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Published by khush_chooramun420K, 2017-10-25 05:27:58

yuvaaz 4th ed. - 2017

yuvaaz 4th ed. - 2017

संस्थान में हिंदी उत्सव की धूम

हिदं ी विभाग द्वारा हिदं ी सप्ताह गयी। पिछले वर्ष की तलु ना मंे में नए राउंड के जड़ु ने से
का आयोजन 7 सितम्बर छात्रों ने बड़ी सखं ्या मंे सभी छात्रों के सामने एक अलग
से आरम्भ हुआ। कविता गतिविधियों मंे भाग लिया। तरह की चनु ौती दिख पड़ी।
वाचन, नकु ्कड़ नाटक, कविता वचन प्रतियोगिता में
अतं ्याक्षरी, आशवु ाक आदि जहाँ 40 कवि उभर कर आए, अवसर पर विभिन्न अतिथियों
प्रतियोगिताओं के आयोजन वहीं आशवु ाक मंे कईयों ने ने छात्रों को सराहा और
से छात्रों के साथ प्राध्यापकों अपने वाक् कौशल को सदु ृढ़ उनका दिशा निर्शेद भी
ने भी आनंद उठाया। बनाया। अपने विचारों, नाट्य किया। हिदं ी सप्ताह के सफल

कला तथा सजृ नात्मकता से आयोजन के लिए हिदं ी
इस साल भी अन्य विभागों से छात्रों ने समाज को बदलने विभाग और उससे जड़ु े अन्य
छात्रों की प्रतिभागिता दखे ी की कोशिश की। अतं ्याक्षरी विभाग बधाई के पात्र ह।ै

तो इसलिए मनाते है हिंदी दिवस...

हिन्दी दिवस प्रत्येक वरष् 14 सितम्बर को मनाया राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनरु ोध पर
जाता ह।ै 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा सन् 1953 से सपं रू ण् भारत मंे 14 सितंबर को
ने एक मत से यह निरयण् लिया कि हिन्दी ही प्रतिवरष् हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता ह।ै
भारत की राजभाषा होगी। इसी महत्वपरू ्ण 14सितम्बर, व्यौहार राजेन्द्र सिंह का जन्मदिवस
निरयण् के महत्व को प्रतिपादित करने तथा भी है जो जिन्होने हिन्दी को भारत की राजभाषा
हिन्दी को हर क्षेत्र मंे प्रसारित करने के लिये बनाने की दिशा मंे अथक प्रयास किया।

सन्शेद
भाषा मकू नहीं हो सकती... हिदं ी का यवु ा बोलने के लिए उत्सुक था! अपने आप, अपनी
होनी भी नहीं चाहिए। लेकिन गतिविधियों, उन गतिविधियों से मिले आनंद और सार्थकता के बारे
भाषा को मकू ता के सकं ट से म।ंे हिदं ी सप्ताह गतिविधियों के माध्यम से दशे के हिदं ी अकादमिक
दरू रखने के लिए उसका मकु ्त सागर मंे फंे के गए एक कं कर से उठी लहर इतनी दरू तक जाएगी...
होना एक अनिवारय्ता ह।ै यह सोचा नहीं था। मन में शब्द उभरा ‘युवाज़ – युवा हिंदी की
आवाज़’। उस पहले अकं से लेकर आज तक यवु ाज़ कई कदम आगे
मॉरीशस मंे हिदं ी खबू बोली बढ़ा ह।ै वे तीन यवु क उन अस्थायी पदों को छोड़ अपनी अपनी-अपनी
ह।ै दशे का इतिहास साक्षी स्थायी दिशाओं की ओर बढ़े। कु छ छू टे, कई जड़ु े। क्षमताएँ बढ़ीं।
है कि जब-जब जहाँ-जहाँ तकनीक भी। और जब-जब हिदं ी सप्ताह आया आवाज़ फिर से उठी।
आवश्यकता पड़ी तब-तब

