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Published by sangam.singapore, 2018-09-30 02:00:19

Singapore Sangam July to September 2018

Singapore Sangam July to September 2018

ISSN: 25917773

त्रमै ासिक ह दिं ी पत्रत्रका

जलु ाई-सितम्बर २०१८ • अकिं ३

सिगिं ापुर िंगि म

▪ अिंक ३ ▪ जलु ाई-सितम्बर २०१८

सम्पादक:
डॉ िधंि ्या सिंि
उप सम्पादक:
शादूलद ा झा नोगजा
तकनीकी सहयोग:

अनमोल सििं
आवरण चित्र:
अजंि सल त्रत्रपाठी

सपं कक :
ईमेल: [email protected]
नशे नल यनद नवसिटू ी ऑफ़ सिगिं ापरु ,
िटें र फॉर लगंै ्वज़े स्टडीज़
फ़ै कल्टी ऑफ़ आर्टिू एडिं िोशल िाइिंि ेज़
ब्लॉक AS4,#03-18
9 आर्टूि सलकंि , सिगंि ापरु 117570

प्रकासशत रचनाओंि के ववचार लेखकों के अपने ैं| आवश्यक न ींि कक पत्रत्रका के ििंपादक या प्रबधंि न िदस्य इििे ि मत ों।

िवाूधधकार िुरक्षित

© Singaporesangam

जलु ाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगिं ापुर िंिगम ◦ www.singaporesangam.com ◦ 1

य धचत्र और इिमें भरे रंिग कु छ ख़ाि प्रतीक ंै| आप इनके बारे मंे कु छ
सलख भेजजए और म उिे अगले अकिं में छापेंगे|

जुलाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगंि ापुर िगंि म ◦ www.singaporesangam.com ◦ 2

इि अिंक मंे

हहदं ी हदवस समीक्षा कला

5 अजंि सल त्रत्रपाठी

89

सामययकी झलककयााँ ररपोर्क

रमशे जोशी 16 आलोक समश्रा 17

झलककयााँ ररपोर्क

कु मार अरुणोदय 21

13 20

काव्य रस यादंे ववदेशी भाषी झलककयााँ व
ससगं ापरु भ्रमण
िंजि य कु मार िाधना पाठक के मखु से

सशक्षा 23 25 चने यी ची

व्यजं न 35 28 31

अनुराधा

33 सिघंि ल

त्योहार हहदं ी के वाहक हहदं ी के वाहक सेहत

अजस्मता राजा 39 ऋवि रायपाटी 42
पदनम चघु
38 प्रयतकियाएाँ 41 व्याकरण
43 44

जलु ाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगिं ापरु िगिं म ◦ www.singaporesangam.com ◦ 3

िम्पादकीय

सिगिं ापरु िगंि म का अगला अकंि प्रस्ततु करते ुए बे द िू का
अनभु व ो र ा ै| य पत्रत्रका सिगंि ापरु के भारतवसिं शयों की एक
िकिं्षिप्त झाकँा ी ै जो य ाँा ो र े छोटे-छोटे प्रयािों को हदखाने

का प्रयाि करती ै| सिगिं ापरु वासियों के िाथ ी ववश्व भर िे
समल र े प्रोत्िा न और प्यार के कारण ी य पत्रत्रका आगे बढ़

पा र ी ै| पत्रत्रका की शरु ुआत तो मनैं े अके ले ी की थी पर इि
बढ़ते कारवााँ में शादूलद ा नोगाजा जी उप िम्पादक के रूप में
शासमल ो गई ैं और उनका ि योग अवश्य ी इि पत्रत्रका को

लाभाजववत करेगा| सिगंि ापरु िगंि म उनका स्वागत करता ै|

इि बार य ााँ प ली बार ह दिं ी हदवि का आयोजन
िावजू ननक स्तर पर ुआ और बड़े ी गवू की बात ै कक इिमें भारतवंिसशयों के िाथ ी ववदेशी भावियों
की भागीदारी ज़ोरदार र ी जजिकी झाकाँ ी आप अवश्य देखंेगे| वपछले म ीने भारत और सिगंि ापरु दोनों देशों
ने अपना स्वतंति ्रता हदवि मनाया जजिे आप तक प ुाँचाने की कोसशश मने की ै| वपछले तीन म ीनों में

मने श्रीमान अटल त्रब ारी वाजपये ी जी, कवववर गोपाल दाि नीरज एविं श्री ववष्णु खरे जी जैिे ह दिं ी
हदग्गजों को खो हदया ै, सिगंि ापरु िंगि म पररवार अपनी श्रदधाजंि सल अवपतू करता ै| इि अकिं मंे एक ओर
रमशे जोशी जी का आलेख स्वतिंत्रता का ि ी अथू िमझाते ुए कई िवालों के उत्तर में स्वयिं ढदँाढने को
प्रोत्िाह त करता ै व ींि दिद री ओर मधबु नी की बानगी मंे हदखती ै| एक ववदेशी भािी का चाय के
वविय मंे ववशिे प्रिगंि तथा अवय ककशोर वगू की यादों और जानकाररयों को देखते ुए य अकिं आगे
बढ़ता ै| इि अकिं मंे सशिा िे िम्बधिं धत एक ववशिे जानकारी भी उपलब्ध कराई गई ै जो मंे परद ा
ववश्वाि ै कक कई लोगों के सलए लाभदायक र ेगी| व्यजंि न, िे त और सिगिं ापरु भ्रमण के ननयसमत स्तम्भ
तो आपकी प्रनतकियाओंि के इंितज़ार मंे उपजस्थत ंै ी|

इि अकिं का भी आवरण धचत्र अजिं सल त्रत्रपाठी जी की तसद लका का िौवदयू ै| य धचत्र सिगंि ापरु और भारत के
राष्रीय प्रतीकों का िगिं म ै| सिगंि ापरु का ‘मरलायन’ और भारत का ‘मोर’ एक िाथ अपनी उपजस्थनत िे दशाू र े ंै
कक भारत िे बा र आने पर भी भारत तो हदल में बिा ै ी लके कन सिगिं ापरु जो कमभू सद म बन गई ै उिकी छवव
भी हदल पर असमट ै और इन दोनों का िगंि म ी प्रगनत का िोपान ै| पाठकों िे भी आगे आने वाले अकिं ों के सलए
धचत्र, पंेहटग आहद आमतिं्रत्रत ैं| आपकी प्रनतकियाएाँ मारे सलए ब ुत ख़ाि ंै अत: आपकी प्रनतककयाओंि का इतिं ज़ार
तो र ेगा!

धवयवाद िह त

िधिं ्या सिंि

जुलाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगंि ापरु िगिं म ◦ www.singaporesangam.com ◦ 4

ह दंि ी हदवि

सिगिं ापरु में ह दंि ी हदवि

इि िाल सिगिं ापुर में ह दिं ी हदवि का वृ द रूप मंे भािा की ध्वनन दरद तक िनु ाई दे| बंदि दरवाज़ों वाले
आयोजन देखा जाए तो प ली बार ी ुआ| य ााँ के प्रांगि ण में आमंति ्रत्रत अनतधथ ी शोभा बढ़ा पाते ंै पर
ह दिं ी ववदयालयों आहद मंे भी १४ सितम्बर ह दिं ी इि खलु े प्रांिगण में आयोजन ने कववता पाठ िनु ने
हदवि को अनदेखा ी ककया जाता र ा ै| भारतीय या प्रश्नोत्तरी का जवाब देने के सलए कईयों को खींचि
उच्चायोग के कायालू य के अलावा इक्का-दकु ्का सलया| आयोजन में मखु ्य अनतधथ के रूप मंे भारत
व्यजक्तगत प्रयाि भले ी ुए ों पर औपचाररक रूप के उप उच्चायुक्त श्रीमान नननाद देशपािडं े जी
िे य प ला आयोजन था| देर आए दरु ुस्त आए उपजस्थत थे और उनके िाथ ी िंेटर फॉर लगंै ्वेज
वाली बात य ााँ भी सिदध ोती ै क्योंकक इि बार स्टडीज़, एन यद एि, की ननदेसशका नतनतमा
य िमारो य ाँा के नेशनल यदननवसिटू ी और िधु थवान, ि ायक ननदेसशका इज़मु ी वॉकर और पवद ू
भारतीय उच्चायोग ने समलकर मनाया| इिे ननदेशक श्री चान वाई मेंग उपजस्थत थे|
ववश्वववदयालय के प्रािंगण में मनाया गया ताकक ह दंि ी

जुलाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगिं ापरु िंिगम ◦ www.singaporesangam.com ◦ 5

ह दिं ी हदवि

य आयोजन इिसलए भी ख़ाि था क्योंकक इि
िमारो को िफल बनाने वाले लगभग िभी छात्र
ह दिं ी को ववदेशी भािा के रूप मंे िीख र े ंै| उनके
सलए देवनागरी सलवप का बड़ा म त्त्व ै| वे सिफ़ू
बोलने वाली न ीिं बजल्क सलखने-पढ़ने वाली भािा भी
िीखना चा ते ैं|

इि हदशा में िमारो मंे भी उनके छोटे-छोटे
प्रयाि हदखाई हदए जिै े आने-जाने वाले लोगों
की थेसलयों पर उनका नाम मे ंिदी िे
देवनागरी में सलखना, खाने-पीने की चीज़ों के
नाम ह दंि ी में सलखना| कु छ छात्रों ने अभी तीन
-चार फ़्ते प ले ी ह दिं ी भािा िीखनी शुरू
की ै, ख़दु ब ुत पक्के न ीिं ैं पर देवनागरी
को बढ़ाने का जोश देखने लायक था|

कववता-पाठ इि ह दंि ी िमारो का मुख्य आकिणू र ा क्योंकक सभवन मश दर कववयों की कववताएँा चीनी भािी छात्र-
छात्राओिं ने िनु ाई| ‘कोसशश करने वालों की कभी ार न ींि ोती’ कववता को छात्र ‘ ाई सियांिग’ ने जजि प्रकार
किं ठस्थ करके िनु ाया और अपनी भािा िीखने की यात्रा िे जोड़ा, िुनने पर लोगों की तासलयााँ रुकी ी न ीिं| डरै ेन,
िोमेश और कागिं सलगिं ने मिंच िंिचालन बखबद ी ककया और िभी के प्रशंििा के पात्र बन|े

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ह दंि ी हदवि

भािा िीखने में उिकी सलवप का स्वरूप िनु ाई गई कववताओंि और तक आिन जमाए बठै े र े| ‘भारत
ककतना म त्त्व ोता ै, य ि ी गीतों में िनु ने को समली| शाम के को जाननये’ नामक प्रश्नोत्तरी भी
उच्चारण के सलए ककतना ज़रूरी ै ३ घंिटे ह दिं ी भािा के बीच कै िे छात्रों ने ी आयोजजत की और
इिकी बानगी श्री अटल जी और ननकल गए ककिी को आभाि ी जान-बदझकर थोड़े िरल प्रश्न रखे
श्री नीरज जी को श्रदधािंजसल न ीिं ुआ| लोग कायिू म के अतंि गए ताकक ज़्यादा िे ज़्यादा लोगों

