ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
अनतभष ा धचक फडाईक, हल्दीफाडी, त्रफन्नागुडी, जरऩाईगुडी, ऩब्श्चभ फॊगार
आहदवासी कौन
कोर हूॉ, बीर हूॉ, भणु ्िा हूॉ, भंै सॊथार हूॉ,
शफयी बी हूॉ, भैं त्रफयसा बी हूॉ,
भंै भरू ननवासी आहदवासी हूॉ |
न हहन्दू हूॉ, न भबु ्स्रभ हूॉ,
न शसख हूॉ, न ईसाई हूॉ,
भैं भरू ननवासी आहदवासी हूॉ |
वन उऩवन भें यहता हूॉ, श्रभ के भतु ात्रफक देखोग,े
कॊ द - भरू भंै खाता हू,ॉ तो पकष ही नहीॊ ऩाओग,े
ककन्तु भझु े असभ्म न कहना औयतों औय भदों भें फयाफयी ही ऩाओगे |
भैं जॊगर की धयोहय भरू ननवासी आहदवासी हूॉ हा,ॉ भैं भरू ननवासी आहदवासी हूॉ |
|
शोध कामों भंे तो भंै शाशभर हू,ॉ
प्रकृ नत की ऩजु ायी हू,ॉ छी:, थ,ू के घरृ ्ा बाव से क्मा वॊधचत हू,ॉ
प्रकृ नत भंे जीता हू,ॉ ऩाचॊ वी अनसु चू ी भंे बी भंै शाशभर हूॉ ,
कयभ की ऩजू ा कयता ह,ूॉ रेककन क्मा सच भें अधधकायों भें सभान ह,ूॉ
ब्जनतमा की ऩजू ा कयता ह,ूॉ हा,ॉ भंै वही भरू ननवासी आहदवासी हूॉ |
प्रकृ नत की ऩजू ा कयने वारा
भैं भरू ननवासी आहदवासी हूॉ |
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 152 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
रार चन्द जैहदमा "जैहद", फीकानये , याजस्थान
ाज़र
हदर योता है आॊसू भगय ननकरता नही
कतया, कतया फहता है रहू हदखता नही।
गभ – ऐ - हार कै से जीते है रोग महाॊ ऩय
भयना चाहे अगय चनै से कोई भयता नही।
चरती है सासॊ े रुॊ ह से उतय कय रुॊ ह तक
ब्जन्दा तो है भगय ब्जन्दा वो हदखता नही।
कहने को तो अल्पाज रफो ऩय फहुत है
खौप इतना है कक भगय कोई कहता नही।
शहय – ऐ - कपजाओ भे मे कै सा जह़य घरु ा
कक गरु – ऐ - फहाय भे बी गुर णखरता नही।
शोजे – गभ – ऐ - जनु नू फहुत जीता है "जैहद"
सॊगो - खाय याहो भे ह,ै कपय बी ियता नही।
गभ – ऐ - हार: गभ के हार भे
शहय – ऐ - कपजाओ: शहय के वातावयर्
गरु – ऐ - फहाय: गरु के फहाय
शोजे – गभ – ऐ - जुननू : आन्तरयक दखु ् की षऩडा
सॊगो - खाय: ऩत्थय औय काटॊ े
ऩटृ ि सॊख्मा: 153 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
ऻान प्रकाश ऩाण्िमे , उत्तय 24 ऩयगना(उत्तय) ,सोदऩयु , कोरकाता, ऩब्श्चभ फॊगार
ाज़र
अफ न गेहूॉ न धान खेतों भ,ें
फो यहा क्मा ककसान खेतों भंे ।
सदष चलू ्हे शससक यहे हय स,ू
जर यहा
सषॊ वधान खेतों भंे ।
कर तरक णखरणखरा के हॉसते थ,े
अफ न रेककन ज़ुफान खेतों भंे ।
लमाह त्रफहटमा का क्मा कये "हयखू",
फस उगा है रगान खेतों भंे ।
तयफतय कौन मॉू ऩसीने स,े
भंे।
दे यहा इम्तहान खेतों
ऩटृ ि सॊख्मा: 154 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
षवनम चौये, फम्हन गावॉ खदु ष, होशॊगाफाद, भध्मप्रदेश
ाज़र
सोचो जया उसने शभट्टी भें ददष बया न होता।
झगडे के फाद कपय प्माय हयाबया न होता।
ददष उसने हदमा है उसको माद के शरए नहीॊ।
इनसान अऩने हाथ ऩयै काटने से िया न होता।
