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bajyaani ka dhur - collection of kumaoni folk songs

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Published by Kumauni Culture, 2021-08-22 02:44:21

bajyaani ka dhur - Kumaoni Lokgeet

bajyaani ka dhur - collection of kumaoni folk songs

Keywords: folk songs,Kumaoni songs,Kumaoni language

" कु भाऊॉ नी ससॊ ्कृ तत औय ऩमावा यण सॊयऺण "

अऩनी फात
प्रस्ततु यचना का भखु ्म उद्देश्म कु भाऊॉ ऺेत्र के ऩमावा यण सॊयऺण व
सयु ऺा की तिऺा देने वारे ववतबन्न गीतों को ऩाठकगणों के सम्भखु
यखना है जजससे उन्हंे महाॉ के ऩयॊऩयागत ऻान का दिना हो सके ।
इन गीतों भें तनहहत प्रकृ तत व ऩमावा यण तिऺा ऩयु ातन कार से ही
वनस्ऩतत व ऩिु ऩजऺमों व वातावयण की सयु ऺा व सॊयऺण का ऩाठ
ऩढाते हुमे आमी है । इन कु भाऊॉ नी गीतों भें ऩमावा यण जाग्रतत का
सदॊ ेि दृविगोचय होता है । ऩयु ाने सभम से ही महाॉ के रोग प्रकृ तत से
उतना ही ववदोहन कयते थे जजतना हक उन्हें आवश्मकता होती थी।

आज ववकास के नाभ ऩय महाॉ ऩय बी ऩेडों को अॊधाधधॊु
काटा जा यहा है जजससे प्रकृ तत का ऺयण हदनों हदन फढता जा यहा है।

अगय सभम यहते इस प्राकृ ततक ववनाि को न योका गमा तो हभायी
साॊस्कृ ततक ऩयॊऩया के वाहक जर जॊगर व जभीन का व इन गीतों का
कोई औतचत्म नहीॊ यह जाएगा। इस छोटी सी ऩसु ्तक के भाध्मभ से

आऩसे भये ी ववनती है हक हभ सफ तभरकय अऩने ऩवू जा ों द्वाया हकए
गए इस ऩमाावयण सॊयऺण के ऩनु ीत कामा को आगे फढाएॉ औय जन

जन तक इस तिऺा का प्रचाय प्रसाय कयंे ।
कु भाऊॉ नी सॊस्कृ तत ऩमावा यण सयॊ ऺण प्रधान यही है । महाॉ के भेरे उत्सव ब्रत
त्मोहाय, गीत, गाथाएॉ, साहहत्म, ऩववत्र स्थर ऩमाावयण सयु ऺा व सयॊ ऺण का ऩाठ
ऩढाते हैं । इस ससॊ ्कृ तत भें ऩि-ु ऩऺी, जर-थर, वऺृ , वनस्ऩतत को सम्भानजनक स्थान हदमा

गमा है। महाॉ ऩय वनस्ऩतत, नदी, नार,े नौर,े भॊहदय, जर स्रोत, धाये
व ऩिु ऩऺी ऩयु ाण कार से वहै दक ग्रन्थों के भाध्मभ से जीवन के अतबन्न अॊगों

के रूऩ भें ऩजू े जाते यहे हंै । महाॉ के तीथा स्थरों की मात्रा भानव को अनेकों
स्थानो के बौगोतरक ऩरयवेि, अयण्म , अबमायण्म, सयोवय, तार व सदॊु य ऩरयविे
का दिना कयाने भंे सऺभ होती हैं। साथ ही इन मात्राओॊ के द्वाया भानव को

प्रकृ तत के नसै तगका सौंदमा का बी आबास हो जाता है ।
प्राकृ ततक सयॊ ऺण ऩवू ा से ही कु भाऊॉ के जनभानस भंे यचा फसा है । प्रकृ तत
ऩजू न, सयॊ ऺण व कई वन व वऺृ फचाओ आॊदोरन इसके प्रभाण हंै । इसके अरावा

