1857 क ां त : कारण एवं नते ा
ां त क कृ त
1857 क ां त क शु आत सपाह व ोह से हु ईथी ले कन अतं तः इसने लोग को भी जोड़ लया।
वी. डी. सावरकर ने 1857 क ां त को थम वतं ता सं ाम क सं ा द थी।
डॉ. एस. एन. सेन ने इसका वणन “ऐसी लड़ाई जो धम के लए शु हु ईथी ले कन वतं ता के यु पर जाकर
समा त हु ई" के प म कया है।
डॉ. आर. सी. मजूमदार ने इसे न तो थम, न ह रा य और न ह वतं ता का यु माना है।
कु छ टश इ तहासकार के अनुसार, यह मा एक कसान सपाह बगावत था।
ां त के मह वपूण त य
मेरठ घटना 19वीं बैरकपुर ने टव इ टर ने नई शा मल क गई एनफ ड राइफल - उपयोग
करने से मना कर दया, बगावत फरवर 1857 म फै ल गयी, जो क माच 1857 म भंग हो गयी।
34वीं ने टव इ फटर के एक युवा सपाह ने बैरकपुर म अपनी यू नट के साज ट मेजर पर
गोल चला द ।
7वीं अवध रेजीमट को भी भंग कर दया गया।
मेरठ म 10 मई को व ोह हो गया, व ो हय ने अपने बंद सा थय को आजाद कया, उनके
अ धका रय को मार दया और सूया त के बाद द ल कू च कर गए।
द ल - महान ां त का के
ां त के नेता :
द ल म ां त के तीका मक नते ा मुगल शासक बहादरु शाह जफ़र थ,े ले कन वा त वक शि त सेनाप त
ब त खां के हाथ म थी।
कानपुर म नाना साहेब, ता या टोपे, अिजमु लाह खान के नते ृ व म व ोह हु आ।सर हु ग ह लर टेशन
कनाडर थ,े इ ह ने समपण कया। नाना साहेब ने खुद को पेशवा और बहादरु शाह को भारत का स ाट
घो षत कया।
लखनऊ म बेगम हजरत महल ने मोचा संभाला और अपने पु बरिजस का दर को नबाव घो षत कर दया।
अं ेज नाग रक हेनर लारस क ह या कर द गई। शेष यूरोपीय नाग रक को नए कमांडर-इन-चीफ़ सर
को लन कै पबेल ने सुर त नकाला।
बरेल म खान बहादरु , बहार म कं ु वर सहं , जगद शपुर के जमींदार और फै जाबाद के मौलवी अहमदु लाह ने
अपने े म ां त का नेतृ व कया।
रानी ल मीबाई, जो क ां त क सबसे असाधारण नेता थीं, को गवनर लॉड डलहौडी के यगपत स ांत के
कारण झासं ी से बेदखल कर दया गया था, य क जनरल ने उनके द तक पु को सहं ासन का
उ तरा धकार वीकारने से मना कर दया था।
भारतीय रा य आदं ोलन
भारतीय रा य कां ेस का उदय (1885)
टश सरकार से सेवा नवृ त स वल सेवक एलन ऑ टे वयन यूम ने अ खल भारतीय संगठन
बनाने के लए पहल क ।
प रणाम व प भारतीय रा य कां ेस क थापना हु ईऔर इसका पहला स 1885 म बॉ बे म
आयोिजत कया गया था।
भारतीय रा य आंदोलन के इ तहास का अ ययन तीन मह वपूण चरण म कया जा सकता है
नरमपंथी रा वाद चरण (1885-1905) जब कां ेस टश शासन के त वफादार रह ।
वष 1906 - 1916 वदेशी आंदोलन, सै य रा वाद का उदय और होम ल आंदोलन का गवाह
रहा। टश क दमनकार नी तय ने कां ेस के भीतर ब पन चं पाल, बाल गंगाधर तलक और
लाला लजपत राय (लाल, बाल, पाल) समेत अर बदं ो घोष जसै े चरमपं थय को ज म दया।
1917 से 1947 क अव ध को गाधं ीवाद काल के तौर पर जाना जाता है।