भैं नहीॊ जान ऩाता तुम्हायी पासॊ का ददष कै सा है।
अगय ऩहरे भनंै े ददष का अनबु व कया न होता।
शभट्टी भें उसके होने का ददष से ही ऩता चरा है।
वयना दनु नमा भंे कोई बरा कोई फयु ा न होता।
ददष से बये प्रेभ के एहसास भंे भीया ऩागर हुई।
कृ टर् भीया के जहय के प्मारे भंे उतया न होता।
ऩटृ ि सॊख्मा: 155 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
सयु ेन्द्र 'सागय', हाॊसी, हहसाय, हरयमार्ा
ाज़र
कै से गुजयी है ब्ज़ॊदगी सभझो
वक्त की थोडी ऩयै वी सभझो
सार ककतना फयु ा है मे आमा
ब्जॊदा हो अऩनी फहे तयी सभझो
एक हदन भयना तो सबी को है
जीने की उनकी नतश्नगी सभझो
पू र खुशफू अगय नहीॊ देते
साये के साये कागज़ी सभझो
मॉू गुभाॊ कय न अऩनी दौरत का
आदभी को बी आदभी सभझो
भसु ्कु या रते ा हूॉ हय इक गभ भंे
ददष से अऩनी दोस्ती सभझो
सनु शरमा फेगुनाह होकय बी
खाभशु ी भये ी सादगी सभझो
रफ्ज़ हदर भें उतय गए 'सागय'
याज़ गहये हंै शामयी सभझो
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 156 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
मोधगता चौयशसमा, भॊिरा, भध्म प्रदेश
ाज़र
दनु नमा के जल्रादों स,े तझु े त्रफहटमा फचा न सके ।
भभता को अऩनी, तये ी याहो भे हभ त्रफछा न सके ।।
गरु शन के फहाय भ,े ऩतझड आने योक न सके ।
मे जख्भ ऐसा है कक, ककसी को हदखा बी न सके ।।
भदु ्दतो का गभ मे ह,ै त्रफहटमा आज जान न रे र।े
कोशशश कयके बी, मे त्रफहटमा बरू ा हभ न सके ।।
वीयॊगना थी अॊत तक रडी, त्रफहटमा फचा न सके ।
चीखी, धचल्राई, योई, होगी, त्रफहटमा सयु ऺा दे न सके ।।
भातभ का आरभ, अफ सभाचाय की सणु खमष ाॊ यहा।
हवस के दरयदॊ ों की कयततू ों स,े अब्स्तत्व फचा सकंे ।।
कै सा कयें, कै से फेहटमों को ऩढ़ाम,े औय कै से फचामे।
नऩॊ सु क सभाज, कभजोय काननू , कु छ कय न सके ।।
खुद को भानव कहने वार,े दानव मे भक्काय यहे।
"मोधगता" की करभ यो दी, रुक रुक जो शरख सके ।।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 157 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
याभनाथ फऽे फय, कोरकाता, ऩब्श्चभ फॊगार
ाज़र
ऽायो - गरु शभरे कु छ बी माय कोरकाता भ,ें
हभ रटु ामंगे े हयसू प्माय कोरकाता भंे।
हभ नहीॊ हंै फाहय के कौन तुभको सभझाम,े
हदर से हदर का जुडता है ताय कोरकाता भंे।
शहये कोरकाता की फात क्मा ननयारी ह,ै
ककतनी अम्नो शभल्रत है माय कोरकाता भंे।
हाथ वारे रयक्शे हैं राभ औय भरे ो बी,
हय कदभ ऩे शभरती है काय कोरकाता भंे।
शानोशौक भत ऩछू ो, कै से - कै से दीवान,े
कोई ककॊ ग है कोई जाय कोरकाता भंे।
फेऽफय की धडकन भें सऩनों की मे नगयी ह,ै
हय ककसी को शभरता है प्माय कोरकाता भें।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 158 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
षवजम "तन्हा", ऩवु ामा,ॉ शाहजहाऩॉ यु , उत्तय प्रदेश
ाज़र
गरे हभको रगा रते ,े तुम्हाया क्मा चरा जाता ?
