ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सफनभ बजु ेर, अप्ऩय चेंगभायी नेऩारी राईन, जरऩाईगडु ी, ऩब्श्चभ फगॊ ार
इनकी ऽाभोशी
ब्जम्भेदारयमों का जो फोझ इन्होंने उिामा इधय - उधय बटकते यहते
ऩाऩा के जाने के फाद हदन - यात शाभों शहय।
ऩाऩा फनकय हदखामा, इनकी ऽाभोशी सफकु छ
मे ऽदु िोकये खाते यहे कयती है फमाॊ
ऩय उस ददष का एहसास ऩय ककसी को नज़य नहीॊ आती
होने तक न हदमा। हदर भें तो आॊसओु ॊ का
अऩने सऩनों को सभदॊ य बया ऩडा है
ककसी फक्से भें कै द कय ऩय आॉखों भें कबी
चरे गए मे दयू शहय नभी आने तक न हदमा।
न खाने की क़िक्र शामद, इनकी इसी ऽाभोशी के कायर्
न सोने की धनु इनके फाये भंे कबी शरखा नहीॊ गमा।
ऩटृ ि सॊख्मा: 52 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
आबा शभश्रा, प्रताऩगढ़, उत्तय प्रदेश
भानवता हुई शभसष ाय
भानवता शभसष ाय हुई, जफ फढ़ा ऩाऩ अधभो की।
अन्मामी अत्माचायी, हद हो गई फेशभो की।
ब्जस नायी ने जन्भ हदमा, ब्जसने हैं जीवनदान हदमा।
फहन फनी फेटी फनी, ऩत्नी फन सम्भान ककमा ।
उस नायी का जीवन छीन शरमा, जीवन छीनों फेयहभो की।
अन्मामी अत्माचयी हद हो गई फेशभो की।
इज्जजत यौंदी रटू ा सम्भान ,भन न बया तो रे री जान ।
दरयदॊ ों का कै सा मह अशबभान, नायी का कयते हंै अऩभान।
जागो औय हुॊकाय बयो, अफ सजा शभरे दटु कभो की ।
अन्मामी अत्माचायी, हद हो गई फशे भो की।
कटती गमै ा रटु ती त्रफहटमा, शासन की अॊधी है अणखमाॊ ।
चीखे उनको न सनु ाई दे, हदन यात शससकती है त्रफहटमा ।
अऩनी ताकत को ऩहचानो ,सय करभ कयो कु कभों की ।
अन्मामी अत्माचायी, हद हो गई फशे भो की।
ऩटृ ि सॊख्मा: 53 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सनु नता कु भायी प्रसाद, चम्ऩगडु ी, नागयाकाटा, जरऩाईगुडी, ऩब्श्चभ फगॊ ार
ब्जॊदगी
ब्जॊदगी का ऩता नही,ॊ हे भानव यीत है जीवन का
आज है कर नहीॊ धगयकय उिना,
ऺर् बय भें हो सकता है हाय कय जीतना,
कु छ बी, कयो वही, जो जान जाए,
ब्जसकी इच्छा है भन भंे वही खडा होता
व्मथष कयो न सभम अऩने दभ ऩय है,
हय सभम से सीख रो, ब्जॊदगी के हय भोड ऩय
जीवन के हय भोड ऩय, हहम्भत के साथ,
ऩीछे नहीॊ आगे फढ़ो, कदभ से कदभ शभराए
जीवन के सपर भोड ऩय, खडा है जो भानव,
असपरता से शभरी शशऺा, है फना ससॊ ाय के शरए ।।
साथ भें शरए चरो,
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 54 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
सौयब ऩािॊ मे , ओभनगय, सलु ्तानऩयु , उत्तय प्रदेश
भाॉ तो भाॉ
भाॉ से फडा कोई आॉचर नही,
ब्जसभें सबी खुशी शभर जाती भाॉ।
ससॊ ाय की हय ऩीडा वो,
अऩने ऊऩय सह रेती भा।ॉ
हभाये कु छ न फताने ऩय बी,
ददष हभाया सभझ रते ी भा।ॉ
यात भें खदु न सो कय वो,
कहानी हभंे सनु ाती है भा।ॉ
बखू की ऩीडा जफ हुई हभ,ें
अन्नऩरू ्ाष फन जाती है भा।ॉ
चरते - चरते धगय जाने ऩय,
रािी का सहाया फन जाती भाॉ।
ऩटृ ि सॊख्मा: 55 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
िॉ● षवशार शसहॊ 'वात्सल्म', याजीव कारोनी, ङीग, बयतऩयु , याजस्थान
तये े खत औय चादॊ
तेया हय खत सम्बार कय यखा है भनै े ककतने चचे हंै इश़् के .... सनु ाता हूॉ तुझे ।
शामद तनू े.... साये खत द़िना हदमंे। ककसी के शरए शशश, ककसी के शरए भहताफ हैं
भेने इश़् सम्बार कय यखा है अबी बी
शामद तनू े .... साये वादे द़िना हदम।ंे हय शख्स चाॊद के शरए फके याय है फताता हूॉ तझु े ।
वयना तू कबी फवे पाई ना कयतीॊ महाॉ हय कोई तुझे अऩनी भहफफू का नाभ देता हैं
औय आज भये े दशु ्भन भसु ्कया हदम।ंे चाॊद की उऩभा भें क्मा क्मा ना कहा
एक एक खत तेया सम्बार कय यखा है
तेये साये अयभान भेने सजा हदम।ें ... सनु ाता हूॉ तझु ।े
घय सजामा था भेने योशननमों से चादॊ तू कु छ कु छ भेये सनभ सा रगता है
तनहाइमों ने अफ साये दीमें फझु ा हदमें। कबी बोरा बारा, कबी गसु ्से वारा रगता है।
चादॊ जफ कयीफ था भेने कहा था उस से भेया चाॊद बी तेयी तयहाॊ ... योज शभज़ाज फदरता हैं
चर भेये चादॊ से शभराता हूॉ तुझ।े
तझु भें दाग हंै फशे क ऩय तये े चादॊ नी से कबी ऩनू भ का चादॊ , तो कबी ऩदे भें छु ऩ जाता हंै ।
योज उसके जेसे तू रूऩ फदर फदर कय आता है
कबी साभने स,े
कबी फादरों की औट से छु ऩ कय शभरता है।
ऩटृ ि सॊख्मा: 56 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
रशरता ऩाण्िमे , हदल्री
यॊग पु रवायी के
अयसा हो गमा ह,ंै कपय सावन की फहाय छामे
जभाने की फहदशों को तोङे कोई फॊहदशे तोङे
अऩनों से भहॊु छु ऩाए औय कभार हो जाए
भास्क की चादय ओढ़े अयसों से जो न हुआ
सऩनों से जी चयु ाए
वो आज हो जामे।
शसपष चायदीवायी भंे यॊग पु रवायी के आए
दोनों हाथ जोड।े औय भाहौर यॊगीन हो जाए।
इॊतजाय हैं फस उस ऩर का
कोई तो इन फढ़ू ी हथशे रमों
से प्रेभ का रयश्ता जोड।े
कपय देखो कै से अश्रु
हदम का कऩाट खोर।े
ऩटृ ि सॊख्मा: 57 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
नन्हा फारक सरयता गोमर, भयु ैना, भध्म प्रदेश
क्रोध भें आमा नन्हा फारक नवजात शशशु सी नमनों वारा
भाॊ से शस्िों का इजहाय कये हहन्द ऩय आधधऩत्म चाहता है
धीयता फहुत हुईअफ वीयता की फायी है
फझु ी हुई अब्ग्न ज्जवरन कयो शानॊ तता नहीॊ अफ शौमतष ा हदखानी है
भाॊ, शस्िों का ननभारष ् कयो फासि ख्वाफों भंे आज तक िू फा है
यार्ा की खडक से चाऊ को जगाना है
हाथ शीश यख आशीष दे दो ब्जस धतू ष शभि की ड्रंेगन हुॊकाय बये
भातृ बशू भ की राज फचाना है कामय सॊग कामयता की शभशार गढ़े
क्रोध भंे आमा नन्हा फारक
तू क़िक्र ना कय भाॊ भाॊ से शास्िों का इजहाय कये।।
शसमाय ने शये ो को ररकाया है
ऩग धया भेयी ऩावन भाटी ऩय
उन फौनो को सभझाना है
कद ब्जसका फारक जैसा
अम्फय देह को धभकाता है
ऩटृ ि सॊख्मा: 58 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
वीर्ा चौधयी, शसरीगुडी, ऩब्श्चभ फॊगार
कृ टर् - याधा (सामरी)
भन अटू ट
भोह शरमा प्रभे सॊफध
सनु ा के धनु हदरों का फॊधन
प्रभे गीत ऩषवि रयश्ता
कान्हा ़ामभ
भादक शरखे
भन भोहक कृ टर् - याधा
फासॊ यु ी की धनु ननश्छर प्रेभ गाथा
हुई फावयी
अद्भतु ग्रॊथ
याधा अभय
कान्हा
यास यचाए
गोषऩमों के सॊग
हुई तॊग
याधा
ऩटृ ि सॊख्मा: 59 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
हयंेद्र शसन्हा, चिॊ ीगढ़, ऩॊजाफ
िा् कराभ
धन्म धन्म है बायत बशू भ िा् कराभ के फताए यास्ते ऩय चरकय,
ब्जसने जन्भ हदमा िा् कराभ को । भानव सवे ा भें ------
िा् कराभ --------- अऩना जीवन सभषऩतष कयंे ।
फस एक इॊसान , कपय देश सवे ा की ओय,
जो यहते थे सदा ------ अऩने को रे चरें ।
सफ ऩय भेहयफान । अगय कु छ सीखना हो िा् कराभ से -----
ब्जन्दगी की सहजता ------ तो सफसे ऩहरे -------
कोई सीखे तो िा् कराभ से । ''ननै तकता'' को -
एक सीधा साधा इॊसान, अऩने जीवन भें ग्रहर् कयें ।
