश ने झाँककर कहा, “कपरू !”
च दर मड़ु ा, देखा िक कै लाश झाँक रहा है एक कु ली सामान उतारकर खड़ा है सुधा नह
है
जसै े िकसी ने झ के से उसके मन का दीप बुझा िदया सामान बहत थोड़ा-सा था वह िड बे म
चढक़र बोला, “सुधा नह आयी?”
“आयी ह, देखो न! कु छ तबीयत खराब हो गयी है जी िमतला रहा है ” और उसने बाथ म
क ओर इशारा कर िदया सुधा बाथ म म बगल म लोटा रखे िसर झकु ाये बठै ी थी-”देखो!
देखती हो?” कै लाश बोला, “देखो, कपरू आ गया ” सुधा ने देखा और मिु कल से हाथ जोड़
पायी होगी िक उसे िमतली आ गयी...कै लाश दौड़ा और उसक पीठ पर हाथ फे रने लगा और
च दर से बोला-”पंखा लाओ!” च दर हत भ था उसके मन ने सपना देखा था...सुधा िसतार
क तरह जगमगा रही होगी और अपनी रोशनी क बाँह म च दर के ाण को सुला देगी
जादगू रनी क तरह अपने यार के पंख से च दर क आ मा के दाग प छ देगी लेिकन यथाथ
कु छ और था सुधा जादगू रनी, आ मा क रानी, पिव ता क सा ा ी सुधा, बाथ म म बठै ी है
और उसका पित उसे सा वना दे रहा था
“ या कर रहे हो, च दर!...पंखा उठाओ ज दी से ” कै लाश ने य ता से कहा च दर च क
उठा और जाकर पंखा झलने लगा थोड़ी देर बाद महँु धोकर सुधा उठी और कराहती हई-सी
जाकर सीट पर बठै गयी कै लाश ने एक तिकया पीछे लगा िदया और वह आँख ब द करके
लेट गयी
च दर ने अब सुधा को देखा सुधा उजड़ चुक थी उसका रस मर चुका था वह अपने यौवन
और प, चंचलता और िमठास क एक जद छाया मा रह गयी थी चेहरा दुबला पड़ गया था
और हड् िडयाँ िनकल आयी थ चेहरा दुबला होने से लगता था आँख फटी पड़ती ह वह
चुपचाप आँख ब द िकये पड़ी थी च दर पंखा हाँक रहा था, कै लाश एक सटू के स खोलकर
दवा िनकाल रहा था गाड़ी यह आकर क जाती ह,ै इसिलए कोई ज दी नह थी कै लाश ने
दवा दी सुधा ने दवा पी और िफर उदास, बहत बारीक, बहत बीमार वर म बोली, “च दर,
अ छे तो हो! इतने दुबले कै से लगते हो? अब कौन तु हारे खाने-पीने क परवा करता होगा!”
सुधा ने एक गहरी साँस ली कै लाश िब तर लपेट रहा था
“तु ह या हो गया ह,ै सुधा?”
“मझु े सुख-रोग हो गया ह!ै ” सुधा बहत ीण हँसी हँसकर बोली, “बहत सुख म रहने से ऐसा ही
हो जाता है ”
च दर चुप हो गया कै लाश ने िब तर कु ली को देते हए कहा, “इ ह ने तो बीमारी के मारे हम
लोग को परे शान कर रखा है जाने बीमा रय को या महु बत है इनसे! चलो उठो ” सुधा
उठी
कार पर सुधा के साथ पीछे सामान रख िदया गया और आगे कै लाश और च दर बठै े कै लाश
बोला, “च दर, तमु बहत धीमे ाइव करना वरना इ ह च कर आने लगेगा...” कार चल दी
च दर कै लाश क िवदेश-या ा और कै लाश च दर के कॉलेज के बारे म बात करते रहे मिु कल
से घर तक कार पहँची होगी िक कै लाश बोला, “यार च दर, तु ह तकलीफ तो होगी लेिकन एक
िदन के िलए कार तमु मझु े दे सकते हो?”
“ य ?”
“मझु े जरा रीवाँ तक बहत ज री काम से जाना ह,ै वहाँ कु छ लोग से िमलना ह,ै कल दोपहर
तक म चला आऊँ गा ”
“इसके मतलब मेरे पास नह रहोगे एक िदन भी?”
