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विज्ञान भैरव तंत्र 1

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Published by Pradip Shresth, 2019-10-06 01:26:53

विज्ञान भैरव तंत्र 1

विज्ञान भैरव तंत्र 1

व ान भैरव तं —ओशो

व ान भरै व तं —ओशो

व ान भैरव तं का जगत बौ क नह ं है। वह दाश नक भी नह ं है। तं शबद् का अथ है। व ध, उपाय, माग। इस 'लए यह
एक वै ा नक *थं है। व ान ‘’+य-‘’ क. नह ,ं ‘’कै से’’ क. 0फ2 करता है। दशन और व ान म4 यह बु नयाद भेद है। दशन
पूछता है। यह अि9ततव् +य- है? व ान पछू ता है, यह आि9ततव् कै से है? जब तुम कै से का ;शन् पछू ते हो, तब उपाय,
व ध, मह<वपणू हो जाती है। तब 'स ातं >यथ हो जाती है। अनुभव क4 ? बन जाता है।
व ान का मतलब है चते ना है। और भैरव का वशषे शबद् है, तांB क शबद् , जो पारगामी के 'लए कहा जाता है। इसी'लए
'शव को भैरव कहते है, और देवी को भैरवी—वे जो समसत् Cवैत के पार चले जाते है।
पावती कहती है—
आपका सतय् प या है?
यह आपका आ चय-भरा जगता या है?
इसका बीज या है?
वशव् च! क" धूर% क्या है?
यह च! चलता ह% जाता है—महा प(रवतन, सतत )वाह।
इसका म+य ,बदं ु या है?
इसक" धूर% कहां है?
अचल क0 1 कहां है?

प2 पर छाए ले6कन प के परे यह जीवन या है?
देश और काल, नाम और )तय् य के परे जाकर हम इसमे कै से पूणत: )वशे करे?
मेरे संशय 9नमूल करे……

ले0कन संशय नमूल कै से ह-गे? 0कसके ऊपर से? +या कोई उतत् र है जो 0क मन के संशय दरू कर दे? मन ह तो संशय है।
जब तक मन नह ं 'मटता है, संशय नमूल कै से ह-गे?

'शव उतत् र द4गे। उनके उतत् र म4 'सफ व धयां है—सबसे पुरानी, सबसे ;चीन व धया।ं ले0कन तुम उGह4 अ<याधु नक भी
कह सकते हो। +य-0क उनम4 जोड़ा नह ं जा सकता। वे पूण है, एक सौ बारह व धया।ं उनम4 सभी संभावनाओं का समावेश है;
मन को शु करने के , मन के अ त2मण के सभी उपाय उनम4 समाएँ है। 'शव क. एक सौ बारह व धय- म4 एक और व ध
नह ं जोड़ी जा सकती। कु छ जोड़ने क. गंुजाईश ह नह ं है। यह सवागJ ीण है, संपणू है, अं तम है। यह सब से ;ाचीन है और
साथ ह सबसे आधु नक, सबसे नवीन। परु ाने पवत- क. भां त ये तं पुराने है, शाशव् त जैसे लगते है। और साथ ह सुबह के
सूरज के सामने खड़े ओस-कण क. भां त ये नए है। ये इतने ताजे है।

Lयान क. इन एक सौ बारह व धय- से मन के Mपातं रण का पूरा व ान न'मत हुआ है। एक-एक कर हम उनम4 ;वशे कर4गे।
पहले हम उGह4 बु से समझने क. चेOटा कर4ग।े ले0कन बु को मा एक यं क. तरह काम म4 लाओ, मा'लक क. तरह नह ं।
समझने के 'लए यं क. तरह उसका उपयोग कर-। ले0कन उसके जPरए नए >यवधान मत पदै ा करो। िजस समय हम इन
व धय- क. चचा कर4गे। तुम अपने पुराने ान को पुरानी जानकाPरय- को एक 0कनारे धर देना। उGह4 अलग ह कर देना। वे
रा9ते क. धूल भर है।

इन व धय- का साQा<कार निRचत ह सावचेत मन से करो; ले0कन तक को हटा कर करो। इस Sम म4 मत रहो 0क ववाद
करने वाला मन सावचते मन है। वह नह ं है। +य-0क िजस Qण तुम ववाद म4 उतरते हो, उसी Qण सजगता खो जाती है।
सावचेत नह ं रहते हो। तुम तब यहां हो ह नह ं।

