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हिन्दू विवाह अधिनियम

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Published by gpatersworld, 2021-11-12 04:55:51

हिन्दू विवाह अधिनियम

हिन्दू विवाह अधिनियम

आदेश VI नियम 17 सपठित धारा 151 ससविल प्रक्रिया संठिता के अधीि आवेदिपत्र

न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............

के मामले मंे: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

आदेश VI नियम 17 सपठित धारा 151 सस. प्र. स. के अधीि आवदे िपत्र -

अनतसादर पवू कव प्रदसशतव करता िै -

1. यि कक ऊपर नोट ककया गया मामला इस माननीय न्यायालय के समक्ष लम्बित िै और अि उसको
...................... के ललए ननयत ककया जाता िै।

2. यि कक कायिण ािी के अनकु ्रम के दौरान याची तथा प्रत्यथी पारस्पररक सिमनत द्िारा वििाि-विच्छे द की
डिक्री के रूप में उनके वििाि के विघटन के ललए करार कर चुके िै।ं

3. यि कक कधथत पररम्स्थनतयों के अिीन न्यायहित मंे दोनों पक्षकारों की पारस्पररक सिमनत के ललए वििाि-
विच्छे द िेतु एक याधचका मंे प्रस्ततु याधचका को सशं ोधित करना तथा सबपररिनततण करना आिश्यक िो
गया िै।

4. यि कक कधथत सशं ोिन प्रस्ततु याधचका में ईम्ससत अनतु ोष की प्रकृ नत को निीं पररिनततण करेगा।

5. यि कक ऊपर िर्र्तण ननिदे नों को ध्यान मंे रखते िुए, ऊपर नालमत ककये गये पक्षकार हिन्दवू ििाि अधिननयम
की िारा 13- ख (1) के अिीन एक याधचका में हिन्दू वििाि अधिननयम की धारा 13(1) (क) इत्याहद के
अिीन याची द्िारा दार्खल की गयी याधचका को सशं ोधित करने तथा सबपररिनततण करने की कृ पा करंे।

6. यि कक सशं ोधित की गयी याधचका पक्षकारों द्िारा सशं ोधित की गयी िै और इस आिदे नपत्र के साथ दी जा
रिी िै।
अतएि, यि अनत सादर पिू कण प्राथनण ा की जाती िै कक यि माननीय न्यायालय ऊपर ककये गये
पक्षकारों की सिमनत से आज की तारीख तक सशं ोधित ककये गये िोने मंे हिन्दू वििाि अधिननयम की िारा
13- ख (1) के अिीन पारस्पररक वििाि-विच्छे द के लिए याधचका में वििाि विच्छे द के ललए प्रस्ततु
याधचका को सबपररिनततण करने के रूप में सशं ोिन को अनजु ्ञा प्रदान करने की कृ पा करें।

याची
जररये अधििक्ता

तारीख:
स्थान:

आिदे नपत्र के समर्नथ मंे शपर्पत्र

न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............

के मामले में: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

शपर्पत्र

म.ंै ......... पत्नी.........ननवासी नयी दिल्िी, ननम्नलिखखत रूप में एतद् द्वारा सत्यननष्ठा से प्रनतज्ञान एवम ् घोषणा करता हँू

1. यह कक मंै ऊपर कथित मामिे में याची तिा मामिे के तथ्यों एवम ् पररस्थिनतयों से पणतण या पररथचत हूँ।
2. यह कक आिेश VI ननयम 17 सपदठत धारा 151 लस. प्र. स.ं के अधीन साि दिये जा रहे आविे नपत्र की

अन्तवथण तएु ं मेरे अनिु ेश के अधीन मेरे अथधवक्ता द्वारा प्ररूप तयै ार ककया गया है, स्जसकी अन्तवथण तएु ं
इस शपिपत्र के भाग एवम ् पासिण के रूप में पढा जा सके गा और सकं्षिप्त होने के लिए इसमें नहीं पनु ः पशे
ककया जा रहा है।

शपिकताण

सत्यापन

...................में इस तारीख म इस तारीख ..................... को सत्यापपत ककया गया कक ऊपर मेरे ऊपर शपिपत्र की

अन्तवथण तुएं मेरी जानकारी में सत्य एवम ् सही है।
शपिकताण

एक वववाि के बानतलीकरण के सलए याचिका

म्जला न्यायालय ...............................

वाि स.ं .................. सन .........................

अबक िनाम ...............याची
कखग ..............प्रत्यथी

ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 (1955 का स0ं 25) की धारा 12 के अधीि एक वववाि के बानतलीकरण के
सलए याचिका।

1. एक वििाि पक्षकारों के िीच ................ मंे तारीख .................. को अनषु ्ठावपत ककया गया। सबयकरूपेर्
अनपु ्रमार्र्त ककया गया हिन्दू वििाि रम्जस्टर/एक शपथपत्र से एक प्रमार्र्त प्रोद्िरर् इसके साथ दार्खल
की जाती िै।

2. वििाि के समय पिू ण तथा याधचका को दार्खल करने के समय पर वििाि के पक्षकारों की िैलसयत एिम ्
ननिास स्थान ननबनललर्खत रूप में दार्खल की जाती िै।

पनत

पववाह के पवण याथचका को िाखखि करने के समय पर

थतर

आयु पववाह के पवण पत्नी
ननवास याथचका को िाखखि करने के समय पर
थिान

थतर
आयु
ननवास
थिान

[चािे एक पक्षकार िमण से एक हिन्दू िो या न िो उसके या उसकी स्तर का एक भाग िै]

3. [इस परै ा में, विलशम्ष्टयां पनत एिम ् पत्नी तथा वििाि से सतं ान के सििास का स्थान यहद "कोई हो तो
हदया जा सके गा। प्रत्यके सतं ान की जन्म-तारीख तथा नाम और ललगं और यि तथ्य कक चािे जीवित या
मतृ िो, का वििरर् हदया जाना चाहिए]

4. प्रत्यथी वििाि के समय पर नपसंु क था और इन कायिण ाहियों के समं ्स्थत ककया जाने तक िसै ा िोना चालू
रिा।
या
प्रत्यथी वििाि के समय पर जड/पागल था।
या
याची/याची का सरं क्षक की सिमनत िल / कपट के द्िारा प्रासत की गयी और याधचका बि की प्रितनण ीयता
िन्द िो जाने तथा कपट की खोज कर चकु ने के पश्चात ् पनत एिम ् पत्नी के रूप मे रिते थे।
या

प्रत्यथी याची से लभन्न ककसी अन्य व्यम्क्त द्िारा गभिण ती वििाि के समय पर थी और याची इस तथ्य से
अनलभज्ञ पववाह के समय पर िा और कायवण ादहयां पववाह की तारीख से एक वषण के अन्िर ससं ्थित की जा
चकु ी है और याची की सहमनत से ववै ादहक सभं ोग याची से लभन्न कनतपय व्यस्क्त द्वारा प्रत्यिी की
गभावण थिा का पवद्यमान होना याची द्वारा खोज से नहीं हुई है।
[ऊपर आधारों में एक या अथधक पर अलभवचन ककया जा सके गा और उन भागों पर जो िाग नहीं है, को
बाहर थगना जाना चादहए। स्जन तथ्यों पर अनतु ोष का िावा आधाररत बनाया जाता है, उसका पिृ क रूप में
वसै े वणनण ककया जाना चादहए जसै े मामिे की प्रकृ नत अनजु ्ञा प्रिान करती हो। आरोपपत ककये गये ववै ादहक
अपराधों का उल्िखे उनके अलभकथित काररत ककये जाने के समय एवम ् थिान सदहत पिृ क् परै ों में
उस्ल्िखखत ककया जाना चादहए]
5. याथचका प्रत्यिी के साि िरु लभसथं ध मंे नहीं ससं ्थित की जाती है।
6. इस याथचका िाखखि करने मंे कोई अनावश्यक या अनथु चत पविम्ब नहीं हुई है।
7. इसका कोई अन्य आधार नहीं है कक अनतु ोष को क्यों नहीं मजं र ककया जाना चादहए।
8. ककसी पिकार द्वारा या उसकी ओर से पववाह के बारे मंे कोई भी पवण कायवण ाही नहीं हुई है।