क ने वाले क ते ंै कक सिफू एक हदन ह दंि ी हदवि मानकर क्या
फ़ायदा! मंै भी ि मत दाँ लेककन इि एक हदन की तयै ारी में और
उिके बाद जो स्मनृ तयाँा बनी,ंि ववदेशी धरती पर व लम्बे िमय तक र ेंगी| म िब ह दंि ी को बढ़ाने के प्रयाि मंे
लगे ैं पर शायद अब जागना भारत की व्यापाररक नीनतयों को भी ंै, ज ाँा ह दंि ी उपयोगी ो और लोग अवय देशों

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िमीिा

‘ववश्वा' पत्रत्रका (अिंतराषू ्रीय ह दंि ी िसमनत, अमरीका ) के जलु ाई अंकि मंे सिगिं ापरु िगिं म के प्रवेशाकिं की िमीिा प्रस्ततु ै|
सिगंि ापरु िगंि म पत्रत्रका श्री रमशे जोशी जी, (प्रधान िम्पादक 'ववश्वा' पत्रत्रका ) का हृदय िे आभार प्रकट करती ै|

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जलु ाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगंि ापरु ििंगम ◦ www.singaporesangam.com ◦ 9

कला

लोक कला और मैं

असभव्यजक्त की आज़ादी मंे स्वच्छंि द उके रन का अल् ड़ उवमादीपन, मन के एक कोने में रची बिी चा
लकीरों के समि आकृ नतयािकं न मानिपटल िे सभवत्त, काग़ज़ और कै नवाि तक के िफ़र पर वव ंिगम
दृजष्ट या एक नज़र भर-

छु टपन िे समली बेरोकटोक कफर जयराम जी बोल चल
दीवारें, खलु ा आगाँ न, चबदतरा,
बरामदे, दरवाज़,े चौखट, दे री पड़ती कद ची अपने भाव गढ़न
और मन मंे उमड़े भावों को
तीज-त्यो ार, पव-ू उत्िव या की ओर। चौक परद ना, तलु िी
कोई आयोजन के पारंिपररक
रीत- ररवाजों के ढााचँ े मंे ढले, घरुआ, बेल-बल्लरी, िनतया,
धचत्रण का खलु ा आमंति ्रण
समलता। अच्छे -बुरे का कोई ओम,आाँगनी-अल्पना, दे री-
अक-दक न था। तो बि कफर
और क्या चाह ए! घर के र काँ गरद े, रिंग भरी दीवारें धचत्र
काम मंे अलादीन के धचराग़
िी मददगार कोककला मौिी उके रन- करवा चौथी, अ ोई
झटपट ताज़ी क़लई करी
दीवार पर गोबर और री अष्टमी, देव उठानी,दीवाली,
घाि लीप-रगड़ कर देतीिं
सभवत्त तैयार। िींिक पर रुई दजद , नागपंिचमी,रिाबंिधन या
की बत्ती िी बट फु रेरीनमु ा
कद ची या ब्रश तैयार। रंिग के गोवधनू । यानी कक
सलए क्या! ल्दी, चनद ा, गेरू,
कोयला, रोली, चदंि न और बार ामािी अनुबंिधन। एेेिा
भीगे वपिे चावलों का घोल।
मौक़ा क ााँ समलेगा! करती

मन ी मन लख- लख तरे ा

शकु र भगवन। छु टपटु अजंि सल त्रत्रपाठी
सशक्षिका, कला ववज्ञ, कवनयत्री,
िाधारण िी कला जानकारी
लेखखका ,
भी िरा ना पाती िबंि ल सिगिं ापरु

समलता।पररजनों व गरु ुओंि की

पीठ थपथपाई कर देती थी

ौिलाअफ़जाई। पाि-पड़ोि

तक रिंगना, गढ़ना कर आती

थी मेरी कलाभरी लगन।

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कला

बि याँद ी रची-बिी अपनी लगन मंे मगन बढ़ती ो गुनगनु ाई तो मनमोह नी मधबु नी मन भाई।
र ी। पररजनों और गरु ु के आशीिों तले
कलाभावना पनपती र ी। स्कद ली आलेखन कला ऐिी ी ंै वशीकरण मंति ्र िी लोक कलाएाँ।
घर िे समली कला िगिं कब बन ि ेली घलु समल
गईं कु छ पता न ी।िं ज ााँ-ज ााँ जीवन और ना मानें तो ख़दु ी भारत का मानधचत्र उठा लें
जज़म्मदे ाररयाँा ले चलींि ये ििगं -िगंि र ी, कभी छद टी ज़रा! इि छोर िे उि छोर तक परु ाना इनत ाि
न ीं।ि बजल्क ककिी न ककिी वज के धागे में
वपरोकर और-और कला ज्ञान लडड़यााँ वपरोती र ी। ै मेरे भारत की वभै वशाली लोक िंिस्कृ नत का।
कभी कलमकारी पे ुई ननिार तो वारली पे वारी, मााँ भारती की ओढ़नी ना- ना लोक कलाओिं के
वपथौरा पे रीझी तो थगंि क पे धथरकी, तजंि ौर मंे चटख रिंग बहद टयों िे िुिजजजत ंै। इनमंे िे एक
रमी तो पातधचत्र िे धचत्त लगा बठै ी, गोंड मंे गमु बड़ी प्यारी मरे े मन भाई या क दाँ िबकी सिरमौर
मधबु नी लोक कला के बारे मंे कु छ जानकारी
अपने अनभु वों के अकू में घोलकर लाई दँा। चसलए
जानंे और िीखें।

समली मधबु नी
मधबु नी लोक कला ै समधथला की। समधथलािचं ल िेत्र मंे त्रब ार के दरभगंि ा, ि रिा, मधबु नी और नपे ाल की
िीमा िे िटे कु छ इलाक़े आते ंै। मधबु नी त्रब ार का एक जज़ला ै। क ते ैं य लोक कला य ींि
ववकसित ुई इिसलए मधबु नी लोक कला क लाई। मधु का मतलब ै श द और बन मतलब वन। अथाूत
श द के वन। प्राकृ नतक छटा त्रबखेरता य खडंि पौराखणक कथाओिं व गाथाओिं मंे ववराजमान ै। राधाकृ ष्ण,
िीताराम के प्रिगंि ों मंे भी मधबु न मधरु रिंग भरने का श्रेय धारे ै। मधै थली कववयों की रचनाओंि मंे भी
मधबु न का वववरण समलता ै। कफ़ल ाल मझु े तो “मधबु न में राधधका नाची रे, धगरधर की मुरसलयााँ बाजी
रे... “वाला गाना याद आ गया।

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कला

जान-प चान

रामायण काल िे चली आ र ी इि कला की प ली वा क मह लाएाँ ी थी।ंि क्योंकक रीनत-ररवाज परिंपरा को
मददेनजर रखते ुए इि शैली में मह लाएाँ ी घर- आागँ न और सभवत्त पर धचत्रािकं न करतींि अपनी ख़ाि शलै ी
बनातींि और अगली पीढ़ी को िौंपतीिं थी।ंि पीहढ़यों िे य ी िम चला आ र ा ै। कालाितं र में जीववका का एक
िाधन मानकर पुरूिों का भी िरा नीय योगदान दज़ू ुआ। आज के दौर मंे क्या स्त्री क्या परु ुि , बड़-े बदढ़े,
बच्च,े ककशोर जवान िबके िब इि लोक कला मंे पारंिगत। एक िे बढ़कर एक कमाल काम ो र ा ै।

पाचाँ पिखं डु ड़यों वाला फद ल ै मधबु नी कला। पाँाच पिंखडु ड़याँा पााँच तर के ढिंग ( स्टाइल ) ंै। जजनके नाम ैं
भरनी, कछनी,को बर, तातिं ्रत्रक और गोदना। मोटे तौर पर भरनी, कछनी व तािंत्रत्रक के अतंि गतू पौराखणक,
धासमकू ववियों पर आधाररत पेंहटगिं आती ैं। को बर िामाजजक शादी-ब्या ििंबंधि ी, और गोदना का मतलब
(टैटद )। टैटद (गोदना) के गोदने की शैली का पेंहटगिं रूप मंे धचत्रण इि ववधध के अतंि गतू आता ै।

धचत्रकारी के वविय: तब िे आज तक िरस्वती,गणेश, प्राकृ नतक पेड़-पौध,े िरद ज-चाँदा ,
फद ल-पत्ते, बेल-लताएा,ँ पछिं ी, मोर,मछली,कछु आ,
मधबु नी लोक कला धचत्रकारी के अतिं गतू भी के ला, बािाँ , कलश, कमल, िनतया, अष्टदल
लगभग व ी पारिंपररक वविय रीनत-ररवाज, तीज- कमल, नागकवया, तालाब, ह रन, ाथी, शरे ,
त्यो ार और िामाजजक शुभविर, शादी-ब्या दृश्य, राजदरबार, ब्या , को बर, एविं शुभकारी,
वग़रै -वगरै ी ैं, जजि तर कई अवय लोक धवय-धावय, िौभाग्य िबंि धिं ी धचह्न आहद- आहद
कलाओंि मंे ंै। जजिमें परंिपरागत पौराखणक कथाओिं का धचत्रण ोता ै।
िे जुड़े प्रिंिग, देवी-देवता जिै े राधा-कृ ष्ण, िीता-
राम, सशव-पावतू ी, ववष्ण,ु दशावतार, काली, दगु ाू,

मुझे मालदम ै अब इतना िब कु छ इिके बारे मंे जानकर आपका मन भी उमड़ र ा ोगा इि शलै ी मंे कु छ
उके रने का। इिके सलए जो बॉडरू के नमदने, फद ल व पवत्तयों के डडज़ाइन हदए ैं। आप भी बनाइए और अपने
पड़ोसियों िे भी बनवाइए और कफर पंेहटगिं सिगिं ापुर िगंि म को भेज दीजजए। उत्िा वधनू स्वरूप चनु ी ुई िवशू ्रेष्ठ
कृ नतयों को मारे अगले अकिं में छापा जाएगा।

जुलाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगंि ापुर िंिगम ◦ www.singaporesangam.com ◦ 12

िामनयकी

आस्था, असभव्यजक्त और वववेक

रमेश जोशी

अध्यापक, व्यिंग्य लेखक, कवव प्रधान िपंि ादक
'ववश्वा' (अतिं राूष्रीय ह दंि ी िसमनत, अमरीका)

