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रेल सुरभि, मध्य रेल, अंक- 30

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रेल सुरभि, मध्य रेल, अंक- 30

रेल सुरभि, मध्य रेल, अंक- 30

म य रले

म य रले क ैमािसक िहदं ी गहृ पि का

अकं - 30 जनवरी से माच 2022

कदांपसनाधंवए )ाषाभजार(कंधबाहमपउ )रावपनपिवि(सपं ादक य

मु यालय, राजभाषा िवभाग क गहृ पि का 'रले सरु िभ' का ैमािसक अकं 30 (जनवरी-माच, 2022) नए कलेवर
और रोचक जानका रय के साथ आपके हाथ म स पते हए मझु े हािदक स नता हो रही है । हमारा यह अकं वर
सा ा ी भारतर न लता मंगेशकर और महान सगं ीतकार एवं गायक ब पी लहरी को समिपत है । सगं ीत जगत क इन
दो महान हि तय के बारे म दशे का शायद ही कोई यि हो जो जानता न हो । इन दोन महान हि तय के जीवन के
रोचक अनभु व , उनक सगं ीत साधना तथा इसे एक नया आयाम दने े के िलए इनके ारा िकए गए यास को लेकर
अलग-अलग रचनाकार ारा भेजी गई रचनाएंआप सभी को िनि त प से आनदं दान करगी ।

आप सब जानते ह िक िहदं ी के चार- सार म िफ म का बहत बड़ा योगदान रहा है। उ कृ पटकथा, बेहतरीन
गीत तथा कणमधरु सगं ीत के साथ रलीज हई िफ म को दशक ने हमेशा ही सराहा है और उनका जी-भरकर आनदं
िलया है । गीतकार ारा श दब रचनाओंको अपनी आवाज दके र उ ह सपु रिहट बनाने म गायक और गाियकाओं
का बहत बड़ा योगदान रहा है । लता जी और ब पी जी ारा गाए हए गाने गनु गनु ाने से आज भी मन को स नता
िमलती है । सरु ीली आवाज म गाए गए 'ऐ मेरे वतन के लोग , जरा आखं म भर लो पानी' गाने को सनु कर वाकई म आखं
म आसं ू आ जाते ह, ऐसी सरु ीली आवाज क धनी लता जी के सामने हम नतम तक हो जाते ह । ब पी जी ने सबसे
पहले पॉप गायक को लोकि य बनाया । उनके गाए हए सभी गाने गनु गनु ाने म हम सबको आनदं िमलता है।'इतं ेहा हो
गई इंतजार क ......' को कौन भूल सकता है ?

रले सरु िभ का अकं िजस माह म कािशत होता है उस माह म िहदं ी के सु िस दो सािह यकार को उनक
जयतं ी के अवसर पर ासमु न अिपत करने क हमारी परपं रा रही ह।ै इसी बात को यान म रखकर हमने ी शरद
जोशी तथा ी सिु म ानदं न पतं जी को दो पृ पर थान दके र उ ह आदराजं िल अिपत करने का यास िकया है।

मझु े िव ास है िक सगं ीत के े क दो महान हि तय और िहदं ी सािह य जगत के दो महान सािह यकार के साथ
कािशत यह अकं आप सभी को िनि त प से पसदं आएगा । इन रचनाओंके बारे म म आपक िति याओंका भी
वागत करता हं ।

(िविपन पवार)
उप महा बंधक (राजभाषा)

एवं धान सपं ादक

सौज य : कॅ टन आशीष पानसे

दवे नाथ दवे ाशीष, क ा - आठ, , महाराणा ताप कू ल, गांधीनगर
- रिवदास अनजु कु मार, क ा - चौथी, महाराणा ताप कू ल, गांधीनगर

अकं 30 (जनवरी - माच 2022)

अनु मिणका

. रचना का नाम िवधा रचनाकार पृ स.ं
ए.के . ीवा तव 1
1. सहायक अिभनेता कहानी ए.के .िम ा 7
िविपन पवार 13
2. ताजमहल कहानी

धान मु य िसगनल एवं दूरसचं ार इंजीिनयर 3. भारतर न लता मगं ेशकर : लेख

सगं ीत के अलावा भी बहत कु छ

4. ऐ मेरे वतन के लोग जरा .......... लेख घन याम मैिथल 'अमतृ ’ 16
मोद सोनी 17
5. सूना हआ सरु का मेला किवता डॉ. अनंत ीमाली 18
िविनता िसहं 20
6. चलते-चलते..मेरे ये गीत याद रखना लेख मंजलु ा स सेना 21
उषा शमा 23
7. वर कोिकला - हम तझु े यूं न भलु ा पाएगं े किवता अनूप पांडे 24
नर नायटे 25
8. लता मगं ेशकर – कु छ झलिकयां लेख िनितन पिं डत सोनार 27
िकशोर कु दरे 29
9. वर कोिकला लता मगं ेशकर लेख ि यकं ा वी. राव 30
मयूर मोहन जोशी 31
10. लता-मंगेशकर किवता मे रजं न 32
िवकास बघेल 34
11. ब पी लहरी – द िड को डांसर लेख स य िसहं 36
डॉ.सर वती अ यर 38
12. पॉप गीत का बादशाह – ब पी लहरी लेख आचाय नीरज शा ी 41

13. अलौिकक लता किवता

14. लता मंगेशकर का जीवन सदं शे लेख

15. लता मंगेशकर किवता

16. अलिवदा ब पी दा लेख

17. “ब पी दा” : िड को िकं ग लेख

18. मनोरजं न स ाट ब पी लहरी लेख

19. िहदं ी िफ मी गीत और िहदं ी गीतकार लेख

20. वर कोिकला: लता मंगेशकर लेख

थायी तभं

धरोहर

21. अितिथ! तमु कब जाओगे यं य शरद जोशी 43

मने पढ़ी िकताब

22. दय पश पु तक समी ा डॉ. पूिणमा ि वेदी कु लकण 44

धरोहर

23. भारत माता किवता सिु म ानदं न पतं

• कहानी

सहायक अिभनते ा

ए.के . ीवा तव

च र अिभनेता याने सहायक अिभनेता ! अनीित, िवप का अगला दांव भली-भािं त मालूम होते ह तथा

इस िकरदार का हर िफ म म बहमू य योगदान होता ह।ै य अपनी टीम को हर हाल म िजताने का जो ज बा इस कलाकार म

समझ लीिजए िक दाल स जी म जो मह व नमक का होता है, वही होता है उतनी िश त तो शायद खदु हीरो म भी नह होती।

इसका िफ म म होता है । या यह कह िक िफ म हीरो क पूरी तो हमारी कहानी भी कु छ इस प रि थित से िमलती जलु ती
िजदं गी ही इस पर िटक रहती है तो कोई अितशयोि न होगी । है।

खासकर हीरो के ेम सगं तो इस िकरदार के बगैर आगे ही नह हीरो यािन ग जी ने कू ल क िश ा ामीण अचं ल से ा
बढ़ते । िफर चाहे वह ेम ताव पशे करना हो, हीरोइन से िमलने कर जब कॉलेज म दािखले के िलए शहर का ख िकया तो आखं
क जगह व व तय करना हो या उसे उपहार दने ा हो । हर ही चिंु धया गई।ं बड़ी बड़ी इमारत, चकाचक मोटर कार, बड़े बड़े
सम या का समाधान इस िवल ण ितभा वाले अिभनेता के पास बाग ! कहां नजर दौडाएं कु छ समझ ही न आता। और कॉलेज क
होता है। और तो और, यह वीर पु ष हीरोइन के घरवाल से भी िबि डंग ! उसके आगे तो उनका कू ल एक झोपड़ी क मािफक
मकु ाबला करने म नह िहचकता । िफर चाहे वह हीरो को रात जान पड़ता था। कु छ िदन तो वे खमु ारी म ही जीते रहे। लग रहा था
िबरात, िखड़क के रा ते हीरोइन के घर म वशे करवाने का मान दूसरी ही दिु नया म पहचं गए ह।
जोिखम हो या उसक इमेज को भ य़ प म दिशत करने क
माकिटंग का काम हो, यह हर कला म िनपणु होता है। यही नह , ग जी का असली नाम बकु ल उपा याय था पर घर मोह ले
िजस कार यु के दौरान हर एक मूव के बाद अगले कदम क म तो अलग ही नामकरण सं कार होता है। पता नह कै से सबने
रणनीित तैयार होती ह,ै उसी कार यह सने ापित अपने बादशाह ग कहना शु कर िदया। अब तक तो उ ह इससे कोई परहजे न
को ऐसी ऐसी योजनाएं रचकर दते ा है िजससे इ क क जमीन म था, पर कॉलेज म पहचं ते ही उ ह इस नाम से शम का अहसास
आने वाले च यूह का सफलतापूवक भेदन सभं व हो जाता ह।ै होने लगा। वह तो गनीमत थी िक नए शहर म कोई भी इस उपनाम
इस ि या म उसे कई बार मार भी खानी पड़ती है और तिबयत से प रिचत न था। बकु ल जी एक दबु ले पतले, छरहरे शरीर और
से बेइ जती भी होती है पर मजाल है िक उसके कदम लड़खड़ाएं म यम ऊं चाई वाले यि व के वामी थे। चेहरे पर ह क -ह क
या वह अपने हीरो का साथ छोड़ जाए। दाढ़ी मूछं ने द तक दे दी थी और शरीर म वे सारे प रवतन होने
लगे थे जो यवु ाव था आने पर अपेि त ह। मन भी इससे अछूता न
इंतहा तो तब हो जाती ह,ै जब हीरो का यिद गलती से था और एक अजीब-सी बेचैनी, उ माद तथा खमु ारी का अहसास
शादीशदु ा होते हए भी िकसी अ य यवु ती से च कर चल जाता ह,ै िनरतं र होता रहता था।
तब भी यह ाणी पूण स यिन ा से अपने वामी का ही साथ दते ा
है और दोन ितयोगी वीरांगनाओंको एक दूसरे के स मखु हो, यही वह अव था होती है जब िकसी कं कड़ के फकने पर
यु करने क सभं ावना को यथासभं व टालने का जगु ाड़ करता लहर का धारा वाह िनमाण शु हो जाता है और दय उमगं के
रहता है। सागर म गोता खाने लगता है। और यहां तो स दय और मादकता
का पूरा सागर ही था।
ध य है ऐसा िम जो शायद क पनाओंम या िफ म म ही
सभं व है। और मजे क बात यह है िक पता नह उसे इस िवधा म ग जी पूरे िदन कॉलेज म इदिगद िवचरण करती रमिणय को
पारगं तता कै से और कहां से िमल जाती है ! वह खदु दखे ने म एक दखे ते न अघाते। िजतने िव ाथ उनके पूरे कू ल म न थे उनसे
िनहायत साधारण या कह तो साधारण से भी कमतर एक पा कह यादा सं या तो यहां के वल लड़िकय क ही थी।
होता है िजसको अपने जीवन म कभी िकसी ने गलती से भी न
ताका हो पर उसे इस पूरी ि या के तमाम दावं पच, नीित- ग के साथ ही उनके कू ल के सहपाठी अिमत ने भी कॉलेज
म दािखला िलया था। चूिं क बाक सभी छा नए थे तो जािहर था
िक इनम काफ छनती थी। एक ही बच म बैठने के अलावा पूरे व

1

कॉलेज म वे साथ रहते। य?
कॉलेज म वेश के कु छ ही िदन के भीतर वह हो गया जो चलो तो ! तु हारे मतलब क चीज ह,ै अिमत ने पता नह कब
च र अिभनेता का रोल अपना िलया था। यह लािजमी भी था,
लगभग हर िफ म , हर कहािनय म होता है। िकशोरवय म वेश आिखर सारे सहपािठय म वही तो ग जी के सबसे यादा करीब
करते ग जी एक चलु बलु ी बाला के िशकार हो गए और बाला भी था।
उ ह क क ा क । िफर या था, अब तो कॉलेज आते जाते, लाई ेरी के गेट पर पहचं कर अिमत रह यमयी अदं ाज म
कॉरीडोर म, लाई रे ी म, हर जगह ग जी उसके पीछे लगे रहते धीमे से बोला, दखे ो एकदम मत दखे ना और हां दूर ही रहना। वो
पर हां एक दूरी बनाकर। एकदम कोने वाले शे फ म िकताब ढूंढ रही ह।ै
अब जाकर ग जी को अिमत क ज दबं ाजी का मतलब पता
ले चर के दौरान भी वे जगु ाड़ म रहते िक ऐसी बच पर बैठे चला। मन हआ िक लपक कर उसे गले लगा ल। वे दबे पावं
जहां से वह अ छी तरह िदखती रह।े जािहर है िक उनका यान लाई रे ी के भीतर घसु गए।
ले च र पर कम, बाला पर यादा होता। कभी गलती से वह चेहरा तू क, म जाकर पता लगाता हं िक या ढूंढ रही है। अिमत
घमु ाकर उनक तरफ दखे लेती तो ग जी हवा म उड़ने लगते। ने िज मेवारी लेते हए कहा।
मन ही मन यह तौलते रहते िक या वह उ ह दखे ने के िलए चेहरा ग जी को एक िफ म याद आ गई वहां भी च र अिभनेता
मोड़ती है या यूं ह ? वे अभी तक यह तय नह कर पाये थे िक या िहरोईन के सारे ि याकलाप का यौरा हीरो को लाकर दते ा था।
वह भी उ ह चाहती ह।ै अपनी तरफ से पहल करना उनक आदत मन ही मन ग जी अपने आपको हीरो के िकरदार म िफट कर बैठे।
न थी और बगैर िकसी प र म से फल ा होने क तो बात ही चल म काम ठीक कर आया। अिमत ने िवजयी सने ापित क
या होती। तरह आकर कहा।
या हआ ?
एक ही क ा म होने के कारण गाहे बेगाहे वह बात कर लेती तो यान से सनु ! वह जो िकताब ढूंढ रही है वह एकाएक मझु े
ग जी के मन म अजीब तरगं े पैदा हो जात जो पूरे शरीर को दूसरे शे फ म िदख गई और म उसे चपु के से उठाकर ले आया ह।ं
फु ि लत कर डालती और वे इस गमु ान को हवा दने े लगते िक अब तू इसे लेकर जा और उससे पूछं िक वह या ढूंढ रही ह।ै जैसे
यह उसके उनके ित झकु ाव का िह सा ह।ै कई िदन तक उनका ही वह इस िकताब का नाम ले, तू तरु तं हािजर कर दने ा। इसके दो
मन उस कही गई बात को कान म रकाड क मािफक बजाता फायदे ह गे। एक तो उसके काम म मदद हो जाएगी, दूसरा उसे यह
रहता और वे एक एक श द का अपने मनमािफक मतलब भी अनभु व होगा िक तू खदु इसे न पढ़ उसको दे रहा है। सोच
िनकालते रहते। िकतना बिढ़या भाव पड़ेगा !
वाह या बात कही ! ग जी गदग् द होते बोले।
कॉलेज म दािखला िलए कई महीने हो चकु े थे और अब तक पर एकदम न चले जाना, इस तरह जताना िक तमु भी िकताब
उनके लगभग सभी िम को इस मे करण के बारे म पता चल ढूंढते-ढूंढते वहां पहचं े हो, नह तो तु हारे साथ-साथ मेरी भी पोल
गया था। ग जी को लगता िक अव य ही उसे भी उनके झान क खलु जाएगी।
खबर तो लग ही गई होगी िफर भी बात य नह आगे बढ़ रही ? वे यार तू दखे ता जा म भी कम थोड़ा हं । िफ म और िजदं गी म
अपने आपको ही इसका िज मेवार मानते। आिखर मने कभी आगे िकतनी समानता है ! सोचते हए ग जी चल पड़े।
बढ़कर अपनी भावनाओंको दिशत िकया नह , के वल याल उनका िदल जोर से धड़क रहा था, मान कोई चोरी करने जा
से बात आगे नह बढ़ती, वे सोचते। पर हां, िदन भर उनके याल रहे ह । वे मन म उन सारे यगु ल को याद करने लगे जो कॉलेज म
म वही छायी रहती थी। उनके इदिगद मडं राते रहते थे। इन यगु ल का मे भी ग जी के

य ही एक िदन वे उसके याल म गमु कॉरीडोर म टहल रहे
थे। ा यापक के न आने के कारण पी रयड खाली था तभी अिमत
हाफं ते हए आया और ग जी को ख चकर ले जाने लगा।

कहाँ ? ग जी ने आ य से पूछा।
लाई ेरी। अिमत ने ख चते हए जवाब िदया।

2

दखे ते-दखे ते ही परवान चढ़ा था। आिखर उन िे मय म और इतना आसान होता तो बात ही या थी! ग जी िवचारक क
मझु म या अतं र है? उ ह ने अपने आपको मजबूत िकया और भािं त बोले।
िकताब पीछे छुपाए दबे पांव लाई ेरी के कोने म जा पहचं े।
िफर ?
हाय ! या ढूंढ रही हो? ग जी ने सारे ेमी यगु ल को तभी तो तझु े बता रहा ह।ं कु छ तो उपाय कर। ग जी ने
आरा य मानते हए मंहु खोल िदया। सलाहकार को िववशता जताई।
यार तू जाकर उसे िकसी तरह िफ म दखे ने के िलए राजी
कु छ नह , इजं ीिनय रगं ाइगं क बकु । उसने जवाब िदया। कर। अिमत ने तरकश से नया तीर िनकाला।
अ छा ! म भी वही खोज रहा था, कह यह तो नह ? ग जी ने या बात कर रहा ह?ै जाकर बोलूं िक तमु आज मेरे साथ
हाथ म पकड़ी िकताब बताई। िफ म दखे आओ? िपटवाने का अ छा इंतजाम कर रहे हो।
अरे हां ! कहां िमली? बड़ी दरे से खोज रही थी। तेरे से कौन कहने को बोल रहा है ? बदं ा िकस िदन काम
थोड़ी दरे पहले वहां कोने वाले शे फ से उठाई थी, ग जी आएगा? बात तो सनु । म यह कहगं ा िक चलो एक अ छी िफ म
सफे द झूठ बोले। तमु ले लो ? लगी है, हम कु छ लोग चलते ह। िफर यिद पछू ेगी िक कौन-कौन
अरे नह ! तु हे ज रत है, म कोई और लेखक क ले लूंगी। चलेगा तो तेरा नाम ले लूगं ा। हां एकाध उसक सहले ी को भी साथ
अरे तमु लो तो ! म वैसे भी अभी पढ़ने वाला नह ह,ँ वह तो लेना होगा, आिखर मझु को भी तो कं पनी चािहए होगी।
बस आगे के िलए लेकर रखना चाहता था। और वह य मानने लगी ? ग जी ने आशकं ा य क ।
प का ? उसको अब तक भनक तो लग ही गई होगी िक तू उसके पीछे
िब कु ल प का।। ग जी ने थोड़ा जोर दके र िकताब उसके पड़ा है और म तेरा दूत ह।ं यिद वह मान लेती है तो एक तरह से
हाथ म थमा दी। प का हो जाएगा िक उस तरफ भी कु छ मामला ह।ै और यिद वह
थक यू, कह वह मड़ु कर दूसरी िकताब छाटं ने लगी। न भी कहती है तो या िबगड़ जाएगा ? वैसे भी कौन-सा तू कु छ
ग जी काफ उ मीद लगाए बैठे थे िक कु छ और बात ह गी, आगे बढ़ पाया है, अिमत ने पूरी रणनीित बताई।
कु छ नह तो कम से कम ध यवाद तो भावनाओं के साथ ा यार तू कहां से ये पचं गढ़ता ह?ै ग जी िवभोर होते बोले।
होगा ही पर एक शु क थक यू उ ह अपया लगा। दो त के िलए करना पड़ता है, अिमत ने आखं मारी और
ठीक है, कोई बात नह , एक िदन के िहसाब से कु छ यादा ही कटीन के बाहर चल िदया।
बातचीत हो गई थी, ग जी मन को मना तरु तं वापस लौट पड़े। ग जी को पूरी तरह से लगने लगा िक िफ म क शूिटंग चल
सासं जोर से चल रही थी, मानो मील दौड़ कर आए ह। रही है और अिमत तो एक प रप व च र अिभनेता बन चकु ा है।
यार बात कु छ आगे नह बढ़ रही, ग जी बोले। दो ले च र के टॉक ज म ह का काश था। िफ म शु होने म अभी दरे ी
बीच कु छ अतं राल था और दोन कटीन म बैठे को डि ंक पी रहे थी। एक तरफ ग जी बैठे थे और दूसरी तरफ अिमत, बीच क
थे। लाई रे ी वाली बात को कु छ िदन बीत चकु े थे। चतरु सेनापित सीट पर बाला और उसक सहले ी। बैठने का यह म अिमत का
क वजह से उस ारिं भक यु म आिं शक सफलता ज र ा ही तय िकया हआ था तािक ग जी को बात करने का मौका िमले।
हई थी। थोड़ी बहत बातचीत िकताब के बहाने हो गई थी पर आगे िफ म भी रोमािं टक थी और मजे क बात यह थी िक उसम भी
कई बार िकताब का पलु बनाकर उ ह ने ेम क लहर पर चढ़ एक सहायक अिभनेता था जो हीरो के यार को बड़ी िश त से
बातचीत क खंृ ला को चालू रखा। यही नह , पढ़ने पढ़ाने के बीच हवा दते ा था। अिमत ने कहानी पढ़ के ही इस िफ म का चयन
इधर-उधर क बात ारा िनकटता भी पा ली। पर ग जी तो िकया था।
छलांग लगाना चाहते थे। तु ह िकसी तरह क िफ म पसदं है ? बात शु करने के
यार तू है ही डरपोक । जाकर बोल य नह दते ा ? अिमत उ े य से ग जी ने पूछा।
बोला।

3

मझु े तो ि लर अ छी लगती ह, वह बोली। उनम जटु ही न पाया। हां, इतना फायदा ज र हआ िक िफ मद
ग जी थोड़ा नवस हए, वे सोच रहे थे िक उसे भी रोमािं टक दखे ने के ज रए नजदीक बैठने का अवसर िमला और थोड़ी
िफ म अ छी लगती होगी, आिखर अिधकतर लड़िकय को यही िझझक भी दूर हई।
भाती ह।
या बात है ! मझु े भी स पस िफ म पसदं ह, उ ह ने झूठमूठ अबे तू घ चू का घ चू ही रहगे ा। एक िदन अिमत ने कहा। छुटृी
कहा। का िदन था और दोन हो टल के कमरे म लेटे हए थे। न कॉलेज
अ छा बताओ, हॉलीवडु क कोई ि लर दखे ी है? क ज दी थी न मेस जाने क । आज खाने का व भी दोपहर बाद
अब ग जी गड़बड़ा गए। अ वल तो उ ह ने बहत ही कम तक का था। अभी अभी तो वे ना ता करके लौटे थे।
अं ेजी िफ म दखे ी थ और जो दखे ी भी थ उनक टोरी याद न
थी। गांव म तो जो एकमा िथयटे र था वहां ढंग क िह दी िफ म य । या हो गया? ग जी ने पूछा।
ही कभी कभार लगती थ , अं ेजी क तो बात ही या क जाए ! यार या तो अपने िदल क बात बता दे या िफर उसका याल
जो एक दो अं ेजी िफ म उ ह ने दखे ी थ , वह कॉलेज म आने के िदल से िनकाल कर पढ़ने म मन लगा। यूं चपु चाप छत क तरफ
बाद ही सहपािठय के जोर जबरद ती करने पर। वे भी उनके िनहारते रहने से कु छ नह होनेवाला।
प ले कम ही पड़ी थ । कहानी तो चलो थोड़ी-बहत पता भी चल बोल तो तू ठीक रहा है पर तझु े ही कु छ करना होगा।
जाती थी पर िकरदार क िगटर-िपटर इंि लश िब कु ल ऊपर से अरे यह या बात हई ? इ क तमु करो और लड़ने म जाऊं । न
जाती थी। भई, अब और न होगा। अिमत ने नखरे िदखाए। आिखर यही तो
दखे ी तो ह पर नाम याद नह आ रहा, परो प से उ ह ने मौका होता है जब सहायक अिभनेता हीरो पर हावी होता है।
कहा। ऐसी बात न कर भाई । तेरे ही बल पर तो यहां तक पहचं ा ह।ं
अरे वह रयर िवडं ो दखे ी थी न, याद नह ! अिमत ने सहायक ठीक है। यादा तेल लगाने क ज रत नह । बोल या करना
अिभनेता के िकरदार को यथाथ म उतारा। है?
अ छा वह ! ग जी को अब भी याद न आया िक उ ह ने इस वही तो मालूम नह । ग धीमे वर म बोले।
नाम क िफ म कभी दखे ी हो, पर हां म हां िमलाने म ही भला यार तो म या क ं ? न तू बताता है िक या करना ह,ै न खदु
िदखा। कु छ करता ह।ै
सचमचु बहत अ छी िफ म थी, और लाइमे स िकतना मेरा मतलब है िक कु छ सोच तािक इस बार बात बनकर ही
रोमांचक था, बाला उ सा िहत होकर बोली। रह।े
ग जी िचिं तत हो उठे िक िफ म के बारे म कु छ और न पूछ दोन कु छ दरे चपु चाप लेटे रहे।
बैठे तभी िफ म चालू हो गई और शु आत म ही एक बड़ा आइिडया ! अचानक अिमत उछल पडा। तझु े एि टंग करनी
रोमािं टक गाना शु हो गया। ग जी ने चैन क सासं ली। पडेगी।
व कु छ और आगे बढ़ता है। िफ म वाली बात भी लाई ेरी एि टंग नह यार म तो िदल से उसे चाहता ह।ँ
क भािं त कु छ आिं शक सफलता िदला पाई। िफ म के दौरान पूरे अरे म वह बात नह कर रहा, दखे अभी कॉलेज का एनअु ल
समय सहले ी ने क या का पीछा ही नह छोड़ा। बचाखचु ा व डे आने वाला है। उसम अ यं काय म के साथ नाटक का भी
इंटरवल और उस दौरान परपं रागत खाने पीने म चला गया। कई आयोजन होगा!
बार अिमत ने इशारा िकया िक वे बाला के आगे कु छ इजहार कर हां तो?
पर एकांत न होने क वजह से ग जी िह मत न जटु ा पाए। इधर तो या।! तू इसम िह सा ले। यह तो प का है िक उसे नाटक
उधर क बेिफजूल बात के अलावा मु े क बात पर आने का दम मे बहत इटं रे ट ह।ै वह ज र भाग लेगी।
तो या होगा ?
अरे मूख, जब तमु दोन उसम अिभनय करोगे तो रहसल के

4

दौरान िकतना व साथ िबताने िमलेगा ? और वहां का तो माहौल तज पर कहा।
ही अलग होगा। या मालूम तु ह अपनी बात कहने का मौका ही तो िफर िकसिलए कर रहे हो? अिमत को गु सा आ गया।
िमल जाए। और नाटक म ेिमय का रोल अदा करते या मालूम अरे बार-बार रीटेक करने पर साथ म रहने का िकतना बिढ़या
यथाथ म भी वही भाव जा त ह जाए?ं
मौका िमल रहा है ? और भले ही डायलॉग क अदायगी ठीक न हो
यार बात तो पते क ह,ै पर मझु े एि टंग कहां आती है ? ग रही हो, भावनाएं तो बार-बार य हो ही रही ह। ग जी गड़ु से
जी ने शकं ा कट क । श कर बन रहे थे।

तो िकसे आती ह?ै सभी रगं ट ह, अिमत ने हौसला बढ़ाया। ब चू यह यान रहे िक कह भावनाओं के च कर म तु ह
यार तेरे िबना न जाने मेरा या होता! ग जी ने कृ त ता से नाटक से ही चलता न कर िदया जाए ! अिमत ने चेताया।
कहा।
कु छ नह होता। तेरा वसै े भी कु छ होनेवाला नह है। अब उठ, ठीक है। अगली बार िब कु ल टकाटक होगा, ग जी
अपना नाम िलखवाने क तैयारी करगे ा या पड़ा ही रहेगा ? आ मिव ास से बोले।
दोन फटाफट उठ नाम िलखवाने दौड़ पड़े।
छा ने नाटक का भी चयन िकया तो दवे दास का ! याने मे यार भी या या करवाता है ! उस िदन के बाद से ग जी ने
रस का पूरा समावशे और पा को अपने मन क बात कला ारा के वल यही एक डायलॉग नह बि क पूरी रहसल म वो परफामस
िदखाने का पूरा मौका। दी िक सभी वाह वाह कर उठे। कु छ लोग को तो उनके भाव उ च
िकसी तरह लीड रोल िमल जाए, ग जी ने सासं भर कर कोिट के कलाकार के तर के मालूम पड़े।
कहा।
िब कु ल िमलेगा। अिमत ने हौसला बढ़ाया और सचमचु भला जब बोल मन से िनकल रहे ह तो रोल म जान तो
अगले कु छ िदन म न जाने या च कर चलाया िक दोन मखु आएगी ही ! ग जी ने अिमत को अदं र क बात बताई।
िकरदार अथात् दवे दास व पारो के ग जी और बाला के झोले म
आ िगर।े िफर या था ? ग जी पढ़ाई छोड़ रात-िदन डायलॉग अिमत क बात गलत न थी। रहसल के लबं े दौर के चलते ग
रटने म जटु गए। जी को सािन य के कई सअु वसर ा हए और कहना चािहए िक
‘ एक बात होती थी, जब तमु बहत याद आती थ ’ लाईन तो उनने इन मौक का सदपु योग भी िकया। सीधे तौर पर तो नह पर
बहत छोटी थी और सरल भी पर न जाने य ग जी उसे न तो घमु ािफरा उ ह ने अपना झकु ाव तो जािहर कर ही िदया।
ढंग से बोल पा रहे थे और न ही चेहरे पर भाव ला पा रहे थे। बार
बार रीटेक करना पड़ रहा था। छुटृी का िदन था और हो टल के तो च र अिभनेता के य न से ग जी क मे नौका चल
ागं ण म ही रहसल का अड्डा बनाया गया था। एक अनभु वी छा पड़ी थी। या कहा जाए िक अब वह िवपरीत लहर को भी बड़ी
डायरे टर का रोल िनभा रहा था। बीच-बीच म ए टस को शि पूवक धके लते बढ़ रही थी तो अितशयोि न होगी। अब तो
िहदायत भी दते ा जाता था। उसे खेने वाले भी दो मे ी जो थे। लहर भले िवपरीत थ पर
आिखर बात या ह?ै अिमत ने रहसल के बाद ग जी को नािवक के िदल क लहर िब कु ल लय म थ ।
एक ओर ले जाकर पूछा।
या बात है ? ग जी ने पलट कर िकया । अब तो वह आए िदन पढ़ने के बहाने उनके कमरे म भी आ
तमु इतना सरल डायलॉग य नह कर पा रहे हो? जाती और घंट दोन कमरे म बैठे गटु रगूं िकया करते। जािहर है
अरे कौन कमब त डायलॉग को पूरा करने के िलए ए टर िक इस दौरान िकतनी पढ़ाई होती और िकतना मे ालाप। ग जी
कर रहा है? ग जी ने इसी नाटक के एक और मशहर डायलॉग क ेम क क ती म सवार हवा के झ के के सहारे लहर म िहडं ोले
खाते रहते।