जनभानस के दैतनक कामा प्रकृ तत ऩजू ा से प्रायम्ब कयना, ऩीऩर को जर
सभवऩता कयना, फड़ के ऩेड़ की यऺा कयना, तुरसी रगाना, हयेरा, फसॊत ऩॊचभी
व पू रदेई त्मोहाय भानना, समू ा को जर देना, महाॉ की ससॊ ्कृ तत के ऩमावा यण
प्रभे को दिााता है । ऩमावा यण के तनकट यहने के कायण महाॉ के तनवातसमों के
जीवन भें प्रकृ तत के दिना होते हैं । मही कायण है हक इनके साहहत्म, करा,

गीतों, गाथाओ,ॊ कथाओॊ भंे जर, जॊगर व जभीन प्रभखु स्थान यखते हंै।
कु भाऊॉ नी गीतों की फात कयंे तो रोकगीतों के अरावा ऩमावा यण सयु ऺा कई
सॊस्काय गीतों व ऩजू ा गीतों भें बी हदखाई देती है। प्रकृ तत ऩजू ा भें एक रोकगीत
अजनन की भहत्ता को सभझाता है। इन गीतों भें अजनन, समू ा ,चन्र की ऩजू ा,

धातभका अनषु ्ठानों व वववाह आहद भाॊगतरक अवसयों ऩय गाए जाते हैं।
मथा –

‘अजनन वफना होभ नहीॊ , ब्रह्मा वफना वेद नहीॊ’
गीत की इस ऩॊवि भंे अजनन ऩजू ा का स्वरूऩ हदखाई देता है।
दसू ये गीत भंे अजनन को फरु ाने ऩय अजनन कह यही है हक तेये वहाॉ कै से आऊॉ
वहाॉ ऩय अत्माचाय पै रा हुआ है , भाॉ फटे ी के फीच ऩसै े का रने देन होता है
फाऩ फेटे के फीच रेखा जोखा होता है इससे मह आबास होता है हक महाॉ ऩय

प्राकृ ततक वस्तओु ॊ को बी व्मवित्व भानकय उनसे वातााराऩ हकमा जाता है, औय
ऐसा इस एक गीत भंे ही नहीॊ वयन अनेक गीतों व कववताओॊ भंे हदखाई देता है .

ए जा अगतन भात रोक, भात रोक
त्वे वफना अगनी , ब्रह्मा बखू ौ यैगो , बखू ौ यैगो
कतसक औरू , कतसक औरॊ ू तेयो भातरोक मो फयु ो अत्माचाय
भामा तधमा भामा तधमा अजो ऩछै ौ, तेया भात रोक ,

फाफू फटे ो को रेखा जोखा तेयो भात रोक,
कतसक औरॊ ू कतसक औरॊ ू तेयो भात रोक, मो फयु ो अत्माचाय

तत्ऩश्चात तनभतॊ ्रण गीतों द्वाया प्रकृ तत को बी तनभॊवत्रत हकमा जाता है –
प्रताहह न्मतू ु भंे सयू ज हकयणन को अतधकाय , साॊजी न्मतू ु भें चॊरभा
तायन को अतधकाय ,

अथाता प्रात् सयू ज व उसकी हकयणों को एवॊ यावत्र को चॊरभा व तायों को
तनभॊवत्रत हकमा जाता है , इनसे ऻात होता है हक प्रकृ तत औय उससे सॊफजन्धत

सबी वस्तुएॉ महाॉ भानव जीवन के प्रत्मेक ऩहरू से सॊफजन्धत हैं ।
प्रकृ तत सॊयऺण से सॊफॊतधत दीना नाथ ऩतॊ जी की एक कववता भें वामु को

