काव्यार्घयय: ‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच पर प्रकाशित भजतत की रचनाओं का साझा काव्य संग्रह प्रकािन ददवस: 07 शसतम्बर 2024
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 1 संपादकीय सादहजययक और सामाजिक गततववधियों में मंच ‘लम्हे जिन्दगी के’ सतत शलप्त है| इसी क्रम में दैतनक ववषयो पर कववता लेखन इस मंच की मख् ु य गततववधि है| मंच पर क ु छ ववषय ददए िाते है जिसपर रचनाए साझा की िाती है| इन रचनाओं में भजतत के पदों का महत्त्वपर् ू य स्थान है| मााँ िारदे का वंदन मंच की एक अमल् ू य उपलजधि है| साथ ही सोलह कलाओं सेयत ुत भगवान श्री क ृ ष्र् की अरािना के पद भी इस मंच पर लगातार साझा होते आए है| मंच द्वारा इन भजतत के पदों को पस्ुतकाकार रूप में साकार करनेका प्रयास आपके सामने प्रस्ततु है| इस संकलन मेंएक तरफ तो कववयों को प्रोयसादहत करने का प्रयास है तो दसू री तरफ ईश्वर का आिीष भी इसमें सजन्नदहत है| इस पस्ुतक की
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 2 संपादकीय शलखते हु ए मै असीम संतु जष्ि और गौरव का अनभ ु व कर रहा हू ाँ| ‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की संस्थावपका डॉ पि ू ा भारद्वाि िी ने इसका मख् ु य पष् ृठ तनमार्य ककया है और ये पस्ुतक दहन्दी प्रशेमयों को एक स्वस्थ पठन सामग्री प्रदान करेगी| मााँ िारदेकल्यार् करे| िन्यवाद| डॉ दहमांि ुिेखर, वैज्ञातनक पर् ु े – 411021 ददनांक: 07.09.2024
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 3 संक्षिप्त अन ुक्रमणिका इंदुश्रीवास्तव, 39 ऊषा िैन उर्यशी, 11, 13, 29, 45, 50, 70, 76, 78 डॉ कुमकुम िुतला, 48 डॉ हहमांशुशेखर, 3, 38, 51, 66 डॉ. रजश्म चौबे, 84 ददनेि ततवारी, 56 पूिा श्रीवास्तव, 82 प्रािेंद्र नाथ ममश्र, 33, 43, 53 महेश चंद्र शमाय राि, 9, 19, 30, 72 मीरा श्रीर्ास्तर्, 36, 74 रूबी शोम, 17, 58 लशलता ' भोला ', 47 वैिाली, 61 संगीता चौहान, 21 संगीता वमाय, 41 संिय िैन, 68 सरोजिनी चौधरी, 16, 20 सीमा के डडया, 24 स्मतृत श्रीर्ास्तर्, 27, 63
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 4 कवर्ता क्रम िय मााँ िारदे............................................................................. 8 उद्बोिन गीत ............................................................................ 9 ओ कन्हैया............................................................................... 11 मााँ ब्रह्मचाररर्ी नमन............................................................... 13 मां चंद्रघंिा............................................................................... 15 भजतत की िजतत ...................................................................... 17 मााँ चंद्रघण्िा ............................................................................. 18 भिन ...................................................................................... 19 भजतत की मदहमा ..................................................................... 21 प्रेम भजतत ............................................................................... 24 िीवन सार............................................................................... 26 िय मााँ िारदे........................................................................... 28 ॐ नमः शिवाय!....................................................................... 30 प्राथयना ..................................................................................... 32 वंदन िैलपुत्री ........................................................................... 35 प्राथयना ..................................................................................... 37 िय मााँ अंबे............................................................................. 39 .. काययायनी मााँ! तुमको प्रर्ाम! ................................................ 41