ब्जसकी फचऩन थी फहुत हीॊ भहे नतकश । ''ननै तकता'' हीॊ भरू भिॊ है -----
सॊघषष से शरु ू हुई, िा् कराभ का ।
ब्जन्दगी िा् कराभ की । औय कपय देश की सेवा को -
कपय देश सेवा से शरु ू होकय, अऩने को सभषऩतष कयें ।
भानव सवे ा तक ऩहुॊच गई । शत शत नभन,
मही तो जीवन का परसपा ह,ै शत शत नभन-
जो हभको िा् कराभ ने हदमा । िा् कराभ को ।
आइए, हभ------ एक नेक, दरयमाहदर इॊसान को ।
ऩटृ ि सॊख्मा: 60 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
िॉ● गुर्फारा आभेटा, उदमऩयु , याजस्थान
भातबृ ूशभ
भातबृ शू भ को तू अऩने कभष से ननहार कय।
उके य दे तू नाभ अऩना कार के कऩार ऩय।।
त्रफखेय दे तू योशनी, नतशभय का षवनाश कय।
रक्ष्म को तू बदे दे, उिा धनषु प्रहाय कय।। फिै े आज देशवासी, सीना अऩना थाभ कय।
प्रचिॊ शसधॊ ु रहयों स,े तू िय ना, उनको ऩाय कय। ननगाह सफकी तझु ऩे ह,ै तू शिु का सहॊ ाय कय।।
कय रे अऩनी कोशशश,ंे न फिै हाय भानकय।। कह यही है मे स्वतॊिता तझु े ऩकु ाय कय।
सखु समू ष के उदम का आसभान तू फहार कय। जान दे, मा जान र,े मे पै सरा तू आज कय।।
भातबृ शू भ के शरए, तू देह को ननसाय कय।। शभटा रयऩु की हस्ती को औय भौत का श्रगॊृ ाय कय।
भेघ सी हो गजनष ा, औय शसहॊ सी दहाड कय। वतन ऩे जो तू भय शभटा, सवसष ्व अऩना त्माग कय।।
धधक यही है ज्जवारा, तये े फाजओु ॊ भें वाय कय।। असखॊ ्म कीनतष यब्श्भमा,ॊ मे कह यही है पै रकय।
फज गई है दॊदु बु ी, तू मदु ्ध का नननाद कय। दे यहा है ध्वज सराभी बी रहय रहय कय।।
दाग दे तू गोशरमा,ॊ गोरों की फौछाय कय।। पहया गमा है हहदॊ का नतयॊगा जो तू थाभ कय।
मे ज़भीॊ औय मे परक, कह यहे ऩकु ाय कय। हो गमा है रम तू अऩने कजष को उताय कय।।
कसभ तझु े शसदॊ यू की औय दधू की तू राज भातबृ शू भ को तू अऩने कभष से ननहार कय।
यख।। उके य दे तू नाभ अऩना कार के कऩार ऩय।।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 61 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
सरयता श्रीवास्तव, फनऩष यु , आसनसोर, ऩब्श्चभ फगॊ ार
यो यही राचाय फेहटमाॉ आज
ओ भाॉ! मह कै सी तमु ्हायी सॊसाय, दहशत इस कदय छाई,
यो यही आज की फहे टमाॉ,
चीख यही आज उनकी हय एक जख्भ, अऩने ही घयों भें रगता अफ सयु क्षऺत नही,
नोच खामा कपय दरयदॊ ो ने, हय फाय औय फाय फाय हुआ मह खरे खतयनाक,
फनामा अऩनी हैवाननमत का शशकाय, हदखती अफ हय एक अजनफी भें बमानक ऩशु खखॊू ाय,
ओ भाॉ! मह कै सी तमु ्हायी सॊसाय!! ओ भा!ॉ मह कै सी तमु ्हायी सॊसाय!!
ओ भाॉ! मह कै सी तमु ्हायी सॊसाय, ओ भा!ॉ मह कै सी तुम्हायी ससॊ ाय,
फटे ी फचाओ वारे देश भें भय यही योज फहे टमाॉ, ऩीडा मे दखु दामी फमा कये ऩय कोई ना सुनवाई,
धचयहयर् हो यही आज बी द्रोऩदी की, भाता षऩता की जो थी रािरी,
हय योज नमा यावर् हय यहा सीता,
सफ तयप फस पै रा भ्रटटाचाय ही भ्रटटाचाय, छऩ कय यह गमी अफ अखफायों की एक कहानी,
ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी सॊसाय!! देख ब्जस्भ की हारत कपय बी आज़ाद घूभ यहे वो
ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी सॊसाय, ऩाऩी दयु ाचाय,
गॊगा जसै ी ऩषवि भाता महाॉ फसती, ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी ससॊ ाय!!
धयती की गोंद की सफ िॊ िक रेते, ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी सॊसाय,
कपय बी छल्री कय देते ब्जस्भ, हुआ फफयष ता याखी की बी बूर गए भमाषदा,
सीने ऩय अफ वहसी बोक यहे हधथमाय, बडे डमों ने इस कदय नोंच खामा,
ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी ससॊ ाय!!
ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी ससॊ ाय, वदी धायी ने बी क्मा खफू पजष ननबामा,
हय योज की मही दस्ता हो गमी, ऩछू ती हय एक फटे ी सुयऺा की ककससे कये गुहाय,
कोई गरी भोहल्रे फाकी ना यही, ओ भाॉ! मह कै सी तमु ्हायी सॊसाय!!
उभय की बी शसभा की ना राज यखी, ओ भा!ॉ मह कै सी तुम्हायी ससॊ ाय,
तडऩ उिती आत्भा ना कोई हदखता आसाय, योज तमु ्हायी सफ वॊदना कयते,
ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी सॊसाय!! इस सभाज भंे फेहटमाॉ बी ऩजू ी जाती,
ओ भाॉ! मह कै सी तुम्हायी सॊसाय, कपय क्मों तडऩ यही आज तुम्हायी सॊतान,
ककतने कटट हदमे होंगे क्मों तुभ हो आज राचाय?
ओ भा!ॉ मह कै सी तुम्हायी ससॊ ाय!!
ऩटृ ि सॊख्मा: 62 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
अॊजना मादव, गाब्जमाफाद, उत्तय प्रदेश
मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ तमु ्हाये फडे हो जाएॊगे
मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ तमु ्हाये फडे हो जाएॊगे भैं तभु को गाॊव की सयै कयवाऊॊ गी ।
गावॊ की बीनी बीनी सी आती शभट्टी की खुशफू से भैं तुभको ऩरयधचत कयवाऊॊ गी ।
हाॊ मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ फडे हो जाएॊगे भैं तुभको गाॊव की सयै कयवाऊॊ गी।
दादा दादी के सॊस्कायों से भैं तुभको एक भहान इॊसान फनाऊॊ गी ।
हाॊ मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ फडे हो जाएॊगे भैं तभु को गाॊव की सयै कयवाऊॊ गी।
ताराफ से आती पू र की खुशफू से उस हदन भैं तुभको ऩरयधचत कयवाऊॊ गी।
हाॊ मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ फडे हो जाएॊगे भंै तभु को हभ गाॊव की सयै कयवाऊॊ गी।
फगीचे भें रगे हय ऩौधे से भैं तभु को उस हदन ऩरयधचत कयवाऊॊ गी ।
हाॊ मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ फडे हो जाएॊगे भैं तभु को गाॊव की सयै कयवाऊॊ गी।
फगीचे भें ऩौधे रगाना उस हदन भंै तभु को फताऊॊ गी।
हाॊ जफ मे नन्हे नन्हे से ऩग फडे हो जाएॊगे भैं उस हदन तभु को गावॊ की सयै कयवाऊॊ गी।
गाॊव की शभट्टी की कीभत से उस हदन भंै तुभको ऩरयधचत कयवाऊॊ गी।
हाॊ मे नन्हे नन्हे से ऩग जफ त फडे हो जाएॊगे भंै तुभको गावॊ की सयै कयवाऊॊ गी।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 63 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
अचनष ा षवश्वकभा,ष न्मु िु वासष डिवीसन चाम फगान, जरऩाईगुडी, ऩब्श्चभ फगॊ ार
चाम ऩत्ती औय भजदयू
हभायी ब्ज़न्दगी का अहभ हहस्सा ह,ै
आजीवन खत्भ न होने वारा ककस्सा है।
ब्जसे एक फच्चे की तयह,
प्रेभऩवू कष उगामा है हभन,े
हय हानन से फचामा है हभन।े
जर, धऩू के शभश्रर् औय
खाद्म, भर, से जगामा है।
गोटी से अिाहयह भहहने फाद जफ ककसरम फनती ह,ै
तफ होिों ऩय एक फडी भसु ्कान णखरती है।
क्मोंकक इन्हीॊ ऩब्त्तमों से हभायी उम्भीद जगती ह,ै
आणखय मही हभाया ऩेट जो बयती है।
चोट बी अगय रग जाए तो दयू नहीॊ होते इससे
प्रभे भंे इज्जज़त की बी होते है कु छ हहस्स।े
महाॉ ब्ज़न्दगी बरे ही भडु ी हुई है कटटों स,े
रेककन बावनाएॊ जडु ी हुई है शस़िष इन्हीॊ ऩब्त्तमों स।े
चाहे तो महाॉ से दयू कहीॊ ननकर सकते है!