“नह , इ ह छोड़ जाऊँ गा लौटकर िदन-भर रहँगा ”
“इ ह छोड़ जाओगे? नह भाई, तमु जानते हो िक आजकल घर म कोई नह है ” च दर ने कु छ
घबराकर कहा
“तो या हआ, तमु तो हो!” कै लाश बोला और च दर के चेहरे क घबराहट देखकर हँसकर
बोला, “अरे यार, अब तमु पर इतना अिव ास नह है अिव ास करना होता तो याह के पहले
ही कर लेते ”
च दर मु करा उठा, कै लाश ने च दर के क धे पर हाथ रखकर धीमे से कहा तािक सुधा न सुन
पाये-”वसै े चाहे मझु े कु छ भी अस तोष य न हो, लेिकन इनका च र तो सोने का ह,ै यह म
खबू परख चुका हँ इनका ऐसा च र बनाने के िलए तो म तु ह बधाई दँगू ा, च दर! और िफर
आज के युग म!”
च दर ने कु छ जवाब नह िदया
कार पोिटको म लगी सुधा, कै लाश, च दर उतरे माली और नौकर दौड़ आये, सुधा ने उन
सबसे उनका हाल पछू ा अ दर जाते ही महरािजन दौडक़र सुधा से िलपट गयी सुधा को
बहत दुलार िकया
कै लाश महँु -हाथ धो चुका था, नहाने चला गया महरािजन चाय बनाने लगी सुधा भी महँु -
हाथ धोने और नहाने चली गयी कै लाश तौिलया लपेटे नहाकर आया और बठै गया बोला,
“आज और कल क छु ी ले लो, च दर! इनक तबीयत ठीक नह है और मझु े जाना ज री ह!ै ”
“अ छा, लेिकन आज तो जाकर हािजरी देना ज री होगा िफर लौट आऊँ गा!” महरािजन चाय
और ना ता ले आयी कै लाश ने ना ता लौटा िदया तो महरािजन बोली, “वाह, दामाद हइके
अके ली चाय पीबो भइया, अबिहन डॉ टर साहब सुिनह तो का किहह ”
“नह माँजी, मेरा पेट ठीक नह है दो िदन के जागरण से आ रहा हँ िफर लौटकर खाऊँ गा
लो च दर, चाय िपयो ”
“सुधा को आने दो!” च दर बोला
“वह पजू ा-पाठ करके खाती ह ”
“पजू ा-पाठ!” च दर दंग रह गया, “सुधा पजू ा-पाठ करने लगी?”
“हाँ भाई, तभी तो हमारी माताजी अपनी बह पर मरती ह असल म वह पजू ा-पाठ करती थ
शु आत क इ ह ने पजू ा के बरतन धोने से और अब तो उनसे भी यादा प क पुजा रन बन
गयी ह ” कै लाश ने इधर-उधर देखा और बोला, “यार, यह मत समझना म सुधा क िशकायत
कर रहा हँ, लेिकन तमु लोग ने मझु े ठीक नह चुना!”
“ य ?” च दर कै लाश के यवहार पर मु ध था
“इन जसै ी लड़िकय के िलए तमु कोई किव या कलाकार या भावुक लड़काढूँढ़ते तो ठीक था
मेरे जसै ा यावहा रक और नीरस राजनीितक इनके उपयु नह है घर भर इनसे बेहद खुश
है जब से ये गयी ह, माँ और शंकर भइया दोन ने मझु े नालायक करार दे िदया है इ ह से
पछू कर सब करते ह, लेिकन मने जो सोच रखा था, वह मझु े नह िमल पाया!”