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 5 भजतत भिन ............................................................................ 42 राम सकल गुर् तनिान............................................................. 44 िगदंबे सदन पिारो.................................................................. 46 भजतत गिल ............................................................................ 47 राम नवमी ............................................................................... 49 नमन िारदे.............................................................................. 51 प्रभुराम................................................................................... 53 राम िैसा बनो.......................................................................... 55 शिव ........................................................................................ 57 शिव वंदना ............................................................................... 60 पवनपुत्र हनुमान....................................................................... 63 िय श्री हनुमान........................................................................ 65 भजतत ग़ज़ल ............................................................................ 68 िय मााँ िारदे........................................................................... 70 साथयक िीवन ........................................................................... 71 भजतत ग़ज़ल ............................................................................ 74 भजतत ग़ज़ल ............................................................................ 76 अयोध्या में राम नाम ............................................................... 78 लागे रे कान्हा नीको ................................................................. 81
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 6 कवर् क्रम महेश चंद्र शमाय राि ................................................................... 8 ऊषा िैन उर्यशी........................................................................ 10 ऊषा िैन उवयिी........................................................................ 12 सरोजिनी चौधरी ....................................................................... 15 रूबी शोम................................................................................. 16 महेश चंद्र शमाय राि ................................................................. 18 सरोजिनी चौधरी ....................................................................... 19 संगीता चौहान .......................................................................... 20 सीमा के डडया ............................................................................ 23 स्मतृत श्रीर्ास्तर् ....................................................................... 26 ऊषा िैन उर्यशी........................................................................ 28 महेश चंद्र शमाय राि ................................................................. 29 प्रािेंद्र नाथ ममश्र ...................................................................... 32 मीरा श्रीर्ास्तर् ......................................................................... 35 डॉ हहमांशुशेखर ....................................................................... 37 इंदुश्रीवास्तव ........................................................................... 38 संगीता वमाय............................................................................. 40 प्रािेंद्र नाथ ममश्र ...................................................................... 42