अऩनी दनु नमा अरग फसा सकते ह,ैं
रेककन मे चाम की ऩब्त्तमाॉ हभ,ें
अऩने प्रभे की िोय से फाॊधे यखती है।
प्रभे का एक अनोखा फॊधन ब्जसभंे
प्रेभ है तो कटट बी,बखू है तो योटी बी है।
ऩटृ ि सॊख्मा: 64 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सशु ीर कु भाय शसहॊ , कोरकाता, ऩब्श्चभ फॊगार
करभ
़रभ तुभ न होते तों ़रभ तुभ न होते तो
न मे कषवता होती न 'भ'ैं , देश को 'भ्रटटाचाय' से अवगत कयाता कौन
न सजावट की दनु नमा होती , देश कक 'गरयभा औय एकता' फनाए यखता कौन
न शरखावट का 'भ'ंै । मदु ्ध - बशू भ भंे 'वीयों की गाथा' गाता कौन
़रभ तुभ न होते तो ़रभ तुभ न होते तो
न 'भ'ैं होता, न भये े होने का प्रभार् । तमु ्हाये अरावा भेयी ऩहचान फताता कौन
ब्जता यहा वषों 'भ'ैं साहहत्म के इस यर् - बशू भ भें
ऩय इस करा से ऩरयचम कयाता कौन भये ा हधथमाय फनता कौन
सोच यहा था कफ से 'भ'ैं ़रभ तुभ न होते तो
ऩहचान फनना शसखराता कौन
़रभ तभु न होते तो
़रभ तुभ न होते तो भझु े "भ"ंै फनाता कौन
फषु द्धभानों का साथ देता कौन भझु े "भ"ंै फनाता कौन
दशरतों को उसका हक हदराता कौन
ायीफों का सहाया फनता कौन
ऩटृ ि सॊख्मा: 65 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
िॉ• सी• ऩी• श्रीवास्तव "आहदत्म अशबनव", बयवायी, कौशाम्फी, उत्तय प्रदेश
फहेशरमा
कबी - कबी फस
ऩखॊ कतय देने के फाद बी चाया भें कु छ ऐसा
ऩऺी थोडी ऊॉ चाई तक भनबावक - भनभोहक - भादक तत्व
उडते हंै ---- शभरा देते हैं कक
उडने के हौसरे से के सय सयु शबत भहक से ही
कु छ दयू आकाश भें उनका भन बय जाता है
षवचयर् कय ही रते े हंै ---- औय
वे ऩखॊ उिा - उिा कय
इसीशरए षऩजॊ ये भंे चायों तयप घभू ते हैं
आजकर फहेशरमा ने फहेशरमा के इशाये ऩय
नमा तयीका ईजाद ककमा है धयती ऩय चोंच ऩटक - ऩटक कय
ऩॊख नहीॊ काटते बायत भाता की जम फोरते हंै ----
षऩजॊ या बी फॊद नहीॊ कयते
चायो तयप ऩहया बी नहीॊ िारते
ऩटृ ि सॊख्मा: 66 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
ऩावतष ी कान,ू हेशभल्टनगॊज, अशरऩयु द्वाय, ऩब्श्चभ फॊगार
हाॉ, फस इसी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी
फनती औय त्रफगडती ख्वाफ हैं ब्जदॊगी , तो कबी ककसी के सऩने त्रफखयते देखा।
हय योज नई उम्भीदे जडु ने की ककताफ ह,ैं हाॉ फस इसी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी,,
कहीॊ नपयत देखी कहीॊ प्माय देखा।
ब्जदॊगी। कहीॊ भतरफ से बया ससॊ ाय देखा,
कहीॊ ददष कहीॊ खुशशमा,ॉ
कहीॊ आश कहीॊ षवश्वास। कही ऩर बय भें जीवन सॉवयते देखा।
हाॉ फस इसी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी,, तो कहीॊ ऩर बय भंे त्रफखयता हुआ ससॊ ाय देखा,
कबी मह दो ऩर की खुशशमाॉ देकय हॉसना
हाॉ फस इसी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी,,
शसखाती ह,ंै कहीॊ अऩनो को फगे ाने हो जाते देखा,
तो कबी गभ देकय योना बी शसखाती हैं। तो कहीॊ फगे ानों को अऩने हो जाते देखा।
हाॉ फस इसी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी,, हाॉ फस इसी का नाभ ह,ंै ब्जदॊगी,,
कबी फन जाती हंै ककसी के सय का ताज, सकायात्भक औय नकायात्भक
तो कहीॊ कोई दाने - दाने को हंै भोहताज।
इन दो शलदो की ऩहेरी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी।
हाॉ फस इसी का नाभ ह,ैं ब्जदॊगी,, हा,ॉ फस इसी का नाभ है ब्जदॊगी
कबी ककसी के सऩने फनते देखा,
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 67 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
यॊजना शभश्रा, कानऩयु , उत्तय प्रदेश
गोऩी का षवयह जफ ननै न फीच फसे षप्रमतभ,
तो देखॊू क्मा औय बरा जग भ,ें
दृग त्रफन्दु फहे जफ ननै न स,े रगे पू र सी कोभर याह हभ,ंे
छषव धशू भर धशू भर होने रगी, बरे चाहे हों काॊटे त्रफछे ऩग भ,ंे
भन ऩीय उिी अनत तीव्र फडी, षवयह की मे ऩावन अब्ग्न जरी,
यसयाज की माद शबगोने रगी, तफ साया षवकाय जरा भन का,
ननत आकु र व्माकु र सा भथॊ न, अफ हुई है सभाधी की सी दशा,
उय भंे चरता हदन - यात सखी, ज्जमों भोऺ शभरा हो जीवन का,
हभंे आती है माद सदा उनकी, अफ कौन जतन हभ ऐसा कयंे,
भसु ्कान बयी हय फात सखी, कक श्माभ हभंे शभर जाएॊ सखी,
उय फीच फसे हंै सरोने षऩमा, कु छ औय बी अवगुर् शषे हों तो,
कु छ औय नहीॊ भन बाता ह,ै आ कयके वो हभको फताएॊ सखी
हदन यात यहे छषव ननै न भ,ंे
फस प्रभे का योग सहु ाता ह,ै
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 68 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
अफरा नहीॊ सफरा सोनभ कु भायी, भधऩु यु , झायखॊि
फेहटमों को ही भजफतू फनाना होगा। कहाॉ फचगे ा वो भहहषासयु ,
ऩयेशाननमों से खुद को स्वमॊ ही फचना होगा। कहाॉ छु ऩगे ा वो दटु कभी दटु कय।
कोभरता के आवयर् को छोडकय, भन को फरु दॊ फनाना होगा,
किोय आवयर् ऩहनाना होगा। फेटी भें आत्भषवश्वास जगाना होगा,
क्मों इॊतजाय यहेगा उसको, षवयोधधमों के षवरुद्ध शस्ि फनाना होगा।
स्व को ही सऺभ फनाना होगा। कपय ना होगी मे नसृ शॊ वायदात,ें
हभ चते ेंगे जग सॊबरेगा, ना अब्स्भता की राज रटू ंेगी,
ऩहरे घय की ही फहु - फहे टमों से ना भाताएॊ इॊसाप भागॉ ंेगी,
नवीन ऩहर कयवाना होगा। ना सभाज फिै िकॊ ा षऩटेगा।
रेरकायेगी झासॉ ी की यानी, जफ फटे ी फदरेगी,जग फदरगे ा।
यर्चॊिी - सी दगु ाष फनकय, सभाज की रूऩयेखा फदरेगी।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 69 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
कॊ चन ज्जवारा कॊु दन, यामऩयु , छत्तीसगढ़
भंै चाहता हूॉ तुभ ऩानी ऩय ऩानी शरखो
कर की छोडो आगे की कहानी शरखो
अऩने आज की शाभ को सहु ानी शरखो
कोई साथ नहीॊ देगा मे शरखकय रे रो
तुभ अके रे ही दरयमा की यवानी शरखो
फनाओ कु छ अऩना तुभ ऐसा ककयदाय
अऩने फाये भंे सफकी भॊहु जफु ानी शरखो
ऩत्थय ऩय ऩत्थय तो कोई बी शरख रेगा
भंै चाहता हूॉ तभु ऩानी ऩय ऩानी शरखो
ऩटृ ि सॊख्मा: 70 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
यषवकान्त सनाढ्म, बीरवाडा, याजस्थान
हभें जीवन भंे क्मा तराशना है ?
अगय तराशना है हैवाननमत का तबी होगा नाश
जीवन भें कु छ जफ इॊसान को इॊसान सभझ
तो प्रेभ तराशशए !
कये उनभें भानवता की तराश !
वयना मह जीवन हो जाएगा सॊवेदनाएॉ तराशशए !
शटु क भरुस्थर !
चनै औय स़ु ू न तराशशए ।
अऩने बीतय के आनदॊ को तराशशए,
स्वमॊप्रकाश रूऩ धरयए
दसू यों को आह्राद देने हे प्रकाश के अभतृ ऩिु ,
की षवधधमाॉ तराशशए !
जीवन भें ननहहत अखूट
ककतने सनु ्दय यॊगो भे सबॊ ावनाओॊ को तराशशए !
णखरता है वन भंे ऩराश !
आऩकी मह तराश जीवन को
उसकी यॊगीननमों से कीब्जए चीन्हेगी ।
उभॊग की तराश !
भानवता को उभधॊ गत कयेगी !
हताशा को करयए षवदा
ऩदै ा कीब्जए आशा का प्रकाश !
