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Lakshyavedh Hindi e-Patrika (October 2020)

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Published by lakshya.jalpaiguri, 2020-10-21 14:35:38

Lakshyavedh Hindi e-Patrika (October 2020)

Lakshyavedh Hindi e-Patrika (October 2020)

Keywords: Sanjay Agarwala,Jalpaiguri,Siliguri,Lakshyavedh,Hindi,e-Patrika,Nilu Gupta

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

फदरते सपय दगु ादष त ऩाण्िमे , वायार्सी, उत्तय प्रदेश

वो ऊॊ चे आसभान को फता दे तू दय - दय बटकना छोडकय,
तू ककतना है, फरवान इन अॊधये ों भें खदु चरना, जता दे तू
मे हदखा दे त,ू सपय ए भबॊ ्जरों के , योिों को
धया क्मा, धया के ऊऩय आसभाॊ भंे अऩने जज्जफे स,े हटा दे तू
ककतनी है, णखरापतें धएु ॊ की गहयाइमों को
उन्हंे शभटा दे तू आग, अफ फना दे तू
इन्ही अॊगायों, ऩे हय - ऩर चरके
भहासागय के , अथाह जर को सपय को आसान फना दे तू !!
कु छ ऩर के शरए, रुका दे तू
तू आ यहा, यहें ढू ढ़ने
सभॊदय को, खुरकय फता दे तू

नपयतों को कही दयू , ऩगिडॊ िमों
भंे, ऩयू ी तयह
िहया दे तू
अऩनी सपरता का, ऩयचभ
सहदमों तक पहया दे तू

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 102 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

ननशा िाकु य, रकू शान, नगयाकाटा, जरऩाईगडु ी, ऩब्श्चभ फगॊ ार

न्माम एक झूिी उम्भीद

फखयी ऩडी थी इज्जजत उसकी ऩय साजा सनु ाए उन ऩऩीमो को
शलदों के कतयो भें एसा ना सॊषवधान फनी है
नहीॊ कयेगा कोई मकीन
तडऩ यही थी उसकी कामा देश के इन यखवारो ऩय
स्माही के फौछायों भंे फेडिमा फधॊ ेगी हय ऩाव भंे
चबु ती इन्हीॊ सवारों ऩय
धचखे बयी है हय ऩन्नो ऩय
शससकती उनकी ऩकु ायो भें नघन है ऐसी भदाषनगी ऩय
जो नन्ही फच्ची को तक दफोचा
घभु े यहै वो सये दैत्म कपन भे शरऩहट तडऩती कामा
शान से अफ बी फाजायों भें । तन के हय खार को नाचा ??

िू फी ना थी कर की शाभ ऩािॊ वो की महाॊ सबा बयी है
सयु ज ऩनु ् अॊधेया शभरा कन्हैमा ना उि के आमेगा
शभशष ाय होती धयती भाॉ भंे कशरमगु की भहाबायत है
सयु णखमो बया सफेया शभरा कौन महाॊ राज फचाएगा?
काननू की ऩेटी का तारा
नहीॊ है था महाॊ कोई खोरने वारा न्माम कबी तो जरुय शभरेगी
ऩाफाॊधी भे खुद सयकाय फधी है फस धमै ष तुभ फनाएॊ यखना
फस सफ महाॊ सणु खमष ाॊ रटू ने वारा ... ऐसी ही झिू ी उम्भीदों ऩय
बायत को जगभगाए यखना
टीवी ऩय ब्रेककॊ ग न्मजू फनी है
अखफयो की हेिराइॊस फनी है

ऩटृ ि सॊख्मा: 01 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

शशवचयर् चौहान, कानऩयु , उत्तय प्रदेश

याजा जी भसु ्काए थे

कर सऩने भंे आए थ।े
याजाजी भसु ्काए थ।े ।
कहते थे तू सोता है
हभ अच्छे हदन राए थ।े ।
धचडडमा एक ियी सहभी
फाज नोचने आए थे।।
कॊ क्रीट के जॊगर भंे
शानॊ त खोजने आए थे।।
जॊगर जॊगर आग रगी
सफ के सफ घफयाए थे।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 104 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

अननता जनै "वीकंे ि शामय", जोधऩयु , याजस्थान

शलद

शलद तेये मे शलद भये े,
भनटु म भखु भंे इनके िये े।

भकू भनजु तो वनभानषु सभ, शलद त्रफना सफ बस्भ हो जाए ,
सदॊ ेहों के उस ऩय घेये। ज्जमों यावर् की रकॊ ा।

शलद त्रफना जग सनू ा राग,े शलदों से भहक़िर सजती है,
शलद हास्म की खान। शलदों से है गान।

शलद त्रफना षप्रमतभ ना भान,े शलद त्रफना सॊगीत है सनू ा ,
शलद से जान भें जान। फात भये ी मह भान।

शलद णखरात,े शलद शसखात,े शलद हॉसाते शलद रुरात,े
शलद फजाते िकॊ ा । शलद यचाते अथाह सॊसाय ।

शलद त्रफना कषवता कै सी,
कै सा यचनाकाय ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 105 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

सखु देव शसहॊ याहिमा, यामगढ़, छत्तीसगढ़

सरयता

तहटनी हो तुभ,
जन - जन की प्रये र्ादानमनी हो।

ननयॊतय अग्रसय यहती हो,
सधु ा - गयर धारयर्ी हो।।

भहहभाभमी हो तुभ,

ससॊ ्कायों की जननी हो।

फहती अभतृ की धाया तझु भ,े

ऐसी तुभ ऩथगाशभनी हो।।

ऐक्म बावना शरए, श्रद्धा हो तभु ,

नन् स्वाथष कभकष ारयर्ी हो। यीनत - ससॊ ्कृ नत दानमनी हो।

बेद - षवबदे सभदॊ य भंे हुआ सभ, सेवा - सदबाव सभाहहत तझु भ,े

अतएव कहराती कतवष ्म ऩयामर्ी वेद कहता तभु कल्मार्ी हो।।

हो।। कर - कर कयती,

सयु - तार छे डे ऐसी याधगनी हो।

सबृ ्टट हेतु एक वयदान हो तुभ,

अतएव कहराती कल्रोशरनी हो।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 106 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

अशभत कु भाय त्रफजनौय, स्मोहाया, त्रफजनौय, उत्तय प्रदेश

भाॉ

भाॉ तये े चयर्ों भंे जन्नत है । सदा अऩनी आॉखों भंे आॉसू नछऩाएॊ ।
दोंनो हाथों से भेये जीवन भंे ,
तू यलफ से भागॊ ी हूॉ भन्नत है । खशु शमाॉ देने वारी ।
जफ दाॉत नहीॊ थे दधू षऩरामा तू फनी सवारी
उिना फिै ना चरना कपयना भाॉ तू ककतनी बोरी
भभता की तू टोरी
उॉ गरी ऩकड कय तनू े घभु ामा कपय बी तू दखु मायी
औय फनी तू प्रथभ गुरू भमै ा तेयी प्रीत का सभझा न कोई
फहुत उऩकाय तये े है भमै ा जफकक तनू े प्रीत है फोई
अनगननत तूने कटट उिामें छु ऩ छु ऩ कय तू फहुत योईं
तनू े भझु ऩय आशीष फयसामंे कपय बी तूने प्माय रटु ामा ।
गभ की फदरी भझु ऩय फयसी ,
यलफ के आगे हाथ जोडे भागॉ ी दआु एॊ ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 107 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

जसप्रीत कौय 'प्रीत', ऩहटमारा, ऩजॊ ाफ

भाॊ

क्मा हुआ अगय भंै फडी हो गई हूॊ
भये े अॊदय का फच्चा आज बी छोटा है
आज बी जफ थक जाता है देखता है चायों तयप

भाॊ की गोद भें सोना चाहता है
सबी ब्जम्भेदारयमाॊ सभम से ऩयू ी कयती हूॊ
ऩय भन आज बी भाॊ से चोटी फनवाना चाहता है

कयती हूॊ काभ सबी फडे हहसाफ से
ऩय भन राऩयवाही से ऩडती भाॊ की िाॊट खाना चाहता है

फनाती हूॊ नए ऩकवान योज ही घय भें
अॊदय का फच्चा आज बी भाॊ से ब्जद्द कयना चाहता है

क्मा हुआ फार ऩकने रगे है भये े
ऩय भन आज बी भाॊ का दरु ाय चाहता है
भाॊ के कायर् ही तो वह भन का फच्चा ब्जॊदा है
तबी तो उम्र जो बी हो छोटा ही यहना चाहता है

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 108 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

भहेन्द्र शसहॊ 'याज', भढै ी,ॊ चन्दौरी, उत्तय प्रदेश

याधा का नाभ होगा

मभनु ा ककनाये आके भझु को ऩकु ाये याधा,
भंै हूॊ तेयी आधी अरु तॊू है भये ा आधा।
कफ तक नछऩा यहेगा ग्वारों के फीच भ,ें

कय भें भयु री रके य आ जाओ भये े काॊधा।।

जन्भों से तऩ ककमा था तुभको ही भनंै े साधा, हदन बय बटकता भधवु न गामों के सगॊ भ,ें
नहीॊ फनगॊू ी जीवन भंे तेये कबी बी फाधा। भैं हाय यही अऩने जीवन के जॊग भें ।
रगता तये ा भन गमै ा अरु ग्वार फार भ,ें कफ तक तेये षवयह भें तिऩगॊू ी इस तयह,
ग्वारों का भन है रगता जसदु ा के रार भंे।। शादी यचगे ा बग के तॊू रुब्क्भर्ी के सॊग भें।।

रकु टी व भयु री रेकय ग्वारों के साथ भ,ंे ऩीछा न छोिू ॊ तेयी भैं बी नहीॊ हूॊ कभ,
कऩडे से फनी कन्दकु रेकय के हाथ भें । शादी हुई न तुभसे इसका नहीॊ है गभ।
आगे आगे गयै ्मा ऩीछे हैं चरते ग्वार,े यहरो रुब्क्भर्ी सगॊ उनकाबी श्माभ होगा,
उसके हैं ऩीछे चरते भयु री फजाने वारे।। तेये सगॊ रुब्क्भर्ी नहीॊ याधा का नाभ होगा।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 109 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