जवम िे प ले और मतृ ्यु के बाद के बारे मंे कु छ भी धमू के नाम पर ऐिे िंगि ठनों ने ित्ता, शजक्त और
प्रामाखणक और िवमू ावय न ीिं क ा जा िकता| न ी आधथकू म त्त्वाकांििाएँा परद ी करने के सलए जब-जब
जवम और मतृ ्यु जीव के अपने ाथ में ंै| िभी ववधान सलए ैं तब-तब ििंि ार िंिकट में पड़ा ै| धमू
जवमना समला ुआ जीवन जीते ैं| रोजाना अिंखि ्य के नाम पर दिद रे देशों पर आिमण करके उनका
जीवों के जवम और मतृ ्यु ोते ंै अतः जवम और आधथकू शोिण करना धमू का िबिे खतरनाक रूप
मतृ ्यु कोई म ान घटनाएँा न ींि ैं| इव ीिं िबके बीच र ा ै| ऐिे व्यजक्त ककिी भी प्रकार िे धासमकू न ींि
यहद जीवन का उददेश्य खोजंे तो य ी उधचत लगता
ोत|े चँाकद क वे अके ले कु छ न ीिं कर पाते इिसलए
ै कक इि िजृ ष्ट को कम िे कम नुकिान प ुँाचाए भोले, िंवि दे नशील व्यजक्त को धमू पर िंिकट के नाम
त्रबना, प्रेम और शािनं त िे जीवन को जी लेना ी पर उकिाया और भड़काया जाता ै और अपने पीछे
जीवन का आदशू और उददेश्य ो िकता ै| इव ींि को कतारबदध कर सलया जाता ै| धमू के नाम पर
ध्यान में रखकर जजन कमों का ववधान व्यजक्त और आतिकं वाद की प्रेरणा देना इिका नवीनतम रूप ै|
िमाज ने ववधान ककया ै व ी धमू ै| इि दृजष्ट िे स्वयिं अधमू का आचरण करने वाले ऐिे कृ त्यों मंे
िभी धमू मलद तः एक ी ंै| िभी धमों का िार भी अधधक िकिय ंै|
य ी ै | ऐिे धमों, व्यजक्तयों का ित्िगंि , समलन
और ििंगठन िंििार को लाभ ी प ुँाचाता ै| िमय, कई धमों मंे अपने अनुयानययों को अपनी आय का
पररजस्थनत और देशकाल के अनिु ार आचरण के दि प्रनतशत धासमकू िंसि ्थानों को देने का ववधान ै|
स्वरूप सभवन ो िकते ंै और ोते भी ंै पर इििे इि प्रकार इििे धासमकू ििसं ्थान एक ब ुत बड़ी
धमू के मदल तत्त्व पर कोई ववपरीत प्रभाव न ीिं पड़ता| आधथकू ताकत और अतंि तः ित्ता का अघोवित के वर
जब य सभवनता धमों को अलग और ववरोधी हदखाने
के काम मंे ली जाती ै तो व धमू कोई धासमकू बन जाते ैं|

आचरण न ोकर कोई ननह त स्वाथू ोता ै|

जलु ाई-सितम्बर २०१८ ◦ सिगंि ापरु ििगं म ◦ www.singaporesangam.com ◦ 13

िामनयकी

इिसलए िवे ा करने वाले भी िेवा िे अधधक बनाने वाले ने इिे नया रोचक वविय िमझा ोगा
धमावू तरण मंे रुधच लेते ैं| इि प्रकार धमू एक ककवतु य िच ै कक व्यजक्तगत असभव्यजक्त के
दिद रे की मधु गयू ाँा चरु ाने वाले धगरो बनते जा र े ैं| सलए ककिी धमू को ननशाना बनाना अनधु चत ी
ककिी देश का आधथकू दो न करने के सलए उि पर न ी,िं आपराधधक भी ै| इििे घणृ ा, कर्टटरता और
आिमण करने को भी धासमकू और ईश्वरीय आदेश ह ििं ा बढ़ते ैं| इन काटदूनों िे इस्लासमक जज़ ाद को
बताया जाता ै| ववसभवन धमों, जानतयों, नस्लों नया बल समला ै | पाककस्तान, समस्र और िीररया
आहद की कसमयााँ, ननदंि ा, बुराइया,ँा उनका उप ाि में िरकारों को उखाड़ने का आधार बनाकर, आस्था
िभी देशों, िमाजों और धमों मंे चलते र े ंै| आज का राजनीनतक उपयोग ककया जा र ा ै |
भी धमू का य दरु ुपयोग स्वाथी और धतद ू लोगों
दवारा ककया जा र ा ै| इि कायू में मीडडया, कला, इि डने माकी मदखतू ा का अपने स्वाथों के सलए
िाह त्य आहद का ि ारा भी सलया जाता ै| चँाकद क उपयोग करने के पीछे एक और आयाम इिसलए भी
िभी को िारे धमों का िम्यक ज्ञान न ींि ोता हदखाई दे र ा ै कक डने माकू की इस्लासमक
इिसलए इि मंे अवय धमों की भावनाएँा भी आ त िोिाइटी के इमामों ने हदिंबि र २००५ मंे समस्र,
िीररया और लेबनान का दौरा ककया और व ाँा ४३
ो जाती ंै| इि िमय धचतंि न, मनन और ववचार पषृ ्ठों की एक पजु स्तका भी बाँाटी जजिमें काटदून, पत्र
न ींि वरन िनिनीखेज ववियों और मुददों की खोज और िबिं ंधि धत िमाचारों की कहटगिं भी थीिं | मक्का
करके उनका आधथकू और राजनीनतक लाभ उठाया मंे इस्लासमक कावफरेंि मंे जो िामग्री बाँाटी गई
जा र ा ै| उिमें उन मलद काटदूनों के अलावा एक और काटदून
भी था जो और भी अधधक आिामक था | य
इि िारी भदसमका का उददेश्य गत ३० सितम्बर काटदून िदअर का मुखौटा प ने ककिी व्यजक्त का था
२००५ को डने माकू की एक पत्रत्रका 'जीलडंै पोस्टन' और उिके नीचे सलखा था- य मो म्मद की िच्ची
में प्रकासशत मो म्मद िा ब के काटदूनों और उिके छवव ै | ववरोध तो प ले भी था और उधचत भी था
ननह ताथों पर उदा रण स्वरूप ववचार करना भी ै| पर डने माकी इमामों के इि दौरे और इस्लासमक
इन काटदूनों के प्रकाशन के दो िप्ता बाद िाढ़े तीन िगिं ठन के िम्मलेन के बाद इस्लासमक देशो के
आधधकाररक ववरोध और राजदतद ों को वावपि बुलाने
जार डने माकी मिु लमानों ने इिका ववरोध ककया| जिै ी कायवू ाह यााँ शुरु ो गईं |
वास्तव में ये डने माकी काटदून अनावश्यक थे और
भड़काऊ तथा मुिलमानों की धासमकू भावनाओिं और
आस्थाओंि की उददंिड अवमानना थे| इन काटदूनों को

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िामनयकी

वास्तव मंे य नया काटदून फ़्ाििं के ककिी अखबार उपयोग करते ंै व भी अतिं तः आस्था के के वरों के
में छपा एक फोटो था, जजिमंे मुखौटा लगाकर िम्मान को कम करना ी ै | अतः धमू के िार
िअद र की आवाज़ ननकालने की प्रनतयोधगता में भाग तत्त्व को प चाना जाना चाह ए | उिके श्रेष्ठ तत्त्व
लेता एक प्रनतयोगी था जजिके नीचे डने नश भािा मंे का आचरण ककया जाना चाह ए, िभी धमों का
नया पररचय ऊपर िे सलखा गया था | इििे इिमंे अध्ययन ककया जाना चाह ए | यहद आवश्यक ो तो
राजनीनत के घुिे ोने िे इंिकार न ीिं ककया जा मानव की बे तरी के सलए उिके आनिु ांधि गक पिों
िकता | पर भी ववचार ककया जाना चाह ए | धमू को
व्यजक्तगत स्वाथू सिदधध का िाधन न ींि बनने देना
ककिी को गाली ननकालना, अपमान करना न तो चाह ए | यहद म 'ववश्व-गाँवा ' की बात करते ैं तो
ववचार मिंथन, धचतंि न और सशवत्त्व ै और न ी गाँाव में भी तो य ी ोता था कक िभी िबका
इििे मानव ववचारधारा के सलए कु छ श्रेष्ठ िम्मान करते थे और ककिी के य ााँ गमी ोने पर
ननकलेगा | जारों विू परु ान,े करोड़ों-अरबों लोगों की लोग अपने उत्िव तक स्थधगत कर हदया करते थे |
आस्था के बारे में अपणद ू अध्ययन और िोधपदणू
पदवागू ्र ों िे कु छ ासिल न ींि ोगा, सिवाय इि पर इि पजंदि ीवादी 'ववश्व-गाँाव'में असभव्यजक्त की
िंिि ार को और अधधक कष्टमय बनाने के | धमू के स्वतितं ्रता के मापदंिड भी पिपात पणद ू ंै | मो म्मद
बारे मंे ववचार मनीवियों और ऋवियों का काम ै, िा ब के काटदून तो असभव्यजक्त की स्वतिंत्रता ंै पर
स्वाथू और अज्ञान में डद बे लोगों का न ींि | इिके आजस्रया में 'ह टलर वार' पुस्तक के लेखक डवे वड
िाथ म उन कृ त्यों के बारे में ववचार करंे जो ह दंि द इरववगिं को इिसलए धगरफ्तार कर सलया गया कक
आस्था के िाथ ककए गए ैं | जापान, योरप और उिने सलखा कक जमनू ी में य दहदयों का कत्ले आम
अमरीका मंे सशव, गणेश, राम, काली, दगु ाू आहद के ुआ ी न ीिं | ववश्व को िच्चे अथों मंे गाँवा बनाने
धचत्रों का उपयोग व्यापाररक लाभ और ह दिं द की िोचंे और य भी ववश्वाि रखंे कक ककिी कु त्ते
भावनाओिं को आ त करने के सलए ककया गया | के ककिी धासमकू ग्रवथ पर पेशाब कर देने िे धमू
इिी प्रकार असभव्यजक्त की स्वतंति ्रता के नाम पर खतरे मंे न ीिं पड़ जाता | कु त्ते के पाि असभव्यजक्त
ुिैन के धचत्र भी आपवत्तजनक ंै | िररता जिै ी के तीन ी िाधन ैं- पँादछ ह लाना, भौंकना और
पत्रत्रकाएँा भी ह दंि द आस्था िे खखलवाड़ करती ैं | पेशाब कर देना |

िरकार का रवयै ा भी ऐिे मामले मंे ननरपेि और तभी क ा ै- 'काटे, चाटे श्वान के दु दाँ भाँानत
वयायपणद ू िमानता का न ींि ै | कु छ भारतीय ववपरीत |
व्यापारी भी ह दंि द देवी-देवताओिं का अपने उत्पादों में
ित्य को कु त्तों िे बचाएंि |

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झलककयााँ

ववश्व ह दिं ी िम्मलेन , मॉररशि

इि िाल ११वााँ ववश्व ह दंि ी िम्मेलन जो
अगस्त मा में मॉररशि मंे आयोजजत ुआ
था, में ववदेश मंित्रालय की ओर िे जाने का
अविर प्राप्त ुआ| य शायद प ली बार
था जब सिगंि ापुर िे ववश्व ह दंि ी िम्मलेन
मंे प्रनतभाधगता ो| िेत्रीय िम्मेलनों में
प ले एक-दो बार य अविर अवश्य प्राप्त
ुआ ै| इि िम्मलेन का वविय ‘ववश्व
ह दिं ी और भारतीय िसिं ्कृ नत’ था| ह दंि ी भािा
के िाथ ी िंसि ्कृ नत का पोिण भी
आवश्यक ै| अलग-अलग ित्रों में सभवन
ववियों पर ववदवजनों ने अपने पचे पढ़े
और ववचार-ववमशू ुआ| ह दिं ी भािा को
लेकर कई अनुशििं ाएँा रखी गईं और जल्द

ी उनके परद े ोने की बात की गई| ववश्व
के अलग-अलग ह स्िों िे आए प्रनतभाधगयों
के ववचार और कायू जानने का अविर
समला|