वहाँ-वहाँ उसने अपनी आवाज़ यवु ाज़ का यह विकास हिदं ी सप्ताह की उड़ान का ही प्रतिबिम्ब ह।ै
बलु ंद की ह।ै यह आवाज़ इतने वर्षों में गतिविधियाँ, छात्र, प्रतिभागी, परु स्कार तो बढ़े ही ससं ्था
भविष्य मंे भी उसी चोटी से निकलती रहे इसके लिए हिदं ी के जड़ु े आज का समर्थन, विभाग के अधिकारियों का सहयोग और खासकर हिदं ी
के यवु कों को भाषा की मकु ्तता से रूबरू करवाते रहना भी अनिवारय्ता सप्ताह के शभु चितं कों और प्रयोजकों की सखं ्या भी लगातार उसी
ह।ै यही उद्शदे ्य है महात्मा गांधी ससं ्थान के हिदं ी विभाग द्वारा गत अनपु ात में बढ़ती रही ह।ै बढ़ता रहा है हिदं ी सप्ताह से जड़ु ने का,
दशक भर से लगातार आयोजित हिदं ी सप्ताह उत्सव का। हिदं ी दिवस उसके लिए बहे पसीने की हर बंदू का, नित नवीन प्रयोगों का आनंद।
के उपलक्ष्य में आयोजित गतिविधियों-प्रतियोगिताओं के माध्यम से
हर वर्ष के समान इस वर्ष भी छात्रों की हिदं ी को पाठ्यक्रम-पसु ्तक- सब के प्रति आभार, यवु ाज़ टीम को बधाई और आप सभी
कक्षा-परीक्षा की चहारदीवारी से मकु ्त करके उनकी सजृ न, सम्पर्क , को हिदं ी दिवस की शभु कामनाएँ दते े हुए आपको हिदं ी सप्ताह
सम्प्रेषण और संघीकरण क्षमताओं को विकसित होने के लिए खलु ा 2017 में उठी हिदं ी की मकु ्तता की गजँू के साथ छोड़ रहा हू।ँ
क्षितिज प्रदान करना ही विभाग और ससं ्थान का मखु ्य उद्शेद ्य रहा। इसी आशा के साथ कि अगले वर्ष – मॉरीशस मंे विश्व हिदं ी
सम्मेलन के आयोजन के वर्ष – हमारा हिदं ी सप्ताह और उसकी
इस उद्शेद ्य की परू ्ति कहाँ तक हो पाई? यह ससं ्थान अथवा आवाज़ यह यवु ाज़ और अधिक विस्तृत क्षितिजों की उड़ान भरे।
विभाग के स्थान पर छात्र ही बोलंे तो ही बेहतर होगा। यही काम

करने ‘यवु ाज़’ का यह चौथा अकं आया ह।ै यवु ाज़ स्वयं भी गुलशन सखु लाल
छात्रों की उन क्षमताओं के मकु ्त विकास का ही संदु र उदाहरण ह।ै अध्यक्ष, हिदं ी विभाग
महात्मा गांधी ससं ्थान
आज से चार वर्ष परू ्व का वह क्षण याद ह।ै अपनी पढ़ाई परू ी करने के
कु छ ही दिन बाद तीन यवु ा हिदं ी स्नातक विश्व हिदं ी सचिवालय में
वहाँ के सचू नापत्र के टंकन का कारय् करने के लिए अस्थायी रूप से
काम करने आए थे। एक दिन उनको किसी योजना को लेकर आशा-

आशकं ा उत्साह-संदहे के बीच विचलन का मौन आनंद लेते हुए पाया।
पता चला कि वे सचिवालय के सचू नापत्र की तर्ज़ पर अपनी ससं ्था
– महात्मा गांधी संस्थान के हिदं ी सप्ताह की सचू नाओं के प्रचार के
लिए एक सचू नापत्र निकालना चाहते ह।ंै चर्चा हो रही थी नाम की।

नयी उर्जा, नयी सोच से सींचा गया ‘हिंदी’ का पौधा...
कल्पना लालजी ने हिदं ी सप्ताह अवसर पर ससं ्थान की निदशे िका,
हिदं ी सप्ताह का शभु ारम्भ इस बार महात्मा गाँधी संस्थान के का उद्घाटन करते हुए, डॉ. श्रीमति विदोत्मा कंू जल ने
एक अनोखे ढंग से हुआ। गलु दस्ता सबु ्रमण्यम् भारती सभागार मंे 7 ‘हिदं ी’ के पौधे को पानी दिया। गणशे वदं ना से अपना वक्तव्य
भटें करने के बदले, हिदं ी विभाग ने सितम्बर को हिदं ी उत्सव का उद्घाटन शरु ू किया। उन्होंने छात्रों को
विशिष्ठ अतिथियों के हाथों ‘हिदं ी’ हुआ। संस्थान की निदशे िका, डॉ. इस दौरान हिदं ी विभागाध्यक्ष, प्रोत्साहित किया और हिदं ी
के पौधेकोसींचनेकीपहलशरु ूकी। श्रीमति विदोत्मा कंू जल और विशिष्ठ श्री गलु शन सखु लाल ने कहा कि सप्ताह के आयोजन की बधाई भी
अतिथि व हिदं ी लेखिका श्रीमति हिदं ी एक पर्ायवरण प्रिय भाषा हैऔर दी। प्रथम गतिविधि के अतं र्गत
साहित्य में प्रकृ ति और पर्ायवरण स्वरचित कविता पठन प्रतियोगिता
का विशिष्ठ उल्लेख हुआ ह।ै इसी का आयोजन हुआ। हिदं ी विभाग
दिशा मंे विभाग द्वारा अतिथियों तथा अन्य विभागों के प्राध्यापक
को गमले का पौधा सींचने का गण ने अपनी उपस्थिति दी। मचं
प्रयास आरम्भ हुआ जिससे सचं ालन डॉ. कृ ष्ण कु मार झा तथा
अतिथियों का आर्शीर्वाद भी मिले सशु ्री अजं लि चितं ामणि ने किया।
और संस्थान की शोभा भी बढ़े।

मैदान मंे उतरे 40 कलम के सिपाही...

