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उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम

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Published by gharichshika, 2021-11-12 04:44:20

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम

आदेश xxxvii सि. प्र. ि.ं के अधीन .................... रुपये की विूली के सलए वाद

न्यायालय .....................................
वाद स.ं .....................................

(ससववल प्रक्रिया सहं िता 1908 के आदेश xxxvii के अधीन)

अबक ..................................... बनाम परिवादी
कखग ..................................... प्रत्यर्थी

अतत सादि पवू कव प्रदसशतव किता िै –

1. यि क्रक वादी एक प्राइवटे सलसमटेड कम्पनी औि कम्पनी अधधतनयम, 1956 के अधीन ....................
कम्पतनयों के िजिस्ट्राि से िजिस्ट्रीकृ त की गयी तर्था ................................ मंे अपनी िजिस्ट्रीकृ त
कायावलय िखने वाली िै। वादपत्र श्री ............................................. द्वािा दाखखल क्रकया िाता िै जिसको
........................ को कम्पनी के तनदेशकों के बोडव के एक सकं ल्प द्वािा सम्यक रूप से प्राधधकृ त क्रकया िा
चकु ा िै। कम्पनी के सधचव द्वािा सम्यक रूप से प्रमाखित क्रकये गये कधर्थत सकं ल्प की प्रततसलवप इसके
सार्थ उपाबद्ध की िाती िै औि उपाबन्ध .......... के रूप मंे धचजन्ित की िाती िै।

2. यि क्रक कम्पनी ........................ के कािबाि मंे वतमव ान पि तनयोजित की िाती िै।
3. यि क्रक प्रततवादी एक भागीदािी फमव िै औि प्रततवादी स.ं 2 एवम ् 3 इसके भागीदाि ि।ैं (मामले के तथ्यों को

इसमें उपवखितव किे)
4. यि क्रक वादी ने कधर्थत िकम के सदं ाय िोने तक ..................... प्रततशत वावषकव दि पि ब्याि सहित

................... रुपये के बिाबि िोने वाले चकै को प्रदसशतव किने वाली िकम के भगु तान की मागाँ कि तािीख
...................... को इसके अधधवक्ता के िरिये एक वाधक नोहटस बािम्बाि अनिु ोध के पश्चात ् प्रततवादी
से चकै ों को व्याहदष्ट किने वाली िकम की वसलू ा किने में असफल िो िाने पि भिे ा। कधर्थत ववधधक नोहटस

की प्रततवादी पि सम्यक रूप से तामील किायी गयी िै। ववधधक नोहटस तर्था सदं ेय वापस प्राप्त की गयी
असभस्ट्वीकृ तत की प्रत्येक छाया प्रततसलवप इसके सार्थ प्राप्त की िाती िै औि सामहू िक तौि पि उपाबन्ध
........................................ के रूप मंे धचन्िांक्रकत की िाती िै।

5. प्रततवादी द्वािा हदये गये आश्वासनों के बाविूद, प्रतिवादीगण.....................रुपये बिाबि िोने वाले चकै ों
की िकम का सदं ाय किने मंे असफल िो गये िं।ै चैकों की छाया प्रतत इसके पाबद्ध की िाती िै औि उपाबन्ध
........................................... के रूप में धचन्िाकं ्रकत की िाती िै।

6. यि क्रक प्रततवादीगि ............................................ प्रततशत वावषकव दि पि ब्याि सहित
............................ रुपये की िकम का सयं कु ्त रूप से तर्था परृ ्थक्-परृ ्थक तौि पि सदं ाय किने उत्तिदायी िै
जिसमंे वे असफल िो गये िैं औि बािम्बाि अनिु ोधों एवम ् हदये गये आश्वासनों तर्था ववधधक नोहटस के
बाविूद भी सदं ाय किने की उपेक्षा की ि।ंै

7. यि क्रक वाद िेतक वादी के पक्ष मंे उत्पन्न िुआ तर्था हदनाकं .............................. को प्रततवादी के ववरुद्ध
उत्पन्न िुआ। यह पनु ः वादी के पक्ष में तर्था उस समय प्रततवादी के ववरुद्ध पदै ा िुआ िब चकै असदं त्त
वापस कि हदये गय।े वाद िेतकु उस समय उत्पन्न िुआ िब वादी द्वािा ...........................प्रततवादी पि
ववधधक नोहटस की तामीलकिायी गयी औि यि अभी डटा ििता िै।

8. यि क्रक वविय के ववशषे तनबन्धनों के अनसु ाि यि पक्षकािों के बीच किाि िुआ िै क्रक बबल से सम्बजन्धत
सभी वववादों का ववतनजश्चय ....................................................... उन्िीं न्यायालयों द्वािा एकमात्र
क्रकया िायेगा जिनके पास अधधकारिता िोगी। अतएव, इस आदििीय न्यायालय के पास वतमव ान वाद का
ववतनश्चय किने की अधधकारिता िै।

9. यि क्रक प्रस्ट्ततु वाद ससववल प्रक्रिया सहं िता के आदेश xxxvii के अधीन दाखखल क्रकया िा ििा िै औि कोई
भी अनतु ोष िो इस तनयम की परिधध के अन्दि निीं आता िै, का वादपत्र मंे दावा क्रकया िा चकु ा िै।

10. यि क्रक न्यायालय फीस एवम ् अधधकारिता के प्रयोिनार्थव वाद का मलू ्य .............................. रुपये पि
तनयत क्रकया िाता िै जिस पि .................................................रुपये की एक न्यायालय फीस का सदं ाय
क्रकया िा ििा िै।

प्रार्नथ ा

अतएव, यि प्रार्थनव ा की िाती िै क्रक .......