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ररपोटू

सिगंि ापुर 'नेशनल डे

आलोक समश्रा
मरीन इंिजीननयर, सिगिं ापरु

सिगिं ापुर के नागररकों के सलए ९ अगस्त का हदन ब ुत ी म त्वपदणू ै क्योंकक आज ी के हदन नतरपन
(५३) िाल प ले सिगंि ापुर को एक स्वतवत्र राष्र के रूप में प चान समली थी | य ाँा स्वतितं ्रता हदवि
जजिको कक 'नेशनल ड'े के नाम िे जाना जाता ै, बड़ी धमद धाम और उल्लाि िे मनाया जाता ै |
अगस्त के म ीने की शरु ुआत िे ी परद े देश मंे एक उत्िव जिै ा मा ौल ोता ै | जग -जग पर
िांिस्कृ नतक कायिू म आयोजजत ककये जाते ैं जजनमंे लोग अपने परद े पररवार िह त जोश और उमिंग
के िाथ शासमल ोते ंै |

दफ्तरों में, ब ुमिंजजली इमारतों में, घरों की फोटो: https://www.singaporetravelhub.com/events/singapores-national-day/
खखड़ककयों में, कार पर नागररक बड़े ी गवू

के िाथ सिगंि ापुर का झंडि ा फ राते ंै |
बच्च,े बदढ़े, जस्त्रयााँ िभी इन हदनों अक्िर
लाल और िफे द रिंग के वस्त्र, जो कक

सिगंि ापुर के झंडि े के रंिग ंै, प ने ुए हदखाई
देते ैं | नागररकों के िाथ-िाथ इि मौके

पर सिगंि ापुर में उपजस्थत कोई भी व्यजक्त
‘नशे नल ड’े के िमारो की धमद धाम िे
अछद ता न ींि र ता |

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ररपोटू

प्रनत विू की तर इि विू भी ९ अगस्त को तीनों िने ाओिं की टु कडड़यों के अनतररक्त नशे नल
य ााँ ‘नशे नल डे परेड’ (NDP) का भव्य आयोजन कै डटे कोर (NCC), सिगिं ापरु रेड िॉि
The Floats @ Marina Bay पर ककया गया िोिाइटी , गलू गाइड , सिगंि ापरु नशे नल सिववल
जजिे देखने ज़ारों की तादाद में लोग एकत्र ुए - डडफे वि फोि,ू व्याविानयक ििंस्थाओिं की टु कडड़यों ने
लगभग िभी लोग लाल और िफे द रंिग के वस्त्र भी परेड में भाग सलया | जांबि ाज़ सिपाह यों
प ने ुए और गवू िे सिगिं ापुर का झंिडा फ राते ुए | ने िा सिक करतब हदखाकर अपने कौशल का
कु छ लोगों ने तो अपने चे रे पर भी सिगंि ापुर के पररचय हदया और दशकू ों का मनोरिंजन ककया |
झडिं े का टैटद बना रखा था | जो लोग ककव ींि सिगिं ापुर एयर फोिू (SAF) ने इि विू स्थापना के
कारणों िे परेड स्थल न ीिं जा पाए , उव ोंने अपने ित्तर विू पदणू ककए | जब आिमान में उड़ते ुए
घरों में पररवार और समत्रों के िाथ टीवी पर NDP वायिु ने ा के ववमानों ने अनेक तर के कौशलपदणू
का िीधा प्रिारण देखकर आनिदं उठाया | प्रधानमिंत्री, करतब हदखाए तो दशकू ों ने झंडि ा फ राकर
अवय मंित्रीगण एवंि ववपिी नते ा िभी ने लाल और उनका मनोबल बढ़ाया और िारा मा ौल तासलयों की
िफे द रिंग के वस्त्र प नकर NDP मंे भाग सलया | गड़गड़ा ट िे गँाजद उठा | वायुिने ा का ेलीकाप्टर
जब राष्रध्वज फ राते ुए NDP स्थल के ऊपर िे
राष्रपनत मैडम लीमा याकद ब ने परेड का गजु रा तो र एक नागररक गवाूजववत म िदि कर
ननरीिण करने के बाद NDP कायिू म शरु ू करने र ा था |
के सलए अनमु नत प्रदान की | तत्पश्चात िभी
उपजस्थत लोगों ने एक िाथ राष्रगान गाया |

फोटो: http://www.littlestepsasia.com/singapore/events/celebrate-national-day-singapore

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ररपोटू

इि विू NDP का मखु ्य वविय था WE उपजस्थत लोगों ने सिगिं ापुर राष्र के प्रनत
ARE SINGSPORE | सिगिं ापरु के जन
िामावय के जीवन को दशातू ी वीडडओ अपने कतवू ्यों की प्रनतज्ञा को दु राया और
जक्लप्ि भी हदखाई गयींि – ककि तर िे
पररवार , समत्रगण और िमाज एक दिद रे की राष्रगान गाया | इिी के िाथ NDP २०१८
ि ायता करते ैं और एक िदु ृढ़ देश का
ननमाूण करते ंै | कई स्कद लों के बच्चों ने का िमापन ुआ | NDP स्थल िे बा र
और स्थानीय कलाकारों ने रंिगारंिग कायिू म
प्रस्तुत ककया | रिंग-त्रबरंिगे वाई पटाखों िे िारा ननकलते िमय िभी के चे रों पर ख़शु ी
आिमान जगमगा उठा | आखख़र मंे िभी
और हदलों में सिगिं ापुर के प्रनत कृ तज्ञता के

िाथ-िाथ सिगिं ापरु को िदु ृढ़ देश बनाने के

सलए र िंभि व योगदान करने का दृढ

ननश्चय था |

सिगिं ापरु जो कक "सलहटल रेड डॉट' के नाम िे भी पदरी दनु नया मंे प्रसिदध ै, दनु नया के उवनत देशों में
िे एक ै | आज़ादी के बाद इतने कम विों में सिगिं ापुर ने अथ-ू व्यवस्था, िुरिा, िाफ-िफाई, यातायात,
शािन व्यवस्था इत्याहद र िते ्र में हदन दनद ी रात चगै नु ी प्रगनत की ै | इिका प्रमुख श्रेय य ााँ के प्रथम
प्रधानमतंि ्री Mr. Lee Kuan Yew को जाता ै | उनकी दरद दसशतू ा और िमझदारी िे ी इतने कम िमय
में सिगिं ापरु की आशातीत प्रगनत िंिभव ो िकी ै | य राष्र उनका मेशा ऋणी र ेगा | उनके िम्मान
मंे मरे े कु छ श्रदधा िुमन अवपतू ैं –

श्रद्ांजसल
(A Tribute to Mr. Lee Kuan Yew)

पक्का नके इरादा मन में नव ा कम्पोंग१ था फोटो: https://www.theonlinecitizen.com/2015/05/26/glimpses-of-lee-kuan-yew/
अनशु ािन की थामे डोर
दरद दसशतू ा, कमठू ता िे सिगंि ापरु
सिगिं ापरु ननमाूण ककया ॥
ले चले उिे प्रगनत की ओर
धनी ववलिण प्रनतभा के
आदशू पनत और वपता थे तुम उत्तम सशिा और िबको घर
िच्ची ननष्ठा और लगन िे
का िपना िाकार ककया ॥
र बाधा को पार ककया ॥
े कमशू ील, े राष्रवपता
ऋणी र ेगा राष्र तुम् ारा
िम्माननत जीवन का तुमने
िबको िम अधधकार हदया ॥

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झलककयााँ

सिगंि ापरु में परिं अगस्त

सिगिं ापुर में भारतीय दतद ावाि मंे १५
अगस्त र िाल मनाया जाता ै|
भारतवािी इि िमारो में बड़े ी गवू िे
ह स्िा लेते ंै|

इि हदन भारत के प्रधान मंति ्री जी का
िवदेश उच्चायुक्त श्रीमान जावदे अशरफ
जी दवारा पढ़ा गया और ववसभवन
िािंस्कृ नतक कार्य्िू म भारतीय ववदयाधथयू ों
दवारा प्रस्तुत ककये गए| परद ा मा ौल ऐिा
लग र ा था जैिे भारत के बा र एक दिद रा
भारत ो|

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ररपोटू

स्वततिं ्रता हदवि और चार पीहढ़यों की ि भाधगता

कु मार अरुणोदय
भारत

इििे िुखद और शुभाशीि क्या ो िकता ै, कक कफर भी आह स्ते िे ी ि ी, बच्चों के कायिू म में
स्वतवत्रता हदवि का कायिू म ो, िाथ ी चार पीढ़ी अपनी उपजस्थनत को ि ज बनाया।
की ि भाधगता ो.! िबिे श्रदधेय पीढ़ी िे वे उपजस्थत
थे, जजव ोंने स्वतंित्रता ििगं ्राम के आंिदोलनों मंे बबरू शायद य ी कु छ जजजीवववित कारण र े ोंगे स्वतंति ्रता
लाहठयााँ खाई थी, दिद री पीढ़ी में उनके बाद के लोग ििगं ्राम के उदघोि का, जजि कारण उम्र को धता
थ,े जो आज के िमाज मंे वरीय असभभावकों की श्रेणी बताते ुए भी, र भारती-पुत्र ने अपने आपको झोंक
मंे आते ै, उनके बाद उनके बच्चों की उपजस्थनत थी, हदया था, राष्र-धमू की आ ुनत में.!
जो आज अपने जीवन मे कमोबशे जस्थर ो चकु े , और
िाथ ी छोटे-छोटे बच्चों की नयी फौज चौथी पीढ़ी के स्वतितं ्रता िंिग्राम के अनक े-अनछु ए ककस्िों-क ाननयों
रजजस्टर में अपना नाम दजू करवाने िे न ींि चकद र ी िे उव ोंने बच्चों को रूबरू भी करवाया, िाथ ी
थी। कहठनाई या ववपवत्त आने पर धयै ू और ििंयम िे अपनी
जीत को िनु नजश्चत करने के गुर भी बताया।
हृदयाभार मारे िामाजजक असभभावकों का, जजव ोंने
अपनी बढ़ती उम्र के दस्तक के बाद भी, बच्चों िे य बताना भी आवश्यक था कक, राष्र की स्वतंित्रता
समलने की इच्छा को मजबदती िे िारी कहठनाइयों पर के मायने तब तक फलीभदत न ी ोंगे, जब तक र
एक भारत-पुत्र मानसिक, िामाजजक, आध्याजत्मक और
ावी ोने हदया। आन-े जाने में थोड़ी हदक्कत भी ो, व्यजक्तक रूप िे अपने मानि को परतिंत्रता की बड़े ी िे
अपने आपको मकु ्त न कर ले।

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ववदेशी अगिं ्रेजो को तो भौनतक कक, राष्र की अखण्डता और ररपोटू
रूप िे अपने िर दों िे बा र िम्प्रभुता को िरिं क्षित करने ेतु,
कर के देश की भौनतक स्वततंि ्रता राष्र-धमू मे डद बना और कफर छोटे-छोटे बच्चों के अिंग्रेजी मंे
उिके कलेवर में झडुिं को झुमाना धगहटर-वपहटर वाली बात भी
ासिल कर ली मन,े पर आवश्यक ै। िुखदता का अ िाि कराए ुए
स्वतंति ्रता के पणद ू मायने देश की थी।
भौनतकता और व्यजक्त के मानि धपद थोड़ी तजे ज़रूर थी, मरे े बार
को स्वततिं ्र ोने िे ी िम्भव ै। -बार क ने के बाद भी बच्चे कु छ भी ो, बच्चों के कायिू म
अडडग थे, अपने ववदयालय मंे मंे सशरकत करने का अविर
वयोवदृ ध स्वतिंत्रता िेनाननयों का आये स्वतवत्रता ििंग्राम के समले, यवु ा-पीढ़ी िे राष्रवाद
आशीवित िाजवनध्य ननजश्चत रूप परु ोधाओिं को िुनने और तननक आधाररत िविं ाद स्थावपत करने
िे वतमू ान में यवु ाओिं के सलए पाि आकर उनके परै छद कर का मौका समले, िामाजजक
एक िकल प्ररे णास्रोत ै, जजिके आशीवाूद लेने को.! असभभावकों का आशीवित
पररप्रेक्ष्य में यवु ा-शजक्त एक नए िाजवनध्य समले, िाथ ी वापिी
और अदम्य िा ि-उत्िा िे स्पोर्टूि ववभाग की ओर िे करते वक़्त कड़ा ी िे ननकली ुई
अपनी ऊजाू की आ ुनत देता ै, प्रसशक्षित बच्चों के ैरतअगिं ेज गरमागरम जलेबी को भी चटकने
अपने स्वखणमू भारत के िपनों करतबों ि,े उपजस्थत असभभावकों का िुअविर समल जाये, तो भला
को िाकार करने ेतु। को भी दम िाधे देखना पड़ र ा इतनी स्वतिंत्रता कम ै, क्या.?
था, अदभुत था िब कु छ.!
मेरी वैचाररक ि मनत िदा िे ी इतने भर िे मन तो ननजश्चत
इि वविय पर के जवरत ोती ै रूप िे म ो-म ो..

