आिेदनपत्र के समर्नथ में शपर्पत्र
न्यायालय ............
इनरी ............. हि. वि. अधि. िाद स.ं ............
के मामले में: ............
अबक (िर्नण एिम ्पता को जोड)े बनाम ............याची स.ं 1
कखग (िर्नण एिम ्पता को जोड)े ............याची स.ं 2
शपर्पत्र
मंै .....................पत्नी................ ननवासी ..................... ननम्नलिखखत रूप मंे एतिद्वारा सत्यननष्ठा से यह प्रनतज्ञान
एवम ् घोषणा करती हँू
1. यह कक मैं ऊपर नोट ककये गये मामिे में याची सं. 2 हूँ और मामिे के तथ्यों एवम ् पररस्थिनतयों से पणतण या पररथचत
है।
2. यह कक द्पवतीय प्रथताव याथचका को िाखखि करने के लिए छः महीने की कािावथध का अथधत्यजन करने िोषमाजनण
करने हेतु धारा 151 लस. प्र. सं. के अधीन साि दिये जा रहे आविे नपत्र की अन्तवथण तुएं स्जसका प्ररूप मेरे ननिेश के
अधीन मेरे अथधवक्ता द्वारा बनाया गया है स्जसकी अन्तवथण तुओं को इस शपिपत्र के भाग एवम ् पासिण के रूप में
पढा जा सके गा, सिं पे के लिए इसमंे पनु ः पेश नहीं ककया जा रहा है।
शपिकताण
सत्यापन
यह ..................... में तारीख ..................... को सत्यापपत ककया गया कक मेरे ऊपर शपिपत्र की अनं ्तवथण तुए सत्य
एवम ् सही है और इसका कोई भी भाग लमथ्या नहीं है और न ही उससे कोई भी बात नछपायी गयी है।
शपिकताण
(MATRIMONIAL LAW)
ठिन्दू ववववाि अचधनियम, 1955
(Hindu Marriage Act, 1955)
ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 की धारा 9 के अन्तर्तव दाम्पत्य अचधकारों की
पिु सव ्थापिा िेतु याचिका
(Petition for Restitution of Conjugal rights u/sec. 9 of the Hindu Marriage Act, 1955)
न्यायालय .........
अ०ि० स० ............ बिाम पेहटशनर
स००ि फ० ............ उत्तरदाता
श्रीमान जी,
उपरोक्त नालमत पहे टशनर ननबन प्रकार सविनय ननिेदन करता िै :
1. यि कक उत्तरदाता (रेस्पोंिने ्ट) के साथ पेहटशनर का वििाि हदनाकं ............ को ....... मंे इस मान्य
न्यायालय के कायण क्षते ्र मंे हिन्दू रीनत ररिाज के साथ सबपन्न िुआ था।
2. यि कक पहे टशनर और उत्तरदाता उसकी पम्त्न विगत में ........... मंे साथ-साथ रिते थ।े
3. यि कक हदनाकं ............. को उत्तरदाता उसकी पत्नी ............. में अपने वपता के घर गई था। उसने एक
माि के भीतर िावपस आने का िायदा ककया था परन्तु िि अभी तक िावपस निीं आई।
4. यि कक पहे टशनर अपने ससरु के घर ............. में हदनाकं . .......... को अपनी पत्नी को लान गया था
परन्तु उसने अकारर् एक के िाद एक ििाना िनाकर घर आने से मना कर हदया।
5. यि कक उत्तरदाता (पत्नी) द्िारा पेहटशनर को छोड हदया िै और बिना ककसी जायज और पायक कारर् के
उसने अपने आप को पेहटशनर के साथ रिने से पथृ क कर ललया िै । म्जसमें याची न तो सिायक िै और न
िी उसका कोई और या अपगं ता िै।
6. यि कक उत्तरदाता (पत्नी) के विरुद्ि पेहटशनर को िाद का िेतकु (cause of action) ति िुआ जि
उत्तरदाता अपने वपता के घर गई थी और िि ति तक जारी रिेगा जि तक उत्तरदाता
पहटशनर के घर िावपस निीं आ जाती !
7. यि कक िाद का मलू ्याकं न क्षते ्राधिकार िास्ते रु० ............ िै म्जस पर रु० .......... न्याय शलु ्क का
भगु तान कर हदया गया िै।
प्राथिव ा:
इसीलए सविनय ननबन प्रकार ननिदे न ककया जाता िै :
(क) यह कक दाबपत्य अधिकारों के पनु सण ्थापन की डिक्री पहे टशनर (याची) के हित में और उत्तरदाता के विरुद्ि
पाररत की जाये।
(ख) अन्य कोई अन्तोष जो कक मान्य न्यायालय उधचत और पयासण त समझे और जो के स की पररम्स्थनतयों मंे
उधचत िो पहे टशनर के हित में पाररत ककया जाय।े
..... (पठे टशिर)
सत्यापि
मंै कक उपरोक्त नालमत पहे टशनर यि सत्यावपत करता िूाँ कक याधचका के परै ा ............ से .. तक के तथ्य मेरी
ननजी जानकारी मंे सत्य िैं और परै ा ............ से ............ तक काननू ी सलाि पर आिाररत िैं जो मेरे विश्िास मंे
सत्य ि।ंै
िस्ताक्षररत और सत्यावपत ठदिाकं ............ ठदि ............ स्थाि .............
