भऊ आवाज़ भऊ आवाज़
नगय ऩालरका ऩरयषद, भऊ
द्वाया प्रकालित;
ई-ऩत्रिका
अक्टू फय-2016
E-Newsletter October, Page 1
भऊ आवाज़
श्री विद्यासागर यादि श्रीमती शाहहना
(अधधशासी अधधकारी) (अध्यऺ)
नगय ऩालरका ऩरयषद, भऊ के नगयवालिमों को अक्टू फय 2016 के ई-ऩत्रिका भऊ आवाज़ भंे
स्वागत है | अक्टू फय भाह भें हुमे ववकाि कामो को ई-ऩत्रिका भऊ आवाज़ के द्वाया
आऩिफ को फताना चाहता हूॉ | भऊ नगय ऩालरका प्रत्मेक भाह ई-ऩत्रिका भऊ आवाज़ के
द्वाया नगय ऩालरका भंे हुमे ववकाि कामो को आऩिफ के िाभने राने का प्रमाि कयता है |
जजििे भऊ नगय ऩालरका ऩरयषद के नगयवािी होने के कायण राबाजववत हो िके |
अक्टू फय भाह भंे नगय ऩालरका के ववकाि के लरमे फहुत िी मोजनामंे अऩनाई गमी औय
िाथ ही िाथ फहुत िे कामो का लिरावमाि भाननीम अध्मक्ष व अधधिािी अधधकायी, नगय
ऩालरका ऩरयषद भऊ के द्वाया ककमा गमा | जजिके फाये भंे ववस्ताय रूऩ िे ई-ऩत्रिका भऊ
आवाज़ भें उऩरब्ध है | नगय ऩालरका ऩरयषद भऊ, ववकाि भंे िहमोग देने के लरए आऩ
िबी नगयवालिमों का आबायी हंै |
E-Newsletter October, Page 2
भऊ आवाज़
Mr. Vidhyasagar Yadav
(Executive Officer)
I am happy to present the October 2016 issue to all of you. A number of projects have
been commissioned in the month of October. The former will help smoothen the flow of
traffic, reduce the travel time of citizens, ease the congestion and reduce pollution on Nagar
Palika Parishad Mau’s road. There have been a lot of lessons to learned and these insights
will certainly stand in good stead with us in our endeavors in future. The one thing that
stands out is the most active participation of citizens. We, the residence of the Nagar Palika
Parishad Mau respective of ages, castes, creeds, religions, localities have untidily participat-
ed in creation of Mau’s Swachh Nagar Palika Parishad proposal. As I look into the future
with great expectation, it is this one aspect of the municipality which gives me the greatest
hope!
We in the Nagar Palika Parishad Mau, would be very happy to receive your feedbacks on
all matters that you feel are important.
E-Newsletter October, Page 3
भऊ आवाज़
Smt. Shahina
(Chairman)
I am delighted to present the tasks and issue of Mau Nagar Palika by E-Patrika Mau
Awaz in October 2016. Nagar Palika Parishad Mau is grateful to the citizens who dis-
played tremendous enthusiasm and whole heartedly participated in numerous activi-
ties throughout this period. All of us should bear in mind that this is not end but a be-
ginning of the exercise pertaining to development and Swachh Mission program. The
coming years will surely be very hectic and eventful. Mau promises to leave no room
for complacency and will work even harder to achieve the targets. We solicit active
participation from the citizens in our endeavor.
We sincerely believe that decisions taken by Nagar Palika Parishad Mau should benefit
Nagar Palika Parishad Mau and the citizens in the ultimate analysis. Many projects
process in work in Nagar Palika Parishad Mau for development our Nagar Palika and
citizens. Thanks to all citizens of Nagar Palika Parishad Mau for supporting to develop
Mau.