ये व धयां 0कसी धम क. नह ं है। वे ठUक वसै े ह Vहदं ू नह ं है जैसे सापेQवाद का 'स ातं आइं9ट न के Cवारा ; तपाVदत होने
के कारण यहूद नह ं हो जाता है। रेWडय- टेल वजन ईसाई नह ं है। ये व धयां Vहदं ओु ं क. ईजाद अवशय् है, ले0कन वे 9वयं
Vहदं ू नह ं है। इस 'लए इन व धय- म4 0कसी धा'मक अनुOठान का उYलेख नह ं रहेगा। 0कसी मंVदर क. जMरत नह ं है। तुम
9वयं मंVदर हो। तुम ह ;योगशाला हो, तुZहारे भीतर ह पूरा ;योग होने वाला है। और वRवास क. भी जMरत नह ं है।

तं धम नह ं है। व ान है। 0कसी वRवास क. जMरत नह ं है। कु रान या वदे म4, बु या महावीर म4 आ9था रखने क.
आवRयकता नह ं है। नह ,ं 0कसी वRवास क. आवRयकता है। ;योग करने का महा साहस पयापत् है, ;योग करने क.
Vहमम् त काफ. है। एक मुसलमान ;योग कर सकता है। वह कु रान के गहरे अथ[ को उपलबध् हो जाएगा। एक Vहदं ू अ\यास
कर सकता है। और वह पहल दफा जानेगा 0क वदे +या है? वसै े ह एक जैन इस साधना म4 उतर सकता है, बौ इस साधना म4
उतर सकता है, एक ईसाई इस साधना म4 उतर सकता है…वे जहां है तं उGह4 आ]तकाम करेगा। उनके अपने चुने हुए रा9ते
जो भी हो, तं सहयोगी होगा।

यह ं कारण है 0क जनसाधारण के 'लए तं नह ं समझा गया। और सदा यह होता है 0क जब तुम 0कसी चीज को नह ं समझते
हो तो उसे गलत जMर समझते हो। +य-0क तब तुZह4 लगता है। 0क समझते जMर हो। तुम Pरक्त 9थान म4 बने रहने को राज़ी
नह ं हो।

दसू र बात 0क जब तुम 0कसी चीज को नह ं समझते हो, तुम उसे गाल देने लगते हो। यह इस'लए 0क यह तुZह4
अपमानजनक लगता है। तुम सोचते हो, म_ और नह ं समझंू, यह असंभव है। इस चीज के साथ ह कु छ भूल होगी। और तब
तुम गाल देने लगते हो। तब तुम ऊलजलूल बकने लगते हो। और कहते हो 0क अब ठUक है।

इस 'लए तं को नह ं समझा गया। और तं को गलत समझा गया। महान राज भौज ने प व उ`जैन नगर म4 तं के
वC य पीठ को खतम् कर Vदया। एक लाख तांB क जोड़- को काट Vदया। +य- ये +या है, हमार समझ म4 नह ं आता। कु छ
साल- पहले वह ं पर राजा व2माVदतय् ने उGह ं तांB क- 0कतना सZमान Vदया…..यह इतना गहरा और उँ चा था 0क यह होना
9वाभा वक था।

तीसर बात 0क चूं0क तं Cवतै के पार जाता है, इस'लए उसका aिOटकोण अ त नै तक है। कृ पया कर इन शcद- को समझो:
नै तक, अनै तक, अ त नै तक। नै तक +या है हम समझते है; अनै तक +या है हम समझते है; ले0कन जब कोई चीज अ त
नै तक हो जाती है, दौन- के पार चल जाती है। तब उसे समझना कVठन है।

तं अ त नै तक है। तं कहता है। कोई नै तकता जMर नह ं है। कोई खास नै तकता जMर नह ं है। सच तो यह है 0क तुम
अनै तक हो, +य-0क तुZहारा चत अशांत है। इस'लए तं शत नह ं लगता 0क पहले तुम नै तक बनो तब तं क. साधना कर
सकते हो। तं के 'लए यह बात ह बेतुक. है। कोई बीमार है, बखु ार म4 है, डाक्टर आकर कहता है: पहले अपना बखु ार कम
करो, पहले पूरा 9वसथ् हो लो और तब म_ दवा दँगू ा।