,,,,,,(पठे टशिर)
िोट-याधचका में ननबनाकं कत वििरर् हदया जाना चाहिय।े
(क) वििाि की हदनांक
(ख) वििाि के समय पक्षकारों की आयु
(ग) वििाि के िाद ककतनी अिधि तक पक्षकार साथ साथ रिे
(घ) साथ साथ ना रिने के कारर्।
(च) साथ साथ रिने के ललए की गई मागँा का वििरर् ।
ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 की धारा 10 के अन्तर्तव न्यायनयक ववयोजि िेतु याचिका
(Petition u/sec. 10 of Hindu Marriage Act, 1955 for Judicial Separation)
न्यायालय………..
िाद निं र............ सन ्..
अ० ि० स० ............ बिाम याची/पहे टशनर
स० द० फ० ............ उत्तरदाता
श्रीमान जी,
याची ननबन प्रकार सविनय ननिदे न करता िै :
1. यि कक याची का वििाि उत्तरदाता के साथ हदनांक ............ को ............ मंे इस मान्य न्यायालय के कायकण ्षते ्र
में िुआ था। वििाि हिन्दू रीनत ररिाज के अनसु ार सबपन्न िुआ था।
2. यि कक विगत में याची और उत्तरदाता ............. मंे साथ-साथ रिते थ।े
3. यि कक वििाि के समय से िी उत्तरदाता का याची के साथ कृ रता का व्यििार रिा िै । (कृ रता के तथ्यों का
िर्नण करंे)
अथवा
उत्तरदाता जार कमण मंे ललसत िै | (जार कमण के तथ्यों का िर्नण करें)
अथवा
अन्य कोई आिार (उसका िर्नण करें)
उपरोक्त कारर्ों से याची का जीिन नकण िन गया िै । याची ि उत्तरदाता का एक साथ रिना असबभि िो
गया िै।
4. यि कक उत्तरदाता की क्रू रता/जारकमण में याची न तो सिायक िै, न िी उसकी कोई मौनानमु नत िै और न िी
उत्तरदाता के कृ त्यों को क्षमा ककया गया िै—याची एिं उत्तरदाता के मध्य न तो दरु लभ सधं ि िै और न िी कोई
मौनानमु नत िै ।
5. यि कक मान्य न्यायालय के ललए कोई काननू ी आिार न्यानयक वियोजन को अस्िीकार करने
का निीं िै।
6. यि कक याची को उत्तरदाता के विरुद्ि िाद का िेतकु इस मान्य न्यायालय के कायण क्षेत्र में नाक ............
को ति उत्पन्न िआ जि......... ।
7. यि कक कायण क्षेत्र के उद्देश्य से याधचका का मलू ्यांकन रु० ........ न्याय शलु ्क भगु तान की गई िै।
प्राथिव ा
इसललए यि सविनय प्राथनण ा की जाती िै कक याची के हित मंे और उत्तरदाता के विरुद्ि न्यानयक वियोजन
की डिक्री पाररत की जाये । और िाद व्यय हदलाया जाये।
............. (यािी)
........शिाख्त अचधवक्ता
सत्यापि
मैं कक उपरोक्त नालमत याची यि सत्यावपत करता िूाँ कक परै ा ............ से ............ तक के तथ्य मेरे
ननजी ज्ञान में सत्य िंै और परै ा ............ से ............ तक विधिक परामशण ि मेरे विश्िास में सत्य िैं।
ठदिांक ............ ठदि ............ स्थाि .......
.........(यािी)
............शिाख्त अचधवक्ता
ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 की धारा 11 के अन्तर्तव वववाि निरसि
(Annulment) के सलए याचिका
(Petition u/sec. 11 of the Hindu Marriage Act, 1955 for annulment of Marriage)
न्यायालय ............
याधचका निं र ............ सन ्.............
अ०ि०स० ............ बिाम िादी
स०ि० फ० ............ प्रनतिादी
श्रीमान जी,
उपरोक्त याची ननबन प्रकार सविनय ननिदे न करता िै :
1. यि कक हदनाकं ............ को याची का वििाि उत्तरदाता/प्रनतिादी से ............ था। हिन्दू विधि, रीनत ररिाज
के अनसु ार वििाि सबपन्न िुआ था।
2. यि कक याची वििाि के पश्चात ् उत्तरदाता के साथ विलभन्न स्थानों ............ पर रिा था।
3. यि कक याची को ज्ञात िुआ िै कक वििाि के समय उत्तरदाता के दसू रा/दसू री जीवित पनत/पत्नी श्री ............