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 7 ऊषा िैन उवयिी........................................................................ 44 लशलता ' भोला ' ...................................................................... 46 डॉ कुमकुम िुतला .................................................................... 47 ऊषा िैन उवयिी........................................................................ 49 डॉ दहमांिुिेखर ....................................................................... 50 प्रािेंद्र नाथ ममश्र ...................................................................... 52 ददनेि ततवारी ........................................................................... 55 रूबी िोम................................................................................. 57 वैिाली ..................................................................................... 60 स्मतृत श्रीवास्तव ....................................................................... 62 डॉ दहमांिुिेखर ....................................................................... 65 संिय िैन ............................................................................... 67 ऊषा िैन उवयिी........................................................................ 69 महेि चंद्र िमाय राि ................................................................. 71 मीरा श्रीवास्तव ......................................................................... 73 ऊषा िैन उवयिी........................................................................ 75 ऊषा िैन उवयिी........................................................................ 77 पूिा श्रीवास्तव ......................................................................... 81 डॉ. रजश्म चौबे.......................................................................... 83
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 8 िय मााँ िारदे वंदन चंदन (मनहरर् घनाक्षरी छं द) िगत में शलप्त लोग, भोगते सतत भोग, सब क ु छ छोड़ यदद, द्वार तेरे आ गए। सेवा पि ू ा ज्ञान ध्यान, चरर्ों का गर् ु गान, रूप का दरि पान, भजतत रस पा गए। मदहमा तु म्हारी गाएं, सकल पदाथय पाएं, माता के आिीष पाएं, सभा बीच छा गए। क ृ पा मझु े शमल गई, दहय कली खखल गई, रोग िोक दख ु भरे, सागर सख ु ा गए। महेश चंद्र शमाय राि
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 9 उद्बोिन गीत सखी छं द कान्हा प्यारे अब आओ गीता ज्ञान सन ु ा िाओ। । भिके है सब नर नारी संकि छाया है भारी। । झठू े हैं ररश्ते नाते। आपस में सब कतराते।। ववनती सन ु ो प्रभ ुहमारी। आये हम िरर् तु म्हारी।। आओ धगरिर आ िाओ।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 10 भततों को मत तरसाओ।। बढ़ती िाये लाचारी। दहम्मत िूि रही सारी।। कै सा संकि है छाया। मानव तेरा घबराया।। आकर कष्ि शमिा िाओ। सबमें प्यार बढ़ा िाओ। । ऊषा िैन उर्यशी
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 11 ओ कन्हैया भि ु ंग प्रयात छंद: वाखर्यक छं द 122 122 122 122 लभ ु ाते सभी को यिोदा दल ु ारे। सभी रूप तेरे लगे खब ू प्यारे।। बिा बााँसरु ी गोवपयों को नचाया। कभी फोड़ हांडी दही की सताया।। रचाते महा रास भी ओ कन्हैया। सभी नाचते हैंनचाते नचैया।। चढ़ा रंग ऐसा सभी पे तु म्हारा। हु आ बावरा झाँम ू ता गावाँ सारा।।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 12 गए तोड़ तयाँ ू प्रीत के तार सारे। तु म्हारे बबना हैंसभी बेसहारे।। पक ु ारे तु म्हें श्याम रािा बल ु ाए। खड़ी द्वार पे मात आाँखे बबछाए।। करे अिय ऊषा सन ु ो ओ कन्हैया। उसे थाम लेना धगरे िो कन्हैया।। ऊषा िैन उवयिी
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 13 मााँ ब्रह्मचाररर्ी नमन रूप दसू रा मााँका संदुर दसू री हमारी देवी सबकी हैंप्यारी देवी नाम ब्रह्मचाररर्ी ध्यान आि लाइए, दक्ष ने था यज्ञ ककया शिव का अपमान ककया माता हुई थीं सती उन्हें ना भल ु ाइए, नारद िी ने कहा देवी
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 14 शिव ही हैंतरेे पतत करके तपस्या आप उन्हीं को मनाइए, कदठन उपवास ककया वन में िा वास ककया ब्रह्मचाररर्ी माता के सदा ग ु र् गाइए, एक हाथ माला सोहे दि ू े में कमंडल सोहे पीले वस्त्र पीले फ ू ल माता को चढ़ाइए,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 15 िजतत को बढ़ाने वाली ववपदा शमिाने वाली करके प्रर्ाम सब आिीष आप लीजिए। सरोजिनी चौधरी मां चंद्रघंिा शस ंहवादहनी मां चंद्रघंिा मस्तक पर चंद्र बबदं ु दस भि ु ाओं वाली कर में बत्रिल ू िनष ु बार् तलवार से ससु जजित