सॊफोतधत कयते हुमे जखरे हुमे पू रो को न तोड़ने की प्राथना ा की गई है

नवीन वनृ ्तों के फीच जो पू र इस वाहटका भंे जखरा है वो भानो कड़े ऩरयश्रभ के फाद
भारी को एक ऩतु ्र के रूऩ भंे प्राप्त हुआ है , वह वाहटका का है जजसने

देवताओॊ का भन तक आकृ ि हकमा है , अत् हे वामु तभु से ववनम है हक
ऐसे पू र कबी भत तोड़ना ।

बोतै ऩरयश्रभ का फाद , भानो भातर कें सवु न तभरौ छ
श्रगॊृ ाय जो छ सारय वाहटका को, जैभंे गमो द्याप्तान को भन,
हे वामु त्वथे े छ ववनती मे भेयी, मासू पू र कंे तू कबंे तोडै जना ।
सतु भत्रा नन्दन ऩॊत जी की एक कववता जॊगर भें जखरे फरु ॊ ि के भाध्मभ से
प्रकृ तत की जीवतॊ ता व कु भाऊॉ के रोकजीवन को दिाता ी हुई इस प्रकाय है
रार फरु ॊ ि (उत्तयाखॊड का याज्म ऩषु ्ऩ ) को सफॊ ोतधत कयते हुमे वह तरखते हैं -

साय जॊगर भें त्वी जै कोई न्हा यै कोई न्हा
पू रन छै कै फुरॊ श जॊगर जलर जस जाॉ ,

सल्र छ घ्नाय छ , ऩईं छ ,आमाय छ
सफनक पाङन भंे, ऩुङनक बय छ

ऩै त्वे भंे ददरे दक आग ,त्वे भँे ज्वालनक पाग छ ।

अथाता साये जगॊ र भें तेया जसै ा कोई नहीॊ है ,
कोई नहीॊ है , फरु ॊ ि पू रता है तो साया जगॊ र जसै े जर सा जाता है।

सार है , देवदाय है ऩाइमाॉ है , अमाय है ,
औय सफकी डातरमों भें कतरमों का बाय है,
ऩय तेये हदर भें आग है , तझु भंे जवानी का पाग है ।
कववता भंे प्रकृ तत का ऐसा वणना उसे जीवॊतता प्रदान कयता है ।

एक अन्म कववता भें प्रकृ ततक सौंदमा को भन के बावों द्वाया कवव ने तनम्न
प्रकाय से वजणता हकमा है मथा –

‚कसी जनू वफयाजी छ पू रन भें, कस उत्सव है यौ छ मो वन भें
कसी सदुॊ य िीतर ऩौन चरी, भन आज भनै भन छौ वफचरी

अतत उच्च डाना फहट तान सणु ी , उतत फाॊसयु ी फाजन छ फोट भुणी
हॊसने अतत भोद बयी भन रै ताय चन्रभ नाज हदखनु ी बरै
कस िोतबत आज आकाि छ हो, घट नाचछ गाड़ नचुछॊ अहो

भन के क तन हो तथयकी तथयकी , तफ गोऩ ररी रग माॊ तथयकी‛

अथाात पू रों भंे , ज्मोत्सना पै री हुई है , वन भें उत्सव सा छा यहा है ,
सॊदु य िीतर ऩवन चर यही है ,

भन बीतय ही बीतय ववचतरत हो यहा है , अतत उच्च तिखयों से तान सनु ऩड़ती
है जहाॊ फऺृ के नीचे फाॊसयु ी फज यही है , हॉसते हुमे प्रसन्न भन, ताये चॊरभा
नाच हदखा यहे हंै, आकाि िोतबत हो यहा है , ऩनचक्की नाच यही है जजसे

छोटी नदी नचा यही है, मह देख कय हकसका भन नहीॊ तथयके गा , तबी तो याधा
बी महाॉ नाची थी।