पतु ्र/श्री ............ ननिासी ............ अथिा उत्तरदाता याची के प्रनतिम्न्ित सबिम्न्ियों मंे से िै अथिा
उत्तरदाता याची को सवपिा िै।
तथ्यों का वििरर् अकं कत करें।
4. यि कक पक्षकार हिन्दू िै और याची और उत्तरदाता के मध्य वििाि विशषे वििाि अधिननयम के अन्तगतण
निीं िुआ था।
5. यि कक वििाि ननरसन का दािा करने िाले पक्षकारों के मध्य कोई दरु लभ सधं ि अथिा मोन सिमनत निीं िै।
6. यि कक इस याधचका के दायर करने में कोई विलबि निीं िुआ िै । (यहद विलबि िुआ िो तो स्पष्टीकरर्
हदया जाय)े ।
प्राथिव ा
इसललए यि प्राथनण ा की जाती िै कक इस मान्य न्यायालय द्िारा यि घोवषत ककया जाये कक उपरोक्त वििाि व्यथण और
शुन्य िै।
.........(यािी)
.........शिाख्न अचधवक्ता
सत्यापि
मै की ...... याची सत्यावपत करता िूँा कक याधचका के परै ा. से क तथ्य मेरी ननजी जानकारी में सत्य िैं और ............ से
............. तक के तथ्य विधिक परामशण ि मेरे विश्िास मंे सत्य िैं।
सत्यावपत - हदनाकं ............ हदन ......थिान..........
.........(यािी)
.........शिाख्न अचधवक्ता
ठिन्दू वववाि अचधनियम, 1955 की धारा 13 के अन्तर्तव वववाि ववच्छे दि िेतु
याचिका
(Petition u/'sec. 13 of the Hindu Marriage Act, 1955 for a decree of divorce)
न्यायालय..........
िाद निं र ............ सन ्...
अ०ि०स० ............. बनाम िादी
स०ि० फ० ............ प्रनतिादी
श्रीमान जी,
उपरोक्त याची ननबन प्रकार सविनय ननिेदन करता िै :
1. यि कक याची का वििाि उत्तरदाता से हिन्दू रीनत ररिाज के अनसु ार हदनाकं ........... मंे िुआ था।
2. यि कक............. में याची और उत्तरदाता पनत/पत्नी के रूप मंे रिे थ।े
3. यिााँ पर वििाि विच्छे दन (तलाक) स्पष्ट के आिार दजण करंे।
4. यि कक वििाि के तीन िषण िाद यि याधचका दायर की जा रिी िै म्जसमंे कोई विलबि निीं िुआ िै। यहद
विलबि िुआ िो तो स्पष्टीकरर् हदया जाये।
5. यि कक याची और उत्तरदाता के मध्य कोई दरु लभ सम्न्ि अथिा मौन सिमनत निीं िै और प्रनतिादी के कृ त्यों
की कोई क्षमा याचना भी निीं िुई िै। और न िी याची ककसी प्रकार से उसके कृ त्यों मंे सिायक िै।
6. यि कक इस मान्य न्यायालय के सबमखु कोई न्यानयक आिार अन्तोष और तलाक का डिक्री पाररत करने
से इन्कार करने का निीं िै।
7. यि कक िाद का िेतकु हदनांक ............. को इस मान्य न्यायालय के क्षते ्राधिकार में ति उत्पन्न िुआ जि
हदनाकं ........... (िाद िेतकु के आिारों का िर्नण करंे।
8. यि कक याधचका का मलू ्याकं न न्याय क्षते ्र के िास्ते रु० ..... न्याय शलु ्क भगु तान की गई िै।
.............. िै म्जस पर रु० अत: सविनय प्राथनण ा िै कक वििाि विच्छे दन की डिक्री याची के हित मंे पाररत की जाये।
.........(यािी)
............शिाख्न अचधवक्ता
सत्यापि
आज हदनांक ............ को स्थान ........... पर सत्यावपत ककया जाता िै कक याधचका के प्रस्तर ......... लगायतः ..........
मरे े व्यम्क्तगत ज्ञान में सत्य िैं और प्रस्तर ....... लगायत....... व्यस्क्तगत परामशण पर िै म्जसे सत्य िोने का मैं विश्िास
करता िूँा ........
.............. यािी
.............शिाख्न अचधवक्ता
िोट - .......... जारकमण के आिार पर याधचका में उस व्यम्क्त को पक्षकार िनाया जाये जा उत्तरदाता के साथ
जारकमण मंे ललसत िै ।।