अभियकु ्त/आवदे क की ओर से समन करने वाले आदेश ददनााकं कत ................. को वापस लेने के भलए
आवेदन पत्र
............... न्यायालय
परिवाद सं..................... सन ् २०२१
अबक बनाम ........ परिवादी
कखग ......... अभियकु ्त
अभियकु ्त/आवदे क की ओर से समन करने वाले आदेश ददनाांककत ................. को वापस लने े के भलए आवदे न पत्र
1. यह कि देखे आदेश ददनाकंा ित ................. िो : इस आदिणीय न्यायालय िो धािा 138 प.ां भल. अधधननयम
1881 िे अधीन एि अभििधित अपिाध िे भलए आवदे ि िो आदेभशिा जािी ििने िे भलए प्रसन्न किया
गया।
2. यह कि एि अभियकु ्त िे रूप में आवदे ि िो समन ििने िा िधित आदेश अन्य आदेशों िे बीच
ननम्नभलखखत पि ववधध िी दृष्टििोण से दोषपणू ण है औि वापस माँगा ा जाने योग्य है -
आधार
(क) क्योंकि परिवाद चिै ददनांाकित ............... िे ववविण िे बािे में परिवादी बिैं िी सचू ना /सलाह
द्वािा पशे किये गये अभिलखे िे अनसु ाि परिसीमा द्वािा वणनण किया जाता है औि धािा 138 प.
भल. अधधननयम िे अधीन नोदिस ................ से 15 ददनों िे अन्दि दी जानी िी लके िन
अधधिधित नोदिस ददनांाकित ................. होने से तात्पवपतण है औि ................. िो िजे ी गयी
जो इसिो देखते ही धािा 138 प. भल. अधधननयम िे अधीन उपबष्न्धत परिसीमा िी ववदहत
िालावधध िे पिे है औि ऐसे रूप में, परिवादी एि मात्र आधाि पि असक्षम एवम ् खारिज किये
जाने योग्य है।
(ख) क्योंकि परिवाद िा परिशीलन यह प्रदभशतण ििेगा कि इस प्रिाि चाहे जो िु छ िी इस बािे में िोई
िी अभिििन नहींा है ष्जस तािीख पि अभििधित नोदिस ददनांका ित अभििधित तौि पि आवेदि
िो परिदत्त िी गयींा औि जब वाद हेतिु परिवाद िो दाखखल ििने िे भलए पदै ा हुआ तब इस अिाव
मंे यह स्िावपत ववधध है कि धािा 138 प. भल. अधधननयम िे अधीन एि परिवाद िा पोषण ििने
िे भलए वाद हेतकु ़ पदै ा होता है नोदिस िी प्राष्तत से 15 ददनों िे अन्दि माँागी गयी ििम िा सदां ाय
ििने िे भलए सम्बोधधती िी असफलता पि पदै ा होता है। इस मामले मंे स्वीिािणीय तौि पि
किसी िी नोदिस िी तामील आवेदि पि ििी नहीां ििायी गयी।
(ग) क्योंकि परिवादी िो दो सम्बोधधती पि अभििधित नोदिस िो िजे ा जाने िा अभिििन किया
जाता है –
(1) ..................
(2) ..................
परिवादी ने ककसी प्रकाि ऊपि कथित पता स0ं पि सम्बोथित ककया। एक ललफाफा दाखखल ककया औि
जो "इन्काि कि ददया" ददनाकं कत ................ एक दिप्पणी को अन्तर्वषि ्ि किता है। यह अलिललखखत
उपयुक्त है कक कथित ललफाफा ककसी िी डाकघि का कोई िी डाक सम्बन्िी स्िाम्प नहीं अन्तर्वषि ्ि किता
िा जो यह प्रदलशित किता है कक परिवाद के साि दाखखल ककया गया ललफाफा का छत्र सािन ककया जाता है
औि डाकघि को िेजा गया ललफाफा परिवाद मंे दाखखल ककये गये ललफाफे द्वािा प्रततस्िार्पत कि ददया
गया है औि परिवादी लमथ्यापूणि साक्ष्य के एक अपिाि का दोषी है जजसके ललए आवदे क के पास उससे
सम्बजन्ित िािा 340 द. प्र. स.ं के अिीन एक आवदे नपत्र को दाखखल किने के अथिकाि को आिक्षित किता
है।
(घ). क्योंकक अलिकथित नोदिस ददनांककत .................) .................... पते पि तािीख ............... को िेजी
गयी होने से तात्पतयित है औि तािीख.................... को इंकाि कि ददया। ककसी प्रकाि परिवादी यह साबबत
किने हेतु डाक र्विाग से ककसी िी एक को पिीक्षित नहीं ककया है कक इसको सम्बोथिती द्वािा अस्वीकृ त
कि ददया गया। यह सादि तनवेदन ककया जाता है कक आवदे क............ उस पते पि नहीं तनवास कि िहा है
जजस पि अनेक दकु ानंे है औि यह कािबाि का आवदे क के स्िान का पणू पि ता नहीं है।
(ड) क्योंकक न परिवाद में औि न ही परिवादी के किन के बािे में प्रकिन ककया गया है या किन ककया गया है
कक .................. पते पि िेज ददया जाने वाली कही गयी अलिकथित नोदिस का क्या िाग्य िा।
(च) क्योंकक आवदे क का िागीदाि होने वाले परिवादी के साक्ष्य का नहीं है कक जजस प्राख्यान को उसी तथ्य लमथ्या
साबबत कि ददया जाता है कक अलिकथित चकैं स्वयं प्रदलशित किता है कक आवदे क एक मात्र फमि का
स्वत्विािी है औि प्रश्नगत चकै इस प्रकाि चाहे जो कु छ िी हो प्रततफल के बगिै िा। इसके संगत यह तनवेदन
ककया जाता है कक परिवादी जो बािम्बाि आवेदक को लमला किता िा। एक ऐसी िेंि के दौिान जब आवेदक
को िन की आवश्यकता पडी औि बकैं के बन्द होने का समय किीब िा तब आवदे क ने शीघ्रता से एक चैक
पि हस्तािि ककया औि इसको उस परिवादी को दे ददया जजसने बकंै जाकि उसी को िुनवाने का प्रस्ताव
ककया। परिवादी 15 लमनि के अन्दि वापस आया औि आवेदक को .................. नकद सौंप ददया। अब यह
प्रेरित किता है कक उसने उसके द्वािा ििी गयी िकम के ऊपि इसको िि किके बािम्बाि तौि पि तिा
बेइमानी पूवकि चकै प्रततिारित ककया औि बेइमानी का लाि हेतु अब प्रस्तुत परिवाद दाखखलककया है।