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 71 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
षप्रमा ऩाॊिमे , सलु ्तानऩयु , उत्तय प्रदेश
याजनीनत का पयेफी भखु ौटा
महाॊ कोई नहीॊ मोगी महाॊ फिै े है सफ ढोंगी
है फढ़ती हय घडी रारच फने फिै े है सफ रोबी
बये भन भंे हजायों ऩाऩ कयते धभष की फातंे
उन्हें क्मा धभष भारभू है जो कयते अधभष की फातंे
है िू फे भासॊ भहदया भें फिै कय दावॊ रगाते
कबी भहॊ दय कबी भब्स्जद भें है दॊगे को बडकाते
रगा कयके भखु ौटा नेक फनने का ऩयू े दनु नमाॊ भें वो घभू े
गयीफों का खनू ऩीके वो अऩनी भस्ती भें जा झभू े
फनेंगे कु छ इस तयह से शयीप कक उनसा नके ना कोई
फने इज्जजत के िे के दाय उनसा इज्जज़तदाय ना कोई
फढ़ाने वोटों को अऩने छोटी हद तक वो धगय जाते
फना जनता को वो उल्रू झिू े वादों से है फहराते
कबी शशऺा कबी योटी कबी है स्वास्थ्म को यखते
कबी योजगाय का झाॊसा दे मवु ाॊ से तारी थारी फजवाते
है जनता को सबी रटू े औय झिू ा प्माय हदखराते
फना के फवे कू प उनको वो खदु जाके भौज उडाते
हदखावा दान का वो कय सफकी सहानबनू त है ऩाते
उन्ही का ऩसै ा रके े वो उन्हीॊ को कजदष ाय है फनाते
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 72 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
याधा गोमर, षवकासऩयु ी, हदल्री
शतयॊजी चार
हय कोई महाॉ ऩय के वर शतयॊजी चारंे खेर यहा है।
अऩना ही अऩनों के जीवन से खेर यहा है।
याजनीनत भंे तो शतयॊजी चारें चरती यहती हंै।
ककॊ तु बाई-बाई भें बी शतयॊज की चारें चरती हंै।
शतयॊज के खेर भें याजा नर ने अऩने याज्जम को गवाॉ हदमा।
दमु ोधन की शतयॊजी चारों ने क्मा - क्मा न कया हदमा।
आज देश ऩय फहुत फडी षवऩदा आई है।
सबी ऩाहटषमों से कयफद्ध फस इक दहु ाई है।
इस षवऩदा के सभम चार शतयॊजी छोडो।
आज देश के हहत भें हदर से हदर को जोडो।
एक तयप कोयोना ने फफाषद ककमा है।
उधय ऩडौसी ने बी षवश्वासघात ककमा है।
कु छ अऩने बी शतयॊजी चारें खेर यहे हंै।
नहीॊ देश की कपक्र.. राब ननज सोच यहे हैं।
एक भहाभायी ने ककतना कहय भचामा।
फारयश के प्रकोऩ ने ताण्िव खूफ भचामा।
पसर हुई फफाषद कयोडों फेघय हो गमे।
ऐसे भें बी कु छ के वाये न्माये हो गमे।
ऐसे कहिन सभम भें तो एक सयु भें फोरो।
कयो नई शरु ुआत देशहहत भें सफ फोरो।
शतयॊजी चारों से अऩना नाता तोडो।
आज देश के हहत भें हदर से हदर को जोडो।
ऩटृ ि सॊख्मा: 73 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
याजायाभ स्वर्कष ाय, फतनष फाजाय, फीकानये , याजस्थान
रुऩ ककशोयी
रूऩ ककशोयी चॊद्र चकोयी मे फतरा तू कौन है औय षवश्व सॊदु रयमाॊ तो भानो कक टके सयै त्रफकती
फाय फाय ऩछू ा ऩय यहती भौन है । सबृ ्टट की सॊदु यता सायी ईश्वय ने तझु भें बय दी
उषा ककयर् सी हदव्म राशरभा तेये चहे ये ऩय ब्जस सजकष ने तझु े यचा उस कराकाय ने हद कय दी
छाई ।
उज्जज्जवर धवर चादॊ नी भें णखरती है तेयी ब,ू ऩातार औय अॊतरयऺ भंे नहीॊ कोई तये ा सानी
तरुर्ाई भझु े रगे कक ईश्वय को बी होती होगी हैयानी
बार सभनु ्नत, गार गुराफी, ननै नशीर,े फमन रौककक नहीॊ अरौककक साये तेये आगे गौर् है
सयु ीरे फाय - फाय ऩछू ा ऩय यहती भौन है ।
के सय क्मायी, अभतृ झायी, ओि यसीर,े अॊग कहीॊ भखभरी कामा है तो कहीॊ येशभी कपसरन है
गिीरे कहीॊ सकु ोभर स्ऩशष है कहीॊ भगृ ी सी धचतवन है
तॊू फसन्त की भहा नानमका तॊू है पू रों की यानीकार असीशभत, ऩथृ ्वी षवऩरु ककसका कोई यखे रखे ा
तॊू भघे ों भंे सदा भचर कयती वषाष की अगवानी एक फात तो तम है तुभ सा कोई अन्म नहीॊ देखा
तॊू तो सदा ऩरू ्ष रगती है सदा सयु ॊगी भस्ती भंे शामद तॊू है रूह ककसी की जो सचभचु बयभाई थी
चौथाई है, आधी है मा ऩौर् है कई हजायों वषष ऩवू ष जो इस ऩथृ ्वी ऩय आई थी
फाय - फाय ऩछू ा, ऩय यहती भौन है । इस अनन्तकार सागय भंे भलू ्मवान तॊू गौहय है
उस इकरौती ऩयभ ् सदॊु यी की तॊू भाि धयोहय है
सॊदु यता की इस नगयी भें एक अरौककक छामा जहाॊ सबी भें षवषभ षवकृ नतमाॊ वहाॊ तॊू ही सभकोर् है
है फाय - फाय ऩछू ा ऩय यहती भौन है ।
अॊग - अॊग भें भादकता है धचय मौवन की
रूऩ ककशोयी चन्द्र चकोयी मे फतरा तू कौन है ।।
भामा है
यॊबा औय भेनका तये े आगे कहीॊ नहीॊ हटकती
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 74 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
भौ● मसू ़ु ि यजा, सबु ाष षवहाय, हदल्री
क़ितयत औय इॊसान
चरो जहाॊ बी तो यऽते स़िय के साथ चरो मे कोहसाय फदर िारे सॊग येज़ों भंे
मे कामनात जहाॊ हभने शफ गजु ़ायी है मे नदहदमों ऩे जो इक फाये आफ िार हदमा
न जाने कोनसी याहों भंे काभ ऩि जाए न सोचा तुभने के क़ितयत ऩे ककमा गजु ़यती हे
ओय आणऽयश हभंे उस दभ उदास होना ऩिे न भाॊगा तुभसे कबी कु छबी क़ितयत ने
मे चाहती हे कक इनसान भझु से प्माय कये
मे जॊगरात, मे दरयमा, मे कोहसायो दयख्त
सबी के सीनों को ज़ख़्भी ककमा हे इॊसाॊ ने हज़ाय फाय कये औय हजाय फाय कये
मे फढना महॊू ी नहीॊ दयजा ए हयायत का अगय मही यहा दस्तयू आमेगा वो हदन
मे चीख चीख के कहते हंै हभस,े ाौय कयो कक सासॊ रने ा बी दशु वाय होगा इनसाॊ को
कहीॊ तुम्हाये अ़ाभर भंे ज़रूय ऽाभी हे औय ऐक भतफष ा तभु को फताम देता हूॊ
मे शोयोारु हे तयक्की के नाभ ऩय ब्जतना चरो जहाॊ बी तो यऽते स़िय के साथ चरो।
मे फेदयीा जो सीना ज़भीॊ का चीयते हो
ज़भीॊ के हदर से बी इक आह ननकरती होगी
ऩटृ ि सॊख्मा: 75 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
अशभत कु भाय याम, कृ तऩयु ा, कभयऩयु , फक्सय, त्रफहाय
भाॉ
भये े भन की आवाज मही - कक तभु सौबाग्म हभायी हो ||
जन्भ - ऩवू ष था साथ तुम्हाया औय तदन्तय साथ शभरा,
तभु ने हभको फडा ककमा है अऩना रोहू षऩरा - षऩरा,
भाॉ का सॊफोधन तझु े शभरा है तू सचभचु सफसे भहान,
उद्भव-कतषृ सॊतानो से तुभ हय सखु की अधधकायी हो |
भये े भन की आवाज मही - कक तभु सौबाग्म हभायी हो ||
वषा,ष शीत औय ग्रीटभकार भंे तभु ने गरे रगा कयके ,
हभें भकु ्त ननद्रा दी तनू े अऩनी नीदॊ गवाॊ कयके ,
तुभ रुदन - नाद सतॊ नत की सनु , हय काभ छोड अभतृ देती,ॊ
हे भाते ! के वर तुभ सदैव इस जीवन की आबायी हो |
भेये भन की आवाज मही - कक तुभ सौबाग्म हभायी हो ||
तेयी उॊ गरी ऩकडी सफने कपय चरना तमु ्हीॊ शसखाती हो,
आॊगन भंे ऩग - ऩग ऩय चरकय धगयने से हभंे फचाती हो,
धगयते - धगयते फाहंे देकय, कपय उिा चमु ्फनों से बयकय,
ककतना ख्मार कयके भाता ! सफकी ब्जॊदगी सॉवायी हो |
भेये भन की आवाज मही - कक तभु सौबाग्म हभायी हो ||
तूने ऩारा, फडा ककमा, कपय अच्छा - फयु ा फताती हो,
षवऩदा की हय घडडमों भें ऩहरे माद तमु ्हीॊ तो आती हो,
हय दोष ऺभा कय देती हो, फस प्माय रटु ामा कयती हो,
इस प्माय रटु ाने के कायर् हे भाॉ ! तुभ सफसे प्मायी हो |
भये े भन की आवाज मही - कक तुभ सौबाग्म हभायी हो ||
ऩटृ ि सॊख्मा: 76 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
त्रफना जे सचदेव, भोयफी, गजु यात
वो रम्हे
थोिी सी भस्ती, प्माय बया ऩगैं ाभ,
ननकर चरे हदर के साथ,
वो भस्ती बये रम्हे, प्माया सा साथ,
फन फेिी भंे नततरी,
ऊि चरी गगन की औय
गनु फिै ी सऩनो के सगॊ ,
खरु गमे ननै ,
प्माय बया वो चने ,
ऊि चरी नततरी
औय,
कपय से वही गुनगनु ....
शभर जामे वही कही,
वो भये ा गरु शन ......