“ य , या बात ह?ै ” च दर ने पछू ा, “गलती बताओ तो हम इ ह समझाएँ ”
“नह , देखो गलत मत समझो म यह नह कहता िक इनक गलती है यह तो गलत चुनाव
क बात है ” कै लाश बोला, “न इसम मेरा कसरू , न इनका! म चाहता था कोई लड़क जो मेरे
साथ राजनीित का काम करती, मेरी सबलता और दुबलता दोन क संिगनी होती इसीिलए
इतनी पढ़ी-िलखी लड़क से शादी क लेिकन इ ह धम और सािह य म िजतनी िच ह,ै उतनी
राजनीित से नह इसिलए मेरे यि व को हण भी नह कर पाय वसै े मेरी शारी रक
यास को इ ह ने चाहे समपण िकया, वह भी एक बेमनी से, उससे तन क यास भले ही बुझ
जाती हो कपरू , लेिकन मन तो यासा ही रहता ह.ै ..बुरा न मानना म बहत प बात करता
हँ तमु से िछपाना या?...और वा य के मामले म ये इतनी लापरवाह ह िक म बहत दु:खी
रहता हँ ” इतने म सुधा नहाकर आती हई िदख पड़ी कै लाश चुप हो गया सुधा क ओर
देखकर बोला, “मेरी अटचै ी भी ठीक कर दो म अभी चला जाऊँ वरना दोपहर म तपना
होगा ” सुधा चली गयी सुधा के जाते ही कै लाश बोला, “भरसक म इ ह दु:खी नह होने
देता, हाँ, अकसर ये दुखी हो जाती ह; लेिकन म या क ँ , यह मेरी मजबरू ी ह,ै वसै े म इ ह
भरसक सुखी रखने का यास करता हँ...और ये भी जायज-नाजायज हर इ छा के सामने झकु
जाती ह, लेिकन इनके िदल म मेरे िलए कोई जगह नह ह,ै वह जो एक प नी के मन म होती
है लेिकन खरै , िजंदगी चलती जा रही है अब तो जसै े हो िनभाना ही ह!ै ”
इतने म सुधा आयी और बोली, “देिखए, अटचै ी सँवार दी ह,ै आप भी देख लीिजए...” कै लाश
उठकर चला गया च दर बठै ा-बठै ा सोचने लगा-कै लाश िकतना अ छा ह,ै िकतना साफ और
व छ िदल का ह!ै लेिकन सुधा ने अपने को िकस तरह िमटा डाला...
इतने म सुधा आयी और च दर से बोली, “च दर! चलो, वो बुला रहे ह!”
च दर चुपचाप उठा और अ दर गया कै लाश ने तब तक या ा के कपड़े पहन िलये थे देखते
ही बोला, “अ छा च दर, म चलता हँ कल शाम तक आ जाने क कोिशश क ँ गा हाँ देखो,
यादा घुमाना मत इनक सखी को यहाँ बुलवा लो तो अ छा ” िफर बाहर िनकलता हआ
बोला, “इनक िजद थी आने क , वरना इनक हालत आने लायक नह थी माताजी से म कह
आया हँ िक लखनऊ मेिडकल कॉलेज ले जा रहा हँ ”
कै लाश कार पर बठै गया िफर बोला, “देखो च दर, दवा इ ह दे देना याद से, वह रखी है ”
कार टाट हो गयी
च दर लौटा बरामदे म सुधा खड़ी थी चुपचाप बुझी हई-सी च दर ने उसक ओर देखा,
उसने च दर क ओर देखा, िफर दोन ने िनगाह झकु ा ल सुधा वह खड़ी रही च दर
ाइगं - म म जाकर िकताब वगरै ह उठा लाया और कॉलेज जाने के िलए िनकला सुधा अब भी
बरामदे म खड़ी थी गमु सुम...च दर कु छ कहना चाहता था...लेिकन या? कु छ था, जो न
जाने कब से संिचत होता आ रहा था, जो वह य करना चाहता था, लेिकन सुधा कै सी हो गयी
ह!ै यह वह सुधा तो नह िजसके सामने वह अपने को सदा य कर देता था कभी संकोच
नह करता था, लेिकन यह सुधा कै सी है अपने म िसमटी-सकु ची, अपने म बँधी-बँधायी, अपने म
इतनी िछपी हई िक लगता था दुिनया के ित इसम कह कोई खुलाव ही नह च दर के मन म
जाने िकतनी आवाज तड़प उठ लेिकन...कु छ नह बोल पाया वह बरामदे म िठठक गया,
िन े य वहाँ अपनी िकताब खोलकर देखने लगा, जसै े वह याद करना चाहता था िक कह
भलू तो नह आया है कु छ लेिकन उसके अ तमन म के वल एक ही बात थी सुधा कु छ तो
बोले यह इतना गहरा, इतनी घुटनवाला मौन, यह तो जसै े च दर के ाण पर घुटन क तरह
बठै ता जा रहा था सुधा...िनवात िनवास म दीपिशखा-सी अचल, िन प द, थमे हए तफू ान क
तरह मौन च दर ने अ त म नोट् स िलए, घड़ी देखी और चल िदया जब वह सीढ़ी तक पहँचा
तो सहसा सुधा क छायामिू त म हरकत हई सुधा ने पाँव के अँगठू े से फश पर एक लक र
ख चते हए नीचे िनगाह झकु ाये हए कहा, “िकतनी देर म आओगे?” च दर क गया जसै े
च दर को िसतार का राज िमल गया हो सुधा भला बोली तो! लेिकन, िफर भी अपने मन का
उ लास उसने जािहर नह होने िदया, बोला, “कम-से-कम दो घंटे तो लगगे ही ”
सुधा कु छ नह बोली, चुपचाप रह गयी च दर ने दो ण ती ा क िक सुधा अब कु छ बोले
लेिकन सुधा िफर भी चुप च दर िफर मड़ु ा ण-भर बाद सुधा ने पछू ा, “च दर, और ज दी
नह लौट सकते?”