हभंे अऩना फना रेत,े तुम्हाया क्मा चरा जाता ?
नहीॊ चबु ता कोई काॉटा, कबी अऩनो के ऩयै ों भ,ंे
चयागों को जरा रेत,े तमु ्हाया क्मा चरा जाता ?
ऩडी आदत तमु ्हें तो ह,ै सबी का हदर चयु ाने की,
हभाया हदर चयु ा रते ,े तमु ्हाया क्मा चरा जाता ?
फना गैयों को तुभ अऩना, सदा खाते यहे िोकय,
हभंे बी आजभा रेत,े तुम्हाया क्मा चरा जाता ?
शरखे हंै गीत बी भनैं ,े तुम्हायी माद भंे अक्सय,
उन्हंे ही गनु गनु ा रते ,े तुम्हाया क्मा चरा जाता ?
कदभ हभने फढ़ाए थ,े तमु ्हायी ओय कु छ रेककन ,
कदभ तभु बी फढ़ा रते ,े तुम्हाया क्मा चरा जाता ?
बटकते ही यहे "तन्हा", ककसी अन्जाॉ शहय भें हभ ,
ऩता अऩना फता देत,े तुम्हाया क्मा चरा जाता ??
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 159 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
ऩनू भ चौहान, भयु ादाफाद, उत्तय प्रदेश
ाज़र
आज तेये नाभ इस जहाॉ की सायी फाहय कय दॉ।ू
अऩने दाभन की हय खुशी तझु ऩय ननसाय कय दॉ।ू
फनकय एक इॊसान जफ जफ बी जग भें आऊॉ भ,ंै
़िना मे जीवन तझु ऩय ही फाय फाय कय दॉ।ू -
ब्जॊदगी बय साथ यहने की भोहरत शभर जाए अगय,
अऩने ननयीह जीवन का हय हदन त्मौहाय कय दॉ।ू
फडी शशद्दत से तुझे ऩाने का ख्वाफ सजामा है भनंै ,े
तये ी फाहों भें शसभट कय हय सऩना साकाय कय दॉ।ू
मे दनु नमा रूि जाए भगय तभु न रूि जाना सनभ,
भहु लफत की फारयश तझु ऩय ही फशे भु ाय कय दॉ।ू
भये े रफों ऩय हॊसी की वजह शसपष तुभ ही तभु हो,
प्रीत चनु रयमा ओढ़ इश्क का दरयमा ऩाय कय दॉ।ू
कबी तो फनाओगे भझु े सभसपय तभु अऩना ,
इसी उम्भीद से अऩनी प्रीत का हय श्रॊगाय कय दॉ।ू
तभाभ उम्र जीना चाहती हूॉ भैं आऩकी भहु लफत भ,ें
इनतहास भंे अभय कु छ मॉू मे प्माय कय दॉ।ू । "ऩनू भ"
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 160 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
अॊजरी श्रीवास्तव, उझानी, फदाम,ॉू उत्तय प्रदेश
ाज़र
शसतभ तो हय घडी उसन,े हभाये हदर ऩे ढामा है।
हॊसामा बी उसी ने औ' उसी ने ही रुरामा है।
रगाकय िोकये उसन,े हभंे कु छ मॊू सतामा ह,ै
शभरा जफ बी कबी भौका, भझु े ही आजभामा है।
शरखा है क्मा भकु द्दय भ,ें षवधाता ने हभाये बी,
यहा हूॉ दयू खुशशमों स,े खशु ी ने भॊहु धचढ़ामा है।
बयोषा है ककमा ब्जसऩय, उसी से है शभरा धोखा,