3. यह कक इस आदिणीय न्यायालय ने उपयुकि ्त महत्वपूणि तथ्यों पि र्वचाि बना समन किने वाला आदेश पारित
कि ददया जो मामले की तह तक जाता है औि इस ि समन किने वाला आदेश र्वथिक दृजष्िकोण से दोषपूणि है
क्योंकक इसने प्रिम दृष्िया इस पि आन के ललए कोई कािण नहीं देता है कक िािा 138 प. लल. अथितनयम के
अिीन एक अपिाि स्िार्पत ककया गया िा।
प्रार्नथ ा
अतएव, यह प्राििना की जाती है कक यह माननीय न्यायालय समन किने वाला आदेश ददनांकक ....... को वापस माँगा ने
तिा आवदे क के र्वरुद्ि कायवि ादहयों िोकने की कृ पा किें।
इस माननीय न्यायालय को ऐसे अथिम आदेश /आदेशों को पारित किने की कृ पा क जो मामले के तथ्यों एवम ्
परिजस्िततयों पि पणू ति या न्याय कि सकंे ।
आवेदक/अलियुक्त
जरिये अथिवक्ता
स्िान :
तािीख :
ककरायेदार से बकाया ककराये की वसूली के भलए वाद
(Suit for recovery of arrears of Rent against a tenant)
न्यायालय ...........
वाद सखंा ्या ............ सन ्.........
अ० ब०स० ............ बनाम वादी
स०द०फ० ............ प्रनतवादी
श्रीमान जी,
उपिोक्त नामााकं ित वादी ननम्न प्रिाि सववनय ननवेदन ििता है :
1. यह कि प्रनतवादी मिान नबंा ि ............ ष्स्ित ............ मंे वादी िे बनै ामा शदु ा ददनािंा ...... िे ननजी मिान
मंे अिंा न रु० ............ माभसि कििाये पि ददनािंा ............ से कििायेदाि है । वादी एवां प्रनतवादी िे बीच
उस ददन कििायदे ािी िा ववलखे ननटपाददत हुआ िा-मलू रूप में सधू च ............ से दाखखल किया जा िहा है।
2. यह कि प्रनतवादी द्वािा ददनािां ............ से कििाया िगु तान नहीां किया गया औि वादी िा अिां न रु०
............ कििाया बिाया वाष्जब हो गया है। प्रनतवादी िो वादी द्वािा ददनांिा ............ िो ददनाांि ............
ति िे कििाया िगु तान हेतु नोदिस तामील ििाया गया पिन्तु प्रनतवादी द्वािा अिी ति कििाया िगु तान
नहीां किया गया है । प्रनतवादी पि अिंा न रु० कििाया वाष्जब हो गया है।
3. यह कि वाद िा हेतिु (cause of action) ददनाांि ............ िो तब उत्पन्न हुआ जब एि माह िा कििाया
वाष्जब हो गया है औि इसिे बाद प्रत्यिे माह िी प्रिम नतधि िो तिा ददनािंा ............. िो जब छ: माह
िा कििाया वाष्जब हो गया है । इसीभलए प्रनतवादी िे ववरुद्ध यह वाद दायि किया गया है।
4. यह कि वाद िा मलू यािंा न अिंा न रु० ............ क्षते ्राधधिाि एवां न्याय शलु ि िे वास्ते किया गया औि
तदनसु ाि ही न्याय शलु ि िगु तान िी गई।
5. यह कि मिान, मान्य न्यायालय िे क्षेत्राधधिाि मंे ष्स्ित है औि न्यायालय िो वाद िो सनु ने िा क्षते ्राधधिाि
प्रातत है।
प्रार्नथ ा
अत: सववनय प्रािनण ा िी जाती है कि :
(ि) वादी िे दहत मंे अिां न रु० ............ िी डिक्री पारित िी जाय।े
(ख) प्रनतवादी से वाद खचण िा िगु तान ििाया जाय।े
(ग) मान्य न्यायालय जो उधचत समझे वाद िी परिष्स्िनतयों में अन्य िोई अनतु ोष िी ददलाया जाय।े
वादी ............
द्वारा अधधवक्ता........
सत्यापन
मै कि उपिोक्त नामाांकित वादी यह सत्यावपत ििता हूाँ कि वाद पत्र िे पिै ा ............ से ..... ति िा ििन मेिी
व्यष्क्तगत जानिािी में सत्य हंै औि पिै ा ............. से ............ िाननू ी सलाह पि आधारित है जो मिे े ववश्वास मंे सत्य
है।
सत्यापन ददनाािं ........... ददन ........ स्िान.......... वादी
जवाबदावा
(Written Statement)
अ०ब०स० ............ न्यायालय ............ वादी
स०द०फ० ............. वाद सखंा ्या ............ सन ्....... प्रनतवादी
बनाम
प्रततवादी की ओर से जवाब दावा
श्रीमान जी,
प्रनतवादी ननम्न प्रिाि से सववनय ननवेदन ििता है :
प्रस्तरवार उत्तर -
पिै ा 1 :- यह कि वाद पत्र िा पिै ा 1 अभिलेख िा मामला है।
पिै ा 2 :- यह कि वाद पत्र िे पिै ा 2 िा ििन गलत है औि अमान्य है । यह ननवेदन है कि वादी द्वािा मााँग िा िोई
नोदिस तामील नहींा ििाया गया िा । यदद िोई तामील है तो फजी है।
पिै ा 3 :- यह कि वाद पत्र िे पिै ा 3 िा तथ्य अस्वीिाि है । यह ननवदे न है कि िोई कििाया वाष्जब नहींा हुआ है।
पिै ा 4 :- यह कि वाद पत्र िा पिै ा 4 िा उत्ति देने िी आवश्यिता नहीां है।
पिै ा 5 :- यह कि वाद पत्र िे पिै ा 5 िा उत्ति देने िी आवश्यिता नहींा है।
अततररक्त तकथ -
पिै ा 6 :-- यह कि प्रनतवादी द्वािा ननिन्ति कििाया िगु तान किया जा िहा है औि उस पि िोई बिाया कििाया वाष्जब
नहींा है । इसिे ववपिीत वादी िा ििन असत्य है।
पिै ा 7:- यह कि प्रनतवादी द्वािा िसीद िी माँगा िी जा िही है पिन्तु वादी उसे छपाई में होना बतािि िालता िहा है।
कििाये िा ननिन्ति िगु तान लेिि उसिी िसीद देने में असमिण िहा है।
पिै ा 8:- यह कि वादी द्वािा ववगत तीन वषण से िोई िसीद नहींा दी गई है।
पिै ा 9:- यह कि इस प्रिाि से िोई वाद हेति (cause of action) उत्पन्न नहीां हुआ है। वाद व्यय सदहत खारिज
होने योग्य है।
प्रततवादी...........