यह वह व होता है जब िफ म के दशक च र अिभनेता को
भूलने लगते ह मानो उसका रोल ख म हो गया हो। पर नह ! रोल
तो अब शु होता ह।ै ेम के बीज बोना तो रोल का एक पाट है,
असल अिभनय कला का परी ण तो बीज से बने पौधे को तेज
हवा पानी से बचाना अथात ेम के रा ते म आने वाली कावट

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का सामना कर हीरो को ल य िदलवा कर होता है। भी तो हमारी कटीन का लु फ उठाइए। अिमत तरु तं बोला और
ऐसे ही एक िदन करीब 12 बजे का व होगा। ग जी अपने उ र का इंतजार िकए बगैर बैग िलए मेस क ओर बढ़ िलया। पीछे
पीछे बाबूजी को भी आना पड़ा।
कमरे म यार क गु तगू म मशगूल थे। जािहर ह,ै अिमत एकातं
दने े क वजह से बाहर ही था। फालतू म टाइम बरबाद न कर वह अरे चाय दने ा! चीनी कम। उसने काउंटर पर आडर िदया
नजदीक के माकट क ओर चल िदया। सोचा कु छ हर िदन के और बाबूजी को एक कु स पर िबठा िदया।
उपयोग क चीज ही खरीद ले आए। अभी कपस के बाहर िनकला
ही था िक सामने से ग जी के बाबूजी िदखे। आटो र शे से उतर आप चाय पीिजए म दखे कर आता हं िक कमरे म झाड़ लग
वह िकराया देने के िलए बटुआ िनकाल रहे थे। दखे ते ही अिमत गई या ?
िठठक गया।
साथ ही चलगे न? बाबूजी बोले।
अब या होगा ? कमरे का तो हाल बेहाल ह,ै जाकर ग को अरे यह व झाड़ लगने का ह।ै ग भी शायद कह गया हआ
आगाह कर दूं ? पर तभी बाबूजी ने उसे दखे िलया। अब तो उपाय है। कमरे म कोई न हआ और झाड़ वाला चला गया तो िफर कल
न था। तेज चलते र शे के पास पहचं ा। तक कोई उपाय नह । आप कहां वहां जाएगं े? म य गया और य
आया। तब तक आप चाय पीिजए, अिमत ने कहा और भागता
पायं लागू बाबू जी। कू ल के िदन से ही वह उ ह अ छी तरह हआ कमरे म जाने के िलए जीने क ओर लपका।
जानता था। चलो! भागना होगा। कमरे म घसु ते ही हाफं ते हए उसने कहा।
अरे यह या बात है? ग को उसका इस तरह आना अ छा
जीते रहो बेटा। कै से हो ? बाबूजी स नतापूवक बोले। न लगा।
अब तक तो ठीक हं पर पता नह कब तक रहगं ा। मन ही मन
उसने सोचा। बेटा, तु हारे बाबूजी आए ह। बड़ी मिु कल से नीचे मेस म
पर आप अचानक कै से ? अिमत का िदमाग तेजी से काम कर बैठाकर आया ह।ं अब चलो ज दी ज दी कमरा ठीक ठाक करो
रहा था। और झाड़ नह लगी अभी तक ?
अरे बेटा बहत िदन से ग का प नह आया तो िचतं ा लगी।
आज छुटृी थी तो सोचा जाकर िमल ही आऊं । य झाड़ का या करना ? और बाबूजी अचानक ? ग
अ छा िकया आप आ गए। आइए म ले चलता ह।ं अिमत ने आ यचिकत हो बोला।
बैग उठाते हए कहा।
तमु कह जा रहे थे ? बाबूजी ने पूछा। तमु तो यहां पढ़ने म इतने मशगूल हो िक िच ी िलखने तक
कह नह , यह माकट तक जा रहा था। बाद म चला जाऊं गा, का टाइम नह । आिखर बाबू जी या करते ? अिमत यंगा मक
आइए। अिमत बड़ी तेजी से उपाय सोचने म लगा था। आिखर एक लहजे म बोला। ज दी करो, झाड़ का बहाना कर के ही तो बाबूजी
आइिडया आ ही गया। कमरे क ओर न जाकर वह बाबूजी को को मेस म िबठाकर आया ह।ं
थम तल म ि थत मेस क तरफ ले गया।
अरे बेटा इस तरफ कहां जा रहे हो? बाबूजी ने पूछा। पर झाड़ तो लगाने कोई आया ही नह । दखे ो िकतना गदं ा
आप थक गए ह गे। चिलए पहले मेस म चाय ना ता कर लेते पड़ा है। ग बोला।
ह, िफर क कर चलगे, अिमत ने दलील दी।
अरे चाय तो मने टेशन पर ही पी ली थी। बाबूजी ग से तब तो मेरी बात गलत पड़ जाएगी। ऐसा करो तमु इ ह
िमलने आतरु हो रहे थे। गिलयारे तक छोड़ आओ तब तक म झाड़ लगा दते ा ह।ं बाबूजी को
अरे बाबूजी, टेशन क चाय भी चाय होती है ! आइए आप यह लगना चािहए िक अभी अभी झाड़ लगी है नह तो उ ह लगेगा
िक कु छ गड़बड़ थी तभी उ ह वहां िबठा िदया गया। अिमत ने
लपक कर झाड़ उठा ली और फटाफट कमरा चमकाने लगा।

ग जी ने कृ त तापूवक अिमत को दखे ा और ेिमका को
छोड़ने गिलयारे क ओर चल पड़े। उनक नजर म आज अिमत
िकसी ऑ कर अवाड ा च र अिभनेता से कम न था।

- धान मु य िसगनल एवं दूरसचं ार इंजीिनयर
म य रले , मबंु ई छिशमट

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• कहानी

ताजमहल

ए.के .िम ा

पलक ने झपकना बदं कर िदया था | दो घटं े से लगातार दखे े ताजमहल बसा हआ है | यह सदंु रता िसफ ईटं ,प थर और सीमट
ही जा रहा था | नजर हटाने क इ छा ही नह हो रही थी | अ ितम चूने से खड़ी क गई दीवार और छत से नह आ सकती है | इसम

सौ दय | सदंु र क पना से भी कह यादा खूबसूरत | िकसने ज र स ची मानवीय सवं दे नाएँसमािहत ह |
सोचा होगा इसक परखे ा के बारे म | वह मि त क िकतना उवर बस से उतरकर एक होटल म अपना सामान वगैरह रखा और

और खूबसूरत रहा होगा | ऐसे ितभावान इजं ीिनयर आज य िफर िनकल पड़ा ताजमहल को दखे ने के िलए | ताजमहल से
नह िदखते ह ? या आज इसे बनाना सभं व है ? सचमचु पहले का रा ता िबलकु ल भी इसका आभास नह होने दते ा था
अ तु ,बेिमसाल है यह ! िक इनक मंिजल चम का रक होगी |

मे से कु छ भी सभं व है,यह बात मने सनु तो रखी थी पर रा ते भर तरह-तरह क क पनाएँ करता रहा | शाहजहाँ ने
अनभु व आज कर रहा था | शरीर का एक-एक कण रोमांिचत था | आिखर एक महल बनवाने का ही िनणय य िकया ? भावनाओं

भारत क पहचान यिद इससे है तो यह इसके कािबल भी है | को भौितकता से जोड़ने क आव यकता या थी ? दिु नया को
अगल-बगल, चार तरफ हजार लोग थे लेिकन यान िसफ और बताने क या ज रत थी ? लोग इसे आडंबर का नाम भी दे

िसफ इसी म था | सकते ह | िजतने महुँ उतनी बात | सदंु र झील बनवा सकते थे |

मे के इस तीक को दखे ने क इ छा वष से थी | िकताब म इंसान और जानवर के िलए शु जल पीने और अ य उपयोग के
इसके बारे म जब भी पढ़ता या टेलीिवजन म दखे ता, दय म इसके िलए िमलता | सदंु र मि जद बनवा सकते थे | ऊँ ची मीनार बनवा
दशन क बल इ छा जागतृ हो जाती | उस समय भाव इसक सकते थे | भोपाल के तालाब क तरह बड़ा तालाब बनवा सकते
सदंु रता के ित उमड़ते थे | बाद म जब इसके अि त व के कारण थे | सदंु र फल से लदे रहने वाला बाग-बगीचा लगवा सकते थे |

क जानकारी हई तो भाव का दायरा कह यादा यापक हो गया | कई तरह क बात िदमाग म आ-जा रही थ | मन म इन के

इसम कला कौशल के अलावा मे क खशु बू भी शािमल हो गई | उ र भी आ रहे थे | िफर एक बात समझ म आई िक सटीक उ र
अब यह और भी यादा खूबसूरत लगता था | तो शाहजहाँ ही दे सकते ह और वह इस दिु नया को बहत पहले
छोड़ चकु े ह |
नौकरी पाकर आगरा घूमने का िवचार मने याग िदया
य िक धीरज अब जवाब दे रहा था | खदु को रोक पाना सभं व दकु ाने सजी हई थ | मने कु छ दकु ान म रखे सामान पर
तीत नह हो रहा था | मन म दाशिनकता भरे िवचार आने लगे थे| नजर डाली और िफर लौटकर ख़रीदारी करने क बात सोचकर

जैसे जीवन का या भरोसा है | अगले ण क गारटं ी कौन दे आगे चल पड़ा | गेट पर मेरी तलाशी ली गई | मने दोन हाथ खड़े

सकता है | कर िदए | सदंु र शट पट के जेब को छूआ और िफर आखँ से आगे

जो भी थोड़े-बहत पैसे पास म थे उसी म से आगरा घूमने का बढ़ने का इशारा िकया | म आगे चल पड़ा |

काय म बनाया | रले गाड़ी से िद ली गया और िफर बस सामने वह था िजसके बारे म मने साल तक तरह-तरह क

पकड़कर आगरा का ख िकया | रा ते भर एक अलग रोमांच ने क पनाएँक थी | वह मझु े ख च रहा था और म आगे बढ़ रहा था |
िदमाग को जकड़ िलया था | कु छ और सोचने समझने के िलए कु छ लोग से िभड़ते-िभड़ते बचा य िक नजर कदम के बजाए
िदमाग म जगह नह रह गई थी | मन म मे और िसफ मे के भाव सामने के अजूबे पर थ | एक मिहला ने तो थ पड़ ही मार िदया
उमड़ रहे थे | मन िबलकु ल ह का और शातं था | था,यिद मने हाथ न जोड़ िलया होता | उसे खदु के बारे म बड़ा म

आगरा क धरती पर जैसे ही बस ने वशे िकया,ताजमहल था य िक वह उतनी सदंु र नह थी िक म जानबूझकर उससे

का िच मन म उमड़ने लगा | ऐसा लगता था मानो कण-कण म िभड़ने का यास करता | म ऐसी धृ ता कभी करता भी नह हँ |

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सीिढ़य के नजदीक पहचँ कर मन क य ता और बढ़ गई अनभु ूित जो गभं ीर मंथन के उपरांत दय प रवतन से
थी| मिं जल के नजदीक पहचँ कर इनसान का धीरज कम होने ही उ प न होती है !
लगता है |
सबु ह उठकर म पनु ः ताजमहल क छिव म खो गया | कमरे
मने पूरा महल दखे ा और िफर सामने बैठ गया | िजतना क िखड़क से ऊपर आसमान क तरफ दखे ते हए मझु े
िनहारता मन क यास उतनी ही बढ़ती जाती | ताजमहल का िच नजर आ रहा था | मे के चौपाए म िटका हआ
ताजमहल | ेम क खशु बू से भरा हआ ताजमहल | ेम और
िविभ न दशे के लोग इसे दखे ने के िलए आए थे | अं ज़े एकता का सदं शे दते ा ताजमहल |
यवु क यवु ितयाँ आपस म हसँ ी िठठोली कर रहे थे | कु छ तो
सामा य ेमालाप भी कर रहे थे | उनके िलए सामा य था लेिकन अमर मे के बारे म सोचते-सोचते मझु े अपने मे सगं क
हमारे िलए यह खीस िनपोरने का िवषय था | शायद मे क बात याद आने लगी | य िप ताजमहल को दखे ते व त मझु े अपने
िनशानी को दखे कर उनके अदं र का ेम उमड़ आया था | इसके ेम का भान लगातार बना हआ था |
सामने ेम का दशन करके वह अपने मे को अमर करने का
सोच रहे ह गे | ऐसा भी सभं व है िक वह यहाँ क ऊजा को अपने मेरे पहले ेम का उदय भी उसी उमर म हआ था िजस उमर
ेम म समािहत करना चाह रहे ह | खैर जो भी बात रही हो मेरा म शाहजहाँ के मन म ममु ताज़ ने जगह बनाना चालू िकया था |
यान इन सब पर बहत कम था लेिकन चूिँ क ऐसा खलु ा ेमालाप उसक सदंु रता ताजमहल से कह भी कम नह थी | तब वही मेरे
हमारे यहाँ दखे ने को नह िमलता है,यह दखे ने क उ सकु ता तो िलए ताजमहल थी | हम दोन एक ही कू ल म पढ़ते थे | कू ल म
जगाता ही है | नए िदन क शु आत उसको दखे ने के बाद ही होती थी | यिद
िकसी िदन उसके दशन नह हए तो सवाल ही नह उठता था िक
सूरज डूबने लगा तो िदमाग म वापस जाने क बात आई | न कोई िवषय समझ म आ जाए | मन इतना बेचैन हो जाता था िक
चाहते हए भी उठना पड़ा | रा ते क दकु ान से कु छ ख़रीदारी क अदं र से ोध उमड़ने लगता था |
िजसम मु यतः ताजमहल क मूित ही थे | घर के िलए और कु छ
खास प रिचत के िलए | होटल तक का रा ता इन मूितय को कू ल क हाफ छु ी के समय म उसके इद िगद ही मडँ राता |
िनहारते हए बीता | एकाध बार उसने मझु े दखे िलया तो मानो िदन सफल हो जाता
था| जीवन अथवान लगने लगता था | हर लड़का जो उसके बारे म
आगरा म कने का और कोई मतलब समझ म नह आया कु छ बात बोलता,मेरा दु मन बन जाता था | और ारा क गई
इसीिलए वापस िद ली आ गया | उसक शसं ा भी मेरे अदं र असरु ा का भाव पैदा करती थी |

रात भर ताजमहल का सौ दय िदमाग को घेरे रहा | न द म भी एक रोज क बात थी | राहल ने उसको दखे कर मेरी तरफ महुँ
उसी का व न आ रहा था | आिखर ऐसा या है उस ईटं प थर करके मु कु रा िदया था | मेरा िदमाग भ ना गया | ोध म कापं ते
क िबि डंग म | िसफ सदंु रता इतने थायी आकषण का कारण हए म ज़ोर से िच लाया,“ या है बे ? तू इस तरह मु कु रा य रहा
कभी नह हो सकती है | जादू तो नजर का फे र होता है पर यह तो है ?”
नजर म कै द हो जाता है | िदमाग म नशे क तरह छा सा जाता है |
भगवान म लीन िवर योगी क तरह मे मय बना दते ा है | “अबे,तू तो ऐसा िबहेव कर रहा है मानो सधु ा तेरी ही है |”
“ साले !..............दबु ारा ऐसी बात महुँ से मत िनकालना |”
मने शाहजहाँ और ममु ताज़ के ेम के बारे म काफ पढ़ा था | “बोलूगँ ा !...........वह मेरी भी लासमेट है |”
अलग-अलग मत ह | कई कार क बात कही गई ंह | लोग क म ोध से आगबबूला हो गया और कापं ते हए राहल क गाल
अलग-अलग धारणाएँह | लेिकन इस बात से इकं ार नह िकया जा पर ज़ोर से थ पड़ मार िदया | सारे ब चे बीचबचाव के िलए आ
सकता है िक इस ेम म कु छ तो था जो इसे आज तक ासिं गक गए| सनु ील ने ोध को शातं करने के िलए मेरे सर पर अपनी
बनाए हए है | शाहजहाँ को ेम क स ची अनभु ूित ज र हई होगी बोतल का पानी उड़ेल िदया | म कु छ ठंडा हआ | राहल के ऊपर
तभी इतनी अ ितम कृ ित क रचना सभं व हो पाई है | कु छ दया भी आई | बात वह पर समा हो सकती थी लेिकन

8

राहल क एक आदत ने बात को चारो तरफ फै ला िदया | “शट अप !” ि य वदा मैम च मा सभं ालते हए गु से से
दरअसल राहल क रोने क आदत थी | वह बड़ा ज दी िच लाई |ं

अपमान महसूस करने लगता था और गला फाड़-फाड़कर रोने कू ल ांगण के कोने-कोने म उनक आवाज िविभ न
लगता था | मेरे थ पड़ के बदले म उसने कोई और िति या आविृ य के साथ गूजँ ने लगी | एक समय पर अलग-अलग जगह
य नह क बि क भावकु ता के साथ लयब होकर ज़ोर-ज़ोर पर अलग-अलग अ र आसमान और धरती के बीच तैरने लगे |
से रोने लगा | कू ल ागं ण उसक रोने क आवाज से भर गया | जैसे कह श ,कह ट ,कह अ तो कह प | इन अ र क मूल
हर तरफ उसके क ण दन का एकसमान वाह था | बात आविृ के साथ अ य कई आविृ याँ भी िनकल रही थ | ठीक
िश क तक कै से नह पहचँ ती | ि य वदा मैम इन बात को लेकर ऐसे ही जैसे हर यि के महुँ से िनकले श द क विनयाँ अलग-
बहत ही यादा सवं ेदनशील थ | कू ल म ऐसी वसै ी बात नह अलग होती ह |
होनी चािहए | यह िव ा का मंिदर है और यहाँ पढ़ने वाले ब च क
उमर च र िनमाण क होती है न िक ेम सगं क | सारे ब चे सावधान क मु ा म खड़े हो गए | कु छ नटखट
टाइप के लड़के पीछे खड़े होकर महुँ को दबाकर खीस भी िनपोर
ि य वदा मैम िमनट के अदं र राहल के पास पहचँ गई |ं रहे थे |
“ या हआ राहल ? रो य रहे हो ?”
राहल और भावकु हो गया और उसके गले से िनकलने वाली अब तक ि ि सपल महोदय भी पहचँ गए थे | ि ि सपल
आवाज और तेज हो गई | रामशरन मालवीय बड़े उ च िवचार के इनसान थे | नैितकता
“नह नह ..............रोते नह है मेरे ब चे !” मैम ने और मू य के िबना िश ा का कोई अथ नह होता ह,ै ऐसा उनका
पचु कारते हए कहा | मानना और िव ास था |
“मैम !..........अिनल ने मझु े मारा है |” राहल ने हाथ से
अिनल क तरफ इशारा करते हए कहा | पूरी बात को सनु ने के प ात उ ह ने सधु ा को भी बलु ाया | म
“ य ?” खशु हो गया िक सधु ा क नजर म आज म अजर अमर हो
राहल चपु रहा | अब वह रोने के साथ-साथ िससकने लगा जाऊँ गा| वह मेरी पूजा करने लगेगी | मेरी भावनाओंको समझकर
था| िवत हो जाएगी |
“बोल मेरे ब चे ?”
“मैम !.........इसने मेरे और सधु ा के बारे म अपश द कहा है|” ि ि सपल साहब ने सधु ा को खड़े रहने के िलए कहा और
अिनल ने टोकते हए बीच म ही कहा | िफर मझु े और राहल को पास आने के िलए कहा | एक ण के िलए
“ या कहा है ?” मझु े लगा िक वह सधु ा को मेरी स ची भावनाओंऔर राहल क
“यही िक सधु ा मेरी है |” कु िटल सोच से अवगत कराने वाले ह | म हीरो क तरह कदम
“मैम यह झूठ बोल रहा है | मने सधु ा क तरफ दखे कर उसके बढ़ाते हए सधु ा के नजदीक जा रहा था | राहल मेरे पीछे था |
खेल क शसं ा क तो यह िचढ़ गया |” राहल गु से से बोला | उसक चाल से ऐसा तीत होता था िक मानो उसे िकसी
“यह कोरा झूठ बोल रहा है मैम | इसने सधु ा क तरफ दखे ा अनहोनी क आशकं ा हो चकु है |
और िफर िचढ़ाने के अदं ाज से मेरी तरफ दखे ा | मने जब
ऑ जे ट िकया तो यह िचढ़कर बोला िक तू तो ऐसा िबहवे कर “तमु दोन सधु ा के परै छूकर उससे कहो िक बहन हम माफ
रहा है जसै े सधु ा तेरी है |” अिनल ने एक सासँ म कहा | कर दो |” ि ि सपल साहब ने गु से के साथ कहा |
“यह झूठ बोल रहा है मैम | मने ऐसा कु छ भी नह कहा है |”
राहल झट से सधु ा के परै पर लोट गया और उससे माफ
मांग ली | म अतं द म उलझा हआ था | इतना ज दी कै से बदल
जाता | म चपु चाप खड़ा रहा |

“माफ मांग मूरख !” ि ि सपल पनु ः िच लाए |
मने सधु ा क तरफ दखे ा | वह स न थी िक हम लोग उससे
आशीवाद मागं रहे ह | उसके चेहरे से ऐसा तीत हो रहा था मानो

9

उसे कु छ भी अता-पता नह था | क याओंके पैर तो पूजे ही जाते गया और म एक महीने के िलए िब तर के सपु दु कर िदया गया |
ह | लेिकन कु छ गड़बड़ है य िक ि ि सपल साहब और ठीक नौ बजकर प चीस िमनट पर अगले िदन पैर म मझु े
ि य वदा मैम दोन गु से म ह |
असहनीय पीड़ा हई | इसके अगले िदन भी यही हआ | यह रोज
अदं र ही अदं र म जलभनु गया | होने लगा | म िच ला-िच लाकर कराहता था | रोता था | पाचँ
“मूरख कह का,चल मागं माफ !” यह कहते हए ि ि सपल िमनट के बाद दद गायब हो जाता था | डॉ टर भी परशे ान थे | दद
साहब ने एक ज़ोर का थ पड़ मेरे गाल पर जड़ िदया | थ पड़ बहत का कारण उनक समझ के बाहर था | इस तरह का यह पहला
मारक और भेदक था | मि त क के सारे कपाट खलु चकु े थे | के स था |
िदमाग पूरी तरह सतं िु लत हो गया था | मेरे पहले ेम क लीला का
समापन हो चकु ा था | एक िदन माँ को पता नह या सूझा िक उ ह ने िपताजी से
राहल के चेहरे म स नता क चमक छा गई थी | उसके चेहरे कहा िक सबु ह-सबु ह मझु े छत म बैठा िदया कर,इससे वा य म
से समझा जा सकता था िक मेरे दद ने उसके दद को पी िलया है | ज द सधु ार हो सकता है | अगले िदन नौ बजकर पं ह िमनट पर
अगला थ पड़ न पड़ जाए इसी डर का अनमु ान करके म मझु े छत म बैठा िदया गया | म बेचैन होकर उसका इंतजार करने
सधु ा के चरण म लोट गया और ज़ोर से िच लाया,“हे दवे ी ! मझु े लगा | नौ बजकर प चीस िमनट पर वह िनकली और मड़ु कर
माफ कर दो ! ” दखे ा | म पहले से ही उधर दखे रहा था | उस िदन मझु े दद नह
उस समय एक चीज बिढ़या थी िक इन घटनाओंका पढ़ाई हआ | िपताजी, माँ को डॉ टर से भी ऊँ चा समझने लगे | घर म
िलखाई पर बहत यादा िवपरीत भाव नह पड़ता था | िकसी क भी तिबयत खराब हो,वह ाथिमक इलाज माँ से ही
म अपनी पढ़ाई िलखाई म िभड़ गया और पहले मे को भूलने पूछते | डॉ टर साहब ने भी माना िक छत म खलु ी हवा खाने से
लगा | मरीज ज दी ठीक हो जाते ह |
दूसरा मे अगले साल हआ था | वह हमारे घर के सामने से
सबु ह ठीक नौ बजकर प चीस िमनट पर साइकल से िनकलती एक महीने के बाद मेरा ला टर उतर गया और िदनचया पनु ः
थी | म उस समय ना ता करके कू ल जाने के िलए तैयार होता उसी तरह शु हो गई |
था| म ज दी-ज दी कपड़े पहनता और भागकर छत पर पहचँ
जाता | म उसको जाते हए दखे ता और वह भी एक बार छत क गरमी क छु य म हम लोग महीने भर के िलए मामा के घर
तरफ ज र दखे ती | मेरी माँ को इस आखँ िमचौली के खेल के गए थे | लौटने के प ात जब कू ल ारभं हई तो पहले ह िदन म
बारे म अदं शे ा हो गया था | उ ह ने एक िदन मझु से पूछा भी िक म नए कपड़े पहनकर नौ बजकर प चीस िमनट पर छत पर पहचँ
तैयार होकर रोज छत क तरफ य भागता हँ | मने कह िदया था गया | वह नह िदखी | म करीब पं ह िमनट तक खड़ा रहा | माँ
िक माल ढूँढ़ने के िलए जाता हँ | माँ ने मु कु रा िदया था | शायद िच लाई िक म कू ल के िलए लेट हो रहा हँ | म नीचे उतरा तो
उ ह इससे िवशेष आपि नह थी य िक इसका अि त व नौ उ ह ने बताया िक उसके िपताजी का तबादला हो गया है और वह
बजकर प चीस िमनट पर दो िमनट के िलए छत पर जाने और दूसरे जगह चली गई है |
उतरने तक ही सीिमत था | मेरी पढ़ाई िलखाई ठीक ही चल रही
थी | म खोया-खोया सा भी नह रहता था | म शरमा गया और महुँ छुपाते हए कू ल के िलए िनकल पड़ा |
एक िदन तैयार होने म थोड़ी दरे ी हो गई | नौ बजकर प चीस करीब दो महीने तक सबु ह नौ बजकर प चीस िमनट पर म छत
िमनट और अठारह सके ं ड हो गए थे | कह वह िनकल न गई पर माल ढूँढ़ने के िलए जाता रहा | बाद म बदं कर िदया |
हो,यह सोचकर म सीिढ़य म ज दी-ज दी चढ़ने लगा | मेरा परै
िफसल गया और पैर म भयकं र मोच आ गई | ला टर चढ़ाया महीने भर मन म भयकं र उदासी छाई रही | धीर-े धीरे
प रि थित को मने वीकार िकया और जीवन को पटरी पर ख च
लाया |

तीसरा मे उसी साल हआ, टेफ़ ाफ से | उसके िखलाफ
एक श द भी नह सनु ा जाता था | मन म इ छा होती िक दिु नया के
सारे टूनामट वही जीत | उसक फोटो लगी कवर वाली कािपयाँ

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ही म खरीदता था | कभी-कभी पढ़ते समय कािपय के कवर को पढ़ाई िलखाई कै सी चल रही है | परी ा के समय पूछते िक पेपर
दखे ने लगता | खो जाता व नलोक क दिु नया म | मझु े पता था कै से जा रहे ह | कौन-सा िश क कै सा पढ़ा रहा है | तदलु कर के
िक उनको पाना बहत मिु कल है पर ेम पर वश िकसका चला है | खेल के बारे म हम अ सर बात करते | मौसम का हालचाल भी
यह तो बस हो जाता है | रोज ही पूछते थे | यादा गरमी या ठंडी पड़ रही हो तो हम एक
दूसरे क तरफ दखे कर 'उ फ़' का इशारा करते | हम पागल
आगे के साल म मेरे समाना तर ेम सगं चले | कु छ िे मय क तरह ेम का दशन नह करते थे | सब कु छ मन ही
छमाही,कु छ वािषक तो कु छ और लंबे समय वाले | कु छ तो पानी मन म था | दय क गहराइय म |
के बलु बलु के समान एकदम िणक थे | लेिकन इनम से िकसी म
भी वह गहराई और थािय व नह था जो िकसी बड़ी कृ ित के दरअसल हमारा ेम दय पी िम ी म अकं ु रत होकर
िलए रे णा बन सके और मझु े शाहजहाँ क तरह अमर व िदला समय और धीरज पी हवा पानी के साथ धीर-े धीरे बड़ा हो रहा
सके | था | इसम िदखावटीपन या इजहार जसै ी कोई बात नह थी | यह
िसफ महसूस िकया जा सकता था | म तो अ छे से महसूस कर
एक बात और मेरे अिधकांश ेम सगं पूणतः मानिसक और रहा था पर वह िकतना गहराई तक महसूस कर रही थी,यह म
वचै ा रक आधार वाले थे | यादातर म बातचीत आखँ के मा यम ठीक से नह जानता था | उसने न कभी बताया था और न मने
से ही होती थी |ऐसा मझु े लगता था य िक दूसरे प के बारे म म कभी पूछा ही था | हाँ ! उसके हाव-भाव से म यह समझ रहा था िक
िसफ अनमु ान ही लगा सकता था | उसके भीतर भी कु छ मे पी रासायिनक ि या चल रही है |