(क) ........................ रुपये की िकम के सलए एक डडिी वाद के सजं स्ट्र्थत क्रकया िाने की तािीख से िकम की
वसलू ी क्रकया िाने तक ....................% वावषकव दि पि ब्याि तर्था आगामी ब्याि सहित वादी के पक्ष मंे
तर्था प्रततवादी के ववरुद्ध पारित कि हदया िाय।

(ख) वाद का खचव वादी के पक्ष मंे तर्था प्रततवादी के ववरुद्ध अधधतनिीत कि हदया िाय; औि
(ग) ऐसा अन्य आदेश या आदेशों को जिसे / जिन्िंे यि आदििीय न्यायालय मामले की परिजस्ट्र्थततयों में

उपयकु ्त तर्था उधचत समझ,े पारित कि हदया िाय।
वादी

ित्यापन

मैं ऊपि नासमत वादी, एतद् द्वािा सत्यावपत किता िूाँ, क्रक वादपत्र के पिै ा ............. ...... ......
........... .... .. लगायत .................................. की अन्तवसव ्ट्तु मिे ी व्यजक्तगत िानकािी में सत्य
िै औि ................................... पिै ा के वे सभी तर्था उसका.......... उस ववधधक सलाि पि आधारित
िै। जिसे मैं सत्य िोने का ववश्वास किता िूँा।

मैं इस हदनांक ....... को सत्यावपत क्रकया गया।

वादी

आदेश के ननष्पादन के सलए उपभोक्ता िरं क्षण अधधननयम की धारा 27 के अधीन आवदे न पत्र -जिला
उपभोक्ता वववाद ननराकरण फोरम .................

ननष्पादन आवेदन

पत्र स.ं .......................
सन ................. के मामले में

अबक बनाम ....... आवदे क/परिवादी
कखग ...........वविोधी पक्षकािगि

आदििीय जिला उपभोक्ता वववाद तनिाकिि द्वािा पारित क्रकये गये आदेश हदनांक्रकत .....................के
तनष्पादन के सलए उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम, 1986 की धािा 27 के अधीन आवदे नपत्र -

अततसादि पवू कव प्रदसशतव किता िै -

1. यि क्रक आवेदक-परिवादी बकु की गयी काि ...................... के ब्याि, खचव एवम ् प्रततकि के सार्थ-सार्थ
मलू बकु किने वाली िकम का प्रततदाय िेतु परिवाद दाखखल क्रकया देख;े वविोधी पक्षकािों के ववरुद्ध प्ररूप
सं. .............. हदनांक्रकत ...................... को।

1. यि क्रक आदििीय जिला उपभोक्ता वववाद तनिाकिि फोिम: देख;े इसका आदेश हदनाक्रकत ...................
परिवाद को अनजु ्ञात क्रकया औि वविोधी पक्षकािों को (आदेश का साक्षप्तसाि को उपवखितव किने का) तनदेश

हदया। फोिम के कधर्थत आदेश को इसके सार्थ उपाबद्ध क्रकया िाता िै औि उपाबन्ध-1 के रूप मंे धचन्िांक्रकत
क्रकया िाता िै।
2. यि क्रक आवेदक परिवादी ने अन्डि सहटवक्रफके ट आफ पोजस्ट्टंग के अनपु ालन िेतु तािीख................... को
अपने-अपने अधधवक्ता के िरिये या पक्षकाि को फोिम के कधर्थत आदेश की एक प्रततसलवप भिे ा लेक्रकन
वविोधी पक्षकार असफल िो गया िै औि इस तनष्पादन आवदे न पत्र को दाखखल क्रकये िाने पिम के कधर्थत
आदेश का अनपु ालन किने की उपके ्षा की िै। प्रत्येक पत्र एवम कट आफ पोजस्ट्टंग की एक छाया प्रततसलवप
इसके सार्थ उपाबद्ध की िाती िै तर्था उपबन्ध-1 के रूप मंे धचन्िाकं ्रकत क्रकया िाता िै।

प्रार्नथ ा
अिएव, यह अतत सादि पवू कव प्रार्थनव ा की िाती िै क्रक यि आदििीय न्यायालय न्यायहित में वविोधी
पक्षकाि के ववरुद्ध उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम, 1986 के धािा 25 के अधीन फोिम मंे तनहित शजक्तयों का
आलम्ब लेकि के कधर्थत आदेश के तनष्पादन का आदेश क्रकया िाय।
ऐसा आदेश या आदेशों को पारित किे जिसे / जिन्िें यि माननीय न्यायालय मामले की परिजस्ट्र्थततयों में
उपयकु ्त एवम ्उधचत समझ।े

आवदे क परिवादी
िरिये अधधवक्ता

स्ट्र्थान -
तािीख -

उपभोक्ता िंरक्षण अधधननयम की धारा 15 के अधीन राज्य आयोग के िमक्ष अपील राज्य उपभोक्ता वववाद
ननराकरण आयोग ...................................

अपील स0ं .................................... सन ्..............................................
(जिला फोिम .......................................

(स्ट्र्थान का उल्लखे किंे) के आदेश के ववरुद्ध उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम की धािा 15 के अधीन अपील)

अबक (विनव तर्था तनवास स्ट्र्थान को िोड)ंे ...................................अपीलार्थी/अपीलार्थीगि
बनाम

कखग (विनव तर्था तनवास स्ट्र्थान को िोड)ें ..................................प्रत्यर्थी/प्रत्यर्थीगि

सवे ा में,
िाज्य आयोग के अध्यक्ष तर्था उसके सार्थी सदस्ट्यगि,

श्रीमान िी,
अपीलार्थी/अपीलार्थीगि अततसादि पवू कव प्रदसशतव किता िै/किते ि।ैं

1. यि क्रक यि उपभोक्ता परिवाद स.ं ........................................ सन......................................... मंे
जिला फोिम ................................... (स्ट्र्थान का नाम) के आदेश के ववरुद्ध धािा 15 के अधीन अपील में
िै।

2. यि क्रक अपील उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम की धािा 15 के उपबधं ों के अनसु ाि आदेश की तािीख से 30
हदनों की एक कालावधध के अन्दि दाखखल की िा ििी िै।

या

यि क्रक यि अपील 30 हदनों की कालावधध की समाजप्त के पश्चात ् दाखखल की िा ििी क्योकक यि ववलम्ब
के दोषमािनव के सलए ववहित कालावधध के अन्दि निीं दाखखल की िा सकी। कधर्थत आवेदनपत्र एक शपर्थपत्र
द्वािा वववाहदत बनाया िा ििा िै।
3. उस आदेश पि आक्षेप के आधाि जिसके ववरुद्ध अपील की गयी क्रकसी तकव या विृ ांि के बबना परृ ्थक शीषों
के अधीन उपवखितव क्रकया िायः ऐसे आदेशों को िमशः सखं यांक्रकत क्रकया िाना िै।
4. दावाकृ त िोने वाले अनिु ोष/अनतु ोषों के ववविि सहित प्रार्थनव ा खण्ड का कर्थन क्रकया िाना िै।

तािीख अपीलार्थी/अपीलार्थीगि

उपबन्ध
1. उस आदेश की प्रमाखित प्रततसलवप जिसके ववरुद्ध अपील की गयी।

उपभोक्ता िरं क्षण अधधननयम की धारा 19 के अधीन अपील - राज्य उपभोक्ता वववाद ननराकरण आयोग
............