E-Newsletter October, Page 4
२ अक्टू फय भहात्भा ग़ाॊधी जमॊती
एक ही ददवि ऩय दो ववबूततमों ने बायत भाता को गौयवाजववत ककमा। गाधॉ ी जी एवॊ रार फहादयू
िास्िी जिै ी अदबतु प्रततबाओ का 2 अक्टू फय को अवतयण हभ िबी के लरमे हषष का ववषम है। ित्म औय
अदहिॊ ा के फर ऩय अगॊ ्रेजों िे बायत को स्वतिॊ कया कयके हभ िबी को स्वतिॊ बायत का अनभोर उऩहाय
देने वारे भहाऩुरूष गाॉधी जी को याष्ट्र ने याष्ट्रवऩता के रूऩ भें िभाजवनत ककमा। वहीॊ जम जवान, जम
ककिान का नाया देकय बायत के दो आधाय स्तबॊ को भहान कहने वारे भहाऩरु ूष रार फहादयु िास्िी जी ने
स्वतॊि बायत के दिू ये प्रधान भिॊ ी के रूऩ भंे याष्ट्र को ववश्वऩटर ऩय उच्चकोटी की ऩहचान ददराई। आज
इि रेख भंे भंै आऩके िाथ याष्ट्र वऩता भहात्भा गाॉधी िे िम्फधॊ धत कु छ योचक फातंे िाझा कयने का प्रमाि
करॉ गी| याष्ट्रवऩता भहात्भा ग़ाॊधी अथातष भोहन दाि कयभचदॊ ग़ाधॊ ी का जवभ २ अक्टू फय, १८६९ को गुजयात
के कादिमावाड़ प्रावत भंे ऩोयफॊदय नभक स्थान ऩय हुआ था | भहात्भा ग़ाॊधी के इि जवभ-ददवि को िभचू ा
याष्ट्र एक एक याष्ट्रीम ऩवष के तौय ऩय भनाता है | गाधॊ ीजी के वऩता कयभचदॊ गाधॊ ी याजकोट के दीवान थे।
इनकी भाता का नाभ ऩतु रीफाई था। वह धालभकष ववचायों वारी थी। उवहोंने हभिे ा ित्म औय अदहिॊ ा के
लरए आदॊ ोरन चराए। गाॊधीजी वकारत की लिक्षा प्राप्त कयने के लरए इॊ्रडैं भी बी गए थे। वहाॊ िे रौटने के
फाद उवहोंने फॊफई भंे वकारत िरु ू की। भहात्भा गाधॊ ी ित्म औय अदहिॊ ा के ऩुजायी थ।े एक फाय गाधॊ ीजी
भकु दभे की ऩयै वी के लरए दक्षक्षण अरीका बी गए थ।े वह अगॊ ्रेजों द्वाया बायतीमों ऩय अत्माचाय देख फहुत
दखु ी हुए। उवहोंने ड भीाॊड भीी मािा बी की। वह कई फाय जेर गए। अफ िाया देि उनके िाथ था। रोग उवहें
याष्ट्रवऩता कहने रगे। अतॊ भंे बायत को 1947 भें स्वतॊिता प्राप्त हुई। गाधॊ ीजी िादा जीवन त्रफताते थे।
उवहोंने हभको अदहिॊ ा का ऩाि ऩढामा। वह एक िभाजिुधायक थे। उवहोंने छु आ-छू त को दयू कयने का
प्रत्मन ककमा। 30 जनवयी, 1948 को गोरी भायकय उनकी हत्मा कय दी गमी। भहात्भा गाधॉ ी के ऩूवष बी
िाजवत औय अदहिॊ ा की अवधायणा पलरत थी, ऩयवतु उवहोंने जजि प्रकाय ित्माग्रह, िाजवत व अदहिॊ ा के
यास्तों ऩय चरते हुमे अगॊ ्रेजों को बायत छोड़ने ऩय भजफूय ककमा, उिका कोई दिू या उदाहयण ववश्व इततहाि
भंे देखने को नहीॊ लभरता। तबी तो प्रख्मात वैज्ञातनक आइॊस्टीन ने कहा था कक -‘‘हज़ाय िार फाद आने
वारी नस्रें इि फात ऩय भुजश्कर िे ववश्वाि कयेंगी कक हाड़-भािॊ िे फना ऐिा कोई इविान धयती ऩय कबी
आमा था।’’ 2 अक्टू फय को अतॊ ययाष्ट्रीम स्तय ऩय अतॊ ययाष्ट्रीम अदहिॊ ा ददवि के रऩ भंे बी भनामा जाता है
क्मोंकक अऩने ऩयू े जीवन बय वह अदहिॊ ा के उऩदेिक यहे। 15 जून 2007 को िॊमकु ्त याष्ट्र िाभावम िबा
द्वाया 2 अक्टू फय को अॊतययाष्ट्रयीम अदहिॊ ा ददवि के रऩ भें घोवषत ककमा गमा है।
E-Newsletter October, Page 5
दिहया की हाददषक िबु काभनामंे !