या
पिकारों द्वारा या उसकी ओर से पववाह के बारे में ननम्नलिखखत कायवण ाही हुई है-

क्र.स.ं पिकारों के नाम अथधननयम की धारा मामिे की स.ं न्यायािय का नाम एवं पररणाम

के साि कायवण ाही एवं तारीख अवस्थित

की प्रकृ नत तिा वषण

1

2

3

4

9. पववाह का अनुष्ठापन ककया गया। पिकारगण इस न्यायािय की साधारण आरस्म्भक लसपवि अथधकाररता की
पररसीमाओं के अन्िर ............... में ननवास करते हंै। पिकारगण अंनतम तौर पर ननवास करते ि।े

10. अतएव, याची यह प्रािनण ा करती है कक शन्यकरणीय होने वािे पिकारों के बीच पववाह की अकृ तता के द्वारा

न्यायािय बानति ककया जा सके गा।

याची

सत्यापन

ऊपर नालमत ककया गया याची इस सत्यननष्ठ प्रनतज्ञान पर करता है कक याची के परै ा ................. िगायत
.............. याची की सवोत्तम सचना एवम ् पवश्वास में सत्य है।

................ मंे इस तारीख .............. को सत्यापपत ककया गया।

थिान: याची

दाम्पत्य अचधकारों के प्रत्यास्थापि

म्जला न्यायालय ...............................

वाि स.ं .................. सन .........................

अबक िनाम ...............याची
कखग ..............प्रत्यथी

दहन्ि वििाि अधिननयम, 1955 (1955 की स.ं 25) की िारा 9 के अिीन दाबपत्य अथधकारों के प्रत्यास्थापन के
ललए याधचका।

(1955 की स.ं 25)

यािी निम्िसलखित रूप में प्राथिव ा करता िै -

1. एक वििाि ................... में तारीख ................... को पक्षकारों के िीच अनषु ्ठावपत ककया गया। सबयक

रूप से अनपु ्रमार्र्त ककये गये हिन्दू वििाि रम्जस्टर से एक प्रमार्र्त उद्िरर्/ एक शपथपत्र इसके साथ

दार्खल की जाती िै।

2. वििाि के पिू ण याधचका दार्खल करने के समय पर वििाि के पक्षकारों की प्राम्स्थनत तथा ननिास स्थान

ननबनललर्खत रूप मंे थी –

पनत

पववाह के पवण याथचका को िाखखि करने के समय पर

प्रास्थिनत पववाह के पवण पत्नी
आयु याथचका को िाखखि करने के समय पर
ननवास
थिान

प्रास्थिनत
आयु
ननवास
थिान

(क्या एक पक्षकार िमण से एक हिन्दू िै या निीं, उसका या उसकी प्राम्स्थनत का एक भाग िै। यि भी कथन करे
क्या कंु िारा/अवििाहिता, विििा, (वििुर), या तलाक सदु ा]

3. इस परै ा मंे विलशम्ष्टयााँ और पनत एिम ् पत्नी के रूप में सििास का स्थान यहद कोई िो तो हदया जा सके गा।
प्रत्यके लशशु के जन्म की तारीख एिम ् स्थान एिम ् नाम एिम ् ललगं और यि तथ्य कक चािे जीवित या मतृ
िो, का वििरर् हदया जाना चाहिए।

4. प्रत्यथी ने ................... (याची को ज्ञात िोने के ज्ञात िोने के रूप में ................. के कारर् का वििरर्
हदया जा सके गा) से यमु ्क्त-यकु ्त कारर् के बिना िापस ललया जा चकु ा िै।

5. याधचका प्रत्यथी के साथ दसु ्सम्न्ि में निीं प्रस्ततु की जाती िै।
6. इस याधचका को दार्खल करने मंे कोई अनािश्यक या अनधु चत विलबि निीं िुआ िै
7. इसका कोई अन्य कारर् निीं िै, क्यों अनतु ोष निीं मजं रू ककया जाना चाहिए।
8. ककसी पक्षकार द्िारा या उसकी ओर से वििाि के िारे में कोई भी पिू ण कायिण ािी निीं िुई िै।

या

पक्षकारों के द्िारा या उनकी ओर से वििाि के िारे मंे ननबनललर्खत पिू ण कायिण ािी िो गयी िै –

क्र.स.ं पिकारों के नाम अथधननयम की धारा मामिे की स.ं न्यायािय का नाम एवं पररणाम

के साि कायवण ाही एवं तारीख अवस्थित

की प्रकृ नत तिा वषण

1

2

3

4

9. वििाि का अनषु ्ठापन ........................................मंे िुआ।
या

पनत या पत्नी .......................................... मंे ननिास करते थे।
या

पनत या पत्नी इस न्यायालय की सािारर् लसविल अधिकाररता की स्थानीय पररसीमाओं के अन्दर ................
में साथ-साथ अतं मंे ननिास करते थे।
10. याची प्रत्यथी के विरुद्ि दाबपत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन के ललए एक डिक्री के ललए प्राथनण ा करता िै।

याची

सत्यापि

ऊपर नालमत ककया गया िादी इस सत्यननष्ठ प्रनतज्ञान पर यि कथन करता िै कक याधचका के परै ा .................
लगायत ................. याची की सिोत्तम सचू ना एिम ्विश्िास मंे सत्य िै।

.................... मंे इस तारीख .................... को सत्यावपत ककया गया

स्थान............................. याची

न्यानयक पथृ क्करण के सलए याचिका

म्जला न्यायालय ...............................

वाि स.ं .................. सन .........................

अबक िनाम ...............याची
कखग ..............प्रत्यथी

ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 (1955 का स.ं 25) की धारा 10 के अधीि एक न्यानयक पथृ क्करण के सलए
एक याचिका।

याची ननबनललर्खत रूप मंे प्राथनण ा करता िै

1. वििाि ................... मंे तारीख ................... को पक्षकारों के िीच अनषु ्ठावपत ककया गया। सबयक रूप
से अनपु ्रमार्र्त ककये गये हिन्दू वििाि रम्जस्टर एक शपथपत्र से एक प्रमार्र्त प्रोद्िरर् इसके साथ दार्खल
ककया जाता िै।

2. वििाि के पिू ण तथा याधचका को दार्खल करने के समय पर वििाि के पक्षकारों का स्तर तथा ननिास स्थान
ननबनललर्खत रूप में थे –

पववाह के पवण पनत
याथचका को िाखखि करने के समय पर

प्रास्थिनत पववाह के पवण पत्नी
आयु याथचका को िाखखि करने के समय पर
ननवास
थिान

प्रास्थिनत
आयु
ननवास
थिान

(क्या एक पक्षकार िमण से हिन्दू िै या निीं, उसका या उसकी स्तर का एक भाग िै।]

3. (इस परै ा में विलशम्ष्टयााँ और पनत एिम ् पत्नी के रूप में सििास तथा सतं ानों का स्थान, यहद कोई िो तो
हदया जाय। प्रत्यके सतं ान को जन्म नतधथ एिम ् स्थान तथा नाम एिम ् ललगं और यह तथ्य कक क्या िि
जीवित या मतृ िै, का भी वििरर् हदया जाना चाहिए।]

4. प्रत्यथी के पास ..................... [िारा 10 मंे विननहदणष्ट आिारों मंे से कोई एक या अथधक िै, का अलभिचन
यिाँा ककया जा सके गा। आरोवपत ििै ाहिक अपरािों का उल्लेख उनके अलभकधथत काररत ककये जाने के
समयो एिम स्थानों सहित पथृ क परै ा मंे उल्लखे ककया जाना चाहिए। तथ्य म्जन पर अनतु ोष का दािा
आिाररत िनाया जाता िै िसै े पथृ क् तौर पर उम्ल्लर्खत ककया जाना चादहए जसै े मामले की प्रकृ नत अनजु ्ञा
प्रदान करती िो। यहद जारकमण का अलभिचन ककया जाता है तो याची को काररत ककया जा चुकने िाले
अलभकधथत जारकमण के कायों की यथा शक्य ननकटतम विलशम्ष्टयां देनी चाहिए] िै।