कॉलेज के फ़ाइनल म आते-आते आिखर मझु े वह मे िमला कालेज के बाहर हम कभी नह िमलते थे | म िन न
जो मेरे जीवन को नई िदशा दने े के लायक था | इसने मझु े जीवन म यमवग य प रवार से था और मझु म इतना दःु साहस नह था
को समझने का मौका िदया | सयं ोग से यह ेम अभी तक चल रहा िक म खु लम खु ला मे कर सकता | मेरी ऐसी चाहत भी नह
था | थी | मझु े मधू के प रवार और उसक खदु क िजदं गी का भी
खयाल था | यिद उसके घरवाले नह तैयार हए तो वह िबना वजह
म एक िदन कॉलेज से घर जाने के िलए बस टॉप पर खड़ा झझं ट म फं स जाएगी | म अपने घरवाल को भी िकसी कार क
था | मधू अपनी लूना से सामने से गजु र रही थी | उसका घर मेरे दिु वधा या सकं ट म नह डालना चाहता था | कु ल िमलाकर म एक
घर के नजदीक ही था और वह मझु े अ छे से जानती थी | म भी िज मेदार और िनः वाथ मे ी था | खदु से यादा म भगवान पर
उसको जानता पहचानता था | आसमान पर काफ बादल छाए िव ास कर रहा था | म रोज भगवान से उसे मांगता था | म जानता
हए थे और ऐसा अनमु ान लगाया जा सकता था िक ज दी ही तेज था िक यिद भगवान चाहगे तो मधू मझु े ही िमलेगी और यिद वह
बा रश हो सकती है | िकसी और क है तो िफर म चाहे िकतना भी सर पटकूं गा वह मझु े
नह िमलेगी | भगवान क स ा और होइ ह वही जो राम रिच
पता नह मधू को या सूझा िक उसने अपनी लूना को रोक राखा,यह मेरे मन मि त क म बचपन से भरा हआ था |
िलया | म भागकर उसके पास गया |
आप लोग मझु े डरपोक मत समझ लीिजएगा | दरअसल म
“पता नह बस कब तक म आएगी ? बा रश ज दी ही शु मे के मामले म आदशवादी था और मे म याग को मह व दते ा
होने वाली ह,ै तमु लूना म बैठ जाओ |” था | म यिद राजा महाराजा होता तो भी िकसी को जबद ती
अपनी रानी नह बनाता | कई रािनयाँ तो कदािप नह रखता |
म लूना चलाने लगा और मधू पीछे बैठ गई | बीच रा ते म ज़ोर
क बा रश चालू हो गई थी | हम दोन एक पेड़ के नीचे पानी से अपने मे के बारे म सोचते-सोचते म कु छ ज बाती हो गया |
बचने क कोिशश म खड़े हो गए | जब बा रश समा हई तब हम आखँ से आसँ ू िगरने लगे तो मने तौिलया उठाकर उ ह प छा |
घर पहचँ े |

इसके बाद हमारी मलु ाक़ात कॉलेज म अ सर होने लगी |
हम एक दूसरे को दखे कर मु कु रा दते े | कभी-कभार पूछ लेते िक

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म वापस ताजमहल के बारे म सोचने लगा | उसके अि त व साथ िकए जाने वाले मानिसक या शारी रक,धोखे और अ याचार
के कारण के बारे म सोचने लगा | सोचना मेरी आदत थी | अभी भी के कारण उ प न होता है | उसक भावनाओं को जाने या
है | कई-कई कार से सोचता हँ | सबु ह,दोपहर,शाम अलग-अलग अनजाने कु चलने के कारण उ प न होता है | उसको समय रहते
कोण से सोचता हँ | सोचने के बाद ही बड़ी मिु कल से िकसी न समझने के कारण उ प न होता है | उसके जाने के बाद उ प न
िन कष पर पहचँ ता हँ | हए खालीपन क खीझ के कारण उ प न होता है |

शाहजहाँ क कई रािनयाँ थ | िनि त प से वह उनसे भी यिद िजदं गी यादा नह बची है तो बची हई िजदं गी प नी को
यार करते रहे ह गे | िबना यार के तो ऐसे ही िकसी को रानी याद करते हए िबताता है और यिद उमर का साथ है तो दूसरे ेम
बनाते नह | इसका मतलब िक वह ममु ताज़ को अ य के मक़ु ाबले के जगु ाड़ म लग जाता है | वह कहता है िक िकसी के चले जाने से
यादा ेम करते थे | तभी तो वह ममु ताज़ के िलए ही ताजमहल िजदं गी थोड़ी क जाती है | यह एक वाह है िजसक िनयित
बनवाया बािकय के िलए नह | तो या मे का बटँ वारा भी हो बहना ही है |
सकता है ?
स चे ेम क अनभु ूित का या यही रा ता है ? प नी के
ममु ताज़ के िलए तो िसफ शाहजहाँ ही थे | इस िहसाब से तो िजदं ा रहते ही उसके शरीर के अदं र बसी औरत को ढूँढ़ने का
ममु ताज़ का ेम यादा वजनदार और स चा था | उनक मृ यु यास पित य नह करता है ?
चौदहव सतं ान को ज म दते े व त हई | तेरह ब चे पदै ा करने के
बाद वह कु छ कमजोर नह हो गई ह गी या ? िफर शाहजहाँ ने अचानक मेरे िदमाग ने िन कष िनकाला िक वा तव म
चौदहवाँ ब चा य पदै ा करना चाहा ? या ममु ताज़ भी यही ताजमहल को ममु ताज़ का शाहजहाँ के ित अटूट मे के िलए
चाहती रही ह गी ? यिद वह िजदं ा रहत तो या जाना,जाना चािहए न िक शाहजहाँ का ममु ताज़ के ित मे के
पं ह,सोलह,स ह,अठारह,उ नीस,बीस.......इसी तरह चलता िलए !
रहता | औरत ब चे पदै ा करने क मशीन है या ? या शाहजहाँ
ने कभी ममु ताज़ से पूछा होगा िक उ ह ताजमहल से यादा खशु ी ममु ताज़ जसै े ही मे भारत क अिधकांश पि नयाँ अपने पित
िमलेगी या िकसी अ य चीज से ? यिद स ा ममु ताज़ के हाथ म से करती ह और बदले म उ ह ताजमहल क नह बि क ेम से
होती तो वह वयं के िलए या चाहती ? बोले गए िसफ दो श द क चाहत होती है | चाहत होती है
वफादारी क भी,यिद भा य से िमल गई तो |
अचानक ताजमहल मझु े एक िनज व महल जसै े िदखने लगा|
ईटं ,प थर,चूना,िम ी के साथ क गई कलाकारी | इसक मेरे मन से िवतृ णा हट गई | म पनु ः इसक सदंु रता के मोह
खूबसूरती से मझु े िवतृ णा होने लगी | जाल म पूरी तरह कै द होने लगा |

पु ष के िलए ेम के या मायने होते ह ? उसके िलए औरत अब ताजमहल मझु े खूबसूरती और ेम क िनशानी के साथ-
का मतलब या है ? म इस का उ र ढूँढ़ने लगा | खदु से साथ रे क भी लगने लगा था | मझु े लगा िक ताजमहल सभी
इसका उ र पूछने लगा | खदु क नजर म म वयं पु ष को मे करने क रे णा दते ा है | प ाताप और आ म लािन
वाथ ,कमजोर और ढ़ गी िदखने लगा | आदशवाद कमजो रय से बचने के िलए सधु रने क सलाह दते ा है | अपनी अनतं सदंु रता
को ढकने का खोल नजर आने लगा | क ऊजा से यह हमारे मि त क म भरे कचड़े को साफ करता है |

तरह-तरह क बात िदमाग म उछल कू द मचाने लग | म िच ला उठा,……….अमर रहे ताजमहल!.........अमर
ताजमहल कह शाहजहाँ का प ाताप तो नह था ? आ म लािन रहे ममु ताज़ का ेम !.........अमर रहे भारत क ना रय का
क प रणित तो नह थी ? हर पु ष प नी के मरने के बाद कह िनः वाथ ेम !
प ाताप से भर तो नह जाता है ? प ाताप जो जीवन भर प नी के
म.ु िस.एवं दू.स.ं इजं ीिनयर(िन.)
म य रले , मबंु ई छिशमट

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• लेख

भारतर न लता मगं ेशकर : सगं ीत के अलावा भी बहत कु छ

िविपन पवार

इस वष 06 फरवरी को सगं ीत के आसमान का सूय हमेशा के िलए किपल दवे ने लताजी को लंदन म भारतीय टीम के साथ राि
अ त हो गया, िजनके बारे म हमारे पड़ोसी दशे के एक प कार ने भोज पर आमंि त िकया था तथा लताजी ने राि भोज म
कहा था िक 'भारत लता और ताज के चलते हमसे े ह'ै । सि मिलत होकर भारतीय टीम को अपनी शभु कामनाएंदी थ ।
इस अवसर पर टीम के सभी सद य ने लता जी के साथ एक गीत
अपना सपं ूण जीवन सगं ीत को समिपत करने वाली गान गाया था, िजसे िवशेष प से लताजी के भाई सगं ीतकार
कोिकला, वर सा ा ी लताजी और भारतीय सगं ीत एक-दूसरे दयनाथ मंगेशकर ने तैयार िकया था । सनु ील गावसकर एवं
का पयाय बन चकु े थे लेिकन शायद कम लोग ही यह जानते ह गे किपल दवे लताजी के ठीक पीछे खड़े हए थे ।
िक लताजी बहआयामी यि व क धनी थी । सगं ीत के अलावा
भी बहत कु छ था उनके जीवन म । आइए, जानते ह िक या थे र ता दो भारत र न का
उनके िविवध शौक ? गान कोिकला लताजी और ि के ट के दवे ता िलिटल मा टर
सिचन तडुलकर दोन अपने-अपने े के िद गज थे । सिचन
नॉट आउट लताजी लताजी को अपनी मॉंकहते थे । लताजी ने सिचन को भारत र न
जी हॉं! लता मंगेशकर ि के ट क दीवानी थी और ऐसे अनेक दने े क परु जोर वकालत क थी तो मबंु ई म अनेक सावजिनक
समारोह के दौरान सिचन ने लताजी के ित अपना नेह एवं
अवसर आए जब उ ह ने अपने ि के ट ेम का सावजिनक प से स मान दिशत िकया था । सन् 2010 म ही लता जी ने कह िदया
दशन िकया । सिचन तडुलकर और लताजी के बीच नेह एवं था िक 'सिचन तो मेरे िलए अनेक वष से वा तिवक भारत र न ही
स मान का अनूठा र ता था । आपको मरण होगी 1988 म है। उसने दशे के िलए जो कु छ िकया ह,ै िवरले ही कर पाते ह । वह
रिचत वह सगं ीत रचना, िजसने सन 90 के दशक म दूरदशन पर इस स मान का वा तिवक हकदार ह,ै उसने हम सबको
कई वष तक जनता-जनादन के दय पदं न म दशे भि से गौरवाि वत िकया है ।' और उसके बाद सन् 2014 म सिचन को
सराबोर एक मदम त राग भर िदया था ........... िमले सरु मेरा भारत र न से स मािनत िकया गया । सिचन ने हमेशा लताजी को
तु हारा .......... तो सरु बने हमारा । इस सगं ीत वीिडयो म लताजी अपनी मॉंका दजा िदया और लता जी ने भी सिचन के िलए एक मॉं
एस.वेकटराघवन, नर िहरवानी, अ ण लाल, पी.के .बैनज , क तरह ई र से ाथनाएं क । लताजी को वह िदन अ छी तरह
गु ब स िसहं , सैयद िकरमानी, ले ली लािडयस, चु नी से याद है, जब सिचन ने पहली बार उ ह “आई” (मॉ)ं कहा था ।
गो वामी, काश पदकु ोण जसै ी हि तय के साथ ि गोचर थी, लताजी इस बात क क पना नह कर सकती थी । यह उनके िलए
िजनम अिधकांश ि के टर ही थे। एक सखु द आ य था । वे भावावेश म रो पड़ी थी और उ ह ने कहा
था िक 'म सिचन जसै ा पु पाकर ध य हो गई ।' यह भी एक अजीब
सन् 1983 म जब किपल दवे क क ानी म भारतीय टीम ने सयं ोग रहा िक सिचन का ज म 24 अ लै को हआ था और
इं लड क धरती पर वे ट इडं ीज को हराकर िव िवजते ा बनने का लताजी के िपता ी मा टर दीनानाथ मगं ेशकर क मृ यु 24
इितहास रचा था, तो लताजी ने भारतीय टीम के िलए िबना कोई अ लै को ही हई थी, इसिलए एक मॉंअपने पु का ज मिदन कभी
पा र िमक िलए मु म ही काय म िकया था, जो चार घटं े क नह मना पाई । जब सन् 2017 म सिचन के जीवन पर एक िफ म
अविध तक चलता रहा । भारत के िव िवजते ा बनने पर लताजी ने रलीज हई – “सिचन : ए िबिलयन ी स” तो लताजी ने सोशल
कहा था 'मने लॉडस् म फाइनल मैच दखे ा, बहत दरे तक तो मझु े मीिडया पर इस िफ म क भरपूर शसं ा क । सन् 2013 म
िव ास ही नह हआ िक हमने दो बार के िव चैि पयन वे ट ि के ट के आसमान से सिचन नामक िसतारे का अवसान हो गया,
इंडीज को धूल चटाकर िव कप पर अपना अिधकार कर िलया तो ि के ट क दीवानी लताजी ने िवराट कोहली पर अपने नेह
ह।ै एक भारतीय होने के नाते िनि त प से इस उपलि ध पर म
अ यतं गौरवाि वत हं ।' िव िवजते ा बनने के बाद भारतीय क ान

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का वषण करना ारभं कर िदया । जब सन् 2016 म मंबु ई टे ट म के साथ पूरा याय करते ह और उनक िफ म क गित कमाल क
िवराट ने इं लड के िव 235 रन क शानदार पारी खेली, तो होती है । लताजी के अनसु ार नरिगस इं ीड क कॉपी िकया करती
लताजी ने िवराट को एक गीत समिपत िकया । सन् 2010 म थी और एक बार उ ह ने यह बात नरिगस को कह दी थी, तो
ऑ ेिलया के िव मोहाली टे ट म भारत क शानदान जीत नरिगस के वल मु कु राकर चपु हो गई थी ।
पर भी लताजी ने वी.वी.एस.ल मण क जमकर तारीफ क थी ।
ि के ट के बादशाह मसं ूर अली खान पटौदी के दहे ावसान पर भारतीय िफ म म उ ह ह क -फु क मनोरजं क िफ म
लताजी बेहद द:ु खी हो गई थी तो यवु राज िसहं को जब कसर का पसदं थी । अपनी बिढ़ या कॉमेडी के कारण उ ह मु नाभाई
िनदान हआ तो सवं दे नशील लता जी ने यवु राज को िह मत दान एमबीबीएस (2003) एवं लगे रहो मु नाभाई (2006) काफ पसदं
क थी । आई थी और इसके िलए उ ह ने सजं य द और िनदशक
राजकु मार िहरानी को बधाई भी दी थी । इंि लश िविं लश (2012)
िफ म दखे ने क शौक न थी लताजी के िलए ीदवे ी भी उनक शसं ा का पा बनी।
लता जी आमतौर पर टी.वी. नह दखे ती थी लेिकन उ ह िफ म
दखे ने का शौक था और आपको जानकर घोर आ य होगा िक लताजी आिमर खान क िफ म को पसदं करती थी, उनक
लता जी को िदल दहला दने े वाली भयानक (हॉरर) िफ म दखे ना ि म तलाश (2012) आिमर क सव े िफ म म से एक थी ।
बेहद पसदं था । सीधी-सादी सरु सािधका लताजी और भयानक उनका कहना था िक आिमर नई कार क भूिमकाओंका चयन
डरावनी भूत क िफ म ?......... है न आ य क बात ! लेिकन करते ह और अपनी िफ म के िलए लीक से हटकर कहािनय का
शौक तो शौक होता है जनाब । 2012 म दिशत िफ म 'तलाश' चनु ाव करते ह । वे अपने काम के ित बेहद समिपत ह तथा िफ म
को उनक शसं ा ा हई थी लेिकन उ ह ने भारत म इस कार िनमाण के यके पहलू पर सू मता से यान कि त करते ह तथा
क िफ म के अभाव पर िचतं ा जािहर क थी । उ ह ने एक मराठी िकसी भी चीज से समझौता नह करते, जो िकसी भी िफ म क
सा ा कार म कहा था िक 'इन िदन हमारे यहां भूत क अ छी सफलता का मूलमं है । उ ह ने रानी मखु ज और करीना कपूर
िफ म नह बनती ह, जो बनती भी ह तो उनम दशक को डराने के के अिभनय क भी शसं ा क थी ।
िलए के वल भयानक चेहरे ही होते ह, जो मझु े िब कु ल भी पसदं
नह आते ।' उ ह तो हालीवडु क “िस थ से स” (1999) पसदं महगं ी िवदशे ी कार
थी, जो दशक को डराने के िलए िकसी नौटंक का सहारा नह लताजी को महगं ी िवलािसतापूण िवदशे ी कार का बेहद
लेती । वैसे उ ह मधमु ती (1958) म वजै यतं ीमाला और लेिकन
(1991) म िड पल कपािडया क भूिमका पसदं आई थी य िक शौक था । कहते ह िक “वीर जारा” गाने के रलीज होने के बाद
दोन म उनका ि य िवषय “भूत” तो था लेिकन डरावने चेहरे नह िफ म िनमाता यश चोपड़ा ने लताजी को महगं ी मिसडीज बज
थे । कार उपहार व प दी थी । मिसडीज का नाम ल जी रयस कार
म िगना जाता है । इस कार म अनेक िफचस होते ह िजनके चलते
अ े ड िहचकॉक क शसं क यह कार िव िव यात है । लताजी के कार सं ह म ि सलर कार
लताजी हालीवडु िफ मकार अ े ड िहचकॉक को बेहद का नाम भी शमु ार था । ि सलर एक शाही कार है, जो भारत म
पया लोकि य है । लताजी के गैरजे म यूक एवं शेवरले भी थ ,
पसदं करती थी । आ य होता है यह जानकर िक उ ह ने अ े ड जो अपने लकु एवं टाइल के कारण भारत म बहत लोकि य है ।
िहचकॉक क येक िफ म दखे ी थी िजसम से गैसलाइट
(1944) उनक सवािधक पसदं ीदा िफ म थी िजसम अिभने ी माईल लीज
इं ीड बगमैन क भूिमका एवं अिभनय क वह कायल थी । लता जी हां ! लताजी एक उ कृ फोटो ाफर भी थ एवं
जी के अनसु ार िहचकॉक क सबसे बड़ी खूबी यह है िक वे कहानी
यवु ाव था म मंबु ई म उनके छायािच क दशनी भी लगाई गई
थी । उनका रोले लै स कै मरा हमेशा उनके साथ ही रहता था ।
जब वे रकािडग के िलए टूिडयो म जाती थी, तो अपने

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सहकिमय के छायािच लेने म उ ह बड़ा मज़ा आता था । घर पर पसदं नह था । मोदक, परु न पोली, आलू साबदु ाना िट क चाट
तो मॉ,ं िपता, भाई तथा बहन के छायािच लेने म उनका काफ एवं ना रयल मखाने क खीर उनके ि य यजं न थे ।
समय यतीत हो जाता था । वैसे उ ह आउटडोर फोटो ाफ बेहद
पसदं थी । लताजी फोटो ाफ म इतनी द एवं िनपणु थी िक यिद िस शफे सजं ीव कपूर एवं लताजी एक बार साथ-साथ
वे गाियका न होती तो शायद एक फोटो ाफर बन जाती । हवाई या ा म थे । जसै े ही सजं ीव जी िवमान म चढ़े, लताजी आखं े
िडिजटल कै मरे एवं त प ात माट मोबाइल फोन के ादभु ाव के बदं कर 1 डी सीट पर सु ता रही थी, सजं ीव जी क सीट 1 सी
कारण बाद म लताजी ने अपने इस शौक को ितलांजली दे दी । थी, बीच म पसै जे था । सजं ीव जी ने उ ह जगाना उिचत नह
परु ाने लोग जानते ह िक पहले कै मर से त वीर लेने के काय म समझा और चपु चाप अपनी सीट पर बैठ गए । जब िवमान
िकतनी रचना मकता, क पनाशीलता, तकशि एवं तकनीक आसमान क उंचाईय को पश कर रहा था और सजं ीव जी न द
के आगोश म थे, लताजी ने उनका कं धा थपथपाकर उ ह जगाया
ान क आव यकता होती थी । उनके पास इतने छायािच और कहा “नम कार ! म ......... लता मंगेशकर ।” ऐसी सीधी
एकि त हो चकु े थे िक शायद उ ह दखे ने म बरस लग जाते । वे सरल सहज थी लताजी । िफर या था? दोन के बीच खाने-
फु रसत म उनके ारा ख चे गए सारे छायािच दखे ना चाहती थ पकाने को लेकर लबं ी चचा चल पड़ी । टीवी शो “मा टर शफे ”
लेिकन उनक यह इ छा पूरी नह हो पाई । लताजी ाय: दखे ा करती थी ।

िच कार लताजी िसफ खाना खाने का ही नह , बनाने का भी उ ह बेहद शौक
लताजी ने बाकायदा िच कारी सीखी थी । ांसीसी िच कार था, हांलािक खाना बनाने के िलए उ ह समय कम ही िमलता था,
लाउड मोनेट (1840-1926) उनके ि य िच कार थे । लेिकन वे जो कु छ भी पकाती थी, सपं ूण िन ा, समपण, गहन
िच कला क बा रिकय क गहन अ यते ा लताजी को सजं य
लीला भसं ाली ारा िनदिशत िफ म म मोनेट क झलक िच, अप रिमत धयै एवं अद य उ साह के साथ पकाती थी ।
ि गोचर होती थी । जब भसं ाली को इस बात का पता चला तो वे आशाजी को तो उनके हाथ का वाद बेहद पसदं था ।
लताजी के िच कला िवषयक अ ययन एवं सू म अवलोकन से
आ यचिकत हो गए । कोई आ य नह िक गलु ज़ार ने लताजी को “सपं ूण
कलाकार” कहा था । और इस सपं ूण कलाकार का कहना था िक
ल जतदार खाने क ही नह , पकाने क भी शौक न थी लताजी “पता नह व कै से िनकल गया ।” मृ यु श या पर उनके अिं तम
लता मंगेशकर क िजजीिवषा िव मयकारी थी, िजसके दशन तब श द थे – “इस दिु नया म मौत से बढ़कर वा तिवक कु छ भी नह
होते थे, जब वे रसोईघर म अपनी मनपसदं िडश बनाती थी और ह।ै ”
पडे र रोड, मंबु ई ि थत ' भकु ंु ज' मनोहारी सगु धं से भर जाता था ।
आमतौर पर यह माना जा सकता है िक अपने रहन-सहन, जीवन उप महा बंधक (राजभाषा)
शैली, पहनावे एवं ोफे शन के चलते लताजी िवशु शाकाहारी म य रले , मु यालय
ह गी । लेिकन नह ! भोजन के मामले म कठोर अनशु ासन का
पालन करने वाली लताजी कभी-कभी अपने मनपसदं भोजन के सदं भ सूची :-
आ वादन का लोभ सवं रण नह कर पाती थी । मूलत: गोवा के 1. लता : सरु गाथा (जीवन च र ) – यती िम
मगं ेशी गावं क िनवासी होने के कारण उ ह मसालेदार समु ी 2. लता दीदी ..................... अजीब दा तॉंहै ये –
भोजन (सी-फु ड) बेहद पसदं था । मटन क शौक न लताजी को
मटन कोिथिं बर (हरा धिनया) तथा मटन काकोरी कबाब िवशेष हरीश िभमानी
3. दीदी और म – मीना मंगेशकर – खड़ीकर
प से पसदं थे। जीरा िचकन एवं मेथी िचकन उनके पसदं ीदा 4. Lata Mangeshkar ……… in her own voice –
भोजन म शािमल था । ऐसा नह है िक उ ह शाकाहारी भोजन
Nasreen Munni Kabir
5. On stage with Lata – Mohan Deora and

Rachna Shah
6. Times of India – Mumbai Edition के िविभ न अकं

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• लेख

ऐ मरे े वतन के लोग जरा आखँ म भर लो पानी..!