ठॊडी ऩौन ठॊडों ऩाणी उजरे ा अतत बरा, फाड़ा तबडा , गाड़ तछड़ा ,
उजरे ा अतत बरा

नीरा वी आकाि भाथ फादरन वफजरु ी नाच, सूमा चन्र ताया साथ
उजेरा अतत बरा

चादॉ ी रे छाई हहभाॊचर तरी जनया छन हमनू का गर,
ऋवि भुतनना का मो थर, उजेरा अतत बरा
चयणन जईं दधु धै ाय , जगॊ रन वाय ऩाय
फुरॊ ि, सल्र, फाजॊ ध्माय , उजेरा अतत बरा
सीडी जसी उऩरू साय, हयी बयी म्माया ऩाय
गरू घट गाड़ वाय , उजेरा अतत बरा

धयण हुणी इनयी ियभ, फचणू हुणी माॊ को धयभ
करूॊ रा याभ आऩणा कयभ , उजरे ा अतत बरा



इस गीत भंे ठॊ डी हवा ऩानी, ऩहाड़, आकाि, फादर, ताये, चरॊ भा, हहभारम, फपा ,
जॊगर, फरु ॊ ि, सार, फाॊज, देवदाय, खेत, नदी, गरू आहद का बरी प्रकाय से
वणना हुआ है औय इनके सॊयऺण की फात की गई है ।
एक अन्म कववता ‘धाय भंे को ऩौ’
बी जर स्रोत की भहत्ता की फात कयती है। इसभें नामक के भन भंे

ऩहाड़ी ऩय फने ऩानी के धाये की भहत्ता फताई गमी है हक कै से उसका ठॊ डा ऩानी
तेज धऩू व खड़ी चड़ाई भें सखू े भहॉु की अन्दय तक की प्मास फझु ाता है, वो
ऐसा धाया है जो फाय फाय आॉखों के आगे आ जाता है ।
उसको बरु ामा नहीॊ जा सकता –
धाय भें को ऩौ , आॊजखन रयटी यौ
उकारी रै घाॊटी सखु ी भखु ड़ी घाभै रै
हॊसा भये ी धाया रागो , कावा का पाभे र,ै फरु ाणै तन उणै कौ ।
धाय भंे को ऩौ आॊजखन रयटी यौ
मथा उथाॊ घड़ा भाट, उथा उथा अरवु ा
चनू ी रै ऩोतथमा छन तसरनू ी फरवु ा कसीकै तन बई धौ ।
धाय भें को ऩौ आॊजखन रयटी यौ ।
ततसा फझु ी तीसा रागी, हपरय ऩाणी वऩमौ
भंै भखु ी चानै यै गमॊू बयी रामौ हहमो तन जाणनी नौं ।
धाय भें को ऩौ आखीन रयटी यौ
ऩौ रगाई रटु ी तरओ भये ो भना वीरै
गर नै तछयनी ऩाजण मसो ऩाजण वऩरै रतगमा स्मोर ऩौ ।
धाय भंे को ऩौ आॊखीन रयटी यौ’



कु भाऊॉ नी रोक गीतों भें ऩमाावयण वविमक चेतना तनहहत होने से महाॉ के
वनो का दोहन , प्राकृ ततक प्रदिू ण , जर प्रदिू ण कभ हुआ है । ऩमावा यण
वविमक गीतों भें कहीॊ फाॊज , फयु ाॊि , बीभर आहद वऺृ ों को काटना ऩाऩ फतामा
गमा है तो कहीॊ उसे काटने से प्राकृ ततक हातन के प्रतत सचते कयने का प्रमत्न
हकमा गमा है । कहीॊ कहीॊ ऩय वन यऺक ऩड़े काटने को भना कय यहा है तो कही
ऩय फाॊज के फऺृ ों को काटने ऩय ठन्डे ऩानी व ठॊ डी हवा की कभी होने का
एहसास कयवामा जा यहा है। कहीॊ ऩय गेहूॊ के खेतों भंे जाने को भना हकमा जा