तोड कय आईना उसन,े हभी को ही हदखामा है।।
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 161 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
ब्जऻासा श्रीवास्तव, बोऩार, भध्म प्रदेश
सॊघषष अबी तक जायी है
चर यहे थे चर यहे ह,ैं चरने की ही फायी है।
थक गए ऩय थभे नही, सघॊ षष अबी तक जायी है।
हय सफु ह उत्साह के सॊग, इक नमी जॊग की तमै ायी है।
धगयकय बी कपय हंै फढा हौसरा हताशाओॊ से बायी है।
बरे जीतना राख हो भबु ्श्कर, तम जीत बी हभायी है।
थक गए ऩय थभे नही, सॊघषष अबी तक जायी है - - -
स्वप्न सबी हंै सच कयन,े मह भन भंे हभनंे िानी है।
हय हदन आगे फढ़ना है, मह सौगन्ध हभें उिानी है।
ब्जतनी दबू य याहंे अऩनी, भॊब्जर उतनी प्मायी है।
थक गए ऩय थभे नही, सॊघषष अबी तक जायी है - - -
इच्छाशब्क्त का ईंधन ह,ै कभिष ता अऩनी गाडी है।
षवश्वास वाहन चारक है, धमै ष िोकयों ऩय बायी है।
मे सपय बरे ही वक्त रे यहा, आगे जीत हभायी है।
थक गए ऩय थभे नही, सघॊ षष अबी तक जायी है
सॊकल्ऩ को हभ सबृ ्टट कय दंे, मही भानकय चरना है।
एक जीत ऩाकय के , असपरता का सयू ज ढरना है।
सत्म ऩथ ऩय सदा चरे ह,ैं न हहम्भत हभने हायी है।
थक गए ऩय थभे नही, सॊघषष अबी तक जायी है - - -
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 162 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
डिप्रोभेट ........... िॉ● अचनष ा खण्िरे वार, बीरवाडा, याजस्थान
औयतंे ''डिप्रोभटे '' होती हंै फते हाशा हॉस के छु ऩाती हंै
फताती कभ छु ऩाती ज्जमादा हंै औयतंे ......
औयतंे "डिप्रोभेट" होती हंै सनु ती हैं किवे फोर अक्सय
हदर भें ददष होता है सनु ा अनसनु ा सा हदखाती है
चहे ये ऩय सकु ू न हदखाती हंै औयतें .....
औयतें ... ऩीसी जाती हंै वो भंेहदी की तयह
आॉखों भंे नभी होती है कु छ नहीॊ हुआ जताती हंै
होिों ऩय भसु ्कु याहट हदखाती है औयतंे ......
औयतंे ..... अऩने हदर की फचे नै ी /ऩयेशानी को
साये हदन थक कय बी ककसी कोने भें छु ऩकय आॉसओु ॊ भंे फहा देती हैं
अऩने को तयोताजा हदखाती हैं ..!!!!!!
औयतें ..... औयतें ... सचभचु डिप्रोभेट होती हैं ..!!
अन्तभनष भन की हरचर को
ऩटृ ि सॊख्मा: 163 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
शशफानी प्रसाद, नागयाकाटा, जरऩाईगुडी, ऩब्श्चभ फॊगार
ख्मार ......