घन याम मैिथल 'अमतृ ’

स त कबीर ने या खूब कहा है -' वै मरे रोगी मर,े मरे जलावन सकते, आज भी आप रिे डयो या टीवी सेट पर लता जी को अपनी
हार | दखे न वारे भी मर,े अपनी-अपनी वार || यािन यह संसार सरु ीली आवाज के साथ उपि थत पाते ह, यानी मर कर भी अमर
न र है ,यहां जो भी आया है उसे एक िदन जाना ही होगा, चाहे वह हो जाना इसीको कहते ह |
कोई भी य न हो | इसके साथ भी वे एक अ य दोहा भी कहते ह - लता जी के सकै ड़ गीत हमारी सांस म समािहत ह, उनके अनेक
' आए ह सो जाएगं े राजा रकं फक र, कोई िसहं ासन चिढ़ गीत हमारे जीवन क धड़कन ह, पूरे िव म पूरी दिु नयां म लता जी
चला,कोई बधं ा ज़जं ीर | भावाथ प है िक आपक अिं तम समय क वर लहरी गली-गली म गजंु ायमान है, अन र है | दिु नयां का
िबदाई कै सी होती ह,ै आप स मानपूवक िसहं ासन पर बैठाकर ऐसं ा कौन-सा रा होगा जहाँ लता जी के चाहने वाले नह ह गे |
िबदा िकए जाते ह अथवा जजं ीर म बाधं कर यानी क पूवक िवदा लता जी सचमचु 'भारत-र न' थ , वे स मान परु कार से बहत
होते ह,आप या लाए थे और या छोड़कर जा रहे ह | ऊपर उठ चकु थ , उ ह दादा साहब फा के अवॉड, िफ़ म-
इस ि से लता जी को दखे तो उ ह ने अपना जीवन भरपूर फे यर,प िवभूषण सिहत िकतने ही स मान जीवन म िमले ह गे,
िजया और इस समाज को इस ससं ार को इतना कु छ दके र िवदा लता जी के स मान हण करने से स मान वयं स मािनत हो
हई कं उ ह कभी भलु ाया नह जा सकता | इस भौितक ससं ार म जाता था |
उ ह ने 28 िसतबं र 1929 को इदं ौर म य दशे म ज म िलया लता जी के थम धानमं ी पिं डत नेह से लेकर वतमान
और अपनी याग तप या तथा सघं ष से िफ म जसै ी काजल क धानमं ी ी नरद मोदी तक िकतने पा रवा रक आ मीय सबं धं
कोठरी म काम करते हए बेदाग जीवन जीते हए वर-सा ा ी के रह,े पर तु उ ह ने कभी अपने सबं धं का राजनैितक इ तेमाल
नह िकया, वे सबक थ , सब उनके थे, िकसी िवशषे िवचारधारा
प म अपने को थािपत करते हए िहदं ी, मराठी सिहत िविवध अथवा वाद से उ ह ने वयं को कभी नह बाधं ा, इसिलए िववाद
भाषाओं म िफ मी और गैर-िफ मी लगभग 30 हजार गान का से उनका कभी नाता नह रहा और सादगी पस द, सफे द रगं क
अनपु म क ितमान बनाया | साड़ी पहनने वाली लता ताई अतं समय भी गई तं ो एकदम बेदाग
िपता मा टर दीनानाथ मगं ेशकर और माँ शवे ती दवे ी क ये ' य क य धर दीनी चद रया |' यह बहत बड़ी उपलि ध है लता
पु ी को सा ात सर वती का वरदान ा था, हालािं क उनक जी के जीवन क , नह तो आपने दखे ा होगा आप राजनीित,
बहन आशा, मीना, लता और भाई ्दयनाथ मंगेशकर ने भी िफ़ म, ि के ट अथवा यापार म खूब धन, मान, स मान कमाते ह
गायन-वादन के े म खूब काम और नाम िकया पर तु लता जी पर तु जीवन म ऐसा अवसर भी आता है िक आपका धन आपक
क िसि एकदम अलग और अनूठी थी | लोकि यता धरी क धरी रह जाती है और आप अश से फश पर
लता जी के िनधन से यूँ लगा जसै े वसतं िवदा हो गया, सारी आ जाते ह |
सरगम मौन हो गई, वीणा के तार टूट गए, तभी तो लता जी ने लता जी के लोकि य गान क एक लबं ी फे ह र त ह,ै यूँ लगता है
बस त पचं मी के िवदाई वाला िदन इस दिु नया से जाने के िलए जैसे हर दूसरा लोकि य गाना लता जी ने ही गाया ह,ै इतनी
चनु ा | आज हम लता दीदी के सीधे दशन उनके सािन य से भले लोकि यता इतना मान स मान भला सबके भा य म कहा,ँ वरना
विं चत हो गए ह पर तु उनक आवाज जो उनक पहचान थी वह जीवन म िशखर तक पहचं ने के िलए कौन ऐड़ी से चोटी का जोर
सदवै हमारे बीच हमारे दय म मौजूद रहगी| नह लगाता, यानी मेहनत के साथ ऊपर वाले क रहमत व नीचे
आज हम िकतने भी आधिु नक हो जाए,ं गीत सगं ीत म िकतने भी वाल क दआु ओंक दरकार भी होती है, वरना दशे और दिु नया
नवीन योग हो जाए,ं पॉप- यूिज़क, यूजन के दौर आ जाए,ं म और दो चार लता जी य न होती, ऐसे ही लोग के िलए कहा
आप वर कोिकला लता जी के गान से अपने को दरू नह रख

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गया है -'भूतो न भिव यित |' • किवता
लता जी का 27 जनवरी 1963 को लाल िकले से गाया गया 'ऐ मेरे
वतन के लोग जरा आखँ म भर लो पानी ..! एक ऐसा अमर गाना है सूना हआ सरु का मले ा
जो आज भी हमारी आखं नम कर दते ा है, इस गाने को सनु कर
त कालीन धानमं ी पि डत नेह तक रो पड़े थे | इस गाने के मोद सोनी
सजृ क किव दीप और सगं ीतकार सी.रामच भी लता जी के
साथ अमर हो गए, आपको नह लगता यह गाना कालजयी है, सूना हआ सरु का मेला,
इसपर इन साठ वष का भी कोई भाव नह पड़ा और पीिढ़यां विणम यगु का हआ अतं ।
गजु र जाने के बाद भी यह गाना उतना ही भावी व लोकि य है | दःु खी बहार पूछ रही ह,
हमने और आपने न िसफ लता जी के गान को सनु ा है अिपतु िबन कोयल कै सा बसतं ??
उनक कई भट-वाताएं व सा ा कार भी सनु े ह, वे िकतनी सहज कणि य वाणी मनमोहक,
सरल व िवन थ उनसे भले हम कभी सजीव न िमले ह पर तु मन को खूब लभु ाती थी।
िफर भी ऐसा लगता था वे हमारे िनकट ह, हमारे प रवार क वह िदल के तार को सबके ,
सद य ह | उनके बारे म अनेक सं मरण और पु तक कािशत झकं ृ त कर-कर जाती थी ।
हई ह | जननी-ज मभूिम के बारे म ज म लेने वाले का कोई छोटे-बड़े सबक दीदी थ ,
अिधकार नह होता, आप िकस माँ क कोख से ज म लगे और वह सबके मन को भाती थ ।
जगह, घड़ी कौनसी होगी यह सब ार ध का खेल ह,ै लता जी का ममता क मूरत थी दीदी,
ज म इंदौर म हआ सच मािनए जब म इंदौर जाता हँ तो लगता है नेह-सधु ा बरसाती थ ।
यह वह पावन पु य भूिम है जहां लता जी ने जीवन क पहली सांस गर सगं ीत-जगत है मठ तो,
ली होगी | ऐसी भूिम को नमन करने का िकसका मन न होगा | दीदी थ एक िद य- महतं ।
म य दशे शासन भी लता मगं ेशकर स मान उनके होते हए भी सूना हआ सरु का मेला,
वष से गायन े क उ कृ ितभाओंको दते ा रहा है और अब विणम यगु का हआ अतं ।
उनके िनधन के प ात उनक मिृ तय को िचर थाई बनाने के
िलए एक बड़ा सं हालय इंदौर म बनने को म य दशे सरकार िजन गीत का गान िकया था,
सकं ि पत ह,ै लता जी के साथ ही खंडवा के िकशोर कु मार भी िदल म हरदम अमर रहगे।
गायन के े म एक ऐसी लोकि य अनूठी शि सयत थे िज ह यह जो िबछोह का घाव िमला ह,ै
ज़माना कभी िव मतृ नह कर सके गा | मरहम बन कर असर करगे।
हमारे यहां नाद को ह कहा गया है और नाद ह क स ची वणा र से नाम आपका,
उपािसका सािधका महान िवभूित भारतर न लता मगं ेशकर भले इस यगु का इितहास िलखेगा।
हमारे म य नह ह पर तु उनका नाद उनका वर हमारे बीच जब भी कोई िलखना चाह,े
मौजूद ह,ै उनक याद म डूबकर उ ह भीगी पलक , गीली आखं यशोगान वह खास िलखेगा।
से शत-शत नमन करते ह शत-शत णाम करते ह | छाई थी और सदा रहेगी,
क ित आपक िदग-् िदगतं ।
सूना हआ सरु का मेला,
विणम यगु का हआ अतं

जी/एल-434 अयो या नगर सवे ािनवृ राजभाषा अिधकारी
भोपाल-41 (म य देश) दि ण पूव म य रले वे

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• लखे

चलते-चलते..मरे े ये गीत याद रखना

डॉ. अनतं ीमाली

वर ही ई र है । हमारे यहां वर व गीत क खदान ह और उसके हलाल' के गीत-आज रपट जाए,ं रात बाक ,बात बाक , जवानी
कदरदान भी ह । नाद और राग जीवन के खालीपन को उ लास से जानेमन..शराबी के गीत-इंतेहां हो गई..दे दे यार द,े मझु े नौ लखा
भरते ह । उसे और समृ करने के िलए 27 नवबं र, 1952 को मगं ा दे रे या िजत के साथ 'तोहफा' का गीत-'नैन म सपना' आज
कोलकाता (तब कलक ा) म अपरशे लािहरी ने गायक आलोके श भी तरोताज़ा लगता है । कु छ अलग तरह के गीत का भी उ ह ने
लािहरी और मॉं वनसरी लािहरी (सगं ीतकार-गाियका) के घर सगं ीत िदया- िकसी नज़र को तेरा इतं जार आज भी है..अपनी
ज म िलया जो भ पी दा के नाम से सगं ीत क दिु नया म छा गए । खास शलै ी म उ ह ने सगं ीतब िकया-यार िबना चैन कहॉंर,े याद
चूिं क मॉ-ं बाप वयं सगं ीतकार-गीतकार थे, सो भ पी दा ने तीन आ रहा है तेरा यार..जसै े गीत तो उस समय यवु ाओंक धड़कन
वष क आयु म ही तबला और सगं ीत के गरु सीखे । 43 वष पूव, बढ़ा दते े थे ।
शु आत म उ ह ने लता जी के साथ तबला भी बजाया है ।
उस ज़माने के िद गज सगं ीतकार के बीच ताल, वा यं और िमथनु दा और ीदवे ी को पहचान िदलाने म भ पी दा का
पि मी धनु -सगं ीत का घालमेल करके िड कोथेक लेकर भ पी बड़ा योगदान है । ीदवे ी के थािपत होने के दौरान क तो
दा आए और िफ मो ोग म िड को िकं ग के प म जगह बनाई । लगभग हर िफ म म उ ह ने ही सगं ीत िदया । माधरु ी दीि त
पॉप सगं ीत के स ाट मायकल जै सन 1996 म एक काय म म 'सलै ाब' का गीत 'हमको आजकल ह'ै या 'थानेदार' का
मबंु ई आए थे । भ पी दा के अनसु ार मायकल को उनके गले म 'त मा..त मा..लोगे' ऐसे गीत के तो रमेक तक के िलए नये यवु ा
लटक गणपित के पडै ल वाली चैन बहत अ छी लगी, उ ह ने सगं ीतकार लालाियत रहते ह ।
पूछा िक तमु सगं ीतकार हो या ? भ पी दा ने कहा िक 'िड को
डासं र' म सगं ीत िदया ह,ै यह सनु ते ही वे बोले -"मझु े 'िज मी 1986 म साल भर म 33 िफ म म 180 गीत का सगं ीत
िज मी...' गीत बहत अ छा लगता है । भ पी दा क कई धनु पर दके र उ ह ने 'िगनीज बकु ऑफ व ड रकाड' म नाम दज़ िकया ।
मायकल जै सन डासं करते थे । अपने कै रयर के 5 दशक के दौरान उ ह ने िहदं ी, बगं ला, तिमल,
कु छ गीत के िलए उनक आलोचना भी हई (रभं ा हो,आईएमए क नड़, गजु राती आिद भाषाओंक 500 से अिधक िफ म म 5
िड को डासं र , बंबई से आया मेरा दो त, मौसम है गाने-बजाने हजार गीत रचे । 2012 म 'द डट िप चर' िफ म के गीत 'ऊह
का..के िलए) लेिकन उस समय क यवु ा पीढ़ी पर उनका सगं ीत ला..ला..' के िलए उ ह िमच सगं ीत परु कार भी िमला ।
िसर चढ़कर बोला । नई-परु ानी पीढ़ी उनके सगं ीत क दीवानी थी ।
नई पीढ़ी को िड को क 'लत' लगाने वाले भ पी दा ही थे, इसिलए 1972 म बगं ला िफ म 'दादू' से सगं ीतकार के प म
उ ह "िड को िकं ग" क उपािध दी गई थी पर उ ह शराब, शु आत क लेिकन दभु ा य से िफ म असफल रही । उ ह ने
िसगरटे , पान क 'लत' नह थी । वे कहते थे िक मने िड को म मंबु ई आकर िक मत आजमानी चाही । उ ह अिधक सघं ष नह
मेलोडी िमलाकर एक नया सगं ीत रचा है । उ ह दो िफ म फे अर करना पड़ा और अगले वष 1973 म 'न हा िशकारी' िमली पर
अवाड (शराबी- नामाकं न तो कई बार हआ) और तीन रा ीय दशक ने इसे भी पसदं नह िकया हालािं क इस िफ म के गीत 'तू
परु कार, 2018 म िफ म फे अर का लाइफ टाइम एचीवमट ही मेरा चदं ा' को मकु े श ने वर िदए थे पर वे िनराश नह हए,
परु कार भी िमले ह । जि टस चौधरी, मवाली, सहु ागन, तमाशा असफलता के ज म के साथ 1975 म 'ज मी' से उनका
उनक मखु िफ म रही ह । िसतारा बलु ंदी पर पहचं ा । होली पर बजने वाले गीत म 'ज मी
िदल का बदला चकु ाने' उनका मखु गीत है । सनी दओे ल क
उनके लोकि य गीत के शानदार सफर को दखे -'नमक िफ म 'घायल'म 'सोचा है या', स र के दशक म 'टूटे िखलौने'
का 'माना हो तमु बेहद हस ', 1979 िफ म 'आगं न क कली' का
'सैया िबना घर सनु ा-सनु ा', इसी वष िवनोद ख ना, शबाना

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आजमी क िफ म 'लह के दो रगं ' के गीत 'मु कु राता हआ', और तैयार िकया , उसके कवर गीत के िलए उपयोग िकया—'ब पी
'चािहए थोड़ा यार' ज़बरद त िहट रहे । चं ाणी मखु ज के साथ लािहरी का -पग घघंु बाधं ' । उ ह ने उषा उथपु , अनेट िपटं ो,
डैनी डे ज पा से 'तमु से हम िमले' गीत गवाया । 1993 म आई पावती खान जैस को पहचान दी । सलमा आगा को 'झूम झूम झूम
'ऑखं ' के गीत ने भी धूम मचाई । बाबा' (कसम पैदा करने वाले क ) खूब चला ।

सरु स ाट िकशोर कु मार से उनके पा रवा रक र ते थे, वे उन पर धनु को चरु ाने का आरोप भी लगा और कहा जाने
उनको मामा कहते थे । भ पी दा ने िकशोर कु मार के साथ 'चलती लगा िक आजकल सगं ीत के खोटे िस के चल रहे ह
का नाम गाड़ी' म छोटे खान क भूिमका िनभाई थी । भ पी दा ने (िजमी..िजमी.. च िड को पर और िड को डांसर अम रक रॉक
उनके साथ कई गीत गवाए 'चलते-चलते'िफ म म 'मेरे ये गीत बड क नकल) पर वे कहते थे िक म दूसर क धनु से ेरणा लेता
याद रखना' ने दोन को बहत ऊँ चाई दी । इस गीत को गाते समय हँ । रे णा को आप नकल मानते ह तो मानते रिहए । इस आरोप पर
िकशोर दा क ऑखं म ऑसं ू आ गए थे । िकशोर दा के िनधन के वे कहते थे िक तब तो यू ट्यूब, या पोिटफाई जैसे लेटफाम नह
बाद ब पी दा ने एक सा ा कार म कहा था िक अब तो गाना छोड़ थे, मा रे णा ही थी । चाहे जो आरोप लगे लेिकन िहदं ी सगं ीत म
दने ा चािहए । उनके िपता ने कहा िक िकशोर दा का आशीवाद िड को, इले ो पॉप धनु पर ऐसे गीत िदए िक आज भी पॉवं
तु हारे साथ ह,ै तब उ ह ने एक लंबे अतं राल के बाद सगं ीत क िथरक उठते ह ।
दिु नया म 'गोरी है कलाइयॉ'ं से पनु : कदम रखा और िपता क बगं ाल म बनी 'गु दि णा' िफ म म भ पी दा के शा ीय सगं ीत ने
भिव य वाणी सही हई । तहलका मचाया । उनसे जब पूछा गया िक वे गु दि णा जैसा
शा ीय सगं ीत य नह दते े ? तो उनका कहना था िक
वे गीत गाने के भी शौक न थे पर अपने सगं ीत म ही गीत बला कार, बदले क भावना, मारधाड़ वाली िफ म म शा ीय
गाना पसदं करते, दूसरे सगं ीतकार के िनदशन म काम करना सगं ीत क सभं ावना कहॉं रहती है ? दरअसल वे यूजेिनफर
उ ह नह सहु ाता था । वष 2006 म उ ह ने इस िनयम को तोड़ मागरटे के सगं ीत से भािवत थे। जसै े च मा पहनने क रे णा
िदया । िवशाल शखे र के सगं ीत िनदशन म उ ह ने 'टै सी नं.92' उ ह एि वस से ले से िमली । सोने से लदे होने का कारण वे कहते
म पहली बार 'बबं ई नग रया' गीत गाया जो बहत लोकि य हआ । थे िक 'ज मी' के िहट होने पर मॉंने पहला सोने का लॉके ट िदया
2011 म 'गडंु े' िफ म म 'तू ने मारी एिं या.ं .' खासा लोकि य हआ था । वे गो ड को अपने िलए बहत लक मानते थे । घर म वे सोने
था । आशा भोसले उनसे कहती थी िक तु हारी िहदं ी अ छी नह क अगँ ूठी तक नह पहनते थे । हीरे उनके िलए शभु नह थे ,
है, तो वे िखलिखलाते थे, वे इसके प धर थे िक उनके सगं ीत म इसिलए वे वण ेमी थे ।
यिद बागं ला भाषा क छाप िदखाई दे तो इसम बरु ा या है, वे
बां ला भाषी ह, इस पर उ ह गव है । वे कहते ह िक मेरे सगं ीत पर वे अपने इस दौर के सगं ीत को वनडे मैच कहते थे । उनका
बगं ाली लोकधनु का भाव है । िस सगं ीतकार तिन क बागी मानना था िक सगं ीतकार को अ छी धनु नह धन चािहए । म ास
('रातां लंिबया'ं 2021 के सव े गीत के रचनाकार) के अनसु ार म इसके िलए जाते थे और वह रहते भी थे । वहां के िनमाता पसै ा
हाल ही म हॉलीवडु िफ म 'गािडय स ऑफ द गैले सी' वॉ यूम और समय बचाने के शौक न थे तब भ पी दा ने उनके िलए एक
2' के ेलर का एक गीत 'दआु िलपा' गीत जैसा समकालीन ेक िदन म तीन-चार गीत रकाड िकए । लबं े अतं राल के बाद 1993 म
समझने क भूल क जा सकती ह,ै यह कोई रीिम स या कवर नह उ ह ने 'ऑखं ' और 'दलाल' िफ म से िफर िक मत आजमानी
है लेिकन आज भी तरोताज़ा लगता है । तिन क ने भ पी दा के चाही पर उ ह सफलता नह िमली ।
िहट गीत 'त मा..त मा..' को रि एट िकया है। 2014 म भाजपा से जड़ु कर राजनीित म भी परै जमाने चाहे
शा ीय सगं ीत िवशषे प.ं स यनारायण िम ा से भ पी दा ने लेिकन मोह भगं हो गया ।
'बीटीएस' के एक शसं क ने उनका एक 'फै न वीिडयो' हाल ही म

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हमेशा मु कु राने वाले भ पी दा आिखरी बार 'िबग बॉस- • किवता
15' म िदखाई िदए थे िजसम वे अपने नाती वि तक क ब चा
पाट और उसके गाने के मोशन के िलए आए थे । 2020 म वर कोिकला - हम तुझे यूं न भुला पाएगं े
'बागी-3’ म 'भकं स' वाला गीत उनका अिं तम गीत था । 69 वष य
भ पी दा अिं तम समय म जहु , मंबु ई के ि टी के अर हाि पटल म िविनता िसहं
अपनी वा यगत सम याओं का इलाज करवा रहे थे । उनके
पा रवा रक डॉ टर दीपक नामजोशी के अनसु ार न द म सॉसं न तो म सगं ीतकार ह,ँ
और न ही सगं ीत क जानकर हँ |
कने के कारण (औ ॅ ि ट ह लीप एि नया) उनका िनधन नगमे सनु ती ह,ँ आनदं लेती ह,ँ
हआ । उनके प रवार म प नी िच ा, गाियका बेटी रमे ा लािहरी नए नगमे आते ही, परु ानी भूल जाती हँ |
बसं ल, बेटा बा पा सिहत भरा पूरा प रवार है । पर उस आवाज म जाने या बात थी,
रात क त हाई म हमेशा मेरे साथ थी |
उ ह ने िड को के शोर शराबे से हटकर अ य यादगार
गीत का सगं ीत भी िदया जो बहत लोकि य हआ जैस-े मंिजल िपकिनक हो या हो रोड ि प,
अपनी जगह ह, िदल म हो तमु (1987 स यमेव जयते) , आओ सब रहते अधूर,े िबना गाए इनके गीत |
तु ह चॉदं पे ले जाए-ं जलता है िजया मेरा भीगी (ज मी) जसै ी धनु
के िलए भी वे जाने जायगे ।(और अजीब से कपड़े, अजीबोगरीब वतं ता िदवस पर ितरगं ा लहराना,
धनु के िलए भी)। लेिकन भारतीय िफ म सगं ीत को एक नया मोड़ रोम रोम िसहर जाता, सनु कर इनका गाना |
दने े के िलए भी वे जाने जायगे । दरअसल वे सगं ीत जगत के शौमैन “ऐ मेरे वतन के लोग , ज़रा आखँ म भर लो पानी”,
थे, भोले-भाले, सहज, सरल भ पी दा को िवन ांजिल । वदशे ेम क भावना से भर दते ी उनक वाणी |

हमलोग, िब.न.ं 75 ए िवंग 102 5 नह , 10 नह , बि क 36 भाषाओं म,
ितलक नगर, चबूर, मबंु ई 400 089 वही शु ता और वही मधरु ता से गाए सभी तराने |

9819051310 िगनीज बकु भी नतम तक हआ,
मेल: [email protected] इनके गान क फ़े ह र त पे |
गौरव करते ह हम भारतवासी
अपने विणम अितत पे |
“नाम गमु जाएगा

चेहरा ये बदल जाएगा,मेरी आवाज़ ही पहचान है|”

10, बे रल हाउस, कोलाबा, मबंु ई

िहदं ी बोिलए
िहदं ी पिढ़ए
िहदं ी सीिखए
िहदं ी िलिखए

िहदं ी पढ़ना और पढ़ाना हमारा कत य है, उसे हम सबको अपनाना है ।
- लाल बहादुर शा ी

20

• लखे

लता मगं शे कर – कु छ झलिकयां

मजं लु ा स सने ा

लता मंगेशकर जी क िजदं गी को हर कोई करीब से जानना सभी से इतना ही कहना चाहती हं िक कभी हार मत मानना एक
चाहता है । उनक जीवन गाथा रे क भी है और रोचक भी । यहां िदन आप जो चाहते ह वह ज र िमलेगा ।
जाने िजदं गी के कु छ ऐसे ही िक से –
िवन ता क ितमिू त बचपन म लता जी को रिे डयो सनु ने का बड़ा शौक था । जब
वह 18 वष क थ , तब उ ह ने अपना पहला रिे डयो खरीदा और
लता मगं ेशकर जसै ी िवन ता और कहां – िहदं ु तानी सगं ीत जसै े ही रिे डयो ऑन िकया तो उ ह के .एल.सहगल क मृ यु का
जगत क मि लका लता मंगेशकर का नाम सनु ते ही हम सभी के समाचार ा हआ । बाद म उ ह ने उस रिे डयो को दकु ानदार को
कान म मीठी मधरु -सी आवाज शहद-सी घलु ने लगती है । आठ वापस कर िदया।
दशक से भी अिधक समय से िहदं ु तान क आवाज बन , लता जी
ने 30 से यादा भाषाओंम हजार िफ मी और गैर-िु फ मी गान आपम से बहत कम लोग को मालूम होगा िक लता जी
म अपनी आवाज का जादू िबखेरा, लेिकन जब एक प कार ने यूिजक डायरे टर भी रह चकु ह । उ ह ने अिधकतर मराठी
उनसे यह सवाल पूछा िक “ या वह भी गु कु ल म सगं ीत क िफ म म आनदं घन के नाम से यूिजक िदया था । जैसे – वष
िश ा दगी? ” तो उ ह ने कहा था िक “म या िकसी को िश ा 1963 म मोिह यांची मजं ळु ा, वष 1964 म मराठा िततकु ा
दूगं ी। मझु े तो खदु एक गु क ज रत है ।” मेळवावा, वष 1965 म साधी माणसं तथा वष 1969 म तांबडी
माती आिद ।
सगं ीत क दिु नया म राज करने वाली सरु -सा ा ी लता
मंगेशकर जी को एक बार गाने के िलए रजे ट भी िकया जा चकु ा लता मंगेशकर को पहली बार मंच पर गाने के िलए 25 पए
है । वष 1948 क िफ म शहीद के िनमाता एस.मखु ज ने यह िमले थे, उ ह ने पहली बार 1942 म मराठी िफ म िकती हसाल
कहते हए लता मंगेशकर जी को रजे ट कर िदया था िक उनक के िलए गाना गाया था ।
आवाज बहत पतली है ।
यत िम ने सात वष तक लगभग हर िदन लता जी से फोन
लता जी बचपन म पढ़ाई तो नह कर पाई,ं लेिकन दिु नया क के मा यम से बात करके उनके अनभु व को ‘लता सरु गाथा’
छह बड़ी यूिनविसटीज से उ ह डॉ टरटे क उपािध िमली । नामक पु तक म िपरोया । यत जी बताते ह िक जीवन के इस
अपनी आवाज को और सरु ीला और मीठा बनाने के िलए वह रोज पड़ाव पर एक भी िदन ऐसा नह था, जब लता जी ई र, गु जन
ढेर सारी हरी िमच खाती थ , खासकर तीखी को हापरु िमच । और अपने माता-िपता क त वीर को णाम न करती ह ।

उन पर िलखी िकताब “लता मंगेशकर इन हर ओन वॉयस” म लता जी िजतनी स त अपने रयाज़ और सरु के मामले म
खदु लता मंगेशकर जी ने एक िक से का िज िकया था िक िकस थ , तो जीवन म भी उतनी ही सरल और िवन थ । यती िम
तरह िदलीप कु मार जी ने लता जी के मराठी होने क वजह से बताते ह िक एक बार लंदन म लता जी का पाचं िदवसीय सगं ीत
उनक उदू अ छी न होने पर िट पणी क थी, िजसके बाद लता समारोह था । समारोह का पहला िदन बहत शानदार रहा । लता
जी ने अपनी उदू भाषा को ठीक करने के िलए एक अ यापक भी जी ने माना था िक यह सारा असर उ ह ने जो साड़ी पहनी थी,
रखा था । ऐसे ही कई उतार-चढ़ाव के बावजूद सफलता हािसल उसका था । िफर या था, सगं ीत समारोह के िदन वह उसी साड़ी
करने के बारे म पूछे जाने पर वह बताती ह िक ये हर िकसी क को धलु वात और पहनत । यती िम कहते ह िक यह उनक
िजदं गी म होता है । सफलता से पहले असफलता िमलती है । म िवन ता थी िक वे सरु क तैयारी को तो अपना मानती थ , लेिकन
िववके ानंद जी और सतं ाने र जी क भ हं । म तो बस आप उससे िमलने वाली सफलता को ई र का आशीवाद समझती थ ।

लता मगं ेशकर जी ने अनेक भाषाओं म हजार गीत गाए,

21

लेिकन एक गीत ऐसा भी था, अगर वह नह गात तो शायद पड़ा, अपनी रयाज रोक दी, यान से लता जी का गाना पूरा सनु ा
उसका वह असर नह पदै ा होता, जो समय क नदी के िनरतं र और िफर बोले िक “कमब त, कह बेसरु ी नह होती” ।
बहते हए आज तक बरकरार है । किव दीप ने िनि त ही जो
िलखा िक ...... ऐ मेरे वतन के लोग ....... वह बेहतरीन है, इस ऐसे ही पिं डत कु मार गधं व ने पूरा लेखा लता जी क गाियक
गीत का कोई जोड़ नह । किव दीप क लेखनी क कोई तलु ना के बारे म िलखा । इसम वह िलखते ह िक िजस लयकारी को कं ठ
नह , मगर लता जी ने अपनी आवाज म िजन भावनाओंम डूबकर से िनकालने म अ य गायक-गाियकाएं आकाश-पाताल एक कर
इस गीत को गाया, उसे सनु कर ही महसूस िकया जा सकता है । दते े ह, उसी का सू म भेद वह सहज करके फक दते ी ह । इसी म
सैकड़ बार सनु ने के बाद भी आप जब भी इस गाने को सनु ते ह म गलु जार, लता जी को याद करते हए कहते ह िक सिलल दा,
और इससे जड़ु ते ह, तो आखं अपने आप नम हो जाती ह । जिटल धनु को बनाने म मािहर थे । उ ह ने एक बार “ओ .....
सजना बरखा बहार आई” गाने क ऐसी ही एक जिटल धनु बनाई,
लता मगं ेशकर जी के यि व का अगला पहलू मशहर लेिकन लता जी तो जसै े बड़ी सहजता से इस पर से टहलती हई
शायर, गीतकार, लेखक गलु जार बताते ह िक जब हम “घर” िनकल गई ।ं
नामक िफ म के एक गाने का अ यास पचं म (आर.डी.बमन) के
साथ कर रहे थे तब घर नाम िफ म का गीत आपक आखं म कु छ िव िस अमे रक मूल के िनवासी वायिलन वादक यहदी
महके हए से राज़ ह म आगे आने वाली लाइन आपक बदमािशय मेनिु हन को सगं ीत से ता लकु रखने वाला कौन नह जानता
के ये नए अदं ाज़ ह के बारे म पचं म दा परशे ान थे । उसने मझु से होगा, उ ह ने कहा था िक काश ! मेरी वायिलन आपक गायक
कहा िक शायरी म बदमाशी कै से चलेगी ? यह लता दीदी गाने क तरह से बज पाती ।
वाली ह, मने कहा – बदमाशी श द रखो, लता जी को पसदं नह
आया तो हटा दगे । लता जी से रकािडग के बाद पूछा गया िक गीत म शाि दक-शिु चता से भी उनका सरोकार हमेशा
गाना ठीक लगा आपको ? लता जी ने कहा “हां अ छा था” । वह िकतना रहा ह,ै इसे बयां करता एक 70 के दशक का वाकया ।
बदमािशय वाली लाइन? अर,े वही तो अ छा श द था इस गीता सगं ीतकार शकं र जयिकशन के साथ िफ म आखं आखं म के
का, उसी श द ने तो कु छ अलग बनाया इस गाने को । लता जी का एक गीत क रकािडग थी । उसक एक पिं म चोली श द था ।
वह गाना याद होगा जब वह गाते हए वे खनकदार हसं ी म इस पर आपि जताते हए लता जी ने उस गाने को गाने से मना
बदमािशय वाले श द का इ तमाल करती ह तब उसक कर िदया । तब िफ म िनमाता जे.ओम काश ने गाने के बोल ही
अिभ यि को और बढ़ा दते ी ह । बदलवा िदए । गीत के बोल के बारे म लता जी हमेशा कहती थ
िक सगं ीत अ ील नह होता, श द अ ील होते ह ।
लता जी क शालीनता, उनक िवन ता अपने आप म एक
िमसाल है, लेिकन उनक खदु से बनाई शि सयत इतनी बड़ी है कभी-कभी उस द रयािदल भु का मन हो आता है िक
िक बड़े से बड़ा िद गज भी उसके सजदे म झकु जाए तो अचरज मानवता को कोई उपहार िदया जाए, तो लता मंगेशकर जी ई र
या । िमसाल ह इसक भी जैसे – लता जी क हमेशा से इ छा का िदया वही वरदान थ िज ह ने वा दवे ी क कृ पा के वल
रही थी िक वे िहदं ु तानी शा ीय सगं ीत के िद गज उ ताद बड़े भारतवष म ही नह , बि क हर सनु ने वाले पर बरसाई । उनके
गलु ाम अली से सीख पात , लेिकन बड़े गलु ाम अली कहते ह िक वे कोिकल कं ठ का सगं ीत वाकई असीम हो गया ।
एक बार रयाज कर रहे थे, तभी लता जी का गाना उनके कान म
मु य कािमक अिधकारी (सा.)
म य रले , मबंु ई छिशमट