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काव्य-रि ििंजय कु मार
आई टी मैनेजर, आई बी एम,
मातभृ ािा की घरु ्टटी!
सिगंि ापरु
अनायाि ी, त्रबन प्रयाि ी, ह दंि ी की घरु ्टटी वपला गई
मरे ी माा,ँ मरे े चाभी के बदंि र की ठन-ठन में ह दिं ी,
मरे ी ततु ली जुबांि के मम-मम में ह दंि ी,
असभव्यक्त कर िकँाद स्वयंि को, वो िा ि, वो िम्बल मेरी लड़खड़ाई क़दमों की धप-धप में ह दिं ी,
हदला गई मरे ी मा,ाँ मरे ी पाँवा िे पानी की छप-छप में ह दिं ी,

उिकी लोरी की गुनगनु मंे ह दिं ी,
उिकी कंि गन की खनखन मंे ह दंि ी,
उिकी नमू थेसलयों की थपथप मंे ह दंि ी,
उिकी आाँचल की वाओंि के िनिन मंे ह दंि ी,
उिकी स्नहे ल दलु ार-पुचकार में ह दिं ी,
उिके अपने िे डाटिं -फटकार में ह दिं ी,
उिकी ममता भी ह दंि ी में, उिकी धचतिं ा भी ह दिं ी में,
वो ना भी क े कु छ, तो िनु ाई दे ह दिं ी में,
ह दंि ी में िब कु छ िुना गयी मेरी माँ,ा
वो ह दंि ी की घरु ्टटी वपला गयी मरे ी मा,ँा

अिर ये ुआ, की ह दिं ी ने थामी यादँ ऊाँ गली
मेरी,

मरे े बचपन की करुण-ििं दन मंे ह दिं ी,
मरे े करघनी के घुघंि रू की छम-छम में ह दंि ी,

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काव्य-रि

अब तो रोऊाँ भी ह दंि ी में, गाउँा भी ह दिं ी में, वो ह दंि ी की घरु ्टटी िे, छु र्टटी का वादा लेकर
गयी मेरी मा,ँा
नयनों के आागँ न में िपने िजाऊँा भी ह दिं ी मंे,
अिर ये ुआ की, बावन आखर के भाव िमाये
ये भािा का कै िा जादद चला गयी मेरी माँा, न छब्बीि मंे,

वो ह दंि ी की घुर्टटी वपला गयी मेरी माा,ँ शब्द मरे े अब भटके लगे ैं,
आत्मववश्वाि मरे े अब ि मंे लगे ंै
ि िा मरे े भववष्य की धचतिं ा िता गयी, असभव्यजक्त के िम्बल को झटके लगे ंै,
आखखर थी तो मरे ी मा,ाँ भाव तो उमड़े ब ुत ैं मगर, लबों को मरे े

ग्लोबल रेंड की अगिं ्रेजी के झािंिे मंे आ गयी चपु ्पी लगी ैं,
मरे ी मा,ँा अब तो रो भी न पाऊंि , गा भी ना पाऊंि
रुिं धे ंै िब भाव मरे े, कै िे मैं गनु गनु ाऊाँ ,
मेरी माँा को ममा अब प्यारा लगे ै,
निरू ी राइम्ि को चौपाई िे वयारा क े ै, ये ह दिं ी िे कर्टटी न भाए मरे ी मा,ँा
अ-आ-इ-ई िे ए-बी-िी-डी का बड़ा ि ारा लगे वो ह दंि ी की घुर्टटी वपला दे मरे ी माँ,ा

ै, ह दिं ी: मेरी प चान
टद टी फद टी ी ो, घर मंे अगंि ्रेजी की धारा ब े

ै,
धगट-वपट जो बोलदंि तो राजा दलु ारा क े ै,
जो आँाचल मंे सिमटद तो थकंै यद क े ै,
उिकी उम्मीद न ह दंि ी िे, उिका भरोिा न

ह दंि ी मंे,

अब तो ह दंि ी की मरे ी ववदवता भी िताए उिे
ह दिं ी में

वो अगंि ्रेजी की वकालत, ह दंि ी मंे कर के गयी
मरे ी मााँ,

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यादंे

जजिके नाम के िाथ ख़दु ब ख़दु ‘जी’ लग जाए; बि
व ी तो ंै ‘अटल जी’

िाधना पाठक
ह दंि ी अध्यावपका, सिगंि ापरु

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यादें

कु छ लोगों िे म समलते न ींि पर वे मारी आत्मा िमपणू अबाधधत र ा| उनका कवव मन कोमल
मंे इि कदर अपनी जग बनाए रखते ैं कक समलना भावनाओंि को, देशप्रेम को, जीवन की ग राइयों को
कभी ज़रूरी ी न ीिं लगता| श्रीमान अटल त्रब ारी बड़ी ी ि जता और िरलता िे व्यक्त करता था|
वाजपेयी जी िे मंै स्वयंि तो कभी न ीिं समली पर मेरे उनकी कववताएाँ - दो अनुभनद तयाँा, दधद में दरार पड़
वपताजी ह दंि ी िे अत्यधधक जुड़े ुए थे और इि गई, शीश न ींि झुके गा इि बात की पररचायक ंै|
हदशा में िकिय र चकु े ंै| उव ींि की ज़बु ानी कई िच्चाई की बने काब तस्वीरें पशे करतीिं ये अनभु दनतयाँा
मुलाक़ातों में अटल जी की बातंे िुनींि और क ीिं न आखखर क्यों न पल-पल याद आएँ;ा
क ीिं वे बातें ऐिे हदल तक रमती गईं कक कभी लगा

ी न ींि कक मनैं े अटल जी िे मलु ाक़ात न की ो|

१६ अगस्त २०१८ को लम्बी बीमारी के बाद भारत के प ली अनभु दनत
पदवू प्रधानमंति ्री, ‘भारतरत्न’ श्री अटल त्रब ारी वाजपये ी
जी के ननधन िे राजनीनतक गसलयारों के िाथ ी बने काब चे रे ैं, दाग बड़े ग रे ंै
ह वदी िाह त्य की दनु नया में भी शोक के बादल छा टद टता नतसलस्म आज िच िे भय खाता दँा
गए|
गीत न ीिं गाता दाँ

अटल जी ने अपने ‘कररयर’ का आरिंभ पत्रकार के दिद री अनुभनद त
रूप में ककया था मगर जल्दी ी उव ोंने राजनीनत के गीत नया गाता दँा
िेत्र में अपना कदम रखा और िन २००९ तक वे
राजनीनत मंे िकिय र े| जजि तर राजनीनत मंे टद टे ुए िपनों की कौन िनु े सििकी
उनका योगदान कभी भी भलु ाया न ीिं जा िकता अवतर की चीर व्यथा पलकों पर हठठकी
उिी तर िाह त्य के िते ्र में उनकी प चान को
समटाया न ींि जा िकता| ह वदी भािा के प्रयोग का ार न ीिं मानाँदगा, रार न ींि ठानँागद ा,
प्रचार-प्रिार तथा ह वदी िाह त्य के िते ्र मंे उनकी
भसद मका अववस्मरणीय र ी ै| ह वदी भािा पर उनका काल के कपाल पे सलखता समटाता दाँ
प्रभुत्व उनके भािणों मंे, उनकी कववताओंि मंे स्पष्ट गीत नया गाता दाँ
झलकता ै|

जी ाँा, राजनीनत जैिे ननममू िेत्र में र ते ुए भी
अटल जी ईमानदारी और अपने कायू के प्रनत उनका

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यादें

१९७७ में जब वे भारत के ववदेश मतिं ्री थे तब ियिं कु ्त

राष्र म ािभा के ३२ वें अधधवेशन मंे में प ली बार

ह वदी में भािण देकर उव ोंने इनत ाि रचा| प ली

बार ह वदी भािा का ववश्व के राजनीनतक मिचं पर

प्रयोग ुआ और ह वदी की गररमा और म ानता की
गँादज दनु नया मंे िनु ाई दी| िभी भारतवासियों के सलए

य अत्यिंत ख़शु ी एविं गौरव का पल था| इि भािण

मंे उव ोंने ‘विधु वै कु टुंिबकम’ की पररकल्पना को

दो राते ुए इि हदशा में राष्र िघंि को अधधक
प्रयत्नशील ोने पर ज़ोर हदया| कम िे कम शब्दों मंे

वे इतना कु छ क गए कक दनु नयावाले देखते ी र े|

उव ोंने अपने देश के इरादे, िकंि ल्प ववश्व के िामने

रखे| अपने इि भािण दवारा मातभृ ािा की म त्ता

िमझाने मंे वे िफल र े| िटीक शब्दों का चयन

उनके भािणों को प्रभावशाली बना देता था| परमाणु

परीिण के बाद, कारधगल युदध के बाद िंिि द मंे हदए

गए उनके भािण िुनकर आज भी रोंगटे खड़े ो जाते

ंै|

अपने जीवनकाल मंे अटल जी ने कई कववताएाँ सलखीिं| शब्दों के इि जादगद र की कमी म ििद तो ोगी| बि
उनका कववता-िंिग्र ‘मरे ी इक्यावन कववताएाँ’ जब य ी क दाँगी कक ववश्व मंिच पर ह वदी की मावयता
प्रकासशत ुआ तब उनके िमथकू ों एविं उनके बढ़ाने की कोसशश ी अटल जी को िच्ची श्रदधांिजसल
चा नवे ालों ने एक अनमोल िंपि वत्त की तर इिे िँाजो
कर रख सलया| उनकी कववताओंि में आगे बढ़ने की ोगी|