अपील स.ं ......................... सन ्......................
जिला फोिम के आदेश के ववरुद्ध उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम की धािा 19 के अधीन अपील ........................

(स्ट्र्थान का उल्लखे किें)

अबक (विनव एवम ्तनवास स्ट्र्थान को िोड)ें ..................... अपीलार्थी/अपीलार्थीगि
बनाम प्रत्यर्थी/प्रत्यर्थीगि

कखग (विनव एवम ्तनवास स्ट्र्थान को िोड)ंे .....................

सेवा मंे;
िाष्रीय आयोग के आदििीय अध्यक्ष औि उसके सार्थी सदस्ट्यगि;

श्रीमान िी,
अपीलार्थी/अपीलार्थीगि अतत सादि पवू कव तनवेदन किता िै

1. यि क्रक यि अपील स.ं ............................................... सन ् .......................मंे िाज्य आयोग ...
............................... (स्ट्र्थान का नाम) हदनांक्रकत ............................................. के आदेश के
ववरुद्ध धािा 19 के अधीन अपील में िै।

2. यि क्रक अपील उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम की धािा 19 के उपबधं ों के अनसु ाि आदेश की तािीख से
30 हदनों के अन्दि दाखखल की िा ििी िै।
या
यि क्रक यि अपील 30 हदनों की कालावधध की समाजप्त के पश्चात ् दाखखल की िा ििी िै कािि क्रक यि
ववलम्ब के दोबमािनव के सलए इस अपील के सार्थ-सार्थ आवदे न पत्र मंे ववहित कालावधध के अन्दि निीं
दाखखल क्रकया िा सकता र्था। कधर्थत आवदे नपत्र एक शपर्थपत्र के सार्थ वववाहदत बनाया िाता िै।

3. जिसके ववरुद्ध अपील की गयी उस पि आक्षपे के आधाि सकं्षक्षप्त तौि पि उपवखितव । िा सके गा औि
क्रकसी किाि या कर्थन के बबना परृ ्थक शीषों के अधीन ऐसे आदेश की िमशः सखं याकं्रकत क्रकया िाना
िोता िै।

4. दावाकृ त अनतु ोष/अनतु ोषों के ब्यौिे सहित प्रार्थनव ा का कर्थन क्रकया िाना िोता िै।

स्ट्र्थान अपीलार्थी/अपीलार्थीगि
तािीख व्यजक्तगत तौि पि या काउजन्सल के िरिये।

उपभोक्ता िंरक्षण अधधननयम की धारा 19 के अधीन राष्रीय आयोग मंे अपील राष्रीय उपभोक्ता वववाद
ननराकरण आयोग ..........................

अपील सखं या .................................. सन ् .................................

जिला फोिम ्................................ (स्ट्र्थान का उल्लखे किें) के आदेश के ववरुद्ध उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम की
धािा 19 के अधीन अपील

अबक (विनव तर्था तनवास स्ट्र्थान को िोड)ें .............................. अपीलार्थी / प्रत्यर्थीगि
कखग (विनव तनवास स्ट्र्थान को िोड)े बनाम
.............................. प्रत्यर्थी/प्रत्यर्थीगि

सवे ा मंे,
िाष्रीय आयोग के आदििीय अध्यक्ष एवं उसके सार्थी सदस्ट्यगि।

श्रीमानिी,
अपीलार्थी/अपीलार्थीगि अतत सादि पवू कव प्रदसशतव किता िै/किते ि:ंै ..........................

1. यि अपील सखं या .......................... सन ् .........................मंे िाज्य आयोग ..............................
(स्ट्र्थान का नाम) हदनाकं्रकत ....................................के आदेश के ववरुद धािा 19 के अधीन अपील मंे िै।

2. यि क्रक अपील उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम की धािा 19 उपबन्धों के अनसु ाि आदेश की तािीख से 30
हदनों की एक कालावधध के अन्दि दायि की िाती िै।

या
यि क्रक यि अपील 30 हदनों की कालावधध की समाजप्त के पश्चात ् दायि की िा ििा िै, क्योंक्रक यि ववलबं
के दोषमािनव के सलए इस अपील के सार्थ-सार्थ दाखखल क्रकये गये आवदन पत्र मंे वखितव काििोवश ववहित
कालावधध के अन्दि निीं दाखखल की िा सकी र्थी। कधर्थत आवदे न पत्र एक शपर्थ-पत्र द्वािा वववादग्रस्ट्त
बना हदया िा ििा िै।
3. वि आदेश जिसके ववरुद्ध अपील दाखखल की गयी के आक्षेप्य के आधािों का सकं्षक्षप्त तौि पि क्रकसी तकव
या विनव के बगिै परृ ्थक शीषों के अधीन उपविनव क्रकया िा सके गा; ऐसे आधािों को िमशः सखं याकं्रकत
क्रकया िाना िै।
4. दावाकृ त िोने वाले अनतु ोष/अनतु ोषों को ववविि सहित प्रार्थनव ा खण्ड का कर्थन क्रकया िाना िै।

अपीलार्थी/अपीलार्थीगि
व्यजक्तगत तौि पि या िरिये अधधवक्ता

तािीख ............................

उपबन्ध:
1. उस आदेश की प्रमाखित प्रततसलप जिसके ववरुद्ध अपील की गयी।

जिला उपभोक्ता वववाद प्रनततोष फोरम जिला .......