हिदं ी सप्ताह के प्रथम गतिविधि के अतं र्गत एसोसिएट प्रोफ़े सर डॉ. राजरानी गोबिन और डॉ. गलु शन ने सहृदय सबका स्वागत किया और
स्वरचित कविता पठन प्रतियोगिता में ससं ्थान हमे राज संदु र रहे जिन्होंने प्रस्तुतिकरण, विषय- छात्रों को सभी गतिविधियों में भाग लेने के
के 40 छात्रों ने अपनी प्रतिभागिता दर्ज वस्ुत एवं मौलिकता के आधार पर प्रतिभागियों लिए प्रोत्साहित किया। महात्मा गाँधी संस्थान
करायी। पिछले वर्ष की तलु ना मंे यह सखं ्या को आकँ ा। प्रतियोगिता के विजेता बने टी.डी. की निदशे िका डॉ. श्रीमति कंू जल ने भी छात्रों
दगु नु ी हुई ह।ै इनमंे से बी.ए., एम.ए., पी.जी. पी के श्रवीन शर्मा बेनिदीन। द्वितीय परु स्कार के उत्साह-वर्धन के लिए दो शब्द कह।े
सी.ई.और टी.डी.पी के छात्र सम्मिलित ह।ंै बी.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा सशु ्री सोनम सरू ूप
एवं ततृ ीय परु स्कार बी.ए. द्वितीय वर्ष के ही छात्र सबके लिए खुला मंच...
इस बार भी कविताओं की विविधता बनी रही। राजशे ्वर सीतोहल अवसर पर हिदं ी विभाग से डॉ. विनय गदु ारी,
‘हिदं ी’, ‘याद’ंे , ‘प्यार’, ‘फे सबकु ’, ‘पर्ायवरण’, को प्राप्त हुआ। डॉ. कृ ष्ण कु मार कु मार झा, श्री गलु शन
‘दोस्ती’, ‘बेटी हुई पराई’, ‘बचपन की याद’ें आदि प्रतियोगिता का सखु लाल ने अपनी अपनी कविताएँ सनु ाई।
विषयों पर कविताएँ प्रस्तुत की गयी। कई रचनाएं आयोजन ससं ्थान डॉ. अलका धनपत ने राजनीती पर कु छ हास्य-
नारी संबंधित रहीं, कई आधनु िक परिवेश को के सबु ्रमण्यम् व्यंग्यात्मक कविताएँ सनु ाई। परिणाम घोषित
ध्यान मंे रखते लिखी गयी तो कई कृ तियों ने यादों भारती सभागार होने से परू ्व, श्रीमति कल्पना लालजी, डॉ.
के पिटारे खोल दिए। प्रतियोगिता के निर्णायक मंे हुआ जिसके गोबिन और डॉ. संदु र ने कविताएँ प्रस्तुत की।
मडं ल मंे हिदं ी लेखिका श्रीमति कल्पना लालजी, दौरान हिदं ी सजृ नात्मक लेखन विभाग की अध्यक्षा ने
विभागाध्यक्ष श्री छात्रों की कविताओं को सराहा और कहा
कि रिमझिम पत्रिका की आगामी विशषे ांक
मंे प्रतिभागियों की कविताएँ छापी जाएगं ी।
मचं सचं ालक और प्रतियोगिता आयोजक
डॉ कृ ष्ण कु मार झा और सशु ्री अजं लि
चितं ामणि रह।े

बचपन के सुनहरे पल विजते ा की प्रतिक्रिया

बचपन में बस थी एक ही ख़्वाहिश मरे ा सपना साकार हो गया। मझु े बहुत ख़शु ी
हम बड़े कब होंगे, हुई है कि मंै कविता वाचन प्रतियोगिता में
जब जवानी आ गई, प्रथम आया हूँ । पहली बार के लिए मनैं े इस
तो याद आते ह,ैं प्रतियोगिता मंे भाग लिया ह।ै सभी प्रतिभागियों
बचपन के वो दिन,
की कविताएँ एक से बढ़कर एक थीं। सच कहूँ
वो बेफिक्र होकर गली गली घमू ना, तो सभी को सनु कर, मंै डर गया था, भगवान का
वो दोस्तों के साथ मस्ती करना । नाम लेकर मनैं े अपनी कविता को पढ़ डाली ।