यह तो हो रहा है, चौर साधु के पास जाता है। और कहता है, म_ चौर हूं, मुझे Lयान करना 'सखाए।ं साधु कहता है, पहले चौर
छोड़ो, चौर रहते Lयान कै से कर सकते हो। एक शराबी आकर कहता है, म_ शराब पीता हूं, मुझे Lयान बताएं। और साधु कहता
है, पहल शत 0क शराब छोड़ो तब Lयान कर सकोग।े

तं तुZहार तथा क थत नै तकता क., तुZहारे समािजक रसम् -Pरवाज आVद क. चतं ा नह ं करता है। इसका यह अथ नह ं है
0क तं तुZह4 अनै तक होने को कहता है। नह ,ं तं जब तुZहार नै तकता क. ह इतनी परवाह नह ं करता। तो वह तुZह4
अनै तक होने को नह ं कह सकता। तं तो वै ा नक व ध बताता है 0क कै से चत को बदला जाए। और एक बार चत दसू र
हुआ 0क तुZहारा चPर दसू रा हो जाएगा। एक बार तुZहारे ढांचे का आधार बदला 0क पूर इमारत दसू र हो जाएगी।

इसी अ त नै तक सुझाव के कारण तं तुZहारे तथाक थत साधु-महा<माओं को बदाशत् नह ं हुआ। वे सब उसके वरोध म4
खड़े हो गए। +य-0क अगर तं सफल होता है तो धम के नाम पर चलने वाल सार नासमझी समापत् हो जाएगी।

तं कहता है 0क उस अव9था का नाम भैरव है जब मन नह ं रहता—अ-मन क. अव9था है। और तब पहल दफा तुम यथाथत:
उसको देखते हो जो है। जब तक मन है, तुम अपना ह संसार रचे जाते हो, तुम उसे आरो पत, ;Qे पत 0कए जाते हो, इस'लए
पहल तो मन को बदल- और तब मन को अ-मन म4 बदल-।

और ये एक सौ बारह व धय- सभी लोग- के काम आ सकती है। हो सकता है, कोई वशेष उपाय तुमको ठUक न पड़,े इस'लए
तो 'शव अनके उपाय बताए चले जाते है। कोई एक व ध चुन लो जो तुमको जंच जाए।

और यह जानना कVठन नह ं है। 0क कौन सी व ध तुZह4 जँचती है। हम यहां ;<येक व ध को समझने क. को'शश कर4ग।े तुम
अपने 'लए वह व ध चुन लो जो 0क तुZह4 और तुZहारे मन को Mपातं Pरत कर दे। यह समझ, यह बौ क समझ बु नयाद तौर
से जMर है। ले0कन अंत नह ं है। िजस व ध क. भी चचा म4 यहां कMं उसको ;योग करो। सच म4 यह है 0क जब तुम अपनी
सह व ध का ;योग करते हो तब झट से उसका तार तुZहारे 0कसी तार से लगाकर बज उठता है।

एक व ध लो उसके साथ तीन Vदन खेलो। अगर तुZह4 उसके साथ नकटता क. अनुभू त हो, अगर उसके साथ तुम थोड़ा
9वसथ् महसूस करो, अगर तुZह4 लगे 0क यह तुZहारे 'लए है तो 0फर उसके ; त गंभीर हो जाओ। तब दसू र व धय- को भूल
जाओ, उनम4 खले ना बदं करो। और अपनी व ध के साथ ट को, कम से कम तीन मह ने ट को। चम<कार संभव है, बस इतना