ज दी! सुधा अगर कहे तो च दर जाये भी न, चाहे उसे इ तीफा देना पड़े या सुधा भलू गयी
िक च दर के यि व पर अगर िकसी का शासन है तो सुधा का! वह जो अपनी िजद से,
उछलकर, लडक़र, ठकर च दर से हमेशा मनचाहा काम करवाती रही ह.ै ..आज वह इतनी
दीनता से, इतनी िवनय से, इतने अ तर और इतनी दरू ी से य कह रही है िक ज दी नह लौट
सकते? य नह वह पहले क तरह दौडक़र च दर का कॉलर पकड़ लेती और मचलकर कहती,
'ए, अगर ज दी नह लौटे तो...' लेिकन अब तो सुधा बरामदे म खड़ी होकर ग भीर-सी, डू बती
हई-सी आवाज म पछू रही ह-ै ज दी नह लौट सकते! च दर का मन टू ट गया च दर क उमगं
च ान से टकराकर िबखर गयी...उसने बहत भारी-सी आवाज म पछू ा, “ य ?”
“ज दी लौट आते तो पजू ा करके तु हारे साथ ना ता कर लेते! लेिकन अगर यादा काम हो तो
रहने दो, मेरी वजह से हरज मत करना!” उसने उसे ठ डे, िश और भावहीन वर म कहा
हाय सुधा! अगर तमु जानती होती िक महीन उद् ा त च दर का टू टा और यासा मन तमु से
पुराने नेह क एक बँदू के िलए तरस उठा है तो भी या तमु इसी दरू ी से बात करती! काश, िक
तमु समझ पाती िक च दर ने अगर तमु से कु छ दरू ी भी िनभायी है तो उससे खुद च दर िकतना
िबखर गया है च दर ने अपना देव व खो िदया ह,ै अपना सुख खो िदया ह,ै अपने को बबाद
कर िदया है और िफर भी च दर के बाहर से शा त और सुगिठत िदखने वाले दय के अ दर
तु हारे यार क िकतनी गहरी यास धधक रही ह,ै उसके रोम-रोम म िकतनी जहरीली तृ णा क
िबजिलयाँ क ध रही ह, तमु से अलग होने के बाद अतिृ का िकतना बड़ा रा ता उसने आग क
लपट म झलु सते हए िबताया है अगर तमु इसे समझ लेती तो तमु च दर को एक बार दुलारकर
उसके जलते हए ाण पर अमतृ क चाँदनी िबखेरने के िलए य हो उठती; लेिकन सुधा, तमु ने
अपने बा िव ोह को ही समझा, तमु ने उस ग भीर यार को समझा ही नह जो इस बाहरी
िव ोह, इस बाहरी िव वंस के मलू म पयि वनी क पावन धारा क तरह बहता जा रहा है सुधा,
अगर तमु एक ण के िलए इसे समझ लो...एक ण-भर के िलए च दर को पहले क तरह दुलार
लो, बहला लो, ठ लो, मना लो तो सुधा च दर क जलती हई आ मा, नरक िचताओं म िफर से
अपना गौरव पा ले, िफर से अपनी खोयी हई पिव ता जीत ले, िफर से अपना िव मतृ देव व लौटा
ले...लेिकन सुधा, तमु बरामदे म चुपचाप खड़ी इस तरह क बात कर रही हो जसै े च दर कोई
अप रिचत हो सुधा, यह या हो गया है तु ह? च दर, िबनती, प मी सभी क िजंदगी म जो
भयंकर तफू ान आ गया ह,ै िजसने सभी को झकझोर कर थका डाला ह,ै इसका समाधान िसफ
तु हारे यार म था, िसफ तु हारी आ मा म था, लेिकन अगर तमु ने इनके च र का अ तिनिहत
स य न देखकर बाहरी िव वंस से ही अपना आगे का यवहार िनि त कर िलया तो कौन इ ह
इस च वात से ख च िनकालेगा! या ये अभागे इसी च वात म फँ सकर चरू हो जाएँगे...सुधा...