उपभोक्ता परिवाद स०ं सन ्.........
........ पतु ्र श्री ............. तनवासी मकान स०ं ............. मौिल्ला/कालौनी नगि/गावाँ

............. र्थाना ............ जिला ............ परिवादी
बनाम

1. मसै सव ............ द्वािा स्ट्वामी/प्रबन्धक श्री ............ डीलि/व्यापािी/वविे ता
2. मसै सव ............ द्वािा प्रबन्ध तनदेशक ............ तनमावता ............ ववपक्षीगि

माननीय अध्यक्ष एवं सार्थी सदस्ट्यगि,

परिवादी तनम्न तनवदे न किता िै :

(1) यि क्रक परिवादी ने ववपक्षी स०ं 2 के डीलि/व्यापािी ववपक्षी स०ं 1 से एक स्ट्कू टि/काि/अन्य वािन हदनाकँा
............ को ............. रु० में िय की र्थी जिसका ववपक्षी स०ं 1 ने पिं ीकिि स०ं ............. हदनाँाक
............. को किाकि हदया र्था तर्था ............ वषव की गािन्टी के सार्थ गािन्टी/वािन्टी काडव िस्ट्ताक्षि किके
हदया र्था।

(2) यि क्रक उक्त वािन लगभग ............ हदन िी चलने के पश्चात ् अत्यधधक असिनीय ध्वतन किने लगा तो
परिवादी ने ववपक्षी स० 1 से ध्वतन दोष के सम्बन्ध में सम्पकव क्रकया तो बताया क्रक प्रर्थम सवे ा पि ध्वतन
दोष दिू कि हदया िायेगा।

(3) यि क्रक हदनाँाक ............ को ववपक्षी स०ं 1 के द्वािा बताये ववपक्षी स०ं 2 के सवे ा के न्र जस्ट्र्थत ............ पि
वािन की प्रर्थम सेवा किाई-सवे ा के न्र के असभयन्ता (याजन्त्रक) ने बताया क्रक ध्वतन दोष दिू कि हदया गया
िै औि इस सम्बन्ध मंे सवे ा पत्रक पि अकं न भी क्रकया।

(4) यि क्रक प्रर्थम सवे ा के अगले हदन से िी वािन ने पवू व की भाताँ त अत्यधधक असिनीय ध्वतन किना आिम्भ
कि हदया । परिवादी ने हदनाकं ............ को उक्त सेवा के न्र पि िाकि असभयन्ता (याजन्त्रक) से ध्वतन दोष
की पन: सशकायत की तो असभयन्ता याजन्त्रक ने ध्वतन दोष दिू किने का प्रयास क्रकया क्रकन्तु असफल ििा
औि इस सम्बन्ध मंे सवे ा पत्रक पि अकं न किके किा क्रक तनमािव दोष िै व ववपक्षी स० 1 के असभयन्ता
हदनाकाँ ............ को उनके सवे ा के न्र पि आ ििे ि,ैं उस हदन आकि वािन उनको हदखाना।

(5) यि क्रक बताई गई हदनाकं ............ को परिवादी अपना वािन उक्त सवे ा के न्र पि लके ि का ववपक्षी स0ं 2
के असभयन्ता ने वािन की िााँच किाई क्रकन्तु ध्वतन दोष दिू किने मंे सब असफल ९औि इस सम्बन्ध मंे
सेवा पत्रक पि अकं न क्रकया। ववपक्षी स0ं 2 के असभयन्ता ने 15 हदवस में
न बदल देने का ववश्वास हदलाया। वािन िय किने की िसीद पिं ीकिि प्रमाि पत्र व सवे ा पत्रक की प्रततयाँा
सलं ग्न की िा ििी िै।ं

(6) यि क्रक ववश्वास हदलाने के पश्चात ् लगभग तीन माि िो चकु े िैं क्रकन्तु ववपक्षीगि ने िन निीं बदला-वािन
में तनमावि दोष ििा िै-ध्वतन दोष को ववपक्षीगि दिू किने मंे असफल ि िै--सेवा में कमी िै-परिवादी को
तनिन्ति आधर्थकव , मानससक व शािीरिक कष्ट पिुँाच ििा -परिवादी ववपक्षीगि से वािन का मल्य मय ब्याि
अर्थवा नया दोष िहित वािन मय नई वािन्टी, काि व वाद का व्यय पाने का अधधकािी िै जिसका कािि
फोल्प के क्षेत्रीय व घनीय क्षते ्राधधकाि.मंे उत्पन्न िआ िै।

अत: प्रार्थनव ा िै क्रक ववपक्षीगि को तनदेश हदया िावे क्रक वे परिवादी को नया दोषिहित वािन मय नई वािन्टी बदल कि
दंे अर्थवा वािन का मलू ्य ............ मय 18% वावषकव ब्याि िय की हदनाँका से भगतान की हदनाँाक तक का, ............ रु०
प्रततकाि तर्था ............ रु० परिवाद का व्यय भगु तान किंे।

ददनााकँ ......

पररवादी . ..........
(नाम)
हस्ताक्षर..........
शनाख्त अधधवक्ता श्री ....

मैं परिवादी सत्यावपत किता िूँा क्रक परिवाद पत्र के प्रस्ट्ति ......... से ............ तक के तथ्य मिे े व्यजक्तगत ज्ञान में
सत्य िै। कोई तथ्य न तछपाया िै औि न कोई असत्य िै।

ददनााँक....
स्र्ान.....

घोषक/पररवादी
ह०......
शनाख्न अधधवक्ता श्री ......

उपभोक्ता िरं क्षण अधधननयम, 1986

(Consumer Protection Act, 1986)

जिला उपभोक्ता वववाद प्रनततोष फोरम जिला

उपभोक्ता परिवाद स०ं ............ सन ्............
.............पतु ्र श्री ............ तनवासी मकान स०ं मोिल्ला/कालौनी नगि/गााँव

............ र्थाना ............ जिला....... परिवादी

बनाम
1. भाित सचं ाि तनगम सल० द्वािा मखु य मिाप्रबन्धक/प्रबन्धक ..... स्ट्र्थान .......
2. मखु य मिाप्रबन्धक/मण्डलीय प्रबन्धक भाितीय सचं ाि तनगम सल० ............ स्ट्र्थान......
3. उपखण्ड अधधकािी दिू भाष भाित सचं ाि तनगम सल० ............. स्ट्र्थान ............
4. लेखाधधकािी दिू भाष िािस्ट्व भाित सचं ाि तनगम सल० ............ स्ट्र्थान ....
ववपक्षीगि

माननीय अध्यक्ष एवं सदस्ट्यगि,
परिवादी तनम्न तनवदे न किता िै :