प्ररे णा ै, आशा की ककरणंे ंै| ििंि द में या अवय मचंि ों

पर भािणों के दौरान अपनी कु छ कववताओंि के अशिं वे

उदधतृ ककया करते थे जजनिे उनके भािणों में ास्य,

व्यगिं , करुण, वीर रि की छटा झलकती थी| उनके

भािा-प्रवा में लोगों को बांिधकर रखने की िमता थी|

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ववदेशी भािी के मुख िे

भारत मंे चाय पीना एक सासां ्कृ ततक आदत है

चेन यी ची
छात्र-नेशनल यनद नवसिटू ी ऑफ़,

सिगंि ापुर

वपछले हदिम्बर में, मैं वाराणिी गयी थी। ववमान िे इि यात्रा मंे मनैं े जाना कक, वाराणिी वालों को
उतरने के बाद, मेरे मन को शाजवत की अनुभनद त ोने
लगी। मझु े पता था, मंै एक ख़ाि जग आ र ी दँा। िुब परद ी और जलेबी खाना िबिे पिदंि ै । मनंै े
व ााँ दो बार परद ी खायी - एक बार अस्िी घाट के
मंै शाम को बनारि प ुँाची थी तो उि िमय िड़क पर पाि, और दिद रा वाला दशाश्वमधे घाट के पाि।
इतनी गाडड़या थीिं कक िड़क भी ै, न ींि मालदम ो र ा दोनों परद ी वाले अलग थे| शायद ववधध िमान न ीिं
था। अरे, व ााँ का रैकफ़क जाम सिगिं ापुर के रैकफ़क जाम
के िमान न ींि ै, मगर ककिी न ककिी तर व ाँा की ै, इिसलए दोनों का स्वाद भी िमान न ीिं लगा।
गाडड़या िब आगे बढ़ ी र ी थीिं! मझु े याद ै, िड़क
के ककनारे िे भदजा सलया था। भदजा गमू था और मझु े मुझे दशाश्वमधे घाट के पाि की परद ी की दकु ान
अच्छा लगा। पििंद आई। उि दकु ान में स्वाहदष्ट िमोिे भी थे|
अभी मैं सिगिं ापुर में दाँ, य ााँ वाराणिी जिै ी पदरी,
जलेबी, िमोिा या लस्िी खोज न ींि िकती।

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ववदेशी भािी के मखु िे

भारत मंे चाय पीना एक कक, भारत की चाय िबिे अच्छी गया| उिने मुझे गगिं ा जी के
िासिं ्कृ नतक आदत ै और ब ुत ै! इि यात्रा में, मनैं े चाय कै िे प ले घाट िे अनिं तम घाट तक
लोकवप्रय ै। मनैं े व ाँा एक हदन
मंे पााँच कप चाय पी! इि यात्रा बनाना चाह ए य भी िीखा ै। हदखाया। मंै िबु -िबु घाट
िे प ले, मनंै े एक हदन मंे कई मनंै े य ााँ आकर चाय बनाई पर देखने गई थी उि िमय गगिं ा जी
बार चाय न ीिं पी थी, मगर इि एक चीज़ का ए िाि ुआ -
अनभु व पर खेद न ींि ै। अरे, भारत का दधद सिगिं ापुर के दधद ब ुत शाितं लगींि और िभी घाट
चाय ब ुत हदलचस्प ै, ै ना? और खाने की तर अलग ै। ब ुत िंिुदर ंै। गिगं ा जी दिद री
एक देश मंे अलग-अलग चाय नहदयों के िमान न ीं,ि व ााँ ब ुत
बनाने का ढिंग ै। मुझे लगता ै मैं वाराणिी मंे घाट देखने गई शाजवत और पववत्र अनभु नद त
थी। मुझे एक नाव वाला समल समलती ै।

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ववदेशी भािी के मखु िे

मझु े पता ंै कक वाराणिी का खाना िबिे
अच्छा ै, मगर जो चीज़ मेशा के सलए मन
मंे बि गई ै व व ाँा के घाट ंै|

र घाट के पाि अदववतीय इनत ाि और
क ानी ै। क्या आप को दशाश्वमेध घाट याद

ै ? व ााँ पर गगंि ा आरती र शाम ोती ै।
गिंगा आरती देखने के सलए भारत के दिद रे
राजयों िे ब ुत लोग आते ैं लेककन दिद रे देशों
वाले और भी ज़्यादा। मंै तो क ती दाँ कक िब
लोगों को गगिं ा आरती देखनी चाह ए। गगंि ा
आरती सिफ़ू आरती न ीिं ै बजल्क हदलचस्प
ििगं ीत और नज़ारा भी ै; भजन बजता ै, पुजारी जी
लोग आरती करते ैं और दशकू भजन के िाथ गाते
ताली बजाते क ीिं खो जाते ैं। वाकई वो पल ब ुत
िखु द लगा|

बीती बातें िोचते ुए, मझु े वाराणिी याद आती ै। व ाँा की
गायंे, बैल, घाट, लोग, खाना, समठाई और भािा। िब कु छ ब ुत
जादईु ै|

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झलककयााँ मुग़लेआज़म

https://www.esplanade.com/events/2018/mughal-e-azam-the-musical ह दंि ी शो का बढ़ता चलन इि बार
‘मगु ल-ए-आज़म’ को भी सिगिं ापरु ले
गुड़िया घर आया|

सिगंि ापुर के कलाकारों दवारा सलखा https://gudiyaghar.peatix.com/
और असभनीत य नाटक अगिं ेजी के
‘डॉल ाउि’ का रूपांितरण था| िभी ने प्रेम नदी
इिकी िरा ना की|
यदयवप प्रेम नदी का मंचि न अगिं ेजी में ककया गया
ताकक इि तक ज़्यादा िे ज़्यादा लोगों की प ुच ो,
य नाटक ब ुत अधधक िरा ा गया और इिमें
मवत्र, गीत आहद ह दंि ी में थे जो िभी को पिंिद आए|

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सिगिं ापरु भ्रमण

िमुर तट

सिगंि ापरु में देखने लायक जग ों की कमी न ीिं ै| र ककिी की पिंिद का कु छ न कु छ ै| इि बार आपको एक
ब ुत ी मश दर जग की िैर करवाते ैं|

सिगंि ापरु के दशनू ीय स्थलों में इि
बार म बात करेंगे य ाँा के िमरु
तटों की| ालाकँा क सिगंि ापुर अपने तटों
के सलए मश दर न ींि ै पर य ााँ के
कु छ तट पयटू कों को ब ुत लुभाते ैं|
ितिं ोिा दवीप का ‘पालवान’ तट और
‘िलोिो’ तट काफो लोगों को अपनी

नए िाल की पाटी ो या कििमि का जश्न ो
इन तटों पर युवाओिं की ख़ािी भीड़ नज़र आती ै|
तो अगर आप य ाँा आने की योजना बना र े ैं तो
इन तटों पर जाने का िमय अवश्य रखें|
इनके अलावा ‘ईस्ट कोस्ट’ िमरु तट वपकननक मनाने के सलए ब ुत मश दर ै पर रवववार को
भीड़ इतनी ज़्यादा ो जाती ै कक लगता ै क्या वाकई सिगंि ापुर की आबादी कम ै?

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सशिा

स्वयंप्रभा स्वमजु ्जज्जवला स्वततं ्रता पकु ारती!

क्या स्वियं प्रभा नामक म ती िरकारी योजना वास्तव मंे भारत के बच्चों को अधंि ाधिधंु र्टयशद न की चपटे िे स्वततंि ्रता
हदला पायेगी? स्वयिंप्रभा डी टी एच DTH चनै ल ववदधाधथयू ों और अध्यापन को िमवपतू ैं।
प ले भी यरद ्टयदब और टीवी पर ब ुत िे पढ़ाई के ववडडयो और
चनै ल ंै, जैिे खान एके डमी, कफर स्वयंपि ्रभा मंे

नया क्या ै कक ब ुत िे बड़े कॉलेज-म ाववदयालय के लोग इि
नेक काम िे जुड़े ुए ैं?
नया ै योजनाबदध ननयोजन, ननशुल्क ोना, भारतीय परीिा और
पाठ्यिम के अनुकद ल ोना और गणु वत्ता बनाए रखना!

यहद आप ककिी ग्यार वीिं या बार वीिं के ववदधाथी को जानते ंै,
या IIT की परीिा की तयै ारी करते बच्चे के असभभावक ैं तो आप
उव ें IIT-PAL प्रोफ़े िर असिस्टेड लननगंि (पाल) वीडडयो लेक्चिू के
बारे मंे बताएाँ।पढ़ाई के ये लेक्चर किा ग्यार वीिं और बार वीिं की
बच्चों के सलए ैं। इव ें यरद ्टयदब मंे नन:शलु ्क देखा जा िकता ै!
ब ुत िे आई आई टी के प्रोफ़े िरों और प्रनतजष्ठत ववशिे ज्ञों ने इि
श्रखिंृ ला मंे अपना अमदल्य योगदान हदया ै। आई आई टी (IIT)
हदल्ली के भौनतकी ववभाग के मुख्य प्रवक्ता प्रोफ़े िर रवव िनै ी ने
ये योजना आगे बढ़ाई ै।
600 घटंि े िे अधधक की श्रखिंृ ला में जीवववज्ञान, भौनतकी,
रिायनशास्त्र व गखणत जैिे म त्वपणद ू वविय पर आपको िंिभािण समलेंगे। पररयोजना को भारत िरकार के मानव
िंिि ाधन ववकाि मतिं ्रालय दवारा आधथकू िमथनू हदया गया ै।

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सशिा

ये चनै ल देखखए:
जीवववज्ञान चनै ल 19
Biology: Channel 19
www.youtube.com/channel/UCqiFTyCxFFMAN_lhAzIkdpA/videos

रिायनशास्त्र चनै ल 20
Chemistry: Channel 20
www.youtube.com/channel/UC3Zv0XxBjYlWMjbMv8ODE8Q/videos

गखणत चनै ल 21
Mathematics: Channel 21
www.youtube.com/channel/UCfz4W0rG8HoyyrrK6qNc1rA/videos

भौनतकी चनै ल 22
Physics: Channel 22
www.youtube.com/channel/UCwNr8peMxn8-Nc2V_RZsRvg/videos

ये ववडडयो आप दरद दशनू के डडश DTH TV पर भी देख िकते ंै और इिकी पदरी िदची चनै ल उवनीि, बीि,
इक्कीि, बाईि पर उपलब्ध ै।

www.swayamprabha.gov.in/index.php/ch_allocation
(डब्ल्यद डब्ल्यद स्वयंपि ्रभा डॉट कोम डॉट इन/इंिडके ्ि पीएचपी/िीएच_एलोके शन) पर जाकर अेाप देखंे।

अब ववदयाधथयू ों को म ँागी और दरद दराज़ की र्टयशद न लेने की कोई ज़रूरत न ीिं! अब वे घर बठै े ी मफ़ु ्त मंे
एक अच्छी सशिा पा िकते ंै।

िरकार और अध्यापकों का य गठबधंि न इि बार ित्य ी स्वयिंप्रभ, स्वमजु जवल और स्वतंित्र सशिा का बीड़ा
उठा र ा ै! जय ह वद!