5. क्या याची का आिार िारा 13(1) (i) मंे विननहदणष्ट आिार िै, याची को यि वििरर् देना चादहए कक िि उन

कायों का ककसी भी रीनत से समनषु धं गक निीं िुआ िै या उन्िें मौनानमु नत निीं प्रिान की िै, उन्िंे दोषमाम्जतण
कर चकु ा िै म्जनकी लशकायत की गयी िै।

6. क्या याची का आिार क्रू रता िै। याची ककसी भी रीनत से क्रू रता का दोषमाजनण निीं ककया है।

7. याथचका, याची ने प्रत्यिी के साि िथु सथं ध मंे नहीं प्रथततु की जाती है।

8. इस याथचकाओं को िाखखि करने में कोई अनावश्यक या अनथु चत पविम्ब नहीं हुई है।
9. इसका कोई अन्य पवथधक आधार नहीं है कक ककसी पिकार द्वारा या उसकी ओर से पववाह के बारे में कोई

पवण कायवण ादहयां नहीं हुई है।
10. ककसी पिकार द्वारा या उसकी ओर से पववाह के बारे में कोई भी पवण कायवण ाही नहीं हुई है।

या

पिकारों द्वारा या उनकी ओर से पववाह के बारे मंे ननम्नलिखखत पवण कायवण ादहयाूँ हुई है –
क्र.स.ं पिकारों के नाम अथधननयम की धारा मामिे की स.ं न्यायािय का नाम एवं पररणाम

के साि कायवण ाही एवं तारीख अवस्थित

की प्रकृ नत तिा वषण

1

2

3

4

11. पववाह ........................ मंे अनुष्ठापपत ककया गया।

या

पनत एवम ् पत्नी........................................ मंे ननवास करते ि।े पनत एवम ् पत्नी इस न्यायािय की साधारण आरस्म्भक
अथधकाररता की थिानीय पररसीमाओं के अन्िर ............................. मंे साि-साि अंनतम बार ननवास करते ि।े

12. अतएव, याची प्रत्यिी के पवरुद्ध न्यानयक पिृ क्करण हेतु एक डिक्री के लिए प्रािनण ा करता है।

याची

सत्यापन

ऊपरनालमत ककया गया याची इस सत्यननष्ठ प्रनतज्ञान पर किन करता है कक याथचका के परै ा

..................................... िगाया .................. याची की सवोत्तम सचना एवम ् पवश्वास में सत्य है।
.................... मंे इस तारीख ...................... को सत्यापपत ककया गया।

थिान................. याची

पारस्पररक सिमनत से वववाि-ववच्छेद की डििी द्वारा वववाि के ववघटि के सलए ठिन्दू वववाि अचधनियम
की धारा 13-ि (2) के अधीि आवदे िपत्र

न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............

के मामले मंे: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

पारस्पररक सिमनत से वववाि ववच्छेद की एक डििी द्वारा वववाि के ववघटि के सलए आज की तारीि तक
यथासशं ोचधत ठिन्दू वववाि अचधनियम की धारा 13- ि (2) के अधीि याचिका

अनत सादर पिू कण प्रदलशतण करता िै -
1. यि कक एक वििाि का अनषु ्ठापन हिन्दू कृ त्य और कमण के अनसु ार ..................................... मंे याची स.ं

1 एिम ् याची स.ं 2 के िीच ककया गया। सबयक रूप से अनपु ्रमार्र्त ककये गये इस प्रभाि की याधचयों के
शपथपत्र को अनपु ्रमार्र्त ककया जाता िै।
2. यि कक वििाि के पिू ण तथा प्रस्ततु याधचका के दार्खल करने के समय पर पक्षकारों की िैलसयत या स्तर,
आयु एिम ् ननिास स्थान ननबनललर्खत रूप मंे थ/े िैं।

पववाह के पवण पनत
याथचका को िाखखि करने के समय पर

प्रास्थिनत पववाह के पवण पत्नी
आयु याथचका को िाखखि करने के समय पर
ननवास
थिान

प्रास्थिनत
आयु
ननवास
थिान

3. यह कक याथचका के पिकारगण पववाह के समय पर धमण द्वारा दहन्ि िे और वे प्रथतुत याथचका को िाखखि करने के

समय परवसे ा होना चाि रखते ि।े

4. यह कक पिकारों के बीच पववाह का सम्यक रूप से संभोग ककया गया और लशत पववाह के फिथवरुप एक पुरुष बािक
तारीख ...................................... को पैिा हुआ। यह पारथपररक तौर पर करार ककया गया कक याची सं. 2 उसके

वयथकता की आयु प्राप्त करने तक ऊपर कथित बािक को रखगे ा तिा उसका पोषण करेगा।

5. यह कक प्रथतुत याथचका के पिकारगण पनत एवम ् पत्नी के रूप मंे साि-साि रहते िे और तत्पश्चात ् एक कारण या
िसरे के कारणवश मतभेि होने की वजह से पिृ क-पिृ क रह रहे हैं और पिकारों के बीच पनु लण मिाप होने की कोई भी

संभावना नहीं है।

6. यह कक चंकक पिकारों के बीच पनु लण मिाप की कोई भी सभं ावना नही है इसलिए उन्होंने दहन्ि पववाह अथधननयम की
धारा 13- ख (1) के अधीन उनके पववाह के पवघटन हेतु पारथपररक सहमनत द्वारा एक याथचका को पववाह के पवघटन
हेतु याची सं. 1 द्वारा िाखखि की गयी याथचका को सम्पररवनततण करने का करार ककया।

7. वह कक कोई अन्य मामिा इस प्रथततु याथचका से लभन्न पिकारों के बीच पवथध की ककसी न्यायािय मंे िस्म्बत नहीं

है और धन के प्रनतफि पर कोई भी पवचार प्रथततु याथचका को िाखखि करने के लिए पिकारों के बीच नहीं ककया
गया।

8. यह कक यिापरोक्त, ऊपर नालमत ककये गये पिकारगण . ..................................... से पिृ क्-पिृ क् तौर ननवास
कर रहे हैं और पिकारों के बीच साि-साि रहने या कोई अन्य पनलण मिाप होने का अवसर नहीं हैं और ऐसे रूप मंे, वे
अपनी थवयं की थवततं ्र इच्छा एवम ् सहमनत के उनके पववाह के पवघटन के लिए सहमत हो गये हंै। सहमनत भय,
बि कपट, प्रपीड़न या असम्यक प्रभाव द्वारा नहीं िी गयी है।

9. यह कक प्रथततु याथचका पिकारों की िरु लभसस्न्ध मंे नहीं िाखखि की गयी है।
10. यह कक इस बारे मंे कोई भी आधार नही है कक उस अनुतोष को पिकारों का क्यों नहीं मंजर ककया जा सकता है स्जसके

लिए प्रािनण ा की गयी।

11. यह कक प्रथतुत याथचका को िाखखि करने में कोई अनुथचत या अयसु ्क्त-युक्त पविम्ब नहीं है।
12. यह कक जसै े – धारा 151 लस. प्र. सं. के अधीन िाखखि ककये गये आवेिनपत्र में प्रािनण ा की गयी दहन्ि पववाह

अथधननयम की धारा 13- ख (2) के अधीन िसरे प्रथताव को प्रथततु 7 के लिए छः महीने की कािावथध मामिे की

पररस्थिनतयों में िोषमास्जतण ककये गये पविम्ब का अथधत्यजन ककया जा सके गा।

13. यह कक प्रथतुत याथचका िाखखि करने में कोई अनथु चत या अयुस्क्त-युक्त पविम्ब नहीं होती है।
14. यह कक पववाह का अनुष्ठापन ककया गया और पिकारों के बीच ..................................... में सहवास ककया गया

और वे अंनतम तौर पर ..................................... मंे साि-साि रहते िे अतएव इस माननीय न्यायािय को प्रथततु

याथचका को ग्रहण करने तिा पवचारण करने की कोई अथधकाररता नहीं है।

15. यह कक पवदहत न्यायािय फीस पहिे से ही याथचका पर ननयत की जा चकु ी है। अतएव, यह अनतसािर पवकण प्रािनण ा

की जाती है कक न्यायदहत मंे यह माननीय न्यायािय पारथपररक सहमनत से पववाह पवच्छे ि की एक डिक्री पाररत
करके पिकारों के बीच पववाह को पवघदटत करने की कृ पा करें।

यह तद्नसु ार प्रािनण ा की जाती है। याची सं. 1
याची सं. 2
तारीख :
थिान : जररये अथधवक्ता

सत्यापन

इस प्रनतज्ञान पर ऊपर नालमत ककये गये याची द्वारा तारीख ......................................को .......................... मंे
यह सत्यापपत ककया गया कक याथचका के परै ा सं. . ..................................... की अन्तवथण तएु ं हमारी जानकारी मंे सत्य एवम ्

सहीं है और याथचका के परै ा सं. के वे सभी सत्य होनी प्राप्त की गयी एवम ् पवश्वास की गयी पवथधक सचना पर आधाररत है।

याची सं. 1 याची सं. 2

याचिका के समर्नथ में शपर्पत्र

न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............