लेिकन सुधा और कु छ नह बोली च दर चल िदया जाकर लगा जसै े कॉलेज के परी ा
भवन म जाना भी भारी मालमू दे रहा था वह ज दी ही भाग आया
हालाँिक सुधा के यवहार ने उसका मन जसै े तोड़-सा िदया था, िफर भी जाने य वह अब आज
सुधा को एक काशवृ बनकर लपेट लेना चाहता था
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जब च दर लौट आया तो उसने देखा-सुधा तो उसी के कमरे म है उसने उसके कमरे के एक
कोने म दरी हटा दी ह,ै वहाँ पानी िछड़क िदया और एक कु श के आसन पर सामने चौक पर
कोई पोथी धरे बठै ी है चौक पर एक ेत व िबछाकर धपू दानी रख दी है िजसम धपू सुलग
रही है लॉन से शायद कू छ फू ल तोड़ लायी थी जो धपू दानी के पास रखे हए थे बगल म एक
ा क माला रखी थी एक शु ेत रे शम क धोती और के वल एक चोली पहने हए प ले
से बाँह तक ढँके हए वह एका मनोयोग से थ का पारायण कर रही थी धपू दानी से धू -
रे खाएँ मचलती हई,ं लहराती हई,ं उसके कपोल पर झलू ती हई ं सखू ी- खी अलक से उलझ रही
थ उसने नहाकर के श बाँधे नह थे...च दर ने जतू े बाहर ही उतार िदये और चुपचाप पलँग पर
बठै कर सुधा को देखने लगा सुधा ने िसफ एक बार बहत शा त, बहत गहरी आकाश-जसै ी
व छ िनगाह से च दर को देखा और िफर पढऩे लगी सुधा के चार ओर एक िविच -सा
वातावरण था, एक अपािथव विगक योित के रे श से बुना हआ झीना काश उस पर छाया हआ
था गले म पड़ा हआ आँचल, पीठ पर िबखरे हए सुनहले बाल, अपना सबकु छ खोकर िवरि
म िख न सुहाग पर छाये हए वधै य क तरह सुधा लग रही थी माँग सनू ी थी, माथे पर रोली
का एक बड़ा-सा टीका था और चेहरे पर वग के मरु झाये हए फू ल क घुलती हई उदासी, जसै े
िकसी ने चाँदनी पर हरिसंगार के पीले फू ल छ टे दे िदये ह
थोड़ी देर तक सुधा प वर म पढ़ती रही उसके बाद उसने पोथी ब द कर रख दी उसके
बाद आँख ब द कर जाने िकस अ ात देवता को हाथ जोडक़र नम कार िकया...िफर उठ खड़ी
हई और फश पर च दर के पास बठै गयी आँचल कमर म ख स िलया और िबना िसर उठाये
बोली, “चलो, ना ता कर लो!”
“यह ले आओ!” च दर बोला सुधा उठी और ना ता ले आयी च दर ने उठाकर एक टु कड़ा
महँु म रख िलया लेिकन जब सुधा उसी तरह फश पर चुपचाप बठै ी रही तो च दर ने कहा,
“तमु भी खाओ!”
“म!” वह एक फ क हँसी हँसकर बोली, “म खा लँू तो अभी कै हो जाये म िसवा न बू के
शरबत और िखचड़ी के अब कु छ नह खाती और वह भी एक व !”
“ य ?”