एक ही समाये ऩय फता देना कक, बरा अऩनों को बी
हभाया मॊू ही शभरना देख कय बी अनदेखी कोई मॊू जुदा कयता ह?ै
बी क्मा, कय देना गुनाह होता भेयी फातें तो ऩसदॊ थी ना
कोई शभरना होता ह?ै है। तमु ्हें फहुत
शभरकय त्रफछड जाना ऩऺी छोड यखे हैं अफ मही तमु ्हंे,
कपय मॊू ही त्रफछड कय तुभने भेये ऩीछे भसरा रगता है?
शभर जाना, रौट आए तो ऩछू रेना तभु कहा कयते थे
बी क्मा िीक हूॊ भ,ैं कहना कारी त्रफदॊ ी रगामा कयो
कोई शभरना होता ह?ै फडा कहिन होता है। जचती है फहुत तभु ऩे
साये जहाॊ की खफय फादरों से फयसते अफ वही साज श्रॊगृ ाय
यखते हो तभु भोती नछऩा कय यखे ह,ैं सफ फेवपा रगता है !
भेयी खफय सनु कय बी भनैं े तमु ्हाये शरए झिू की फनु नमाद ऩय, हभेशा
त्रफखय जाते हैं रयश्ते
अनसनु ी कय देना आऔ कबी तो
ब्जसे जोडने ऩय बी
मे बी क्मा रेते जाना, दयाय यह जामा ही
कोई खफय रेना होता ह?ै बरा तोपा बी क्मा, कोई कयता है ....
भना कयता है?
दयख़्तों से फात की है
भनैं े तुम्हायी तस्वीय है तुम्हायी
हदख जामे कहीॊ तो अबी बी भेये ़िोन भंे कई
ऩटृ ि सॊख्मा: 164 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
भीनाऺी सकु ु भायन, नोएिा, उत्तय प्रदेश
अनकही व्मथा अन्माम ऩय अन्माम ऐसा थी वो गयीफ औय ननम्न जानत
भौत को बी न शभरा सम्भान की
त्रफहटमा थी दरु ायी न साथ अऩने ऩरयजनों का क्मा इज़्ज़त बी फडी छोटी होती
अऩने भाॉ फाफा की फस जरा हदमा यातों यातों है
फहना थी प्मायी तडऩती यही भाॉ क्मा अऩयाध का भाऩदॊि बी
अऩने बाई फहना की त्रफरखते यहे षऩता छोटा फडा होता है
ऩय रगी नज़य ऐसी छटऩटाती यही फहन क्मा गयीफ को सज़ा
जकड शरमा अऩने गहु ाय रगाता यहा बाई अभीय को सयॊ ऺर्
ऩजॊ ों भंे दानवों ने ऩय सुनी न सदा ककसी ने मही क्मा एक त्रफहटमा की
कय के हयर् ककमा ऩहरे दटु कभष कपय यहस्मभमी ननमनत है
दटु कभष कय कय के भौत औय मूॉ भनभानी कय ऩछू ती चीख चीख कय हय वी
ताय ताय भासूशभमत त्रफना ककसी को फताए जरा फेटी
औय इज़्ज़त भेयी देना जो आमे हदन होती शशकाय इस
इतने ऩय बी न बया जात ऩात औय भजहफ की नघनौने दटु कभष का
भन तोड दी गदषन की याजनीनत का आईना औय ऩयू ा शसस्टभ रग जाता
हड्िी काट दी जुफान है ब्जसने खडे ककए ककतने कपय उसकी शरऩा ऩोती ऩय
छोड मूॉ अधभया बाग सवार ताकतवय दरयदॊ ो,सत्ता, मे षविफॊ ना नहीॊ तो औय क्मा है
गए ऊॊ ची जानत के वो प्रशासन, काननू ??