के मामले मंे: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

शपिकताण

म.ैं .................................... पतु ्र श्री ..................................... ननवासी ................................. ननम्नलिखखत रूप मंे

सत्यननष्ठा से प्रनतज्ञान एवम ् घोषणा करता हूँ -

1. यह कक शपिकताण ने दहन्ि पववाह अथधननयम की धारा 13-ख (2) के अधीन साि-साि िी जा रही याथचका िाखखि

की है कथित याथचका की अन्तवथण तएु ं इस शपिपत्र के भाग के रूप मंे पढा जा सके गा जो सकं ्षिप्त होने के लिए इसमें
पनु ः पेश नहीं की गयी है।

2. यह कक याची सं. 1 एवम ् शपिकताण के बीच पववाह दहन्ि कृ त्य रूदढयों ..................................... के अनसु ार

तारीख ..................................... को अनुष्ठापपत ककया गया।

3. यह कक याची स.ं 1 एवम ् 2 ..................................... के पश्चात ् पिृ क्-पिृ क् रह रहे हंै।
4. यह कक तारीख ..................................... को कथित पववाह के पररणाम थवरूप एक परु ुष बािक पिै ा हुआ।
5. यह कक प्रथतुत याथचका पिकारों की िरु लभसस्न्ध में नहीं प्रथतुत की गयी है।

6. यह कक साि-साि िी जा रही याथचका का प्रारूप मेरे अनुिेशों के अधीन मेरे अथधवक्ता द्वारा तयै ार ककया गया है

स्जसकी अन्तवथण तएु ं इस शपिपत्र के भाग एवम ् पासिण के रूप मंे पढी जा सके गी और सकं ्षिप्त होने के लिए इसमंे
नहीं पनु ः पेश की गयी है।

शपिकताण

सत्यापन

..................................... मंे इस तारीख ...................................... को यह सत्यापपत ककया गया कक इस शपिपत्र की
अन्तवथण तएु ं मेरी जानकारी में सत्य एवम ् सही है, इसका कोई भाग लमथ्या नहीं है और कोई भी बात उससे नछपायी नहीं गयी है।

शपिकताण

याचिका के समर्नथ मंे शपर्पत्र
न्यायालय ............

इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............
के मामले में: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

शपिपत्र

म.ंै ....................................पत्नी.....................................ननवासी .....................................
ननम्नलिखखत रूप मंे एतद्द्वारा सत्यननष्ठा से प्रनतज्ञान एवम ् घोषणा करता है –

1. यह कक शपिकताण ने दहन्ि पववाह अथधननयम की धारा 13-ख (2) के अधीन सािसाि िी जा रही याथचका िाखखि

की है। कथित याथचका की अन्तवथण तुओं को इस शपिपत्र के भाग के रूप में पढा जाय जो संक्षिप्त होने के लिए इसमंे
नहीं पनु ः पेश की गयी है।

2. यह कक याची सं. 1 एवम ् 2 के बीच पववाह ..................................... दहन्ि कृ त्यों एवम ् रुदढयों के अनसु ार
...................................... मंे अनुष्ठापपत ककया गया।

3. यह कक याची स.ं 1 एवम ् 2 ..................................... के पश्चात ् पिृ क-पिृ क रह रहे हैं।
4. यह कक तारीख ..................................... को कथित पववाह के फिथवरूप बािक पिै ा हुआ।
5. यह कक प्रथतुत याथचका पिकारों की िथु संथध मंे नहीं िाखखि की गयी है।

6. यह कक साि-साि िी जा रही याथचका का प्रारुप मेरे अनिु ेशों के अधीन मेरे अथधवक्ता द्वारा तयार ककया गया है,

स्जसकी अन्तवथण तएु ं इस शपिपत्र के भाग एवम ् पासिण के रूप में का जाय और संक्षिप्त होने के लिए इसमंे नहीं पुनः
पेश ककया गया है।

शपिकताण

सत्यापन
....................................... मंे इस तारीख .................................... को यह सत्यापपत ककया गया कक मेरे ऊपर
शपिपत्र की अन्तवथण तएं मेरी जानकारी मंे सत्य एवम ् सही है।

शपिकताण

वादकालीि निवािव भत्ते िेतु धारा 24 ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 के अन्तर्तव याचिका

(Petition u/sec. 24 of the Hindu Marriage Act, 1955 for Maintenance Pendentelite)

न्यायालय............
वििाि विच्छे द िाद निं र ............ सन ्............ से सबिम्न्ित

अ० ि०स० ............ बिाम िादी
स० द० फ० ............ प्रनतिादी

श्रीमान जी,
याची ननबन प्रकार से सविनय ननिदे न करती/करता िै।

1. यि कक याची द्िारा वििाि विच्छे दन की उक्त याधचका उत्तरदाता के विरुद्ि दायर की िै जो मान्य न्यायालय मंे
लम्बित िै। अथिा
उत्तरदाता ने वििाि विच्छेद की याधचका स०ं ............ सन ............ शीषकण ........ िनाम ......... याची के विरुद्ि योम्जत
की िै जो मान्य न्यायालय मंे विचारािीन िै ।

2. यि कक वििाि के पररर्ामस्िरूप दो िच्चे िुए म्जनमें एक लडका िै और एक लडकी । लडका जो कक ............ िषण का
िै ............ कक्षा मंे ............ स्कू ल मंे ............ में पढ़ रिा िै म्जसका मालसक खचाण रु० ............ िै। लडकी जो कक ............

िषण की िै भी कक्षा ..... मंे ............ स्कू ल में ............ मंे पढ़ रिी िै। लडकी की पढ़ाई का खचाण रु० .... मालसक िै।
उत्तरदाता ने ............ माि/िषण से याची ि िच्चों के भरर् पोषर् िेतु कु छ निीं हदया िै।

3. यि कक उपरोक्त दोनों िच्चे याची के साथ िी रि रिे िं।ै

4. यि कक याची और िच्चे दोनों िी अच्छा जीिन स्तर जीने के आहद ि।ैं

5. यि कक याची के पास कोई स्रोत जीिन ननिाणि करने का निीं िै और िि िच्चों का ि अपना पालन पोषर् करने की
म्स्थनत में निीं िै।

6. यि कक उत्तरदाता ............ रु० मालसक नौकरी/व्यापार/व्यिसाय/कृ वष से कमाता/कमाती िै । िाद के दौरान याची
के ............रु० िाद के व्यय िेत............. २० मालसक अपने भरर् पोषर् िेत. रु० ............ मालसक िच्चों की पढाई ि
भरर्पोषर् िा आिश्यकता िै और उत्तरदाता उक्त िनरालश याची को भगतान करने की म्स्थनत में िै-याचा का प्राथनण ा
पत्र स्िीकार िोने योग्य िै।
.
.
अत: प्राथनण ा िै कक याची को उत्तरदाता से ............ रु० िाद के व्यय िेत,ु रु० मालसक भरर् पोषर् भत्ता स्ियं याची के
ललए तथा .............रु० मालसक िच्चों का पदार ि भरर् पोषर् भत्ता हदलाने ि भगु तान कराने के आदेश देने की कृ पा
करें।

............ यािी ....... शिाख्त अचधवक्ता

सत्यापि

आज हदनाकं ............ को स्थान ............ पर मैं याची सत्यावपत करती/करता िूँा कक प्राथनण ा पत्र के प्रस्तर 1 लगायत 6
के तथ्य मरे े व्यम्क्तगत ज्ञान मंे सत्य िै । कोई तथ्य न तो झठू ा िै न िी छु पाया गया िै।

...........यािी
…….शिाख्त अचधवक्ता

वववाि का ववघटि के सलए याचिका

म्जला न्यायालय ...............................