यहा है हक खेत भंे जाने ऩय गेहूॊ की फारी टू ट जाएगी,
तो कहीॊ कच्ची नायॊगी

तोड़ने को भाना हकमा जा यहा है। वऺृ ों को फचाने हेतु उनको घय के फच्चों की
तयह भानने को कहा जा यहा है औय हाथ जोड़ कय प्राथना ा बी की जा यही है
की फऺृ ों को भत काटो । एक गीत भंे फतामा गमा है की तनु के ऩेड़ को भत
काटो हभ उसकी छामा भंे फठै ंे गे । एक अन्म गीत भें वऺृ ायोऩण कयने व उनके

राब फताने का प्रमास हकमा जा यहा है । सॊऺऩे भें कहा जा सकता है हक

कु भाऊॉ नी रोक गीतों भें ऩमाावयण तिऺा, सॊयऺण, सयु ऺा, व वऺृ ायोऩण भखु ्म
रूऩ से दृविगोचय होते हैं।

वतभा ान भें हाराॊहक नई ऩीड़ी ऩमावा यण सयॊ ऺण की ओय कु छ सीभा तक
जागरूक है ऩयॊतु वे महाॉ के ऩवू ा तनवातसमों की बाॊतत ऩमावा यण के सॊसगा भंे नहीॊ
यहती। रोक गीतों व ससॊ ्काय गीतों के अध्ममन से ऻात होता है हक प्रकृ तत व
ऩमाावयण कु भाऊॉ ऺेत्र के तनवातसमों के इतने तनकट थे हक वो प्रकृ तत को अऩने
दैतनक जीवन का अॊग भानते थे , उनके तरए प्रकृ तत कोई फजे ान वस्तु न होकय

एक व्मवित्व थी जजसका सयॊ ऺण व सयु ऺा वो अऩने ऩरयवाय के सदस्मों की

बाॊतत कयते थे । ऩयॊतु वतभा ान ऩीड़ी इन बावो को हृदमगत कयने भंे असभथा
है इसका कायण उनका प्रकृ तत के ससॊ गा भंे न यहना बी हो सकता है मा वो
प्रकृ तत के वविम भंे इतना सोचने का कि नहीॊ कयना चाहते इसतरए अनतबऻ
यह जाते हंै। आज इस फात की भहती आवश्मकता है हक हभ अऩनी आने वारी
ऩीड़ी को कु भाऊॉ ऺते ्र के ऩयॊऩयागत ऩमाावयण सफॊ ॊधी गीतो के भहत्व से अवगत

कयवाएॉ औय उन्हंे ऩमावा यण तिऺा व सॊयऺण का ऩाठ ऩढ़ामें ।

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ऩमावा यण सॊयऺण, उत्तयाखण्डवातसमों के स्वबाव भंे है।

हयेरा जसै े त्मौहाय, हभाये ऩूवजा ों की दयू गाभी सोच को फताते
हंै।



गॊज्मारी (ओखरी कु टनी) फाॊज की ही रकडी के फनते हंै ,

गॊज्मारी ऩहाडी जीवन से जुडा ऐक ऐसा हलथमाय है
जजसके बफना धान की कु टाई नहीॊ की जा सकती मह चक्की का काभ कयती है ।
ग्राभीण काश्तकायों द्वाया फाॊज की रकडी़ी का उऩमोग खेती के काभ भें आने वारे बवबवध
औजायों मथा कु दार,दयातीॊ के सॊमु ाठ, जुवा, जोर-ऩाटा के लनभााण भें दकमा जाता है।

उत्तयाखडॊ का हया सोना फाजॊ की सूखी चौड़ी ऩवत्तमों का आवयण
जहाॊ जभीन को धऩू की गभी से फचाता है वहीॊ फयसात के ऩानी को तेजी से

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िब्द ---- ठाड़ो ,फोटो , खडहकमा , सआु , झन फाजजमे , फाॊसुरी
हहन्दी अथा ---- खड़ा, फऺृ , खड़क का ऩेड़, ऩतत मा ऩत्नी के तरए प्रमिु होने वारा िब्द, भत फजना , फाॊसुयी

फहने से योकता है तो ऩानी को जभीन के अॊदय जाने का अलधक सभम
लभरने से फायाभासी धाये ऩॊदेये ठन्डे ऩानी के स्रोतों का लनभाणा कयते हंै.

