वाचन जगत से
बाल पत्रिका से कोई कहानी पढ़ो और परिपाठ में सनु ाओ ।
पढ़ना कहाँ आता है । उस रात भरतू ने सपने में देखा, अगले दिन रमशे ने
जैसे वह मैदान में बैठा है और उसके सामने एक लंबी- भरतू से कहा, ‘‘भरतू भयै ा,
-चौड़ी किताब खलु ी पड़ी है । तभी एक आवाज कानों आज मैं तुम्हारे लिए ए और
में आती है । लाओ मेरी किताब फिर भरतू की नींद टटू बी लाया हँू ।’’ और उसने
गई । जागकर वह बहुत दरे तक सपने के बारे में सोचता बस्ते से निकालकर एक सबे
रहा । और गंेद भरतू के हाथ मंे
थमा दी । भरतू कछु पछू ता,
सुबह अपनी रिक्शा बाहर निकाली और इससे पहले रमेश ने कहा, ‘‘देखो ए से एप्पल, बी से
बारी-बारी से बच्चों को लेने लगा । तभी रमशे नामक बॉल ।’’
बच्ेच ने कहा, ‘‘मेरी किताब...?’’ वह कछु परेशान
दिख रहा था । रमशे की मांॅ सरिता ने भी कहा, ‘‘भरतू, भरतू ने कहा, ‘‘रमेश भैया, क्या रोज ऐसे ही
जरा ध्यान से दखे ना, रमशे की किताब नहीं मिल पढ़ाओगे ?’’
रही ह ै ।’’
रमशे ने कहा, ‘‘हाँ ’’ और माँ के साथ घर में दौड़
भरतू ने किताब उनकी ओर बढ़ा दी । तभी रमशे गया । भरतू सबे और गेदं को हाथ में लिए खड़ा रह
ने कहा, ‘‘तुमने मरे ी किताब फाड़ी तो नहीं । किताब गया । उसने सोचा, कल दोनों चीजंे वापस कर देगा ।
फाड़ना बरु ी बात है ।’’ सनु कर भरतू हसँ पड़ा । उसने उस रात देर तक ए और बी से खेलते रहे भरतू और
कहा, ‘‘नहीं भयै ा, मैनं े तुम्हारी किताब खबू ध्यान से उसके साथी । उनके बीच देर तक गेंद और सेब इधर से
रखी थी । एकदम ठीक ह,ै देख लो ।’’ उधर उछलते रहे । कमरे मंे हसँ ी गजँू ती रही । शायद
इससे पहले ये लोग इतना कभी नहीं हसँ े थे । भरतू के
रमेश की माँ सरिता दवे ी भी हसँ पड़ीं । उन्होंने साथी पूछते रह,े ‘‘भरतू कल अपने मास्टर जी से क्या
कहा, ‘‘भरतू जो बात मंै इसे समझाती हूँ, वही इसने पढ़गे ा ?’’
तुमसे कह दी । बरु ा न मानना ।’’
अगली सुबह रमशे के घर के बाहर पहुँचकर भरतू
सारा दिन भरतू उसी किताब के बारे मंे सोचता ने रिक्शा की घटं ी बजाई । कुछ देर तक कोई जवाब नहीं
रहा । दोपहर में रमशे को उसके घर के बाहर छोड़ते हुए मिला फिर रमशे की माँ सरिता दवे ी बाहर निकलकर
भरतू ने कहा, ‘‘क्यों भैया, जो तमु पढ़ते हो, मुझे भी आईं । उन्होंने कहा, ‘‘रमशे आज स्कूल नहीं जाएगा ।
पढ़ा दो ।’’ ‘‘मैं क्या टीचर हँू जो तुम्हें पढ़ाऊँ ?’’ रमेश उसे रात से बखु ार आ रहा है ।’’
बोला । ‘‘मरे े टीचर बन जाओ न रमेश भैया । जो फीस
मागँ ोगे दगँू ा,’’ भरतू ने हँसकर कहा । ‘‘ठीक ह,ै कल सनु कर भरतू को एक झटका-सा लगा । वह
पढ़ाऊगँ ा ।’’ ‘‘क्या पढ़ाओगे ?’’ बाकी बच्चों को स्कूल पहुँचाने चला गया । उस दोपहर
वह गुमसुम रहा । ठीक से खाना भी नहीं खाया भरतू
‘‘ए, बी .... पढ़ाऊँगा ।’’ कहकर रमेश माँ के ने । रमन बार-बार पूछता रहा, ‘‘भरत,ू क्या बात है ?’’