दानव साये ब्जसने यचा खेर मे साया एक कौन हदखाए आईना
छोड तडऩने औय भयने को भासूभ फेटी जात ऩात, भजहफ, याजनीनत,
इस छोटी जानत की फेटी को के साथ ब्जसका कसयू बय सत्ता, काननू
कई हदन हस्ऩतार भंे यहने इतना था के इन भुट्ठी बय िे के दायों को
ऩय चरी चार रे जाने को ताकक हो सकंे सयु क्षऺत फेहटमाॊ
हदल्री औय एक ही हदन भें वष:ष 01 अकॊ : 04 हभायी
हो गई खत्भ कहानी भेयी
अक्टू फय, 2020
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 165
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
ऩथृ ्वीयाज कु म्हाय, बीरवाडा, याजस्थान
हहन्दी की दशा / हदशा / ददु षशा
हहन्दी भमै ा का ब्जसने बी, अच्छे से गुर्गान ककमा।
अऻानी से ऩकडा उसको, ऻानी का सम्भान हदमा ।।
इसके घय भें जो बी आमा, सफका ही सत्काय ककमा
उदष-ू पायसी गरे शभरी ऩय, ना इसने अहॊकाय ककमा
देवनागयी शरषऩ इसकी, अॊग्रेजी बी इसभंे छु ऩ गई
इसको सफने कटट हदमा, ऩय इसने सफको प्माय हदमा
स्वय - व्मॊजन से शभरकय, सफका ही उऩकाय ककमा
अऻानी से ऩकडा उसको, ऻानी का सम्भान हदमा
छॊ द की भारा ऩोमी इसन,े हषषतष सफको हो गई
दय - दय इसने खाई चोटे, िगभग मह ना हो ऩाई
इसके ऩथ ऩय जो बी आए, नहीॊ वो ऩीछे हटते
क, ख, ग का सहाया रके य, कय सकते बयऩाई
त्रफन्दु बी छू टा इसभें तो, कभी का आबास ककमा
अऻानी से ऩकडा उसको, ऻानी का सम्भान हदमा
रुऩ है इसका षवस्ततृ ऩय, सॊक्षऺप्त ज्जमादा रगती है
अथों के अथों भें फसती, मह ना ढोंग कयती है
टू टे - पू टे शलदों को जोडा, सफको ही सम्भान हदमा
प्रेभ - बाव की बाषा ह,ै औय प्रभे ी सा फतावष ककमा
भधयु कॊ ि का बान है इसभ,ंे वार्ी का श्रॊगृ ाय ककमा
अऻानी से ऩकडा उसको, ऻानी का सम्भान हदमा
ऩटृ ि सॊख्मा: 166 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
कभरा शसहॊ 'भहहभा', खोयीफाडी, दाब्जशष रगॊ , ऩब्श्चभ फगॊ ार
स्िी
एक स्िी नहीॊ शरहाज कयता
चाहे ब्जस यॊग की हो वह उम्र का
रयश्तों का
ब्जस रूऩ भंे हो धभष का
ब्जस उम्र की हो न्माम का |
ब्जस ढॊग भंे हो
मह ऩरु ूषवादी सभाज राख ऩहयों भंे यहे
फस उसे उऩबोग की हीॊ राख फॊहदशों भें यहे
वस्तु सभझता है | शसय से ऩयै ढकी हुई हीॊ क्मों ना हो
अऩनी सायी ससॊ ्कायों को उस स्िी के साथ
ताक ऩय यखकय छे डछाड जसै ी घटना हो हीॊ जाती है
उस अधेड उम्र की भहहरा ऩय ऩरु ूषवादी सभाज
मा उस छोटी सी फाशरका के साथ इसके उऩयाॊत बी अऩनी
फरात्काय जैसी
जघन्म अऩयाध कय जाता है | झिू ी अहॊ का
त्माग नहीॊ कयता
भानवता को सायी गरनतमों का दोष
शभसष ाय कय जाता है | स्िी जानत ऩय भढ़ देता है |
ऩटृ ि सॊख्मा: 167 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
नननतन त्रिगरु ्ामत 'वयी', शाहजहाऩॊ यु , उत्तय प्रदेश
नेता जी !