हय एक रफ्ज,
भेयी रहु तरे साही फनके
करभ से टऩके ;
भये ी रुहको चने सा रग,े
ब्जगय भंे एक सकु ू न सा रगे
ऩटृ ि सॊख्मा: 77 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
आहदवासी सयु ेश भीर्ा, फाॊसवाडा, याजस्थान
तुभ थ,े तुभ हो, औय यहोगे
तुभ थ,े तुभ हो, औय यहोगे
ऩय मे सनु ो !
फोहत सी फातंे जो कहनी है तभु स,े चऩु - चाऩ तेये जाननफ से होकय गजु ़य जाएॉग,े
ऩय अफ शामद कबी िीक से कह बी नहीॊ ऩय सय उिा कय तुम्हायी तयप नहीॊ देखंेग,े
ऩाएॊगे,
जज़्फात ब्ज़ॊदा है त्रफल्कु र ऩहरे की तयह हा,ॉ
ऩय अफ जता नहीॊ ऩाएॊग,े हय भॊहदय भब्स्ज़द जाएॊगे
औय खफू सायी दआु ॊए तेये शरए भागॊ रेंगे
वही तमु ्हायी ऩयु ानी फातें दोहयाएॊगे खदु से फस अफ तझु े अऩने शरए नहीॊ भाॉगेंग,े
भगय अफ तुझसे दोफाया फात कयने नहीॊ आएॊग,े
एक फजॊ ाया फनकय अऩनी ऩयू ी ब्ज़न्दगी,
खुश तो यहेंगे तये े साभने बी, तये े फगैय बी महॉू ी गजु ़ाय दंेग,े
ऩय खुश नज़य नहीॊ आमेगं ,े ऩय तेये घय का आसभान छीन कय
हभ अऩने घय का छत नहीॊ फनाएॊग,े
हय शसतभ से अके रे ही गजु ़य जाएॊगे
ऩय तुझे कबी आवाज़ नहीॊ रगाएॊगे , चाहे नज़ये तझु े देखने को तयस क्मों न जाए
भसु रसर तझु े ढूॊढ़ते कपयेंगे
मादों भें फसा के यखेंगे तुझे ऩय तये े नए घय का ऩता ककसी से नहीॊ ऩछू ंे गे।
अफ कबी तये े साथ सऩने नहीॊ सजाएॉग,े
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 78 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
गीता ऩरयहाय, अमोध्मा, उत्तय प्रदेश
कशभकश
ऩयेशाननमाॉ
खदु चरी जामंगे ी
गय दाभन
भंे उम्भीद, जज़्फात
मे नाभ न हों
घाव टीसंगे े नहीॊ
भयहभ जो न हो।।
आग फझु गे ी कै स?े
घय का धचयाग
ही जफ घय जराने वारा हो
ककस्भत के हैं खेर ननयारे
फघनखे रगाए शभरते गरे
ढूॊढती यही ब्जॊदगी
अऩनों का प्माय
हाशसर हुए छरावे
जड सॊवेदनाएॊ।।
ऩटृ ि सॊख्मा: 79 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
यॊजना फरयमाय, भोयाफादी, याचॉ ी, झायखॊि
रेखन
रखे न वॊदन है, अऩरष ् है, अचनष है, तऩरष ् फन जाती है कबी अॊगायों की दहकती रऩट,ंे
है, कबी है त्रफछा देती प्रभे ऩटु ऩों की अशआय है!
साधक की साधना का भधभु म आचभन
है ! जान की फाज़ी रगाकय यखते हभें भह़िू ज़ जो,
दीऩ नवै दे ्मों से सजी ऩजू ा की उन जाफॉ ाज़ों को हदर खोर कयती आबाय है !
थारी है, नन्सदॊ ेह कदाचायी, स्वचे ्छाचायी ऩनऩ यहे महा,ॉ
इन्द्रधनषु ी इिों से ऩगी पू रों की क्मायी धधक्काय प्रहाय भंे बी रखे नी महाॉ ऩीछे कहाॉ!
है ! बावों की सशभधा शरए ननत्म नमे आमाभों भ,ें
चते न-अचते न की जानी अनजानी कहानी ह,ै हो यही ननत्म होभ रखे नी, फगे ैयतों ऩडे सो यहे हैं!
खदु से ही खुद की ऩहचान कयाती ऻानी है मही षवषम सतॊ ाऩ का, कु छ रगे जागयर् भ,ंे
है ! कु छ सो यहे गहन ननद्रा भ,ें मा रगा यहे आग हंै !
ऩयत दय ऩयत सहेजती तहों की यवानगी फारयश की धरु ी शजय सी, रखे न है अजय अभय,
है, हो चाहे ब्जतनी फयसात, उबयती उतनी हो ननखय!
धगयह दय धगयह खोरती ह्रदम की कहानी सोना तऩकय आग भ,ें शसखा हदमा ननखय जाना,
है! नघस जाए नहीॊ ऩयवाह, तशू रका नहीॊ है कभ ज़या!
यीनतमों कु यीनतमा की मह खरु ी तहयीय ह,ै रेखन वदॊ न है, अऩरष ् है, अचनष है, तऩरष ् है,
आईना हदखाती सधु ायकों की मे तदफीय है साधक की साधना का भधभु म आचभन
!
है !
ऩटृ ि सॊख्मा: 80 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
िॉ• यानी गपु ्ता, सयू त, गजु यात
ब्जन्दगी
अजीफ हैं मे ब्ज़न्दगी।
दौरत से इसकी ऩहचान है
ओहदे से इसका नाभ है
दौरत से फनते रयश्ते
ब्जन्दगी इसी का नाभ है
़दभ ़दभ ऩय
भबु ्श्करों का साभान हैं
दौरत को हधथमाय फनाकय
नहीॊ ककसी रयश्ते का भान है
ब्जन्दगी इसी का नाभ है।।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 81 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
नायी फेटी है सधु ीय श्रीवास्तव, गोण्िा, उत्तय प्रदेश
फहन है, भाॊ है, ऩत्नी है,
नायी के षवषवध रूऩ ह,ंै रयश्ते हंै नायी सम्भान
बायतीम सॊस्कृ नत भंे
नायी की ऩजू ा होती है। अऩभान कयते हैं ?
ऩयॊतु नारयमों के साथ साथ उन ऩय अत्माचाय कयते हैं ?
दवु ्मवष हाय, अत्माचाय बी होते हंै नहीॊ न !
नायी का सम्भान जरूयी ह,ै तो कपय हभ क्मों
रोक कल्मार्, सभाज के शरमे ब्जस कन्मा/ नायी को ऩजू ते ह,ैं
नायी का भान जरूयी है। उस ऩय तभाभ अत्माचाय बी
सोचने की जरुयत है योज ही कयते हंै।
क्मा हभ अऩने इटटों का सोधचए, षवचारयमे
नायी की ऩजू ा, सम्भान कीब्जए
अन्मथा आऩको सौगॊध है
अऩने इटटों की ऩजू ा,
सम्भान कयना छोड ही दीब्जमे।
ऩटृ ि सॊख्मा: 82 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
फडे घय की औयतंे षप्रमा गौड, याभगढ़, सोनबद्र, उत्तय प्रदेश
फडे घय की औयतंे ऩाती है खुद को
वास्तव भें फडी नही होती जफ होती है अके रे अऩने कभये भें
होती हंै वे अऩने भदो अऩने त्रफखये अब्स्तव के साथ ...
के अधीन .... योती बी नही शसफकु कय यह जाती
हदखावे की दनु नमा भंे है अॊदय ही अॊदय
यभ जाती हंै ... कही आॊखे सजू गमी तो क्मा कहेगीॊ
फना रेती हंै खुद को फाहय सवॊ दे ना षवहीन फडे रोगो से ..
सॊजी, सवयी एक खूफसयू त रोग जान रंेगे वो कभजोय है
गुडडमा .... क्मा ऩनत से भाय बी खाती है
जो अऩनी चभकती त्वचा औय सफु ह उि कय उसी के साथ आती है
से रोगो को णखचॊ ती है अऩनी तयप ऑकपस काभ ऩय ... अच्छे कऩडो के फीच
औय हॉसती है अॊदय से उजडी हॉसी अऩने भदु ाष शयीय को रके य औय भहॊगे भके अऩ
हदखता है जसै े है से छु ऩा रते ी है हय आॉसु औय शसकन ...
सफकु छ उसके हाथ ... कभय भें हाथ िारे उसका ऩनत उसके
हदखाई देती है आत्भननबयष , कानों भंे फदु फदु ाता हैं अॊगयेजी के गारी
ननबीक, ऊजावष ान औय औय कहता है हॉसने की एब्क्टॊग बी नही आती तुम्हंे
फोरती है अॊगयेजी ... औय वो सफकी तयप देख कय फेफाक औय खोऽरी
अॊदय से फेफस,असहाम भसु ्कान हॉसती है औय इतयाती है अऩने आऩ ऩय ...