दिहया दहवदओु ॊ का एक प्रभखु त्मोहाय है । मह त्मोहाय अलिवन भहीने के िकु ्र ऩक्ष भें दि ददनों तक भनामा
जाता है । इन ददनों भाॉ दगु ाष के ववलबवन रूऩों की ऩजू ा-अचनष ा की जाती है । नवयाि भें भतू तष ऩजू ा भंे ऩजश्चभ
फगॊ ार का कोई िानी नहीॊ है जफकक गजु यात भें खरे ा जाने वारा ड भीाॊडड भीमा फजे ोड़ है। ऩयू े दि ददनों तक त्मोहाय की
धूभ यहती है। रोग बजक्त भंे यभे यहते हंै। भाॊ दगु ाष की वविषे आयाधनाएॊ देखने को लभरती है।ं भाॉ दगु ाष िजक्त की
अधधष्ट्िािी देवी हंै । जीवन भें िजक्त का फहुत भहत्त्व है, इिलरए बक्तगण भाॉ दगु ाष िे िजक्त की माचना कयते हंै
। ऩ.ॊ फगॊ ार, त्रफहाय, झायखॊड भी आदद प्रातॊ ों भें भदहषाियु भददषनी भाॉ दगु ाष की प्रततभा स्थावऩत की जाती है । नौ ददनों
तक दगु ाषिप्तिती का ऩाि चरता यहता है । िखॊ , घडड़मार औय नगाड़े फजते हंै । ऩजू ा-स्थरों भें धूभ भची यहती है
। तोयणद्वाय िजाए जाते हैं । नवयाि भें व्रत एवॊ उऩवाि यखे जाते हैं । भदॊ दयों भंे वविषे ऩजू ा-अचनष ा होती है ।
प्रिाद फाॉटने औय रगॊ य चराने के कामकष ्रभ होते हंै । दिभी के ददन त्मोहाय की िभाजप्त होती है। इि ददन को
ववजमादिभी कहते ह।ैं फयु ाई ऩय अच्छाई के प्रतीक यावण का ऩतु रा इि ददन िभचू े देि भंे जरामा जाता है। इि
ददन बगवान याभ ने याक्षि यावण का वध कय भाता िीता को उिकी कै द िे छु ड़ामा था। औय िाया िभाज
बमभकु ्त हुआ था। यावण को भायने िे ऩवू ष याभ ने दगु ाष की आयाधना की थी। भाॊ दगु ाष ने उनकी ऩजू ा िे प्रिवन
होकय उवहंे ववजम का वयदान ददमा था। यावण दहन आज बी फहुत धभू धाभ िे ककमा जाता है। इिके िाथ ही
आततिफाजजमाॊ छोड़ी जाती ह।ंै दगु ाष की भतू तष की स्थाऩना कय ऩजू ा कयने वारे बक्त भतू त-ष वविजनष का कामकष ्रभ बी
गाज-े फाजे के िाथ कयते हैं। उत्तय बायत के ववलबवन प्रातॊ ों भें याभरीरा का भचॊ न होता है । कहा जाता है कक
ववजमादिभी के ददन बगवान याभ ने रकॊ ा नयेि अहॊकायी यावण का वध ककमा था । यावण अत्माचायी औय घभडॊ भीी
याजा था । उिने याभ की ऩत्नी िीता का छर िे अऩहयण कय लरमा था । िीता को यावण के चगॊ रु िे भकु ्त
कयाने के लरए याभ ने वानययाज िगु ्रीव िे भिै ी की । वे वानयी िने ा के िाथ िभदु ्र ऩाय कयके रकॊ ा गए औय यावण
ऩय चढाई कय दी । बमकॊ य मदु ्ध हुआ । इि मदु ्ध भंे भेघनाद, कॊु बकण,ष यावण आदद िबी वीय मोद्धा भाये गए । याभ