रा को आगे बढ़ाना है तो सभी ब च को िशि त क िजए। देश को वे खुद सभँ ाल लगे ।

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• लेख

वर कोिकला लता मगं ेशकर

उषा शमा

तीस से यादा भाषाओं म श द के भाव को वर ब करने लता जी को गाना गाने क इजाजत दने े के िलए कहा लेिकन सभी
वाली लता मंगेशकर को भारत ही नह िवदशे म भी लोग बहत ही ने उनक पतली आवाज होने के कारण काम दने े से इकं ार कर
िदया तो हैदर ने चेले ज दते े हए कहा िक दखे ना एक िदन लताजी
ा के साथ जानते ह। उनके िवषय म कहना सही होगा िक जब इतनी मशहर होगी िक अ छे-अ छे िनमाता उनसे अपनी िफ म
तक चादं म शीतलता रहगे ी, सूय काश रहेगा, तब तक लता जी म गाना गाने क िम नते करगे।
का नाम हर उ के यि य के दय पर राज करता रहेगा, सभी
उ ह पा गायन क अप रहाय और एक छ सा ा ी के प म जब उ ह ने गाना ारभं िकया। तब नूरजहा,ँ शमशाद बेगम
वीकार करते ह, उ ह भारत सरकार ने प भूषण, प ी, भारत आिद गाियकाओंका बोलबाला था। अत: उ ह ने अपनी नई शलै ी
र न जैसे सव े परु कार से भी नवाजा था। पाचँ भाई-बहन म िवकिसत करने का िवचार िकया और नई शलै ी िवकिसत करने के
लता जी सबसे बड़ी थी । जब वह कू ल गई, तो छोटी-सी बात पर िलए लता जी ने उदू के श द का उ चारण भी सीखा और अपने
उनक िशि का से अनबन हो गई तो वह कू ल से वापस आ गई, नई शैली िवकिसत क ।
िफर कभी उ ह ने कू ल क ओर मड़ु कर नह दखे ा िपता लता जी क सफे द साड़ी
दीनानाथ जी ने ही उ ह शा ीय सगं ीत क िश ा घर पर ही दी थी
य िक वह वयं बड़े शा ीय सगं ीत थे एक कहावत है िक सबु ह सोने क जगह हीरे और चादँ ी िक जगह सोने के आभूषण पहनने
के बाद शाम और शाम के बाद रात अव य होती ह।ै लता जी क वाली लता जी हमेशा सफे द साड़ी पहनती थी। उनका मानना था
खिु शय का िसदं ूर भी अिधक िदन तक िटक न सका। लताजी ने िक सफे द रगं म सादगी, स जनता और सरलता का व प
उ के 13 बसतं पार िकए थे िक िपता का साया उनके िसर से उठ दखे ने को िमलता है। ऐसा नह है िक वे कभी और रगं नह पहनती
गया। सामने चार छोटे भाई-बहन और माँ को सहारा दने े के थी कु छ समय तक उ ह ने अ य रगं भी पहन थे लेिकन हमेशा
याल से खदु के आसँ ू प छे और घर चलाने के िलए काम क परशे ानी होती थी और इसी को दखे ते हए उ ह ने िनणय िकया िक
तलाश करने लगी उसी समय “नवयगु िच पट मूवी” कं पनी के वे सदवै सफे द कपड़े पहनेग ।
मािलक मा टर िवनायक और अ य प रवार के नजदीक लोग ने याग मिू त लताजी
लताजी का कै रयर सवारँ ने म मदद क ।
ऐसा नह िक उनके मन म खदु का घर बसाने का याल नह
लता जी को अिभने ी के प म काम करना पसदं नह था आया परतं ु प रवार क िज मेदा रय को पहले रखकर अपने
परतं ु घर क हालत को दखे कर उ ह ने कई िफ म म बतौर िववाह का याल छोड़ िदया। इसिलए उ ह याग मूित कहना
अिभने ी भी काम िकया। लताजी का ज म नाम हेमा था। लेिकन गलत न होगा।
दीनानाथ जी ने अपने नाटक भावबंधन के एक पा के नाम सफलता क थम सीढ़ी
लितका से भािवत होकर इनका नाम लता भी रख िदया। कै रयर
के ारिं भक िदन म वसतं दसे ाई और गलु ाम अली, हदै रजी के 1949 म एक िफ म खेमचदं काश के ारा िनिमत हई।
सपं क म लता जी के आने से उ ह बहत मदद िमली। हदै रजी िजसम लता जी ने “आएगा आने वाला” गीत गाया गया था जो
उनक ितभा को समझा और कई िनमाताओंसे अपनी िफ म म सपु र िहट हआ उसके बाद लता जी ने मड़ु कर कभी नह दखे ा।
सरल वभाव

लता जी का वभाव बहत ही सरल था। यही कारण था िक वह

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• किवता लता-मगं शे कर
िनमाताओं क पहली पसदं बन गई। िनमाता उ ह बहत किठन
गीत दते े थे परतं ु वे उ ह बड़ी ही सरलता के साथ वरब कर अनूप पाडं े
दते ी थी। वे बहत ही सरलता से बात करती थी अत: वे उ ह अपने
प रवार का सद य समझते थे । सरु भी गया,
कु छ अपवाद सगं ीत भी गया,
साम वदे का गीत गया।
कई िनमाताओंव सगं ीतकार से उनके कु छ मनमटु ाव भी हए। वीणा पािण म होने समािहत,
कु छ लोग ने उनके सफे द पहनावे पर तो कु छ उनक आवाज पर उनका ही एक प गया।
कमट करते। िजस से दखु ी होकर वह के वल उनसे दूर हो जाती थी मधरु वर से झकं ृ त हम
या एक िनणय करती थ िक वे उनके साथ काम नह करग । एक तमु , िजन गीत के होते थे।
अपवाद यह भी है िक उ ह िकसी से यार हआ है। लोग का उ ह वर से जैसे हाय,
मानना है िक दोन के प रवार के राजी न होने के कारण उ ह ने आ म त व ही रीत गया।
कभी िववाह न करने का फै सला िकया और उ ह ने अपने प रवार वरद ह त सी थ वो कोई
क और अपने छोटे भाई-बहन को आगे बढ़ाया। या वट वृ सघन थ वो।
लता जी क मृ यु हमसे िवलग करके तु ह
जगत िनयतं ा जीत गया॥
जीवन के अिं तम ण म भी बहत समय तक वह अ पताल म कौन मगर छीनेगा हमसे,
रही यह सोचती थी िक मेरे पास आज सब कु छ ह।ै कौन सी ऐसी रची बस धनु गीत क ।
चीज ह,ै जो मेरे पास नह है? लेिकन िफर भी म चलने के िलए होग हज़ार गीत परु ाने,
मोहताज ह।ँ उनके इस कथन ने यह िस कर िदया िक इंसान को मखु र न होगा सजृ न नया॥
खशु ी से बढ़कर पसै े को नह समझना चािहए। इसं ान अगर खशु कहते ह जग न र है और
रहना चाहे तो वह कम पैस म भी खशु रह सकता है और दिु नया हर व तु यहाँ िमट जाती ह।ै
क दौलत इसं ान को िजदं गी नह दे सकती। िकसी ने सच ही कहा िकं तु तु हारे गीत ह अ ु ण,
है िक पसै ा गदु गदु े ग े तो दे सकता है परतं ु न द नह दे सकता। अमर ह ये और रहगे सदा॥
पसै ा सोने क थाली तो दे सकता है लेिकन भूख नह दे सकता। ओ भारत क दीदी जाओ,
इसी बात को िस करते हए लता जी हमारे दय के ऊपर आज महा मनीषी लोक म तमु ।
भी राज कर रही ह और हमेशा राज करती रहगी। भले ही उनक तमु को भाये लोक दसू रा,
आवाज 6 फरवरी 2022 को रिववार माघ शु ल पचं मी को मबंु ई साथ परु ाना लोक नया॥
के ीच कडी अ पताल म शांत हो गई परतं ु उनके गीत हमारे
िदल म सिदय तक गनु गनु ाते रहगे। उप मु य संर ा अिधकारी,
मु यालय,
ई-45, महावीर कॉलोनी,
िग रराज जी मिं दर के पास, मंबु ई छ. िश. म. ट.

मथरु ा,
मो. - 9997683004

24

• लखे

ब पी लहरी – द िड को डासं र

-नर नायटे

ब पी लहरी का ज म कोलकाता, पि चम बगं ाल म शा ीय चांद पे ले जाए’ और ‘जलता है िजया मेरा भीगी-भीगी रात ’ म जैसे

सगं ीत क समृ परपं रा वाले प रवार म हआ था। उनके िपता गीत लोकि य हए ।

अपरशे लहरी एक िस बगं ाली गायक थे और उनक मॉं ब पी ने कई िफ म म अपने पा गायन से भी ोताओंको अपना

वनसरी लहरी एक सगं ीतकार और गाियका थ , जो शा ीय दीवाना बनाया ह।ै उनके गाए गीत क लबं ी फे ह र त म कु छ ह –

सगं ीत और यामा सगं ीत म पारगं त थ । वह उनक इकलौती बबं ई से आया मेरा दो त, दखे ा है मने तझु े िफर से पलट के , तू मझु े

सतं ान थे। कहते ह िक पूत के पांव पालने म ही िदख जाते ह और जान से भी यारा ह,ै याद आर रहा है तेरा यार, सपु र डासं र आए

सगं ीत का हनर तो उनके खून म था ही। शु आत के कु छ समय ह आए ह, जीना भी या कोई जीना ह,ै यार िबना चैन कहां र,े

म, उ ह उनके माता-िपता ने ही िशि त िकया था। बचपन म त मा-त मा लोगे, यार कभी कम मत करना, िदल म हो तमु ,

ब पी दा ने अपने सगं ीत को सधु ारने और बेहतरीन बनाने के िलए बबं ई नग रया, उलाला-उलाला आिद।

काफ यास िकया। िकशोर कु मार उनके मामा थे और उ ह ही वष 1982 म दिशत िफ म नमक हलाल ब पी के क रयर क

ब पी को सगं ीत के े म लाने का ये जाता ह।ै मह वपूण िफ म म शमु ार क जाती ह।ै काश मेहरा के िनदशन

बहत कम उ म ही उनक मह वाकां ा न के वल रा ीय तर पर म बनी इस िफ म म सपु र टार अिमताभ ब चन ने मु य भूिमका

बि क अतं ररा ीय तर पर िस होने लगी थी। उ ह ने 3 साल िनभाई थी। िफ म म िकशोर कु मार क आवाज म ब पी का

क छोटी-सी उ म ही तबला बजाना शु कर िदया था। उनक सगं ीतब यह गीत ‘पग घघंु बांध मीरा नाची थी’ उन िदन

मां के प रवार से उनके र तेदार म िकशोर कु मार और एस ोताओंम े ज बन गया था और आज भी जब कभी सनु ाई दते ा

मखु ज वशं शािमल ह। उ ह 19 साल क उ म 1972 म एक है तो लोग िथरकने पर मजबूत हो उठते ह।

बगं ाली िफ म ‘दादू’ म पहला मौका िमला। वष 1983 म दिशत िफ म िड को डासं र ब पी के क रयर के

ब पी 19 साल क छोटी उ म मबंु ई आ गए। उनके क रयर का िलए मील का प थर सािबत हई। बी. सभु ाष के िनदशन म िमथनु

मह वपूण मोड़ तािहर हसैन क िहदं ी िफ म ज मी थी, िजसके च वत क मु य भूिमका वाली इस िफ म म ब पी लहरी के

िलए उ ह ने संगीत तैयार िकया और एक पा गायक के प म सगं ीत का नया अदं ाज दखे ने को िमला। आई एम ए िड को डांसर,

िस हो गए । उ ह ने खदु मोह मद रफ और िकशोर कु मार के िजमी-िजमी िजमी आया आजा जैसे िड को गीत ने ोताओंको

साथ एक यगु ल गीत गाया, िजसका नाम था ‘ निथंग इज झूमने पर िववश कर िदया। िफ म म अपने सगं ीतब गीत क

इ पॉिसबल’ उ ह ने दि ण भारत म िनिमत कई िफ म के िलए सफलता के बाद ब पी िड को िकं ग के प म मशहर हो गए।

सगं ीत भी िदया । वष 1984 म ब पी के िसने क रयर क एक और सपु रिहट िफ म

हमारी िहदं ी िफ म इडं ी म ब पी जी एक िस सगं ीत शराबी दिशत हई। इस िफ म म उ ह एक बार िफर से िनमाता

िनदशक थे। उ ह ने भारतीय िसनेमा म िड को गान के उपयोग काश मेहरा और सपु र टार अिमताभ ब चन के साथ काम

का बीड़ा उठाया और अपने कु छ िलखे गान को भी गाया। वह सन करने का अवसर िमला। िफ म म अपने सगं ीतब सपु रिहट गीत

1980 म िड को डासं र, नमक हलाल और शराबी जसै ी िफ म दे दे यार द,े मंिजल अपनी जगह ह के ज रए ब पी ने अपना

से लोकि य हए थे। िदवाना बना िदया। ब पी ने 80 के दशक म बालीवडु को यादगार

बचपन से ही ब पी यह सपना दखे ा करते थे िक सगं ीत के े म वे गान क सौगात दे कर अपनी पहचान बनाई। उनक ेरणा बने

अतं ररा ीय याित ा कर सक। ब पी क िक मत का िसतारा एसडी बमन। ब पी जब छोटे थे तब एसडी बमन के गान को सनु ा

वष 1975 म तािहर हसैन क दिशत िफ म ज़ मी से चमका करते और उ ह रयाज िकया करते थे। वे गायक होने के साथ

िजसके िलए उ ह ने सगं ीत क रचना क और पा गायक के प यूिजक डायरे टर, अिभनेता एवं रकॉड ोडयूसर भी थे।

म दोगनु ी कमाई क । सनु ील द , आशा पारखे , रीना रॉय और सन 2004 म, उ ह ने अपना ए बम ब पी मैिजक – द असली

राके श रोशन क मु य भूिमका वाली इस िफ म म ‘आओ तु ह बाप िम स िनकाला, िजसम गोरी है कलाइयां और िजमी-िजमी

25

जैसे लोकि य गाने थे। िजस दौर म लोग रोमांिटक सगं ीत पसदं कं पोजर थे तथा उ ह ने सगं ीत जगत म िसथं ेसाइ ड िड को
करते थे उस व ब पी ने बॉलीवडु म िड को डांस का प रचय सगं ीत बनाने का काम िकया था। उनक अनोखी मधरु आवाज के
करवाया। ब पी ने ताल वा ़ यं ो के योग के साथ िफ मी सगं ीत िलए उ ह ने बगं ाली िफ म म जसै े िक अमर सगं ी, आशा ओ
म पि चमी सगं ीत का सिं म ण करके िड कोथेक क एक नई भालोबाशा, अमर तिु म, अमर मे , मिं दर, बदनाम, र लेखा,
शलै ी भी िवकिसत क थी। अपने इस नए योग क वजह से ब पी ि या इन सभी िफ मी गान म अपनी आवाज दी थी।
लहरी को क रयर के शु आती दौर म काफ आलोचनाओंका भी इसके अलावा उ ह ने 1980 से लेकर के 1990 के दशक म िहदं ी
सामना करना पड़ा, लेिकन बाद म ोताओं ने उनके सगं ीत को िफ म जगत के कई िफ म म अपनी आवाज म गाने के तौर पर
काफ सराहा और वह िफ म इडं ी म िड को िकं ग के प म दी ह, जैसे क वारदात, िड को डासं र, नमक हलाल, शराबी,
िव यात हो गए। नौकर बीवी का, नया कदम, मा टरजी, बेवफाई, मकसद, सरु ाग,
ब पी को बॉलीवडु का िड को िकं ग कहा जाता ह।ै वे सबसे यादा इसं ाफ म क ं गा, डासं डासं , कमांडो, साहेब, अिधकार, आज का
बहमखु ी कला से स प न गायक थे। उनके गाने डांस और म ती एमएलए, राम अवतार आिद। उनक पहली िहदं ी िफ म 1973 म
से भरपूर होते थे। िज ह सनु मन म ती और उमगं से भर जाता है। न हा िशकारी के िलए सगं ीत िदया था िजसके बाद 1975 म आई
उनके सैड सांग भी िड को सागं जैसे ही लगते ह। याद आर रहा है िफ म ज़ मी और साल 1976 म चलते-चलते के महशूर गाने मेरे
गाने के बोल सडै होते हए भी िड क शलै ी के ह। यह गीत याद रखना के िलए सगं ीत िदया जोिक आज गो डन
ब पी को िकशोर कु मार और ए आर रहमान क आवाज बहत गान क िहट िल ट म शमु ार ह। उ ह ने 1976 म आई िफ म
पसदं थी। वे अिमताभ ब चन और सलमान खान के बहत बड़े िड को डासं र के िलए यूिजक िदया था। इस िफ म का गाना
फै न थे। इनक पसदं ीदा अिभने ी माधरु ी दीि त थी। इनके िफ म बहत मशहर हआ जोिक उनके कै रयर का टिनग पॉइटं सािबत
ज़ मी के एक गीत निथगं इ पॉिसबल क रचना कर असभं व को हआ। िमथनु च वत के ारा िफ माये गए गाने आई एम ए
सभं व बना िदया, िजसे मोह मद रफ़ और िकशोर कु मार ने िड क डांसर ने धूम मचा दी थी और पॉप एवं िड को का नया
िमलकर गाया था। दौर क शु आत हई। ब पी ने चार दशक तक लगभग 600
ब पी लहरी को सोने का बहत शौक था और ये रोजाना 1.5 िफ म म लगभग 5000 गाने गाये और सगं ीत िदया। एक रपोट
िकलो ाम सोना पहन के रखते थे और ये उसक सरु ा के िलए 4 के मतु ािबक साल 1976 म उ ह ने 33 िफ म म 180 गान गाए।
बॉडीगॉड भी रखते थे, िजससे कोई इनका सोना चरु ा न ले। वे हर उनका ये रकाड िगनीज बकु ऑफ व ड रकॉड म भी दज है।
समय सोने से लदे रहते थे। वह मानते थे िक सोना उनके िलए उ ह िफ ममेयर क ओर से लाइफ टाइम अचीवमट अवॉड से भी
लक ह।ै वह लाख पये के आभूषण हर समय पहने नजर आते नवाजा जा चकु ा है।
ह। उनक पहली चेन उनक मां ने उ ह भेट दी थी वह दूसरी चेन ब पी ने राजनीित म भी हाथ आजमाया। सन 2014 म उ ह ने
उनक प नी ने तोहफे म दी थी। बीजेपी के िटकट पर चनु ाव लड़ा। ब पी भारतीय सगं ीत जगत के
सन 2008 म उ ह ने कोलकाता नाईट राइडस टीम के िलए इकलौते ऐसे सगं ीतकार ह िज ह माइकल जै सन ने अपने पहले
आईपीएल म सगं ीत िदया था। उ ह ने कई सगं ीत रयिलटी शो शो म बलु ाया था। 1996 म यह लाइव शो मबंु ई म हआ था। िहदं ी
भी जज िकये ह, जसै े सा रे ग म प िलटल च स 2006, सार रे ग म सगं ीत म पॉप का िम ण लाने का ये उ ह ही जाता है। इस वजह
प चैलज 2007, आिद। वे 8-10 लाख ित गीत का चाज िलया से उनका भारी िवरोध भी हआ। 16 फरवरी 2022 को 39 वष क
करते थे। उनके बेटे का नाम ब पा लािहरी है। ब पा लािहरी भी एक उ म मशहर िसगं र क पोजर ब पी लहरी ने मबंु ई के िसटी के यर
सगं ीतकार है। वह एक यूएस-बे ड िसगं र ह। उ ह ने तनीषा वमा से हॉि पटल म अपनी आिखरी सासं ली।
शादी क । दपं ित का एक बेटा भी है िजसका नाम कृ ष ह।ै ब पा ने
अपने िपता के न शेकदम पर चलते हए सगं ीत क दिु नया म कदम कायालय अधी क
रखा है। सरं ा िवभाग, मंरे कायालय
ब पी सगं ीत जगत म ािं तकारी सगं ीत बनाने वाले एक सगं ीत
नागपरु

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• लेख

पॉप गीत का बादशाह – ब पी लहरी

-िनितन पिं डत सोनार

सु यवि थत विन, जो रस क सिृ कर,े सगं ीत कहलाती है। हो ही नह सकता। सोने के गहने पहनने वाले ब पी लहरी हमेशा
गायन, वादन व नृ य तीन के समावशे को सगं ीत कहते ह। सगं ीत रॉक टार के लकु म नजर आते थे। बातचीत के ढंग से भी वह एक
नाम इन तीन के एक साथ यवहार से ही पड़ा ह।ै सगं ीत योग क ऐसा िम ण लगते ह िजसम भारतीय रगं प के साथ अिधक
तरह है जो हम हमेशा खशु रखता ह।ै सगं ीत का हमारे वा य पर मा ा म िवदशे ी फै शन हो। उनके पहनावे म अिधकतर ैकसूट या
काफ अ छा असर होता ह।ै यह हमारे शरीर को व थ तथा कु ता पायजामा होता था । इसके साथ ही ब पी लहरी अपने धूप के
हमारे मन को शातं बनाये रखता ह।ै भारतवष म सगं ीत का च म को गम हो या सद कभी नह छोड़ते। ब पी दा को बॉलीवडु
परु ातनकाल से अपना एक अलग ही मह व रहा है। इसी तरह का पहला रॉक टार िसगं र भी कहा जाता ह।ै ब पी लहरी 19
बॉिलवडु म गायक क अलग ही पहचान होती ह।ै इ ह गायक म साल क उ म ही बॉिलवडु म अपना िस का चमकाने के िलए
से कोई गायक अपना एक ऐसा थान बनाता है, जो बािकय से मबंु ई चले आए। वष 1973 म उ ह िहदं ी िफ म “न हा िशकारी” म
िबलकु ल अलग होता ह।ै ऐसे ही गायक म शािमल है, बॉिलवडु के गाना गाने का मौका िमल गया। तािहर हसनै क िहदं ी िफ म
पहले रॉक टार ब पी लहरी। ज़ मी (1975) से उ ह ने बॉलीवडु म खदु को थािपत िकया
ब पी लहरी ने बॉिलवडु म गीत को पॉप का तड़का लगाया और और एक पा गायक के प म पहचान बनाई। इस िफ म म
भारतीय दशक को एक नया वाद दान िकया। भारतीय सगं ीत उ ह ने मोह मद रफ और िकशोर कु मार जैसे महान गायक के
जगत म एक समय ऐसा भी था जब ब पी लहरी का नाम आते ही साथ गाना गाया। इसके बाद तो जैसे ब पी दा के गाने सबक
लोग के जहन म झमु ते हए गान और बेहतरीन सगं ीत घमु ता था। वे जबु ान पर छाने लगे । इसके बाद दौर आया ब पी लहरी और
हमेशा से िफ म म अपनी एक अलग आवाज और सगं ीत के िलए िमथनु च वत क जोड़ी का। इन दोन क जोड़ी ने बॉिलवडु म
जाने जाते है। इसके अलावा उनक पहचान उनके सोने के गहन ऐसी धूम मचाई िक सब डासं और िड को यूिजक के दीवाने हो
से भी होती ह।ै आज ब पी लहरी को आम जनता “ब पी दा” के गए। उ ह ने िमलकर िड को डासं र, डांस डासं , कसम पदै ा करने
नाम से भी पहचानती है। उनके बार म कु छ िवशेष बात और उनक वाले क जैसी िफ म को अपने गान से ही िहट बना िदया।
जीवनी के बारे म कु छ जानते ह।ै 27 नवबं र, 1952 को ब पी ब पी लहरी क एक और खािसयत उनके गहने। गले म सोने क
लहरी का ज म पि म बगं ाल के जलपाईगड़ु ी म हआ था। वह एक मोटी चेन और भारी-भारी अंगूिठया,ं पहली बार ब पी लहरी को
महान सगं ीत घराने से ता लकु रखते ह। उनके िपता “अपरशे दखे ने वाले सोने क दकु ान तक कहते थे लेिकन सच तो यह है िक
लहरी” एक िस बगं ाली गायक थे। उनक माता “बांसरी लहरी” ब पी लहरी को सोने से बेहद लगाव था और वह सोने को अपने
भी बां ला सगं ीतकार थ । बचपन से ही उ ह ने िव िस होने के िलए लक मानते थे। िह दी िसनेमा म िहदं ी भाषा के श द को
सपने दखे ना शु कर िदया था। तीन साल क उ म तबला छेड़छाड़ िकए िबना ब पी दा ने सगं ीत को एक नई िदशा दी।
सीखने के साथ उ ह ने सगं ीत क िश ा लेनी शु क । उ ह ने अपने सभी एलबम म अशोक कु मार और आशा भोसले
सगं ीतकार एस. मखु ज उनके सबं धं ी ह।ै उ ह ने सगं ीत अपने क आवाज का बखूबी इ तेमाल िकया। साथ ही एिलशा िचनॉय
माता-िपता से ही सीखी और 19 साल क उ म पहली बार उ ह और ऊषा उथपु के साथ िमलकर उ ह ने कई िहट गान को
बगं ाली िफ म “दादू” (1972) म गाना गाने के िलए चनु ा गया था। अजं ाम िदया।
यह से इस ितभाशाली यवु ा ने सगं ीत क दिु नया म अपना ब पी लिहरी क एक फोटो िजसम वह म मी-पापा के साथ तबला
कदम रखते हए अपनी आवाज से लोग को मं मु ध कर िदया । बजाते नजर आ रहे ह। इस फोटो से समझ आ जाता है िक वह
ब पी लहरी क बात हो और उनके टाइल पर नजर ना जाए ऐसा बचपन से ही िकतने ितभाशाली और सगं ीत के ित उ साही थे।

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उनके िहट गान म से कु छ खास िन न ह – लहरी इतनी वले री य पहनते ह इस बारे म भी वह अपने कई
• याद आ रहा है और सपु र डासं र ( िड को डांसर ), इटं र यू म बोल चकु े ह। उ ह यादा गहने पहनने क रे णा
• बबं ई से आया मेरा दो त ( आप क खाितर ), अमे रकन रॉक टार “एि वस े ली” से िमली थी। ब पी लहरी ने
• ऐसे जीना भी या जीना है ( कसम पदै ा करने वाले क ), अपने एक इटं र यू म बताया था, 'हॉलीवडु गायक “एि वस
• यार चािहए मझु े जीने के िलए ( मनोकामना ), े ली” सोने क चेन पहनते थे और मझु े वह काफ पसदं थे। वसै े
• रात बाक ( नमक हलाल ), भी ' गो ड ' मेरे िलए हमेशा से ही लक सािबत हआ है।
• यार िबना चैन कहां रे ( साहब ),
• ऊ ला ला ऊ ला ला ( द डट िप चर ) वह बात कर ब पी लहरी के पास मौजूद सोने क तो जािहर है िक
उ ह ने अिमताभ ब चन के िलए "नमक हलाल" (1982) और उनके पास लाख पये का सोना ह।ै ब पी लहरी ने अपने पास
"शराबी" (1984) जैसी िफ म के िलए कई चाटब टस तैयार मौजूद सोने और सपं ि क जानकारी साल 2014 म हए
िकए थे । उनके िहट िफ म ैक म "पग घघंु बांध मीरा नाची लोकसभा चनु ाव के दौरान दी थी। वष 2014 म उ ह ने लोकसभा
थी", "थोड़ी सी जो पी ली ह"ै , "आज रपट जाए तो, हम ना चनु ाव लडा था। इस दौरान ब पी लहरी ने अपनी सपं ि के बारे म
उठई यो ", "जहां चार यार", "दे दे यार द,े हम यार द ", "इतं हा चनु ाव आयोग को जानकारी दी थी। चनु ावी शपथप के अनसु ार
हो गई इंतजार क " और "रात बाक , बात बाक " जसै े गाने साल 2014 म ब पी लहरी के पास 754 ाम सोना था और 462
शािमल ह। िकलो चादं ी थी। ब पी लहरी ही नह उनक प नी “िच ानी लहरी”
भी गो ड क शौक न ह।ै 2014 के चनु ावी शपथप के अनसु ार
ब पी लहरी क प नी के पास 967 ाम सोना, 89 िकलो चांदी है।

ब पी दा हमेशा से िफ म म अपनी एक अलग आवाज और सगं ीत ब पी दा ने भारत म 80 और 90 के दशक म िड को संगीत को
के िलए जाने जाते रह है। इसके अलावा उनक पहचान उनके लोकि य बनाने म अहम भिु मका अदा क थी। ब पी दा ने साल
सोने के गहन से भी होती है। ब पी लहरी को सोने के गहने पहनना 1985 म िफ म 'शराबी' के िलए बे ट यूिज़क डायरे टर का
काफ पसदं है। सोने को वह अपना भा य मानते ह। यही वजह है िफ मफे यर अवॉड जीता था। बॉलीवडु म उनका आिखरी गाना
जो ब पी लहरी के शरीर पर सोने के गहने िदखाई दते े ह। ब पी 2020 म आई िफ म 'बागी' का 'भकं स' था। 1970-80 के दशक
लिहरी को सोना पहनना और हमेशा च मा लगाकर रखना बेहद के अतं म 'िड को डांसर', 'नमक हलाल' और 'डांस डासं ' जैसे
पसदं था। गले म सोने क मोटी-मोटी चेन और हाथ म बड़ी-बड़ी साउंड ैक को लोकि य तथा भारतीय िसनेमा के साथ सं ेिषत
अगं ूिठयां समेत सोने के ढेर सारे गहने पहनना उनक पहचान थी। िड को सगं ीत को बेहतर ढंग से एक कृ त करने म अपनी अहम
उनके गले और हाथ हमेशा वले री से भरे िदखाई दते े ह। ब पी भिु मका िनभाई थी।

ब पी लिहरी का नाम एक ऐसे सगं ीतकार के प म िलया जाता है
िज ह ने अपने सगं ीत म कई तरह के नवाचार व योग िकए। ब पी
दा को अपने बेहतरीन सगं ीत के िलए दजन स मान और
परु कार ा हए। िफ मी सफर म कई अवॉड जीतनेवाले ब पी
दा को सगं ीत क दिु नया का मशहर परु कार “ ैमी अवॉड” क

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चाहत थी। उ ह ने कहा था िक सोना यानी गो ड पहनना उनक • किवता
पहचान ह,ै लेिकन “ मै ी अवॉड” उनक चाहत ह।ै उ ह ने “ मै ी
अवॉड” के िलए पांच बार ‘इंिडयन मेलोडी' नाम के यूिजक ए बम अलौिकक लता
से अपनी िव ी भेजी थी। इस ए बम म उ ह ने भारतीय सगं ीत
के साथ म सूफ और लोकगीत शैली के गान ततु िकए थे। इस िकशोर कु दरे
ए बम से उ ह मै ी अवाड जीतने क एक आस थी, लेिकन ऐसा लता म ही तो ताल है, मां सर वती का कमाल है ।
हो न सका। अब तक पिं डत रिवशकं र शु ल, प.ं िव मोहन भ , सरु सगं म ये िवहगं म ह,ै ये अलौिकक, बेिमसाल है ।।
ए. आर. रहमान, जािकर हसनै और जिु बन मेहता जसै ी भारतीय
हि तय को मै ी अवाड िमल चकु ा ह।ै आवाज़ ये नायाब सी, बस यही तो कामयाब सी,
िव को अजीज़ बहत, ये बेपनाह लाजवाब सी,
ब पी दा का नाम ैमी िवजेताओंक सूची म भले ही शािमल न हो ई र के मन म सगं ीत का, उ प न यही खयाल है ...
सका हो, लेिकन भारतीय िसनेमा के िड को िकं ग के प म
उनका नाम अमर और अिमट तथा अजरामर रहगे ा। बॉलीवडु सगं ीत क ईज़ाद य,े है सगं ीत लता से आबाद य,े
सगं ीत को िडिजटल बनाने वाले सगं ीतकार म उनका नाम अ णी वर साधना का आरभं ये, अनंत के भी बाद ये,
है। उनके गान ने भारत क सरहद को पार कर हॉलीवडु म भी
अपनी धूम मचाई थी। अभेद सरु के कंु भ क , यही तपती हई मशाल है ....

