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Warli Ramayana by Vijaya Raikwar
मानव के विकास की आरंभिक अवस्था में भाषा और लिपि से भी पूर्व मानव द्वारा अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जिस सशक्त माध्यम को अपनाया गया वह चित्र कला है । आदिमानव द्वारा शैलाश्रयों मे उकेरे गये कहीं स्थूल तो कहीं सूक्ष्म चित्र न केवल माननीय रचनात्मकता और कल्पनाशीलता की कहानी कहते हैं,अपितु इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के लिए महत्वपूर्ण सूचना स्रोत भी है । विभिन्न काल खंडों में हमारे पूर्वजों द्वारा
आड़ी -तिरछी रेखाओं और सांकेतिक मानव तथा पशु आकृतियों के रूप मे छोड़े गए यह चिन्ह अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं और आज भी कलाओं के मूल के रूप में अपनी मेहत्ताओं को स्थापित करते हैं ।
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