“असल म पहले मने एक त िकया, प ह िदन तक के वल ात:काल खाने का, तब से कु छ
ऐसा हो गया िक शाम को खाते ही मन िबगड़ जाता है इधर और कई रोग हो गये ह ”
च दर का मन रो आया सुधा, तमु चुपचाप इस तरह अपने को िमटाती रह ! मान िलया च दर
ने एक खत म तु ह िलख ही िदया था िक अब प - यवहार ब द कर दो! लेिकन या अगर तमु
प भेजत तो च दर क िह मत थी िक वह उ र न देता! अगर तमु समझ पात िक च दर के
मन म िकतना दुख ह!ै
च दर चाहता था िक सुधा क गोद म अपने मन क सभी बात िबखेर दे...लेिकन सुधा कहे, कु छ
िशकायत करे तो च दर अपनी सफाई दे...लेिकन सुधा तो है िक िशकायत ही नह करती, सफाई
देने का मौका ही नह देती...यह देव व क मिू त-सी पथरीली सुधा! यह च दर क सुधा तो नह !
च दर का मन बहत भर आया उसके ँ धे गले से पछू ा, “सुधा, तमु बहत बदल गयी हो खरै
और तो जो कु छ है उसके िलए अब म या कहँ, लेिकन अपनी त दु ती िबगाड़कर य तमु
मझु े दुख दे रही हो! अब य भी मेरी िजंदगी म या रहा ह!ै लेिकन एक ही स तोष था िक तमु
सुखी हो लेिकन तमु ने मझु से वह सहारा छीन िलया...पजू ा िकसक करती हो?”
“पजू ा कहाँ, पाठ करती हँ, च दर! गीता का और भागवत का, कभी-कभी सरू सागर का! पजू ा
अब भला िकसक क ँ गी? मझु जसै ी अभािगनी क पजू ा भला वीकार कौन करे गा?”
“तब यह एक व का भोजन य ?”
“यह तो ायि ह,ै च दर!” सुधा ने एक गहरी साँस लेकर कहा
“ ायि त...?” च दर ने अचरज से कहा
“हाँ, ायि ...” सुधा ने अपने पाँव के िबिछय को धोती के छोर से रगड़ते हए कहा, “िह दू
गहृ तो एक ऐसा जेल होता है जहाँ कै दी को उपवास करके ाण छोड़ने क भी इजाजत नह
रहती, अगर धम का बहाना न हो! धम के बहाने उपवास करके कु छ सुख िमल जाता है ”
एक ण आता है िक आदमी यार से िव ोह कर चुका ह,ै अपने जीवन क ेरणा-मिू त क गोद
से बहत िदन तक िनवािसत रह चुका ह,ै उसका मन पागल हो उठता है िफर से यार करने को,
बेहद यार करने को, अपने मन का दुलार फू ल क तरह िबखरा देने को आज िव ोह का
तफू ान उतर जाने के बाद अपनी उजड़ी हई िजंदगी म बीमार सुधा को पाकर च दर का मन तड़प
उठा सुधा क पीठ पर लहराती हई सखू ी अलक हाथ म ले ल उ ह गथँू ने का असफल यास
करते हए बोला-
“सुधा, यह तो सच है िक मने तु हारे मन को बहत दुखाया ह,ै लेिकन तमु तो हमारी हर बात
को, हमारे हर ोध को मा करती रही हो, इस बात का तमु इतना बुरा मान गयी?”
“िकस बात का, च दर!” सुधा ने च दर क ओर देखकर कहा, “म िकस बात का बुरा मान
गयी!”
“िकस बात का ायि कर रही हो तमु , इस तरह अपने को िमटाकर!”
“ ायि तो म अपनी दुबलता का कर रही हँ, च दर!”
“दुबलता?” च दर ने सुधा क अलक को घटाओं क तरह िछटकाकर कहा
“दुबलता-च दर! तु ह यान होगा, एक िदन हम लोग ने िन य िकया था िक हमारे यार क
कसौटी यह रहेगी च दर, दरू रहकर भी हम लोग ऊँ चे उठगे, पिव रहगे दरू हो जाने के बाद
च दर, तु हारा यार तो मझु म एक ढ़ आ मा और िव ास भरता रहा, उसी के सहारे म अपने
जीवन के तफू ान को पार कर ले गयी; लेिकन पता नह मेरे यार म कौन-सी दुबलता रही िक
तमु उसे हण नह कर पाये...म तमु से कु छ नह कहती मगर अपने मन म िकतनी कंु िठत हँ
िक कह नह सकती पता नह दसू रा ज म होता है या नह ; लेिकन इस ज म म तु ह पाकर
तु हारे चरण पर अपने को न चढ़ा पायी तु ह अपने मन क पजू ा म यक न न िदला पायी,
इससे बढ़कर और दुभा य या होगा? म अपने यि व को िकतना गिहत, िकतना िछछला
समझने लगी हँ, च दर!”