(1) यि क्रक ववपक्षी स0ं 1 के दिू भाष स०ं ............ का परिवादी हदनाकं ............. से उपभोक्ता िै औि यि
दिू भाष परिवादी के आवास स० ............ /दकु ान स०ं ............ जस्ट्र्थत ... पि स्ट्र्थावपत िै।

(2) यि क्रक परिवादी का उक्त दिू भाष हदनाकं ............ से कायव निीं कि ििा िै-परिवादी ने ववपक्षीगि स०ं 2,
3 से कई बाि मौखखक एवं सलखखत में दिू भाष मतृ िोने की सशकायत की र्थी आि कम्प्यटू ि पि सशकायत
अकं्रकत किाई िै। सलखखत सशकायतों की प्रततयााँ अनलु ग्नक स०ं 1.2……..तर्था त्रहु ट पत्रक (Fault card]
अनलु ग्नक स०ं ............ िै।

(3) यि क्रक ववपक्षीगि ने अभी तक परिवादी का दिू भाष सिी निीं क्रकया िै जिसे खिाब िए
..... हदवस िो चकु े ि-ैं -परिवादी को दिू भाष खिाब ििने से बिुत असवु वधा िै व क्षतत पिुँाच ििी िै औि मानससक
कष्ट िो ििा िै बािि से आवश्यक दिू भाष न आ पाने के कािि पी० सी०ओ० से किने पडे िंै जिनके भगु तान
के बबल अनलु ग्नक स०ं ............. िैं िो कु ल .. रु०….. के िै।ं

(4) यि क्रक दिू भाष खिाब ििने के काल में ववपक्षीगि के यिाँा से बबल हदनाकं सिआ जिसमें दिभाष खिाब ििने
की अवधध का क्रकिाया अकं न ......रु० भी ससमतत ि। परिवादी ने सवविोध दिभाष चाल िोने की आशा में
हदनांक ............ को भगु तान भी कि हदया िै जिसकी िसीट अनलग्नक स०ं ............ िै-आश्चयिव नक िै
क्रक ववपक्षीगि अभी तक परिवादी का दिभाष ठीक निीं कि पाये ि।ैं ववपक्षीगि के उक्त कृ त्यों से सेवा में
कमी िोना प्रमाखित है ।

(5) यि क्रक ववपक्षीगि अपनी सवे ा में कमी के कािि परिवादी को तनम्न धनिासश भगतान किने के उत्तिदायी
िंै।

(क) पी० सी० ओ० से क्रकये दिू भाष का व्यय अकं न ............ रु०
(ख) दिू भाष का ............ हदन का क्रकिाया अकं न ............ रु०
(ग) सवे ा मंे कमी के कािि िुई असवु वधा, कष्ट, आने िाने में अनावश्यक व्यय िेतु प्रततकाि अकं न ...........रु० (घ)
परिवाद का व्यय अकं न ............ रु०

....... कु ल ............ रु०

(6)यि क्रक परिवाद को कािि हदनाकँा ............ को दिू भाष खिाब िोने, मौखखक व सलखखत सशकायतंे अकं्रकत
किाने के हदनाकाँ को औि दिू भाष सिी न किने के कािि फोिम के क्षते ्राधधकाि में तनिन्ति िािी िै।
(7). यि क्रक माननीय फोिम को परिवाद के श्रवि का क्षेत्रीय व धनोय क्षेत्राधधकाि प्राप्त िै। अत: प्रार्थनव ा िै क्रक
परिवाद स्ट्वीकाि किके ववपक्षीगि से तनम्न अनतु ोष हदलाया िावे।

(क) यि क्रक परिवादी का दिू भाष अववलम्ब ठीक किने का तर्था आदेश के हदनांक से ठीक किने के
हदनाकाँ तक ............ रु० प्रततहदन का प्रततकि हदलाने का आदेश पारित किंे।

(ख) यि क्रक परिवादी को ववपक्षीगि से प्रस्ट्ति 5 मंे वखितव धन अकं न ............. रु० हदलाया िावे औि उस पि ब्याि
हदलाया िाव।े
(ग) यि क्रक माननीय फोिम की िाय में िो अन्य उधचत अनतु ोष िो हदलाया िावे ।

ददनाकँा ........

............. पररवादी
(नाम)

हस्ताक्षर ........
शनाख्त अधधवक्ता ...

में ............ परिवादी सत्यावपत किता िूाँ क्रक परिवाद पत्र के प्रस्ट्ति स०ं 1 लगायि ..... मिे े व्यजक्तगत ज्ञान मंे सत्य िै ।
कोई तथ्य तछपाया निीं िै औि न असत्य िै ।

ददनााकँ ............ स्र्ान

हस्ताक्षर घोषक पररवादी ......
शनाख्त अधधवक्ता श्री. ...........

2. पररवाद का आदशथ प्ररुप

उपाबन्ध-III
परिवाद का आदशव प्ररुप

परिवादी के नाम

उपभोक्ता वववाद तनिाकिि आयोग ..................................................
उपभोक्ता परिवाद स.ं ......................... सन ्...................................

अबक (विनव एवम ्तनवास स्ट्र्थान को िोड)ंे परिवादी / परिवादीगि
बनाम वविोधी पक्षकाि/ वविोधी पक्षकािगि सवे ा मंे
कखग (विनव एवम ्तनवास स्ट्र्थान को िोड)ें

िाज्य आयोग के आदििीय अध्यक्ष औि सार्थीगि।

श्रीमान िी

ऊपि नासमत क्रकये गये परिवादी / परिवादीगि तनम्नसलखखत रूप में अततसदि पवू कव तनवदे न किता िै/किते
ि:ैं

1. परिवाद, ववसशजष्टयों, स्ट्र्थान, तािीख से सम्बजन्धत सभी तथ्यों का विनव क्रकया िाना िोता िै।
2.
3.

4. स्ट्र्थान पि वाद िेतकु से सम्बजन्धत ब्यौिा ििााँ परिवाद दाखखल क्रकया िा ििा िै।
5. अधधकारिता एवम ् माल/सवे ाओं का मलू ्य तर्था प्रततकि मलू ्य से सम्बजन्धत ब्यौिा हदया िाता िै।
6. दावाकृ त िोने वाले अनतु ोष/अनतु ोषों सहित प्रार्थनव ा खण्ड का ववविि हदया िाना िै।

परिवादी/परिवादीगि
व्यजक्तगत तौि पि या िरिये अधधवक्ता

स्ट्र्थान ...............................
तािीख ...............................