अनाशभका शसहॊ "कयभ", उत्तभ नगय, हदल्री

आज की नायी

उस हदन शाभ को जफ भंै अये ..! तुभने अऩने श्रगॊृ ाय को
ऩहुॉची अऩने घय।
पंे क फनामा कै सा यॊग।
देखकय अऩनी ..... भाॉ को
भैं तो यह गई दॊग।। तौफा ...! नायी चते ना का, कै सा नाभ रंे गौयी - सीता का, हभंे ककमा
है मह ढॊग ...? गभु याह।
होता प्रतीत ककसी कानन भें
रग गमा दावानर। आओ .... फैिो .... ध्मान स,े सुनो फाहय ऩुरूष अट्टाहास कयते,नायी
भेयी फात। बयती यही महीॊ आह ...!
गशभमष ाॉ .... शसधॊ ु की छू ते नब
उिा ऐसा फडवानर।। ऩरु ुष कयते यहे अफ तक .. नायी कभष हभाये यहे ... सॊकु धचत,यख सके
जानत से घात।। वे नज़य।
ाामफ थी .... ऩाजेफ ऩाॉव की
चडू डमाॉ नही थी .. हाथ। हभाये ऩाॉव भें िार दी उसने, ऩजे नी इसी तयह ढाते यहे है .. ऩुरूष औयतों
औय ऩामर। ऩय ़हय।।
भंै फुयी तयह से चौंक गई ...!
सराभत था .. उनका सुहाग। कबी सोचा क्मा तभु ने,कयते हभको सनु कय ध्वनन .... ऩामर .. कॊ गन की

शसदॊ यु नही था भाॊग भें, ऽारी मे ककतना घामर।। कयते कान सतकष ।
था उनका कान।
कोई नहीॊ ज़रूयत उनकी ... पें क दी ककससे शभरने जा यही हो .. कयते है
नाक भें नथ बरे न थी .... ऩय हभने कॊ गन। मे तकष ।।
उनके अधय ऩय थी भुस्कान।।
अफ वे नहीॊ सकें गे जान .... घय भंे हूॉ आज से ... अबी से ... पंे क दी हभने
सकॊ ोचवश धीये से ऩछू ी...भाॉ
क्मों ककमा तुभने मह हार। मा आॊगन।। तोड दी अऩनी फेडी।
नन् सॊकोच ... उत्तय हदमा भाॉ ने
नायी चते ना का है .. कभार।। औयतों को ़ै द कयने की, भदो की भब्श्कर हो यही है .. असॊबव है अफ
थी मे चार। सहन भदों की हेकडी।।

अफ तक हुआ, अफ न होगा, फदर
यहा है कार।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 110 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

हरय आनदॊ , कोटा, याजस्थान

इॊसान फना हैवान

खण्िय ऩडी ईभायत भ,ें अफ कराकायी कयता कौन है
उजडे हुम,े वीयानों भें, अफ बरा घय फसाता कौन है

शसस्कते हुमे चहे ये बी अफ महाॉ हदखाते हंै अदाकायी
अफ बरा भा,ॉ के आॉचर भंे खुरकय योता कौन है

सफ भयभत भें रगे है महाॉ उजडी ब्ज़ॊदगी को फनाने भें
जीवन दंेने वारी भाॉ का द्ु ख अफ बरा ऩछु ता कौन है

मे जो ऩाफ, ओढ़कय, नाभ फनाने भें रगे है अऩना
कोई ऩछु रे जया इनसे इनके हुनय के यॊग बयता कौन है

सफ खेर यहे है आॉख, शभचौरी नजयों के ़ियेफ से
सच देखकय आॉखों से अफ बरा सच फोरता कौन है

सफ सच को झटू फनाने भंे कयते है भीरों का स़िय महाॉ
अफ सच्चाई की औय इक ़दभ तक फढ़ाता कौन है
अफ ककसका कये ऐतफाय महाॉ खुदगज़ी के फाज़ाय भंे
अऩने भतरफ के आगे अफ इॊसाननमत हदखाता कौन है
सफ कु छ भतरफ भंे फाध हदमे ईस्वय तमु ्हाये नाभ बी
त्रफना भतरफ के याभ याभ अफ बरा कयता कौन है
सफ फेचनै नमाॊ रके य चरे है इक सकु न की तराश भंे
हरय भंे आनदॊ की तराश अफ बरा कयता कौन है

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 111 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

िॉ● ननशा ऩायीक, जमऩयु , याजस्थान

सौदा

नहे का सौदा है दनु नमा,
प्रभे का अशबशाऩ है |
दरू यमाॉ भन भंे है रेककन,
रयश्तो का आगाज है ||

खदु सॉबारे फढ़के ऩहर,े
अधधक भनहु ाय दनु नमा ह|ै
खदु ही तोिे साथ सहु ाना,
खदु गजी मे दनु नमा है ||

ऑसू शभरते सच्चे ह्रदम को,
फदे दी आनन्द भनाते है |
तोि ककसी का साथ ऩर भ,ें
नमी दनु नमा सजाते ह|ैं |

खशु ककस्भत ह्रदम त्रफन इॊसा,
योज त्रफछिते शभरते है |
भातभ भें शभरते है ऐस,े
जैसे खशु ी की यात है ||

ददष ह्रदम का छु ऩा सका त,ू
ददष नहीॊ वो सच्चा है |
जीवन देकय प्रभे सॉबार,े
वही एक रयश्ता ऩक्का है ||

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 112 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

सत्मभ नघशभये "बऩु ने ्द्र", जाराऩािा फस्ती, फानयहाट, जरऩाईगुिी, ऩब्श्चभ फॊगार

कै से होगा भुनापा

"षवकास कयना है भझु े "ऩाण्िमे जी फोरे ऩयु जोय नारे को दयु नदी भे ऩहुॉचामा नदी से ऩानी आमा
फारयश का भौसभ है जनता को होती है ऩयेसानी घय आदभी फहे सभाचाय भे आमा इसफाय ।

योि फान्ध फना त्रफकास कक पु रझिी रगाऊन्गा
ऩान्िे जी भे आऩत फान्ध फनाने का प्रस्ताव

तबी अखफाय रेकय उनका अशसस्टेन्ट आमा फतामा

आदभी फह गमा, घय फह गमा हय ओय डिएभ ने शसएभ से फान्ध प्रस्ताव ऩास कयामा

तिके उिे ऩाण्िे जी गािी, धचउिा गुि भॊगवामी दो सौ कयोि का फान्ध का फजट आमा

एक एक ककरो के दय से धचउिा गुि फटवाई शसएभ ने सौ कयोि अऩने बनतजे का फतामा

एक पोटो णखचवाई पे सफकू सभाचाय भे िरवाई इब्न्जननमय आमा एक हरवाई को शभस्री फनामा
ऊऩय से पोन आई, खचाष ऩयु जोय हुआ फताई। आधा रुषऩमा ऩान्िे जी ने इब्न्जननमय को थभामा

"एक फिा फान्ध फानाऊन्गा गाव के उसऩाय" ऩशु रस को बनक रगी, ऩाण्िे ने फन्िर थभामा

अशसस्टेन्ट ऩाण्िे के कान भे पु सपु सामा सबु भहु यत भे उदघाटन का सभम ननकरामा

"नही है कोई नदी उस गाव भे मे फतामा"

अशसस्टेन्ट फोरा दसु ये गाव भे फाढ आमा इसफाय नरयमर पोिा फान्ध भे त्रफचो त्रफच शभस्िी फटवाई
अगरे हदन अखफाय भे फान्ध टु टने कक खफय आई
वही फनामा जामे फान्ध इसफाय

सयकाय ने जाचॊ कशभटी त्रफिाई कु छ यहात हदराई

ऩाण्िे जी का भहु पिका फोरे वहाॉ फान्ध फना तो जल्द फान्ध भयभभत कक मोजना कपय से आई

अगरी फाय धचउिा भे कै से होगा भनु ापा ? ऩाण्िे ने इसफाय िे के दायी बाई को हदरवाई

कपय क्मा होना था ......

तत्कार एक पोन ऩाण्िे जी ने घभु ामा

सौ रोग फरु ामा गाव के त्रफच से नारा खुदवामा

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 113 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

यीभा शसहॊ , अमोध्मा नगय, बोऩार, भध्म प्रदेश

अहसास

ब्जसकी फाहंे भनैं े थी थाभी, उसकी प्मायी सयू त,
फीता ऩर उन रम्हों भ,ंे फिा ़ा ही था खफू सयू त।

नमन भेये फस देख सके , फाहयी ही हदखावा,
काश की सभझ ऩाती उसके बीतय का छरावा।

वक्त उसे गुजायना था, ऩर दो ऩर भये े सॉग,
भंै बी ऩगरी प्माय की भायी यॉग गमी उसके यॉग।

भेये अयभानों का घोट गरा, फन फिै ा वो कानतर,
कयना उसने जो चाहा कय चकु ा था वो हाशसर।

भसीहा ब्जसको भाना था वह तो ननकरा बऺक,
जीवन ब्जसको सौंऩा था ना फन सका भेया यऺक।

दोष उसे बी क्मॉू दॉ?ू भंै बी कहाॉ सही थी,
कोई फहरा गमा औय भैं बी फहक गमी थी।

थाभा ब्जसका हाथ था, सभझ कय भनंै े अऩना,
आॉख खरु ी शकु ्र है जाग गई, था वो एक सऩना।

खदु ऩय मकीन कय सकॉू , तो होती फडी फात,
ऩयू नभासी आ गई, फीत चकु ी अॉधेयी यात ।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 114 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

िॉ● त्रिरोकी शसहॊ , हहन्दऩू यु , कयछना, प्रमागयाज, उत्तय प्रदेश

नायी की भहहभा

नायी की अतुशरत भहहभा का, नायी ननत ककतने रूऩों भ,ें
कोई बी ऩाय न ऩामा है। इस जग भंे शोशबत होती है।
वेदों ने देवों के सभान, सॊफधॊ - ननवहष न भें हयधगज,
नायी को ऩूज्जम फतामा है ।।1।। भमादष ा कबी न खोती है ।। 6 ।।