भारतीय रा य कां ेस के मह वपणू स
वष थान अय
1885 बा बे ड यू. सी. बनज
1886 कलक ता दादाभाई नरौजी
1893 लाहौर
1906 कलक ता -
1887 म ास
-
1888 इलाहाबाद
1889 बा बे बद ीन तै यबजी ( थम मुि लम
1890 अय )
1895, 1902 कलक ता
पूना, अहमदाबाद जाज यूल ( थम अं ेज अ य )
सर व लयम वेडरबन
सर फरोज एस. मेहता
एस. एन. बनज
1905 बनारस जी. के . गोखले
1907, 1908 सूरत, म ास रास बहार घोष
एम. एम. मालवीय
1909 लाहौर ए. सी. मजुमदार (कां ेस का
1916 लखनऊ पुन मलन ( र-यू नयन))
एनी बेसट ( थम म हला अ य )
1917 कलक ता मोतीलाल नेह
1919 अमतृ सर लाला लाजपत राय
1920 कलक ता ( वशेष स ) सी. आर. दास
1921, 1922 अहमदाबाद, गया अ दलु कलाम आजाद (युवा
1923 द ल ( वशेष स )
अय )
1924 बेलगाम एम. के . गाधँ ी
1925 कानपु र सर जनी नायडू ( थम भारतीय
म हला अ य )
1928 कलक ता मोतीलाल नेह ( थम अ खल
भारतीय युवा कां ेस का गठन )
1929 लाहौर जे. एल. नहे (पूण वराज
संक प पा रत कया गया)
1931 कराची व लभभाई पटेल (यहा,ं मौ लक
अ धकार और रा य आ थक
1932, 1933 द ल , कलक ता काय म पर संक प पा रत कया
1934 बा बे
1936 लखनऊ गया )
1937 फै जपूर (स तबं धत)
1938 ह रपूरा राजे साद
जे. एल. नेह
1939 पु र जे. एल. नहे (गावँ म थम
स)
एस. सी. बोस (जे.एल. नेह के
अधीन एक रा य योजनाब
यव था क गई)।
एस.सी. बॉस फर से नवा चत
ले कन गांधी जी के वरोध के
कारण उ ह इ तीफा देना पड़ा
(गांधीजी ने डॉ. प ाभी
1940 रामगढ़ सीताराम या का समथन कया)।
1946 मेरठ राज साद को उनक जगह
1948 जयपु र नयु त कया गया।
अ दलु कलाम आजाद
आचाय जे. बी. कृ पलानी
डॉ. प ाभी सीताराम या
नरमपथं ी रा वाद
रा य आदं ोलन के पहले चरण के दौरान अ णी यि त व : ए. ओ. हयूम, ड यू. सी. बनज , सुर नाथ बनज ,
दादाभाई नौरोजी, फरोज शाह मेहता, गोपालकृ ण गोखले, पं डत मदन मोहन मालवीय, बद ीन तै यबजी,
जि टस रनाडे और जी. सु म य अ यर थे।
सुरे नाथ बनज : को भारतीय बुक कहा जाता था। उ ह ने बंगाल वभाजन क ढ़ता से वरोध कया।
उ ह ने राजनी तक सुधार के लए भारतीय संघ ( 1876 ) क थापना क । उ ह ने इं डयन नेशनल
कॉ स ( 1883 ) का संयोजन कया था िजसका वलय सन ् 1886 म भारतीय रा य कां ेस
के साथ कया गया।
जी. सु म य अ यर ने म ास महाजन सभा के मा यम से रा वाद का चार कया। उ ह ने
हदं ू और वदेशी म न क भी थापना क ।
दादाभाई नरौजी को भारत के ांड ओ ड मैन के नाम से जाना जाता था। उ ह इं लड म भारत
के अनौपचा रक राजदतू के तौर पर वीकृ त कया जाता है। वह टश हाउस ऑफ कॉम स के
सद य बनने वाले पहले भारतीय थ।े
गोपाल कृ ण गोखले गांधी के राजनी तक गु माने जाते थ।े उ ह ने 1905 म सवट ऑफ इं डया
सोसाईट क थापना क िजसम भारतीय नाग रक को देश के लए कु बान होने का श ण
दया जाता था।