च दर ने ना ता िखसका िदया अपनी आँख म झलकते हए आँसू को िछपाते हए चुपचाप बठै
गया
“ना ता कर लो, च दर! इस तरह तु ह अपने पास िबठाकर िखलाने का सुख अब कहाँ नसीब
होगा! लो ” और सुधा ने अपने हाथ से उसे एक नमक न सेव िखला िदया च दर के भरे
आँसू सुधा के हाथ पर चू पड़े
“िछः, यह या, च दर!”
“कु छ नह ...” च दर ने आँसू प छ डाले
इतने म महरािजन आयी और सुधा से बोली, “िबिटया रानी! लेव ई नानखटाई हम क है से
बनाय के रख िदया रहा िक तोके िखलाइबे!”
“अ छा! हम भी महरािजन, इतने िदन से तु हारे हाथ का खाने के िलए तरस गये, तमु चलो
हमारे साथ!”
“िहयाँ च दर भइया के कौन देखी? अब िबिटया इनहँ के याह कर देव, तो हम चली तोहरे
साथ!”
सुधा हँस पड़ी, च दर चुपचाप बठै ा रहा महरािजन िखचड़ी डालने चली गयी सुधा ने
चुपचाप नानखटाई क त तरी उठाकर एक ओर रख दी-च दर चुप, अब या बात करे ! पहले
वह दोन घंट या बात करते थे! उसे बड़ा ता जुब हआ इस व कोई बात ही नह सझू ती
है पहले जाने िकतना व गजु र जाता था, दोन क बात का खा मा ही नह होता था
सुधा भी चुप थी थोड़ी देर बाद च दर बोला, “सुधी, तमु सचमचु पजू ा-पाठ म िव ास रखती
हो...”
“ य , करती तो हँ, च दर! हाँ, मिू त ज र नह पजू ती, पर कृ ण को ज र पजू ती हँ अब सभी
सहारे टू ट गये, तमु ने भी मझु े छोड़ िदया, तब मझु े गीता और रामायण म बहत स तोष िमला
पहले म खुद ता जुब करती थी िक औरत इतना पजू ा-पाठ य करती ह, िफर मने सोचा-िह दू
नारी इतनी असहाय होती ह,ै उसे पित से, पु से, सभी से इतना लांछन, अपमान और ितर कार
िमलता है िक पजू ा-पाठ न हो तो पशु बन जाये पजू ा-पाठ ही ने िह दू नारी का च र अभी
तक इतना ऊँ चा रखा है ”
“म तो समझता हँ यह अपने को भुलावा देना है ”
“मानती हँ च दर, लेिकन अगर कोई िह दू धम क इन िकताब को यान से पढ़े तब वह जाने,
या है इनम! जाने िकतनी ताकत देती ह ये! अभी तक िजंदगी म मने यह सोचा है िक पु ष हो
या नारी, सभी के जीवन का एकमा स बल िव ास ह,ै और इन थ म सभी संशय को
िमटाकर िव ास का इतना गहन उपदेश है िक मन पुलक उठता है ...म तमु से कु छ नह
िछपाती च दर, जब िबनती के याह म तमु ने मेरा प लौटा िदया तो म तड़प उठी एक
अिव ास मेरी नस-नस म गथँु गया मने समझ िलया िक तु हारी सारी बात झठू ी थ एक
जाने कै सी आग मझु े हरदम झलु साती रहती थी! मेरा वभाव बहत िबगड़ गया था मझु े हरे क से
नफरत हो गयी थी हरे क पर झ ला उठती थी...िकसी बात म मझु े चनै नह िमलता था धीरे -
धीरे मने इन िकताब को पढऩा शु िकया मझु े लगने लगा िक शाि त धीरे -धीरे मेरी आ मा
पर उतर रही है मझु े लगा िक यह सभी थ पुकार-पुकारकर कह रहे ह-'संशया मा
िवन यित!' धीरे -धीरे मने इन बात को अपने जीवन पर घटाना शु िकया, तो मने देखा िक
सारी भि क िकताब और उनका दशन बड़ा मनोहर पक ह,ै च दर! कृ ण यार के देवता