उऩननषदों औय ऩयु ार्ों भ,ंे नायी से ही नय होते ह,ैं
नायी की भहहभा वणर्तष है। नायी से ही होती नायी ।
है अटर सत्म मह सकर सबृ ्टट, नायी नय - नायी की जननी,
नायी से ही सचॊ ाशरत है ।। 2 ।। जग भें नायी सफसे न्मायी ।। 7।।

इस शब्क्तस्वरूऩा नायी की, इस अणखर षवश्व भें नायी मह,
भहहभा गाई सद्ग्रथॊ ों ने। ककतने सॊफधॊ ननबाती है।
नायी को श्रेटि फतामा है, जननी, अनजु ा औ' तनजु ा के ,
हय सॊप्रदाम, हय ऩॊथों ने ।। 3 ।। सफॊ ॊधों भंे ढर जाती है ।। 8 ।।

साहहत्म-साधकों ने बी तो, फनती जफ कबी बामाष मह,
इस नायी का सम्भान ककमा। ऩनत को ऩयभेश सभझती है।
नाना कृ नतमों के भाध्मभ स,े फनकय ऩनत की सहचयी सदा,
इस नायी का गुर्गान ककमा ।।4।। ननज धभष ऩरू ्ष सफ कयती है ।।9।।

नायी अनऩु भ कृ नत ब्रह्भा की, शशशु को देकय के जन्भ मही,
जग को सॊचाशरत कयती है। शशशु की जननी फन जाती है।
वह ऩथृ क - ऩथृ क सॊफधॊ ों सॉग, शशशओु ॊ के ऩारन - ऩोषर् भ,ें
अऩना व्मवहाय फदरती है ।। 5।। जननी का धभष ननबाती है ।।10।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 115 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

साषविी - सीता का स्वरूऩ, अऩभाननत होने ऩय षवनाश -
जफ - जफ नायी धायर् कयती। कयती, मह ध्मान सदा यखना ।।17।।
तफ - तफ ऩानतव्रत के फर ऩय,
मभ से बी यॊच नहीॊ ियती ।। 11।। मह फात बरू ना कबी नही,ॊ
घय का सम्भान मही नायी।
नायी नवदगु ाष का स्वरूऩ, सम्भान - प्राब्प्त की अधधकायी,
जफ आत्भसात कय रेती है। घय की है शान मही नायी ।।18।।
ऩर बय भंे ही दटु कभी के ,
प्रार्ों को वह हय रेती है ।। 12।। अनधगनत नारयमों की गाथा,
सद्ग्रॊथों भंे शभर जाएगी।
जफ कु षऩत ऩाषऩमों ऩय होती, सद्गुर् से बूषषत नायी का,
ऩर भें ही बकृ ु टी तन जाती। दनु नमा हयदभ गरु ् गाएगी ।।19।।
उन आतताइमों का वध कय,
उनकी सहॊ ायक फन जाती ।।13।। नायी सयु सरय की धाया - सी,
दो कु र को ऩावन कयती है।
नायी - सा यत्न नहीॊ कोई, ननज स्नेह - सधु ा से शसधॊ चत कय,
हय घय भंे मह शोबा ऩाती। कु र के खानतय भय-शभटती है ।।20।।
गहृ - व्मवस्थाषऩका होने स,े
नायी गहृ रक्ष्भी कहराती ।।14।। वह द्ु सह वेदना सहकय बी,
नायी का धभष ननबाती है।
मह अफरा सचभुच सफरा ह,ै कु र की ऩीडा के शभन हेत,ु
कोई बी सभझ न ऩाता है। तन - भन से वह जटु जाती है ।।21।।
है अगॊ - अगॊ सौंदमष - ऩजॊु ,
जो सफको सहज रुबाता है ।।15।। नायी नीयसभम जीवन भ,ें
यस का सचॊ ाय सदा कयती।
भानव - भलू ्मों की सॊवाहक, अषवयर यसस्रोत प्रवाहहत कय,
भानवता की है धुयी मही। सखु का षवस्ताय सदा कयती ।।22।।
ऩीमषू - स्रोत - सी फहती मह,
सद्ग्रथॊ ों ने मह फात कही ।।16।। नायी! तू भभता की देवी,
हय रूऩ तमु ्हाया सदॊु य है।
मह शब्क्त - फुषद्ध की है प्रतीक, तभु ही हय घय की शोबा हो,
इसका सम्भान सदा कयना। तभु से ही शोशबत हय घय है ।।23।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 116 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

भभता कु भायी, आसनसोर, ऩब्श्चभ फगॊ ार

रूिी कषवता

अऩने जीवन के सदॊु य ऺर्ों को चनु कय
सफसे सॊदु य बाव, शलदों से कषव सजाता है कषवता

घोषषत कय देता है उम्दा यचनाओॊ भंे शीषष ऩय
भन औय कागज दोनों ऩय,

कपसरती येत सा सभम ननकर जाता ह,ै
भन, करभ ऩय भ्रभ।

येधगस्तान के ग्रीटभ भें नहीॊ शभरती शीतरता ऩधथक को,
कषवता शीतर है औय बाव तो कस्तूयी भगृ है
कहाॊ िहयते कबी
यर्फाकु यों सा जॊग पहत कयने को आतुय,
इन ऺर्ों भें अॊककत होती कषवता
जूझती कषवता,

सॊवायने को ककसी के फते यतीफ इल्ज़ाभों वारे नामाफ भन को
कु दयत, कपतयत गहये सगॊ ी हैं

दोनों के शरए फनी है कषवता,फदरने को भौसभ
तफ कषव भन चनु रेता है अऩनी अधयू ी, छू टी, खोई कोई ननधध कोष से

ऩरू ्ष होने के क्रभ भ,ें अवगत कयाने मथाथष से
ऽारयज कय असबॊ व्मता,तत्ऩय हो उिती है रूिी कषवता।

ऩटृ ि सॊख्मा: 117 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

प्मायी त्रफहटमा भहेश सायिा, उदमऩयु , याजस्थान

ईश्वय का भझु को ऐसा, दो फोर जफ भझु स,े
उऩहाय शभर गमा वो हॊसकय फोरती है
कोशशश सदा यही है,
फेटी शभरी तो जसै ,े उसे कोई कबी ना गभ हो
सॊसाय शभर गमा नौफत कबी ना आम,े
आॊखें बी उसकी नभ हो
घटु नों से चरकय जफ, फहती हुई दरयमा सी हुआ कयती है
कदभ होने रगे िग भग फहे टमाॊ तो ऩरयमाॊ सी हुआ कयती है
फाऩ का हदर बी एक सभन्दय होता है
जी कयता था साथ तेये, हय दरयमा उसके हदर के अन्दय होता है
चरता यहूॊ ऩग ऩग

िग भग ़दभों से चर,
कफ खडी हो गईं

प्मायी त्रफहटमा आज भये ी,
फडी हो गईं

हय कपक्र को भये ी,
वो फातों भंे घोरती है

ऩटृ ि सॊख्मा: 118 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

षप्रमॊका ऩािॊ मे त्रिऩािी, प्रमागयाज, उत्तय प्रदेश

भै गगॊ ा भाॊ हूॊ

स्वगष से उतयी हूॊ! भंै हूॊ फहती धाया! तुम्हाये कु कभो से --
तुभ भझु े भानो तो जग है भझु भंे साया! अदृश्म हो गई सयस्वती!

हाॊ गॊगा भाॊ हूॊ! स्वगष से उतयी हूॊ!भंै हूॊ फहती धाया!
भंै गॊगा भाॊ हूॊ! तुभ भझु े भानो तो जग है भझु भंे साया!

धयती को ऩावन कयती! हाॊ गॊगा भाॊ हूॊ!
भंै ननभरष शीतर फहती! भैं गॊगा भाॊ हूॊ!
जन जन की प्मास फझु ाती!
धीयज धमै ष की चादय ओढ़े! मे है ऩाऩ ऩणु ्म की धयती!
भभता का सागय कहराती! ब्जसभें भै घटती फढ़ती यहती!
कोई ऩाऩ की िु फकी रगाता!
सफके ऩाऩ हूॊ धोती! कोई ऩजू के ऩणु ्म कभाता!
कोई भरै े कऩडे धरु ता!
स्वगष से उतयी हूॊ!भैं हूॊ फहती धाया! कोई कचया पंे क के जाता!
तुभ भझु े भानो तो जग है भझु भें साया! कोई ऩीय न भेयी सभझे!
सफ भझु से ही आस रगते!
हाॊ गॊगा भाॊ हूॊ!
भंै गॊगा भाॊ हूॊ!

शशव शम्बु की जटा भे शशु ोशबत! स्वगष से उतयी हूॊ! भैं हूॊ फहती धाया!
गॊगोिी से फगॊ ार की खाडी तक! तुभ भझु े भानो तो जग है भझु भें साया!
भये ी अषवयर धाया फहती!
भै गॊगोिी, मभनु ोिी, भदॊ ाककनी, बाधगयथी! हाॊ गॊगा भाॊ हूॊ!
भैं ही सयस्वती कहराती! भंै गॊगा भाॊ हूॊ!