ने अऩने ियण आए यावण के बाई ववबीषण को रकॊ ा का याजा फना ददमा औय ऩत्नी िीता को रके य अमोध्मा की
ओय प्रस्थान ककमा । याभरीरा भें इन घटनाओॊ का ववस्ततृ दृश्म ददखामा जाता है । इिके द्वाया श्रीयाभ का भमादष ा
ऩरु षोत्तभ रूऩ उजागय होता है । बक्तगण दिहये भंे भाॊ दगु ाष की ऩजू ा कयते हंै। कु छ रोग व्रत एवॊ उऩवाि कयते
ह।ैं ऩजू ा की िभाजप्त ऩय ऩयु ोदहतों को दान-दक्षक्षणा देकय ितॊ षु्ट्ट ककमा जाता है। कई स्थानों ऩय भरे े रगते हंै।
E-Newsletter October, Page 6
भुहयषभ ऩवष की िरु आत
मह िभम िन ६० दहजयी का था. कफरष ा जजिे िीरयमा के नाभ िे जाना जाता था. वहाॉ
मजीद िहॊिाह फनाना चाहता था, जजिके लरए उिने आवाभ भें खौप पै राना िरु ू कय
ददमा. िबी को अऩने िाभने गरु ाभ फनाने के लरए मातनामंे दी. मजीद ऩयु े अयफ ऩय
अऩना रतफा चाहता था. रके कन उिके तानािाह के आगे हज़यत भहु म्भद का वारयि इभाभ
हुिनै औय उनके बाइमों ने घटु ने नही टेके औय जभकय भकु ाफरा ककमा.फीवी फच्चों की
दहपाजत देने के लरए इभाभ हुिनै भदीना िे इयाक की तयप जा यहे थ.े फ ही मजीद ने
उनऩय हभरा कय ददमा.वो जगह एक येधगस्तान थी, जजिभे ऩानी के लरए एक नदी थी
जजि ऩय मजीद ने अऩने ितै नकों को तैनात कय ददमा था . कपय बी इभाभ औय उनके
बाइमों ने ड भीटकय भकु ाफरा ककमा. वे रगबग ७२ थ,े जजवहोंने ८००० ितै नकों की फ़ौज को
दाते तरे चने चफवा ददए थे. ऐिा भकु ाफरा ददमा की दशु ्भन बी तायीप कयने रगे. रके कन
वो जीत नही िकते थे. वे िबी तो कु फानष होने आमे थ.े ददष, तकरीप िहकय बखू े प्मािे
यहकय बी रड़ना स्वीकाय ककमा औय मह रड़ाई भहु यषभ २ िे ६ तक चरी आखखयी ददन
इभाभ ने अऩने िबी िाधथमों को कब्र भे िरु ामा.रके कन खुद अके रे अॊत तक रड़ते यहे.
मजीद के ऩाि कोई तयकीफ नही फची औय उनके लरए इभाभ को भयना ना भभु ककन िा हो
गमा. भहु यषभ के दिवे ददन जफ इभाभ नभाज अदा कय यहे थ,े तफ दशु ्भनों ने उवहंे धोखा
िे भाया. इि तयह िे मजीद इभाभ को भाय ऩामा, रके कन हौिरों के िाथ भयकय बी इभाभ
जीत का हक़दाय हुए औय िहीद कहरामा. तख्तो ताज जीत कय बी मे रड़ाई मजीद के
लरए हाय एक फड़ी हाय थी.
उि ददन िे आज तक भहु यषभ के भहीने को िहीद की िहादत के रूऩ भंे माद कयते है .
E-Newsletter October, Page 7
दीवारी की हाददषक िबु काभनामंे !