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 16 िान्त सौम्य मां स्वर्य रूप में निर आती पापों का नाि करने वाली दैययों का संहार करने वाली मां भगवती िगत का कल्यार् कर संसार को भय मत ुत करने वाली मां हम पर भी क ृ पा दृजष्ि रखने वाली मां चंद्रघंिा देवी अपने भततों पर सदा आिीष रखने वाली। रूबी शोम
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 17 भजतत की िजतत वंदन चंदन (सोरठा छं द) माता तेरा प्यार, सदा बरसता िगत पर। संकि देती िार, िो तरेा सश ु मरन करे। माता देना ज्ञान, िीवन नैया तर सके । अपने क ु ल का मान, मैया मेरी तनत बढ़े। माता दख ु की िप ू , सता नहीं सकती मझु ।े तेरा पावन रूप, तनमयलता मन में भरे। भतत रहे मााँिेर, क ृ पा करहु वरदातयनी। करो नहीं मााँदेर, दीन दख ु ी के दख ु हरो।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 18 रोग दोष मााँ िाल, सब िग के मंगल करो। िीवन के सरु ताल, सदा सरल चलते रहें। महेश चंद्र शमाय राि मााँ चंद्रघण्िा रूप तीसरा माता का बड़ा ही तनराला है चंद्र अिय मस्तक पर गले फ ू ल-माला है, यद्ु ि को उद्यत माता रानी स्वर्य वर्य चमकीला है शस ंह सवारी करने वाली भावे रंग लाल-पीला है,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 19 दस हैंभि ु ाएाँजिनमें अस्त्र-िस्त्र िोशभत हैं सकल कष्ि हरने वाली भततों पर मोदहत हैं, भजतत-भाव सश ु मरन से माता खु ि होती हैं कष्ि सभी दरू करें आिीष िभ ु देती हैं। सरोजिनी चौधरी भिन खाली झोली हमारी भर दीजिए , मेरा भी बेड़ा पार कर दीजिए ।।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 20 तु मने मयै ा भततों को तारा भततों का कारि तु मने संवारा। मेरा भी कारि संवार दीजिए, मेरा भी...... तु म हो मयै ा अंतयायमी , हम सेवक तु म हो स्वामी।। सर पर दया का हाथ िर दीजिए , मेरा भी..... तेरी ये सरूत मेरे मन में बसी है, मन में बसी ननै ों में बसी है।। दिनय दे मझु को तनहाल कीजिए, मेरा भी..... संगीता चौहान
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 21 भजतत की मदहमा भजतत में अपार िजतत बना दे प्रभ ु का खास हनम ु ान की भजतत ने हृदय में बसा शलया राम शसदं रू लगा डाला बदन पर राम का वप्रय बनने के शलए रूप रंग का नहीं सोचा लाल लाल हु ए राम के शलए मीरा की भजतत थी अद्भतु क ृ ष्र् प्रेम में हुई तल्लीन
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 22 रार्ा ने भेिा ववष का प्याला बबगाड़ न सका क ु छ भी भतत प्रह्लाद की भजतत के सामने अजनन देव भी हार गए बाल न बाकं ा हु आ उनका सक ु िल अजनन से बाहर आए िबरी की भजतत अिीब थी प्रभ ुराम को झठू े बरे खखलाया ववदरु की भजतत तनराली थी प्रभ ु को साग खखला डाला भतत ध्रव ु की भजतत थी अद्भतु
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 23 बालपन में लीन हु ए प्रभ ु में चमक रहें हैंआि भी गगन में अनप ु म ध्रव ु तारा बनके सरूदास, रववदास, तु लसीदास सब लीन रहते थे प्रभ ु भजतत में अमर नाम कर गए अपना सब तल्लीन अपने प्रभ ु की भजतत में भजतत की मदहमा अपरंपार इसके आगे प्रभ ु भी माने हार सीमा के डडया
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 24 प्रेम भजतत पावयती ने की अतत कदठन तपस्या बनीं अपर्ाय शिव की चाह में पाया शिव को, पावतय ी की अिूि प्रेम भजतत के विीभतू हो शिव बने अियनारीश्वर उसी प्रेम के बंिन में बंि कर पावयती बनी शिवमय। सीता िब गौरी पि ू न को गईं, राम, कं ु ि में सम ु नों को चन ु ते हु ए, प्रथम दृजष्ि में ही,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 25 खो गए उनके प्रेम में, और उसी पल हो गए उनके, उसी प्रेम के बंिन में बंि कर सीता बनी राममय। हे मेरे परमेश्वर ! तु म्हारी भजतत का ऐसा रंग चढ़ा हैमझु पर, उसी में रम गई हू ं म,ैं मझु े नहीं हैआकांक्षा िन, ऐश्वयय, वैभव की, केवल चाहती हू ं तु म्हारे प्रेम, तु म्हारी प्रीतत