कितने सनु हरे थे वो पल, हिदं ी सप्ताह के आयोजकों के प्रति मैं आभार
न मसु ्कु राने की कोई वजह थी, प्रकट करना चाहता हूँ कि उन्होंने एक ऐसी
न था हसँ ने का कोई बहाना, प्रतियोगिता का आयोजन किया जहाँ
बस खशु रहना जानते थे हम नवजवानों को अपने विचारों एवं भावों को दिया । रात के 11 बजे उनको फ़ोन करके
अभिव्यक्त करने का अवसर मिला सकता उनको उठाता था ताकि वे मरे ी कविता
लौटा दो मझु े अपना वो बचपन, है । मंै अपने परिवार तथा उन दोस्तों को को सनु ें और मझु को फीडबाक दे सकंे ।
क्यों कि जवानी मंे तो है आज़ादी, -श्रवीन शर्मा बेनीदिन
धन्यवाद कहना चाहता हूँ जिन्होंने मरे ा साथ
लेकिन शाम है बीत जाती,
लबों पे नहीं आती है हसँ ी, कु छ विशेष टिप्णियाँ...
बचपन मंे थे हमारे कु छ दोस्त,
कविता वाचन प्रतियोगिता के परिणाम
जो थे हमारी जान, घोषित होने से परू ण् श्रीमति कल्पना
वे ही अब हो गए, लालजी तथा डॉ. संदु र ने छात्रों के
हमारे सखु दखु से अजं ान, प्रयास पर अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त की।
वादा था हमारा,
सदा रहगंे े एक दसू रे का सहारा, श्रीमति कल्पना लालजी ने प्रतिभागियों डॉ. हमे राज संदु र ने कहना है कि कविताएँ
कि कविताओं को सराहते हुए कहा बहुत अच्छी रही परन्तु अभिव्यक्ति में कमी
लेकिन ज़िंदगी की भाग दौड़ म,ंे कि शरु ू शरु ू में कविताएँ हल्का- रह गयी। कविता पढ़ते वक़्त ऑय कांटेक्ट
बस साथ चलना भलू गए है हम, फु ल्का होती है पर समय के साथ सचु ारू भी अनिवार्य ह।ै एक कु शल वक्ता को भाषा
लेखन से रचनाएं प्रौढ़ होती जाएगं ी। पर अधिकार होनी चाहिए। उसमें अगं
बिछड़ गए हम,बिखर गए , संचालन और बोलते समय वो शब्द और
मानो मोती बिखार रहे हो, उसके हाव-भाव एक होने चाहिए। उसको
इन मोतियों को जडु ़ने के प्रयास म,ंे ओजस्वी स्वर में भी बोलना चाहिए जहाँ
रात से कब हो जाती है सबु ह, करुण में वहाँ करुण स्वर की परू ी अभिव्यक्ति
करनी चाहिए तब जाकर वो एक कु शल
पता ही नहीं चलता, कवि बन सकता ह।ै भाषा पर अधिकार
और शदु ्ध उच्चारण भी होना चाहिए।
लेकिन ऐ दोस्तो,
रहगे ा हमशे ा इतं ज़ार,
कि कब बचपन के वो सनु हरे पल,
आएगं े जीवन मंे वापस,

और एक बार ।
-श्रवीन शर्मा बेनीदिन

वाकपटुता की चनु ौती पर खड़े हुए विद्यार्थी...

हिदं ी सप्ताह के दसु रे चरण के अतं रतग् विद्यार्थियों विशिष्ठ अतिथि विश्व हिदं ी सचिवालय के
को वाकपटुता की कसौटी पर रखा गया। एक दिन महासचिव डॉ. विनोद कु मार मिश्र ने प्रथम 3
परू ्व ही आयोजकों द्वारा पर्चियों में लिखे विषय प्रतिभागियों का चयन किया जिससे प्रतियोगिता

चनु कर छात्रों को तैयारी के लिए 24 घटं े मिले। का शभु ारम्भ हुआ। प्रतिभागियों में बी.ए.,
एम.ए., टी.डी.पी, और पी.जी.सी.ई. के छात्र रह।े

‘मैं कै लेंडर’, ‘अगर मंै मॉरीशस की शिक्षा मतं ्री प्रथम विजेता बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्रा रिया