द्वारा अधधवक्ता..........
सत्यापन
सत्यावपत-स्िान ............ ददनाािं ............ददन ............. यह सत्यावपत किया जा है कि भलखखत ििन िे अनसु ाि 1
लगायत 9 ति िे तथ्य मेिी व्यष्क्तगत जानिािा म सत्त्व औि उसमंे िु छ िी नछपाया नहींा गया है ।
............. (प्रततवादी)
नोट-
(1) नये तथ्यों िो ववशषे रूप से तिण सगंा त भसद्ध ििना है।
(2) इन्िािी पषु ्टियकु ्त हो।
(3) जब प्रनतवादी वाद पत्र िे तथ्य िो इन्िाि ििे तो उसे िालते हए उत्ति न देिि ठोस उनि दना चादहय।े
(4) उसिे द्वािा बताया हुआ यदद िोई हो, जवाबी दावा ििना चादहए।
नोदटस के आधार पर ककरायेदारी पयवथ सान हो जाने पर बेदखली और पूवथ से हुए
देय ककराया के अवशेष सदहत अन्तः कालीन लाि का वाद
(Suit for Ejectment of determination of tenancy by notice and for mesne profits with arrears
of rent already fallen due)
न्यायालय ............
वाद सखंा ्या ............ सन ्............
अ०ब०स० ............ बनाम वादी
स०द०फ० ............ प्रनतवादी
श्रीमान जी,
उपिोक्त नामांाकित वादी ननम्न प्रिाि सववनय ननवदे न ििता है :
1. यह कि वादी द्वािा मिान नबंा ि ............ ष्स्ित ............ स्रीि ............ मंे ददनाािं
...... से ितू ल पि दो िमिे औि एि िसोई अिंा न रु० ............ माभसि कििाये पि प्रनतवादी िो ददये ि।े
2. यह कि ददनािां ............ से प्रनतवादी द्वािा कििाया िगु तान नहींा किया गया औि उसे कििाये िी मााँग औि
कििायदे ािी समाष्तत िा एि नोदिस ददनािां ............ िो अन्तगतण धािा 106 सम्पवत्त अन्तिण अधधननयम,
1882 िो तामील ििाया गया पिन्तु उसिे द्वािा अिी ति ना तो मिान खाली किया गया ना ही बिाया
कििाया अदा किया गया। प्रनतवादी पि कििायेदािी पयवण सान ति ............ रु० कििाया तिा ............ रु०
अन्त:िालीन लाि देय हो गया है।
3. यह कि वाद िा हेतु (cause of action) ददनांाि ............ िो तब उत्पन्न हुआ जब प्रनतवादी िो नोदिस
िी तामील ििाई गई औि इस न्यायालय िो वाद िा ननणयण ििने िा क्षते ्राधधिाि प्रातत है।
4. यह कि वाद िा मलू यािंा न अिंा न रु० ......... क्षते ्राधधिाि वास्ते औि अिां न रु०......न्याय शलु ि िगु तान हेतु
किया गया है औि खाली ििाने तिा िब्जा लने े हेतु औि रु० बिाया कििाया व अन्त: िालीन लाि वसलू ी
हेतु न्याय शलु ि ......... अदा किया गया है।
प्रार्नथ ा
यह कि वादी द्वािा ननम्नाकां ित अनतु ोष िी याचना िी जाती है :
(1) अिां न रु० ............ कििायेदािी पयवण सान िे समय ति िा बिाया कििाया व अन्त:िालीन लाि िा
िगु तान ििाया जाये। तिा वादपयनण ्त व िब्जा ददलाने िे समय ति िा अन्तिालीन लाि ददलाया जावे।
(2) उपिोक्त मिान से प्रनतवादी िी बेदखली िििे वादी िो िब्जा ददलाया जाये।
(3) वाद व्यय ददलाया जावे।
(वादी)............
द्वारा अधधवक्ता......
सत्यापन
में कि उपिोक्त नामांाकित वादी यह सत्यावपत ििता हूाँ कि वाद पत्र िे पिै ा 1 औि 2 िा िि मिो व्यष्क्तगत जानिािी
िे आधाि पि सत्य हंै औि पिै ा 3 औि 4 िा ििन िाननू ा सलाि - आधारित है जो मिे े ववश्वास मंे सत्य हैं।
सत्यापन - ददनािां ............ ददन ............ स्िान ............ (वादी)
पराक्रम्य भलखत अधधतनयम, 1881
(Negotiable Instruments Act, 1881)
(धारा 420 िारतीय दण्ड संदा हता, 1860) और धारा 138 पराक्रम्य भलखत अधधतनयम, 1881
(साशं ोधधत, 1988 व 2002 के अन्तर्तथ (भशकायत) दावा
(Complaint u/sec. 420 of the IPC and Sec. 138 of the N.I. Act, 1881
(As Amended by Act, 1988 &2002)
न्यायालय………..
भशिायती वाद नबां ि ............ सन ्......