ित्यापन

म/ैं िम ...................................... (परिवादी / परिवादीगि) पतु ्र / पतु ्रगि ....................तनवासी .. .....................
एतद्द्वािा सत्यतनष्ठा से घोषिा एवम ्कर्थन किता िूँा / किते िैं क्रक ऊपि रिवाद की अन्तवसव ्ट्तएु ं / ववसशजष्टया सवोत्तम
िानकािी तर्था ववश्वास में सत्य िै। उसमें कोई भी बात समथ्या निीं िै औि न िी उसमें कोई भी बात गलत
वखितव /तछपायी गयी िै।

..................... मंे इस तािीख ....................को सत्यावपत क्रकया।

शपर्थकताव

उपबन्ध
1.

पररवाद का प्ररुप

उपभोक्ता वववाद तनवािि जिला फोिम ...................... उपभोक्ता परिवाद स.ं
............................................................... अबक (विनव तर्था तनकास स्ट्र्थान को िोड)ें कखग (विनव तर्था तनवास
स्ट्र्थान को िोड)े .......................... परिवादी / परिवादीगि वविोधी पक्षकाि तर्था वविोधी पक्षकािगि.

सवे ा मंे
जिला फोिम के आदििीय अध्यक्ष एवम ्अन्य सार्थी सदस्ट्यगि,

श्रीमान िी,
ऊपि नासमत क्रकया गया परिवादी/परिवादीगि तनम्नसलखखत रूप मंे अततसादि पवू कव तनवदे न किता

िै

1. परिवाद से सम्बजन्धत सभी तथ्य, ववसशजष्टया,ाँ स्ट्र्थान, तािीख इत्याहद का कर्थन क्रकया िाना िै।
2.
3.
4. स्ट्र्थान पि वाद िेतकु से सम्बजन्धत ब्यौिा ििाँा परिवाद दाखखल क्रकया िा ििा िै।
5. अधधकारिता एवम ् माल / सवे ाओं का मलू ्य तर्था प्रततकि दावे से सम्बजन्धत ब्यौिा, हदया िाना िै।

(मात्र/सेवायंे तर्था दावाकृ त प्रततकि मलू ्य को .................................... लाख रुपये से अधधक निीं िोना
चाहिए)

6. दावाकृ त िोने वाले अनतु ोष /अनतु ोषों के ववविि सहित प्रार्थनव ा खण्ड का कर्थन क्रकया िाना िोता िै।

स्ट्र्थान ................................... परिवादी/परिवादीगि

तािीख ................................... व्यजक्तगत तौि पि या अधधवक्ता के िरिय।े

ित्यापन

म/ंै िम ....................... (परिवादी / परिवादीगि) पतु ्र / पतु ्रगि ......................... तनवासी एतद्वािा
सत्यतनष्ठा से यि घोषिा एवम ्कर्थन किता िूाँ क्रक उपवखितव परिवाद को अन्तवसव ्ट्तएु ं / ववसशष्ट या सवोत्तम ज्ञान
एवम ्ववश्वास मंे सत्य िै। उसमें कधर्थत कोई भी बात समथ्या निीं िै औि उसमंे गलत वखितव /तछपायी निीं गयी िै।

....................... में इस तािीख ......................... को सत्यावपत क्रकया गया।

शपर्थकताव

उपाबन्ध

1. ......................
2. ......................

4. पररवाद के प्ररुप

िाष्रीय उपभोक्ता वववाद तनिाकिि आयोग नयी हदल्ली

उपभोक्ता परिवाद स.ं . ...................... सन ्..............................................

अबक (विनव एवम तनवास स्ट्र्थान को िोड)े ........................ परिवादी / परिवादीगि

बनाम

कखग (विनव एवम ्तनवास स्ट्र्थान को िोड)ंे ......................... वविोधी पक्षकाि/वविोधी पक्षकािगि

सवे ा में,
िाष्रीय आयोग के आदििीय अध्यक्ष तर्था उसके सार्थी सदस्ट्यगि;

श्रीमानिी,
ऊपि नासमत क्रकया गया परिवादी / परिवादीगि तनम्नसलखखत रूप मंे अतत सादि पवू वव तनवदे न किता िै/किते िंै



1. परिवाद ववसशजष्टया,ाँ स्ट्र्थान, तािीख इत्याहद से सम्बजन्धत सभी तथ्यों का ववविि हदया िाना िै।

2.
3.
4. उस स्ट्र्थान पि वाद िेतकु से सम्बजन्धत ब्यौिा ििाँा परिवाद दाखखल क्रकया िा ििा िै।
5. अधधकारिता एवम ् माल / सवे ाओं का मलू ्य तर्था प्रततकि दावा से सम्बजन्धत ब्यौिे हदये िाने िै।

(माल/सेवाओं तर्था दावाकृ त प्रततकि का मलू ्य 20 लाख रुपये से अधधक िोता िै।
6. दावाकृ त िोने वाले अनतु ोष/अनतु ोषों के ब्यौिे सहित प्रार्थनव ा खण्ड का कर्थन क्रकया िाना िै।

स्ट्र्थान :
तािीख :
परिवादी/परिवादीगि
व्यजक्तगत तौि पि या िरिये अधधवक्ता

वखितव परिवाद की अन्तवसव ्ट्तु वखितव

ित्यापन

म/ैं िम ...................................... (परिवादी / परिवादीगि) पतु ्र / पतु ्रगि ....................तनवासी .. .....................
एतद्द्वािा सत्यतनष्ठा से घोषिा एवम ्कर्थन किता िूँा / किते िैं क्रक ऊपि रिवाद की अन्तवसव ्ट्तएु ं / ववसशजष्टया सवोत्तम

िानकािी तर्था ववश्वास मंे सत्य िै। उसमें कोई भी बात समथ्या निीं िै औि न िी उसमें कोई भी बात गलत
वखितव /तछपायी गयी िै।

..................... मंे इस तािीख ....................को सत्यावपत क्रकया।

शपर्थकताव

उपबन्ध
2.
3.

पररवादी द्वारा दाखिल ककये गये पररवाद का प्रत्यर्ी का उत्तर - उपभोक्ता वववाद ननराकरण फोरम
.................

वाद स.ं ................. सन ्.................