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 83 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
सशु ीर सरयत, आगया, उत्तय प्रदेश
गुरू की भहहभा अऩयॊऩाय
गुरू की भहहभा अऩयॊऩाय
रगा दे हय नमै ा वो ऩाय
जहाॊ बी रगे टू टने जोडे
वह जीवन के ताय।
गुरू की भहहभा अऩयॊऩाय।
जो न हदखे ननै ो को गरु ु हदखा दे वह ऩर भें
फषु द्ध षववके की अब्ग्न जरा दे वह भन के जर भंे
अऻानों की धरू ह्रदम से देता वही फहु ाय
गुरू की भहहभा अऩयॊऩाय।
क्रोध भोह भद रोब के फधॊ न भें जफ भन फन्ध जाए
तोड के साये फॊधन गुरु ही सच्ची याह हदखाएॊ
भरै सबी धो िारे वो फनकय गॊगा की धाय
गरु ू की भहहभा अऩयॊऩाय
कर् को मह फदरे षवयाट भें षवदॊ ु को शसधॊ ु फनाए
जीवन भंे जफ जफ अॊधधमाया हो प्रकाश वह राए
फाहय बीतय दोनों साधे फनकय चतयु कु म्हाय
गुरू की भहहभा अऩयॊऩाय
ऩटृ ि सॊख्मा: 84 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
ऩजू ा यॉम, जरऩाईगुडी, ऩब्श्चभ फॊगार
दो ऩर साथ
चाय हदन की ब्ज़न्दगी भ,ें
दो ऩर साथ ननबा रते े तो क्मा था |
सखु द्ु ख तो सपय हैं ब्ज़न्दगी का,
सपय भें तुभ न घफयाते तो क्मा था |
तमु ्हाये हय ददष को सभझा भनै े अऩना,
तभु बी भझु ऩय हक जता ऩाते तो क्मा था |
सायी दनु नमा से रूिकय तुम्हाये ऩास आमे थ,े
तभु बी अऩने ददष भझु तक राते तो क्मा था |
ता उम्र सभझा हभने तभु को अऩना,
तुभ बी हभे अऩना कह ऩाते तो क्मा था |
रम्हे फदरे रहजे फदर,े
जज़्फात न फदरते तो क्मा था |
ब्ज़न्दगी के सपय भे तमु ्हें हभसपय सभझ फिै े,
तुभ फस हभयाही सभझ रेते तो क्मा था |
मु तो ददष फहुत है ब्ज़न्दगी भ,े
तभु बी थोडा दे देते तो क्मा था |
दआु ऐ तो फहुत की थी, भनै े तमु ्हाये हक भे ,
तभु फददआु ही कय रते े तो क्मा था |
चाय हदन की ब्ज़न्दगी भें ,
दो ऩर साथ ननबा रेते तो क्मा था |
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 85 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
फोधी याभ साहू, जाजॊ गीय, छत्तीसगढ़
नीदॊ नहीॊ आती है
कषव को नीदॊ नहीॊ आती है सभाज की त्रफगडी दशा देखकय।
जफ साया आरभ नीॊद भंे सोता है कषव सोचता है यात जगकय।
हय ददु षशा हय आरभ हििकता झकझोयता है उसे कु येदकय।
ऩेरोर दार सलजी अनाज के बाव भें फेतहाशा वषृ द्ध को देखकय।
कषव की नीॊद उड जाती है आवश्मक वस्तओु ॊ के बाव देखकय।
फयसात भें घय की रयसती दीवाय फच्चों की ऩढ़ाई पीस देखकय।
फीवी की झल्राहट पयभाइश औय फच्चों की पडपडा हट देखकय।
कषव को नीॊद नहीॊ आती है सभाज की त्रफगडी दशा देखकय।
कषव ऐसा जीव जो खदु से ज्जमादा कयता दनु नमा की कपक्रय।
कषव चनै से सोएगा तो जागेगा कौन त्रफगडती दशा का है क़िकय।
सच है प्माये कषव धभष ननबाना कहिन है इस फात का हय ऩर है ब्जकय।
जफ रोग हॊसी ख्वाफों भें यात चैन से सोते हंै खुशी शभजाज फन कय।
तफ कषवयाज जागकय यात यात शरखता है हय खुशशमाॊ फेचकय।
नीदॊ तो ऐसे आशशकों की बी नहीॊ उडती हय सभस्मा सोच कय।
सभाज की त्रफगडी दशा को कै से हदशा दंे नीदॊ उडती है मह सोच कय।
कषव को नीदॊ नहीॊ आती है सभाज की त्रफगडी दशा देखकय।
शलद भुहावये कषवता से भहर खडा कयता है कषव की ऩनै ी नजय।
कषव की फानॊ गी सोमा वो खोमा जागा सो ऩामा फस मही सोचकय।
तॊग हार भें बी खशु हार है ऩय फीवी को बा यहा फस साजो शसगॊ ाय है।
फीवी की हदन – फ - हदन फढ़ती डिभाॊि ऊऩय से फढ़ती जाती तकयाय।
फीवी की गयु ाहष ट यात बय शरखो ककस फात की तयक्की फोरी भहुॊ भोडकय।
भहॊगाई गयीफी बुखभयी फेयोजगायी ऩय रेख क्मो शरखते हो नीॊद फेचकय।
कषव फोरा देश सभाज याटर कक भझु े धचतॊ ा है भत टोको खफयदाय।
कषव को नीॊद नहीॊ आती है सभाज की त्रफगडी दशा देखकय।
ऩटृ ि सॊख्मा: 86 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
कल्ऩना त्रिवेदी, शकु ्रागॊज, उन्नाव, उत्तय प्रदेश
तुभ रडकी हो
तुभ रडकी हो तुभ ियना सीखो,
तभु रडकी हो तुभ सबॊ रकय चरना सीखो,
तुभ रडकी हो सफ कु छ सहना सीखो,
तुभ रडकी हो कु छ बी न कहना सीखो,
तभु रडकी हो साये तौय-तयीके सीखो,
तभु रडकी हो तमु ्हें ससयु ार जाना ह,ै
तुभ रडकी हो तुम्हें ऩयामो को अऩना फनाना ह,ै
तुभ रडकी हो तुम्हंे घय सॊबारना ह,ै
तुभ रडकी हो तुम्हें फच्चे ऩारना ह,ै
फशे क आज रडककमाॉ भहहरा-सशब्क्तकयर् की याहों भंे फहुत आगे फढ़ी ह,ै
ऩय आज बी फहुत सी रडककमा,ॉ तभु रडकी हो के फॊधनो भंे कै द ऩडी ह,ै
तभु रडकी हो के फधॊ नो से ननकरने का जफ वो रडककमाॉ अऩने हौसरे से साहस हदखामेगी,ॊ
तबी वो तभु रडकी हो के फधॊ नो से आजाद हो ऩामेगी,ॊ
तबी वो रडककमाॉ खुद से खदु की सशक्त ऩहचान फना ऩामेगीॊ।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 87 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
भकु े श शसघॊ ाननमा, चाम्ऩा, छत्तीसगढ़
अफ नही आते कहीॊ छत ऩय ऩरयदॊ े
क्मा फताएॉ क्मा हुआ है अफ खुशी को कय शरमा फफाषद हहस्सा उम्र का इक
कै से दें इल्ज़ाभ कु छ बी इस सदी को औय ककतना दें तवज्जजो अजनफी को /7/
/1/
गब्ल्तमाॊ कु छ तो मकीनन ही हुई है चाॊद है शभट्टी का इक धरे ा सयीखा
जो बगु तना ऩड यहा है आदभी को मे भगय कहना नही तभु चादॊ नी को /8/
/2/
हभने भाना था अहभ हदर की रगी को
गय फनाना है सहर जीने का यस्ता अहशभमत तुभने भगय दी हदल्रगी को /9/
गौय कयना छोड दो तुभ फतकही को
/3/ रग यहा उनीॊदी सा सयू ज सवये े
यात बय ताका ककमे हंै क्मा ककसी को /10/
क्मा हुआ हारात त्रफगडे हैं जया तो यात शसयहाने खडे थे ख्वाफ साये
अहशभमत भत दो जया बी खुदखशु ी को /4/ ऩय इजाजत थी न आने की ककसी को /11/
प्मास सभदॊ य को बी रग सकती कबी है अफ नही आते कहीॊ छत ऩय ऩरयदॊ े
क्मा खमार आमा कबी बी मे ककसी को /5/ दाने बी यखते नही देखा ककसी को /12/
वक्त कु रयमय से कहो तो बजे दें हभ ब्जॊदगी है फे फहय फे काकपमा सी
अफ फहाने भत कयो तुभ वाऩसी को
/6/ ना भकु म्भर सा शभरा शभसया खदु ी को /13/
ऩटृ ि सॊख्मा: 88 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सीभा रोहहमा, झॊझु नु ,ू याजस्थान
ककन्नय की ऩीङा
तुभसे ऩछू ते हुए आवाज भये ी इतना बय आई, भये ी जन्भ की क्मों नही फॉटी थी कोई फधाई ।
भेये देह सजृ न की आधाय जननी भझु े ना
फताई। भै ककन्नय हुआ तो दोष भये ा तो नही था ना,
भाॉ ! तभु ने अऩने अॊश से कै से नजय कपयाई।
नो भहहने ब्जस शशशु को ऩटे भंे ऩारते ऩारत,े
हय भबु ्श्कर सह तुभने हभशे ा खुशी हदखाई। अऩने आऩसे औय इस सभाज से फहहटकृ त,
कयते हुए क्मा तमु ्हायी आॉखे नही बय आई।
घटते क्रभ भें तुभने योज हदन धगनते धगनत,े
जाने ककतनी याते भये े ख्वाफों भें जगते त्रफताई। साभान्म तन ना सही ऩय भये ा भन तो वही ह,ै
अऩने से दयू कयने का क्मों ना षवयोध जताई।
भै भहससू कयता था तेये प्माय का हय स्ऩश,ष
जफ जफ तभु भसु ्कयाकय ऩटे को सहराई। भभता की प्रनतभनू तष भझु ऩय जया ना रटु ाई,
भेये जन्भ के अऩवाद को क्मों नही फताई।
भझु े दनु नमा भें आने का सभम जफ आमा,
सफसे ऩहरे देखने को तभु फेताफ हो आई। थोङा अगय तुभ अऩना साहस हदखा ऩाती,
तो आज दय दय घभु ते ना होती जग हॉसाई।
ना नायी है ना ही कोई ऩरु ुष कोख से जन्भा,
भये े जन्भ की खफय नसष ने जफ तुम्हे सनु ाई। ब्जन खशु शमों को भै ससॊ ाय से ऩा ना सका,
उनभें खशु होकय भनै े ककतनी ताशरमाॉ फजाई।
भै तये ी फाहॉ ो भें आने को हो उिा था अधधय,
ऩय तभु ने बी भये ी क्मों नही की भॉहु हदखाई । ब्जस फधाई को भै जन्भबय तयसता यहा ह,ूॉ
घय घय जाकय स्वमॊ दी है अनधगनत फधाई।
सफके चहे ये से खुशशमाॉ कापू य कै से हो आई,
ऩटृ ि सॊख्मा: 89 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
अशबषके ऩाण्िमे , हावडा, ऩब्श्चभ फगॊ ार
स्िी जानत की आह
ब्जदॊ गी के हय भोड ऩय देती यही घय - घय की मह कहानी है,
सताई गमी वो, वो अब्ग्न ऩयीऺा वह द्षवत सबा की द्रौऩदी
कबी दहेज तो जर कय बी वो शुद्ध यही, हो गमी आज ऩुयानी है।
कबी ऩयामी फता कय तमु ्हाये अत्माचायों से
जराई गई वो। आहत होकय,अतॊ त् अफ तो छ् भाह की
ऩथृ ्वीगोद भंे सभा गई वो। फब्च्चमों का बी
वो स्िी ही थी होता महाॉ फरात्काय है,
ब्जसने सवसष ्व अऩना त्माग हदमा, 'द्रौऩदी को भानवता को शभसष ाय कय
ताकक मह ससॊ ाय चरे जीवन बय कटट शभरे' गमी फफतष ा की कहानी वो।
ऩय कपय बी मह भाॊगने वारा
कु ल्टा औय फदचरन ही 'ऩुरुष सभाज' का षऩता ही था, त्रफरख यही अफ अफराएॊ
फताई गई वो। औय योक अऩनी राज फचाने को,
'कौभुदी गदा' श्रीकृ टर् का कोहट द्ु शाशन औय दमु ोधन
अहहल्मा को ऩुिी धभष ननबा गमी वो। बये ऩडे हैं, कु दृब्टट गडाने को।
छरा तभु ने ही,
ऩत्थय बी तुभने ही फनामा! उसने तुभको षवरीन हो यही
क्मा दोष था क्मा कु छ नहीॊ हदमा ऩय भानवता औय सभ्मता
उस अफरा का भागॉ ा कबी कु छ नहीॊ, नीवॊ ब्जसकी तभु ने िारी थी,
कफ बरा मे जग जान ऩामा? अये! तुभने तो उसके अफ फहुत हुआ
वस्ि तक खीचॊ िारे, अफ नटट कयो,
ब्जस ऩनतव्रता धभष से उसे बी नतभस्तक इस अधभष की कहानी को।
झकु ा िारा वदै ेही ने स्वीकाय गमी वो! हे सवशे ्वय!