अ०ब०स० ............ बनाम भशिायतिताण
स०द० फ० ............ अभियकु ्त
श्रीमान जी,
उपिोक्त भशिायतिताण ननम्न प्रिाि सववनय ननवदे न ििता है :
1. यह कि भशिायतिताण एि पष्ब्लि भलभमिेि िम्पनी है जो िम्पनीज एक्ि, 1956 िे अन्तगतण पजंा ीिृ त है
ष्जसिा प्रमाण-पत्र नबां ि ............ ददनािां ............ है जो कि ननबधां ि िम्पनीज ददलली औि हरियाणा,
नई ददलली द्वािा ननगतण है ष्जसिा पजंा ीिृ त िायाणलय नई ददलली मंे ष्स्ित हंै ।
2. यह कि अभियकु ्त एि पािणनिभशप फमण है ष्जसिा िायाणलय ............ पि है औि श्री ......... औि श्री
............ इसिे पािणनि हंै जो फमण िे िाम िाज िो चलाते हैं ।
3. यह कि अभियकु ्त नबंा ि 2 भशिायतिताण िम्पनी िे नई ददलली ष्स्ित िायालण य मंे आया औि गलत ब्यानी
ििते हुए िहा कि वे दक्षक्षण िे बाजािों िी ष्स्िनत से अच्छी प्रिाि से परिधचत ह औि ववशषे रूप से मद्रास
िे बाजािों से औि उनिे पयाणतत सम्बन्ध हंै औि वे वहाँा पयातण त व्यवसाय आि साख जमा सिते हंै औि इस
प्रिाि से भशिायतिताण िम्पनी िो अपने उत्पादन िी सतलाई मास मंे उनिी फमण िो ववक्रय हेत देने िे
भलए प्ररे ित किया। भशिायतिताण िम्पनी द्वािा अभियकु ्त H०.2 िे िहे अनसु ाि ववश्वास िििे औि उसे
सच जानिि वास्तववि रूप से अभियकु ्त फमण िो पन उत्पादन िी पनू तण ििने िे भलए सहमत हो गई।
अभियकु ्त नबां ि 2 द्वािा हस्ताक्षरित 15 चिै देहली िम्पनी िे िायाणलय में हस्तगत किये गये औि यह
ववश्वास ददलाया गया कि प्रस्ततु जाने पि उनिा िगु तान भमल जायगे ा औि इस प्रिाि से भशिायतिताण
िम्पनी िो अपने दन िा पनू तण अभियकु ्त िो ििने िे भलए प्ररे ित किया। उपिोक्त चिै ों िा ववविण ननम्न
प्रिाि ददया गया है।
चिै नबां ि बकंै ददनांाि धन िाभश
4. यह कि आिोपी फमण िो एि िीलि िे रूप मंे िम्पनी िे उत्पादन िी बबक्री औि ववविण हेतु मद्रास िे भलए
ननयकु ्त किया गया। अभियकु ्तगणंा स०ां 2 व 3 फमण व फमण िे व्यापाि िे सचंा ालन िे भलए प्रिािी व उत्तिदाई
िे।
5. यह कि भशिायतिताण िम्पनी द्वािा अपनी ववभिन्न उत्पादनों िी आपनू तण मद्रास में ववक्रय हेतु ििना
प्रािम्ि िि ददया।
6. यह कि भशिायत िताण िम्पनी द्वािा अभियकु ्त िे साि होने वाले लेन देन िा चालू खाता िखना प्रािम्ि
िि ददया गया िा अभियकु ्त िो िी गई सतलाई िो फमण िे नाम अकां ित िि ददया जाता िा औि आिोपी
फमण से प्रातत धन उसिे खाते में जमा िि ददया जाता िा।
7. यह कि अभियकु ्त नबां ि 2 औि 3 आिोपी फमण िे पािणनि हैं औि वे ही फमण िे व्यापाि िा प्रबन्ध िि िहे हं।ै
उपिोक्त चिै ों िो अभियकु ्त नबां ि 2 द्वािा हस्ताक्षि िििे भशिायतिताण िम्पनी िे नई ददलली िायाणलय
में हस्तगत किया गया िा जो कि आिोपी फमण िो िी गई आपनू तण िे िगु तान िे रूप में िा।
8. यह कि भशिायतिताण िा िहना है कि उक्त चैिो िो भशिायतिताण िम्पनी िे बिंै िे माध्यम से ददनांाि
............ िो िगु तान िो वास्ते प्रस्ततु किया गया तो आिोपी फमण िे बिैं ि द्वािा उपिोक्त ववविणानसु ाि
अिां न रु० ............ िे चैिों िो बबना िगु तान किये वापस ददनाांि ............ िो िि ददया गया औि यह
(प्रबन्ध से अधधि है) excecds arrangement' िी दितपणी लगाई गई । अनादरित चिै ों िी सत्य प्रनतयाँा
एि जािी िििे सलंा ग्नि A पि इस वाद पत्र िे साि सलां ग्न िी गई हंै साि ही बिैं िा मीमो िी नत्िी
किया जा िहा है।
9. यह कि अभियकु ्त फमण िे बिैं द्वािा अनावतृ चैिों िो प्रातत ििने िे उपिान्त भशिायत िताण िम्पनी
द्वािा तत्िाल अभियकु ्त नबंा ि 2 औि 3 िो फमण िे पािणनिों िो सधू चत किया गया। पनु : अभियकु ्त नबां ि
2 ददलली आया औि भशिायत िताण िम्पनी िे प्रबन्ध ननदेशि से भमला औि ववश्वास ददलाया कि चन्द
ददनों मंे ही अनावतृ चिै ों िा िगु तान िि ददया जायगे ा।
10. यह कि भशिायतिताण िम्पनी िो अभियकु ्त द्वािा ववश्वास ददलाये जाने िे बावजदू अभियकु ्तों द्वािा
भशिायतिताण िम्पनी िो अनादरित चिै ों िा िगतान ििने िे भलए िोई िायवण ाहा नही िी गई।
11. यह कि भशिायतिताण िम्पनी द्वािा अभियकु ्त िे बिैं ि से ददनािंा ............ िो सचू ना प्रातत होने िे
अनसु िण मे औि अनादृत चिै ों िा अभियकु ्त द्वािा िगु तान ववश्वास ददये जान िे उपिान्त िी, ना ििने
िे िािण ददनािां ............ िो पजां ीिृ त A/D नोदिस अिन रु० ............ िा िगु तान ििने िी मागँा ििते
हए तिा 30% वावषिण ब्याज िे साि िगतान िित हेत ददया गया जो सलां ग्नि 'B' पि नोदिस िी फोिो