ऩटृ ि सॊख्मा: 119 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

भईनदु ीन कोहयी "नाचीज फीकानेयी", भोहल्रा कोहरयमान, फीकानये , याजस्थान

फुयाई हटाओ

यास्ते भंे ऩडा ऩत्थय दोस्तों, देश भंे
याहगीय के िोकय जो रोग बी
रगने से ऩहरे नपयत पै राने वारे हों
उिा कय हटाओ । उन्हें जड से हटाओ ।

भवाद ऩडे पोडे को कोई बी फयु ाई
ज्जमादा पै रे उससे ऩहरे कहीॊ बी हो

ऑऩयेशन कय उस फयु ाई को, ऩनऩने से ऩहरे
हटाओ । शभर कय हटाओ ।

गय यहफय दो फयु ाइमाॊ हैं
फेखफय हो तो इन फयु ाइमों भें
ऐसे यहफय को बी जो ज्जमादा खयाफ हो
शभर कय हटाओ । उसे ऩहरे हटाओ ।

याह भंे आओ, अऩने - अऩने
काटॊ े हों तो धगयेफाॊ भंे झाॉको
उन काॉटों को तन - भन की
देखते ही हटाओ ।
फयु ाई को बी हटाओ ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 120 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

आकृ नत, शसयसा, प्रमागयाज, उत्तय प्रदेश

मादें तये ी

माद तये ी आई, माद तेयी आई। अस्क तो रूिे हुए ह,ै
हय वक़्त अक्स तेयी ऩाई, मे तो धडकनों की आवाज़ ह,ै

माद तये ी आई, माद तये ी आई। बीड भंे अके रे है,
वो तये ी प्माय बयी फात,ें अके रे भंे तन्हाई,
वो तये े प्माय की सौगात,ें माद तये ी आई, माद तये ी आई।
वो तये ी भरु ाकातंे, ना सोचा था कबी,
मॊू आॊसू आमगंे े तुझे माद कयके ,
वो तेये साथ बीगी फयसात,ें कबी अस्को को छु ऩाकय,
जहाॊ कहीॊ देख,ॊू हदखे तेयी ऩयछाई, कबी परयमाद कयके ,
अऩने मादों को क्मू नहीॊ रे गए साथ अऩन,े
माद तये ी आई,माद तये ी आई। वादा तो न कयते हाथों को रेकय हाथ अऩन,े
खुद से नायाज़ हू, ना वादे ननबाई, ना प्रेभ गीत गाई,
माद तेयी आई, माद तेयी आई।
तुझसे दयू होकय बी ऩास हू,ॊ
टू टा हुआ साज़ हूॊ,

अनकही, अनसनु ी अॊदाज़ हूॊ,

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 121 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

त्रफक्रभ साव, कोरकाता, ऩब्श्चभ फॊगार

स्कू र काहे !

वदी ऩहनी, फगै शरमा, ननकरे घय से सफ की तयह,

यास्ते भंे सरीके से चरा सफ की तयह,

कपय ए चभडा!सुनते काहे !ए चभडा !

स्कू र ऩहुॉचा, घण्टी फजी, भास्टय ऩढ़ाने आए,
सबी फच्चें फेंच ऩय फैिे ,

हभको भास्टय ने नीचे त्रफिामा काहे!

प्मास रगी, ऩानी ऩीने गए,

नर नहीॊ छु ने शभरता काहे!

हटक़िन होती, खाना हदमा जाता,

सबी फच्चे एकसाथ, ऩॊब्क्त भंे फिै कय खाते,

हभरोगों की अरग ऩबॊ ्क्त होती काहे!

छु ट्टी होती, सफ फच्चें घय जाते, हभें नहीॊ जाने शभरता,

भास्टय हभंे कहता यहता

खारी क्रासेस भंे हभंे बेजते,

साप सपाई कयने को -, कहते काहे!

कपय झाडू शरए, हभें भदै ान फुहायना होता काहे!
कपय टॉमरेट भें जभी धचकनाई को,

त्रफशॊ समो फाल्टी, झाडू से साप कयना ऩडता काहे!
आणखय भें थक हाय कय घय हभ आते -,

ऩढाई ऩयू ी नहीॊ कय ऩाते,

ऐसे स्कू र भें आणखय जाएॉ काहे!

ऩडोसी तो ऩडोसी, भोहल्रा तो भोहल्रा,

गाॊव तो गावॊ , शहय तो शहय,

रेककन, स्कू र काहे!

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 122 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

अन्जनी अग्रवार 'ओजस्वी', कानऩयु नगय, उत्तयप्रदेश

अऩीर एक वीय सनै नक की

गॊजू यहा चहु ओय मही नाया ह,ै गॊजू यहा चहु ओय मही नाया ह,ंै
ररकाय भतृ ्मु ने आज ऩकु ाया है। ररकाय भतृ ्मु ने आज ऩकु ाया है।
भंै फीज वऺृ का एक दऩरष ् हूॉ ,
ररकाय सीभा ऩय यऺा की ह,ै हय फाय जनभता भयता यहता हूॉ।
क़िन शसय ऩय फाधंे आमे हंै हभ। त्रफयासते फायीककमों की त्रफछा द,ॉ ू
हदव्म ऩॊजु की ज्जमोनत तो जगा दॉ।ू
याटर के अरख प्रहयी हैं हभ, कभमष ोगी सा गीता ऩाि तो कय र,ॉू
न यखने दंेगें दशु ्भन को एक कदभ। थोडा अऩना कतवष ्म तो ननबा दॉ।ू
गॊूज यहा चहु ओय मही नाया ह,ंै
गॊूज यहा चहु ओय मही नयै ा ह,ै ररकाय भतृ ्मु ने आज ऩकु ाया हैं।
ररकाय भतृ ्मु ने आज ऩकु ाया है। ररकाय भतृ ्मु ने आज ऩकु ाया है।।
जीवन भे सॊघषष नही हंै हभाये कभ
कतवष ्म ननबाकय ही अफ रेंगे दभ।
अभन चनै की प्रीत तो सजा दॉ,ू
भानवता को वह हक तो हदर दॉ।ू
उज्जज्जवर बायत की अरख जगा द,ॉ ू
सोते हुमे प्रहयी को तो जगा दॉ।ू

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 123 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

याजीव बायती, गौतभ फदु ्ध नगय,नोमिा, उत्तय प्रदेश

पू र औय काटॊ े .....

ताउम्र हभ काॊटों को पू र के साथ शरू बी होते हैं
देखते यह गए औय जीवन की मह कडवी सच्चाई है
त्रफता दी वक्त, उन्हें धगनते हुए कक सखु के साथ द्ु ख बी होते हैं
न सोंचा, न भहससू की मही ह़ी़त है
जरुयत इस फात की काश! इस फात को ऩहरे ही
कक काॊटों के फीच सभझ गमा होता
णखरे हंै, सनु ्दय पू र गुराफ के तो, आज़ ब्जन्दगी का
कै से नजयअॊदाज हभने हश्र कु छ औय ही होता
कय हदमा , ऩय, हभाये सोचने से क्मा होता है
औय वक्त मॊू ही गुज़य गमे होता तो वही है जो
काश, काॊटे धगनने के फजाम यफ को भजॊ यू होता है ।
सनु ्दय गरु ाफ को देख शरमा होता
तो, खफू सयू ती से भन प्रसन्न हो गमा होता
औय जीवन धन्म हो गमा होता
ऩय, जीवन भंे
शसपष पू र नहीॊ होते साहफ!

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 124 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

श्वते ा कु भायी, धनफाद, झायखॊि

कषव की कषवता

मॉू अचानक ज़हन भें छा जाती ह,ै
जीना दशू ्वाय कय जाती ह,ै

रृदम को फते हाशा तडऩाती ह,ै
हय तयप वो - ही - वो नज़य आती ह,ै
कबी दृश्म फनकय,कबी श्रव्म फनकय,
हय षवषम ऩय साभने उबयकय आती ह,ै
शलदों की भारा फनकय ऩन्नों ऩय त्रफखय जाती ह,ै
कबी उसकी शब्क्त है तो कबी उसकी बब्क्त ह,ै
मे हहदॊ ी - साहहत्म के जगत भें सविष नजय आती ह,ै

वशे बषू ा नगण्म है इसकी,
मह रोकभानस के ऩटर ऩय अॊककत हो जाती ह,ै
याटरीम एकता, अखॊिता, बाईचाया, प्रेभ का प्रतीक फनकय रृदम भें सभा जाती ह,ै

तबी तो मे कषव की कषवता कहराती है।

ऩटृ ि सॊख्मा: 125 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

छोटे रार प्रसाद, वधभष ान, ऩब्श्चभ फॊगार

वक्त का खेर

सभाज फदर यहा है
औय हभ बी फदर यहे हैं
ऩहरे आशरगॊ न कयते थे
औय अफ नजये चयु ा यहे हैं।

ज़हय तो ऩहरे से ही था
अफ फाहय ननकार यहे हैं
कोई सॊदेह ना हो इसशरए
षवषार्ु का नाभ फता यहे हैं।

ऩयू ी ऩयीऺाओॊ के फावजूद बी
व्मब्क्त को फहहटकाय कय यहे हैं

ऩहरे षप्रम हुआ कयते थे जो उन्हंे
अऩयाधी का आयोऩ रगा यहे हंै।

दानमत्व से दयू यहकय बी
रोग दानमत्व को ननबा यहे हंै
औय कै सी ब्स्थनत आ गई है देखो
घय फिै े रोग फयु ाइमाॊ ननकार यहे हैं।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 126 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

बावना िाकय, फेंगुररू ु, कनाषटक

कु छ एसा कयना

सनु सजना भैं आधी शरखी हुई गज़र हूॉ तेयी जल्दी क्मा है ज़या हौरे शरखना शभसय,े
ताउम्र तमु ्हाये ज़हन भें यहूॉ कु छ एसा कयना।

चाहत की जॊजीय भंे जकडी ननैं ो की बाषा भंे त्रफखयी प्रीत के शाशभमाने भंे यखना,
ताउम्र तमु ्हायी सोच भें यहूॉ कु छ एसा कयना।

गभष सासॉ की धऩू भंे फहती हॊसी भंे तुम्हायी योज़ हूॉ यभती खाभोशी भें फोर सी फजती,
ताउम्र तुम्हाये होिों ऩय िहरूॉ कु छ एसा कयना।

टु कु य - टु कु य भझु े देखती आॉखें ऩीि ऩय भये े प्रीत को शरखती ऩर - ऩर भये ा ऩीछा कयती हाम,े
ताउम्र भझु े तकती यहे कु छ एसा कयना।

तये े हदर भंे एक धचगॊ ायी सरु गे भेये ऽमार की काभना झरु से धनू ी भये े तू नाभ की बय र,े
ताउम्र हभ तभु ना त्रफछडे कु छ एसा कयना।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 127 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