होना चाVहए 0क वह व ध सचमुच तुZहारे 'लए हो। यVद तुZहारे 'लए नह ं है तो कु छ नह ं होगा। तब उसके साथ जGम--
जGम- तक ;योग करके भी कु छ नह ं होगा।
ले0कन ये एक सौ बारह व धयां तो समसत् मानव-जा त के 'लए है। और वे उन सभी युग- के 'लए है जो गुजर गए है और
आने वाले है। और 0कसी भी युग म4 एक भी एका आदमी नह ं हुआ और न होने वाला ह है। जो कह सके 0क ये सभी एक सौ
बारह व धयां मेरे 'लए >यथ है। असंभव , यह असंभव है।
;<येक ढंग के चत के 'लए यहां गजंु ाइश है। तं म4 ;<येक 0कसम् के चत के 'लए व ध है। कई व धयां है िजनके उपयुक्त
आदमी अभी उपलबध् नह ं है, वे भ वषय् के 'लए है। और ऐसी व धयां भी है िजनके उपयुक् त मनुषय् रहे ह नह ं। वे अतीत
के 'लए है। ले0कन डर मत जाना। अनेक व धयां है जो तुZहारे 'लए ह है।
ओशो
व ान भैरव तं
)वचन—1
भाग—1( तं सू )

तं -सू – व:ध—01

;शव कहते है:

व ान भैरव तं –ओशो
तं -सू , धय् ान व:ध–

हे देवी, यह अनुभव दो वास2 के बीच घ=टत हो सकता है।
वास के भीतर आने के प चात और बाहर लौटने के ठAक पूव–
Bेयस ् है, कCयाण है।

आरंभ क. नौ व धयां Rवास-02या से संबंध रखती है। इस'लए पहले हम Rवास-02या के संबंध म4 थोड़ा समझ ल4 और
व धय- म4 ;वशे कर4गे।

हम जनम् से म<ृ यु के Qण तक नरंतर Rवास लेते रहते है। इन दो Bबदं ओु ं के बीच सब कु छ बदल जाता है। सब चीज बदल
जाती है। कु छ भी बदले Bबना नह ं रहता। ले0कन जनम् और म<ृ यु के बीच Rवास 02या अचल रहती है। बfचा जवान होगा,
जवान बढ़ू ा होगा। वह। बीमार होगा। उसका शर र Mगण् और कु Mप होगा। सब कु छ बदल जायेगा। वह सुखी होगा, दःु खी
होगा, पीड़ा म4 होगा, सब कु छ बदलता रहेगा। ले0कन इन दो Bबदं ओु ं के बीच आदमी Rवास भर सतत लेता रहेगा।
Rवास 02या एक सतत ;वाह है, उसम4 अंतराल संभव नह ं है। अगर तुम एक Qण के 'लए भी Rवास लेना भूल जाओं तो तुम
समापत् हो जाओग।े यह कारण है 0क Rवास लेने का िजZमा तुZहार नह ं है। नह ं तो मुिRकल हो जायेगी। कोई भूल जाये
Rवास लेना तो 0फर कु छ भी नह ं 0कया जा सकता।

इस'लए यथाथ म4 तुम Rवास नह ं लेते हो, +य-0क उसमे तुZहार जMरत नह ं है। तुम गहर नींद म4 हो और Rवास चलती
रहती है। तुम गहर मूfछा म4 हो और Rवास चलती रहती है। Rवासन तुZहारे >यि+ततव् का एक अचल ततव् है।

दसू र बात यह जीवन के अ<यंत आवशय् क और आधारभूत है। इस 'लए जीवन और Rवास पयायवाची हो गये। इस 'लए
भारत म4 उसे ;ाण कहते है। Rवास और जीवन को हमने एक शबद् Vदया। ;ाण का अथ है, जीवन शि+त, जीवंतता। तुZहारा
जीवन तुZहार Rवास है।

तीसर बात Rवास तुZहारे और तुZहारे शर र के बीच एक सेतु है। सतत Rवास तुZह4 तुZहारे शर र से जोड़ रह है। संबं धत कर
रह है। और Rवास ने 'सफ तुZहारे और तुZहारे शर र के बीच सेतु है, वह तुZहारे और वशव् के बीच भी सेतु है। तुZहारा शर र
वशव् का अंग है। शर र क. हरेक चीज, हरेक कण, हरेक कोश वशव् का अंश है। यह वशव् के साथ नकटतम संबंध है। और
Rवास सेतु है। और अगर सेतु टू ट जाये तो तुम शर र म4 नह ं रह सकत।े तुम 0कसी अ ात आयाम म4 चले जाओग।े इस 'लए
Rवास तुZहारे और देश काल के बीच सेतु हो जाती है।