साथ घर में चला गया । भरतू मुसकराया तो सरिता देवी पर भरतू ने कछु नहीं कहा ।
भी हँस पड़ीं ।
q कहानी में आए उनकी पसंद के सबसे सदुं र प्रसंग बताने के लिए कहंे । पसंद के कारण पछू ंे । उनके शब्दों मंे कहानी कहने
के लिए प्रेरित करें । कहानी में आए भतू , वर्तमान और भविष्यकाल के एक-एक वाक्य खोजकर लिखने के लिए कहें ।
91
स्वयं अध्ययन
किसी शालेय समारोह के कार्यक्रम मंे अध्यक्ष जी के परिचय दने े हेतु जानकारी तैयार करे ।
नाम जन्मस्थान शिक्षा कार्यक्षेत्र विशेषताऍं प्राप्त
पुरस्कार
इसके बाद वाली सबु ह को रमेश के दरवाजे पर कहा, ‘‘भरत,ू तुम्हारे मास्टर जी की तबीयत अब ठीक
पहुँचकर उसने घटं ी बजाई तो रमशे की माँ बाहर आईं । है । आओ, अदं र आ जाओ, धपू मे ं क्यों खड़े हो ?’’
‘‘भरत,ू रमेश की तबीयत आज भी ठीक नहीं है । यह कहकर उन्होंने दरवाजा परू ा खोल दिया । भरतू को
शायद एक-दो दिन और वह स्कूल न जा सकेगा ।’’ लग रहा था, इस समय आना शायद ठीक नहीं रहा पर
अब वापस नहीं लौटा जा सकता था । वह झिझकते
भरतू के हाथ में ए और बी यानी सबे और गदंे कदमों से अदं र घसु गया । ‘‘आओ भरतू, यहाँ
थे । उसने सरिता दवे ी से कहा, ‘‘ये दोनों मेरे मास्टर जी आओ,’’ कहते हुए सरिता देवी ने एक कमरे में आने
को दे दने ा, मडै म जी । अब तो मझु े पढ़ाएँगे नहीं ।’’ का इशारा किया ।
सरिता देवी आश्चर्य से मरु झाए सबे और गेदं को भरतू ने कहा, ‘‘मैडम जी, अब आपने बता दिया
दखे ती रहीं । फिर भरतू ने उन्हंे सब बताया तो उनके न कि हमारे मास्टर जी ठीक हैं । बस अब जाता हूँ ।
चहे रे पर फीकी मसु कान आ गई । लके िन भरतू हसँ न आप तकलीफ न करंे ।’’
सका । उसन े स्कूल वाली रिक्शा आगे बढ़ा दी ।
‘‘नहीं, नहीं, तकलीफ कसै ी ! तुम अपने
उस दोपहर भरतू ढाबे मास्टर जी स े मिलने आए हो तो क्या बिना मिले चले
पर नहीं आया । वह रमेश के जाओगे ? आ जाओ । इतना घबरा क्यों रहे हो ?’’
घर के बाहर जा खड़ा हुआ ।
आसपास कोई न था । वह ‘‘कसै े हो मास्टर जी ?’’ कहते-कहत े भरतू हँस
कछु देर तक धपू मंे खड़ा पड़ा, उसने देखा, सेब और गेंद पलगं पर रमशे के पास
रहा, फिर झिझकते हुए रख े थे । ‘‘मैं ठीक हूँ ।’’ रमशे ने कहा, फिर बोला,
दरवाजे पर लगी घटं ी बजा ‘‘तुमने ए, बी माँ को लौटा दिए । ऐसे कैसे पढ़ोगे ! लो,
दी । कछु पल ऐसे ही बीत गए । उसे दोबारा घंटी ले जाओ और ध्यान से याद करो । तभी तो आगे
बजाना ठीक न लगा । न जाने रमेश की माँ क्या सोचने पढ़ाऊगँ ा तुम्हंे ।’’
लगे । उसका मन रमशे स े मिलना चाहता था पर सकं ोच
भी था । वह वापस मुड़ने लगा, तभी दरवाजा जरा-सा ‘‘भरत,ू खड़ े क्यों हो ? बैठ जाओ ।’’ सरिता दवे ी
खोलकर सरिता दवे ी ने बाहर झाकँ ा । भरतू को देखकर ने कहा । उनके हाथ मंे पानी का गिलास और प्टले मंे
वह चौंक पड़ीं । उन्होंने कहा, ‘‘भरत,ू तमु इस समय कछु नाश्ता था ।
कैसे ? क्या चाहिए ?’’