अबक......................... बनाम परिवादी
कखग ................. प्रत्यर्थी/वविोधी पक्षकाि

अनत िादर पवू कथ प्रदसशतथ करता हैप्रत्यर्ी कम्पनी ननम्नसलखित रूप में अनतिादर पवू कथ ननवेदन करता है –

1. परिवाद का पिै ा 1 को उस ववस्ट्ताि तक स्ट्वीकृ त क्रकया िाता िै िो प्रत्यर्थी कम्पनी के ववज्ञापन से पिै ा क्रकया
िाता िै|

2. परिवाद का पिै ा 2 गलत िै औि उसका प्रत्याखयान क्रकया िाता िै। प्रत्यर्थी कम्पनी सादि तनवदे न किती िै
क्रक इसने यिाँा तक इसके ग्रािको/उपयोगकताओव ं में से क्रकसी परिवाद को प्राप्त निीं क्रकया िै। प्रत्यर्थी कम्पनी
आगे तनवेदन किती िै क्रक प्रश्नगत उत्पाद का मच्छिों, काकिोचो ववस्ट्ति खटमलों, क्रकलतनयों तर्था घिेलु
मजक्खयों को भगाने का अर्थव लगाया िाता िै। शब्द "प्रततकवषतव किना भगा देना, बलात ् भगा देना, उसके
बढ़ने को िोकना घिृ ा या अरूधच पदै ा किने से अर्थव लगाया िाता िै। (लक्सीकान बेब्स्ट्टि डडक्सनिी वालम
|| 1986 ससं ्ट्किि) यि आगे तनवदे न क्रकया िाता िै क्रक प्रततकषिव किने का एक ढंग िै, अर्थातव ् िब
प्रततकषिव एक कमिे मंे क्रकया िाता िै तब इसको कम से कम आधा घण्टे के सलए बन्द िखा िाता िै औि
मात्र उसके पश्चात ् कधर्थत कमिे का प्रयोग क्रकया िाना िै। यि तनवेदन क्रकया िाता िै क्रक उत्पाद में कोई

ववषलै ा पदार्थव निीं अन्तववषव ्ट िोता िै िो के िोने; चक्कि आने एवम िी समधचलाने को िन्म दे सके गा। यि
भी तनवदे न क्रकया िाता िै क्रक परिवादी यर्था इसमंे इसके पवू व उपदसशतव क्रकये प्रततकषिव कताव पि उपदसशतव
क्रकय गये अनदु ेशों के अनसु ाि उत्पाद को प्रततकवषतव निीं क्रकया िै। चूंक्रक उत्पाद ववष के क्रकसी भी तत्व का
अन्तववषव ्ट निीं किता िै इससलए परिवादी का यि असभकर्थन क्रक स्ट्वयमवे परिवादी तर्था उसक कु टु म्ब
प्रततकषिव कताव का प्रयोग किने से कै िोने, चक्कि आने, ससिददव एवम समधचली आने से ग्रस्ट्त हो िाता िै
औि अस्ट्पताल में भती क्रकया िाना पिू तव या गलत तर्था तनिाधाि िै औि कधर्थत आमकर्थनों को प्रत्यर्थी
कम्पनी के उत्पाद की मान िातन किने के सलए न्याय सगं त बनाया गया िै।
3. परिवाद के पिै ा 3 को उस ववस्ट्ताि तक स्ट्वीकृ त क्रकया िाता िै जिस तक असभलखे ों में चढ़ाया िाता िै। यि
तनवदे न क्रकया िाता िै क्रक परिवाद की प्राजप्त पि परिवादी से प्रततकषिव करने वाले को भिे ने तर्था
प्रततकषिव कताव को वापस लने े का अनिु ोध क्रकया गया। परिवादी का यि अभिकथन की क्रक कम्पनी ने
परिवादी के पत्र का उत्तिदायी निीं बना, दोषपिू व िै औि इसका प्रत्याखयान ककया जािा िै। यि तनवेदन
क्रकया िाता िै क्रक प्रत्यर्थी कम्पनी ने क्रकसी अनधु चत व्यापाि मंे सजम्मसलत िुआ िै औि प्रत्यर्थी कम्पनी
द्वािा वविय क्रकये गये उत्पाद प्रभावकािी नहीं है यदद उसका िी प्रयोग प्रततकषिव कताव के अनदु ेशों के
अनसु ाि क्रकया िाता िै।
4. पैरा 4 की अन्तवसव ्ट्तएु ं गलत िै औि इसका प्रत्याखयान क्रकया िै। यि तनवदे न क्रकया िाता िै क्रक प्रत्यर्थी
कम्पनी का उत्पाद क्रकसी भी दोष से ग्रस्ट्त निीं िै या यि प्रभाविीन िै औि आगे प्रत्यर्थी ने कोई
समथ्याव्यदेशन निीं प्रस्ट्ततु क्रकया िै बजल्क प्रततकषिव कताव के उपयोग के ढंग को उस पि स्ट्पष्ट रुपिे
उपदसशतव क्रकया िै। प्रत्यर्थी कम्पनी ने इसके ग्रािकों/उपयोगकतावओं में से क्रकसी से कोई परिवाद यिााँ तक
निीं प्राप्त क्रकया िै। यि तनवेदन क्रकया िाता िै क्रक प्रत्यर्थी कम्पनी अभी भी प्रत्यर्थी कम्पनी को
प्रततकषिव कताव को वापस कि परिवादी पि प्रततकषिव कताव के मलू ्य का प्रततदाय किने की इच्छा कि ििा िै।

प्रार्थनव ा खण्ड को पिू तव या गलत समझा िाता िै। प्रत्यर्थी कम्पनी, यि तनवेदन क्रकया िाता िै,
बबल्कु ल उत्तिदायी निीं िै क्योंक्रक प्रततकषिव कताव का उपयोग प्रततकषिव कताव पि अनदु ेशो के अनसु ाि
परिवादी द्वािा निीं प्रयोग क्रकया गया िै। प्रत्यर्थी कम्पनी क्रकसी अनधु चत व्यापाि पद्धतत का एकदम प्रयोग

