मानव के विकास की आरंभिक अवस्था में भाषा और लिपि से भी पूर्व मानव द्वारा अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जिस सशक्त माध्यम को अपनाया गया वह चित्र कला है । आदिमानव द्वारा शैलाश्रयों मे उकेरे गये कहीं स्थूल तो कहीं सूक्ष्म चित्र न केवल माननीय रचनात्मकता और कल्पनाशीलता की कहानी कहते हैं,अपितु इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत भी है । विभिन्न काल खंडों में हमारे पूर्वजों द्वारा आड़ी -तिरछी रेखाओं और सांकेतिक मानव तथा पशु आकृतियों के रूप मे छोड़े गए यह चिन्ह अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं और आज भी कलाओं के मूल के रूप में अपनी मेहत्ताओं को स्थापित करते हैं ।