Rवास के दो Bबदं ु है, दो छोर है। एक छोर है जहां वह शर र और वशव् को छू ती है। और दसू रा वह छोर है जहां वह वRवातीत
को छू ती है। और हम Rवास के एक ह Vह9से से पPर चत है। जब वह वशव् म4, शर र म4 ग त करती है। ले0कन वह सदा ह
शर र से अशर र म4 ग त करती है। अगर तुम दसू रे Bबदं ू को, जो सेतु है, धुi है, जान जाओं। तुम एकाएक Mपातं Pरत होकर एक
दसू रे ह आयाम म4 ;वशे कर जाओगे।

ले0कन याद रखो, 'शव जो कहते है वह योग नह ं है। वह तं है। योग भी Rवास पर काम करता है। ले0कन योग और तं के
काम म4 बु नयाद फक है। योग Rवास-02या को >यवि9थत करने क. चOे टा करता है। अगर तुम अपनी Rवास को >यव9था दो
तो तुZहारा 9वासथ् सुधर जायेगा। इसके रह9य- को समझो, तो तुZह4 9वासथ् और द घ जीवन 'मलेगा। तुम `यादा ब'ल,
`यादा ओज9वी, `यादा जीवतं , `यादा ताजा हो जाओगे।

ले0कन तं का इससे कु छ लेना देना नह ं है। तं 9वास क. >यव9था क. चतं ा नह ं करता। भीतर क. और मुड़ने के 'लए वह
Rवास 02या का उपयोग भर करता है। तं म4 साधक को 0कसी वशेष ढंग क. Rवास का अ\यास नह ं करना चाVहए। कोई
वशेष ;ाणायाम नह ं साधना है, ;ाण को लयव नह ं बनाना है; बस उसके कु छ वशषे Bबदं ओु ं के ; त बोधपणू होना है।

Rवास ;शव् ास के कु छ Bबदं ु है िजGह4 हम नह ं जानत।े हम सदा Rवास लेते है। Rवास के साथ जGमते है, Rवास के साथ मरते
है। ले0कन उसके कु छ महतव् पणू Bबदं ओु ं को बोध नह ं है। और यह हैरानी क. बात है। मनुषय् अंतPरQ क. गहराइय- म4 उतर
रहा है, खोज रहा है, वह चादँ पर पहुंच गया है। ले0कन वह अपने जीवन के इस नकटतम वदं ु को समझ नह ं सका। Rवास के

कु छ Bबदं ु है, िजसे तुमने कभी देखा नह ं है। वे Bबदं ु Cवार है, तुZहारे नकटतम Cवार है, िजनसे होकर तुम एक दसू रे ह संसार
म4, एक दसू रे ह अि9ततव् म4, एक दसू र ह चेतना म4 ;वशे कर सकते हो।

ले0कन वह Bबदं ु बहुत सूQ्म है। जो चीज िजतनी नकट हो उतनी ह कVठन मालूम पड़गे ी, Rवास तुZहारे इतना कर ब है, 0क
उसके बीच 9थान ह नह ं बना रहता। या इतना अलप् 9थान है 0क उसे देखने के 'लए बहुत सूQ्म aिOट चाVहए। तभी तुम
उन Bबदं ओु ं के ; त बोध पूण हो सकते हो। ये Bबदं ु इन व धय- के आधार है।

'शव उतत् र म4 कहते है—हे देवी, यह अनुभव दो Rवास- के बीच घVटत हो सकता है। Rवास के भीतर आने के पRचात और बाहर
लौटने के ठUक पूव—kेयस ्है, कYयाण है।

यह व ध है: हे देवी, यह अनुभव दो Rवास- के बीच घVटत हो सकता है। जब Rवास भीतर अथवा नीचे को आती है उसके बाद
0फर Rवास के लौटने के ठUक पवू —kेयस ्है। इन दो Bबदं ओु ं के बीच होश पुण होने से घटना घटती है।

जब तुZहार Rवास भीतर आये तो उसका नर Qण करो। उसके 0फर बाहर या ऊपर के 'लए मुड़ने के पहले एक Qण के 'लए,
या Qण के हज़ारव4 भाग के 'लए Rवास बंद हो जाती है। Rवास भीतर आती है, और वहां एक Bबदं ु है जहां वह ठहर जाती है।
0फर Rवास बाहर जाती है। और जब Rवास बाहर जाती है। तो वहां एक Bबदं ु पर ठहर जाती है। और 0फर वह भीतर के लौटती
है।