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बी दन— सिगंि ापरु का स्थानीय पकवान

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अनु सिघंि ल व्यजिं न
ह वदी अध्यावपका (सिगिं ापुर)
सामग्री:
पााँि लोगों के सलए टोफद के २०० ग्राम
बनाने मंे लगने वाला समय: ३ प्याज मीडडयम िाइज़ के , पतले-पतले आकार में कटे ुए
लगभग आधा घंटि ा १ री और १ लाल सशमला समच,ू लम्बे पतले आकार मंे कटी ुई
आधी पत्तागोभी कटी ुई
२ गाजर, लम्बे और पतले आकार मंे कटी ुई
१ कप पालक के पत्ते
५ लाल समचू (या स्वाद के अनुिार अधधक)
३-४ ल िनु के फली, बारीक कटी ुई
बी दन नडद ल्ि
स्वादानुिार नमक, काली समचू और नीबंि द का रि
बारीक काटी ुई िाग वाली प्याज़

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व्यिजं न

ववच् :
एक बड़े बतनू मंे पानी उबाल लें|
बी दन नदडल्ि को बि १ समनट के सलए डु बोएँ,ा कफर छानकर अलग रखंे|

टोफद को टु कड़ों में काट लंे जिै े आप पनीर काट र े ों|
िुन रे भदरे रंिग तक कड़ा ी में टोफद को िॉटे करंे, कफर अलग िे रखंे|
रिंग मंे पारदशी ोने तक कड़ा ी मंे प्याज़ और ल िुन को िॉटे करंे|
पालक को छोड़कर शिे िजब्ज़यााँ भी डाल दें|

एक चॉपर में लाल समचू को धीरे-धीरे पीिकर, पेस्ट बनने तक पानी डालें|
अब तक जो कु छ भी तैयार ककया ै, उिे तेज़ आचाँ पर कड़ा ी में डालकर टॉि करंे|
स्वादानुिार नमक, काली समचू और नीबिं द का रि डालें|
आखखर में पालक की पवत्तयाँा भी कड़ा ी मंे डालकर लके िे टॉि करंे|
बारीक कटे ुए िाग वाले प्याज़ के िाथ िजाएँा|
गमाूगमू परोिें

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त्यो ार

अक्तबू र से हदसबं र तक के त्योहार व ससगं ापरु समय

अक्तबू र ७ नवम्बर २०१८ हदवाली
१० अक्तदबर २०१८ शारदीय नवरात्रत्र कलश लक्ष्मी पदजा मु दतू ७ बजकर २२ समनट िे ९
स्थापना (श्री लक्ष्मीनारायण मंहि दर, सिगिं ापरु ) बजकर ११ समनट तक
८ नवम्बर २०१८ गोवधनू पदजा
१८ अक्तबद र २०१८ कलश उदयापन, वन (श्री ९ नवम्बर २०१८ भाई दजद
लक्ष्मी नारायण महंि दर सिगंि ापुर) टीका मु दतू २ बजे िे िे ४ बजकर २३
समनट तक
१९ अक्तबद र २०१८ दश रा १३ नवम्बर २०१८ छठ पजद ा
२३ नवम्बर २०१८ कानतकू पदखणमू ा
२७ अक्तदबर २०१८ करवा चौथ (कथा-पदजन
श्री लक्ष्मी नारायण मंहि दर सिगिं ापरु ) नोट: बदलाव िंभि व ै|
चरिं ोदय- ९ बजकर २० समनट पर सिगंि ापुर
िमय

३१ अक्तबद र २०१८ अ ोई अष्टमी

नवम्बर
५ नवम्बर २०१८ धनतेरि
पजद ा मु दतू –
प्रदोि काल ६ बजकर ४६ समनट िे ९
बजकर ११ समनट तक
विृ भ काल ७ बजकर ३० समनट िे ९ बजकर
३६ समनट तक

६ नवम्बर २०१८ नरक चतुदूिी

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ह दिं ी के वा क

मेरे सलए ससगं ापरु आखखर है क्या?

अजस्मता राजा

छात्रा, सिगिं ापरु

सिगंि ापरु मंे जवम िे ककशोरावस्था तक िमय त्रबताने के बाद, अब
जब इि भदसम िे अलववदा लेने का िमय दस्तक दे र ा ै, मरे े
मन में कई भावनाओिं ने धमाचौकड़ी मचा दी ै। एक तरफ़ ख़शु ी
और उल्लाि िे भरे एक नए िफ़र की उड़ान और दिद री तरफ़,
अपने पररवार और ख़ाि दोस्तों िे जुदाई का थोड़ा ग़म। जजि
वातावरण ने मेरे मन-प्राणों मंे एक िगु ंिध म काई ै, कु छ ी हदनों
में य एक अलग-िी ख़शु बद को घेरने वाली ै।

अठार विों के इि िनु रे िफ़र के पश्चात, मंै पदरे
ववश्वाि के िाथ य क िकती दाँ कक मरे ा जीवन
ब ुत ी ि ज और िुगमता के िाथ बीता। बचपन
िे ी मेरे माता-वपता ने मुझे भारतीय िसिं ्कृ नत िे
ववलग न ीिं ोने हदया। अगर आप मेरे पररवार को
देखेंगे, आपको कतई भी भनक न ींि लगेगी कक म
िब सिगिं ापरु मंे बीि िालों िे बिे ुए ैं। भारतीय
िसिं ्कृ नत के मापदिंडों और सिगंि ापुर मंे प्राप्त उत्तम
सशिा के आधार पर ी मनैं े कई प लुओिं में िफलता
प्राप्त की ै, जैिे कक मैं अपने स्कद ल में ेड गलू थी,
काफ़ी िारे कायिू म और प्रनतयोधगताओंि की व्यवस्था
करती थी और अपने सशिकों के िाथ उनके कायों मंे
अपना ि योग देती थी।

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ह दिं ी के वा क

स्कद ल में ी न ीं,ि मनंै े कई जग ों में िमाज िेवाएँा पर मैं अपने डॉक्टर बनने के िपने को यथाथतू ा मंे
की ंै, जैिे कक अस्पतालों मंे बिे ारे मरीज़ों के िंिजोने वाली दँा। इिका श्रेय मैं अपने असभभावकों,
िाथ िमय व्यतीत करना, दान-पात्र में धन इकत्र स्कद ल के अध्यापक- अध्यावपकाओिं और अपने वप्रय
करना, िामुदानयक कें रों मंे ववसभवन नतृ ्य कलाओिं भाई-ब न को देना चा दाँगी जजव ोंने र क़दम पर
िे लोगों का ध्यान सिगिं ापरु के ब ुजातीय िभ्यता- मेरा मनोबल बनाए रखा। मंै इि बात को भी
िसंि ्कृ नत की तरफ़ कें हरत करना। मझु े ऐिा प्रतीत नज़रअवदाज़ न ीिं कर िकती कक जो अनभु व मझु े
सिगंि ापुर के जाने-माने ‘जक्लननक्ि’ और अस्पतालों
ोने लगा कक जज़दिं गी मंे पढ़ाई के अलावा भी ब ुत मंे समला ै, उिकी वज िे ी मरे े कररयर को कई
म त्त्वपदणू चीज़ंे ोती ैं, जैिे अपने अजस्तत्व को फ़ायदे समले ैं, जो मझु े दनु नया के ककिी कोने मंे
एक िाथकू वज़दद देना और िवपू ्रथम एक इतनी आिानी िे न ीिं समलता। य ाँा मरे ी योग्यता
स्वाथरू ह त िामाजजक प्राणी का व्यजक्तव अपनाना। को प चाना गया और मझु े कई मौके हदए गए।
इन िब कायों ने मझु े एक िमझदार और नैनतक य ााँ की अनत उत्कृ ष्ट पढ़ाई, युवाओिं के सलए
इंििान बनाया और मुझे िमय ननयोजन की कु शलता अनधगनत िुववधाएाँ और अविरों की वज िे मरे े
में ननपणु ककया। जिै े यवु ा का भववष्य स्वखणमू ुआ ै।

मनंै े बार वींि किा मंे आई बी पाठ्यिम चनु ा था अपने देश िे कोिों दरद , UK जाने िे
और उिमंे मनैं े अच्छे अकिं प्राप्त ककए जजिके बल प ले मंै सिगंि ापरु मंे अपने पररवार और
दोस्तों के िाथ िमय व्यतीत कर र ी
दाँ। मुझे ख़शु ी ै कक य ााँ मरे े जीवन का
िफ़र ब ुत ी रोमांिचक र ा ै ज ाँा मनंै े
एक आदशू पररवशे में अच्छे गणु ों िे
अपने व्यजक्तव को ननखारा ै। मैं आशा
करती दँा कक UK में अपनी धचककत्िा
ववज्ञान की डडग्री पणद ू करने के पश्चात ्
भववष्य में सिगंि ापरु के धचककत्िाजगत में
अपना योगदान दाँ।द

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मझु े भी कु छ क ना ै! (आपकी प्रनतकियाएँा)

अकंि देखा भी और पढ़ा भी क्योंकक दशनू ीय भी ै और पठनीय भी| मुखपषृ ्ठ ब ुत समधथकल ै अिजं सल त्रत्रपाठी

को बधाई| माक काइ फंि ग डरै न का भारत भ्रमण ब ुत ि ज और िरल ै| िसंि ्मरण जजतने िरल और ि ज
ोते ंै उतने ी ववश्विनीय लगते ंै| सिगंि ापरु मंे यवु ाओंि के सलए ज़रूरी िनै नक प्रसशिण की तज़ू पर इिे

िभी देशों में ोना चाह ए| स्वतंित्रता के बाद भारत मंे य ए.िी.िी. और बाद में एन.िी.िी. के रूप मंे बड़े

जोर-शोर िे शरु ू ुआ था लेककन अब व बात न ीिं र ी| सशिा को के वल रर्टटा लगाने और व्याविानयक
कालेजों में चनु े जाने तक िीसमत कर हदया गया ै, बड़ी ननदूयता के िाथ|

कु ल समलकर अच्छा अिंक सिगंि ापुर को जानने-िमझाने की दृजष्ट िे भी|

अवय बातों के अलावा मह ला पत्रत्रका िशक्तीकरण की दृजष्ट िे भी म त्त्वपदणू ै|

इि शौक को बनाए रखें और बढ़ाते र े| रमेश जोशी

अमरीका

सिगंि ापरु िगिं म का आवरण पषृ ्ठ ब ुत ी िुंदि र और अपने आप में अनठद ा ै। सिगिं ापरु मंे राष्रीय िेवा के

अतंि गतू वदीबदध राष्रीय िेवाओंि की अननवायतू ा की वधै ाननक प्रनतकिया के बारे में बताया गया ै जो ब ुत ी

िदिुं र और मन को छद लेने वाला ववचार ै।

'एक रास्ता ै जजिंदगी' क ानी ब ुत ी भाव ववभोर करने वाली ै। मौत जो कक सियाधचन के ब ादरु िनै नक

नमु नथप्पा कोप्पड़ (िेना पदक िे िम्माननत), को िमवपतू ै। य पढ़कर मन गवू िे वितू ो जाता ै।

जजंदि गी की जजिंदाहदली के बारे में धचत्र गपु ्ता जी के ववचार ब ुत ी प्रशिंि नीय ै और ववदेशी भािा के मुख िे

मरे ी प ली भारत यात्रा के िसिं ्मरण अपने आप में ी ववशिे ै। इिके अनतररक्त िबिे अच्छी बात य ै कक

जुलाई िे सितिबं र मा तक के त्यौ ार एवंि उनके िमय के बारे में भी बताया गया ै। ह दंि ी के वा क के

अतिं गतू जो मुददा अभय सिघिं ल जी ने उठाया ै व त्रबल्कु ल ित्य ै कक आधनु नक िामाजजक मीडडया यवु ाओिं

को िमाज िे ब ुत दरद ले जा र ा ै क्योंकक िवंि ाद न ींि र े ंै, भावनाएंि न ीिं र ी ंै, कम ोती जा र ी ंै।

आपिी तालमले , आपिी बातचीत मानो क ींि गुम िी ो गई ै। य एक ऐिी िमस्या ै जो आने वाले िमय