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 26 के बंिन में बंिना, तु म्हारी चाहत में डू बना, और तु म्हारे ही स्मरर् में खोकर, बन िाना भजततमय !!! स्मतृत श्रीर्ास्तर् िीवन सार मन तयाँ ूसयय से घबरा रहा, और झठू इतना भा रहा। सांसे शमली है धगनती की, जिन्हें व्यथय ही गाँवा रहा।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 27 कामनाओं का ववनाि कर, आक ु लता मन की िातं कर। है जिंदगी मौसम सदृश्य, बदलाव सभी स्वीकार कर। हर अिभ ु भाव का ह्रास कर, अब आयमबोि का भान कर। कमों के बंिन काि कर, मोक्ष मागय का चन ु ाव कर। मोदहत ना हो घर द्वार में, िन दौलत की चमकार में। तया करने तु ने िन्म शलया,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 28 और तया ककया संसार में। कान्हा बसे अंतस में िब, अब तोड़ दे मोहपास सब। ऊषा करे ववनती प्रभ ु िी, उसे दो चरर् में ठााँव अब। ऊषा िैन उर्यशी िय मााँिारदे वंदन चंदन खाई िग की ठोकरें, आया तेरे द्वार। हार गया हू ाँ िारदे, दो भव सागर तार।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 29 दो भव सागर तार, ककनारे कर दो नैया। शलए मिरु मस्ु कान, मोह मद हरती मैया। राि खड़ा कर िोड़, थाम लो मझु को माई। िूिा माया िाल, िगत की ठोकर खाई। 2. भारी संकि लाल का, हरती मााँ तयकाल। दीन दख ु ी को िारदे, करतीं मालामाल। करतीं मालामाल, याचना करती परू ी। तनि भततों की मााँग, नहीं मााँ रखे अिरू ी। चरर्ों का रख ध्यान, बनें सख ु के अधिकारी। सर पर तेरा हाथ, काि दे दव ु विा सारी। महेश चंद्र शमाय राि
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 30 ॐ नमः शिवाय! शिव का आकार हैिन् ू य रूप शिव का स्वरूप है प्रखर जयोतत शिव, स्वयं हमारे अंतस में शिव पाना है तो करो भजतत। यात्रा है सयय की, महादेव शिव वतयमान, शिव हैंभववष्य यदद अंतयायत्रा में िाएं तो ददख िायगे शिव के भव्य दृश्य। ें सािना है शिव, शिव ध्यान, योग
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 31 शिव उच्च शिखर, अंतवायसी काया, मन, बद्ु धि, आयमा से ददख िायें शिव, शिव की कािी। शिव ने ही सन ु ाई राम कथा िो सब पापों को हरती है, होती हैआयमा अमतृ मय िीवन में सब सख ु भरती है। शिव की मदहमा, शिव ही िाने शिव वतमय ान में ववद्यमान शिव का मतलब, कल्यार् िगत शिव ब्रह्म रूप का तेिमान।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 32 शिव को मत खोिो और कहीं खोिो शिव को अंतमनय में शिव पावतय ी हैंववद्यमान पररवार के अंतिीवन में। ले अर्घयय हाथ में, अवपयत हो! कै लाि के वासी हों सहाय िब भी बोल, ं ूयह मन बोले ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय। प्रािेंद्र नाथ ममश्र प्राथयना पावन ददन नौरात्र के,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 33 मां का सन् ुदर हैसंग मेरे साथ हैंमां मेरी मन में भरें हैंउमगं ।। अन्तमनय मन में वही, घर आंगन में में रहती छांव सख ु द अतत मां की सख ु मय सब वह करतीं।। बसी हैंरग रग में मयै ा, सांसों में भी समाई है उंगली पकड़ी है मेरी मंजिल तक पहु ंचाईं है।।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 34 माता तेरे रूप अनेक, एक से बढ़कर हैंएक उपमा दे दे शसखाएं तु म्हे रही मैंमाथा िेक।। िब भी पीर पड़ी कोई, तु मको सदा पक ु ारा है दौडी दौड़ी आईं तु म तु मने सदा उबारा है।। मैया इतनी िजतत दो, भजतत का दो वरदान साथयक िीवन हो मेरा मांगं ू मां से अनदु ान।।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 35 िगमग दीप िलें, सरु शभत सब संसार हो मेरी यह मन कामना मां की क ृ पा अपार हो।। मीरा श्रीर्ास्तर् वंदन िैलप ु त्री (भि ु ंगप्रयात: 122 122 122 122) िरा अवतरर्, िलै पत्र ु ी, बताते, नमन कर सभी, सर वहीं पर नवाते। फले प्रततपदा, चत्रै की ित ु ल को िब,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 36 सभी भतत साजन्नध्य, माता ददखाते।1। भला हो, ख ु िी हो, क ृ पा भी बड़ी हो, झड़ी आि वरदान की हो, सन ु ाते। हुई आि आरंभ, ये सज ृ ष्ि िानो, सन ु ो श्लोक ब्रह्मा, सभी ग ु नग ु नाते।2। चढ़ाए सभी भतत, नैवेद्य, फल को, क ृ पा देख आई, इसे खा बताते। पहन वस्त्र नतू न, नया ददल बनाया, समवपतय हु ए ख ुद, यही सब बताते।3। हु आ पवय माता, चले देख नौ ददन, नया रूप हर ददन, शलए ये बताते।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 37 ददया भतत को वर, नयन से उबारा, ददखा आि वायसल्य, ऐसा सन ु ाते।4। डॉ हहमांशुशेखर प्राथयना प्राथनय ा में सयंम है , प्राथयना मे भजतत है प्राथनय ा में िजतत है, प्राथनय ा में संतोष है प्राथनय ा में मनोबल है हे मां मझु े इतनी िजतत देना मैंसबके सख ु का कारर् बनं ूदख ु का नहीं िो भी तेरी क ृ पा से शमला हैउसमें संतोष रखं ू