सदी के महानायक अिमताभ ब चन ने ब पी लहरी के िनधन पर मिहमा लता क है अमर, सरु को भी है ये खबर,
गहरा शोक य करते हए कहा था िक पॉप गान के बादशाह, बजती लता क ही धनु , िदन-रात के चार हर,
गायक, सगं ीतकार ने अपनी िफ म के िलए जो गाने िदए, उ ह सरु भी अनाथ लता बगैर, सरु का यही सवाल है ....
दशक बाद भी याद िकया जाता रहेगा। ब पी लिहरी के िनधन पर
िफ म मेकर अशोक पिं डत ने कहा था, ''रॉक टार ब पी लािहरी है सगं ीत का वजूद लता, सगं ीत का सबूत लता,
जी के िनधन के बारे म सनु कर त ध ह।ं िव ास नह हो रहा है िक सगं ीत के हर ातं क , न व अटूट मजबूत लता,
मेरा पड़ोसी अब नह रहा। आपका सगं ीत हमेशा हमारे िदल म वो समु धरु सरु संप नता, िबन लता सब कं गाल है ...
रहगे ा।'’
इस वष सगं ीत जगत को एक के बाद एक बड़े झटके लगे ह। ब पी जब तक ये पृ वी, धरा ह,ै ई री वरदान रखरा है,
लिहरी से पहले भारत क कोिकला “लता मगं ेशकर” का फरवरी राग, सगु म, भि , गज़ल, बस लता संगीत भरा ह,ै
को मबंु ई के ीच कडी अ पताल म िनधन हो गया। भारत म जीवतं वो हर साज़ म, न अतं लता, न इतं काल है ....
िड को सगं ीत को लोकि य बनाने वाले सगं ीतकार और गायक
ब पी लहरी, िज ह यापक प से भारत म "िड को िकं ग" के प लता म ही तो ताल है, मां सर वती का कमाल है ।
म जाना जाता ह,ै ऐसे महान गायक, सगं ीतकार इस सरु क सरु सगं म ये िवहगं म है, ये अलौिकक, बेिमसाल है ।।
दिु नया को छोडकर हमेशा के िलए चले गए।

किन अनवु ादक, राजभाषा िवभाग, व र अनवु ादक
मं.र.े . कायालय, भसु ावल मु यालय, गंबु ई छिशमट

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• लेख

लता मगं शे कर का जीवन सदं ेश

ि यकं ा वी. राव

वर कोिकला, सरु सा ा ी, सरु क मिलका “लता मंगेशकर · मेरा घर मेरे िलए महल जसै ा है लेिकन म अ पताल के एक
जी”…….. िजनक आवाज से हमारी सबु ह क शु आत होती है छोटे से िब तर पर लेटी ह।ं
और िदन खशु गवार हो जाता ह,ै िजनके वर से हम साधना म · म इस दिु नया के फाइव टार होटल म घूमती रही, लेिकन
लीन हो जाते ह और िजनक आवाज सनु कर हम अपने गम भलु अब मझु े अ पताल म एक लैब से दूसरी लैब म ासं फर िकया जा
जाते ह….. िजनके गान को सनु कर हम खिु शय से सराबोर हो रहा है।
जाते ह उ ह सरु क सर वती भी कहा जाता है। ऐसी अ ितम · म दिु नया भर के अलग-अलग िवमान म उड़ रही थी लेिकन
ह ती को सादर नमन…. 92 वष क उ म उनका िनधन हआ ह,ै आज दो लोग अ पताल के बरामदे म जाने म मेरी मदद करते ह।
िफर भी हम उनके िलए यही कहगे िक- · िकसी भी सिु वधा ने मेरी मदद नह क ।
· िकसी भी तरह से सकु ु न नह ।
“अभी ना जाओ छोड़कर िक िदल अभी भरा नह …” · लेिकन कु छ अपन के चेहर,े उनक दआु एं और इबादत मझु े
िजदं ा रखते ह।
आज हम उनको ाजं िल दते े हए उनके अिं तम श द को याद · यह जीवन ह,ै कोई फक नह पड़ता िक आप िकतनी दौलत
करते ह, उनके अिं तम श द म जीवन का गढ़ु रह य िछपा ह।ै जो के मािलक ह। अतं म आप खाली हाथ जाते ह।
भी उनके इस सदं शे को समझ लेगा, उनके इस सदं शे को अपनी · इसिलए दयालु बन, िकसी क भी मदद कर, जो आप कर
जीवन शलै ी का िह सा बना लेगा, िन य ही वह सही मायने म सकते ह।
जीवन जीना सीख लेगा। · धन और शि के िलए लोग को मह व दने े से बच।
· अ छे इसं ान से यार कर, जो तु हारे िलए ह उ ह सजं ोए
लता दीदी के अिं तम श द – रख, िकसी को द:ु ख ना द, अ छे बन, अ छा कर य िक वही
तु हारे साथ जाएगा।”
· “इस दिु नया म मौत से यादा वा तिवक कु छ भी नह है। सरु क रानी लता मंगेशकर आज भले ही हमारे बीच न हो पर
उ ह ने जीवन और मृ यु को बहत करीब से दखे ा है इसिलए उनसे उनके कहे गए हर वा य म स यता है। मनु य पूरी िजदं गी लगा
बेहतर इसके बारे म कोई नह बता सकता। उनके इन श द म पूरे दते ा है अपनी सखु -सिु वधाओं क पूित म पर तु अतं म यहां से
जीवन का सार ह,ै बस ज रत है उसे समझने क । उ ह ने कहा कु छ भी लेकर नह जाता, ले जाता है तो अपने ारा िकए गए कम
था िक - का फल और छोड़ जाता है अपनी याद।
· दिु नया क सबसे महगं ी ाडं ेड कार मेरे गैराज म खड़ी है, लता दीदी क मधरु आवाज आज भी कान म िम ी क तरह घलु ी
लेिकन मझु े हीलचेअर पर ले जाया जाता ह।ै हई है, रह-रहकर ऐसा लगता है जसै े वह अपनी मधरु आवाज म
· इस दिु नया के हर तरह के हर िडजाइन और रगं के महगं े कह रही हो-
कपड़े, महगं े जूते, महगं े साजो सामान सब मेरे घर म ह लेिकन म “नाम गमु जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा, मेरी आवाज ही पहचान
अ पताल ारा उपल ध कराए गए छोटे गाउन म ह।ं ह।ै गर याद रहे.....”
· मेरे बक खाते म बहत पैसा है लेिकन वह मेरे िकसी काम का इस मकु ाम पर पहचं ने वाली लता दीदी का जीवन हमेशा ऐसा नह
नह ह।ै था, उ ह ने अपने जीवन के शु आती िदन म काफ उतार-

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• किवता लता मगं शे कर
चढ़ाव दखे । बचपन म ही उनके िसर से िपता का साया उठ गया
और पूरे प रवार क िज मेदारी उनके ऊपर आ पड़ी। उनके मयूर मोहन जोशी
जीवन म कई सकं ट आए, िकं तु वे कभी घबराई नह । उ ह ने

डटकर उन सकं ट और सम याओं का के वल सामना ही नह सूर क मि लका और वर कोिकला है लता मगं ेशकर,
िकया बि क साथ-साथ उनका समाधान भी करती रही। उनका इनक आवाज के दीवाने मौजूद है हर घर घर ।

जीवन बहत ही सरल था इसीिलए पूरा दशे उ ह चाहता था और सरल है वभाव और नाम है लता मंगेशकर,

हमेशा उ ह याद रखेगा। हर कोई ी चाहगे ी म बताऊं अपने आपको इनके जैसा

उ ह ने एक बार अपने एक इ टर यू म कहा था िक मने जीवन म बनकर ।
बहत सघं ष िकया है लेिकन मझु े उसक खशु ी ह,ै य िक सघं ष इनके जसै ा नह है कोई गायक और न गाियका,
ही आदमी को इसं ान बनाता है। सघं ष के िबना आदमी म आज हम सभी के िलए यह एक रे णा तो है जैसे एक
इंसािनयत नह आती वह दूसर क भावनाओं को समझ नह
पाता ह।ै नाियका ।
एक बार लता जी को िकसी ने पूछा िक अगर आपका दूसरा ज म गायक के े म इनका बहत बड़ा है नाम,
होता है तो या आप वापस लता मगं ेशकर ही बनना चाहगं ी? तब हर कोई चाहगे ा िक म भी क इनके जसै ा कोई बड़ा काम ।
उ ह ने जवाब िदया िक “म चाहती ही नह िक मेरा दूसरा ज म हो लता जी ने अपनी पूरी िजदं गी मे हजार गाने गाए ह,
और अगर होता भी है तो म कभी लता मंगेशकर नह बनना चाहगं ी ऐसा लगता है िक जसै े हर तरह के गणु इनक आवाज म समाए
य िक लता मंगेशकर क तकलीफ िसफ लता मगं ेशकर ही
जानती है।” उनके इस जवाब से यह जािहर होता है िक उ ह ने ह।
अपने जीवन म िकतनी किठनाइय का सामना िकया होगा । 15 अग त और 26 जनवरी जसै े यौहार म जब लता जी के
माना जाता है िक लता मंगेशकर भारत क आज तक क सबसे
महान गाियका थी, उ ह ने आधी सदी से अिधक के अपने िसिं गगं दशे भि वाले गान क आवाज आती ह,ै
क रयर म 35 से अिधक भाषाओंम गाने गाए और सबसे अिधक तब इन गान क आवाज सनु कर सभी िहंदु तान वािसय क

आखं े नम हो जाती है ।
बचपन हो, बढ़ु ापा हो या हो जवानी,
लता जी क आवाज क पूरी दिु नया है दीवानी ।

गाने गाने के िलए पहली बार िगनीज बकु ऑफ व ड रकाड म इनक आवाज हर एक के िदल म घर कर जाती ह,ै

इनका नाम दज हआ था। इ ह प भूषण, दादा साहब फालके , आज लता जी नह है तो इनक याद हम बहत सताती है ।

प िवभषु ण जसै े कई रा ीय परु कार से स मािनत िकया गया। हर कोई चाहता है िक लता जी क तरह हर तरफ हो उनका

इसके अलावा भारत सरकार ारा इ ह भारत के सव च भी नाम,

परु कार “भारत र न” से भी स मािनत िकया गया था। लता जी आज हमारे बीच नह है, लेिकन लता जी को आज
अतं म यही आशा करती हं िक उनक इस सादगी, इस तप या पूरी दिु नया करती है सलाम,
और न वभाव से े रत होकर काश नई पीढ़ी भी कु छ सीख ले।
“सिदय तक चलता रहे, गीत म लता जी का नाम, लता जी के गान को सनु कर हर यि उनको याद करगे ा,
ऐसी वर क दवे ी, सािधका को, शत शत कर णाम।” भले ही लता जी आज इस दिु नया म नह है, लेिकन उनका

नाम इितहास म अमर रहगे ा ।

ध यवाद लता जी, आपको, आपक साधना को, आपके

सदाबहार अमर सगं ीत को। आपको शत-शत नमन। रले पथ अनरु क - III,
घाटलोिडया, अहमदाबाद, सरं ा कायालय, भसु ावल
गजु रात - 380061

मो. 9374272385

31

• लखे

अलिवदा ब पी दा

मे रजं न

बॉलीवडु म गायक का एक मकु ाम रहा ह।ै हर गायक का एक उ ह अपना पहला अवसर एक बगं ाली िफ म दादू (1972) और
अलग ही तरीका होता ह,ै लेिकन कई बार इ ह गायक म से कोई िह दी िफ म न हा िशकारी(1973) म िमला, िजसके िलए
गायक अपना एक ऐसा थान बनाता है जो बािकय से िब कु ल उ ह ने सगं ीत िदया था । िजस िफ म ने उ ह बॉलीवडु म
जदु ा होता है। ऐसे ही गायक म एक थे हमारे ब पी दा यानी थािपत िकया वह िफ म थी तािहर हसनै क िहदं ी िफ म ज मी
बॉलीवडु के पहले रॉक टार ब पी लहरी ।ब पी दा ने बॉलीवडु म (1975) िजस िफ म म उ ह ने मशहर गायक मोह मद रफ और
गीत को पॉप का तड़का लगाया और भारतीय दशक को एक िकशोर कु मार के साथ गाना गाया तथा इसके िलए सगं ीत िदया ।
नया वाद दान िकया।भारतीय सगं ीत जगत म एक ऐसा भी
समय था जब ब पी लहरी का नाम आते ही लोग के जेहन म झूमते िफ म ज मी (1975)ने उ ह िसि क नई ऊं चाइय पर
हए गाने और बेहतरीन यूिजक घूमता था। पहचं ाया और िहदं ी िफ म उ ोग म एक नए यगु का आरभं हआ ।
इसके बाद तो वह िफ म दर िफ म बलु िं दय को छूते गए और
ब पी लहरी ऊफ अलोके श लहरी एक मशहर भारतीय बॉलीवडु म अपना नाम बड़े कलाकार के प म िति त िकया।
िसगं र और कं पोजर थे ,िज ह ने भारतीय िसनेमा को िड को से
अवगत कराया और िफ म उ ोग को एक से बढ़कर एक इसके बाद दौर आया ब पी लहरी और िमथनु च वत क
सदाबहार गीत िदए । उनका ज म 27 नवबं र 1952 को जोड़ी का। इन दोन क जोड़ी ने बॉलीवडु म ऐसी धूम मचाई िक
जलपाईगड़ु ी, पि म बगं ाल के एक धनाढ्य सगं ीत घराना म हआ सब डासं और िड को यूिजक के दीवाने हो गए। उ ह ने िड को
था। उनके िपता अपरशे लािहरी भी िस बगं ाली गायक थे तथा डांस, डांस डांस ,कसम पदै ा करने वाले क जसै ी िफ म को
माता वनसरी लहरी एक िस बगं ला सगं ीतकार थी। वे अपने अपने गाना से ही िहट बना िदया ।
माता-िपता क इकलौती सतं ान थे । िहदं ी िसनेमा से िबना छेड़छाड़ िकए ब पी दा ने सगं ीत को एक नई
कै रयर :- िदशा दी। उ ह ने अपने ए बमो म अशोक कु मार और आशा
ब पी लहरी ने महज 3 वष क उ म ही तबला बजाना शु कर भ सले क आवाज का बखूबी इ तेमाल िकया। अलीशा िचनॉय
िदया था। बॉलीवडु को राक िड को से ब करा कर पूरे दशे को और उषा उथयु के साथ िमलकर उ ह ने कई िहट गाने िदए।
अपनी धनु पर िथरकाने वाले मशहर सगं ीतकार और गायक हालािं क कई बार उन पर िवदशे ी धनु को चरु ाने का भी आरोप
ब पी लािहरी ने कई छोटी-बड़ी िफ म म काम िकया। 80 के लगा ।
दशक म बॉलीवडु को यादगार गान क सौगात दके र अपनी 1990 के दशक म ब पी दा िफ म से पूरी तरह अलग होकर
पहचान बनाई। अपने ए बम पर ही काम करने लगे।
ब पी दा िस गायक होने के साथ-साथ यूिजक डायरे टर
महज 17 वष क उ म ही ब पी दा सगं ीतकार बनना चाहते अिभनेता और रकॉड ोड्यूसर भी थे । बचपन म उ ह ने िव
थे और उनक ेरणा बने एसडी बमन। ब पी लहरी टीनएज म िस होने के सपने दखे ना शु कर िदया था।
एसडी बमन के गाने सनु ा करते थे और उ ह रयाज िकया करते
थे। ब पी लहरी के खास गान:े -
याद आ रहा है और सपु र डासं र,िड को डासं र बा बे से आया
िजस दौर म लोग रोमािं टक सगं ीत सनु ना पसदं करते थे उस व मेरा दो त (आपक खाितर),ऐसे जीना भी या जीना है (कसम
व ब पी दा ने बॉलीवडु को िड को डांस से प रिचत कराया । पदै ा करने वाले क ), मझु े जीने के िलए (मनोकामना) , रात बाक

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िफ म नमक हलाल ,यार िबना चैन कहां रे िफ म साहब उ-ला- सोना मेरा भगवान है ऐसा वे मानते थे । ऐसा माना जाता है िक उ ह
ला उ-ला-ला (द डट िप चर)। वे ित गाना 8 से 10 लाख पया सोने क पहली चैन उनक मां ने तथा दूसरी चेन उनक प नी
चाज करते थे। िच ाणी लहरी ने दी थी ।िजसे वे अपने िलए बेहद लक मानते थे ।
ब पी दा के नाम रकॉड : - ब पी लहरी भारतीय सगं ीत जगत के महगं े और सोने के गहने पहनने वाले ब पी लहरी हमेशा रॉक टार
इकलौते ऐसे सगं ीतकार थे िज ह ने िस पॉप गायक तथा के लकु म नजर आते थे ।बातचीत के दौरान भी वह एक ऐसा
डासं र माइकल जै सन को अपने लाइव शो जो 1996 म मंबु ई म िम ण लगाते थे िजसम भारतीय रगं प के साथ अिधक मा ा म
आयोिजत िकया गया था ,म बलु ाया था। िवदशे ी फै शन हो ।उनके पहनावे म अिधकतर ैक सूट या कु ता
एक रपोट के मतु ािबक साल 1986 म उ ह ने 33 िफ म म 180 पजामा हआ करता था। इसके साथ ही ब पी लहरी अपने च मे
गाने गाए। उनका यह रकॉड िगनीज बकु ऑफ व ड रकॉड म भी को गम हो या सद कभी नह छोड़ते थे।
दज है। ब पी लहरी का राजनीितक कै रयर:-
ब पी दा को 2018 म िफ मफे यर लाइफ टाइम अचीवमट अवाड 11 जनवरी 2014 को ब पी लहरी 2014 का लोकसभा चनु ाव
िदया गया । लड़ने के िलए भारतीय जनता पाट म शािमल हो गए ।2014 म
उ ह 1985 म िफ म शराबी के िलए बे ट यूिजक डायरे टर का होने वाले सेरामपरु लोक सभा िनवाचन े से उ ह भाजपा का
अवॉड (1985) िमला ।
उ ह ने तेलगु ु ,उिड़या,क नड, जसै ी िविभ न भाषाओं म 5000 याशी बनाया गया था लेिकन वह अिखल भारतीय तणृ मूल
से अिधक गीत क रचना क । कां से के क याण बनज से हार गए।
उ ह ने कई क नड़ िफ म म सगं ीत िनदशक और गायक के प मृ यु :-
म काम िकया।जैसे अ का दा द लीशाला (1986),कृ णा नी 16 फरवरी 2022 को 69 वष क उ मआ ि टव लीप
बेगाने बारो(1986), पिु लस मथदु ादा(1989),इ यािद। एपिनया और रकरे ट चे ट इ फे शन से पीिड़त, मशहर िफ म
कं पोजर,गायक और सबके िदल पर राज करने वाला रॉक टार
ब पी लहरी क एक खािसयत उनके गले म सोने क मोटी िफ म जगत म एक खालीपन छोड़कर दिु नया को अलिवदा कह
चेन और भारी-भरकम अगं ूिठयां उनके आकषण का क था ।उ ह गया।िजसक कमी बॉलीवडु को सदा खलती रहेगी।
सोने से बेहद लगाव था और वे उसे अपने िलए लक मानते थे।
टी. टी. आई, सोलापरु

भारतीय भाषाएँ निदयां ह और िहदं ी महानदी ।
- रिवं नाथ टैगोर

िहदं ी भाषा एक ऐसी सावजिनक भाषा है, िजसे िबना भेद -भाव येक भारतीय हण कर सकता है ।
मदन मोहन मालवीय

रा ीय यवहार म िहदं ी को काम म लाना दशे क एकता और उ नित के िलए आव यक है।
महा मा गांधी

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• लेख

“ब पी दा” : िड को िकं ग

िवकास बघले

वष 1952 म सगं ीतकार प रवार म ज म ब पी लािहड़ी का दी । यह मंबु ई म उनक सगं ीतकार के तौर पहली िफ म थी ।
असली नाम अलोके ष लािहड़ी है, जो िक सगं ीत क दिु नया ने इसके िलए उ ह ने काफ मेहनत क । इस िफ म का सगं ीत
उनको “ब पी दा” के प म नयी पहचान दी । “ब पी दा” के माता- काफ पसदं िकया गया लेिकन िफ म यादा चली नह िजसके
िपता बां ला िफ म के सगं ीतकार एवं गायक थे । सगं ीतमय कारण उनके नाम को िकसी ने भी नोिटस नह िकया ।
वातावरण म उनक परव रश एवं बचपन गजु रा । मा 3 वष क “ब पी दा” ने िह मत नह हारी उ ह ने कु छ िव ापन म भी सगं ीत
अव था म ही उ ह सगं ीत क ए.बी.सी.डी. से प रिचत कराना िदया जो िक उनक रोजी-रोटी का ज रया बना रहा । “ब पी दा”
शु कर िदया । क िक मत का िसतारा, वष 1975 म रलीज सनु ील द , आशा
“ब पी दा” ही वो यि ह, िज ह ने भारतीय िसनेमा म िड को पारखे टारर िफ म “ज मी” से चमका, इस िफ म के सभी गाने
सगं ीत को जनता के बीच लोकि य बनाया । अपने कई अनोखे सपु रिहट सािबत हए और “ ब पी दा” रात -रात िफ मी
ए सि मट के तौर पर वे एक भारतीय गायक, सगं ीतकार, सगं ीतकार क िल ट म शािमल हो गए । इस िफ म म “ब पी दा”
अिभनेता के प म जाने जाते ह । ने पा ा य संगीत का िम ण िकया जोिक उस समय एक अलग
“ब पी दा” का नाम एक ऐसे सगं ीतकार-पा गायक के तौर पर भी कार का यूजन बन गया जोिक हर एक क जबान पर बोल रहा
शमु ार िकया जाता है िज ह ने सगं ीत से लोग को िदवाना एवं था।
पागल बना िदया । “ब पी दा” ने ताल वा यं के योग के साथ इसके बाद 1976 म उनक एक और िफ म “चलते-चलते” ने
िफ मी सगं ीत म पि मी सगं ीत का सिं म ण करके िड कोथेक तहलका मचा िदया इस िफ म म िकशोर कु मार जी ारा गाया
क एक नयी शलै ी िवकिसत क थी । गाना 'चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना कभी अलिवदा न
अपने इस नए योग क वजह से “ब पी दा” को क रयर के कहना' उस साल का िहट गाना बना और इसी के साथ ही “ब पी
शु आती दौर म काफ आलोचना का भी सामना करना पड़ा, दा” को मु य सगं ीतकार क ेणी म लाकर रख िदया । उसके
लेिकन बाद म उनके सगं ीत को काफ सराहा गया वह िफ म बाद उ ह ने कभी पीछे मड़ु कर नह दखे ा एक के बाद एक िफ म
इंड ी म “िड को िकं ग” के प म िव यात हो गए । म उनका सगं ीत सनु ाई दने े लगा । अब उ ह ने काफ दौलत और
बतौर सगं ीतकार उ ह ने अपने क रयर क शु आत वष 1972 म शौहरत हािसल कर ली । उ ह ने अपने सगं ीत म नयापन लाने के
बां ला िफ म “दादू” से क लेिकन यह िफ म कोई खास नह िलए िवदशे ी वा यं को अपने सगं ीत के िलए खरीदा और िफर
चली और “ब पी दा” ने सपन को साकार करने के िलए मबंु ई का उसके मा यम से नया यूजन बनाने का यास करने लगे ।
साल 1982 म अिमताभ ब चन टारर िफ म “नमक हलाल”
ख िकया । उस समय उनक उ 19 साल के लगभग थी । वहां उनके क रयर क मह वपूण िफ म म एक िगनी जाती है । उस
पर उ ह गायक िकशोर कु मार जो िक इनके दूर के मामा भी लगते िफ म के सगं ीतब गाना 'पग घघंु बांध मीरा नाची थी' ने पूरी
थे, उ ह ने इनक पहचान कु छ सगं ीतकार से करा दी वहां पर दिु नया म धूम मचा दी । उन िदन इस गाने का इतना े ज बन गया
“ब पी दा” ने सगं ीतकार के साथ िमलकर सगं ीत क बारीिकयां था िक हर गली-मोह ले म वही गाना बज रहा था । इस िफ म के
सीखी और मंबु ई क िफ म इडं ी को नजदीक से दखे ना शु सभी गाने सपु रिहट हए ।
कर िदया । अभी “ब पी दा” क िक मत म अभी िसतारा बलंु द होना शेष था,
उस समय ल मीकांत- यारे लाल और क याण जी-आनंद जी वष 1983 म रलीज िफ म “िड को डांसर” उसके सगं ीत एवं
क सगं ीत के े म तूती बोल रही थी । उनके सामने िकसी अ य गायन क वजह से ॉकब टर सािबत हई और िमथनु च वत
सगं ीतकार का िटक पाना नाममु िकन था । के क रयर क पहली सपु रिहट िफ म सािबत हई िजसक वजह
“ब पी दा” उस समय चल रहे एक समान यूिजक म कु छ तबिदली से वह भी एक सपु र टार बन गए । इसका सगं ीत इतना पॉपलु र
लाना चाहते थे तािक लोग का यान उनक तरफ जाए । इसके हआ िक ब चे-ब चे क जबु ान पर 'आई एम ए िड को डासं र',
िलए पहले उ ह िफ म िमलनी ज री थी । इस बारे म उ ह ने और 'िजमी िजमी िजमी आजा आजा' जसै े िड को गीत ने
िकशोर कु मार से कहा तो िकशोर जी ने 1973 म अपने प रिचत िथरकने पर िववश कर िदया । “ब पी दा” सभी हीरो क पहली
सगं ीतकार को बोलकर उ ह एक िफ म “न हा िशकारी” िदलवा