बायत भें दहवदओु ॊ द्वाया भनामा जाने वारा िफिे फड़ा त्मोहाय है। दीऩों का खाि ऩवष होने के कायण इिे
दीऩावरी मा ददवारी नाभ ददमा गमा। दीऩावरी का भतरफ होता है, दीऩों की अवरी मातन ऩॊजक्त। इि
प्रकाय दीऩों की ऩॊजक्तमों िे ििु ज्जत इि त्मोहाय को दीऩावरी कहा जाता है। इि ददन र्भी के ऩजू न
का वविषे ववधान है। यात्रि के िभम प्रत्मेक घय भें धनधावम की अधधष्ट्िािी देवी भहार्भीजी,ववघ्न-
ववनािक गणेि जी औय ववद्मा एवॊ करा की देवी भातशे ्वयी ियस्वती देवी की ऩूजा-आयाधना की जाती है।
ब्रह्भऩयु ाण के अनिु ाय काततकष अभावस्मा की इि अधॊ ेयी यात्रि अथाषत अधयष ात्रि भें भहार्भी स्वमॊ बूरोक
भें आती हैं औय प्रत्मेक िद्गहृ स्थ के घय भें ववचयण कयती हंै। जो घय हय प्रकाय िे स्वच्छ, िुद्ध औय
िॊुदय तयीके िे िुिज्जत औय प्रकािमकु ्त होता है वहाॊ अिॊ रूऩ भें िहय जाती हंै औय गॊदे स्थानों की
तयप देखती बी नहीॊ। इिलरए इि ददन घय-फाहय को खफू िाप-िथु या कयके िजामा-िॊवाया जाता है। कहा
जाता है कक दीऩावरी भनाने िे र्भीजी प्रिवन होकय स्थामी रूऩ िे िदगहृ स्थों के घय तनवाि कयती हैं।
त्मोहायों का जो वातावयण धनतये ि िे प्रायम्ब होता है,वह इि ददन ऩयू े चयभ ऩय आता है। मह ऩवष अरग-
अरग नाभ औय ववधानों िे ऩयू ी दतु नमा भंे भनामा जाता है। इिका एक कायण मह बी कक इिी ददन
अनेक ववजमश्री मुक्त कामष हुए हैं। फहुत िे िुब कामों का प्रायम्ब बी इिी ददन िे भाना गमा है। इिी
ददन उ्जनै के िम्राट ववक्रभाददत्म का याजततरक हुआ था। ववक्रभ िवॊ त का आयॊब बी इिी ददन िे भाना
जाता है। मानी मह नए वषष का प्रथभ ददन बी है। इिी ददन व्माऩायी अऩने फही-खाते फदरते हैं तथा राब-
हातन का ब्मौया तैमाय कयते हैं। हय प्रातॊ मा क्षिे भंे दीवारी भनाने के कायण एवॊ तयीके अरग हैं ऩय िबी
जगह कई ऩीद़िमों िे मह त्मोहाय चरा आ यहा है। रोगों भंे दीवारी की फहुत उभगॊ होती है। रोग अऩने
घयों का कोना-कोना िाप कयते हैं, नमे कऩड़े ऩहनते हैं। लभिाइमों के उऩहाय एक दिू ये को फाॊटते हैं,एक
दिू ये िे लभरते हंै। घय-घय भें िुवदय यॊगोरी फनाई जाती है, ददमे जराए जाते हंै औय आततिफाजी की
जाती है। फड़े छोटे िबी इि त्मोहाय भें बाग रेते हैं। मह ऩवष िाभदू हक व व्मजक्तगत दोनों तयह िे भनाए
जाने वारा ऐिा ववलिष्ट्ट ऩवष है जो धालभकष ,िासॊ ्कृ ततक व िाभाजजक ववलिष्ट्टता यखता है। अधॊ काय ऩय
प्रकाि की ववजम का मह ऩवष िभाज भंे उल्राि, बाईचाये व प्रेभ का िदॊ ेि पै राता है।
E-Newsletter October, Page 8
गोवधनष ऩूजा
गोवधनष ऩजू ा को दीवारी के अगरे ददन फाद भनामा जाता है। गोवधनष ऩजू ा
ऩॊजाफ, हरयमाना, उत्तय प्रदेि औय त्रफहाय भंे कापी प्रलिद्ध है। ऩयॊऩया के अनिु ाय
इि ददन खाि तौय ऩय गाम के गोफय िे गोवधनष ऩहाड़ फनामा जाता है, जजिे
गोवधनष ऩहाड़ के नाभ िे जाना जाता है। गोवधनष ऩजू ा को अवनकू ट ऩजू ा के