वाि सं................... सन .........................

अबक िनाम ...............याची
कखग ..............प्रत्यथी

हिन्दू वििाि अधिननयम, 1955 (1955 का स0ं 25) की िारा 13 के अिीन वििाि विच्छेद के ललए एक डिक्री
द्िारा वििाि का विघटन के ललए याधचका

यािी निम्िसलखित रूप में प्राथिव ा करता िै -
1. एक वििाि .................... मंे तारीख .................... को पक्षकारों के िीच अनषु ्ठावपत ककया गया। सबयक
रूप से अनपु ्रमार्र्त ककये गये हिन्दू वििाि रम्जस्टर/एक शपथपत्र से एक प्रमार्र्त प्रोद्िरर् इसके साथ
दार्खल ककया जाता िै।
2. वििाि के पिू ण वििाि के पक्षकारों का ननिास स्थान तथा प्राम्स्थनत याधचका दार्खल ककये जाते समय, जो
ननबन थे -

पनत

पववाह के पवण याथचका को िाखखि करने के समय पर

प्रास्थिनत पववाह के पवण पत्नी
आयु याथचका को िाखखि करने के समय पर
ननवास
थिान

प्रास्थिनत
आयु
ननवास
थिान

3. वििाि से पनत एिम ्पत्नी तथा सतं ानों के रूप में विलशम्ष्टयााँ तथा सििास का स्थान यदि कोई िो तो हदया
जा सके गा। प्रत्यके लशशु के जन्म की तारीख एिम ् स्थान तथा तथ्य चािे जीवित या मतृ ।

4. प्रत्यथी ................... (िारा 13 मंे विननहदणष्ट आिारों मंे से एक या अधिक का यिां अलभिचन
जा सके गा। तथ्य म्जन पर अनतु ोष का दािा आिाररत िनाया जाता िै, िसै े पथृ क रूप से कथन ककया जाना
चाहिए जसै े मामले की प्रकृ नत अनजु ्ञा प्रदान कराया िै। यहद जारकमण अलभवचन ककया जाता िै तो याची को
लगभग उतना अलभकधथत काररत ककया जा चुकने वािे जारकमण के कायों की विलशम्ष्टयाँा देनी चाहिए
म्जतना की िि कर सकता िै। आरोवपत ववै ादहक अलभकिन काररत ककया जाने के समयों एवं थिानों के
साि पिृ क परै ा में दिया जाना चाहिए। यहद िारा 13(1) के खण्ि (viii) में विननहदणष्ट आिार का अलभिचन,

तो याथचका इस प्रभाव की याची के शपिपत्र के साि दिया जाना चादहए की वह या उसने न्यानयक प्रुिक्करण

के ललए डिक्री को पाररत करने के एक िषण या ऊपर की एक कालािधि के ललए सििास पनु रारबभ निीं ककया
िै या की िै।

5. जिााँ याधचका के आिार 13 की उपिारा (1) के खण्ि (1) में विननहदणष्ट आिार िै ििाँा याची को समनषु गं ी
तरीका निीं िै।

6. जहाूँ याथचका का आधार क्ररता है वहाूँ याची ने ककसी भी रीनत से क्ररता का िोषमाजनण नहीं ककया है।
7. धारा 13 में उस्ल्िखखत कोई अन्य आधार है।
8. याथचका प्रत्यिी के साि िरु लभसथं ध में नहीं प्रथतुत की गयी है।
9. इस याथचका को िाखखि करने में कोई भी अनावश्यक या अनथु चत पविम्ब नहीं हुई है।
10. इसका कोई अन्य आधार नहीं है कक क्यों अनुतोष नहीं मजं र ककया जाना चादहए।
11. ककसी पिकार द्वारा या उसकी ओर से पववाह के बारे में कोई भी पवण कायवण ाही नहीं हुई है।

या
पिकारों द्वारा या उनकी ओर से पववाह के बारे में ननम्नलिखखत पवण कायवण ादहयाँू हो गयी है -

क्र.स.ं पिकारों के नाम अथधननयम की धारा मामिे की स.ं न्यायािय का नाम एवं पररणाम

के साि कायवण ाही एवं तारीख अवस्थित

की प्रकृ नत तिा वषण

1

2

3

4

12. पववाह अनुष्ठापपत ककया गया। पनत एवम ् पत्नी इस न्यायािय की साधारण आरस्म्भक अथधकाररता के अन्िर
.................... मंे रहते हंै और पनत एवम ् पत्नी अनं तम बार साि-साि रहते ि।े

13. अतएव, याची यह प्रािनण ा करता है कक याची तिा प्रत्यिी के बीच पववाह-पववाह पवच्छे ि की एक डिक्री द्वारा पवघदटत

कर दिया जाय।

याची

सत्यापि

ऊपर नालमत ककया गया िादी इस सत्यननष्ठ प्रनतज्ञान पर यि कथन करता िै कक याधचका के परै ा .................
लगायत ................. याची की सिोत्तम सचू ना एिम ्विश्िास में सत्य िै।

.................... मंे इस तारीख .................... को सत्यावपत ककया गया

स्थान............................. याची

वववाि की अकृ तता की एक डििी के सलए याचिका

म्जला न्यायालय ...............................

वाि स.ं .................. सन .........................

अबक िनाम ...............याची
कखग ..............प्रत्यथी

ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 की धारा 11 के अधीि वववाि की अकृ तता की एक डििी के सलए याचिका -

याची ननबनललर्खत रूप मंे प्राथनण ा करता िै

1. एक वििाि ........................................... मंे तारीख .................................. को हिन्दू वििाि
अधिननयम के प्रारबभ के पश्चात ् पक्षकारों के िीच अनषु ्ठावपत ककया गया। सबयक रूप से अनपु ्रमार्र्त
ककये गये हिन्दू वििाि रम्जस्टर/शपथपत्र से एक प्रमार्र्त प्रोद्िरर् इसके साथ दार्खल ककया जाता िै।

2. वििाि के पिू ण तथा याधचका को दार्खल करने के समय पर वििाि के पक्षकारों का स्तर तथा ननिास स्थान
ननबनललर्खत रूप मंे थे -

पनत

पववाह के पवण याथचका को िाखखि करने के समय पर

थतर

आयु पववाह के पवण पत्नी
ननवास याथचका को िाखखि करने के समय पर
थिान

थतर
आयु
ननवास
थिान

[चािे एक पक्षकार िमण से हिन्दू िो या न िो उसका या उसकी िैलसयत का एक भाग िै।]

3. इस परै ा में विलशम्ष्टयाँा और पनत एिम ् पत्नी के रूप मंे सििास का स्थान, वििाि से सतं ाने, यहद कोई िो
हदये जाय। जन्म की तारीख एिम ् स्थान तथा प्रत्यके सतं ान का नाम एिम ् ललगं तथा यि तथ्य की क्या
िि जीवित या मतृ िै, का भी वििरर् हदया जाना चाहिए।

4. प्रत्यथी का वििाि के समय पर जीवित रिने िाला एक पनत या पत्नी िै। [सपं रू ्ण विलशष्टयों का वििरर् दें।]

या

पक्षकारगर् प्रनतवषद्ि नातदे ारी की डिधियों के अन्दर आते िंै और उनमंे से प्रत्यके शालसत करने िाली कोई
रूहढ या प्रथा िै जो दोनों के िीच वििाि को अनजु ्ञा प्रदान करती िै। [पक्षकारों के िीच यथाित नातदे ारी दी
जानी चाहिए]