ह वंशी क विन िव ास क पुकार है धीरे -धीरे तु हारे ित मेरे मन म जगा हआ अिव ास
िमट गया, मने कहा, तमु मझु से अलग ही कहाँ हो, म तो तु हारी आ मा का एक टु कड़ा हँ जो
एक जनम के िलए अलग हो गयी लेिकन हमेशा तु हारे चार ओर च मा क तरह च कर
लगाती रहँगी, िजस िदन मने पढ़ा-
सवधमान् प र य य मामेकं शरणं ज
अहं वां सवपापे यो मो िय यािम मा शुच:
तो मझु े लगा िक तु हारा खोया हआ यार मझु े पुकारकर कह रहा ह-ै मेरी शरण म चले आओ,
और िसवा तु हारे यार के मेरा भगवान और है ही या...उसके बाद से च दर, मेरे मन म िव ास
और ेम झलक आया, अपने जीवन क प रिध म आने वाले हर यि के िलए सभी मझु े बहत
चाहने लगे...लेिकन च दर, जब िबनती यहाँ से िद ली जाते व मेरे साथ गयी और उसने सब
हाल बताया तो मझु े िकतना दु:ख हआ िकतनी लािन हई तु हारे ऊपर नह , अपने
ऊपर ”
बात भावना मक तर से उठकर बौि क तर पर आ चुक थ च दर फौरन बोला, “सुधा,
लािन क तो कोई बात नह , कम-से-कम मने जो कु छ िकया है उस पर मझु े जरा-सी भी शम
नह !” च दर के वर म िफर एक बार गव और कड़वाहट-सी आ गयी थी-”मने जो कु छ िकया है
उसे म पाप नह मानता तु हारे भगवान ने तु ह जो कु छ रा ता िदखलाया, वह तमु ने िकया
मेरे भगवान ने जो रा ता मझु े िदखलाया, वह मने िकया तमु जानती ही हो मेरी िजंदगी क
पिव ता तमु थी, तु हारी भोली िन पाप साँस मेरे सभी गनु ाह, मेरी सभी कमजो रयाँ सुलाती रही
ह िजस िदन तमु मेरी िजंदगी से चली गय , कु छ िदन तक मने अपने को सँभाला इसके बाद
मेरी आ मा का कण-कण ोह कर उठा मने कहा, वग के मािलक साफ-साफ सुनो तमु ने
मेरी िजंदगी क पिव ता को छीन िलया ह,ै म तु हारे वग म वासना क आग धधकाकर उसे
नरक से बदतर बना दँगू ा और मने होठ के िकनारे चु बन क लपट सुलगानी शु कर
द ...धीरे -धीरे महा मशान के स नाटे म करोड़ वासना क लपट जहरीले साँप क तरह
फँु फकारने लग मेरे मन को इसम बहत स तोष िमला, बहत शाि त िमली यहाँ तक िक
िबनती के िलए म अपने मन क सारी कटु ता भलू गया म कै से कह दँू िक यह सब गनु ाह था
सुधा, अगर ठीक से देखो, ग भीरता से समझो तो जो कु छ तु हारे िलए मेरे मन म था, उसी क
िति या वह है जो मेरे मन म प मी के िलए है तु हारा दुलार और प मी क वासना दोन एक
िस के के दो पहलू ह अपने पहलू को सही और दसू रे पहलू को गलत य कहती हो? देवता
क आरती म जलता हआ दीपक पिव है और उससे िनकला हआ धुआँ अपिव ! दीप-िशखा
निै तक है और धमू -रे खा अनिै तक? लािन िकस बात क , सुधा?” च दर ने बहत आवेश म
कहा
“िछः, च दर! तमु मझु े समझे नह ! म निै तक-अनिै तक क बात ही नह करती मेरे भगवान ने,
मेरे यार ने मझु े अब उस दुिनया म पहँचा िदया है जो निै तक-अनिै तक से उठकर है तमु ने
अपने भगवान से िव ोह िकया, लेिकन उ ह ने तु हारी बात पर कोई फै सला भी तो िदया होता
वे इतने दयालु ह िक कभी मानव के काय पर फै सला ही नह देते दंड तो दरू क बात, वे तो