नाभ िे बी जाना जाता है। इि ददन घयों भंे गाम के गोफय िे गोवधनष नाथ जी
की छवव फनाकय उनका ऩूजन ककमा जाता है तथा अवनकू ट का बोग रगामा
जाता है। मह ऩयॊऩया द्वाऩय मुग िे चरी आ यही है। श्रीभद्भागवत भंे इि फाये भें
कई स्थानों ऩय उल्रेख प्राप्त होते हैं। उिके अनुिाय बगवान कृ ष्ट्ण ने ब्रज भें
इॊद्र की ऩूजा के स्थान ऩय काततकष िुक्र प्रततऩदा के ददन गोवधनष ऩवतष की
ऩूजा आयॊब कयवाई थी। इि िॊफॊध भें एक रोकवप्रम कथा है। कथानुिाय बगवान
श्री कृ ष्ट्ण ने इॊद्र का अलबभान चूय कयने के लरए गोवधनष ऩवतष को अऩनी छोटी
उॊ गरी ऩय उिाकय िऩॊ ूणष गोकू र वालिमों की इॊद्र के कोऩ िे यक्षा की थी। जफ
इवद्र का अलबभान चयू हो गमा तफ उवहोने श्री कृ ष्ट्ण िे क्षभा भागॊ ी। िात ददन
फाद श्री कृ ष्ट्ण ने गोवधनष ऩवतष नीचे यखा औय ब्रजफालिमों को प्रततवषष गोवधनष
ऩूजा औय अवनकू ट ऩवष भनाने को कहा। तबी िे मह ऩवष भनामा जाता है।
E-Newsletter October, Page 9
बाई दजू
बाई दजू का त्मोहाय बाई फहन के स्नहे को िदृ ृढ कयता है । मह त्मोहाय ददवारी के दो ददन फाद भनामा
जाता है। दहवदू धभष भें बाई-फहन के स्नेह-प्रततक त्मोहाय भनामे जाते है-एक यक्षाफधॊ न जो श्रावण भाि की
ऩूखणभष ा को भनामा जाता है । इिभें बाई फहन यक्षा की प्रततज्ञा कयता है । दिू या त्मोहाय ' बाई दजू ' का
होता है इिभें फहन बाई की रम्फी आमु की प्राथनष ा कयती है । बाई दजू का त्मोहाय काततकष भाि की
दवु ्तीम को भनामा जाता है ।
बाई दजू व्रत कथा :-
छामा बगवान िमू दष ेव की ऩत्नी हंै जजनकी दो िॊतान हुई मभयाज तथा मभनु ा. मभुना अऩने बाई मभयाज
िे फहुत स्नेह कयती थी. वह उनिे िदा मह तनवेदन कयती थी वे उनके घय आकय बोजन कयें. रेककन
मभयाज अऩने काभ भें व्मस्त यहने के कायण मभुना की फात को टार जाते थे। एक फाय काततकष िकु ्र
द्ववतीमा को मभुना ने अऩने बाई मभयाज को बोजन कयने के लरए फुरामा तो मभयाज भना न कय िके
औय फहन के घय चर ऩड़।े यास्ते भंे मभयाज ने नयक भंे यहनवे ारे जीवों को भकु ्त कय ददमा। बाई को
देखते ही मभनु ा ने फहुत हवषतष हुई औय बाई का स्वागत ित्काय ककमा। मभुना के प्रेभ बया बोजन ग्रहण
कयने के फाद प्रिवन होकय मभयाज ने फहन िे कु छ भागॊ ने को कहा। मभुना ने उनिे भागॊ ा कक- आऩ
प्रततवषष इि ददन भये े महाॊ बोजन कयने आएगॊ े औय इि ददन जो बाई अऩनी फहन िे लभरेगा औय फहन
अऩने बाई को टीका कयके बोजन कयाएगी उिे आऩका ड भीय न यहे। मभयाज ने मभनु ा की फात भानते हुए
तथास्तु कहा औय मभरोक चरे गए। तबी िे मह मह भावमता चरी आ यही है कक काततकष िकु ्र द्ववतीम
को जो बाई अऩनी फहन का आततथ्म स्वीकाय कयते हंै उवहें मभयाज का बम नहीॊ यहता ।
E-Newsletter October, Page 10
भऊ आवाज़
नगय ऩालरका ऩरयषद् भऊ के कभचष ारयमों द्वाया कू ड़ा उिा कय रारी भें ड भीारा जा
यहा है |
E-Newsletter October, Page 11
भऊ आवाज़
नगय ऩालरका ऩरयषद् भऊ के कभचष ारयमों द्वाया िड़क ऩय झाड़ू रगामा जा यहा