या
पक्षकारगर् प्रत्यके दसू रे के सवपण्ि िैं और उनमें से प्रत्यके को शालसत करने िाली कोई रूहद प्रथा निीं िै
जो दो के िीच एक वििाि को अनजु ्ञा प्रदान करती िै। [ पक्षकारों के बीच यथाित नातदे ारी विननहदणष्ट की
जानी चाहिए।]

(उपयकुण ्त आिारों मंे से एक या अधिक का अलभिचन ककया जा सके गा और जो भाग निीं लागू िोते िंै उन्िें
िािर धगना जाना चाहिए। म्जन तथ्यों पर अनतु ोष को आिाररत िनाया जाता िै उनका वििरर् िसै े पथृ क
तौर पर हदया जाना चादहए जैसे मामिे की प्रकृ नत अनजु ्ञा प्रिान करती हो। वैवादहक आरोपों को उनके अलभकथित

काररत ककये जाने के समयों एवम ् थिानो के साि पिृ क पैरा में उपवखणतण ककया जाना चादहए।

5. याथचका िाखखि करने में कोई भी अनावश्यक या अनथु चत पविम्ब नहीं हुआ है।
6. इसका कोई अन्य पवथधक आधार नहीं है कक अनुतोष क्यों नहीं मंजर ककया जाना चादहए।
7. ककसी पिकार द्वारा या उसकी ओर से पववाह के बारे मंे कोई भी पवण कायवण ाही नहीं हुई है।

या

पक्षकारों द्िारा या उनकी ओर से वििाह के बारे में ननम्नललखखत पिू िथ ती कायिथ ाहहयााँ हुई है -

क्र.स.ं पिकारों के नाम अथधननयम की धारा मामिे की स.ं न्यायािय का नाम एवं पररणाम

के साि कायवण ाही एवं तारीख अवस्थित

की प्रकृ नत तिा वषण

1

2

3

4

8. पववाह का अनषु ्ठापन ककया गया। पिकारगण इस न्यायािय की आरस्म्भक लसपवि अथधकाररता के अन्िर
................... में रहते ह।ैं अनं तम बार साि-साि रहते िे।

9. अतएव, याची प्रािनण ा करता है कक पिकारों के बीच अनषु ्ठापपत ककये गये पववाह के अकृ त एवम ् शन्य होने
के कारण एक अकृ तता की डिक्री द्वारा न्यायािय इस प्रकार घोपषत ककया जाय।

याची

सत्यापन

ऊपर नालमत ककया गया याची सत्यननष्ठ प्रनतज्ञान पर पववरण किन करता है कक याथचका के पैरा ......................
िगायत ................... याची की सवोत्तम सचना एवम ् पवश्वास मंे सत्य है।

...................... में इस तारीख .................... को सत्यापपत ककया गया।

थिान: याची

वववाि ववच्छे द की अिमु नत िेतु धारा 14 ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 के अन्तर्तव
याचिका

(Petition u/sec. 14 of the Hindu Marriage Act, 1955 for leave to dissolution of Marriage)

न्यायालय.............

अ० ि० स० ............ बिाम िादी
स०द०फ० ............ प्रनतिादी

श्रीमान जी,
याची सविनय ननबन प्रकार ननिदे न करता िै

1. यि कक याची का वििाि उत्तरदाता के साथ हिन्दू रीनत ररिाज के साथ हदनाकं ............ को िुआ था। तभी
से याची ि उत्तरदाता ............ स्थानों पर पनत पम्त्न के रूप में रहे िे ।

2. यि कक वििाि के ............ हदन/माि के अन्दर िी उत्तरदाता ने याची के साथ क्रू रता का व्यििार आरबभ
कर हदया अथिा उत्तरदाता का श्री ............ पतु ्र श्री ............ ननिासी ............. से जारकमण का सबिन्ि
ज्ञात िुआ ----सबपरू ्ण वििरर् सलं ग्न वििाि विच्छेद की याधचका में िर्र्तण िै।

3. यि कक याची का प्रकरर् याची के ललए अपिादजनक कष्ट का उत्तरदाता की ओर से अपिादजनक िदचलनी
का िन गया िै और याची का जीिन नकण िन गया िै- सबपरू ्ण तथ्य सलं ग्न वििाि विच्छेद की याधचका मंे
िर्र्तण िै म्जसके प्रस्ततु करने िेतु वििाि के एक िषण की प्रतीक्षा करने में कोई भी अवप्रय घटना घहटत िो

सकती िै। उक्त िर्र्तण पररम्स्थनतयों मंे वििाि के एक िषण परू ्ण िोने से पिू ण िी वििाि विच्छे द की याधचका
प्रस्ततु करने िेतु न्याय हित में अनमु नत हदया जाना परमािश्यक िै।

अत: प्राथनण ा िै कक मान्य न्यायालय उपरोक्त िर्र्तण पररम्स्थनतयों मंे वििाि के एक िषण व्यतीत िोने से पिू ण िी वििाि
विच्छे द की याधचका प्रस्ततु करने की अनमु नत प्रदान करके सलं ग्न याधचका ििर् करने की कृ पा करे...

.......................यािी
.............शिाख्त अचधवक्ता

सत्यापि
आज हदनाँाक ............ को ............ स्थान पर सत्यावपत ककया जाता िै कक प्राथनण ा पत्र के प्रस्तर 1 लगायत 3 के तथ्य
मेरे व्यम्क्तगत ज्ञान में सत्य िै-कु छ नछपाया निीं गया िै-कु छ असत्य निी िै।

.......................यािी
.............शिाख्त अचधवक्ता

ठिन्दू वववाि अचधनियम 1955 की धारा 13 संशोचधत वववाि ववचध (सशं ोचधत) अचधनियम,
1976 के अन्तर्तव तलाक की डििी के आधार पर वववाि ववच्छे द िेतु याचिका

(Petition for dissolution of Marriage by a decree of divorce u/sec. 13 of Hindu Marriage Act,
1955, As Amended by Marriage Laws (Amendment) Act, 1976)

न्यायालय ............
हिन्दू वििाि अधिननयम के तित के स निं र ............ मंे और ननबन मामले में

अ० ि० स० ............. बिाम िादी
स० द० फ० ............. प्रनतिादी

श्रीमान जी,
याची ननबन प्रकार सविनय ननिदन करता िै :

1. यि कक याची और उत्तरदाता के मध्य वििाि हिन्दू रीनत ररिाज के अनसु ार हदल्ली मंे हदनाकं ..... को सबपन्न िुआ
था। । (इस सबिन्ि मंे शपथपत्र सलं ग्न ककया जाता िै )

2. यि कक याची और उत्तरदाता हदनांक ............ को हिन्दू िमण से सबिन्ि रखते थे और दोनों पक्षकार इस याधचका के
िारा 13 (1) (ia) हिन्दू वििाि अधिननयम, 1955 सशं ोधित अधिननयम, 1976 के तित दायर करने तक हिन्दू िमण का
पालन करते रिे थ।े

3. यि कक इस याधचका से सबिम्न्ित पक्षकारों की िैलसयत और ननिास स्थान वििाि पिू ण और इस याधचका के दायर
करने के समय ननबन प्रकार दी जा रिी िै

िैलसयत पनत पत्िी ननिास स्थान
आयु ननिास स्थान िैलसयत आयु

4. यि कक वििाि सबपन्न िो जाने के िाद इस याधचका के पक्षकार साथ-साथ रिे थे और पनत पला के रूप में सििास
भी ककया था म्जसके फलस्िरूप हदनांक ......... को एक लडकी का जन्म िुआ था।

5. यि कक पक्षकार अपने वििाि िाले घर मंे ............ माि के ललए प्रसन्नता पिू कण रिते रि । परन्तु दो मिीने िाद
उत्तरदाता द्िारा परेशानी प्रारबभ की गई और याची के जीिन को भर िनाना शरु ू कर हदया। उत्तरदाता द्िारा याची का
किना मानना िन्द कर हदया और खाना िनाना पर नाश्ता तयै ार करना भी याची और उसके पररिार के िास्ते मनाकर
हदया। याची ने इस िदले िुए व्यििार का कारर् उत्तरदाता से पछू ना चािा तो उत्तरिाता ने उससे िचना चािा और
अधिक अनशु ासनिीनता और उपद्रि करना शरू कर हदया।