होती’, ‘मरे ी प्रिय कहानी’, ‘मरे े प्राइमरी के 3 मिनट रहा। कु छ छात्रों के अनभु वों ने खबु गोपोल बनी जिसका शीर्षक रहा ‘फू ल तोड़े या
दिन’, ‘वह डांट जिसने मझु े कु छ सिखा दिया’, हसाया तो कईयों ने सोचने पर विवश भी किया। नहीं’। द्वितीय विजते ा बने ‘मॉरीशस का प्रधान मतं ्री
‘सोशल मीडिया और मरे ा संसार’, ‘फटा पोस्टर हूँ म’ंै शीर्षक पर बोलने वाले दिनेश सकू ा। ततृ ीय
निकला मरे ा हीरो’ आदि विषयों पर छात्रों प्रतियोगिता का आयोजन 8 सितम्बर को विजेता ततृ ीय वर्ष की छात्रा हूलाश इश्वरी रही।
ने अपनी वाकपटुता दर्शाई। निर्धारित समय सबु ्रमण्यम् भारती सभागार में हुआ। मचं इसके अतिरिक्त प्रेरणा संध्या, याश्ना जोवता और
संचालक तथा आयोजक डॉ. अलका धनपत शिक्षा धनपत को प्रोत्साहन परु स्कार प्राप्त हुआ।
और श्री अरविन्द बिसेसर ने सबका स्वागत करते

हुए प्रतियोगिता के नियमों से परिचित कराया।
निर्णायकमडं लमंेशिक्षामतं ्रालयके एडमिनिस्ट्रेटर
श्री निरंजन बीगन, आईसीसीआर चये र डॉ. उमशे
सिंह, और हिदं ी प्राध्यापक, डॉ. विनय गदु ारी रह।े

पूर्व छात्रों ने साँझा किए साक्षात्कार
कु छ अनभु व, कु छ विचार ... श्री निरं जन बीगन

मरे ा पहला संदशे यह होगा कि हिन्दी को के वल
पढ़ाई के बाद शिक्षक कि नौकरी को एक व्यवसाय, प्राप्ति या जीविका प्राप्ति के लिए
ही प्राथमिकता दते े है पर वे हिदं ी की उसे अलग नहीं होना चाहिए या जोड़ना नहीं
सवे ा अन्य माध्यमों से भी कर सकते ह।ै चाहिए। मंै समझता हूँ कि अगर व्यक्ति हृदय
से इस भाषा से जड़ु ेगा तो नौकरी की बात तो
श्री निरंजन बीगन ने भी विद्यार्थियों अलग लेकिन जो कु छ भी उसे प्राप्त होगा
का दिशा निर्शदे किया। उन्होंने ने सभं वतः वो अपने आप मंे अमलू ्य ह।ै साहित्य से
बताया कि ससं ्थान से उनका परु ाना सागर में गोटा लगाने का अवसर, साहित्यकारों
रिश्ता है क्योंकि बार बार वे पढ़ाई से परिचित होना, न अन्य कृ तियों के बारे में
आशवु ाक प्रतियोगिता के अतं िम चरण में करने के लक्ष्य से ससं ्थान से जड़ु े रहे जान्ने का, सभी सवु िधाएं व्यक्ति को प्राप्त ह।ै
ससं ्थान के परू ्व छात्र श्री रितेश महाबीर तथा श्री ह।ै उन्होंने अपनी सफलता का श्यरे हिदं ी और अन्यथा हम के वल दरू के दर्शक ही बने रहगें ।े
निरंजन बीगन ने वर्मत् ान छात्रों से अपने अनभु व महात्मा गाँधी संस्थान को दिया। उन्होंने ने यह भी
बांटे। रितेश महाबीर ने बताया कि हिदं ी सप्ताह ही बताया कि अक्सर छात्रों में सम्प्रेषण कौशल की अनभु व अच्छा रहा, लेकिन एक बात मझु े
वह मचं है जहाँ उन्होंने अपनी भाषण कौशल को कमी होती है जिससे वे साक्षात्कार मंे असफल संके त करना था वो मंै भलू गया- इस गतिविधि
सदु ृढ़ बनाया। उन्होंने छात्रों से इस मचं का भरपरू ्ण हो जाते ह।ै सम्प्रेषण कौशल कि महत्ता को को अगर अधिक न्याय करना चाहते हैं
प्रयोग करने का सन्देश दिया क्योंकि यहाँ से ही दर्शाते उन्होंने ने कहा कि डिग्री होने के साथ साथ तो शायद अगली बार कम कागज़, ज़्यादा
उनके उज्जवल भविष्य की शरु ुआत होती ह।ै छात्रों को अन्य कौशल विकसित करना चाहिए। बातचीत होना चाहिए। तब जाकर के वक्ता-
उन्होंने यह भी बताया कि ज़्यादातर छात्र हिदं ी की
श्रोता के बीच में तारतम्य स्थापित होगा।

दनु िया बदलने चले ये कलाकार... प्रतिक्रियाएँ
हिदं ी सप्ताह २०१७ के नकु ्कड़ नाटक के
समस्त प्रतिभागियों को मरे ा साधवु ाद। ‘हमंे
इससे क्या’ प्रस्तुत करने वाली टोली विजते ा

घोषित हुई इसलिए उनको विशषे बधाई। इस

नाटक की विषयवस्तु मौलिक थी, साथ-ही-
साथ अभिनेताओं ने इसमंे सजृ नात्मकता का
भी प्रदरनश् किया। इसमंे उन्होंने समाज मंे व्याप्त