उस अशबभानी यावर् को, हे यषव रोचन!
उसकी ऩषविता ऩय मह गाथा नहीॊ है, एक फाय कपय दहु या दो,
सवार खडा कय याभामर् औय भहाबायत की भहाबायत की कहानी वो।
उसे बजे हदमा तभु ने वन को।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 90 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सीभा शभश्रा, सागय, भध्म प्रदेश
षप्रम
षप्रम जीवन शभरता एक फाय
कहो भंै तुभ तक कै से आ ऩाऊॊ !
गहन वेदना अफ भचर उिी
षवयह फहुत ऩीडादामक
कै से यज धशू र तेयी भाथ रगा ऩाऊॊ !
अऩने भन का सदॊ ेश षप्रम
तेयी रूह तक कै से ऩहुॊचा ऩाऊॊ ?
अफ औय ऩयीऺा भेयी भत रने ा
सासॊ े टू टे ,उससे ऩहरे
कय जतन कक तझु भें घरु जाऊॊ !
मह भन का फधॊ न है ऩावन
प्रत्मऺ आओ तो कु छ सभझा ऩाऊॊ !
प्रीत रगाकय फनी ऩजु ारयन !
तेयी चौखट जो न ऩाई भनैं े
भोहना ,कई जन्भों तक भैं ऩछताऊॊ
भैं ऩरकंे त्रफछामे ननहारुॊ याह तये ी
तये े दयश त्रफना मे तन छोड न ऩाऊॊ !
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 91 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
योब्जना छे िी, शसरीगडु ी, ऩब्श्चभ फॊगार
ऩरक
ऩरके झऩके तो इशाया है
ऩरके उिाएॊ तो नजाया है
ऩरके आॊखो को थाभे यखे
ऩरके आॊसू को फहाए
ऩरके खुरे तो फॊदू ों का धगयना दफु ाया है
झटू ऩरको भंे िहय न ऩाए
सच को कबी नछऩा ना ऩाए
ऩरके फदॊ हो तो कदभ िहय जाए
ऩरके खोरो तो दनु नमा जीत जाए
ऩरके झऩके तो अॊधकाय है
ऩरके उिाएॊ तो ऩयू ा सॊसाय है ..
स्वाॊग यचती है
तार से तार शभराती है
ऩतु री को नचाती है
आॊखो को सजाती है
इसके त्रफना क्मा गजु ाया
ऩरके झऩके तो इशाया है
ऩरके उिाएॊ तो नज़ाया है ...
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 92 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
षववेक शसन्हा, सफजै ोय, जभईु , त्रफहाय
आत्भननबयष बायत : एक सवार
आत्भननबयष ता क्मा है?
गाॉधी, ऩटेर, अटर औय कराभ की शरखी कहानी है? आत्भननबयष ता क्मा है?
मा भोदी, शाह औय सीतायभर् की जुफानी है? फरात्काय से सहभी रडककमों की चीऽ है? मा,
गयीफों की गयीफी ऩय ककमा गमा प्रहाय है? मा, भॊहदय, भब्स्ज़द, गुरूद्वाये भें फॉट यही बीऽ है?
वास्तव भंे अऩनी नीनतमों से ही शभरी हाय है ? ऩरु वाभा औय उयी भंे शहीद होता जवान है? मा,
एन●आय●सी● औय सी●ए●ए● ऩय रडता हहन्दू - भुस्रभान
आत्भननबयष ता क्मा है? है?
'भेक इन इॊडिमा' द्वाया षवदेशी कम्ऩननमों को फरु ाना आत्भननबयष ता क्मा है?
आत्भननबयष ता है? मा,
रोकर के शरए वोकर का भिॊ देना आत्भननबयष ता बाषर्ों से खुश हो ताशरमाॊ फजाने वारों की भासशू भमत
है? है?मा,
बायतीम भरू के नाभ ऩय षवदेशशमों को सम्भाननत भीडिमा द्वाया फेची गई झूिे सऩनों की ह़ी़त है ?
रेन की ऩटरयमों के फीच यौंदे गमे इॊसानों की राश है? मा,
कयना आत्भननबयष ता है? मा,
अऩने देश के टैरेंट को महाॉ जगह न दे ऩाना ऩदै र घय ऩहुॉचने से ऩहरे भासभू की उखड गमी साॉस है ?
आत्भननबयष ता है? आत्भननबयष ता क्मा है?
आत्भननबयष ता क्मा है? रेन भें भॉूगपरी पंे ककय जाऩान की स़िाई ऩय चचाष कयना
भतृ फच्चे को गोद शरमे योते फाऩ की ऩकु ाय है? मा, आत्भननबयष ता है? मा,
सफ कु छ देखकय आखॉ ंे फदॊ कय के वर फुयाई कयना
खुरे आसभान भें सोते रोगों की हाय है?
हजायों ककरोभीटय बूखा चरता हुआ जन सभूह है? आत्भननबयष ता है?
मा, अऩने ऩरयवाय का ऩटे ऩार रेना आत्भननबयष ता है ? मा,
व्मवस्था भंे कु चरी गमी फेफस रूह है? सोपे ऩय फैिकय घॊटो षवचाय कयना आत्भननबयष ता है?
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 93 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
प्रीनत श्रीवास्तव, फायाफॊकी, उत्तय प्रदेश
वेदना
सहना सदा यहेगा भझु ,े क्मा ऩरु ुषों का योष है सकर षवश्व भें ऩहचान है ब्जससे
भैं नायी हूॉ, तो क्मा मही हभाया दोष ह?ै उस देश को भाता कहते हैं
नाभ तो रक्ष्भी, गौयी, अन्नऩरू ्ाष फेटी फन सफको भसु ्कामा
आहद हदमे हैं रोगों न,े ऩत्नी फन घय को सजामा
शसपष भनू तष भंे ऩजू ी जाती ह,ूॉ भाॉ फन कय दरु ाय रटु ामा
फजे ्जजत हुई बयी सबाओॊ भें उसके हहस्से भें क्मा आमा?
हे भानव ! क्मों बरू गमा, सोचो तो गौय से गय क्मा उसने
नायी से ही है वजूद तये ा ब्जमा अऩना जीवन?
