The words you are searching are inside this book. To get more targeted content, please make full-text search by clicking here.

सूक्तिपरक निबंध

Discover the best professional documents and content resources in AnyFlip Document Base.
Search
Published by nibha.ver13, 2020-08-27 13:47:00

सूक्तिपरक निबंध

सूक्तिपरक निबंध

सिू क्तपरक नबंध

NIBHA VERMA
CMS GN - 1

वही मनषु ्य है क जो मनषु ्य के लए मरे

एक आदमी ही दसू रे आदमी के काम आ सकता है, कोई अन्य नही।ं मनुष्य जो कर सकता है,
पशु-पक्षी वह सब कभी नहीं कर पात।े इस प्रकार मनुष्य को सिृ ष्ट का सवशरष् ्रेष्ठ प्राणी कहा और
समझा जा सकता है।



इसी कारण वह सवश्षर ्रेष्ठ और सामािजक प्राणी माना जाता है। सच्चे मनषु ्य का हर कदम, हर कायरष्
सामू हक चतं न और हत साधना की भावना से भरा रहता है। तभी तो कई बार उसे दसू रों के
लए अपने प्राणों का ब लदान करते हुए भी देखा जा सकता है। मनषु ्य जीवन मंे जो अ त थ देवता
आ द की कल्पना की गई है, इन्हंे देवता के समान महत्व दया गया है। उसके मूल में भी अपने
लए नहीं, बिल्क सारी मनषु ्यता के लए जीने की प रकल्पना छपी हुई है।





राजा श व के उपाख्यान पर भी दृिष्टपात कीिजए । क्या उन्होंने दीन कपोत
रूपी मानवता के लए अपने शरीर का तल- तल भाग नष्ट नहीं कर डाला था
? र तदेव ने भखू से व्याकु ल मानवों के लए अन्न-दान कया । वशदु ्ध
सेवा-भाव से पथृ ्वी पर घमू ते रहनेवाले छद्मवेशी महाराज वक्रमा दत्य की
कहा नयाँ तो वश्व- वश्रतु ही हंै ।

दानवों के अत्याचार से सारी सिृ ष्ट कराह उठी थी । सभी कं कतवष्र ्य वमढ़ू हो
रहे थे । एक ही मागष्र शषे था- य द मह षषर् दधी च की अि थयों से वज्र वनाया
जाए तो समाज इस आप त्ति से बच सकता है ।

सब देवता दधी च के पास गए और उस पणु ्यात्मा ने सहषरष् इस नश्वर शरीर का
त्याग कर अपनी अि थयों का दान कर दया । इस पौरा णक रूपक को आप
इस रूप में भी ले सकते हैं क दधी च ने परोपकार की भावना से मनषु ्य मात्र
के कल्याण के लए अपना शरीर गला दया ।


Click to View FlipBook Version