ज्वलन्त समस्याओं पर चते ना लाना चाहा। मझु े
लगता है कि छात्रों को नाटक–लेखन, मचं नादि
को गभं ीरता से लेना होगा क्योंकि यह भविष्य में
जीविकोपार्जन का साधन हो सकता ह।ै ध्यातव्य

हिदं ी विभाग के कलाकार, दनु िया बदलने के “हमंे इससे क्या”, “नारी शक्ति”, “एक है कि सशक्त अभिव्यक्ति के लिए, हिदं ी भाषा पर
सपने सजाये हिदं ी सप्ताह की तीसरी गतिविधि विक्लांग की पीड़ा” और “भदे भाव क्यों करते छात्रों की अच्छी पकड़ होनी चाहिए। इस ध्यय
“नकु ्कड़ नाटक” के लिए, भारतीय अध्ययन हो” विषयों पर आधारित नकु ्कड़ नाटकों में की प्राप्ति हते ु उनको अधिक महे नत करनी होगी।
सकं ाय के प्रांगन में उतरे । 11 सिप्तम्बर को अभिनय के स्तर पर मजं े हुए कलाकार सामने अतएव सभी को मरे ी हार्दिक शभु कामनाए।ँ
आयोजित इस प्रतियोगिता की मखु ्य अतिथि आए। जहाँ श्षरे ्ट अभिनेता व् अभनेत्री का के वल नायेक
परु स्कार “हमें इससे क्या” नाटक के दिनेश
सकु ा और सोनम सरु ूप को प्राप्त हुआ, वही ँ हिदं ी विभाग चाहता है छात्र हिदं ी सप्ताह के सभी
“नारी शक्ति” नाटक से , मोनिश्ता रामनाथ और गतिविधियों मंे भाग ले चाहे उनकी जीत हो या
जोशीता घरभरन सहायक अभिनेता घोषित हुए। नहीं l गतिविधियों मंे भाग लेने से उनका आत्मा
विश्वास बढेगा तथा साथ ही साथ सम्प्रेषण

कौशल मज़बतू होगा l प्रतियोगीतायों मंे भाग
लेने से मौलिक प्रतिभा उभरकर सामने आती

भारतीय दतू ावास के द्वितीय सचिव डॉ. श्रीमती है l हिदं ी पढने से उनका आत्मविश्वास तथा
नतू न पांडेय रही, जिन्होंने हिदं ी गमले को सींचा सजृ नात्मक प्रतिभा सक्षम बनता हlै हिदं ी सप्ताह
। इस वर्ष के विजेताओं में बी. ए. द्वितीय वर्ष महात्मा गाँधी ससं ्थान के छात्रों तथा प्राध्यापकों
के छात्रों ने बाज़ी मार लीं और प्रथम दो के लिए हिदं ी उत्सव बनता है जो अपने आप मंे
विशिष्ट उपलब्धि है l छात्रों को महात्मा गाँधी
परु स्कार कक्षा की दो टीमों को गई । बी.ए.
ततृ ीय वर्ष की टीम तीसरे स्थान पर आई । संस्थान के इस हिदं ी सप्ताह में ऐसा सनु हरा मौका
मिला है जो कहीं और नहीं मिल सकता है

निर्णायक मडं ल के सदस्यों मंे वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ अलका धनपत
डॉ. अल्का धनपत, संस्कृत विभाग के
विभागाध्यक्ष श्री के वल नायेक और विशषे मचं पर आकर अभिनय करना अपने आप में बड़ी
सदस्य श्री आशीष बिसनु दयाल रहे । संसथान की बात है l बिना कोई साधन के नाटक को इतनी
महानिदशे िका श्रीमती सरू ्यकान्ति गयान ने हर वर्ष तनमयता से प्रस्तुत करना बहुत कठिन है l आवाज़
की तरह इस वर्ष भी, छात्रों के उत्साह वर्धन के लिए से ही भावों कि अभिवक्ति होती है l सभी छात्र
, अपने उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई । प्रशसं ा के योग्य है और सभी को मैं बधाई दते ा हूँ l
आशीष बिसनू ्दयल

गंजू उठा प्रांगन, झमू उठे लोग...