िापी सलां ग्नि िी गई है। बिैं िा पि अनादि होने िी सचू ना िे 30 ददन िे अन्दि ही नोदिस दे ददया गया
िा।
12. यह कि आिोपी फमण द्वािा ददनाांि ............िो उपिोक्त नोदिस प्रातत किया गया जो कि िािखान िी िसीद
औि AD िी फोिो िापी सलां ग्नि .पि नत्िी िी गई है। भशिायत िम्पनी द्वािा ददनािंा ............. िो
आिोपी फमण िो एि िेलके ्स मसै ेज िी िेजा गया ष्ज उपिाक्त चिे ों िी वापसी औि िगतान िे भलए अनिोध
किया गया िा। उपिोक्त िेलक्स िा िापी सलंा ग्लनि D पि नत्िी िी गई है।
13. यह कि अभियकु ्त द्वािा झठू ा ििन िििे भशिायतिताण िम्पनी िो यिीन ददलाया गया औि उसे अन्य
माल िी आपनू तण ििने िे भलए प्ररे ित किया गया। इसभलए इस से यह प्रिि होता है कि अभियकु ्त प्रािम्ि
से ही बेईमानी िी नीयत िखता िा ताकि भशिायतिताण िम्पनी िो धोखा दे सिे औि स्वयां गिै िाननू ी
रूप से लाि उठाने औि भशिायतिताण िम्पनी िो गिै िाननू ी रूप से हानन पहंाचाने िे द्वािा धािा 420 IPC
िे अन्तगतण अपिाध िारित ििने िा दोषी है । नोदिस प्रातत ििने िे 15 ददवस मंे अभियकु ्तगण ने िगु तान
नहीां किया-इस प्रिाि अभियकु ्तगण ने धािा 138 पभल० अधधननयम, 1881 िा अपिाध किया अपिाध ििने
िे ददनांिा िो िी अभियकु ्तगण स0ंा 2 व 3 अभियकु ्त स०ंा 1 व उसिे व्यापाि िे सचां ालन हेतु प्रिािी व
उत्तिदाई िे।
14. यह कि सववनय ननवदे न है कि सम्पणू ण वाद हेतिु देहली मंे उत्पन्न हुआ चँाकू ि अभियकु ्त भशिायतिताण
िम्पनी िे िायालण य ददलली मंे पहुँाचा औि चिै ों पि हस्ताक्षि िििे ददलली मंे ही हस्तगत किये गये औि
भशिायतिताण िम्पनी िो ददलली में ही माल िी आपनू तण ििने हेतु प्रेरित किया गया औि धन िा िगु तान
ददलली मंे ही ििने िा वायदा किया औि इस प्रिाि से वाद हेतु ददलली में ही उत्पन्न हुआ। इस मान्य
न्यायालय िो इस प्रिाि से अपिाध िा सजां ्ञान लने े िाक्षते ्राधधिाि प्रातत है।
15. यह कि अभियकु ्तगण द्वािा धािा 420 IPC औि धािा 138 NIA िे अन्तगतण दण्िनीय अपिाध किया
गया है। िािण उत्पन्न होने िे 30 ददन िे अन्दि/............ अपरिहायण िािणों से ............ ददन िे क्षम्य
योग्य ववलम्ब से परिवाद योष्जत किया जा िहा है।
इसभलए सववनय ननवदे न है कि अभियकु ्तों िो धािा 420 2PC औि धािा 138 NIA िे अन्तगतण सनु वाई हेतु िाननू िे
अनसु ाि तलब िििे दष्ण्ित किया जावे औि धािा 357 CrPC िे तहत औि 117 NIA िे अन्तगतण अिण दण्ि से दष्ण्ित
ििते हुए ननम्न प्रिाि िगु तान ििने हेतु आदेश पारित ििने िी िृ पा िी जाय।े
1. चिै िी धनिाभश - रु० 4,96.053-00
2. बिै सववसण चाजजे - रु० 2000-00
3. नोदिस चाजजे - रु० 1100-00
4. एिवोिे ि िा मेहनताना - रु० 5000-00
स्र्ान - नई ददल्ली 5,04,153-00
ददनांाक................. Plus Inst. @ 30% till payment
भशकायतकताथ ..............
द्वारा अधधवक्ता...........
पराक्राम्य भलखत अधधतनयम की धारा 138 तर्ा 142 के अधीन पररवाद
न्यायालय मखु ्य मेरोपाभलिन मष्जस्रेि .....................
श्री .............पतु ्र ................... ननवासी ....................... परिवादी
बनाम
. ........................................................................................ अभियकु ्त
1988 िे अधधननयम 66 द्वािा यिासशंा ोधधत पिक्राम्य भलखत अधधननयम िी धािा 138 एवम ्142 िे अधीन परिवाद।
परिवादी ननम्नभलखखत रूप मंे सादि ननवेदन ििता है।
1. यह कि अभियकु ्त ................ िे साि सवंा ्यवहाि ििने वाला स्वत्वधािी है।
2. यह कि अभियकु ्त ने परिवादी से ..........................रुपये िा भलया औि रुपये िे भलए तािीख .................
िो एि प्रोनोि िा ननटपादन किया (प्रोनोि िी एि फोिो स्िेि प्रनतभलवप उपाबन्ध है)
3. यह कि अभियकु ्त ने तािीखंा ................ िो भलखे गये ................. रुपये (................ रुपये मात्र) िी
िाभश िे भलए चैि स0ंा ................. ददनाांकित ................. जािी किया औि िधित ऋण/प्रोनोि िी बाबत
उसिे दानयत्व िे ननवहण न में परिवादी िो इसिो ददया।
(चिै िी फोिो स्िेि प्रनतभलवप उपाबन्ध ............... है) िधित चैि िा जािी ििते समय अभियकु ्त
ने परिवादी िो यह आश्वासन ददया कि चिै िा आदि इसिे अभियोजन पि किया जाता है।
4. यह कि परिवादी ििन ििता है कि चिे तािीख ............... िो परिवादी िे बिैं ............... िे जरिये .