Rवास के भीतर या बाहर के 'लए मुड़ने के पहले एक Qण है जब तुम Rवास नह ं लेते हो। उसी Qण म4 घटना घटनी संभव है।
+य-0क जब तुम Rवास नह ं लेते हो तो तुम संसार म4 नह ं होते हो। समझ लो 0क जब तुम Rवास नह ं लेते हो तब तुम मतृ हो;
तुम तो हो, ले0कन मतृ । ले0कन यह Qण इतना छोटा है 0क तुम उसे कभी देख नह ं पात।े

तं के 'लए ;<येक बVहगामी Rवास म<ृ यु है और ;<येक नई 9वास पुनजनम् है। भीतर आने वाल Rवास पुनजनम् है; बाहर
जाने वाल Rवास म<ृ यु है। बाहर जाने वाल Rवास म<ृ यु का पयाय है; अंदर जाने वाल Rवास जीवन का। इस'लए ;<येक
Rवास के साथ तुम मरते हो और ;<येक Rवास के साथ तुम जनम् लेते हो। दोन- के बीच का अंतराल बहुत Qlणक है, ले0कन
पनै ी aिOट, शु नर Qण और अवधान से उसे अनुभव 0कया जा सकता है। और यVद तुम उस अंतराल को अनुभव कर सको
तो 'शव कहते है 0क kेयस ्उपलबध् है। तब और 0कसी चीज क. जMरत नह ं है। तब तुम आ]तकाम हो गए। तुमने जान
'लया; घटना घट गई।

Rवास को ;'शmQत नह ं करना। वह जैसी है उसे वैसी ह बनी रहने देना। 0फर इतनी सरल व ध +य-? सतय् को जानने को
ऐसी सरल व ध? सतय् को जानना उसको जानना है। िजसका न जनम् है न मरण। तुम बहार जाती Rवास को जान सकते
हो, तुम भीतर जाती Rवास को जान सकते हो। ले0कन तुम दोन- के अंतराल को कभी नह ं जानत।े

;योग करो और तुम उस Bबदं ु को पा लोगे। उसे अवशय् पा सकते हो। वह है। तुZह4 या तुZहार संरचना म4 कु छ जोड़ना नह ं है।
वह है ह । सब कु छ है; 'सफ बोध नह ं है। कै से ;योग करो? पहले भीतर आने वाल Rवास के ; त होश पूण बनो। उसे देखो।
सब कु छ भूल जाओ और आने वाल Rवास को, उसके या ा पथ को देखो। जब Rवास नासापुट- को 9पश करे तो उसको
महसूस करो। Rवास को ग त करने दो और पूर सजगता से उसके साथ या ा करो। Rवास के साथ ठUक कदम से कदम
'मलाकर नीचे उतरो; न आगे जाओ और ने पीछे पड़ो। उसका साथ न छू टे; Bबलकु ल साथ-साथ चलो।

सम् रण रहे, न आगे जाना है और न छाया क. तरह पीछे चलना है। समांतर चलो। युगपत। Rवास और सजगता को एक हो
जाने दो। Rवास नीचे जाती है तो तुम भी नीचे जाओं; और तभी उस Bबदं ु को पा सकते हो, जो दो Rवास- के बीच म4 है। यह
आसान नह ं है। Rवास के साथ अंदर जाओ; Rवास के साथ बाहर आओ।

बु ने इसी व ध का ;योग वशेष Mप से 0कया; इस'लए यह बौ व ध बन गई। बौ शcदावल म4 इसे अनापानस त योग
कहते है। और 9वयं बु क. आ<मोपलिcध इस व ध पर ह आधाPरत थी। संसार के सभी धम, संसार के सभी ?Oटा 0कसी न
0कसी व ध के जPरए मंिजल पर पहुंचे है। और वह सब व धयां इन एक सौ बारह व धय- म4 सिZम'लत है। यह पहल व ध
बौ व ध है। दु नया इसे बौ व ध के Mप म4 जानती है। +य-0क बु इसके Cवारा ह नवाण को उपलबध् हुए थे।