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पसदं बन गए । उनके बारे म कहा जाता है िक जब “ज मी” िफ म म उनका
'िड को' उस समय का एक चिलत श द बन गया, बाजार म हर सगं ीत सपु रिहट हो गया तो उनक मां ने उ ह एक सोने क चेन
चीज पर िड को का लेबल लगा कर बेचा जाने लगा, यहां तक िक भट दी और कहा यह तु हारी कामयाबी क गवाह बनेगी और तमु
होली क िपचकारी, कपड़े, खाने -पीने के सामान म भी िड को िनरतं र तर क करते जाओगे तभी से “ब पी दा” सगं ीत क
श द को शािमल िकया जाने लगा । उसके बाद क िफ म “डासं - दिु नया म कामयाब होते चले गए और मरते दम तक उ ह ने मां क
डांस” “सरु ा”, “वारदात” “कमाडं ो” “सलै ाब” जसै ी यूिजकल दी हई चेन को नह उतारा । वे हमेशा अपने शरीर पर रोजना 1.5
िफ म ने िमथनु च बत के क रयर म चार चादं लगा िदए इसका िकलो से भी यादा गहने पहना करते थे इसके िलए हमेशा 4
सगं ीत सपु र िहट रहा । इन िफ म ने एक तरह से भारत म पॉप बॉडीगाड रखते थे जोिक उनक सरु ा िकया करते थे । वे मानते
सगं ीत क शु आत कर दी और उसके बाद एक नए ऑरके ा थे िक सोना उनके िलए काफ ल क है ।
का ज म हआ । िजसक वजह से शादी, पािटय एवं सावजिनक उनके प रवार म प नी िच ाणी लािह़ड़ी और दो ब चे रमे ा पु ी
महो सव म िसफ उनके सगं ीत क धूम थी । (गाियका) और बा पा पु (सगं ीत िनदशक) है ।
उनक अिमताभ टारर “शराबी”, “लावा रस” िफ म भी सगं ीत उ ह ने वष 1986 म 33 िफ म म 180 गाने गाए िजसक वजह
क वजह से ॉकब टर िहट हई और “ब पी दा” को िड को िकं ग से उनका नाम “िगनीज बकु ऑफ व ड रकाड” म भी दज है ।
कहा जाने लगा । उ ह बेहतर सगं ीत के िलए कई “िफ म फे यर” अवाड तथा अ य
अिनल कु मार क “साहबे ” िफ म का वह गाना 'यार िबना चैन िफ मी अवाड से नवाजा गया था । इसके अलावा 63 व िफ म
कहां र'े िजसमे वयं वरब िकया था जोिक यूिजकल फे यर अवाडस म उ ह “लाइफ टाइम अचीवमट” अवाड से भी
सपु रिहट रहा । िफ म म पॉप एवं रॉक क था को लाने का ेय स मािनत िकया गया था ।
“ब पी दा” ही को जाता ह।ै उ ह ने कई सगं ीत रयिलटी शो भी जज िकए । इसके साथ ही
वष 1980 से 1990 तक का समय “ब पी दा” का सगं ीत एवं गायन कोलकाता नाईट राइडस टीम के िलए आई.पी.एल म सगं ीत भी
क वजह से जाना जाता है । िदया था ।
वष 1997 म डांसर 'माइकल जै सन' ारा मंबु ई म आयोिजत कु छ साल का िव ाम लेकर उ ह ने 2011 को एक नए धमाके के
लाइव शो म “ब पी दा” ने टेज फोमस दी िजसम 'माइकल साथ िफ म “डट िप चर” म 'ऊ लाला ऊ लाला' के गाने ने यवु ा
जै सन' ने उ ह िवशषे प से आमिं त िकया था । पीिढ़य के िदल म रात -रात सगं ीत के ित रोमांच पैदा कर
“ब पी दा” पॉप सगं ीत के िलए जाने जाते थे लेिकन इसके िलए िदया। उस वष का सव े गाना सािबत हआ । एक बार िफर वे
उ ह काफ िवरोध एवं आलोचना का भी िशकार होना पड़ा उन सबके चहेते बन गए ।
पर पा ा य सगं ीत चरु ाने का आरोप लगातार लगता रहा लेिकन
ब पी दा हमेशा से कहते रह िक यिद कु छ नया करना है तो िकसी उ ह ने वष 2014 के आम चनु ाव म भाजपा के उ मीदवार के
का अनसु रण या नकल करना भी ज री है । लेिकन उनके सगं ीत प म पि म बगं ाल के ीरामपरु से चनु ाव लड़ा, लेिकन ये उसमे
क एक िवशषे ता थी िक उनके ारा िदया गया सगं ीत पूरी तरह से सफल नह रहे और हार गए ।
नकल पर आधा रत नह था उ ह ने हमेशा अपने सगं ीत म
बदलाव कर एक नया सगं ीत बना कर पशे िकया जोिक जनता ने “ब पी दा” का भारी शरीर होने के कारण उनके शरीर म कई
उ ह िसर-आखं पर बैठाया । बीमा रय ने घर बना िलया िजसके चलते उनका वा य िनरतं र
“ब पी दा” िफ म इंड ीज के पहले 'गो ड मैन' थे िज ह ने खराब होता जा रहा था और 16 फरवरी 2022 को सगं ीत का
'गो ड मैन' को ज म िदया उस समय शरीर पर सोना पहनना जगमगाता चेहरा हम सब से अिं तम िबदाई लेते हए सदा के िलए
अपने आप म टेटस िसबलं बना करता था । िजसका असर आज अ त हो गया ।
भी हम दखे ते है ।
व र अनवु ादक
इ रन, नािसक रोड

पु तक से िवहीन घर िखडिकय से िवहीन भवन के समान है ।

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• लेख

मनोरजं न स ाट ब पी लहरी

स य िसहं

मानव जीवन म भोजन, व के बाद मनोरजं न अतीव आव यक सू पात करने वाले बड़े सगं ीतकार िस हए। वे एक िस गायक
है जो िदन रात के अथक प र म से हई मानिसक व मि त क य होने के साथ साथ सगं ीत िनदशक, अिभनेता एवं रकॉड
लािं त से राहत िदलाकर मनु य को तरोताजा करके नव सघं ष ोड्यूसर भी थे। उ ह ने बॉलीवडु को 1970 के दशक म िड को
के िलए तैयार करता है। अिभनय, गायन, सगं ीत और सगं ीत व रॉक यूिजक से ब कराया। िमथनु च वत के साथ उनक
िनदशन के े म याित ा ब पी लहरी मनोरजं न क जागतृ जोड़ी बनी और "आई एम अ िड को डांसर" गाने से ही दोन
ितमा थे। भारी भरकम दहे यि , उ नत ललाट पर घघंु राले के श, महान बन गए। ब पी िड को िकं ग बन गए। उनके अ य गाने जसै े,
गले और अगं िु लय म सोना ही सोना, आवाज म जादू, हरएक को "अउआ आउआ कोई यहाँ नाचे", "यार िबना चैन कहाँ र"े , "त मा
आकिषत करने म समथ यि व जो मा 69 वष क अव था म त मा", "जवानी जाने मन", "बबं ई से आया मेरा दो त", "िज मी
22 फरवरी, 2022 को िचरिन ा म लीन हो गया। िजसने सनु ा वह िज मी", "ऊ लाला ऊ लाला" बहत चले। इनके अलावा "याद आ
दखु के सागर म डूब गया। भारत के माननीय धानमं ी ी नरे रहा ह"ै , "आज रपट जाने दो","तूने मारी एं ी,"िदल था अके ला
मोदी तक उनके अवसान से इतने दखु ी हए िक ट्वीट िकए िबना अके ला", "चलना है तेरा काम" आिद यूँ कु ल िमलाकर ब पी दा ने
नह रह सके । उ ह ने िलखा, "ब पी लािहड़ी जी का सगं ीत 600 से अिधक िफ म म सगं ीत िदया और गायन िकया। िफ म
सवागीण था, िविवध भावनाओंको खबु सूरती से य करता था। अिभनेता राजेश ख ना, अिमताभ ब चन, िवनोद ख ना, िमथनु
कई पीिढय के लोग उनके काय से खदु को जोड़ सकते ह। च वत , अ य कु मार, अजय दवे गन जसै े अिभनेताओंपर उनके
उनका जीवतं वभाव सभी को याद रहेगा। उनके िनधन से दखु ी गाने खूब िफ माए गए।
ह।ँ उनके प रवार और शसं क के ित सवं ेदना। ओम् शािं त।"
भारतीय िसनेमा म योगदान के िलए व ड बकु ऑफ
ब पी दा नाम से मशहर ब पी लहरी का ज म 27 नवबं र रकॉड्स ने ब पी लहरी को स मािनत िकया। उ ह ने
1952 म पि म बगं ाल के सु िस नगर कोलकाता म हआ था। िसथं ेसाइ ड यूिजक को इंिडयन टच िदया। एक साल म 33
उनका बचपन म नाम अलोके श लहरी था। उनके िपता अपरशे िफ म म सगं ीत व गायन करने पर उनका नाम िगनीज बकु ऑफ
लहरी बगं ाली गायक थे तो माता बासं री लहरी भी गाियका थ । व ड रकॉड्स म दज िकया गया। िफ म फे यर अवॉड्स समारोह
सु िस अिभनेता अशोककु मार, अनूप कु मार और सु िस म उ ह लाइफ टाइम अचीवमट अवॉड िदया गया। उ ह ने िफ म
गायक अिभनेता िकशोर कु मार उनके मामा थे। इस कार ब पी "बढती का नाम दाढी", "कलाकार" और बां ला िफ म "नयन
दा को सगं ीत िवरासत म िमला था। उ ह ने मा तीन वष क आयु कोनी"म अिभनय िकया। िहदं ी के अलावा उ ह ने बां ला,
म तबला सीखना शु कर िदया था और उनके िपता ने उ ह मलयालम, पजं ाबी, तेलगु ू, क नड़ और उिड़या गान म भी सगं ीत
तबला म पारगं त िकया। िच ाणी लहरी से 24 जनवरी 1977 को िदया। उ ह ने बीस साल क उ म अपना कॅ रयर शु िकया था
उनका िववाह हआ था। और अिं तम सांस तक सगं ीत को समिपत रहे। वे आज हमारे बीच
नह ह परतं ु अपने सगं ीत के मा यम से सदा हमारे िदल म रहगे।
ब पी दा एस.डी.बमन से बहत भािवत थे। उनके गाने सनु ते वसै े उनके पु ब पा लहरी और बेटी रीमा लहरी सगं ीत के े म
और उन पर रयाज़ करते। ब पी लहरी सगं ीतकार तो थे ही, उनका नाम सदा अमर बनाए रखगे। ब पी लहरी जी को िवन
गायक और अिभनेता भी थे। सबसे पहले उ ह ने 1972 म बगं ाली
िफ म दादू के िलए सगं ीत िदया था परतं ु 1973 म उ ह ने िहदं ी ाजं िल।
िफ म "न हा िशकारी" के िलए सगं ीत िदया जो िकसी िहदं ी
िफ म म सगं ीत दने े का उनका पहला अवसर था और इसीसे पूव व र राजभाषा अिधकारी,म यरले
उ ह ने बॉलीवडु म वशे िकया। 1975 म जब उ ह ने तािहर "रामे री सदन", स िगरी सोसायटी,
हसनै क िफ म "ज मी" के िलए सगं ीत रचना क और जाभं लु वाडी रोड, आंबेगावं खदु ,
पा गायन िकया तो बॉलीवडु म थािपत हो गए। इस िफ म ने पणु े 411046 महारा
उ ह िसि िदलाई और वे िहदं ी िफ म उ ोग म एक नये यगु का मोबाइल 9922993647

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• लेख

िहदं ी िफ मी गीत और िहदं ी गीतकार

डॉ.सर वती अ यर

िह दु तानी िफ म म गीत का इितहास बहत रोचक रहा है। जब ह रयाणवी और खड़ी बोली का योग िकया और ये गाने हर
से बोलते चलिच का दौर आर भ हआ, तब से पा गीत िफ म गावँ ,,शहर, गली म बजने लगे । रिे डयो इनक लोकि यता का एक
के एक अिभ न अगं बन गए थे । िफ म क पटकथा को आगे बड़ा मा यम बन गया। िफ मी गीत के विणम यगु के इन
बढ़ाने म प रि थितय के अनु प पा क का या मक गीतकार ने अपनी रचना मकता और सजना मकता से िहदं ी
अिभ यि को गीत के मा यम से िव तार िमला। आदिशर ईरानी िसनेमा म दशे भि गीत,भजन, कृ ित सौ दय,गजल,क वाली,
क पहली बोलती िफ म 'आलम आरा' जो 1931 म दिशत हई, लोक गीत, नृ य गीत, यौहार के गीत, जीवन दशन और िचतं न
उसमे 7 गाने थे। उन िदन िफ म म गाने िलखकर कलाकार को के गीत आिद का अनूठा िम ण ततु िकया। ये गीत आज भी
दे िदए जाते थे िज ह वे याद कर लेते थे तथा िफर सेट पर वयं सम त भारत म ही नही अथवा पूरे ससं ार म सनु े और गनु गनु ाए
गाते थे, पीछे से सािज़दं े धनु बजाते थे, िजनको कै मरे से दूर जाते ह।ै
बैठाया जाता था । िहदं ी िसनेमा के आरिं भक दौर म तलु सीदास,
कबीर दास, सूरदास, मीरा और रदै ास के पद को गीत के प म इस दौरान कई मकु मल उदू शायर और गीतकार ने भी
इ तेमाल िकया जाता था। यहाँ से गीतकार क या ा ारभं हई । ठेठ गवं ई िहदं ी बोिलय का उपयोग करके कई गीत िलखे िज ह
िहदं ी िफ़ म सगं ीत ने बेहतरीन गीतकार क एक पर परा दके र लोग ने बहत सराहा जैसे सािहर लिु धयानवी (काहे तरसाए
सगं ीत- ेिमय को यादगार भट दी । िजयरा), हसरत जयपरु ी (अजहँ न आए बालमा), मज ह
सु तानपरु ी (साजन िबिं दया ले लेगी तेरी िनिं दया), कै फ
उस समय िहदं ी सािह य म जयशकं र साद, महादवे ी वमा, आज़मी(सारा मोरा कजरा चरु ाया तूने), शक ल बदं ायनु ी (नैन
सूयकातं ि पाठी ‘िनराला’, सिु म ानदं न पतं , रामधारी िसहं लड़ जइहै,तो मनवा मा कसक हईबै करी), राजा मेहदँ ी अली
‘िदनकर’ आिद का बड़ा नाम था पर तु सािहि यक अिभ िच के खान(मने रगं ली आज चनु रया सजना तोरे रगं म) से लेकर
यि िफ म के साथ जड़ु ना सामािजक मू य के िवपरीत मानते जावेद अ तर (घनन घनन िघर िघर आई बदरा )आिद ने कई
थे।िफ म क आम जनता के बीच लोकि यता से भािवत होकर सदंु र गीत िलखे ।
कु छ किव और गीतकार इसक ओर आकिषत हए। िथएटर से
नए-नए आए िहदं ी िसनेमा के िलए उस समय ठेठ िहदं ी म गीत हालािं क िहदं ी गीत क इस या ा म अनेक ऐसे गीतकार आए
लेखन के बारे म सोचना भी दु ार था । उदू और फारसी के िज ह िसरे से भलु ा िदया गया। इन लोग ने काम तो अ छा िकया
अ फाज़ के बगैर सवं ाद लेखन से लेकर पटकथा लेखन और पर ोता इ ह नाम से नह पहचानते, परतं ु उनके गाने आज भी
गीत लेखन क कतई गजंु ाइश नह थी। िहदं ी िफ म के गीत म सनु े जाते ह । जैसे दीनानाथ मधोक का अिं खयां िमलाके िजया
शु आती दौर म उदू शायर और नगमािनगार का ही बोलबाला भरमा के चले नह जाना, के दार शमा 'म या जानूँ या जादू है',
था परतं ु दीनानाथ मधोक, के दार शमा, किव दीप, भरत यास सरोज मोिहनी नायर गीत ' ीतम आन िमलो' िजसे गीता द जी
आिद गीतकार को िहदं ी क शि पर िव ास था, इन सभी ने ने गाया था, किव गोपाल िसहं नेपाली का 'है ध य सहु ागन वो
दवे नागरी िलिप म िहदं ी क ित ा थािपत क और अपने िजसने भारत को तलु सीदास िदया'प.ं नरे शमा ' योित कलश
उ कृ गीत से िहदं ी क िफ म को समृ करने के साथ-साथ छलके ', गीतकार रमेश शा ी िलखा गीत 'हवा म उड़ता जाये,
मेरा लाल दपु ा मलमल का', सर वती कु मार दीपक 'माटी कहे
ोताओंक िचय का प र कार भी िकया। कंु भार स,े तू या र दे मोह'े , सतं ोष आनदं एक यार का नगमा ह,ै
कु लवतं जानी 'मेरी हसरत क दिु नया', िव ल भाई पटेल 'झूठ
िफर पचास, साठ,स र और अ सी के दशक म एक से एक बोले कौवा काटे', रव जनै (लोग उ ह सगं ीतकार के प म
नायाब िहदं ी गीतकार आए िज ह ने अपने गीत म िहदं ी और लोक यादा जानते ह ) 'अिँ खय के झरोख से', राजकिव इं जीत िसहं
भाषाएं जैसे ज, अविध, भोजपरु ी, बदंु ले ी, राज थानी, तलु सी 'पानी रे पानी तेरा रगं कै सा', माया गोिव द ' नैन म दपण

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ह,ै दपण म कोई',पु षो म पकं ज 'चादँ जैसे मखु ड़े पे िबिं दया िहदं ी िफ म के गीतकार म शैल का नाम पहले थान पर आता
िसतारा',इंदु जनै 'कहाँ से आए बदरा' वसतं दवे 'मन य बहका है। रावलिपडं ी से मथरु ा और िफर बबं ई म रले वे क नौकरी से
रे बहका आधी रात को',अिभलाष 'इतनी शि हम दने ा दाता' िफ म तक पहचं े सवं ेदनशील गीतकार शकं र लाल के सरी
और रानी मािलक' छुपाना भी नह आता' जैसे कई खूबसूरत गीत 'शैल 'का िलखा पहला ही गीत 'बरसात म तमु से िमले हम
आज भी लोकि य ह। इन गीतकार ने िफ़ म संगीत को एक से सजन,हम से िमले तमु ' लोकि य रहा इसके बाद तो लगभग 20
बढ़कर एक गीत क सौगात दी। ऐसे बहत से गीतकार हए जो साल तक शैल ने गीत क झड़ी लगा दी । एक ओर जहां उ होने
गीत-सगं ीत क महिफल से दूर गमु नामी का जीवन जीते रहे या सब कु छ सीखा हमने ना सीखी होिशयारी, है सबसे मधरु वो गीत
जी रहे ह। िज ह हम दद के सरु म गाते ह , सूरज ज़रा आ पास आ आज
सपन क रोटी पकाएगं े हम , आ अब लौट चल जैसे अमर गीत म
महान दशे भ किव दीप का वा तिवक नाम रामचं बड़ी ही सरलता से रह यवाद और जीवन दशन क बात कहकर
नारायण ि वदे ी' था। उ जनै के गीतकार किव दीप क पहचान िसनेमा म िहदं ी गीत को नया आयाम िदया वह वे दूसरी ओर
1943 क िफ म िक मत के गीत 'दूर हटो ऐ दिु नया वाल पूवा चल क स धी िम ी क महक से भरपूर पान खाय सया
िहदं ु तान हमारा है'से बनी। इस गीत पर र नाराज हो त कालीन हमार', 'सजनवा बैरी हो गए हमार', िमला है िकसी का झमु का, जा
ि िटश सरकार ने उनक िगर तारी के आदशे भी िदए थे। उनके तोसे नह बोलूँ क हयै ा, अब के बरस भेज भैया को बाबलु , चढ़
िलखे गीत 'चल चल रे नौजवान','आओ ब च तु ह िदखाएंझांक गयो रे पापी िबछुआ , 'चलत मसु ािफर मोह िलयो र'े और िपया
िहदं ु तान क , 'दे दी हम आजादी िबना खडग िबना ढाल', ए मेरे तोसे नैना लागे रे आिद से आचं िलक िहदं ी को मु य धारा म लाने
वतन के लोग , जरा आखँ म भर लो पानी'आिद आज भी पं ह वाले और िफ मी गीत म उदू के वच व को चनु ौती दने े वाले
अग त और छ बीस जनवरी पर पूरे दशे म बजाए जाते ह। पहले गीतकार बने ।

चू ,राज थान के रहने वाले भरत यास भी ऐसे ही एक राज कृ ण 50 और 60 के दशक के अि म पिं के
बेिमसाल गीतकार थे। उ ह ने आ लौट के आजा मेरे मीत, चली गीतकार म से एक थे। उनका पहला िस गीत 1948 म
राधे रानी भर अिं खय म पानी , हो उमड़ घमु ड़ कर आयी रे घटा, महा मा गाधं ी क ह या के बाद िलखा गीत था, िजसके बोल थे
नैन सो नैन नाह िमलाओ यह कौन िच कार है, योत से योत 'सनु ो सनु ो ऐ दिु नयावाल बापू क ये अमर कहानी' िजसे मोह मद
जगाते चलो, आधा है चं मा रात आधी, पवन वगे से उड़ने वाले रफ साहब ने बेहद क ण वर म गाया और पूरा िहदं ु तान जसै े
घोड़े', जरा सामने तो आओ छिलय,े तमु गगन के चं मा हो म धारा इस गाने क ताल पर रो पड़ा,हर साल 30 जनवरी को यह गीत
क धूल हँ जसै े भाव णव गीत सदंु र सं कृ तिन िहदं ी म िलखे रिे डयो पर सनु ने को िमलता है। अिवभािजत भारत के जलालपरु
और बताया िक िहदं ी म हर तरह के रस और भाव को कट करने जाटां के रहने वाले रािज दर िकशन के गीत ‘चपु -चपु खड़े हो
का पूण साम य ह।ै ज र कोई बात ह’ै के बाद तो पूरा दशे उनक कलम के मोहपाश म
बधं गया । उ ह ने जादूगर सया छोड़ो मोरी बिहयं ा,ं कौन आया मेरे
बहमखु ी ितभा के धनी गीतकार,सगं ीतकार और नृ य मन के ारे ,जहां डाल डाल पर सोने क िचिड़यां करती ह
िनदशक ेम धवन को एक ऐसे गीतकार के तौर पर याद िकया बसरे ा,एक चतरु नार करके िसगं ार , मन डोले मेरा तन डोले ,
जाता है िज ह ने िहदं ु तान के हर रगं को अपने गीत क रगं ोली म तु ही मेरी मिं दर, तु ही मेरी पूजा, सखु के सब साथी दखु म न
सजाया ह।ै अबं ाला म ज मे मे धवन के गीत म जिटल कोय आिद िविवध कार के कालातीत गीत िलखे ।
साथकता, सकारा मकता और सरल का या मकता रहती थी । अपने गीत से बॉिलवडु को गलु जार करने वाले भारत के सबसे
उनके कलम क नोक से ओज वी और भावकु श द क स रता बेहतरीन गीतकार गलु जार साहब भारतीय िसनेमा के िलए िकसी
वही है। चदं ा मामा दूर के , जागो मोहन यार,े अिखयां सगं अिखयां वरदान से कम नह ह। पािक तान के पजं ाब ांत के सपं ूरन िसहं
लागी आज, जोगी हम तो लटु गए तेरे यार म, चदं ा रे जा रे जा रे कालरा से मंबु ई िफ म के थम णे ी के गीतकार गलु जार बनने
जैसी रचनाएं हमारी अनमोल धरोहर ह । उनके दशे भि से के िलए उ ह ने एक लंबा सफर तय िकया। उनका िलखा पहला
प रपूण गीत मेरा रगं दे बसतं ी चोला, ए मेरे यारे वतन आिद के
िबना हमारी वतं ता का उ सव अधूरा ह।ै

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गीत 'मोरा गोरा रगं लई ले, मोहे याम रगं दई द'े िफ म बिं दनी के िदलाया िजसके वे हकदार थे। । उनके सरल, शालीन व सदंु र
िलए था। । हालांिक उनके िहदं ी गीत म उदू ल ज़ का इ तेमाल िहदं ी गीत म आए तमु याद मझु े, रमिझम िगरे सावन,ये िदन या
यादा हआ है परतं ु उनके अनेक गीत म शु िहदं ी के साथ- आए, कई बार यूँ भी दखे ा ह,ै नैन हमार-े साझँ सकार,े कहाँ तक ये
साथ आचं िलक श द का भी योग हआ है िजससे गीत क मन को अधं ेरे छलगे आिद शािमल ह।
सदंु रता और बढ़ गई है जैसे 'गगं ा आए कहाँ से', बोले रे िजस तरह के गीत 50 और 60 के दशक म िलखे जा रहे थे, उसी
पपीहरा,िपया बावरी, मीठे बोल बोले पायिलया, घर जाएगी तर परपं रा को रावलिपडं ी से िवभाजन के बाद भारत म अपनी
जाएगी डोिलयाँ चढ़ जाएगी ,बीती ना िबताई रनै ा, आकं चली िक मत आज़माने मंबु ई आए आनंद ब शी ने बड़ी ही खबु सूरती
बाकं चली , छई छप छई छपाके छई , झूठे नैना बोले साचं ी से 70 और 80 के दशक म िनखारा। 'परदिे सय से न अिं खयां
बितयाँ आिद अ तु गीत ह । िमलाना' उनका शु आती सपु रिहट गाना था. यह से आनदं
ब शी क कामयाबी का सफर शु हआ जो लगभग 42 वष तक
िहदं ी का य मंच के यात किव और िवल ण ितभा के चला । पजं ाब क िम ी से बेहद लगाव रखने वाले 'िह दी गीत के
धनी इटावा के गोपाल दास नीरज ने अपने िसफ पांच साल के राजकु मार' आनदं काश ब शी ने सावन का महीना पवन करे
िफ मी क रयर म उ ह ने िहदं ी िसनेमा के गीत को सतरगं ी छटा शोर,परदिे सय से न अिं खयां िमलाना, कु छ तो लोग कहगे,
से भर िदया। नीरज जी ने अपने गीत म रस,अलकं ार और किवता िचगं ारी कोई भड़के ,बाग म बहार आई(िजसे उ ह ने लता जी के
का िम ण करके अ तु भाव पदै ा िकया। िहदं ी के कु छ श द जसै े साथ गाया भी था),बड़ा नटखट है िकशन क हयै ा,स यम िशवम
मिदर, मधरु , रजनीगधं ा, पाती, गीतांजिल,नीरज नैना आिद सदंु रम से लेकर उड़ जा काले कावं ा तक हजार गाने िहदं ी
श द का पहली बार िफ मी गीत म उपयोग िकया गया । उ ह ने िफ म के िलए िलखे ।
काल का पिहया घूमे भैया , व न झरे फू ल से मीत चभु े शूल से, िसनेमा को े ीय बोिलय से -बू- कराने वाले गीतकार
धीरे से जाना बिगयन म ,मेघा छाए आधी रात ,ए भाई जरा दखे के लालजी पाडं ेय 'अनजान'का तन भले ही मायानगरी मंबु ई म रहता
चलो, फू ल के रगं से िदल क कलम से, जीवन क बिगया था लेिकन उनका िदल हमेशा काशी म बसा था । पर कहते ह िक
महके गी, जसै े शा त गीत िलखकर जनता के दय के तार एक अ छा और सवं ेदनशील किव लंबे समय तक अजं ान नह रह
झनझना िदए। सकता इसिलए आरभं म दस वष तक मायानगरी मंबु ई मे सघं ष
करने के बाद अनजान 'चली आज गोरी िपया क नग रया','मानो
उ र दशे के झासँ ी के ब वा सागर नामक क बे से मबंु ई भाग तो म गगं ा मां ह,ं न मानो तो बहता पानी','िबन बदरा के िबजु रया
कर आए गीतकार यामलाल बाबू राय 'इदं ीवर' िहदं ी िसनेमा के कै से चमके ' आिद गीत के बाद अनजान नह रहे बि क बाद म
सफलतम गीतकार म से एक ह । इदं ीवर को साल 1949 म अिमताभ ब चन पर िफ माए उनके गीत लकु िछप लकु िछप
िफ म म हार के गीत ' बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम'ने जाओ ना, खून पसीने क िमलेगी तो खाएगं े, रोते हए आते ह सब,
िहदं ी िफ म म पहचान िदला दी। िफर तो उ ह ने चदं न सा बदन ओ साथी रे तेरे िबना भी या जीना,खइके पान बनारस वाला,ई है
चचं ल िचतवन , भु जी मेरे अवगनु िचत ना धरो, 'है ीत जहां क ब बई नग रया तू दखे बबआु , मेरे अगँ ने म तु हारा या काम है ,
रीत सदा', 'मेरे दशे क धरती सोना उगले',ताल िमले नदी के जल गोरी है कलाइयाँ आिद से वे सबके ि य बन गए।
म, जीवन से भरी तेरी आखँ 'ह ठ से छू लो तमु 'से लेकर 'सूरज लाहौर के पास शखे परु ा म ज मे गलु शन कु मार मेहता जब 20
कब दूर गगन स'े तक सफल गीत क एक लबं ी पारी खेली। साल क उ म “स ा बाज़ार “ िफ म के ोड्यूसर के पास अपने
गीतकार योगेश ग ड को बचपन से ही किवता िलखने का शौक गाने लेकर गए तब ोड्यूसर ने दबु ले-पतले रगं -िबरगं ी शट पहने
था। वह हमेशा पढ़ना पसदं करते थे। उ ह ने लखनऊ से मबंु ई लड़के को दखे कर हसं कर कहा 'ये बावरा या गाना िलखेगा ' पर
आकर शु आती सघं ष के बाद हसं ता हआ नूरानी चेहरा, तमु को जब गलु शन का गीत 'तु ह याद होगा कभी हम िमले थे' मशहर हो
िपया िदल िदया जैसे सदाबहार गीत िलखे पर सपु र टार राजेश गया तो उ ह ने “बावरा” उपनाम सदा के िलए रख िलया। िफर तो
ख ना क बह शिं सत िफ म आनदं के गीत 'कह दूर जब िदन उपकार के 'मेरे दशे क धरती सोना उगले, उगले हीर-े मोती ' गीत
ढल जाये ' और 'िजदं गी कै सी है पहेली' ने उनको वो स मान