भरतू सकपका गया । हकलाता-सा बोला, ‘‘जी, भरतू जमीन पर ही बैठ गया । सरिता ने कहा,
मनैं े सोचा अपने मास्टर जी को देख लू,ँ उनकी तबीयत ‘‘वहाँ जमीन पर नहीं, कुरसी पर आराम से बैठो ।’’
कसै ी है ?’’
मास्टर जी शब्द पर सरिता देवी हसँ पड़ीं । उन्होंने ‘‘जी, मंै यहीं ठीक हूँ ।’’ भरतू ने कहा और उठ
खड़ा हुआ । उसने कुछ खाया नहीं । ‘‘मास्टर जी जल्दी
ठीक हो जाओ, फिर आगे पढ़ाना ।’’ कहकर सेब और
गंदे रमेश के हाथ स े ले ली और बाहर निकल आया ।
q कहानी के अनसु ार भरतू क े स्वभाव का वर्णन कहलवाएँ । कहानी में आए विशषे ण शब्दों की पहचान करवाऍं । पाठ में आए
किन्हीं दस शब्दों के समानार्थी, विरूदध् ार्थी शब्द लिखवाए ँ तथा उनका अलग-अलग वाक्यों मंे प्रयोग करवाएँ ।
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बताओ तो सही
अतं में रमेश के घर से ‘वापस आने पर भरतू के मन की भावनाऍं’, बताओ ।
रमेश की तबीयत ठीक दखे कर उसका मन खशु हो गया रहा था । भला य े भी कोई बताने की बातंे हंै ।’’
था । एक बार मन मंे आया था कि हौले से रमशे का सिर ‘‘अरे नहीं-नहीं, मझु े तो तुम्हारी बातंे सुनकर
सहला दे पर हिम्मत न हुई । बाहर निकलते हुए सरिता बहुत अच्छा लगा और बताओ । असल में मै ं तो कभी
देवी की आवाज सुनाई दी, ‘‘भरतू, कल रमेश को लने े गाँव गई नहीं । वहा ँ लोग कसै े रहते हं,ै क्या करते हैं,
आ जाना, अब इसकी तबीयत ठीक है ।’’ केवल किताबों से पता चलता है या फिल्मों से ।’’
अगली सबु ह रमशे माँ के साथ घर से बाहर खड़ा भरतू उठने को हुआ पर सरिता दवे ी ने रोक
मिला । भरतू से नजरंे मिलते ही रमशे और उसकी माँ लिया । बोली, ‘‘मैंने जिस बात के लिए बलु ाया था,
मुसकरा दिए । भरतू भी हँस दिया । वह तो अभी कही ही नहीं । तुम पढ़ना चाहते हो,
दोपहर को रमेश को घर छोड़ने आया तो सरिता सुनकर मझु े अच्छा लगा । रमशे के पापा को भी पसंद
दवे ी ने कहा, ‘‘भरत,ू शाम को पाचँ बजे आना । आ आई यह बात ।’’
सकोगे ? बहुत काम तो नहीं रहता ?’’ ‘‘मडै म जी, वह तो मनंै े ऐसे ही हसँ ी में कह दी
‘‘जी आ जाऊगँ ा,’’ भरतू ने कहा और ढाबे पर थीं,’’ भरतू ने संकोच से कहा ।
जा बठै ा । मन प्रसन्न था । रमन ने पकु ारा, ‘‘क्यों भरतू, ‘‘नहीं, इसमे सकं ोच
पढ़ाई कैसी चल रही है ?’’ कसै ा ? अगर तुम चाहो तो
‘‘बहुत बढ़िया ।’’ भरतू ने कहा और हँस दिया । शाम को पाँच बजे रोज आ
भरतू पाचँ बजे रमशे के घर के बाहर पहुँच गया । सकते हो । मंै पढ़ाऊगँ ी तमु ्हें ।
कछु देर बिना घटं ी बजाए सोच में डूबा खड़ा रहा । मन शादी से पहले मैं बच्चों को
में कछु डर था । न जाने रमेश की माँ ने क्यों बुलाया ह ै ? पढ़ाया करती थी । अब भी मन
कछु दरे बाद उसने घंटी बजा ही दी । दरवाजा करता है कोई ऐसा काम करने
रमेश ने खोला उसे देखते ही हसँ पड़ा । बाले ा, ‘‘आओ का ।’’