Someshwar Velly

ऩमाावयण सॊयऺण भंे भैती आॊदोरन एक बवलशष्ट आॊदोरन है
जजसके तहत शादी के ददन भामके की माद भें नव बववादहत दम्ऩलत द्वाया एक ऩौधा रगामा जाता है।

मह आॊदोरन श्री कल्माण लसॊह यावत द्वाया शुरू दकमा था जजन्हंे
2020 भें ऩद्मश्री से बी सम्भालनत दकमा गमा

फाॉज मा फरतू मा िाहफरूत एक तयह का वऺृ है जजसे अगॊ ्रेजी भंे

'ओक' (Oak) कहा जाता है। फाॉज (Oak) पागेतसई (Fagaceae) कु र के क्वेका स
(quercus) गण का एक ऩेड़ है। इसकी रगबग 400 हकस्भंे ऻात हंै, जजनभंे कु छ

की रकहड़माॉ फड़ी भजफतू औय येिे सघन होते हैं। इस कायण ऐसी रकहड़माॉ
तनभाणा काष्ठ के रूऩ भंे फहुत अतधक व्मवहृत होती है।

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िब्द ---- ऩाया , तबड़ा घस्मायी, ब्म,े थोयी, भ्मोर, गाड़, भकै णी, तबना, नक, झन भातनए, नाभा
हहन्दी अथा ---- दयू , ऩहाड़ी, घास राने वारी भहहरा, प्रसव , बंैस की फच्ची,खाई, नदी, भझु को, जीजा, फयु ा, भत भानना, नाभ

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िब्द ---- तन काटो, झभु यमारी फाॊजा, फज्माणी ,धुया, धनऩतु ई, खकु ु यी, तबटौरी, बरू ूरों, ऊनी .
हहन्दी अथा ---- भत काटो, फाॉजों का झयु भुट, फाजों का जगॊ र ऩतगॊ ा, खॊजय, बाई द्वाया दी गई बंटे , बूरना, आते हंै .

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िब्द ---- काचा ,नायॊगी ,भोरा, ईजा, कौरी .
हहन्दी अथा ---- कच्ची , सतॊ या, भलू ्म मा भोर, भा,ॉ कहेगी.

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िब्द ---- काहटए, अखौड़े, बरयरै ऩाजण, डातर फोहट, घरू नानततना .
हहन्दी अथा ---- काटना , अखयोट, ऩानी बयेगा, डार ऩेड़, घय , फच्चे.

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िब्द ---- त्वीर,ै धुया, तततभर,ै ऩाता, जोडन्मू .
हहन्दी अथा ---- तभु ने , जॊगर ,तततभर का ऩेड़, ऩत्ती, जोड़ता हूॉ .

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िब्द ---- तन काटा , धयु .
हहन्दी अथा ---- भत काट , जॊगर

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िब्द ---- तन काटो , डातर .
हहन्दी अथा ---- भत काटो , िाखामंे .

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िब्द ---- तजु ण , बौजी, श्मोरा .
हहन्दी अथा ---- तुन का फऺृ , बाबी, छामा .

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िब्द ---- रूऩसी , खुटी , चौभास , तचपइ , उजाड़ .
हहन्दी अथा ---- रूऩवान , ऩैय , चातभु ासा , हपसरनदाय , उजाड़ने को .

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िब्द ---- हाव ऩाणी दी याखो, वीक , धरय हदमो, द्वी फोट , यौवऩ, फोट डाउ, रकु े , थातभ ,
थावऩ,नाि, योहक, रगणु ,ठानी ल्हीमा .