सगंा ्रहण िे भलए प्रस्ततु किया गया औि िधित चैि "लखे ीवाल िो ननदेश" एि ज्ञापन िे साि बिै में
अभियकु ्त िे खाते मंे ननधध िी पयातण तता िे िािण असदां त्त तािीख ................. िो वापस िि ददया। (बिैं
िे ज्ञापन िी फोिो प्रनतभलवप उपाबधंा .................. है।
अभियकु ्त उसी समय िे प्रािम्ि से अतएव बेइमानी एवम ्दोषी आशय या अधधिाि िखता िा जब
उसने उपयकुण ्त चिै जािी किया।
5. यह कि परिवादी ने ठीि उसिे पश्चात ् अभियकु ्त से सम्पिण किया औि चिै िे अनाहत होने िे बािे में
उसिो सधू चत किया लके िन अभियकु ्त ने िोई ध्यान नहींा ददया।
6. यह कक परिवादी किन किता है कक यिा संदत्त चकै के अनादि/र्वविण से सम्बजन्ित बकंै से उसकी सूचना की िसीद
के पन्रह ददनों के अन्दि नोदिस की प्राजप्त की तािीख पन्रह ददन के अन्दि उसने िेजा अनाहत ककये गये चैक पि
देय ब्याज के साि-साि कथित ि के संदाय के ललए अलियकु ्त से अपेिाकि तािीख ................. को अलियकु ्त को
................... अपने अथिवक्ता के जरिये एक िजजस्रीकृ त अलिस्वीकृ तत पत्र तिा य.ू पी. सी. नोदिस ददनांककत
.......................... देखे : डाक सम्बन्िी िसीद सं ................ ददनांककत ................ (... ..........डाकघि) ।
अलियुक्त कथित नोदिस की िसीद को अलिस्वीकृ त ककया देखे देय अलिस्वीकृ तत। िजजस्रीकृ त अलिस्वीकृ तत पत्र/य.ू
पी. सी. एवम ् अलिस्वीकृ तत काडि की डाक सम्बन्िी िसीद को फोिो स्िेि प्रततललर्पयााँ उपाबिं ................ है र्वथिक
नोदिस की छाया प्रततललर्प उपाबिं ................. है) तािीख ................ को नोदिस प्राप्त कि चकु ने पि र्वथिक
नोदिस की प्राजप्त के पन्रह ददनों के अन्दि सदं ाय किने मंे असफल हो गया है। यह कक समझा जाता है कक अलियकु ्त
ने तािीख ................ को नोदिस को प्राप्त कि चुका है क्योंकक नोदिस िजजस्रीकृ त अलिस्वीकृ तत पत्र तिा तािीख
................ की य0ू पी0 सी0 के अिीन िेजी गयी िी। अलियकु ्त तािीख .............. को नोदिस प्राप्त कि चुकने
पि र्वथिक नोदिस की प्राजप्त की तािीख से पन्रह ददनों के अन्दि सदं ाय किने में असफल हो गया।
7. यह कक परिवादी तनवेदन किता है कक अलियुक्त ने अपने बकंै खाते मंे पयािप्त तनथि के बबना ही चकै जािी ककया िा।
अतएव अलियकु ्त ने 1988 के अथितनयम द्वािा यिासंशोथित पिक्राम्य ललखत अथितनयम 1988 की िािा 138
के अिीन अपिाि कारित ककया औि दजडडत ककये जाने के ललए दायी है।
8. यह कक परिवादी आगे तनवदे न किती है कक अलियकु ्त ने न सदं ाय किने के ललए पवू ि आशय के साि उसको ऋण
सहायता देने मंे साशय परिवादी को उत्प्रेरित ककया औि तद्वािा परिवादी के साि िोखािडी की औि िा. द. स.ं की
िािा 415 एवम ् 420 के अिीन अपिाि कारित ककया।
9. यह कक प्रस्ततु अलियोजन के ललए वाद हेतुक 16वंे ददन अिाित ् उपयुकि ्त र्वथिक नोदिस की प्राजप्त के समाजप्त के
पश्चात तािीख ................ को औि अलियकु ्त द्वािा िकम के न िुगतान ककया जाने के कािण पदै ा हुआ।
10. यह कक परिवादी आगे तनवदे न किता है कक वह कथित िन के िगु तान के ललए ददये गये समय पन्रह ददनों की
समाजप्त की तािीख से एक महीने के अन्दि परिवाद दाखखल ककया है। कथित चकै ................ मंे पेश ककया गया
................ में जािी ककया गया जहााँ चकंै परिवादी बैक द्वािा असंदत्त होने के रूप मंे वापस कि ददया गया औि
इसललए इस माननीय न्यायालय के पास अपिाि का सजं ्ञान लेने की अथिकारिता है।
11. यह कक अलियकु ्त ने अतएव, 1988 मंे यिा सशं ोथित पिक्राम्य ललखत अथितनयम, 1988 की िािा 138 तिा िा0
द0 स0ं की िािा 415 & 420 के अिीन दडडनीय अपिाि कारित ककया है। परिवादी ककसी प्रकाि कथित उपचाि के
औि अथिक प्रिावकािी एवम ् रतु गामी होने के कािण यिा संशोथित पिक्राम्य ललखता अथितनयम की िािा 138 के
अिीन अपिाि के ललए मात्र अलियकु ्त को अलियोजजत किने का चनु ाव किता है।
अतएव यह प्रािनि ा की जाती है कक अलियकु ्त को 1988 मंे यिा सशं ोथित पिक्राम्य ललखत अथितनयम
1988 की िािा 138 के अिीन र्वचािण का सामना किने के ललए समन ककया जाए औि उसका र्वचािण ककया जाए
तिा तत्पश्चात र्वथि के अनसु ाि दजडडत ककया जाए।
यह िी आगे प्रािनि ा की जाती है कक आदिणीय न्यायालय तनम्नललखखत रूप में दडड प्रकक्रया संदहता की
िािा 357 सपदित िािा 117 पिक्राम्य ललखखत अथितनयम के अिीन जमु ानि े की िकम मंे प्रततकि के िगु तान हेतु
िी आदेश किने की कृ पा किे।
(1) चैक िकम..................................................रुपये
(२) बकंै सेवा प्रिाि ..................................................रुपये
(3) नोदिस प्रिाि ..................................................रुपये
(4) एडवोके ि फीस ..................................................रुपये
(5) ब्याज िकम (........ तक) ..................................................रुपये
...............................रुपये (िुगतान
होने तक ..........