भरत,ू आओ, अंदर चलो,’’ कहकर रमशे न े भरतू का ‘‘पर भरतू तो बड़ा है मा,ँ ’’ रमशे ने कहा । ‘‘पहले
हाथ पकड़ लिया और उसी कमरे म ें ले गया । बच्चों को पढ़ाती थी तो अब बड़ों को पढ़ाऊँगी । भरतू
सरिता देवी कुरसी पर बठै ी थीं । उन्होंने कहा, से ही शुरू होगा यह मरे ा स्कूल ।’’
‘‘भरत,ू यहाँ बैठो । रमशे बता रहा था, तुम पढ़ना चाहते ‘‘तो क्या मुझे आप सचमुच पढ़ाएगँ ी ?’’ भरतू ने
हो ? अगर ऐसा ह ै तो बहुत अच्छी बात है ।’’ भरतू पूछा । उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था ।
लजा गया । बोला, ‘‘मैडम जी, यह तो मनैं े यूँ ही मजाक ‘‘हाँ भरत,ू मैं सच कह रही हूँ । जिस दिन मुझे
में कह दिया था । भला अब क्या पढ़ूँगा मैं । हाँ, गावँ के कोई काम नहीं होगा तो मं ै तुम्हें बता दूगँ ी, जब तमु
स्कूल मंे मेरा बटे ा नन्हा जरूर पढ़ता है ।’’ रमेश को छोड़ने आओगे । उस दिन तुम पढ़ने आ
‘‘भरतू, तुम्हारे घर मंे कौन-कौन हैं ?’’ सरिता जाना ।’’
दवे ी ने पछू ा । भरतू उन्हंे अपने गावँ -घर की बातंे बताने बाहर निकलने से पहले रमेश क े सिर पर हाथ
लगा । न जाने क्या-क्या बता गया फिर एकाएक रुक रखने से खदु को नहीं रोक पाया भरतू । ऐसा करते समय
गया । बोला, ‘‘माफ करना मडै म जी, मंै तो यँू ही कह उसकी आँखंे भीग गईं ।
93
मनैं े समझा
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शब्द वाटिका विचार मंथन
नए शब्द ।। मटु ्ठी में है तकदीर हमारी ।।
दाखिला = प्रवेश
सकपकाना = डरना
हकलाना =रुकरुक कर बोलना
खोजबीन
ओलंपिक स्पर्धा सबं ंधी जानकारी प्राप्त करो :
कब से प्रारभं प्रतीक चिहन् किन-किन दशे ों अगली बार कहॉं ओलपं िक में पदक
और अर्थ मंे आयोजन ? होने वाला है ? पान े वाले भारतीय
मेरी कलम से
मदु ्द ों के आधार पर कहानी लिखो :
जगं ल मंे पड़े के राजा द्वारा चूहों काे हाथियों का झंुड पानी चूहों की राजा से रक्षा
नीचे चहू ों का अपने हमशे ा दया, परोपकार की की खोज में पड़े के की माँग ।
राजासहित निवास । पास आना, चहू ों को
सलाह । तकलीफ पहुँचाना ।
चूहा राजा का हाथियों के चहू ा राजा द्वारा हाथी हाथियों का शिकार हाथियों का सदं ेश चिड़िया
सरदार से मिलना को पानी की जगह करने शिकारी का अाना, दव् ारा चहू ा राजा को
दिखाना । पहुँचाना ।
और हाथी सरदार का माफी हाथियों का जाल मंे
माँगना । फँसना ।
चहू ा राजा का चहू ों को चूहों का जाल सीख और शीर्षक
सहायता करन े भेजना । काटना ।
9९4
* पाठ के आधार पर 5-६ पंक्तियों मंे उत्तर लिखो ः (घ) भरतू रमेश के घर के बाहर किसलिए खड़ा था ?
(क) भरतू किताब उठाने पर मन मंे क्यों चिढ़ा ? (च) सरिता दवे ी ने कौन-सी बात तय की ?
(ख) सरिता देवी की हसँ ी का क्या कारण था ? (छ) भरतू, रमन आदि बीच-बीच में गाँव किनसे मिलने
(ग) भरतू और उसके साथी रात दरे तक कौन-सा खेल
जाते ?