है |
E-Newsletter October, Page 12
भऊ आवाज़
२ अक्टू बर के उऩऱक्ष्य मंे नगर ऩालऱका ऩररषद् मऊ में स्िच्छता से जुड़े
कायकय ्रम का आयोजन ककया गया था जजसमे मऊ के अध्यऺ , अधधशाषी
अधधकारी और नगर ऩालऱका के अधधकारी और शहर के ऱोग उऩजस्थत थे |
E-Newsletter October, Page 13
भऊ आवाज़
नगय ऩालरका ऩरयषद् भऊ के कभचष ारयमों द्वाया हय भोहल्रा भें झाड़ू रगामा जा
यहा है |
E-Newsletter October, Page 14
भऊ आवाज़
नगय ऩालरका ऩरयषद् भऊ के कभचष ारयमों द्वाया हय भोहल्रा भंे कू ड़ा-कचया
उिामा जा यहा है |
E-Newsletter October, Page 15
भऊ आवाज़
नगर ऩालऱका ऩररषद् मऊ के अधधकाररयों और ऩुलऱस अधीऺक के ननगरानी में
शहर में जजतने ऱोगों का मकान है उसका मुिायना ककया जा रहा है जजससे ऩता
चऱे की ककतने ऱोगों का मकान अनतक्रमण मंे आ रहा है |
E-Newsletter October, Page 16
भऊ आवाज़
E-Newsletter October, Page 17
भऊ आवाज़
२ अक्टू बर के उऩऱक्ष्य मंे नगर ऩालऱका ऩररषद् मऊ में स्िच्छता से जड़ु े
कायकय ्रम का आयोजन ककया गया था जजसमे मऊ के अध्यऺ , अधधशाषी
अधधकारी और नगर ऩालऱका के अधधकारी और शहर के ऱोग उऩजस्थत थे |
E-Newsletter October, Page 18
भऊ आवाज़
E-Newsletter October, Page 19
भऊ आवाज़
अक्टू बर से ऱगगे ा हाकी का महाकंु भ सीबीएसई बोर्य की रीजनऱ बाऱक-बालऱका हाकी
प्रनतयोधगता का होगा आयोजन | 28 अक्टू बर को होगा समाऩन,सात प्रदेशों के 600 खिऱाड़ी होंगे
शालमऱ |
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भऊ आवाज़
10 ऱाि की ऱागत से अऱी बबज्र्गंु के अदंु र दकु ानदारों की माुंग ऩर इंुटरऱॉककुं ग ऱगाई है। आज
ऱोकाऩणय हुआ।
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भऊ आवाज़
नगर ऩालऱका के कमचय ाररयों द्िारा ऩेड़-ऩौधों को ऩानी देते हुए जो सड़क के
साइर् में ऱगाए गए है !
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भऊ आवाज़
नगर ऩालऱका के अधधकाररयों द्िारा ऩेड़-ऩौधों को ऩानी देते हुए जो सड़क के
साइर् मंे ऱगाए गए है !
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भऊ आवाज़
नगर ऩालऱका के कमचय ाररयों द्िारा ऩेड़-ऩौधों को ऩानी देते हुए जो मोह्ऱो में
ऱगाए गए है !
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भऊ आवाज़
दशहरा और ताजिया की तैयाररयो को ऩखु ्ता रिने के लऱये मनू तयय ो और ताजजयों के
गुजरने िाऱे रास्तो का जाएिा लऱया।
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२३,२४,२५ अक्टू बर को होने तबऱीघी इज्तेमा को जाने िाऱे सभी
रास्ते ऩालऱका के द्िारा बनाये जा रहे है !
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अधधकारयमों द्वाया औचक तनगयानी की गमी जहाॉ ऩय नगय ऩालरका
का नारों का काभ चर यहा है !
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