वार्षकि दि से ब्याज सदहत)
...............................................में ददनांककत ...............................................
परिवादी के ललए अथिवक्ता परिवादी
दस्तावेजो की सचू ी साक्षियों की सचू ी
1. परिवाद
1. अनारतु ककया गया चैक 2. प्रबन्िक शासकीय
2. बकंै की र्वविणी ज्ञाप बकैं
3. परिवादी का बकैं र्वविण ज्ञाप । शाखा
4. अलियकु ्त पि तामील की गयी नोदिस की प्रततललर्प
5. िजजस्रीकृ त अलिस्वीकृ तत नोदिस तिा य.ू पी. सी. की यह प्रदलशति किने हेतु अलिलेख के
डाक िसीद साि बकैं का कमचि ािी कक अलियकु ्त
6. अलिस्वीकृ तत पत्र तािीख को अपने बकंै खाता स.ं मंे
7. प्रोनोि तनथि पयािप्त िकम नहीं िखता िा जब
8. र्वशषे मखु ्तािनामा उसने चकै जािी ककया औि उस तािीख
को जब चकै प्रस्ततु ककया गया तिा
अनारतु कि ददया गया |
9. कालानकु ्रम किन 3. न्यायालय की अनजु ्ञा से कोई अन्य सािी
परिवादी
फमथ के िंरा ् करने और लेखा जोखा के वास्ते वाद
(Suit for dissolution of a firm and for accounts)
न्यायालय ............
वाद सखंा ्या ............ सन ्............
अ०ब० स० ............ बनाम वादी
स० द० फ० ............ प्रनतवादी
श्रीमान जी,
उपिोक्त नाभमत वादी ननम्न प्रिाि सववनय ननवदे न ििता है :
1. यह कि ददनािां ............ िो वादी औि प्रनतवादी द्वािा ............ नाम िी साझदे ािो फमण िा गठन किया
गया औि उक्त फमण िा पजां ीयन ििाया-पजंा ीििण सखंा ्या ............ सन ् ............. है ष्जसिे द्वािा
............ िा व्यापाि ििने हेतु पजंा ीििण किया गया है जो आज िी नतधि ति चल िहा है।
2. यह कि प्रनतवादी ............ फमण िा प्रबन्धन िागीदाि है औि वह ही बिैं िे लखे े िा सचां ालन ििता है।
3. यह कि वादी िा िायण ............ ििना है।
4. यह कि प्रनतवादी द्वािा श्री ............ िो अिां न रु० ............ िा त्ररुण वादी िी सहमनत िे बबना ददया गया
है औि बिंै से जो रुपया आहरित किया गया है उसिे खचे िा लखे ांािन किताबों मंे नहीां किया गया है । वादी
िो िि है कि धन िा प्रनतवादी द्वािा दरु ुपयोग किया जा सिता है औि िु प्रबन्धन िी हो सिता है औि इसी
िािण से वह साझदे ािी आगे चलाना नहीां चाहता है।
5. यह कि वाद िा हेतिु (cause of action) ददनािां ............ िो तब उत्पन्न हुआ जब प्रनतवादी द्वािा वादी
िी सहमनत िे बबना श्री ............ िो ऋण ददया औि बिैं से धन आहरित किया औि ष्जसिा लखे ांािन
लेखा पसु ्तिों मंे नहींा किया गया। मान्य न्यायालय िो वाद िा ननणयण ििने िा क्षते ्राधधिाि प्रातत है। ,
6. यह कि वाद िा मलयािंा न अिां न रु० ............ है जो कि प्रनतवादी द्वािा दरु ुपयोग िी १३ धनिाभश है औि
न्याय शलि िे वास्ते अिां न रु० ............ किया गया है जो कि मागाँ े गये ताप ि आधाि पि है। तदानसाि
न्यायशलि िगु तान किया गया ह।ंै
प्रार्नथ ा
वादी ननम्नाकंा ित अनतोष िी याचना ििता है :
(i) साझदे ािी िगंा िी जाय।े
(ii) प्रनतवादी द्वािा बिंै से आहरित धनिाभश औि ष्जसिा लखे ािंा न नहीां किया गया जमा ििाया जाय।े
(iii) फमण िे िगंा होने ति आदाता िी ननयषु ्क्त िी जाये।
स्र्ान ............ ददनाकां
(वादी)……
द्वारा अधधवक्ता……..
सत्यापन
मै की....... वादी यह प्रमाखणत ििता हूाँ कि वाद पत्र िे पिै ा 1 से 4 ति िा ििन मिे ी ननजी म सत्य हंै औि पिै ा 5 व 6
िाननु ी सललाह िे आधाि जो गिे ववश्वास मै सत्य है ।
सत्यार्पत - -ददनांाि ............ ददन ............ स्िान ............ (वादी)
साझदे ारी
साझेदारी को िारं ् करने और लेखा जोखा उपलब्ध कराने के वास्ते वाद
Partnership
(Suit for dissolution of partnerships and for accounts)
न्यायालय...........
वाद सखंा ्या ............ सन ्....