खले ते रहे ?
सदवै ध्यान में रखो
भाषा की ओर कभी भी किसी का मन टटू ने न देना ।
वर्णेंा एवं शब्दों के मेल को देखो, पढ़ो और समझो ः
१. महर्षि ध्यानमग्न बठै े थे । १. रोगी को तत्काल भर्ती कराया गया । १. हमें दरु ाचार से बचना चाहिए ।
२. कन्याकुमारी का भानदू य अप्रतिम २. प्रतिज्ञा में एकात्मता का उल्लेख है । २. कवे ल मनोरथ से ही काम नहीं बनता ।
होता है । ३. दिया हुआ अनचु ्छेद पढ़ो । ३. मनंै े पढ़ने का निश्चय किया है ।
३. राष्र्ट ीय सपं त्ति की सरु क्षा प्रत्येक 4. मित्र काे चोट पहुँचाकर उसे बहुत
का कर्तव्य है ।
मनस्ताप हुआ ।
ßß
ß
महा + ॠषि = आ + ॠ तत्+ काल = त् + का दुः + आचार= विसर्ग (ः) का र्
भानु + उदय = उ + उ उत् + लखे = त् + ल मन ः + रथ = विसर्ग (ः) का ओ
प्रति + एक = इ + ए अनु + छेद = उ + छे नि ः + चय = विसर्ग (ः) का श्
मन ः + ताप= विसर्ग (ः) का स्
स्वर संधि व्ंजय न सधं ि विसर्ग सधं ि
सधं ि के भेद
संधि-ध्वनियों का मेल ध्वनि + ध्वनि = नया रूप
हिम + अालय हिम् + (अ) + (अा) लय = हिमालय
अ + अा = अा
संधि में दो ध्वनियाँ निकट आने पर आपस में मिल जाती हैं और एक नया रूप धारण कर लते ी हैं ।
उपरोक्त उदाहरणों में (१) में महा+ॠषि, भान+ु उदय, प्रति+एक शब्दों में दो स्वरों के मले से जो परिवर्तन हुआ है अतः
यहाँ स्वर सधं ि हुई । उदाहरण (२) में तत्+काल, उत+् लखे , अनु+छदे शब्दों में व्यंजन ध्वनि के निकट स्वर या व्यंजन
आने से व्यंजन में परिवर्तन हुआ है अतः यहाँ व्जंय न संधि हुई । उदाहरण (३) मंे विसर्ग के पश्चात स्वर या व्यंजन आने
पर विसर्ग मंे परिवर्तन हुआ है । अतः यहाँ विसर्ग संधि हुई ।
9९5
* कविता में निम्न शब्दों से सहसंबंध रखने वाले शब्द खोजकर लिखो ः
(क) सीमित पग-डग - (च) राही -
(ख) दाए-ँ बाएँ - (छ) जीवन -
(ग) साथ-साथ - (ज) पथ -
(घ) आकलु - (झ) सूनी -
(ङ) व्यथा - (ञ) राह -
सदवै ध्यान मंे रखो
सच्चा मित्र वही ह,ै जो विपत्ति मंे काम आए ।
भाषा की ओर
पढ़ो, समझो और करो ः
() छोटा कोष्ठक, [] बड़ा (वर्गाकार) कोष्ठक, {} मँझला (सर्पाकार) कोष्ठक, ^ हंसपद
छोटा कोष्ठक () मझँ ला (सर्पाकार) कोष्ठक{}
क्रमसचू क अक्षर, अकं , एक साधारण पद से संबधं
सवं ादमय लखे ों मंे हावभाव रखने वाले अलग-अलग
सचू ित करने क े लिए () पंक्तियों के शब्दों को मिलाने
इसका प्रयोग करते हंै । के लिए {} इसका
प्रयोग करते हंै ।
छोटा कोष्ठक () मझँ ला (सर्पाकार) कोष्ठक {}
(१) सागर- (आश्चर्य स)े आप
सब मरे ा इंतजार कर रहे हंै ! } }(१) गनगिबरो्दमनालना प्रेमचदं जी के प्रसिदध् उपन्यास हंै ।
(२) निम्न प्रश्न हल करो ः
} }(२) तकुलालसिीददाासस महाकवि माने जाते हंै ।
(अ) ९5 X २६ (ब) ६००÷ १5
विलरउागमचाओिचतिहः्न १. कामायनी महाकाव्य कवि जयशंकर प्रसाद ३. सबालु लभभभारातरतीी हिदं ी की पसु ्तकें हैं ।
२. विशाखा लंदन स े दिल्ली आती है 4. किसी दिन हम भी आपके घरआएगँ े ।
हवा जैसी आने की सूचना नहीं दते ी ।
बड़ा (वर्गाकार) कोष्ठक [] हसं पद ^
लेखन मं े त्रुटि या परू ्ति लेखन में जब कोई शब्द
बताने, दूसरे कोष्ठक को छूट जाता है तब उसे पकं ्ति
घरे ने क े लिए [] इसका के ऊपर लिखकर ^ यह