मंे ब ुत ी गंिभीर रूप धारण करने वाली ै। इिसलए इिके प्रनत में अभी िे चते ना ोगा। सिगिं ापुर िंगि म

मशे ा िे ी कु छ नया, कु छ भावुक, कु छ ििंवेदनशील, कु छ िामाजजक, कु छ ननै तक, कु छ मनोरंिजक, कु छ

पोिक, कु छ ि नशील ,कु छ िजृ नशील, कु छ असभ- प्ररे णात्मक , ऐनत ासिक और कु छ भववष्य को लेकर इन

िभी िामधग्रयों का एक ििगं ्र प्रस्ततु करने का प्रयाि करता ै ,जो वाकई कात्रबले तारीफ ै य गागर मंे

िागर ै। मंै इिके उजजवल भववष्य की कामना करती दाँ और आशा करती दाँ कक य पत्रत्रका इिी तर

िाह त्य और िमाज की िवे ा में अग्रिर र े तथा आने वाली पीहढ़यों को इिी तर अपना ज्ञान और अनुभव

बाटंि ती र े । डॉ ववदिु ी शमाू
इव ीिं शभु कामनाओंि के िाथ धवयवाद प्रेवित करती दाँ। हदल्ली, भारत

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वस्तओु िं की एक प चान ह दिं ी के वा क

ऋवि रायपाटी
(छात्र - एिंग्लो चाइनीज़ इिंडडपेंडंेट स्कद ल,

सिगंि ापरु ))

म आम वस्तुओिं में चे रे क्यों देखते ंै? क्या य रेखाएँा ोती ैं, तब म उिमंे एक चे रा देखने
मारी एक मनगढ़ंित रचना ै, या कफर कोई लगते ंै। विै े भी, परेडोसलया इि कलयगु की
मानसिक रोग, जजिका अनभु व म िहदयों िे करते आधनु नकीकरण के बढ़ते प्रभाव िे फै ल र ा ै।
आए ंै, लेककन इििे पदणतू ः अनजान ंै। मारे आजकल म शब्दों िे न ी,ंि चे रों िे अपने फ़ोन पर
शरीर की इि अनोखी कला का नाम ै “परेडोसलया”, भी वातालू ाप करते ैं क्योंकक “इमोजज” की
अथातू अचर वस्तुओंि मंे एक चे रा देख पाना। लोकवप्रयता जो बढ़ चकु ी ै! इि पथ पर चलत-े
चलते म ककिी भी वस्तु में आखाँ ंे, ोंठ, दााँत,
परेडोसलया को म अक्िर नज़रअदिं ाज करते ैं, इत्याहद देख िकते ंै।
क्योंकक इिका मारे बदन पर कोई ववशिे प्रभाव तो
न ींि ै, लेककन मखु ्य लक्ष्य बि अपने पयाूवरण को लेककन कु छ लोग ऐिे भी ैं, कक परेडोसलया को एक
िमझने की िमता बढ़ती ै। मारी आँखा ंे, दनु नया रोग िमझते ैं, और इलाज ढदँाढते र ते ैं। मेरा
देखने की खखड़की ै, जो मरे े मुतात्रबक़, दे के िबिे जवाब तो य ै, कक वे य ा-ाँ व ााँ भटककर अपना
शजक्तशाली भाग ैं। जब म पैदा ोते ैं, तब य ींि िमय बबादू कर र ी ैं। वे एक ऐिी िमता पर
आँाखें एक वस्तु को न ीिं देखत,े बजल्क एक चे रे को “रोग” का नाम थोप र े ंै जजिके दवारा म अपने
ढदँाढते ंै, या तो अपनी माँा या वपता का चे रा, बा री पयावू रण को िमझ िकते ैं और प्रकृ नत के
क्योंकक जब वे मारी दृजष्ट में ैं, तब म िरु क्षित वरों का आनदिं उठा िकते ैं।
म ििद कर िकते ंै। य ीिं आदत मारे उम्र के
ववकाि के िाथ-िाथ ववकसित ो जाती ै और म इिसलए, परेडोसलया पर ज़्यादा ग़ौर मत कीजजएगा,
िाधारण िी वस्तओु ंि मंे व चे रा देखने लगते ैं, लेककन उिको स्वीकाररए ज़रूर, क्योंकक इििे ी म
और एक तर िे एक वस्तु को प चान देना। अपने मनपिंिद खाना या खखलौने को प चान िकते
लेककन परेडोसलया का एक और कारण भी ै। य
मानवता की एक ववशिे दनर ै, कक म त्रबखरी ुई ंै। मतृ वस्तओु िं मंे एक जीवन देखना, य ककतना
चीज़ों मंे भी िमबदधता देखते ंै, इिसलए जब कोई अनमोल ै, मनषु ्यत्व की ििकं ल्पना िे परे ै।
वस्तु लकड़ी की तर खरु दरी ोती ैं, उिपर कई

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व्याकरण

मुहावरे/लोकोक्क्तयााँ

महु ावरों का अड्डा - अट्ठा

छोड़ दे
अगर-मगर मत कर, आाँख हदखाना छोड़ दे,
अक़्ल के घोड़े दौड़ा ले, तद आाखँ चरु ाना छोड़ दे।
अपनी खखचड़ी अलग पकाले, आखाँ उठाना छोड़ दे,
आँखा ों मंे न धलद झोंक, उल्लद बनाना छोड़ दे।

जो-
काला अिर भिैं बराबर, समले ककनारा कर लेना,
काग़ज़ काले कर लेना चा े, काम तमाम न करना।
कानों कान ख़बर न ोवे, तमु ऐिे कान क़तर लेना,
कान पे जाँद तक न रेंगे यँाद कान के कच्चे मत ोना।

अजंि ली त्रत्रपाठी

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िे त

सेहत की बात, दादी-नानी के नसु ्ख़े - अजवाइन

पनद म चघु
(ह दिं ी अध्यावपका - सिगिं ापरु ))

आपने देखा ी ोगा कक अजवाइन का उपयोग परद ी, अजवाइन वजन घटाने में काफ़ी मददगार ै|
मठरी, पराठे और भी अनेक चीज़ों का स्वाद बढ़ाने के अजवाइन का पानी पीने िे शरीर का
सलए ककया जाता ै| लेककन क्या आप जानते ंै कक मेटाबॉसलजम बढ़ता ै, जजििे चबी घटने लगती
अजवाइन न सिफू खाने का स्वाद बढ़ाती ै बजल्क
य आपको पेट िे जड़ु ी बीमाररयों को भी दरद रखने मंे ै| एक धगलाि पानी मंे रात भर अजवाइन
मदद करती ै| अजवाइन औिधीय गणु ों का भंिडार ै सभगोकर रख दीजजए| आप चा ंे तो पानी में
तभी तो रिोईघर के िाथ ी आयवु दे में भी इिका अजवाइन उबालकर भी पी िकते ैं| इिमंे श द
प्रयोग ककया जाता ै| शायद म न ीिं जानते कक समलाकर खाली पटे पीने िे जल्दी फायदा ोता
अजवाइन में थाइम नामक एक बे द ज़रूरी तेल पाया
जाता ै जो कक खशु बदद ार गंिध छोड़ता ै| इिीसलए ै|
इिे खाते िमय लोगों का मन खशु ो जाता ै|

आइए जानते ंै इि मामलद ी-िी हदखने वाली अजवाइन के
कु छ फायदे!

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िे त अजवाइन लेने िे ददू में चबाएँा और जब तक कक पीने
आराम समलता ै लेककन की इच्छा िमाप्त न ो
 अजवाइन वजन घटाने में इि बात का ध्यान रखना अजवाइन चबाते र ें और रि
काफ़ी मददगार ै| अजवाइन चाह ए कक अजवाइन की चिद ते र ें| कु छ हदन तक
का पानी पीने िे शरीर का तािीर गरम ोती ै इिसलए ऐिा करते र ंे जब तक कक
मेटाबॉसलजम बढ़ता ै, जजििे यहद ब्लड फ्लो अधधक ो पीने की आदत न छद ट जाए|
चबी घटने लगती ै| एक
धगलाि पानी मंे रात भर

अजवाइन सभगोकर रख इिका इस्तेमाल न ीिं करना  यहद आपकी खाािँ ी ठीक न ीिं
दीजजए| आप चा ें तो पानी मंे चाह ए| ो र ी ै तो अजवाइन को
अजवाइन उबालकर भी पी
िकते ंै| इिमंे श द  यहद आपके चे रे पर मँाु ािे पानी मंे समलाकर उबालकर
समलाकर खाली पटे पीने िे ैं तो द ी के िाथ थोड़े-िी उिमंे काला नमक समलाकर
जल्दी फायदा ोता ै| पीने िे खाििं ी मंे आराम
अजवाइन पीिकर इि लेप समलता ै| अजवाइन न सिफू
 कई बार मह लाओिं को को चे रे पर लगाएँा और िदख छाती मंे जमे कफ िे
पीररयड्ि के िमय कमर जाने पर इिे गमू पानी िे छु टकारा हदलाती ै बजल्क
और पटे के ननचले ह स्िे मंे िाफ कर लंे| कु छ ी हदनों िदी और िाइनि में आराम
ब ुत ददू ोता ै| ऐिे में मंे मिुं ािे गायब ो जाएागँ े| देती ै|
गनु गुने पानी के िाथ
 शराब पीने की आदत छु ड़वाने
के सलए चटु की भर अजवाइन

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 अजवाइन मधमु े रोधगयों के सलए भी ब ुत िे त
लाभकारी ै क्योंकक य फिं गल ििंि मण िे
बचाती ै| ोता ै|

 यहद मिदड़ों मंे िदजन ो तो गुनगुने पानी में सिरददू िे रा त के सलए भी अजवाइन के पानी
अजवाइन के तेल की कु छ बँादद ें डालकर कु ल्ला का िवे न लाभदायक ै|
करने िे आराम समलेगा| इिके अलावा
अजवाइन को भदनकर उिे पीिकर पाउडर शोध के अनुिार अजवाइन में उम्र बढ़ने िे
बना लंे| इििे ब्रश करने िे मिदड़ों के ददू रोकने वाले गणु ब ुत मात्रा में ोते ंै|
और िजद न में रा त समलती ै| अजवायन के ब ुत िे गणु ैं| अजवाइन पेट की
कई बीमाररयों का रामबाण इलाज ै| इिे अपने
अजवाइन का पानी रोज िबु खाली पटे वपया िाथ यात्रा में भी रखा जा िकता ै| इिका
प्रयोग रोगों के अनुिार कई प्रकार िे ोता ै|
जाए तो य परद े शरीर के सलए लाभदायक य ी न ीिं अगर डाइजेशन ि ी करना ो तो भी
अजवाइन िे बे तर कु छ न ी!ंि

फोटो: https://www.naturalfoodseries.com/11-benefits-carom-seeds-ajwain/

नोट: य ााँ य बताना आवश्यक ै कक बरिों िे भारत में ये
चीज़ें काम मंे लाई जा र ी ंै और लोगों को फ़ायदा प ुँाचा र ी

ंै परवतु र व्यजक्त अलग ोता ै अत: आप अपने धचककत्िक
िे परामशू के बाद ी ककिी भी जानकारी को आजमाएाँ|

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आपके ववचार और प्रनतकियाएाँ िादर आमतिं ्रत्रत ंै:

[email protected]

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