हहन्दी अथा ---- हवा ऩानी , दे यखा , उसका, यख देना, दो फऺृ , रगाना, ऩड़े टहतनमाॉ , तछऩा,
थाभना, रगाना, नि, योक, रगाना, ठान रने ा .

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िब्द ---- घॊघु यमारी दातुरी, तन काट, तन रुट, दाज्म,ू काटण, सासु , रयसारी, भुररी ऩाजण, कथे कू नु, हदछौ, हुनुय .
हहन्दी अथा ---- गोर दयाती, भत काट, भत रूट, दद्दा, काटना, सास , गुस्सा कयेगी, भुयरी, ऩानी, हकस से कहें, देगा , हदरासा .

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िब्द ---- ततर सये ी, झन जमे, नमू फातर, टु टरी, दातरु ी, तबभंे , छु टरी,
यहट की तान, हंेगी, कपू आ, हमोंक .

हहन्दी अथा ---- नीचे का खेत, भत जाना, गहे ूॊ की फारी, टू टेगी, दयाती, जभीन ऩय, तगयेगी,
यहट की आवाज, हो गई ,कपु आ ऩऺी, फपा का .

हयेरा

हयेरे से सॊफजन्धत एक गीत इस प्रकाय है जो हयी बयी प्रकृ तत का सदॊ ेि देता है -
हरयमारी ये हरयमारी हरयमा फण जारी...

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िब्द ---- फण, दफु ड़ी, कंे छ, चेरी भैंतरु ी जरॊु ौ .
हहन्दी अथा ---- जॊगर, दफू घास, कहती है, फहे टमाॉ मा रड़की, भामके , जाऊॉ गी .

हयेरा त्मोहाय का गीत खेती हक सभवृ ि का प्रतीक भाना जाता ह,ै
इसके तरए सप्तधान्मो को एक फतना भें घय के बीतय
ऩजू ास्थर ऩय फोमा जाता है,
औय नमायह हदनों फाद उसभें उगे हुमे ऩौधों को काटकय
बगवान को सभवऩता कयने के ऩश्चात ऩरयवाय के सबी

सदस्मों के तसय ऩय तनम्न आिीवचा न के साथ यखे जाते हंै .

जी यमे , जागी यमे , मो भास मो हदन बेटने यमे
अगास जस उच्च ह्वे जामे धयती जस चाकोव ह्वे जामे
दफु जस ऩगॊ यु जामे ,स्मावे जे फवु ि स्मु वो ज तयाण
भाका न्डेम ज आमु ह्वे जाओ, गॊगाजी भंे ऩाजण हुण तक
हहभारम भंे हमू हुण तक ऩनऩ जाम,े मो हदन मो भास बेटनंे यमे ।

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िब्द ---- जी यमे , जागी यमे, भास , अगास ,चाकोव, स्मावे ,स्मू जस तयाण, ह्यू .
हहन्दी अथा ---- जीते यहना, जाग्रत यहना, भहीना, आकाि, चौड़ा, तसमाय, िेय जसै ी िवि, फपा .

जजसभंे काभना की जाती है हक जीववत जाग्रत यहो, जागतृ यहो,
मे भहीना व मे हदन तभु से बंेट होती यहे , तभु धयती की तयह चौडे, आकाि की तयह ऊॉ चंे ,

दफू की तयह फवृ ि वारा हो जाओ,तुभ तोते की तयह फुविभान िेय की तयह िविभान,
भाका न्डेम की तयह तमु ्हायी आमु हो जाए।

गगॊ ा जी भें ऩानी तक, हहभारम भंे फपा यहने तक तुभ जीववत यहो, जीते यहो जाग्रत यहो
मे हदन व भहीना फाय फाय आते यहंे औय हभ सफकी बंेट होती यहे।