नयेंद्र शसहॊ , भोहनऩयु , अतयी, गमा, त्रफहाय

रौट चरो अफ गाॉव

रौट चरो अफ गावॉ , वहाॊ यहो ककसान फनके
छोडो अफ मे शहय शान, इसे त्रफयान कयके ।
वो गशरमा,ॉ ऩगििॊ ी, भहॊ दय चफतू या ऩयु ाना;
वहाॊ तो सफ अऩना ह,ै शहय भंे सफ फेगाना।
फदरो अफ षवदेशी बषे , यहो ककसान फनके ;
छोडो अफ मे शहय शान, इसे त्रफयान कयके ।
दसू यों के ऩटे जो बय सके , वो खयीद के खाता
खेत खशरहान सम्बारो, फनके अफ अन्नदाता।
गावॉ भे हरयमारी राओ, यहो अफ वहाॊ जभके ।
रौट चरो अफ गाॊव, वहाॊ यहो ककसान फनके ।
कौवा भनै ा को ऩकु ायो, आॊगन भें अन्न को छीटॊ के
धचडडमाॊ कपय चहके आॊगन, अफ न हभसे त्रफदके ।
स्वागत के शरए अनतधथ, अफ न द्वाय ऩय तयस,े
साध,ु शबऺु बखू ा न रौटे, उनका आशीष फयस।े
छोडो अफ मे शहय हिकाना, इसे त्रफयान कयके
रौट चरो सफ गाॉव, वहाॊ यहो ककसान फनके ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 128 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

अभतृ ा ऩाॊि,े ननै ीतार, उत्तयाखॊि

कषवता क्मा है ..

वेदना का ताय ह,ै सभऩरष ् औय प्माय है
भाता षऩता औय गुरुजनों का आचाय ह,ै
जीवन से प्माये फच्चों का दरु ाय है
नवजीवन की आशाओॊ का सॊसाय है।
जीवन की आऩाधाऩी भंे सखु की फौछाय है
सपु ्त कु न्द रृदम के बावों की झॊकाय ह,ै
अननै तक, अन्मामी, ऩाऩी को हुॊकाय है
आत्मामी, दयु ाचायी, ऩाऩी को ररकाय है।
प्रकृ नत की भदृ रु सी ऩकु ाय है
नई प्रेयर्ा, स्पू नतष का सचॊ ाय ह,ै
होरी के साथ यॊगों की पु हाय है
हदवारी के दीऩों की फहाय है।
सखु - दखु के भहीन तायों भें
जीवन के सात यॊगों से गॊथु ा
अनोखा ऩटु ऩहाय है कषवता

एक सनु हया सा हाय है कषवता ..।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 129 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

स्वाभी प्रभे अरुर्ोदम, यॊगकिे या िोंगयगावॊ , याजनाॊदगाॊव, छत्तीसगढ़

धभहष ीन रोकतॊि

धभहष ीन रोकतॊि फधॊ न भंे याजकोष है। काननू मे फाहुफरी। ऩयू जभ के खरु कहो,
रोक को ही छर गमा ननबमष ा बमबीत है, न्माम शीघ्र ननशुल्क हो।
स्वप्न स्वर्ष याटर का कु कु यभुत्तों से उग गए, दाऊद हैं गरी गरी।
शससककमों भंे जर गमा। नते ा गरी गरी कई। धभमष ुक्त, याटरनीत
खीसे ननऩोय, देश चोय, असुयों का अट्टहास है, सब्च्चदानन्द भलु ्क हो।
कहाॊ गई स्वाधीनता पु दक यहे छरी कई। बतू प्रेत नाचत।े
सऩने कहाॊ चरे गए? व्दादश भताधधकाय को
यक्त शसहॊ सऩूत के , पु पकायते हैं देश रीर, तन्ि इन्द्रजार सा, शीघ्र ही स्वीकाय रो
शहीद सफ छरे गए। कु ण्िरी भें रोक है, छर के भन्ि फाॊचत।े झूिा मे अधधकाय नहीॊ
अजगयों का तन्ि है, सच भें अधधकाय हो।
दस्मु बया ससॊ द सबा, न योक है न टोक है। फधॊ धत हजाय वषष थे
छरी मे सषॊ वधान है। वह दौय अफ बी चर यहा। तभ शषे न एक खण्ि हो,
न्माम के ही दय महाॊ, यक्त चूस, छर, कऩट, स्वतॊिता का स्वप्न प्रश्न न व्देष न घभण्ि हो।
न्माम रहुरुहान है। झऩट के साथ आ गए। जर नमन भें जर यहा। कोई न अण्ि फण्ि हो,
षवरग, छरी उदण्ि हो।
बूख,योग,फेफसी, साॊऩनाथ चरे गए, जफ साॊचा ही गड्ि भड्ि है,
शहय - िगय ननकर यहे। तो नागनाथ आ गए। तो भनू तमष ों की दोष क्मा? न्माम धया ऩे भण्ि हो
प्रेभ ऩुण्म प्रचण्ि हो
रब्ज्जजत भनुजता महाॊ धभष सत धगयवी धया ननयऩेऺ धभष याटर भंे, न उटर्ता न िण्ि हो
हो हय रृदम षवकर यहे। न्माम ननत नीराभ है। होश, जोश, योष क्मा? षवश्व सत अखण्ि हो।

कू डो के ढ़ेय भें बषवटम कदाचाय कीनतभष ान फस ऩकु ाय चीख ही, परें पू रे सबी महाॊ
फीनता फचऩन महाॊ हरयश्चन्द्र कु नाभ है। ध्मेम कबी भेया नही।ॊ धया ऩयू ा कु टु म्फ हो।
चाहता इतना मही कक, यीते महाॊ न कु छ यहे
स्तलध है फरु फुर कोमर उभगॊ सहभंे सहभें से, छरकते से नहे कु म्ब हो।
भयु झा यहा चभन महा।ॊ उत्सव सबी षवकर हुए। स्वगष हो धया महीॊ।
स्वागतभ ् सुस्वागतभ,्
मह अधूया रोकतिॊ , कोई कसय फचा नहीॊ, प्रनतटिा न्माम धभष की न्माम धभष आगतभ।्
तॊि भें उरझ गमा। छरछरा के छर हुए। देश भंे अषवरम्फ हो प्रखय ऩूर्ष ऩरू ्तष भ,्
खडे ज्जवरतॊ प्रश्न हंै, सत्म, प्रेभ, न्माम, ऩणु ्म, देव भनजु बावतभ।्
ना सझू ता सुरझ नमा। याटरषऩता शससक यहा,
शससक यही भाॊ बायती। षवधध के चाय खम्ब हो अक्टू फय, 2020
षवकृ त,बीड बेंड तॊि अयदास औ अजान सफ,
व्दन्द, द्रोह, दोष है। त्रफरख यही है आयती। धभष ननयऩेऺ मे रोकतन्ि
जनाधधकाय रपु ्त है। धभष साऩेऺ, शुद्ध हो।
रेकय के जेफ घभू त,े
ऩटृ ि सॊख्मा: 130 उिा के सफ वो पंे क दो।
वष:ष 01 जो धभष के षवरुद्ध हो।

अकॊ : 04

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

िॉ● सषु भा शसहॊ , आगया, उत्तय प्रदेश

ब्ज़न्दगी

साऩॊ के कैं चरु सी भनंै े चाही छोढ़नी
ब्ज़न्दगी जौंक सी धचऩक गमी भझु स।े

दीभक रग गमी भेये भन भें
बयबया कय धगय गमी भेये भनसफू ंे की इभायत।

घनु रग गमा भेये सऩनों को
धरू - धरू हो गमीॊ भेयी यातंे ।
ग्रहर् रग गमा भये े इयादों को
कागज़ की नाव सात्रफत हुईं भेयी सायी कोशशशंे।
भेयी बखू को भाय गमा रकवा
औय भेयी प्मास हो गमी ररू ी रॊगडी।
जीवन के आसभान ऩय छा गमी धधॊु
औय आ गमीॊ आॊधधमाॊ भसु ीफतों की ।
तफ अॊगडामी री भेयी अना न,े भये े ज़भीय ने
औय ब्ज़न्दगी की ऩतॊग की िोय थाभी भनैं े हाथों भें
हौसरों के ऩॊख रके य भनंै े उडान बयी

अयभानों के आसभान भंे।
इच्छाओॊ के फीज िारे कोशशशों की धयती ऩय।

सपरता की पसर रहरहाने रगी
मशकी भहक उड कय दयू दयू जाने रगी।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 131 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

श्माभ गुप्ता, वाशाफाडी फाजाय राइन, फागयाकोट, जरऩाईगडु ी, ऩब्श्चभ फगॊ ार

हे भाॉ

भैं भनीषा फोर यही भझु े अऩनी कोख भंे ही भाय दे
हा भैं हाथयस से फोर यही इन्सानों के बेष भें दरयदॊ े जरा दंेगे

ना भैं हहदॊ ू ना भबु ्स्रभ भझु े नोचा जामे खयोंचा जाएॊ
हा भंै ननबमष ा फोर यही भये े फारों ऩकडकय घसीटा जामे
भय चकु ी हय फेटी फोर यही भये े कराइमों को भयोडा जामे
भन की गािॊ े खोर यही भेये दऩु ट्टे से ही हाथ फाॊधा जामे
राशों के ढेयों ऩय सोई हूॉ
चीखती ऩकु ायती फोर यही हे भाॉ अफ तो सनु रे
भये ी अॊतयात्भा घामर है भत ऩदै ा कय भझु े इस दनु नमा भें
भये ा सनु ने वारा कोई नही कऩडा यहतें हुऐ बी नगॊ ा हो जाऊ
अऩनी भन की गाॊिे खोर यही भझु े अऩनी कोख भंे ही भाय दे
भेया अब्स्भता रटू शरमा जामेगा
सनु रे भेयी प्मायी भाॉ
भझु े उिामा जामेगा कपय रोग भेये नाभ ऩय
झाडडमों भंे रे जामेगा हय गरी चौयाहे सडक भागष ऩय