प्रयोग करते हैं ।
चिहन् लगाते हैं ।
बड़ा (वर्गाकर) कोष्ठक []
(१) रवींद्रनाथ ठाकुर का अनवु ादित हसं पद ^
[अनदू ित] साहित्य सब पढ़ते हंै । सदंु र
(२) दखे ो, आपका पत्र [नमनू ा (ड)] के
अनसु ार होना चाहिए । (१) अस्मि न^े भटंे कार्ड बनाया ।
(२) पिता जी कमलुबं ^ईजाएगँ े ।
99
* nwZamdV©Z - 2 *
१. अब तक सनु ी सबसे अच्छी कविता सनु ाओ ।
२. विद्यालय में अबतक मनाए गए पसंदीदा कार्यक्रम के बारे में बताओ ।
३. जातक कथाओं का वाचन करो ।
4. अपने प्रिय शिक्षक/शिक्षिका पर १२ से १5 वाक्य लिखो ।
5. विरामचिह्न ों का उचित प्रयोग कर निम्न वाक्य पुनः लिखो ः-
१. यही वह व्यक्ति है जिसने चोर को पकड़वाया 5. यह आचार्य विनोबा की कार्य स्थली है
................................................
..................................................
.................................................. ................................................
२. अहा इतनी मिठाई मरे े लिए ६. राकशे ने कहा मैं अपना गृहकार्य रोज करूँगा
.................................................. ................................................
.................................................. ................................................
३. आप इस समय क्या कर रहे हैं ७. सरू ्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ बड़े दयालु थे
.................................................. ................................................
.................................................. ................................................
4. जो इस तोते को परेशान करते हंै वह उन्हीं को 8. भारत मंे छह ॠतुएँ होती हंै ग्रीष्म वर्षा
काटता है
.................................................. शरद हमे तं शिशिर और वसंत
.................................................. ................................................
................................................
कृति कृति उपक्रम प्रकल्प
अपने मा-ँ पिता जी स्वतंत्रता दिवस प्रति सप्ताह संत विद् यालय में तैयार
से नाना/नानी के किस तरह मनाओग,े कवियों के कोई पद कंपोस्ट खाद पर
बारे मंे सुनो । एकल या गुट में
बताओ । पढ़ो । प्रकल्प तयै ार करो ।
1१0०4
इयततञा १ ली ते ८ िी सञाठीची पञाठ्यपुसतक मडं ळञाची िवै शष्ट्यपणू भ् पसु तके
• मुलञांसञाठीचयञा ससं कञार कथञा • स्तफू तीगीत
• बञालगीते • गीतमजं ुषञा
• उपयकु ्त असञा मरञाठी रञाषञा शबदञाथ्भ संग्रि • वनिडक किी, लेखक यञांचयञा कथञांनी युक्त पुसतक
• सिञा्भचयञा सगं ्रिी असञािी अशी पुसतके
पसु ्तक मागणीसाठी www.ebalbharati.in, www.balbharati.in संक्े तस्थळावर भेट द्ा.
साहित्य पाठ्यपसु ्तक मडं ळाच्या हिभागी्य भाडं ारांमध्येय
हिक्रीसाठी उपलब्ध आिेय.
ebalbharati
विरञागीय रञांडञारे संपक्क क्रमञाकं : पुणे - २५६५९४६५, कोलिञापूर- २४६८५७६, मंबु ई (गोरेगञाि)
- २८७७१८४२, पनिले - २७४६२६४६५, नञावशक - २३९१५११, औरगं ञाबञाद -
२३३२१७१, नञागपूर - २५४७७१६/२५२३०७८, लञातरू - २२०९३०, अमरञािती - २५३०९६५