अ०ब०स० ............ बनाम वादी
स०द० फ० ............ प्रनतवादी
श्रीमान जी,
उपिोक्त वादी ननम्न प्रिाि सववनय ननवदे न ििता है :
1. यह कि वादी औि श्री ............ प्रनतवादी साझदे ािी प्रलेख िे अन्तगतण ववगत ..... वषण से साि-साि
भमलिि व्यापाि िि िहे ह।ैं
2. यह कि वादी औि प्रनतवादी िे मध्य अनेिों मतिदे उत्पन्न हो गये हैं ष्जस िािण से साझेदािी में
लाििािी व्यापाि चलाना असम्िव हो गया है । अिवा प्रनतवादी द्वािा ननम्नााकं ित ित्तवण ्य ववमखु ता
साझेदािी प्रलखे िे पालन मंे िी गई है।
(1) ............. ववमखु ताओां िा ववविण अकां ित ििंे।
(2) ............ ,, ,, ,,
(3) ...........,, ,, ,,
3. यह कि वादी ने प्रनतवादी से ददनााँि ............ िो आपसी समझौता िे आधाि पि साझेदािी िगंा ििने व
लखे ा जोखा देने िो िहा तो प्रनतवादी ने इन्िाि िि ददया।
4. यह कि वाद िा हेतिु तब उत्पन्न हुआ जब प्रनतवादी ने ददनाँिा ............ िो साझदे ािी िगां ििने व लखे ा
जोखा देने िो इन्िाि किया। ............ (यहााँ तथ्य दजण ििंे) औि इस मान्य न्यायालय िो वाद िे सनु ने
िा क्षते ्राधधिाि प्रातत है।
5. यह कि क्षेत्राधधिाि वास्ते वाद िा मलू याािं न रु० ............ है औि न्याय शलु ि िे वास्त रु० ............ है ।
तदानसु ाि न्याय शलु ि िगु तान किया जा िहा है।
6. यह कि वादी ननम्नााकं ित अनतु ोष िी याचना ििता है
(i) साझेदािी िगंा िी जाये।
(ii) लेखा जोखा उपलब्ध ििाया जाये।
(iii) आदाता िी ननयषु ्क्त िी जाय।े
(iv) वाद िा व्यय ददलाया जावे।
ददनाकां ……….
वादी ...
द्वारा अधधवक्ता……
सत्यापन
में कि ............ वादी यह प्रमाखणत ििता हंै कि पिै ा 1 से 3 ति िा ििन वाद पत्र में मिा ननजी जानिािी में सत्य हंै
औि पिै ा 4 व 5 िा ििन िाननु ी सलाह िे आधाि पि है जो मिे ववश्वास सत्य ह.ैं
सत्यावपत-ददन ............ ददनांाि ............ स्िान ............ (वादी)
साझदे ारी फमथ िांर् करने हेतु वाद
(Suits for dissolution of partnership)
न्यायालय..........
वाद सखंा ्या ............ सन ्............
अ०ब०स० ............. बनाम वादी
स०द० फ० ............ प्रनतवादी
श्रीमान जी,
उपिोक्त नामााकं ित वादी ननम्न प्रिाि सववनय ननवेदन ििता है :
1. यह कि वादी औि प्रनतवादी द्वािा ......... नाम से ....... व्यापाि ििने हेतु साझदे ािी फमण िा गठन किया
गया िा।
2. यह कि अनबु न्ध िी शतों िे अन्तगतण वादी द्वािा व्यापाि सचंा ालन हेतु धन िा प्रबन्ध ििना िा औि
प्रनतवादी द्वािा उक्त फमण िा प्रबन्धन, लखे ािां न ििना िा औि वादी तिा प्रनतवादी िो लाि हानन में
बिाबि िी दहस्सदे ािी ििनी िी।
3. यह कि उक्त साझेदािी फमण िा व्यवसाय लाि पि चलता िहा पिन्तु ददनाांि ............. से प्रनतवादी द्वािा
िु प्रबन्धन प्रािम्ि िि देने िे िािण हानन पि व्यापाि िा जािी िखा जाना िदठन हो गया है।
4. यह कि प्रनतवादी फमण िे व्यापाि िा िु प्रबन्धन ििने िा ननम्न प्रिाि से दोषी िहा है--
(i) .........
(ii) .....
5. यह कि उपिोक्त तथ्यों िे आधाि पि यह आवश्यि हो गया है कि साझदे ािी िो िगां िि ददया जाये औि
लखे ा जोखा िी पड़ताल िी जाय।े
6. यह कि वाद हेतु (causc of action) ददनाांि ............ िो तब उत्पन्न हुआ जब वादा िा प्रनतवादी द्वािा
किये गये िदाचिण िा पता चला औि जब प्रनतवादी से फमण िे िगंा ििने िा माग िी गई औि उसिे
द्वािा फमण िो िगां किये जाने से ददनािंा ............ िो इन्िाि िि ददया गया।
7. यह कि फमण िी व्यवसानयि गनतववधधयाां मंे मान्य न्यायालय िे क्षेत्राधधिाि ि चलाई जा िही है । वाद िी
सनु वाई िा मान्य न्यायालय िो क्षते ्राधधिाि प्रातत है ।
8. यह कि वाद िा मलू यांिा न अिंा न रु० ............क्षते ्राधधिाि एवंा न्याय शलु ि वास्त किया गया है, ष्जसिा
िगु तान किया गया है।
प्रार्नथ ा:
मान्य न्यायालय से ननम्नाकंा ित अनतु ोष िी याचना िी जाती है।
(ि) साझदे ािी फमण िो िगां ििने औि लखे ा जोखा ददलाने िी िृ पा िी जाये।
(ख) साझदे ािी परिसम्पवत्तयों िा िब्जा लने े हेतु आदाता िी ननयषु ्क्त िी जाय।े
(ग) वादी िो वाद खचण ददलाया जाये तिा अन्य िोई अनतु ोष जो न्यायालय उधचत समझे ददलाया जाये।
स्र्ान ............
ददनाांक.........
वादी..........
द्वारा अधधवक्ता ..........
सत्यापन
मंै कि ............ वादी यह सत्यावपत ििता हूाँ कि वाद पत्र िे पिै ा 1 से 6 ति िा ििन मिे ी ननजी जानिािी में सत्य है
औि पिै ा 7 व 8 िा ििन िाननू ी सलाह पि आधारित हंै जो मेिे ववश्वास में सत्य औि सही ह।ंै
सत्यापन-ददनाांि ............ ददन ............. स्िान ............ (वादी)