इन ऩयू े आिीवचा नों भंे प्रकृ तत के सबी घटकों को भहत्व हदमा गमा है ।
जजससे ऻात होता है हक कु भाऊॉ ऺेत्र के त्मोहायों के गीत बी प्रकृ तत से सॊफजन्धत हंै औय ऩमावा यण का सदॊ ेि देते हंै।

पू रदेरी औय हयेरा गीत ऐसे हंै जो हभें ऩमावा यण सुयऺा की तिऺा देते हैं ।
पू रदेरी का गीत जहाॉ हभें प्रकृ तत के सौंदमा के वविम भें जानकायी देता है ।

इस हदन फच्चों द्वाया अऩने व आस ऩास के घयों की देहयी का
पू रों से ऩूजन हकमा जाता है औय गीत गामा जाता है,

पू र देई, छम्भा देई, देण द्वाय बय बकाय,
त्वी देरी सो नभस्काय, आओ देरी ऩजू ों द्वाय,
बाई जीयों राख फयीि ,फणै जीयों राख फयीि ,पू र देई छम्भा देई !!

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िब्द ---- फण, दफु ड़ी, कंे छ, चेरी भतंै रु ी जरुॊ ौ .
हहन्दी अथा ---- जगॊ र, दफू घास, कहती है, फहे टमाॉ मा रड़की, भामके , जाऊॉ गी .

मह त्मोहाय फताता है दक ऩेड से तोडकय नहीॊ वयन उसके नीचे लगये हुमे पू रों से देहयी ऩूजा की जाए ।
इस त्मोहाय से सॊफजन्धत एक दसू ये गीत भंे फतामा जा यहा है की प्रकृ लत हयी बयी हो गई ,है
ऩहाडों भंे पू र हॉस यहे ह,ैं ठॊ डी हवा चर यही ह,ै तुम्हाये अन्न के बॊडाय बये यहें
मह ऋतुएॉ आती यहंेगी औय हभ सफ फचे यहंे मथा-
पू र देई, पू र देई पू रो सॊग्मान, सुपर कयो नौं फयस तुभुकें बगवान ।
यॊलगर चॊगीर पू र एगी,ॊ डारा फोटा हरयमा हैगीॊ , लबड कनाई पू रै पू र , आज पू रौ सॊग्मान ...

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िब्द ---- यॊतगर चॊतगर, एगीॊ, डारा फोटा, हरयमा, ल्मगे े, भौनु कणी , हदनी, डावा , हने यौरा .
हहन्दी अथा ---- यॊग वफयॊगे , आ गए, डार फऺृ , हये, रा गए, भधुभक्खी को , देते हंै, डार, होते यहेंगे .

आबाय
कु भाऊॉ ऺेत्र के ऩमावा यण सयॊ ऺण व प्रेभ को इस ऩुस्तक के भाध्मभ से आऩ

रोगो तक ऩहुॊचाने का प्रमास कय यही हूॉ, आिा है आऩ भेये इस कामा को
सयाहंेगे। प्रस्तुत ऩुस्तक (e Book ) की यचना हेतु सवपा ्रथभ भैं जगत के
तनभाणा कताा ऩयॊब्रह्म ऩयभेश्वय का आबाय प्रकट कयती हूॉ , तत्ऩश्चात ऩसु ्तक
तनभाणा के तरए भंै श्री के . सी. ऩाण्डेम जी का हृदमगत आबाय प्रकट कयती हूॉ
उनके सहमोग के वफना इस ऩनु ीत कामा को सम्ऩणू ा कयना असॊबव था , साथ
ही भंै उन सबी ऺेत्र वातसमों ऩारयवारयक सदस्मों, स्नेही जनों का बी आबाय
प्रकट कयती हूॉ जजन्होने इस ऩुनीत कामा हेतु कई जानकारयमाॉ उऩरब्ध कयवाईं

औय अऩना स्नेह प्रदान हकमा ।

धन्मवाद एवभ ् िबु काभनाओॊ के साथ

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