जानवयों की तयह ऩीटा जामेगा कंे िर भाचष ननकारेंगे
भेये ब्जस्भ को जरामा जामेगा जोय शोय से आवाज उिे गी
भेये होिों से हाॊसी छीना जामेगा कपय टीवी ऩय डिफटे होगी
इससे ऩहरे अऩना वजदू खो दु इससे ऩहरे तये ा बी नाभ आ जामे
हे भाॉ भझु े अऩनी कोख भें ही भाय दे ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 132 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

कल्ऩना गुप्ता "यतन", जम्भू एॊि कश्भीय

दादी नानी

सनु ए त्रफहटमा यानी
सनु ाती हूॊ एक कहानी
वह बी थी फटे ी ककसी की
जो थी तुम्हायी दादी नानी।

फयकत थी तफ घयों भंे
दआु ओॊ से बये हाथ थे सय भें
खूफसयू त थे वह हदन जफ
रोरयमा गाके सरु ाती दादी नानी।
होते थे घय के फेटे फहादयु शयू वीय
फेहटमाॊ बी काधॊ े ऩे रटका तयकश
चराती थीॊ आगे फढ़ शिु ऩे तीय
तरवायफाजी थी शसखाते दादी नानी।

जभाने भें नहीॊ था कोई बी खोट
घभू आते थे अके रे इधय-उधय
शभरता नहीॊ जो ऩहुॊचाता चोट
सासॊ ्कारयक फनाती थी दादी नानी।
नानी के नसु ्खे दादी के फोर
होते थे सीधे प्माये व सच्चे
त्रफना ककसी बाव गोरभोर
सच की शशऺा देती दादी नानी।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 133 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

यीता जमहहन्द, हदल्री

कफ तक फरात्काय होते यहंेगे

कफ तक फहे टमों के साथ फरात्काय होते यहंेग?े
कफ तक ज़भाने वारों आॉख भीॊचकय सोते यहेंग?े
आज उसकी त्रफहटमा के साथ भंे फरात्काय हुआ है।
कर तेयी फटे ी समानी होगी, सोमा क्मों हुआ है?
शस्ि उिा आज फदरा रो त्रफहटमा की अस्भत का।
फटे ी ईश्वय की देन हंै खाती अऩनी ककस्भत का।।
फेहटमों ऩय जफ बी अन्माम हो तुभ आवाज उिाओ।
ज़भाने वारों जागो आज शभरकय एक हो जाओ।।

फरात्कायी का हश्र होना चाहहए शसपष पाॉसी।
फेहटमों को तरवाय थाभकय फनाओ यानी झाॉसी।।
देखना एक हदन जीत होगी फेहटमों के न्माम की।
सत्म जीतगे ा हाय तो ननब्श्चत होगी अन्माम की।।
अन्माम सहन कयना बी एक फहुत फडा अऩयाध है।
जो जन अन्माम सहेगा उसका जीवन अशबशाऩ है।।
तो देय ककस फात की? अऩयाधी को धगन - धगनकय भायो।
मही शाश्वत सत्म है तुभ अऩना जीवन सवॊ ायो।।

फरात्कायी, ऩाऩी, देशद्रोही देखो फचने न ऩाए।
ऐसे अऩयाधी अऩनी भौत को असभम ही फरु ाए।।
भौत बी आज शसहय जाए ऐसी सजा इनको देना ।
बायत भाता की सॊतान हो तो पजष ननबा रेना।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 134 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

सयु ेश कु भाय कऩयू "श्री हॊस", स्टेडिमभ योि, फयेरी, उत्तय प्रदेश

कोशशश कयो कक ब्जन्दगी हभायी अऩनी सहेरी फन जामे

भसु ्कया कय ही जीना तुभ

इस ब्जॊदगानी भें। गभों भंे बी भसु ्कायनंे की मह आदत

भाना कक कु छ यास्ते खयाफ बी फहुत अरफरे ी है ।
तन्हाई भें बी ब्जन्दगी कबी यहती
हैं इस यवानी भें।।

जान रो कक ब्जन्दगी कपदा है नहीॊ अके री है ।।

इस भसु ्कयाहट ऩय। तनाव अवसाद मॉू ही असय नहीॊ

चाहे ककतने गभ हों जीत कय ही कयते आदभी ऩय ।

आओगे इस कहानी भंे।। कबी मह ब्जन्दगी हभायी फनती

मह जीवन फस इब्म्तहानों का ही नहीॊ ऩहेरी है ।।

दसू या नाभ है । कोशशश कयंे कक ब्जन्दगी हभायी

एक यास्ता फदॊ हो तो बी जान रो अऩनी चरे ी फन जामे।

दसू ये तभाभ हंै ।। वक़्त भबु ्श्करों का बी हभायी

तुम्हाया बाग्म तमु ्हाये कभष की ही सहेरी फन जामे।।

भटु ्ठी भंे होता है कै द । फस खुश यहंे हभ हय वक़्त औय

मह ककस्भत की रकीयंे तये े ऩरयश्रभ हय ददो गभ भें ।

का ही ईनाभ हैं ।। हो ब्जसका हय जवाफो हर फस

ब्जॊदगी वो ऩहेरी फन जामे।।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 135 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

ननशा गपु ्ता, शसरीगडु ी, ऩब्श्चभ फगॊ ार

कषवता तुभने सनु ा नही,ॊ
ददष कही फॉटा नहीॊ !
आज कपय शरु ू,
हुआ नमा जीवन ! माद आमा कपय,
कागज ऩे उताया ह,ै करभ कागज़ ही सही !
ब्जॊदगी कषवता के रूऩ भंे !
ककतनी अधयू ी थी, जफ से इन हाथों न,े
अफ ऩयू ी हुई है ! जुफाॉ से नहीॊ करभ स,े
ददष शरखा कागज ऩ,े
कषवता तू ना होती, फजे ्जजती नहीॊ इज्जजत शभरा रोगो से !
तो कै से भैं जीती !
अऩने जज्जफातों को शरखा, वाह ये वाह कै सी दनु नमा ....
जो कह नहीॊ सकी मही जफु ाॉ से कहा होता,
उसे करभ से शरखा ! नतयस्काय शभरा होता !

कागज धन्मवाद तू तो सनु ा, अफ ऩरु ुस्काय हदमा जा यहा !!
हदर को फहुत सकु ॉू शभरा ! जानवय कहने से फयु ा भान जाते ह,ंै
शये कहने से खशु हो जाते है !
रोग िामरयमाॉ शरखते ह,ैं कहवात आज सभझ आई !!!
ब्जसे फॊद अरभायी भंे यखते है !
भनंै े कषवता शरखी, वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ब्जसे खरु े आभ ऩशे की !
रोगो ने फहुत वाह वाह हदमा !!!
कै से सभझाऊॊ अफ उन्हंे,
तुभने ही मे हुनय हदमा !

ऩटृ ि सॊख्मा: 136

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

सॊघषष भधु प्रसाद, शसरीगडु ी, ऩब्श्चभ फगॊ ार

ब्जॊदगी को जीना ह,ै तो षवशबन्न ऩहरू साभने आ जाते है
सॊघषष कयते यहना है। औय उन सबी ऩहरओु ॊ भें
क्मोंकी ......... हभ उरझते है औय
ब्जॊदगी शभरी है सघॊ षष के शरए उसे सरु झाने का
इसशरए ......... ननयॊतय प्रमास कयते है।
ब्जॊदगी के हय भोड ऩय ब्जॊदगी है ,तो
सॊघषष हभाया प्रतीऺा कयता है सघॊ षष कयते यहना है।
ब्जॊदगी औय सॊघषष का औय ......
रयश्ता गहया है सघॊ षष कयते यहोगे तो
इस सबृ ्टट भंे ब्जॊदगी ननखय कय
इसशरए ....... सौंदमष का रूऩ धायर् कय
दोनों एक दजू े के साथी फने है। खशु शमाॊ देगी।
सॊघषष के भाध्मभ से इसशरए ....
ब्जॊदगी भें सघॊ षों के ब्जॊदगी भें सघॊ षष कयते यहना है।

ऩटृ ि सॊख्मा: 137 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

नीतू चौहान, वायार्सी, उत्तय प्रदेश

यैना भंे चाॉद

छरफती चभकती सी यैना,
चाॉन्दनी यातो भें ननै ा,
सहु ावनी भें तयाशती,

अऩनी षप्रम की भखु को ननै ा।
फादरो भंे चभकता एक ताया हदखा,
उसभें षप्रम का चभकता भखु हदखा।

षप्रमतभा रजाती हुई फोरी,
हे षप्रमे! तभु चादॊ भें हो, मा
चादॊ ही तभु फन गए हो?

षप्रम फोरा, षप्रमतभा!
तमु ्हाया प्रेभ ही,

सागय की गहयाईमो सा है।
इस शरमे तुम्हें चादॉ भें भ,ैं

औय दयू हूॊ भंै तो,
चाॉद फना हदख यहा।

ऩटृ ि सॊख्मा: 138 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

प्रेभ फजाज, जगाधयी, मभनु ानगय, हरयमार्ा

दहरीज

आकाॊऺाओॊ के सनु ्दय फाग हदखा कय भन भोह यही है भये ा दहरीज ,
भन की ऩतॊग को देती है हवा उस ऩाय की दहरीज ।

तन यहता दहरीज के अन्दय भन उस ऩाय घभू आता है , ननत नए यॊग हदखाता है ।
चाहता है भन उडना ऩॊख रगा कय दहरीज के उस ऩाय ,
भगय राघॊ नहीॊ सकती भैं मे दहरीज ।
उस ऩाय दहरीज के , जीते हंै सऩने भये े , इस ऩाय घय है ,

ऩरयवाय है , ब्ज़म्भदे ारयमाॊ हंै , भभता है, भमाषदाएॊ हैं , ऩयम्ऩया की फडे डमाॊ है ,
मे सफ योकते हंै , भझु े टोकते है , राघॊ ने नहीॊ देते दहरीज ।

नहीॊ राॊघ ऩाऊॊ गी भैं भमादष ा की दहरीज , नहीॊ राॊघ ऩाऊॊ गी षवश्वास की दहरीज ,
नहीॊ राॊघ ऩाऊॊ गी भैं ऩयम्ऩयाओॊ की दहरीज ।

दहरीज के अन्दय ही यह कयके राघॊ नी है दहरीज, रूहढ़वादी प्रथाओ की ,
अॊधषवश्वास की कथाओॊ की , षऩजॊ ये भें कै द कयने वारी हवाओॊ की ।
खडी हूॊ दहरीज ऩय पॊ सी हूॊ धभसष कॊ ट भें , दहरीज ऩाय करूॊ तो कै से ,
हूॊ अजीफ सी कशभकश भंे ।
राॊघ चकु ी उम्र की दहरीज , अफ नहीॊ राघॊ ऩाऊॊ गी मे दहरीज ।
छोडकय दहरीज ऩय सफ चाहते , इच्छाएॊ , आकाॊऺाएॊ रौट आती हूॊ
दहरीज के अन्दय , नहीॊ राघॊ सकी भंै मे दहरीज ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 139 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

काजर गपु ्ता, शसरीगडु ी, ऩब्श्चभ फगॊ ार

'कषवता' क्मा हंै ?