हिदं ी सप्ताह के अतं िम गतिविधि के अतं र्गत मखु ्य अतिथि श्री निखिल शिबनौथ ने ‘आ भी बीच बीच में प्राध्यापकों ने भी गाना गाया।
अतं ्याक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन जा’ गाने से अतं ्याक्षरी का श्री गणशे किया। प्रतियोगिता के संचालक डॉ. विनय
संस्थान के प्रांगन मंे आयोजित हुआ। प्रतियोगिता मंे इस बार शब्द खले राउंड , गदु ारी और श्री अरविन्द बिसेसर रह।े
संस्थान की निदशे िका डॉ. श्रीमति कंु जल, धनु राउंड, अनवु ाद राउंड, क्विज राउंड, डम्ब
डॉ. उमशे सिंह तथा श्रीमति श्रुति रामफल ने शराद, रीमिक्स राउंड आदि मजेदार राउंड हुए। विजेता बनी बी.ए. द्वितीय वर्ष के छात्राएँ
गमले के पौधे सींचकर अतं ्याक्षरी प्रतियोगिता मॉरीशस की लोक गीत ‘गीत गवाई’ को आबाना येश्ना, डोमी आशं ी, सीराज वदे िता।
की औपचारिक उद्घाटन किया। डॉ. कंु जल, यनू ेस्को द्वारा अमरू ्त सांस्कृ तिक विरासत के रूप द्वितीय परु स्कार टी.डी.पी तथा तृतीय
हिदं ी विभागाध्यक्ष श्री सखु लाल और मंे मान्यता प्राप्त करने के उपलक्ष्य में विभाग ने परु स्कार भारतीय दर्शन के छात्रों ने जीता
डॉ. चमे ने ने प्रोत्साहन के दो शब्द कह।े प्रतियोगिता मंे लोक गीत राउंड शामिल किया ।

हिंदी योद्धाओं के साथ अन्य भी आए मदै ान मंे... इतिहास से जुड़े...

महात्मा गाँधी संस्थान मंे हिदं ी सप्ताह के जमा करने की अतं िम तिथि 11 सितम्बर रहा। मॉरीशस में हिदं ी भाषा का प्रचार एवं विकास
दौरान एक अन्य प्रतियोगिता आयोजित किया कु छ छात्रों ने अपने हाथों से पोस्टर बनाये तो कु छ पोस्टर प्रतियोगिता के लिए इस साल का विषय
गया; पोस्टर प्रतियोगिता। इस क्रम में जो विद्यार्थियों ने डिजिटल आर्ट्स का सहारा लिया। परू ्व वर्षों की भाँति भिन्न था। अगले वर,ष् अर्थात्
विषय निर्धारित किया गया वह ह;ै ‘मॉरीशस इस साल कई सनु ्दर-सनु ्दर एवं आकर्षित पोस्टर 2018 में हम मॉरीशस की स्वतंत्रता के पचासवीं
की स्वतंत्रता के 50 वरष् और हिदं ी भाषा।’ सामने आए जिन्हंे दखे कर निर्णायक मडं ली वर्ष मनाएगँ े। इसी को ध्यान में रखकर इस साल

आश्चर्य में पड़ गए। नकु ्कड़ नाटक के दिन चारों यह विषय निर्धारित किया गया। मॉरीशस को
इसमें 28 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इन ओर दिवारों पर प्रतिभागियों के पोस्टर लगाए गए। स्वतंत्रता दिलाने में हिदं ी भाषा का बड़ा योगदान
में से 17 हिदं ी के विद्यार्थी थे और 11 फाइन विजते ा बने प्रथम टी.डी.पी.की महादू सविता। रहा ह।ै प्रारंभ में भारतीय मलू के लोग परस्पर
आर्ट के छात्र थे। इस साल फाइन आर्ट के द्वितीय परु स्कार बी.ए. हिदं ी प्रथम वरष् भोजपरु ी में बोलते थे। मॉरीशस मंे बैठका भारतीय
छात्रों ने इस गतिविधि मंे भाग लेकर इस की जोवाता याश्ना को गया। टी.डी.पी गिरमिटिया मजदरू ों का एक कंे द्र बना। बैठकाओं
प्रतियोगिता में चार चाँद लगा दिया। पोस्टर से धन्नू शषे ना सकु न और फाइन आर्ट्स से में हिदं ी सिखाई जाने लगी। यदि बैठकाओं की
बनाने का न्यूतम आकर A3 रहा। पोस्टर को नीतषु ा को प्रोसहन परु स्कार प्राप्त हुआ । स्थापना न हुई होती तो हिदं ी भाषा का उचित

प्रचार नहीं हो पाता। हिदं ी की प्रचार प्रसार
में दशे के कोने कोने से योद्धा सामने आये ।
आज मॉरीशस की जनता हिदं ी भाषा
के सामने नतमस्तक है और इसके प्रचार-
प्रसार में सक्रिय रूप से योगदान दते े ह।ैं

