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परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र

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Published by gharchaabhyas, 2021-11-12 04:51:52

परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र

परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र

परिसीमा अधिनियम, 1963

(Limitation Act, 1963)

परिसीमा अधिनियम की िािा 5 के अन्तर्तग प्रार्िग ा-पत्र

(Application u/s 5, Limitation Act, 1963)

विलम्ब की माफी का प्रार्िग ा-पत्र सवििय दायि ककया जािा

(Application for Condonation of delay most respectfully showeth)

न्यायालय.........
FA.O. No. ............ सन.् .......
(मलू वाद स०ं ............ सन ् ............)

अ०ब० स० ............ बिाम वादी/अपीलार्थी
स०द०फ० ............ प्रतिवादी/प्रत्यर्थी

श्रीमान जी,
सववनय तनम्न प्रकार तनवदे न ककया जािा है :

1. यह कक उपरोक्ि वाद मंे विमत ान अपील ददनाकं ............ को दायर की गई र्थी परन्िु ....... पर आपवि होने
के कारण वावपस कर दी गई र्थी।

2. यह कक पजं ीयन कायालत य से प्राप्ि करने के पश्चाि जो कागजाि आपवि लगाकर वावपस व ककसी अन्य
पत्रावली के कागजों में ममश्रश्रि हो गये र्थे और इसी कारण से समय के अन्दर दायर नहीं ककये जा सके र्थे।

3. .यह की याची के अधिवक्ता को उपरोक्त मिश्रण के बारे िैं दिनाांक.........को पता चला जबकक अन्य के स
की पत्रावली जो की दिनाकंा .........को ननयत था. सनु वाई के मलए ननकाली गई।उसके तुरांत बाि अपील योजजत
कर िी गई है।

4. यह कक अपील के पनु ः िायर करने िें हुई िेरी इराितन न होकर वास्तववक है जो उपरोक्त िरा 2 िें
उजललखित कारण से हुई थी. अत्यधिक / अस्वाभाववक ववलम्ब नहीां हे.क्षिा योग्य हे.।

इसीमलए अत्यांत सववनय पूवकव यह प्राथवना की जाती हे की अपील के पुनः िायर करने िें हुई िेरी को िाफ़

ककया जाए।

स्थान....... अधिवक्ता...........
दिनांाक........ ओर से प्राथी/अपिलाथी........

शपर्पत्र

(Affidavit)

न्यायालय............
F.A.O.No. ............ सन ् ............
(वाद स०ं ............ सन ् .............)

अ०ब०स० ............ बिाम वादी/अपीलार्थी
स०द० फ० ............ प्रतिवादी/प्रत्यर्थी

मैं कक ............ पतु ्र श्री ............. आयु ............ वर्त कलकत शपर्थ पवू कत तनम्न प्रकार कर्थन करिा हूँ।

1. यह कक मैं प्रार्थी/अपीलार्थी अश्रिवक्िा का मलवपक हूँ।
2. यह कक ववलम्ब के सलं ग्न प्रार्थनत ा पत्र में सत्य और सटी िथ्य ददये गये ह।ंै

.........शपर्कताग

सत्यापि

सत्यावपि -स्र्थान ............ ददन ............ ददनाकं ............ को प्रमाणणि ककया जािा है कक उपरोक्ि शपर्थपत्र के
प्रस्िर 1 व 2 सत्य और सही हंै । मरे े व्यक्क्िगि ज्ञान में कु छ तछपाया नहीं गया है।

...........(शपर्कताग)


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