आते नेता जफ है द्वाय अऩयाधी को होगी जेर
फातों भें कयते षवस्ताय
भझु े ब्जताओ अफकी फाय
फाकी सफ तो है फेकाय
नहीॊ चरेगा गॊदा खेर
फातें कयते भीिी चाय दयू कयेंगे गॊिु ा याज
कयते अऩना खूफ प्रचाय होगा ऐसा अऩना याज
कय रो भझु ऩय तभु षवश्वास ~~~~~
सफको दंेगे हभ आवास नहीॊ भचा है खारी शोय
~~~~~ होगी खुशहारी चहुॊओय
त्रफजरी ऩानी शभरे अऩाय
होगा अफकी खफू षवकास
हभसे यखो रगाकय आस जफ आमे अऩनी सयकाय
हभ नहह चाहे कोई नाभ
जनता सेवा अऩना काभ याशन बी दंेगे बयऩयू
आमेगा बायत भें नयू
भझु े नहीॊ कु सी से प्माय
जन सेवा को हभ तमै ाय
ऩटृ ि सॊख्मा: 168 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
नीरू गपु ्ता, शसरीगडु ी, ऩब्श्चभ फॊगार
वयदान है जीवन
जीवन एक उत्सव है तो कबी सावन की पु हाय सी
भानो तो फसतॊ भानो तो सकु ू न भन भंे
न भानो तो ऩतझड है! न भानो तो हरचर ही हरचर!
कबी सखु ों का सवये ा है कबी काॊटों का शय्मा जीवन
तो कबी दखु ों का अॊधये ा
भानो तो हय ऩर खशु भम तो कबी पू रों का कोभर त्रफस्तय
न भानो तो हय ओय गभ का शम! न भानो तो चायों ओय ननयाशा
कबी सभॊदय सी गहयी भानो तो इसी भंे नछऩी है आशा
तो कबी नदी सभान चचॊ र कबी मह अधयू ी ख्वाफ ह,ै तो
भानो तो हय चीज भें शभिास कबी ऩयू ी भकु ाभ बी है
न भानो तो है फस खटास! न भानो तो अशबशाऩ है जीवन
कबी जेि की तऩती दऩु हयी भानो तो वयदान है जीवन!
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 169 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020.
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गुप्ता
सजॊ म अग्रवारा, जरऩाईगडु ी, ऩब्श्चभ फॊगार
N आई एर मू
N भैं तुम्हंे आकाश नहीॊ कहूॊगा N भैं तमु ्हें हीया रूफी ऩन्ना नहीॊ कहूॊगा
आकाश भें फादर ह,ंै इसभें ऩरु ुषों का रारच ह,ै
N भैं तुम्हें सभदु ्र नहीॊ कहूॊगा N तभु को फताऊॊ , क्मा कहूॊगा?
सभदु ्र भंे रहयें ह,ैं N आई एर म,ू
N आई एर म,ू
N भैं तमु ्हंे प्रकृ नत नहीॊ कहूॊगा
प्रकृ नत प्रदषू षत होती ह,ै प्रभे अभय है
N भैं तमु ्हंे पू र नहीॊ कहूॊगा क्मा तुभ जानती हो?
पू र धगयते ह,ंै भये ा रृदम तभु को
जीवन बय चाहता यहेगा!
N भंै तुम्हंे सऩना नहीॊ कहूॊगा
सऩने त्रफखय जाते ह,ै वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 170
ससॊ ्थाऩक एवॊ सऩॊ ादक: सजॊ म अग्रवारा सह सऩॊ ादक: नीरू गपु ्ता
ऩटृ ि सखॊ ्मा: 171 वष:ष 01 अकॊ : 04 अक्टू फय, 2020