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ने उनको भारत क जनता से जोड़ िदया। उनके िलखे अथपूण समय म अपने गीत से िहदं ी िफ म जगत म अपनी पहचान बना
गीत जैसे आती रहगी बहार, ये मौसम रगं ीन समा, चादं ी क ली है। बचपन से ही सािह य ेमी सून जी ने 'अबके सावन ऐसे
दीवार न तोड़ी, यार भरा िदल तोड़ िदया, सपना मेरा टूट गया, बरस'े ,मन के मंजीर,े म ती क पाठशाला ,सै याँ छेड़ दवे े ननद
वादा कर ले साजना,दु क पे दु क हो या स े पे स ा, हम चटु क लेवे ससरु ाल गदा फू ल ,मोहे तू रगं दे बसतं ी, म कभी
और जीने क चाहत न होती आिद ने ोताओं को मं मंु ध कर बतलाता नह , पर अधं रे े से डरता हं म मां,'दखे ो इ ह ये ह ओस क
िदया। बूदं े प क गोद म आसमां से कू द' जसै े शानदार और दय पश
मूल प से पजं ाबी गीतकार िफ़रोज़परु से िवभाजन के बाद गीत िलखे ह।
िद ली आए वमा मिलक क िगनती िहदं ी के सफल गीतकार म
होती है।उनका वा तिवक नाम बरकत राय मिलक था। मनोज िहदं ी से गहरा लगाव रखने वाले इंदौर से मंबु ई आये गीतकार,
कु मार क िफ म यादगार म वमा मिलक का िलखा दशे क सवं ाद लेखक,गायक और अिभनेता वानदं िकरिकरे का मानना
सामािजक, राजनीितक और आिथक दशा पर तीखा कमट है िहदं ी भाषा बहती हवा क तरह है । इसको िकसी सीमा म बाधं
करता गाना' इकतारा बोले तनु तनु ' सपु र िहट रहा । िफर 'सबसे कर नह रखा जा सकता. यह जहां-जहां होकर गजु रती ह,ै वहां
बड़ा नादान वही है, जय बोलो बेइमान क जय बोलो, ि य क स धी महक िहदं ी भाषा म समाकर और यादा प लिवत
ाणे री, दये री यिद आप हम आदशे कर,' चलो रे डोली होती है। उ ह ने कई सदंु र गीत सरल िहदं ी म िलखे ह। वे अपने
उठाओ कहार,आज मेरे यार क शादी ह,ै चदं ा मामा से यारा मेरा िलखे गीत 'बदं े म था दम' और 'बहती हवा सा था वो' के िलए
मामा जसै े सदाबहार गान के साथ उनके 'बाक कु छ बचा तो रा ीय परु कार भी जीत चकु े ह । 'पीयू बोले िपया बोले , ओ री
महगं ाई मार गई' गाने ने पूरे दशे म उस समय धूम मचा दी थी । लोग िचरयै ा न ही सी िचिड़या, बावरा मन, चार कदम बस चार कदम
उस व बढ़ती महगं ाई और बेरोजगारी से परशे ान थे। ऐसे चल दो न साथ मेर,े य न हम तमु चल टेढ़े –मेढ़े र त पे नगं े पावँ
वातावरण म जब यह गाना आया, तो जसै े जनता-जनादन क र,े इ ी सी हसं ी इ ी सी खशु ी' जसै े कई लाजवाब गीत वान द
आवाज़ बन गया । िकरिकरे क कलम से रचे गए ह ।

िहदं ी िसनेमा का एक दौर ऐसा था, जब िफ मी गान म धनु करीब न बे साल का विणम इितहास और सामािजक
िकसी भी सगं ीतकार क हो, पर बोल समीर के ही होते थे। वीकायता िफ मी गीत लेखन को उ च सां कृ ितक थान
गीतकार अजं ान के सपु ु शीतला पांडे उफ समीर एक कामयाब दान करते ह । आजकल के िहदं ी िसनेमा म य िप गीत का तर
गीतकार के प म पहचान बनाने के िलए बक अिधकारी के पेशे पहले जैसा नह रहा ह।ै िनः सदं हे िहदं ी िसनेमा के सनु हरे दौर के
को छोड़कर मबंु ई आए । समीर को पहचान िमली 1990 म आई गीत अमर ह और आज भी सनु े जाते ह तथािप ये दौर भी अ छे
िफ म 'आिशक ' म उनके गीत 'सांस क ज रत है जैसे' से गीत के मामले म बहत बरु ा दौर नह है। आजकल क तेज धनु
और इसके बाद समीर ने पीछे मड़ु कर नह दखे ा। उ ह ने'नज़र के और उन पर िलखे जाने वाले िनरथक बोल के बीच कु छ गीतकार
सामने िजगर के पास कोई रहता ह'ै , 'मझु े न द ना आये' , कोयल ऐसे भी ह िजनके श द ने गीत को सही अथ िदया ह।ै कु छ अ छे
सी तेरी बोली, जब से तेरे नैना मेरे नैन से लागे रे , म यहाँ तू वहाँ तरीय गीत िलखने वाले नए िहदं ी गीतकार जसै े व ण
जसै े कई ेम गीत सरल और सहज़ िहदं ी म िलखकर सफलता ोवर,अिमताभ भ ाचाय, मनोज मंतु िशर, पीयूष िम ा,िवजय
क नई ऊं चाइय को छुआ । िहदं ी िसनेमा म सवािधक गीत अके ला आिद ऐसी ितभाएं ह जो नए ज़माने क नई सोच को नए
िलखने का रकाड भी गीतकार समीर अनजान का रहा है । कलेवर के साथ गीत म ढाल रही ह , इनसे और अ छे िहदं ी गीत
क अपे ा ह।ै
न बे के दशक म समीर अनजान छाये रहे और उनके बाद
िव ापन जगत से िफ मी दिु नया म कदम रखने वाले उ राखडं व र अनवु ादक,
के गीतकार, किव,लेखक,सगं ीतकार सून जोशी ने बहत ही कम मु यालय, मंबु ई छ. िश. म. ट.

40

• लेख

वर कोिकला: लता मगं शे कर

आचाय नीरज शा ी

वर कोिकला लता मंगेशकर का ज म 18 भाऊ', 'बड़ी मा'ं , 'जीवन या ा', 'छ पित िशवाजी' जसै ी िफ म
िसतबं र,1929 को इदं ौर( म य दशे ) के एक मराठा ा ण भी शािमल थ । 'बड़ी मां' िफ म म लता जी ने नूरजहां के साथ
प रवार म हआ था। वह पिं डत दीनानाथ मंगेशकर क सबसे बड़ी अिभनय िकया था। आशा जी ने छोटी बहन क भूिमका िनभाई
बेटी के प म ज मी थ । उनका प रवार म यमवग य प रवार था थी। उ ह ने अपनी भूिमका के िलए गाने गाए थे और आशा जी के
िजसम िक लताजी अपने अ य भाई बहन के साथ अपना बचपन िलए भी पा गायन िकया था। अतः वसतं जोगलेकर ने अपनी
गजु ार रही थ । इनम उनके भाई दयनाथ मगं ेशकर और बहन अगली िफ म 'आपक सवे ा' म उनको गाने का अवसर िदया था।
उषा मगं ेशकर, मीना मंगेशकर और आशा भोसले भी थ । लता िफ म 'महल' के गाने से लता जी को बहत ित ा ा हई । इसके
मगं ेशकर क परव रश महारा म हई थी । उ ह ने अपने जीवन अलावा उ ह ने 'मजबूर' िफ म के गीत गाए। 'िदल मेरा तोड़ा हाय
का ल य सगं ीत को बना िलया था। उनके िपता मा टर दीनानाथ मझु े कह का ना छोड़ा तेरे यार ने' गीत भी लोकि य हआ था।
मगं ेशकर क मृ यु के बाद प रवार क आिथक दशा बहत जीण- इसके बाद 1949 म उ ह ने गाना गाया था 'आएगा आने वाला'।
शीण हो चकु थी। तब वह प रवार के सहयोग के िलए आगे आई।ं यह गीत बहत मधरु व मनभावन गीत था और मधबु ाला पर
उस समय उनक उ मा 13 वष थी । इस 13 वष क छोटी सी िफ माया गया था। िफ म भी सफल िफ म थी और लता जी के
उ म उ ह ने काफ सघं ष िकया और पसै ा कमाने के िलए कु छ िलए वह िफ म एक वरदान सािबत हई थी। उसके बाद उ ह ने
िहदं ी और कु छ मराठी िफ म म अिभनय भी िकया िकं तु कभी पीछे मड़ु कर नह दखे ा था । लता जी ने गाियका और
अिभनय लता जी क मंिजल नह थी । वह सगं ीत से अन य ेम अिभने ी दोन के प म काम िकया था िक तु उ ह लोकि यता
करती थ । ऐसा कहा जाता है िक बचपन म ी कंु दन लाल सहगल पा गाियका के प म ही हािसल हई । लता जी से पहले भारतीय
क एक िफ म 'चडं ीदास' जब लता जी ने दखे ी तो उ ह ने कहा िच पट क मखु गाियकाओं म सरु यै ा, शमशाद बेगम और
िक वह बड़ी होकर कंु दन लाल सहगल से शादी करगी और जब नूरजहां मखु थ । ऐसा कहते ह िक सरु यै ा, शमशाद बेगम और
उ ह पता लगा िक उनके बड़ी होने तक सहगल साहब बूढ़े हो नूरजहां ये तीन ही अपने समय म लोकि यता पा चकु थी।
चकु े ह गे तो इस सच को जानने के बाद भी उ ह ने सहगल साहब शा ीय गायन म रसूलन बाई,बतूलन बाई जैसी गाियकाओंक
के ित अपनी ा रखी। वो आजीवन अिववािहत रहकर सगं ीत भी अ छी ि थित थी िकं तु लता जी ने जब गाियक म वशे िकया
के ित ाणपण से समिपत हो गई। पहली बार लता जी ने वसतं तो चाहे नूरजहां हो या सरु यै ा अथवा शमशाद बेगम उ ह ने
जोगलेकर के ारा िनदिशत क गई िफ म 'िकती हसाल' के िलए सबको पीछे छोड़ िदया था। उनक आवाज म जादू था। उनके
गाया था िक तु तब उनके िपता मा टर दीनानाथ मगं ेशकर नह गायन म कु छ ऐसी िवशेषताएंथ जो
चाहते थे िक लता िफ म म गाएं और इसीिलए इस गाने को
िफ म से बाहर िकया गया परतं ु लता मगं ेशकर से वसतं उनसे पहले िकसी के गायन म नह थ । उनक आवाज म जहां
जोगलेकर बहत भािवत हए। िपता क मृ यु के बाद उ ह ने सरु ीलापन था, वह िनमलता और कोमलता उनके वर म थी।
अिभने ी के प म पहली िफ म क 'पिहली मंगलागौर'। यह लता जी क विन मिु का बहत आकषक हआ करती थ तथा
िफ म 1942 म बनी थी। इस िफ म म उ ह ने नेह भा धान उनका गानपन अपने आप म अ तु था। इतना ही नह प
क छोटी बहन का िकरदार िनभाया था। बाद म अ य कई िफ म उ चारण और तु गित होना भी लता जी के गायन क मह वपूण
म भी काम िकया िजनम 'माझे बाळ', 'िचमूकला ससं ार', 'गजा िवशषे ता थी और सभं वत: ये सभी िवशेषताएं िकसी एक म नह

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िमलत िकं तु लता जी म ये सभी िवशेषताएं मौजूद थ । सु िस क टाइम पि का ने उ ह भारतीय पा गायन क अप रहाय और
सगं ीतकार कु मार गधं व कहते ह िक लता जी क आवाज जब एकछ सा ा ी क उपािध दान क । भारत सरकार ने उ ह प
उ ह ने एक बार बीमार होने पर अ पताल म सनु ी तो उस िवभूषण के साथ भारत र न जसै े परु कार भी िदये । *उ ह 1958,
आवाज को सनु ते समय उ ह लगा िक जैसे वह आवाज कान से 1962, 1965, 1969, 1993 , 1994 के िफ म फे यर परु कार
होते हए उनके दय तक पहचं गई हो।वे सोचने लगे थे िक इतनी ा हए । *1972, 1975 और 1990 म उ ह रा ीय परु कार
सरु ीली आवाज िकसक हो सकती ह।ै िफ म 'बरसात' के पहले ा हए । *1966 और 1967 म महारा सरकार के परु कार
का कोई गाना रहा होगा, जैसे ही गाना समा हआ, एनाउंसर ने उ ह ा हए । * 1969 म उ ह प भूषण स मान दान िकया
घोषणा क िक आप सनु रहे थे लता मगं ेशकर को। कु मार गधं व गया । *1974 म दिु नया के सवािधक गीत गाने के िलए उनका
कहते ह िक जब उ ह ने यह सनु ा तो उ ह याद आया िक वह लता नाम िगनीज बकु ऑफ व ड रकॉड्स म दज हआ । *1989 म
जी, िजनक गायक म मा टर दीनानाथ मगं ेशकर क गायक का दादा साहब फा के परु कार िमला । *1993 म िफ मफे यर का
आभास होता है और साथ ही उनक अपनी आवाज क सरसता, लाइफटाइम अचीवमट परु कार उ ह िमला । *1996 म न
कोमलता, िनमलता जैसी िवशेषताएं उसे और भी अभूतपूव बना का लाइफटाइम अचीवमट परु कार उ ह ा हआ । *1997 म
दते ी ह, मा टर दीनानाथ मंगेशकर क ही पु ी ह। राजीव गाधं ी परु कार तथा 1999 म एनटीआर परु कार भी
कु मार गधं व ने यह मान िलया था आने वाला समय के वल और उनको ा हआ । *2000 म आई आई ए एफ का लाइफटाइम
के वल लता का ह।ै वे मानते ह िक लता जी के गायन म िजतनी भी अचीवमट अवॉड तथा 2001 म टारड ट का लाइफटाइम
िवशेषताएं उपि थित ह,वे िवशेषताएं लता जी को िव तरीय अचीवमट अवॉड उ ह िमला । *2001 म ही नूरजहां परु कार,
बना दते ी ह। पूरे जीवन उ ह ने जो भी गाया झूमकर गाया। लता महारा परु कार व भारत का सव च नाग रक स मान 'भारत
जी पर यह आरोप लगाया गया िक वे गंृ ार रस के गीत बहत र न' भी भारत सरकार के ारा दान िकया गया। उनको ा
गभं ीरता के साथ गाती ह जबिक गंृ ार रस के साथ उ ह ने याय होने वाला सबसे बड़ा परु कार भारत र न ही है य िक भारत
नह िकया है। यह बात कु मार गधं व ने भी अपने एक आलेख म र न सगं ीत( पा गायन) म अभी तक िकसी को नह िमला।यह
कही है िकं तु ये सारे आरोप िनराधार ह य िक लता जी ने जब अपने आप म एक िमसाल है । लता जी जसै ा िकरदार सभं वत:
गीत गाया ''ऐ मेरे वतन के लोग जरा आखं म भर लो पानी, जो िफर दिु नया को नह िमलेगा। कोिवड-19 के कारण 6 फरवरी सन्
शहीद हए ह जरा याद करो कु बानी।।" सनु कर पूरा दशे रो पड़ा 2022 को रिववार के िदन मंबु ई के ि ज कडी हॉि पटल म
था, यहां तक िक भारत के पहले धानमं ी पं जवाहरलाल नेह उपचार के दौरान लता जी हमेशा हमेशा के िलए हमसे दूर चली
क आखं भी नम हो गई ंथ अथात कह भी लता जी से कोई गई। उनक गायक और सगं ीत के ित उनके लगाव के िलए पूरे
अ याय नह हआ। एक बात और कहना चाहता हं िक लता जी ने दशे ने उ ह ाजं िल अिपत क । मन लता जी के ित
चाहे आरिं भक वर म गाया हो या िफर शीष के वर म गाया हो, नतम तक हो जाता है और कहता है काश ! वे कु छ और िदन
जब भी गाया झूमकर गाया। उ ह ने कभी िकसी गीत को रस के हमारे साथ रह पात ।
आधार पर नह दखे ा उ ह ने गीत म डूबकर ही गीत को गाया। यही
कारण है िक वे भारतीय िच पट क एकमा सा ा ी एवं सपं ूण 34/2, लाजपत नगर, एन. एच- 2,मथुरा 281004
पा गाियका बन । 30 से यादा भाषाओं म िफ मी और गैर मो. 9259146669/ 9758593044
िफ मी गीत गाने का उ ह ने रकॉड बनाया है। उनक जादईु
आवाज पूरे िव को अपनी ओर ख च लेती है। इसीिलए अम रका

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• यं य

धरोहर

सादर नमन

ज म : 21 मई, 1931
मृ यु : 5 िसतबं र, 1991

अितिथ! तुम कब जाओगे

तु हारे आने के चौथे िदन, बार-बार यह मेरे मन म उमड़ रहा दखे मेरी प नी क आखं बड़ी-बड़ी हो गई।ं तमु शायद नह जानते
ह,ै तमु कब जाओगे अितिथ! तमु िजस सोफे पर टांग पसारे बैठे िक प नी क आखं जब बड़ी-बड़ी होती ह, मेरा िदल छोटा-छोटा
हो, उसके ठीक सामने एक कै लडर लगा ह,ै िजसक फड़फड़ाती होने लगता ह।ै कपड़े धलु कर आ गए और तमु यह हो। तु हारे ित
तारीख म तु ह रोज िदखाकर बदल रहा ह।ं मगर तु हारे जाने क मेरी ेमभावना गाली म बदल रही है। म जानता हं िक तु ह मेरे घर
कोई सभं ावना नजर नह आती। लाख मील लंबी या ा कर म अ छा लग रहा ह।ै सबको दूसर के घर म अ छा लगता है। यिद
ए ोनॉट्स भी चांद पर इतने नह के , िजतने तमु के । या लोग का बस चलता तो वे िकसी और के ही घर म रहते। िकसी
तु ह त्ु हारी िम ी नह पकु ारती? िजस िदन तमु आए थे, कह दूसरे क प नी से िववाह करते। मगर घर को सदंु र और होम को
अदं र ही अदं र मेरा बटुआ कांप उठा था। िफर भी म मु कु राता वीट होम इसिलए कहा गया है िक मेहमान अपने घर वािपस भी
हआ उठा और तमु से गले िमला। तु हारी शान म ओ मेहमान, लौट जाए।ं दखे ो, शराफत क भी एक सीमा होती है और गेट
हमने दोपहर के भोजन को लचं म बदला और रात के खाने को आउट भी एक वा य है, जो बोला जा सकता है। कल का सूरज
िडनर म। हमने तु हारे िलए सलाद कटवाया, रायता बनवाया और तु हारे आगमन का चौथा सूरज होगा। और वह मेरी सहनशीलता
िमठाइयां बलु वाई।ं इस उ मीद म िक दूसरे िदन शानदार मेहमान क अिं तम सबु ह होगी। उसके बाद म लड़खड़ा जाऊं गा। यह सच
नवाजी क छाप िलए तमु रले के िड बे म बैठ जाओगे। मगर, आज है िक अितिथ होने के नाते तमु दवे ता हो, मगर म भी आिखर
चौथा िदन है और तमु यह हो। कल रात हमने िखचड़ी बनाई, िफर मनु य ह।ं एक मनु य यादा िदन तक दवे ता के साथ नह रह
भी तमु यह हो। तु हारी उपि थित यूं रबर क तरह िखंचेगी, हमने सकता। दवे ता का काम है िक वह दशन दे और लौट जाए। तमु
कभी नह सोचा था। सबु ह तमु आए और बोले, 'लॉ ी म कपड़े लौट जाओ अितिथ। इसके पूव िक म अपनी वाली पर उत ं , तमु
दने े ह।' मतलब? मतलब यह िक जब तक कपड़े धलु कर नह लौट जाओ।
आएगं े, तमु नह जाओगे? यह चोट मािमक थी, यह आघात
अ यािशत था। मने पहली बार जाना िक अितिथ के वल दवे ता - शरद जोशी
नह होता। वह मनु य और कई बार रा स भी हो सकता ह।ै यह साभार

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• पु तक समी ा

मने पढ़ी िकताब

दय पश : काग़ज़ पर उके री हई अमतू भाव क मतू -कृ ित।

अनूप क किवताएँ उनके यवसाय के अनु प प रशु िसिवल नह ह,ै पर तु हर तूफ़ान को सहजता से गजु र जाने म मदद करती
इंजीिनय रगं क गणनाएँ जैसी ह या, िकसी िकसान क उवरा से है।ये तेज हवा के थपड़े से बचाती नह है, लेिकन शीतलता तो
प रपूण धरती क तरह या, िनि त ही दते ी है। ये आसं ओु ंऔर मु कान दोन को सबं ल दते ी
िकसी परी क के सामने के वे उ र ह जो सवथँ ा िु टहीन ह ह।ै एक अ छी किवता अचानक ही ज म लेती ह, जैसे हौले से ठहरे
या, बादल म से एक रौशनी अचानक फू ट पड़ती है।वा तव म किवता
िकसी ेमी के िमलन का बह तीि त िदन ह या, दय का अनतं से सवं ाद होती है।
तेज गम से तन मन को राहत िदलाती शीतल जल क मदं मंद
बौछार ह या, अनूप अपनी फ़े सबकु टाइम लाइन पर जीवन के िविभ न
दद से राहत िदलाती कोई दवा सी ह, रगं को समािहत करती मध-ु रस सी किवताए,ँ अपने किवता मे ी
या िफर…या िफर िम के िलए िलखते रहते ह।अलग अलग भाव म ढली ये मधरु स
कृ ण क बांसरु ी क मधरु िद य तान सी ह जो सारी धरती पर सी किवताएँ कभी ख़शु ी के अहसास भर , कभी उदास, कभी
शनैः शनैः ितर रही है। तीखी, िझझं ोड़ती, कभी ब च सी भोली होती ह और कभी िकसी
बीते यगु से रस ख च लाती ह।मने जब इ हे पढ़ा तो लगा िक ये
अनूप के िलये किवता ही जीवन है।किवता उनक नस नस म जगु नओु ंसी िदप िदप करत किवताएँ मझु े लभु ा रही ह।मने सोचा
समाई हई ह।ै वो हर घड़ी, हर पल रगं िबरगं े फू ल सी किवताओंके य न मेरी सासँ म घलु ती इन फू ल क ख़शु बू को एक यारी म
उपवन म सजृ न के पु प िखलाते रहते ह।ये कोई अितशयोि भरा सहजे दू।ँ मने गहरी सासँ ली और एक िकताब अनूप जी के ५७व
कथन नह है, वा तव म वो किवताओं म ही जीते है।किवताएँ ज मिदन पर उ ह भट कर दी।इन किवताओं ने मेरे दय के हर
उनके िलये उ सव क तरह ह।उनक किवताएँपरखती ह, मन को भाव को छुआ और मेरे मन से इस सं ह का नाम िनकल पड़ा
छू के छलकती ह, महकती ह, सनु ती भी ह और मन के उन “ दय- पश”।
मनोभाव को भी पढ़ लेती ह जो अ य और गहरे छुपे ह।
शायद ये अनतं सा आकाश, उसम तैरते नम से बादल या आकाश एक द माली क तरह अनूप अपनी किवताओं को अपने
म उड़ते पखे अनूप को आमं ण दते े ह…िक आओ आकर हम दय से उगाते ह, कलम ही उनका हल ह।ै उनक रचनाएँफू ल क
पर किवता िलखो और वो किवता रच दते े ह। वैसे किवता किव तरह िखलती ह और अपनी खशु बू और रगं प से पढ़ने वाले का
दय से तभी िनकलती है जब मन म आनंद या िवषाद क मन मोह लेती ह।ये किवताएँ अलौिकक अनभु ूितयाँ ह,ै जो दूसरी
अनभु ूित ती हो उठे और मन पखं लगा के उड़ जाए, सोच के दिु नया से उतरी सी लगती ह। दय- पश का य े ता का सं ह
अनंत आकाश म।किवता जीवन म हो रही घटनाओंको बदलती है जो कलम क जादूगरी से पाठक को आनिं दत कर दते ा ह।ै अनूप
क कलम बड़े िव ास से िविभ न िवषय को छूती ह,ै जो इस सं ह

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के सात भाग म समाए ह।वे बारह आयम को छूते ह इसम कृ ण पैदा कर दते े ह।हर रगं पाठक के मन म उतर जाता ह,ै बार बार
मे , बचपन, उमगं , उ गे , दो ती, कृ ित, बुढ़ापा, मातृ व, ी, पढ़ने और उ ह िवषय पर वापस लौटने का अनरु ोध सा करता
पशु ेम, और भावनाए।ँ ह।ै
इस सं ह के कवर पेज क पिटंग मेरे बचपन के िम कै टन ये िकताब अपनी तरह क अनूठी है, एक ऐसा आनंद है िजसे आप
आशीष प नासे ने चारकोल से बनाई है।वे एक बेहतरीन कलाकार सहेज कर रखना चाहगे।अनूप क किवताओं के झरने इसी तरह
ह।उ ह ने बड़ी स दयता से मझु े अपनी बारह पिटं स को से शन आने वाले कई बरस तक झरते रह और पाठक ख़ूबसूरत
सेपरटे र के प म लगाने क अनमु ित दके र, दय- पश को किवताओंसे ख़ूबसूरत दिु नया दखे ते रह ।
सं हणीय बनाने म बहत मदद क ह।ै आशीष का कला े अित आप भी जाइये अपना दय- पश क िजये ।
िव ततृ ह,ै उनके कै चेस् सजीव से लगते ह, मानो बोल ही पड़गे, दय- पश जो अपने श द से मन को मोहने वाला जादू बनु ेगी।ये
ये िच बड़े मोहक और आकषक ह, लगता है जसै े सवं ाद कर रहे अपनी भाषा के स दय और सरलता से आपको सासँ रोक कर
ह। ये लभु ाते भी और गदु गदु ाते भी ह। वा तव म ये िच दखे ने वाले पढ़ते रहने को िववश कर दगे ी ।
को बस बाधँ लेते ह। ज र पिढ़ये ।
दूसरी ओर अनूप क हर किवता शु , िनमल और अपने आप म डॉ.पूिणमा कु लकण
पूण ह, इसम कु छ छूटा हआ नह लगता।ये किवताएँ आप के डॉ.पूिणमा कु लकण का प रचय
मनोमि त क म गहरे तक उतर जाती ह। अपनी भ यता से बार डॉ पूिणमा कु लकण एक ि भाषीय किविय ी एवं बहआयामी
बार िवि मत करती रहती ह।इस किव का दय किवताओंम नम यि व क मािलक ह।वे किवता और नाटक म गहरी िच
से धड़कता हआ िदखाई दते ा है।इनक सोच बहआयामी ह और रखत ह।कई रा ीय एवं अतं रा ीय जनरलस् म इनके शोध प
श द के चयन सश और बहत भावी। मे के ऊपर िलखी छपते रहे ह । द िथयटे र ऑफ महशे द ानी नाम के शोध प के
किवताएँ मन के कोमल भाव को बहत नज़ाकत से छू लेती एक भाग को िलखने का ेय डॉ पूिणमा को जाता ह।ै इ ह ने अपना
ह।किवताओंम साधारण भाव भी बेजोड़ श द के चयन से मन को पहला का य सकं लन Assorted plumerias डॉ. नीतीश
असीम आनदं से भर दते े ह।सोच बेहद सीधी और सरल ह, जो भार ाज जी को समिपत िकया ह।ै वह Permutations and
मन म दरे तक घलु ती रहती ह।कु छ श द तो िदमाग म ऐसे अिं कत combinations of love इनका दूसरा अतं ररा ीय किवता
हो जाते ह, िक बार बार उ ह पढ़ने का जी करता है । ये श द मन म सं ह है । फू ल क साठ जाितयाँ पर िलखा Autographs
बार बार गूजं ते रहते ह। from heaven एक अि तीय का यानभु ूित ह।ै कई सारी
दय- पश एक पढ़ने लायक़ पोय ी कले शन ह,ै यिद आप िहदं ी अतं ररा ीय एथं ॉलॉजी म ये सह किविय ी भी रही ह जैसे
किवताओंके ज़रा भी शौक़ न ह या नह भी ह तो एक सीधी सरल Deccan Reveries, Kavya Kumbh Anthology and
सी ये िकताब आपको किवताओंसे ेम करना िसखा दगे ी।अनूप Epiphany : A Myriad of Emotions. इ यािद।ये
ने अपना मन उड़ेल कर रख िदया है इस सं ह म िलखी िविभ न Discourses नामक सं था भी चलाती ह िजसम छा के
िवषय क किवताओं म।इन किवताओं म हर वग, हर समदु ाय, यि व को िनखारने उनक ि कलस् को उंभारने का काम ये
सािह यकार, कलािव , सगं ीत के जानने वाले, घमु त,ु ब च बखूबी करती ह । िहदं ी अं ेज़ी के कई किवता सं ह पर काम
वय क और वृ के बारे म कु छ न कु छ ह।ै श द काग़ज़ पर ठहरते जारी है। िनकट भिव य म डॉ. पूिणमा और अनूप जी के का य
ही नह , नृ य सा करते लगते ह और पढ़ने वाल के मन भी किवता कौशल के दशन पाठक गण कई और सं ह म भी अव य करगे।
क लय और ताल पर बह िनकलते ह।
ये पूरी िकताब के वल लैक एडं वाईट रगं से सजी हई ह,ै उसपर - डा. पूिणमा ि वेदी कु लकण
ह के आइवरी कै नवास पर उके रे श द और िच एक ितल म सा

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