याची द्िारा शादी के 21 माि िाद पनु : उत्तरदाता से उसकी िरदाश्त न िोने िाले कक्रया कलाप के िारे मंे पछू ा तो उत्तरदाता
द्िारा याची को िताया गया कक िि याची के माता-वपता से अलग रिना चािती िै। याची द्िारा उसकी इस इच्छा को
परू ्ण करने मंे अपनी अयोग्यता और िेिसी िताई और किा चँाकू क उसके माता-वपता ििुत िदृ ्ि िैं और इस िदृ ्िािस्था
में उसकी उन्िंे अनत आिश्यकता िै। इससे भी अधिक याची द्िारा यि भी किा गया कक िि अपने माता-वपता को निीं
छोड सकता। उत्तरदाता इसी िात पर अडी रिी कक उसने याची की पररम्स्थनत से कभी भी समझौता निीं ककया था।

6. यि कक कु छ समय िाद तक उत्तरदाता चुप रिी क्योंकक उसके माँा िनने के धचह्न तजे ी से ङ्के मर रिे थे। सोचा कक
िच्चे के जन्म फे उपरान्त उत्तरदाता को अपनी माता का आमासस िोगा और िि अपने आपको याची की पररम्स्थनतयों
के साथ समझौता करने का प्रयास करेगी परन्तु उत्तरदाता गल्ती पर थी। िच्चे की पदै ाइश के िाद उसकी
अनशु ासनिीनता की गनतविधियााँ जारी रिी।ं कु छ हदन िाद उसने याची से किा कक िि अपने माता-वपता के घर जाना
चािती िै। यिाँा यि िताना भी प्रासधं गक िोगा कक उसका अपने माता-वपता के घर अक्सर जाना िोता था। हदनाकं
............ को याची द्िारा उसे जाने की स्िीकृ नत दे दी गई । िि अपने माता वपता के घर चली गई और उसी हदन सायं
को उसने याची से ितलाया कक उसने ............. स्थान पर नौकरी कर ली िै और िि उसे िी करेगी। याची ने उससे किा
कक नौकरी करना इतना आिश्यक निीं उसे अपने मम्स्तष्क को घरेलू काम काज मंे लगाना चाहिये और उसे अपने
ििै ाहिक कत्तवण ्यों का ननििण न करना चाहिये क्योंकक िि भी अपने ििै ाहिक कतवण ्यों का पालन कर रिा था। यि सनु कर
उसने याची का अपमान ककया और भद्दी भाषा का प्रयोग ककया और याची के माता-वपता ि ररश्तदे ारों के सामने िी
याची को िरु ा भला किा । याची ने नतरस्कार मिससू ककया और िाद में उसे लगा कक उसके सगे सबिम्न्ियों द्िारा
उसकी िंसी उडाई जानी प्रारबभ कर दी गई िै। याची द्िारा पनु : उत्तरदाता से पछू ा गया कक उसकी क्या इच्छा िै ? उसने

अपनी साफ िरन मक्कारी की भाषा मंे याची से किा कक िि उसको िदनाम करना और िइे ज्जत करना जारी रखगे ी
यहद याची उसे नौकरी निीं करने देगा और यहद िि अपने माता-वपता से अलग निीं रिेगा। उत्तरदाता याची और उसके
माता वपता की इच्छा के विरुद्ि उसके वपता का घर छोडकर चली गई और नये मकान न०ं ............ मंे रिना प्रारबभ
कर हदया िै। यिाँा यि किना भी प्रासधं गक िै कक इस मकान क प्रिन्ि उसके माता-वपता द्िारा ककराये पर ककया गया
िै जो कक उसी िस्ती में िै।

7. यि कक. में उत्तरदाता अधिक स्िततं ्र और स्िच्छन्द िो गई और कभी भी सामान्य गिृ र्ी निी िन सकी। िि अपने
िच्चे को अपने माता-वपता के घर हदन के समय छोड देती थी। कु छ हदनों के िाद याची को पता चला कक िास्ति में
उत्तरदाता ने एक ब्यटी पालरण मंे नौकरी करना शरु ू कर हदया िै न कक ............ िोटल मंे । इससे पिू ण याची अपनी पत्नी
पर विश्िास करता था और कभी भी उसकी जाचँा पडताल निीं की थी परन्तु कु छ समय के पश्चात याची को ज्ञात िुआ
कक......ब्यटू ी पालरण एक गन्दे, गरै काननू ी और अमानिीय घन्िों का के न्द्र िै जो कक ब्यटू ा पालर की आि मंे चल रिा
िै। याची ने उससे इस िन्िे को छोिने को किा िकाँ क यि सबमानजनक महिलाओं और लडककयों का कायण निीं था उस
हदन से उत्तरदाता द्िारा िि कायण छोडने से इन्कार तो निीं ककया िम्ल्क राबत्र में विलबि से 9 से 11 िजे के मध्य आना
शरू कर हदया। इससे याचा ओर िर गया। हदनांक ............ को िि याची के घर के सामने चार पाचाँ व्यम्क्तयों द्िारा
ििे ोशी और नशे की िालत में छोडी गई थी जो उसे सफे द रंग की मारूती कार स०ं ........... में लेकर आये थ।े टोकने पर
उत्तरदाता ने उपम्स्थत पडौलसयों के सामने याची को गन्दी गाललयााँ दी और अमादा फौजदारी िो गई.--पिू ण की भाँानत
उत्तरदाता के उक्त क्रू र तथा अभद्र व्यििार से याची की ििुत िदनामी िुई थी। इसके कारर् िी याची द्िारा उसे अपने
माता-वपता के घर जाने से मना ककया गया क्योंकक याची को समय पर खाना नाश्ता तक निीं लमल रिा था। यानी को
अि पक्का विश्िास िो गया िै कक िि असामाम्जक और गरै काननू ी िन्िा करने िाले लोगों के िाथों में पड चकु ी िै।

8. यि कक िर प्रकार का प्रयास करने के िाद याची उत्तरदाता के वपता से लमला परन्तु उत्तरदाता ने अपने वपता से िी
झगडना चालू कर हदया और िि अपना सारा सामान ............ में एक अलग मकान में उठा ले गई म्जसमें उसने याची
से अलग रिने की ठान ली थी। िचे ारा वपता कु छ निीं कर सका और अपने आपको अपमाननत मिससू करने लगा।

9. यि कक हदनाकं ............. को उत्तरदाता ने याची से उसके घर पर सबपकण ककया और आपसी सिमनत से तलाक लेने
को किा और याची को िताया गया कक िि ऐसा अिश्य करेगी और उसने इस पर काफी दिाि हदया और याची तथा
उत्तरदाता द्िारा आपसी सिमनत के आिार पर शपथ पत्र सहित म्जला जज हदल्ली के न्यायालय में तलाक का के स
दायर कर हदया जो ............. न्यायालय मंे स्थानान्तररत कर हदया गया था। मान्य न्यायािीश द्िारा पक्षकारों के
ब्यानात दजण करने िेतु हदनांक ............ ननयत की गई थी परन्तु उत्तरदाता अपना ब्यान दजण कराने िेतु उपम्स्थत निीं
िुई म्जसके कारर् आपसी सिमनत की याधचका खाररज िो गई-अगले हदन अथाणत हदनाकँा ............ को उत्तरदाता से
पछू ताछ की तो पडोलसयों के सामने उसने याची के साथ मारपीट की और िमकी दी कक िि याची को िरिाद करके दम
लेगी-याची ि उत्तरदाता के मध्य वििाि के सबिन्ि भविष्य मंे चलने योग्य निीं िै।

10. यि कक याची द्िारा उत्तरदाता के क्रू रता के व्यििार को ककसी रूप में भी क्षमा निीं ककया गया िै।

11. यि कक याधचका समय अिधि के अन्दर िी दायर कर दी गई थी और इस याधचका के दायरे में कोई अनािश्यक और
अनधु चत विलबि निीं ककया गया।

12. यि कक कोई ऐसा कारर् अथिा आिार निीं िै जो कक काननू ी रूप से मागँा े गये अन्तोष के हदये जाने में िािा उत्पन्न
करे।