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 38 सयंम इतना देना ववकि पररजस्थतत में भी ियै य रख ू ाँ हे मां मेरी इच्छाओं का अंत नहीं तू मां मझु े वो देना जिसमे मेरी भलाई हो इतनी मेहरबानी मां बनाये रखना िो रास्ता सही हो उसी पर चलाये रखना मैंककसी के आंसओ ु ं का नहीं खु िी का कारर् बनाँ ू हे मां वहां ही नहीं रहना िहां हम प्राथयना करते हैंवहााँभी रहना िहां हम पाप करते हैं हे मां शिकवा न हो ककसी से अपनी रज़ा में तू रहना शसखा दे सख ु दख ु में िीना शसखा दे इंदुश्रीवास्तव
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 39 िय मााँअंबे हे भवानी मात अंबे, िजतत रूपा है नमन मन हमेिा कर रहा है, भजतत में तु मको श्रवर्। भतत द्वारे पर खड़े मां, धचत्त में श्रद्िा सम ु न, िंख घंिे बि रहे हैं, गं ू िती ब्रह्मांड में िन ु । रूप उजवल के ि काले, धचत्त में ममता भरी,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 40 हे भवानी मात अंबे , नमोस्तुते हे ददगंबरी। छांव तु मसे िंप ू तु मसे, व्योम तारो से भरा। फ ू ल पत्ते और उपवन, इत्र सी महके िरा, आपके वरैानय में मन, कस्तूरी बन घम ू ता। हर ददिा में हर दिा में, तनयय हर िन पि ू ता। संगीता वमाय
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 41 .. काययायनी मााँ! तम ु को प्रर्ाम! स्वखर्यम है वर्य, हैंचतु भि ु य ा मद्रु ा एक हाथ की, अभयदान एक हाथ, वरदमद्रु ा मे है एक खड्ग शलए, एक पद्म पाखर् लेकर बत्रदेव का तेि और लेकर प्रताप उयपन्न हुईं काययायन ऋवष की कन्या बन शलए िजतत पंि ु वह प्रकि हुईं वाहन है शस ंह, वनराि प्रबल
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 42 मद्रु ा हैिातं , भततों के शलए काययायनी रूप है काल रूप तामस प्रक ृ तत की प्रवत्त ृ ों के शलए। .. काययायनी मााँ! तु मको प्रर्ाम! प्रािेंद्र नाथ ममश्र भजतत भिन बाि तनहारूाँ तनयय तु म्हारी, बीत रही है उमर हमारी। झलक ददखी न श्याम की अब तक, व्याक ु ल अखखयााँरो रो हारी।।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 43 सारे िग के पालन हारे, हमको लेलो िरर् तम् ुहारे। काया माया सारी झठू ी, झठू े ररश्ते नाते सारे।। कौन ितन से तु मको पाऊाँ, तनयय नई मैंि ु गत लगाऊाँ। हार गई मैंतूसमझादे व्यधथत हृदय है िीर बाँिादे।। मोहपास से हमें छुड़ाओ, भजतत रस बाँदू े छलकाओ। कमों के ताने बाने में,
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 44 और नहीं हमको उलझाओ। तन तो हैमािी का पतु ला, ककसे सिाता है मन पगला। ढेर राख का बन िाएगा, सच ये है िग नश्वर तनकला।। ऊषा िैन उवयिी राम सकल ग ु र् तनिान राम नाम अमतृ रस िान राम सकल ग ु र् तनिान बाजल्मकी तु लसी देव देवता
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 45 तनयय करें सश ु मरर् ध्यान राम सकल ग ु र् तनिान सबरी खखलाए ि ूठे बेर तनषाद खेवे प्रभ ू की नाव अंग ु लीमार उलिा िपनाम ऐसे मेरे प्रभ ूदीनदयाल साि ुसंत करते बखान राम सकल ग ु र् तनिान असरु ों के ववनािकताय िन के कल्यार्कताय अयोध्या पहु ंचे परमिाम समय रहते िान वविान
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 46 राम सकल ग ु र् तनिान लशलता ' भोला ' िगदंबे सदन पिारो प्रातः वेला में, उठकर ले लो , नाम मात िारदा का । िग िननी अम्बा , संकि हर लो , काययायनी माता िय हो ॥ मॉ का नवराता , मन को भाता , दरिन की आस िगाता i घर में िोत िली , िग मग िलती , ववपदा हर लेती सारी ॥
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 47 िेरावाली मााँ , घर में आती , सौगातें दे िाती हैं। कं ु क ु म माथ सिा , लाली चड़ू ी , मात गले हार पहनाओ । अस्त्र िस्त्र ले मााँ , शस ंह सवारी , िगदम्बे सदन पिारो ॥ डॉ कुमकुम िुतला भजतत गिल वज़्न - 122 122 122 122 हमें छोड़कर श्याम िाना नहीं अब हुई प्रीत तु मसे भल ु ाना नहीं अब।
‘लम्हे जिन्दगी के’ मंच की प्रस्तुतत : काव्यार्घयय 48 नही अब लभ ु ाता िगत ये तु म्हारा िगत िाल मकड़ी फसाना नहीं अब। तु म्ही हो हमारे तु म्ही हो सहारे तु म्हें छोड़ दि ू ा दठकाना नहीं अब। शलखा नाम अंतस तु म्हारा कन्हैया तु म्हें सब पता हैछु पाना नहीं अब। दया के समंदर खड़े आस लेकर शमले बाँदू भर ही सताना नही अब। बतादो हमें श्याम अपना दठकाना कई िन्म बीते शमला ना अभी तक।