कषवता ... अगय तुभ भझु से ऩछू ो तो
न शकु ्र की ऩरयबाषा भंै फताऊॊ ‘कषवता’ क्मा है ?
न वड्षसवथष के षवचाय भाि हंै कषवता .....
अगय तभु भझु से ऩछू ो कषव के उरझे बावो का
तो भै फताऊ ... सरु झा शलद रूऩ है ...
कषवता क्मा हंै ? औय कषवता हैं क्मा ..
शातॊ भन का शोय तो
कषवता .... चपु ्ऩी की चीख है ।
यईसों का भनोयॊजन तो
दीनो की दशा हंै तभु सभझ सको तो
गयीफों की सॊताऩ तो भंै स्भझाआऊ
ननयीह जनता की जरती भशार हैं ‘कषवता’ क्मा हंै ?
षवमोगीमो का षवराऩ तो कषवता औय कु छ नहीॊ
प्रेशभमों की भधयु याग हंै कषव के आह ! का
तुम्हाया वाह ! !
शलद रूऩ है।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 140 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

षप्रमॊका कटाये 'षप्रयाज', ग्वाशरमय, भध्म प्रदेश

रडककमाॉ

रडककमाॉ
नततशरमों की तयह होती ह,ंै
यॊग - त्रफयॊगी, खफू सयू त सी।
भगय ककसी के छू ते ही
त्माग देती हैं अऩने ऩखॊ
औय वो तभाभ यॊग बी,
जो रोगों को आकषषतष कयते हंै।

रडककमाॉ रडककमाॉ
धचडडमों की तयह होती ह,ंै खुशफओु ॊ की तयह होती ह,ैं
चहचहाती , पु दकती हुई सी। भहकती सी, त्रफखयती सी।
भगय ककसी जार भें पॊ सते ही भगय ककसी कै द भंे आते ही
बरू जाती हैं पु दकना छोड देती हैं भहकना
औय चहचहाना बी, औय खुद को त्रफखेयना बी,
ब्जसे सनु कय जार त्रफछाए जाते हैं। फस शसभट जाती हैं उस कै द भंे।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 141 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

प्रनतबा शसहॊ , कोरकाता, ऩब्श्चभ फगॊ ार

भेये ऩास षप्रमे तफ आना

है प्रेभ नहीॊ उथरा भेया, तुभको ही प्रभे ककमा भनैं ,े
इसभंे सागय - सी गहयाई। तुभ भये ी जीवन आशा हो।
षप्रम हयदभ साथ ननबाऊॊ गा, कय हदमा ऩरू ्ष जीवन ब्जसन,े
हो वाद्धषक्म मा तरुर्ाई।।१।। वह प्रेभ ऩरू ्ष अशबराषा हो।।५।।

जीवन के हय भबु ्श्कर ऺर् भ,ंे है भेये अॊतस भें के वर,
आऊॊ गा फनकय आस षप्रमे। तये ी मादों का वास षप्रमे।
जफ रगे अके राऩन तभु को, जफ रगे अधयू ी हो भझु त्रफन,
तफ आना भेये ऩास षप्रमे।।२।। तफ आना भेये ऩास षप्रमे।।६।।

जीवन बय साथ ननबाने का, हभ इक दजू े के ऩयू क हैं
भनंै े था वचन हदमा तुभको। दोनों को साथ ननबाना है।
भय कय बी साथ ननबाऊॊ गा, फनकय इक - दजू े का सॊफर
ना झिू सभझना षप्रम इसको।।३।। इस जग को प्रेभ शसखाना है।।७।।

भैं होने दॊगू ा कबी नही,ॊ जफ त्मागऩरू ्ष जीवन होगा,
ककॊ धचत दखु का आबास षप्रमे। तफ प्रेभ फनेगा खास षप्रमे।
जफ साथ छोड दे हय कोई, जफ कबी ऩकु ारूॊ भंै तभु को,
तफ आना भेये ऩास षप्रमे।।४।। तफ आना भेये ऩास षप्रमे।।८।।

ऩटृ ि सॊख्मा: 142 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

वनतकष ा अग्रवार, वायार्सी, उत्तय प्रदेश

मे दो हाथ

मही दो हाथ ऩयभात्भा को प्रर्ाभ कयने के शरए जडु ते हैं ।
मही दो हाथ अॊधये े भें ऩाऩ कयने के शरए इक दजू े के होतंे हैं ।

मही दो हाथ ईश्वय को ऩटु ऩ सभषऩतष कयने के शरए आतंे हंै ।
मही दो हाथ बखू े के भखु से बोजन का ननवारा नछन जातें हंै ।

मही दो हाथ सदी भंे ककसी काऩॉ ते को कॊ फर ओढ़ातें हंै ।
मही दो हाथ ककसी भज़फयू के तन से कऩडंे उतायतें हंै ।

मही दो हाथ अब्स्थमों की याख को गॊगा भंे प्रवाहहत कय भबु ्क्त हदरातंे हैं ।
मही दो हाथ ककसी फफे स ऩय चाफकु चराते हैं ।

मही दो हाथ 'याभामर् - गीता' वर्नष भंे ऩटृ ि ऩरटतंे जातंे हैं ।
मही दो हाथ ककसी अनाथ, रावारयस को ढके र दयू बगातंे हैं ।

मही दो हाथ ककसी भासभू फच्चे के शसय ऩय पे य स्नेह - वषाष कयवातंे हैं ।
मही दो हाथ ककसी के स्वाशबभान ऩय तभाचा भाय ब्जॊदगी बय को मादें छाऩ जातें हंै ।

मही दो हाथ ऩयभात्भा से दआु ॉ के शरए उितें हैं ।
औय मही दो हाथ ककसी का ़त्र कयने भें साथ होतें हंै ।

मही दो हाथ भामा के फधॊ न भें फॉधवातंे हैं ।
मही दो हाथ जो फधॊ न से भबु ्क्त हदरवातंे हंै ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 143 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

िॉ● याजेन्द्र शभरन, शभरन भजॊ यी, आजादनगय, खॊदायी, आगया, उत्तय प्रदेश

ब्जमो - जीने दो

ाभ भंे नहीॊ दभ मायो सफको फताओ तुम्हंे बेजा भाशरक ने इॊसाॊ फनाके
ब्जमो औय जीने दो खुशशमाॊ भनाओ दमा धभष करुर्ा का ऩतु रा फनाके
तभु हहन्दू ईसाई यहो माकक भबु ्स्रभ न हहदॊ ू तुम्हंे उनको भबु ्स्रभ फनामा
ऩय इॊसाननमत को तननक भत रजाओ न बजे ा कोई सॊत भलु ्रा फनाके

भॊहदय मा धगयजा कक भब्स्जद भें जाओ तुम्ही ने फनाई मे कपयका ़ा ऩयस्ती
भगय हदर का दीऩक न हयधगज फझु ाओ भत आऩस भंे अफऔय कटु ता फढाओा़

धयभ चाहे जो हो नहीॊ दोष उसभें अये बाई है चाय हदन ब्ज़ॊदगानी
षवचायों भें तोरो नहीॊ खोट उसभंे दनु नमा भें यह जामेगी फस कहानी
तमु ्हायी ननगाहों भंे फर जो ऩडे हंै अगय तभु ने ऩोंछे न आॊसू ककसी के
टटोरो न ऩाओगे तुभ जोश उसभंे बरा छोड जाओगे क्मा तभु ननशानी

अगय सच सनु ो तो सनु ाएॊ तमु ्हंे हभ खुशशमाॊ रटु ाना ही जीवन का भकसद
आऩस भें शभर बाईचाया फढाओा़ गरे से रगो औय गरे से रगाओ ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 144 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

सीभा गगष भजॊ यी, भये ि, उत्तय प्रदेश

जम जम सीतायाभ

यघवु य याजा याभ दरु ाये अमोध्मा के ननै ों के ताय,े
दशयथनदॊन याजायाभ जनभन को प्रार्ों से प्माये !

आज षवयाजै यघयु ाई चहुॉहदशश आनन्द यस छरकाई,
सणखमाॉ झभू ें भॊगर गाई अवधऩयु ी भें यॊगी फहायें छाईं !

बशू भऩजू न शशरान्मास आज अवध पै री उजास,
ऩयभ ऩनु ीत भगॊ र घडिमाॉ माद यखेगा मे इनतहास !

चाॊद हदवाकय धया व्मोभ भंे हषष अऩाय छामे ह,ै
सयु फारा अप्सया नाचे देव दनु ्दशु ब फजामे है !

अभतृ ननझयष फॉदू े झयती वसधु ा के कटट हयंेगे याभ,
सोभ सधु ा यस फयस यहा भहु दतभन है अमोध्मा धाभ !

दीऩ जराओ भॊगर गाओ ब्रह्भ अगोचय आमे ह,ै
याभयाज आमेगा सखु दामी भन भंे आस फॊधामे हैं!