निीं कि ििा िै क्योंक्रक कम्पनी का उत्पाद न तो दोषपिू व िै औि न िी स्ट्वास्ट्थ्य के सलए खतिनाक िै, क्योंक्रक
वि ववष के क्रकसी भी तत्व को - अन्तववषव ्ट निीं किता िै। कम्पनी का उत्पाद उस दशा में मच्छिों, काकिोचों,
ववस्ट्ति के खटमलों में वदृ ्धध िोने को िोकने के सलए, िटाने बलात ्दिू किने के सलए मात्र एक प्रततकषिव कताव
िोता िै िब प्रततकषिव कताव पि अनदु ेशों के अनसु ाि कमिे मंे प्रततकवषतव कि हदया िाता िै।

यि तनवदे न क्रकया िाता िै क्रक परिवादी का परिवाद तनिाधाि असभकर्थनों पि आधारित िोने के
कािि खारिि क्रकया िाने योग्य िै।

अतएव यि तद्नसु ाि प्रार्थनव ा की िाती िै।

स्ट्र्थान - प्रत्यर्थी के सलए अधधवक्ता
तािीख -

फोरम के आदेश की अवहेलना पर दण्ड ददलाने हेतु प्रार्नथ ा पत्र अन्तगतथ धारा 27

उपभोक्ता िरं क्षण अधधननयम 1986

जिला उपभोक्ता वववाद प्रतततोष फोिम जिला .......
दाजन्डक वाद स०ं ............ सन.् .......

(परिवाद स०ं ............ सन ्............ में पारित आदेश हदनाँका ............ से उत्पन्न)

क ख ग................ ..... बनाम प्रार्थी
अ.ब.स............................. ववपक्षी

माननीय अध्यक्ष एवं सार्थी सदस्ट्यगि,
प्रार्थी तनम्न तनवदे न किता िै :

(1) यि क्रक माननीय फोिम मंे एक परिवाद स०ं ............ सन ् ..... ....... चला र्था जिसमंे हदनाकँा ............ को
आदेश पारित िुआ र्था, अपील न िोने अर्थवा अपील के खारिि िोने के कािि वि आदेश अजन्तमता प्राप्त
कि चकु ा िै।

(2) यि क्रक उक्त आदेश के अधीन ववपक्षी को ............ में दोष दिू किने अर्थवा सवे ा मंे कमी को दिू किने के
तनदेश हदये गये र्थे औि ............रू० प्रततकि तर्था ............ रु० िजाा / व्यय भगु तान किने के तनदेश हदये
गये र्थ।े
अर्वा

परिवादी का परिवाद तनस्ट्साि अर्थवा तगं किने वाला पाये िाने पि परिवादी को ििाना भगु तान किने का
आदेश हदया गया र्था।

(3) यि क्रक आदेश की सत्य प्रततसलवप सलं ग्नक स०ं 1 प्रार्थनव ा पत्र के सार्थ प्रस्ट्ततु का िा ि.ैं –ववपक्षी अर्थवा
परिवादी ने फोिम के उक्त आदेश का अवसि हदये िाने पि भी अनपु ालन क्रकया िै औि आदेश की अविेलना
कि ििा िै।

अत: प्रार्थना िै क्रक उक्त ............. को आित किके उपभोक्ता सिं क्षि अधधतनयम, 1986 की धािा 27 के अन्तगतव
कािावास का तर्था अर्थदव ण्ड का आदेश देने की कृ पा किंे।

ददनााँक............

प्रार्ी.................
(नाम)
हस्ताक्षर..........
शनाख्त अधधवक्ता श्री..........

फोरम के आदेश के प्रवतनथ हेतु प्रार्नथ ा पत्र अन्तगतथ धारा 25 उपभोक्ता िंरक्षण
अधधननयम, 1986

जिला उपभोक्ता वववाद प्रतततोष फोिम जिला ............
तनष्पादन वाद स०ं ............ सन ्............ !

(परिवाद स०ं ............ सन ्........... मंे पारित आदेश हदनााँक ............ से उत्पन्न)
........ पतु ्र श्री ............. तनवासी मकान स०ं ............. मोिल्ला/कालौनी नगि/गाँाव

.............र्थाना/तिसील ............ जिला ............

बनाम

1.............
2..............

माननीय अध्यक्ष एवं सार्थी सदस्ट्यगि, परिवादी तनम्न तनवदे न किता िै :

(1) यि क्रक परिवादी ने ववपक्षी/ववपक्षीगि के ववरुद्ध उक्त फोिम मंे एक परिवाद स०ं .......... सन ् .............
............ बनाम ............ प्रस्ट्ततु क्रकया र्था जिसमंे परिवादी के पक्ष म आदेश हदनाँका ............ को पारित
िुए र्थ।े वि आदेश अपील न किने अर्थवा खारिि िो िाने से अजन्तम िो चुका िै।

(2) यि क्रक ववपक्षी/ववपक्षीगि को ............. बदलकि देन/े सेवा में कमी दिू किने के आदेश * सार्थ ............ रु०
प्रततकि भी भगु तान किने का आदेश हदया गया र्था । फोिम की सत्यप्रततसलवप इस प्रार्थनव ा पत्र के सार्थ
सलं ग्नक स०ं 1 िै ।

(3) यि क्रक उक्त आदेश को पारित िए लगभग ............. माि/वषव िो चुके िैं क्रकन्तु ववपक्षीगि ने आदेश का
अनपु ालन निीं क्रकया िै। फोिम के िस्ट्तक्षेप के बबना आदेश का प्रवतनव सम्भव निीं िै।

(4) यि क्रक ववपक्षी/ववपक्षीगि की सम्पवत्त का ववविि अन्त में वखितव क्रकया िा ििा िै। क प्रवतनव िेतु
ववपक्षी/ववपक्षीगि की सम्पवत्त को कु कव किके नीलाम क्रकया िाना तर्था......रु० प्रततकाि वसलू किने िेतु
वसलू ी तिसील को भिे ा िाना पिमावश्यक िै।

अि: प्राथना ा िै क्रक ववपक्षी/ववपक्षीगि की वखितव सम्पवत्त को कु कव किके नीलाम किाने तर्था ... रु० प्रततकि
को ि-ू िािस्ट्व के रूप मंे वसलू किने की तिसील ............ को आदेसशका िािी किने की कृ पा किंे।

िम्पवत्त का वववरण दिन ंाक..............

.........................
..........................

........... पररवादी
....... (नाम)
ह०........

शन ख्त........

ददनांक........


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