उसी से चरती सबृ ्टट सायी जन्भ से रेकय भयने तक
उसी से है ससॊ ाय तेया तन, भन, धन सफ ककमा सभऩरष ्
हे भानव ! षवनती है तभु से
नायी तो है फस त्माग का नाभ उसका बी कयो आदय, सत्काय
फस योक दो अफ मे अत्माचाय
गभों को सह खशु शमाॉ देती है उसे बी दो जीने का अधधकाय ।
इसे चाहहए फस सम्भान
नदी को भा,ॉ गाम को भा,ॉ
जहाॉ धयती को भाता कहते हंै
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 94 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
सन्ध्मा ऩािॊ मे , हयदा, भध्म प्रदेश
सहेशरमाॉ
माद आती हंै फचऩन की सहेशरमाॉ अॊतभनष के झयोखों भे हो जसै े बरू औय बरु मै ा।।
अशभमाॉ सी भीिी औय नीभ की ननफॊ ोरीमाॊ। माद आती है फचऩन की सहेशरमाॊ।
कयते थे सफ शभरकय अिखेशरमा,ॊ खट्टी भीिी सी इभरी कीगोशरमा।ॊ
अॉगना भंे गॊजू तीथी ककरकारयमा,ॊ ऩीऩर का ऩेड औय आभ की अभयाइमा,ॉ
ऩास आकय होती थी आॊख शभचोशरमा।ॉ छोटी - छोटी फातों ऩय रूिी रुसवाईमाॊ।
रूिकय भनाने का काभ कयती थीॊ त्रफचोशरमा।। छोटे फडे ददष की होती थी दवाइमाॉ
माद आती है फचऩन की सहेशरमा।ॊ फाटॉ रते ी थी एकदजू े की तनहाइमा।ॉ ।
कु छ फझू ी औय कु छ अनफझू ी ऩहेशरमाॊ। माद आती है फचऩन की सहेशरमाॊ।
गावॊ छोडकय शहय जा फसी अफ भजफरू यमा,ॊ हभयाज, हभउम्र, नादान हभजोशरमा।ॉ
सभम चक्र के साथ ना फढ़ ऩाई हदर की अफरगे सयगभ सी शहनाईमाॊ
दरू यमाॊ। गीत औय गज़र की रुफाइमाॉ।
सभदॊु य से गहयी औय उथरी जसै ी तार औय कु छ किोय तो कु छ होती थी सकु ु भारयमा।ॉ
तरमै ा, सखु द्ु ख की साथी एकदजू े की ऩयछाइमाॉ
माद आती हैं फचऩन की सहेशरमाॉ।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 95 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
गौयव नागया, जगाधयी, मभनु ा नगय, हरयमार्ा
नवोहदत कषव
ऺर् ककॊ धचत बी नहीॊ शभरता, उसको कै से फतराऊॊ ।
अबी अबागा जगा ही हूॉ भ,ंै उसको कै से फहराऊॊ ।।
भौन व्मथा चपु ्ऩी साध,े साधो अफ तो कु छ फोरो।
अफ खत्भ कयो मे गॊगू ाऩन, बदे जया वो चाय बी खोरो।।
ककसके उप्ऩय तुभ भयते थ,े ककसके शरए श्रॊगृ ाय कयते थे।
ककसकी फाहों भे जा जाकय,रफॊ ी रॊफी आहें बयते थे।।
इतना ध्मान एकाग्र कयके , घॊटों घॊटों फिै े यहते।
व्मथा, ऩीडा, आत्भ हार, मे सफ तभु ककसको कहते।।
तुम्हायी ब्जऻासा, अशबराषा, सखु दखु , आत्भ कथा का साथी कौन।
अये ! नव ऊजाष सचॊ ारयत भानषु , तुम्हायी व्मथा अबी बी भौन।।
रुको फताता हूॊ अच्छा नहीॊ ह,ै खुद भन ही भन ख्मार फनु ना।
एकाएक टकी रगाकय फिै ो, अषवयर ही तभु भझु को सनु ना।।
एक नवषवकशसत कषव हू,ॊ काकपरा फहुत अनोखा है।
मे करभ ऩथ ही सही है फाकी सफ कु छ धोखा है।।
करभ कामातॊ य होकय जफ जफ, अऩने ऩथ ऩय चरती है।
भेयी भौन व्मथाओॊ को मे खुद – फे - खदु ही गढ़ती है।।
भेयी आत्भ कथा, सखु दखु को, मे ऩटृ ि गाशभनी सभझती है।
भान्मवय वो श्रगॊृ ाय इस हेतु ही था, क्मॊकू क मे बी श्रॊगृ ाय से चरती है।।
भानव के सौ भखु ौटों से जफ जफ जी इतयाता है।
तफ तफ इस धया से भन ननयॊतय उिता जाता है।।
तफ कहहॊ जाकय कोई सभदु ्र, सभटे ता है एक सरयता।
करभ गौयव से झभू उिती ह,ै औय फनती है एक कषवता।।
ऩटृ ि सॊख्मा: 96 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
इस जीवन के यॊग हजाय िॉ• दीषऩका याव, फासॊ वाडा, याजस्थान
मह जीवन है, मही जीवन है ऺणर्क अऩने इस जीवन भंे
धऩू औय छाॊव की तयह नहीॊ यहे ककसी से बी भनभटु ाव
सखु औय दखु आते हैं यहे आऩस भंे अऩनाऩन
इस जीवन के यॊग हजाय इस जीवन के यॊग हजाय
जीवन के भलू ्म को सभझें
चरता यहता है जीवन आओ शभरकय कये सकॊ ल्ऩ
जन्भ के साथ आमा, धयती ऩय यहे साथ बाईचाये से
ऩयॊत,ु भतृ ्मु है अटर सत्म इस जीवन के यॊग हजाय
इस जीवन के यॊग हजाय
जीवन की ननयॊतयता भंे
देखो हय ऩर भंे
खशु शमाॊ हैं अनके
इस जीवन के यॊग हजाय
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 97 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
असरी कभाई अजीत कु भाय, गयु ारू, गमा, त्रफहाय
तभु कभामे फहुत ऩय फचा कु छ नही,ॊ तभु कभाने भें सफसे षऩछडते गम,े
हभ गॉवामे फहुत ऩय गमा कु छ नहीॊ। साथ यहकय बी सफसे त्रफछडते गमे।
शान - शौकत यईसी का आता यहा,
तुभ हदखावे भें सफ कु छ रटु ाते गम,े भगय फदरे भंे ससॊ ्काय जाता यहा।
हभ अबावों भें सफ कु छ फचाते गमे। तुभ कभामे ............
तभु ब्जसकी धब्ज्जजमाॊ उडाते गम,े तुभ तो असरी कभाई कभाते नही,ॊ
हभ उसी को गरे से रगाते गमे। जरूयतभॊदों को तभु काभ आते नही।ॊ
तुभ कभामे ........... हभ ककसी को कबी हदर दखु ाते नही,ॊ
दीन - दणु खमों को स्वाथष भें रुराते नही।ॊ
तभु तो भामा की नगयी भें उडते यह,े तुभ कभामे ............
हभ हकीकत की नगयी से जुडते यहे।
तुभ हकीकत से नजयें चयु ाते यह,े
हभ हकीकत से नजयंे रडाते यहे।
तुभ कभामे ...........
ऩटृ ि सॊख्मा: 98 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सऩना, औयैमा, उत्तय प्रदेश
जफ तक
दनु नमाॊ वारों की नजयों भें , जफ तक यहते साडी घूघॊ ट भें,
हभ तफ तक अच्छे यहते हैं। हभें ससॊ ्कायी सफ कहते हैं।
रगा के तारा जफु ाॊ ऩय अऩनी, शान से थोडा ननकरंे जो,
हभ जफ तक भौन यहते हैं। सफकी नजयों भंे खरते हंै।
भय भय कय जीते हैं जफ तक, भाय ऩीट अऩशलद सहंे तो,
तफ तक सफ खशु यहते हैं। सफके भन के यहते हंै।
अऩने बी आखॊ हदखाते हैं , आवाज उिाते जफ हहसॊ ा की,
जफ अऩने शरए हभ जीते हैं। सफ फेहमा हभें कहते हैं।
ब्जनकी हाॊ भंे हाॊ शभराते, भन्द भन्द भसु ्काए तो,
हभ उनके हदर भें यहते हंै। हभ सफको अच्छे रगते हैं ।
अऩने हदर की जफु ाॊ ऩे राते, खरु हॊस रें जया कबी तो,
तो वाचार हभंे सफ कहते हंै। ननरजष ्जज हभें सफ कहते है।
सेवा खुशाभद कयते सफकी , जफ शसय को झकु ा कय चरते हंै ,
हभंे कामकष ु शर सफ कहते हैं। हभ सफको अच्छे रगते हंै।
अऩने शरए कु छ कय फिै े तो, भहक़िर भें जो िु भके रगा दंे ,
भक्काय हभंे सफ कहते हैं। तो फेशभी इसको कहते हंै।
रूखी सखू ी खाते तफ तक, फहू को फेटी कहते हैं सफ,
सभझदाय सफ कहते हैं। हभ जफ तक सफ सहते हंै।
अऩनी खुशी से खचष कयंे तो, अऩना ददष फमाॊ कय दे तो,
सफ नासभझ हभंे कहते हंै। फहू गरत सफ कहते हैं।
ऩटृ ि सॊख्मा: 99 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
देफीदीन चऩ्वशॉ ी, ऩटु ऩयागढ़, अनऩू ऩयु , भध्म प्रदेश
गयीफी
इस धया भंे जन्भ हुआ,
व्माकु र हुआ भन।
तन भंे वसन नही,
तडऩ यहे हैं जन।।
अऩना व्मथा ककसे कहु,ॉ
सायी उभय ऩडा है।
रृदम तडऩ यहा है,
आगे 'गयीफी' खडा है।।
नही बाग्म भें कु फेय,
ऺुधा ऩीडा से तन जजयष ।
नीय ऩी कय फीते ननशा,
बटक यहा हूॉ दय - दय।।
दहु दषनो के दौय भ,े
नहीॊ नसीफ सभायोह भें।
षवऩदा ऩडी साभन,े
इस 'गयीफी' के कहय भंे।।
सभम नही कफ अन्न - जर का,
नहीॊ हिकाना इस जीवन का।
षवनती कयते उस प्रबु को,
अन्त कयो 'गयीफी' का।।
ऩटृ ि सॊख्मा: 100 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
नीरभ वन्दना, बोऩार, भध्म प्रदेश
अगय तभु चाहते
तुभ चाहते तो फना सकते थे सफ कु छ...
तभु चाहते तो फसा सकते थे एक ऩयू ी दनु नमा ...
तभु चाहते तो ऩयू े कय सकते थे अऩने साये सऩने ...
तभु चाहते तो उसके बी सऩने ऩयू े हो जाते ..
ननखाय आ जाता उसके चहे ये ऩय ,
णखर जाता तुम्हाया बी साया ससॊ ाय ,
फस जाता एक सनु ्दय सभाज
अगय तुभ चाहते ...
रेककन तुभने कबी चाहा ही नही
खुद के अरावा ककसी को औय
अशबश्राऩ हदमा सभाज को
फना हदमे तुभने कु छ
औय भासभू ो को
अऩयाधी औय असाभाब्जक ...
फस मू ही ...
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 101 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020