के सय कस्तूयी बयो तरमै ा दधध हल्दी की धभू भचाओ,
यॊग यॊगीरी यॊगोरी से भगॊ र करश घय द्वाये सजाओ !
रड्िू फपी ऩडे ा भवे े बय बय फाटों शभिइमाॉ जी,
इि पु ररे चोफा अगयजा भहका दो घय अॊगना जी !
ऩाॊच सदी के फाद णखरी है नेह की सकु ृ त चाॊदनी धऩू ,
सब्च्चदानन्द सत्म अरौककक सजा हदव्म रूऩ अनऩू !
कोहटन काभदेव रजामे झाॊकी सीतायाभ की,
भॊगर शधु च ऩावन नाभ जम जम सीतायाभ जी !!

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 145 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

षवनीता शसहॊ चौहान, इॊदौय, भध्मप्रदेश

सवॊ ेदना

जफ षवचायाॊकु य होते हैं प्रस्पु हटत, इॊसान इॊसान से ियने रगे।
औय जागतृ होती है अतॊ चते ना। झूि, पयेफ, अहभ की भहाभायी स,े
जफ फदाशष ्त से फाहय होती है ब्स्थनत, हय जगह राशों के ढेय रगने रगे।
औय फढ़ जाती है अतॊ वेदना।
प्रताडना इॊसान को कय देती है ऩत्थय, अभीय गयीफ की खाई को ऩाट,
औय भय जाती है सवॊ दे ना, एक दजू े के आॊसू ऩोंछते यहहए।
तफ शामद फन जाती है कषवता.... ऊॊ च - नीच का बेद शभटाकय,
तफ शामद फन जाती है कषवता.... भन भंे वदे ना ना यहने दीब्जए।

जफ अतॊ वेदना कयहाने रग,े जीवन भें उम्भीदों की रौ को,
औय इॊसाननमत भयने रग,े भशार फन कय जरने दीब्जए।
तो सभझो रोग सवॊ दे नहीन हो गम,े प्रकाश ऩॊजु आरोककत यहे सदा,
तफ से ही इॊसानी रयश्ते भयने रगे। भन भंे अतॊ चेतना जगने दीब्जए।

गाॊव की सयजभीॊ ऩय, रृदम सभयसता ना सखू े कबी,
अफ शहय फसने रगे। नदी सा बावों को फहने दीब्जए।
इॊसानी स्वाथष की खानतय, सखू गई जो धाय फस येत फनगे ी,
हये बये वन कटने रगे। भन को येधगस्तान न फनने दीब्जए।
आशशमाने उजड गए,
जीव जतॊ ु भयने रगे। रयश्ता कामभ यखने के शरए,
करषु व तभस की नदी भ,ंे सवॊ ेदना ना भयने दीब्जए।
इॊसान धाय के साथ फहने रगे। एक दजू े की भन की जभीॊ भ,ें
औय स्वाथष सवोऩरय हो गमा अऩनेऩन का गीराऩन यहने दीब्जए।

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 146 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

सयु ेन सागय, साॊगानये , बीरवाडा, याजस्थान

देश गीत गा यहा हूॉ ......

देश गीत गा यहा हूॉ। तीखी खोटी बी सनु ी
अऩनी धनु भें जा यहा हूॉ। हुई फहुत सी अनभनी
देश गीत गा यहा हूॉ ...... भगय ध्मान से हटा
धमै ष को सजा यहा हूॉ।
याभ के इस देश भ,े देश गीत गा यहा हूॉ।
गाधॊ ी के ऩरयवशे भ,ंे अऩनी धनु भें जा यहा हूॉ।
जो शभरा उसे नभन
कयके चरा जा यहा हूॉ।। धनु भये ी है नके सी
देश गीत गा यहा हूॉ। प्रीत के सन्देश सी,
अऩनी धनु भंे जा यहा हूॉ। जो है सफ भीत भेये
ऐसी यीत ध्मा यहा हूॉ।
प्रभे से ऩकु ाय कय देश गीत गा यहा हूॉ।
क्रोध को नकाय कय, अऩनी धनु भें जा यहा हूॉ।
याग अऩनी बरू कय
देश याग गा यहा हूॉ। सफका साथ रे चरो
देश गीत गा यहा हूॉ। धीये धीये ही सही फढ़े चरो फढ़े चरो,
अऩनी धनु भें जा यहा हूॉ।
अगय भगय बरू कय
िगय ऩे फढ़ता जा यहा हूॉ।

देश गीत गा यहा हूॉ।
अऩनी धनु भंे जा यहा हूॉ।

ऩटृ ि सॊख्मा: 147 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

भनीषा शसहॊ , यानीिगॊ ा, शसरीगुडी, ऩब्श्चभ फॊगार

मह वक्त

मह वक्त बी गुजय जाएगा,
बयोसा यख मह तूपान बी थभ जाएगा,

भाना के फहुत तकरी़ि हो यही है तुझ,े
ऩय िय भत ! खशु शमों का हिकाना बी शभर जाएगा,

भहे नत के चलू ्हे ऩय सऩने को हकीकत फना,
कोशशश तो कय, भकु द्दय खदु गुराभ फन जाएगा,

सोच ज़या जफ इस कशभकश से ननकरकय तू ऩीछे भडु कय देखेगा,
शामद खदु की एहशभमत तफ कहीॊ तू जान जाएगा,

औय मह जो फदर यहे हैं हय योज़ चहे य,े
तू क़िक्र ना कय, इन के होंिों ऩय बी कर तये ा नाभ फस जाएगा,

िु कयाने दंे उन रोगों को, ब्जतना उन्हंे िु कयाना ह,ंै
तू तो सयू ज ह,ंै अॊधेया धचय कय छा जाएगा,

मह वक्त बी गुजय जाएगा,
बयोसा यख, मह तुपान बी थभ जाएगा ..।

ऩटृ ि सॊख्मा: 148 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

अचनष ा होता, सम्फरऩयु , ओडडशा

आधुननक भच्छय

“फस्ती भंे घसु आए मह कु छ भच्छय मे घभू ते भच्छय इन्हंे क्मों नहीॊ काटते
शबन्न - शबन्न हुए रगा यहे मे चक्कय योगों से ग्रशसत कय इनके शयीय को चाटते

कहीॊ कोई शभर जाए इॊसान ऩय मे दौरत वारे ताकतवय जो िहये
योग रगा कपन का कय दे इॊतजाभ गय मे भच्छय रगाएॊगे उनका चक्कय
काट खाएॊगे उल्टा इन्हें ही दफोच कय
ऐसे ही इॊसानी भच्छय घभू यहे हंै
भजदयू ों को फेवजह िस यहे हैं मही तो यीनत है जभाने की
ब्जनके ऩास खाने को दाना नहीॊ कभजोय दफता है, फरवान दफाता है

यहने औय ऩहनने को कऩडा नहीॊ मे ददष रते े हंै, वे ददष देते हैं
ऐसे दफु रष , ननयीह क्मा कय ऩाएॊगे इनका दखु कोई नहीॊ फाटॊ ने वारे
हजायों हैं उनके दखु सहने वारे
इनका भकु ाफरा तबी तो इन्हंे फरवान कहते हैं
औय धीये - धीये भय जाते हैं कु रफरु ा ऩसै ों के फरफतू ों ऩय सफ काभ कयवा रेते हैं
अभीयों के घय जहाॊ ऩसै ा ऩानी की तयह आता गयीफ एक - एक दाने के भोहताज होते हैं
मह रोगों को दानों के शरए भोहताज कयते हंै।”
है
कहाॊ से आता है कै से आता है
ना है अफ तक ककसी को ऩता

ऩटृ ि सखॊ ्मा: 149 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता

भाधयु ी ऩाण्िमे , शसरीगुडी, ऩब्श्चभ फॊगार

वो गशरमाये पसरों से चायों औय
यॊगीननमा छा जाती थी ,
आज बी माद आती है सयसों के पू रों से
गावॉ की वो गशरमाये , हय औय सनु हयी ककयर्
जो शहयों की इन ़िै र जाती थी ,
चभक धभक से थे ऩये । जहाॉ नीभ की ननफॊ ौयी
जहाॉ इक भनबावन ..... से हवाओॊ भंे शदु ्धता
हवाओ से जडु ा था भन आ जाती थी ,
ब्जसकी ऩगििॊ ी की जहाॉ दादा - दादी की
धरू भंे इक प्मायी सी कहाननमों की फीच फचऩन फीता
खसु फू से योज भासशू भमत औय नासभझी ......
शभरना होता था । के फीच हय ऩर जीमा
जहाॉ फारयश की फदॊू ों से उन गशरमायों के फीच जाते भन नहीॊ थकते ,
शभट्टी भंे सौंधी सौंधी ऩय उन सफको छोड रौट
भहक से एक - एक यास्ते आना ऩडता है कभबष शू भ की ओय ।।
भहक जाते थे ,
जहाॉ खेतो भें रहयहाते वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020

ऩटृ ि सॊख्मा: 150

ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता

अभतृ ा कु भायी, आसनसोर, ऩब्श्चभ फॊगार

सपरता

सच है की सपरता के भाॉ - फाऩ, बाई - फहन सफ होते है
होते है फशे कीभती ऩहये बी,
धगनती बी उनकी होती है ओहदेदायो भें।

वो उॊ गशरमों ऩय ह,ै
ब्जन्होंने कबी असपरता का स्वाद चखे त्रफना ही
यच दी दास्तान - ए - पतह
औय उनकी कहाननमाॊ अरग फनी
ब्जसने अऩने जोय से ऩवतष ों को काट कय नहदमाॊ फहा दी।

असपरता गतष फनाती है िू फने का,
हदशा बरू ा देती है कदभों की,
द्ु ख का बान कयाके भन भें
जगा देती है सॊशम ।
कपय हौसरे टू टने रगते हैं
हधथमाय छू टने रगते हंै
यर् भें शिु बायी रगने रगता है।

महद हो सच्चे षवजमी तो कभष कयो,
सपर होकय ऩयू ा भानवता का धभष कयो
सपरता उसकी हटकती नहीॊ है जो फन जाए अशबभानी ,
कभिष भानव का गरु ् है
हाथों भंे सपरता औय आॊखों भें स्नहे का ऩानी।

ऩटृ ि सॊख्मा: 151 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020


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