13. यि कक ितमण ान याधचका दरु लभ सधं ि एिं मौनानमु नत के आिार पर प्रस्ततु और दायर निीं की गई िै।

14. यि कक िाद के कारर् याची ि उत्तरदाता के वििाि सबपन्न िोने के हदन से िाद पत्र मंे िर्र्तण उसके क्रू रता की
हदनाँका ों को और अम्न्तम िार मारपीट करने की हदनाकँा ............को माननीय न्यायालय के क्षते ्राधिकार मंे उत्पन्न िुआ
और माननीय न्यायालय को याधचका के श्रिर् का क्षेत्राधिकार प्रासत िै।

15. यि कक दोनों पक्षकारों के हदल्ली मंे ननिास करने के कारर् हदल्ली न्यायालय को िी क्षते ्राधिकार प्रासत िै।

16. यि कक याधचका पर विधि के अनसु ार न्याय शलु ्क भगु तान ककया जाता िै।

प्राथिव ा:

इसललए सविनय प्राथनण ा की जाती िै कक याची और उत्तरिाता के मध्य पववाह को पवघदटत करते िए तलाक की डिक्री
पाररत की जाये जो कक उत्तरदाता के द्िारा क्रू रता के व्यििार पर याची के हित में आिाररत िो जैसा कक न्याय हित मंे
काननू में प्राििान िै।
अन्य कोई अनतु ोष अथिा आदेश जो भी यि मान्य न्यायालय उपयकु ्त और उधचत माने पाररत करे।

(यािी) ............
द्वारा अचधवक्ता............
स्थाि ............ ठदिांक.........

सत्यापि

उपरोक्त याची प्रनतज्ञापिू कण कथन करता िै कक परै ा 1 से 13 तक, याधचका में याची के व्यम्क्तगत ज्ञान में सत्य िै
जिकक परै ा 14 से 16 तक विधिक परामशण के आिार पर तथा विश्िास में सत्य िं।ै अम्न्तम परै ा मान्य न्यायालय से
प्राथनण ा के रूप मंे िै।
सत्यावपत-हदनाकं ............ हदन ............ स्थान ............ (याची)

शपथपत्र

(Affidavit)

न्यायालय ……….
सन्दभण मे

अ०ि०स० ............ बिाम िादी
स०द०फ० ............. प्रनतिादी

शपथपत्र ओर से ............ पतु ्र ............. नन०……….

उपरोक्त शपथकताण प्रनतज्ञापिू कण ननबन प्रकार कथन करता िै :

1. यि कक याची और उत्तरदाता के मध्य वििाि हिन्द रीनत ररिाज के साथ हदनाक ...... को ............ मंे सबपन्न िुआ
था।
2. यि कक शपथकताण द्िारा ककसी प्रकार भी करता को क्षमा निीं ककया गया िै।
3. यि कक ितमण ान याधचका उत्तरदाता के साथ ककसी लमली भगत के आिार पर प्रस्ततु ार अलभयोम्जत निी की गई िै।
4. यि कक िादपत्र के प्रस्तर 1 लगायत 13 व्यम्क्तगत जान पर ि शषे विधिक परामशर सत्य िै म्जसके सत्य िोने का
उसे विश्िास िै।

........ शपथकताव

सत्यापि
सत्यावपत-स्थान ............. हदनांक ............. हदन ......
यि सत्यावपत ककया जाता िै कक शपथपत्र के परै ा 1 से 4 तक का कथन मेरी व्यम्क्तगत जानकार मंे सत्य ि।ैं कोई
तथ्य नछपाया निीं गया िै और न कल झठ िै।

................(शपथकताव)

हहन्दू वववाि अचधनियम की धारा 13- ि (2) के अधीि दसू रा प्रस्ताव प्रस्ततु करिे के सलए छः मिीिे की
कालावचध को दोषमार्जतव करिे उसका अचधत्यजि करिे के सलए धारा 151 सस. प्र. स.ं के अधीि आवेदिपत्र

न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............

के मामले मंे: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

आज की तारीख तक यथा सशं ोधित हिन्दू वििाि अधिननयम की िारा 13- ख (2) के अिीन दसू रे प्रस्ताि को
प्रस्ततु करने िेतु छः मिीने की कालािधि को दोषमाम्जतण करने। उसका अधित्यजन करने के ललए िारा 151 लस. प्र.
स.ं के अिीन आिेदनपत्र

अनत सादर पिू कण प्रदलशतण करता िै

1. यि कक याची ने आज की तारीख तक यथा सशं ोधित हिन्दू वििाि अधिननयम की िारा 13-ख (i) के अिीन
एक याधचका दार्खल की िै।

2. यि कक कधथत अधिननयम की िारा 13(1) (i क) के अिीन याची स.ं 1 द्िारा दार्खल की गयी पिू तण ्तर
याधचका तारीख ................... को दार्खल की गयी जो अि हिन्दू वििाि अधिननयम की िारा 13 (ख) (1)
के अिीन एक याधचका मंे माननीय उच्च न्यायालय की अनजु ्ञा से सबपररिनततण एिम ् सशं ोधित की जा
चकु ी िै।

3. यि कक .................... के पश्चात दोनों याची पथृ क-पथृ क रि रिे िंै और भविष्य उनके द्िारा पनु ः साथ-
साथ रिने ि पनु मण ेल लमलाप का कोई अिसर निीं िै।

4. यि कक तथ्यों एिम पररम्स्थनतयों को ध्यान मंे रखते िुए कक पनु लण मलन का कोई तर निीं िै और यि पक्षकारों
ने .................. से कोई सििास निीं ककया िै इसललए कोई उपयोगी उद्देश्य उनके वििाि का विघटन कर
पारम्स्पररक सिमनत द्िारा वििाि विच्छे द एक अनं तम डिक्री पाररत करने के प्रयोजनाथण छ: मिीने की एक
दसू री कालािधि की प्रतीक्षा करने के प्रयोजन को परू ा ककया जायगे ा। इसमें इसके ऊपर िर्र्तण तथ्यों एिम ्
पररम्स्थनतयों को रखते िुए यि अतएि अनतसादरपिू कण प्राथनण ा की जाती िै कक न्याय हित मंे समीचीनता
मंे दहन्ि वििाि अधिननयम की िारा 13- ख (2) के अिीन यथापेक्षक्षत छः मिीने की कालािधि को छोड़
हदया जाय और दोष मम्जतण करता िै।

याची स.ं 1
याची स.ं 2
जररये अधििक्ता

स्थान:

तारीख :

आिदे नपत्र के समर्नथ में शपर्पत्र

न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............

के मामले मंे: ............

अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2

शपर्पत्र

मंै .....................पतु ्र श्री ................ ननवासी ..................... ननम्नलिखखत रूप में एतिद्वारा सत्यननष्ठा से यह प्रनतज्ञान

एवम ् घोषणा करती हँू

1. यह कक मंै ऊपर नोट ककये गये मामिे में याची सं. 1 हँू और मामिे के तथ्यों एवम ् पररस्थिनतयों से पणतण या पररथचत

है।

2. यह कक द्पवतीय प्रथताव याथचका को िाखखि करने के लिए छः महीने की कािावथध का अथधत्यजन करने िोषमाजनण
करने हेतु धारा 151 लस. प्र. स.ं के अधीन साि दिये जा रहे आविे नपत्र की अन्तवथण तुएं स्जसका प्ररूप मेरे ननिेश के

अधीन मेरे अथधवक्ता द्वारा बनाया गया है स्जसकी अन्तवथण तओु ं को इस शपिपत्र के भाग एवम ् पासिण के रूप मंे

पढा जा सके गा, सिं पे के लिए इसमंे पनु ः पेश नहीं ककया जा रहा है।

शपिकताण

सत्यापन

यह ..................... में तारीख ..................... को सत्यापपत ककया गया कक मेरे ऊपर शपिपत्र की अनं ्तवथण तएु सत्य

एवम ् सही है और इसका कोई भी भाग लमथ्या नहीं है और न ही उससे कोई भी बात नछपायी गयी है।

शपिकताण


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