फू ल तोड़े या नहीं श्रुतलखे प्रतियोगिता

फू ल, नाम से ही पवित्रता झलकती ह,ै वास्तव क्योंकि वे भी तो जीव-जतं ु ही ह।ैं सनु ्दरता ‘सनु ना एक कला ह,ै और हुबहू वही बात सनु कर
में प्रकृ ति की एक ऐसी सशु ोभित दने है जिसपर बढ़ाने के लिए तथा भक्ति दिखाने के लिए उस बात को लिख पाना उससे भी बड़ी कला
मानव जाति गर्व करता ह।ै फू ल अत्यंत ही सनु ्दर नकली फू ल का प्रयोग भी किया जा सकता ह।ै है ।’ हिदं ी सप्ताह 2017 के उपलक्ष्य में हिदं ी
और कोमल स्वभाव के होते ह।ैं वे मिश्रित रंगों मंे भगवान भी स्वयं नहीं चाहगें े कि उनके सम्मान विभाग ने अपने स्तानक एवं स्नातकोत्तर छात्रों
दिखाई दते े ह,ंै आखँ ों के लिए भी मनमोहक सिद्ध के लिए फू लों की जीवन लीला समाप्त हो जाए। के लिए श्तुर लेख प्रतियोगिता का आयोजन
होते ह,ैं अतएव मनषु ्य को अपनी ओर आकर्षित इसी कारण आजकल फू लों के जगह गलु ाब किया। इस प्रतियोगिता मंे लगभग 160 छात्रों ने
करते ह।ंै चमले ी, गलु ाब, गंेदा, सरू जमखु ी आदि जल एवं गगं ा जल का उपयोग किया जाता ह।ै सक्रीय रूप से भाग लिया। स्तानक स्तर पर निम्न
हमारे आगं न की शोभा बढ़ाने मंे सहयोग दते े ह।ैं फू ल तो डाली पर ही खिले हुए अच्छे लगते ह।ैं उन्हें छात्राओं की जीत हुई : प्रथम स्थान: रामलगन
फू ल क्यों तोड़े जाते ह?ंै अवश्य इसके अनेक तोड़कर रखने से हम वक्त से पहले ही उन्हंे मरु झाने प्रीति (टी.डी.पी.), द्वितीय स्थान: सकु ाली जया
कारण होंगे।इसमंे से एक पजू ा आदि के लिए पर मजबरू कर दते े ह।ंै एक बार किसी ने फू ल से दवे ी (बी.ए. ततृ ीय वर)्ष एवं ततृ ीय स्थान: दोमा
ह,ंै ये भगवान के चरणों पर अर्पित किये जाते पछू ा- दर्द तो होता है परन्तु मैं उस समय अपना दर्द हशं ा (बी.ए. ततृ ीय वर)ष् । स्नातकोत्तर स्तर पर
ह।ैं शादी, जन्मदिन तथा सगाई आदि मंे फू लों भलू जाता हू,ँ जब मरे े कारण कोई खशु हिता ह।ै आयोजित श्तुर लेख प्रतियोगिता में कै डू शरवानी
का प्रयोग किया जाता ह।ै कहते ह,ैं फू ल्प्यार ऐसे होते हैं फू लों का स्वभाव, निस्वार्थ।तो (पी.जी.सी.ई.) को प्रथम स्थान, धनपत शिक्षा
का प्रतिक होता ह।ै रूठों को मना लेता है यह फू लों तोड़े नहीं, फू ल खिलाओ। (एम.ए.) को द्वितीय स्थान एवं चदे ी लक्ष्मी
फू ल,दिल को भी छू लेता है यह छोटा सा फू ल। (एम.ए.) को ततृ ीय स्थान प्राप्त हुआ ह।ै ‘यवु ाज़’
रिया गोपोल टीम की ओर से सभी विजते ाओं को बधाई।
लेकिन क्या तोड़े जाने पर फू लों को दर्द नहीं बी.ए. प्रथम वरष्
होता? इस बात पर गौर करना आवश्यक है

यौवन आया, यौवन आया

झमू उठे तमु , किलकारियाँ भरते
उत्साह से भावों को अभिव्यक्त करते
बतियाते, बोलते, गाते, अभिनय करते
हाँ तेरा यौवन आया यौवन आया

आभार नई चते ना नई उमगं भरते
महात्मा गाँधी संस्थान नए सनु हरे सपनों को सजाते
झमू झमू बरसात से बरसते
संपादकीय टीम हाँ तेरा यौवन आया, यौवन आया
खशु बू चूरामन, करिश्मा रामझीतन नारायण,
मीताषा मोहन, नंदिनी झूमक, प्रिया जीबोधन, पूजा नमे नित नए रूप धारण करते
अपनी अस्मिताओं की खोज करते
फोटो आभार
राजशे ्वर सीतोहल बढ़ त,ू चल त,ू कदम बढ़ाते

Printed by: Mam Printing यहाँ से निकल तू उल्लास भर दे
Tel : 2481471 हर घर में हिदं ी स्थापित कर दे
हर मौसम को हिन्दीमय बना दे
email: [email protected] हिदं ी सप्ताह तेरा यौवन आया, यौवन आया


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