बु न कहा है। अपनी Rवास-;Rवास के ; त सजग रहो। अंदर जाती, बहार आती, Rवास के ; त होश पणू हो जाओ। बु
अंतराल क. चचा नह ं करते। +य-0क उसक. जMरत ह नह ं है। बु ने सोचा और समझा 0क अगर तुम अंतराल क., दो Rवास-
के बीच के वराम क. 0फ2 करने लगे, तो उससे तुZहार सजगता खंWडत होगी। इस'लए उGह-ने 'सफ यह कहा 0क होश रखो,
जब Rवास भीतर आए तो तुम भी उसके साथ भीतर जाओ और जब Rवास बहार आये तो तुम उसके साथ बहार आओ। व ध
के दसू रे Vह9से के संबधं म4 बु कु छ नह ं कहते।

इसका कारण है। कारण यह है 0क बु बहुत साधारण लोग- से, सीधे-सादे लोग- से बोल रहे थे। वे उनसे अंतराल क. बात
करते तो उससे लोग- म4 अंतराल को पाने क. एक अलग कामना न'मत हो जाती। और यह अंतराल को पाने क. कामना बोध
म4 बाधा बन जाती। +य-0क अगर तुम अंतराल को पाना चाहते हो तो तुम आगे बढ़ जाओगे; Rवास भीतर आती रहेगी। और
तुम उसके आगे नकल जाओग।े +य-0क तुZहार aिOट अंतराल पर है जो भ वषय् म4 है। बु कभी इसक. चचा नह ं करते;
इसी'लए बु क. व ध आधी है।

ले0कन दसू रा Vह9सा अपने आप ह चला आता है। अगर तुम Rवास के ; त सजगता का, बोध का अ\यास करते गए तो एक
Vदन अनजाने ह तुम अंतराल को पा जाओग।े +य-0क जैसे-जैसे तुZहारा बोध तीi, गहरा और सघन होगा, जैसे-जैसे तुZहारा
बोध 9पषट् आकार लेगा। जब सारा संसार भूल जाएगा। बस Rवास का आना जाना ह एकमा बोध रह जाएगा—तब
अचानक तुम उस अंतराल को अनुभव करोग।े िजसम4 Rवास नह ं है।

अगर तुम सूnमता से Rवास-;शव् ास के साथ या ा कर रहे हो तो उस ि9थ त के ; त अबोध कै से रह सकते हो। जहां 9वास
नह ं है। वह Qण आ ह जाएगा जब तुम महसूस करोगे। 0क अब Rवास न जाती है, न आती है। Rवास 02या Bबलकु ल ठहर गई
है। और उसी ठहराव म4 kेयस ्का वास है।

यह एक व ध लाख--करोड़- लोग- के 'लए पयापत् है। सVदय- तक समूचा ए'शया इस एक व ध के साथ जीया और उसका
;योग करता रहा। तबब् त, चीन, जापन, बमा, Rयाम, kीलंका। भारत को छोड़कर समसत् ए'शया सVदय- तक इस एक
व ध का उपयोग करता रहा। और इस एक व ध के Cवारा हजार--हजार- वय् ि+त ान को उपलबध् हुए। और यह पहल ह
व ध है। दभु ागय् क. बात 0क चंू0क यह व ध बु के नाम से संबं हो गई। इस'लए Vहदं ू इस व ध से बचने क. चेOटा म4 लगे
रहे। +य-0क यह बौ व ध क. तरह बहुत ;'स हुई। Vहदं ू इसे Bबलकु ल भूल गये। इतना ह नह ,ं उGह-ने और एक कारण से
इसक. अवहेलना क.। +य-0क 'शव ने सबसे पहले इस व ध का उYलेख 0कया, अनके बौ - ने इस व ान भैरव तं के बौ
*ंथ होने का दावा 0कया। वे इसे Vहदं ू *ंथ नह ं मानत।े

यह न Vहदं ू है और न बौ , और व ध मा व ध है। बु ने इसका उपयोग 0कया, ले0कन यह उपयोग के 'लए मौजूद ह थी।
और इस व ध के चलते बु -बु हुए। व ध तो बु से भी पहले थी। वह मौजूद ह थी। इसको ;योग म4 लाओ। यह सरलतम

व धय- म4 से है—अनय् व धय- क. तुलना म4। म_ यह नह ं कहता 0क यह व ध तुZहारे 'लए सरल है। अनय् व धयां अ धक
कVठन ह-गी। यह कारण है 0क पहल व ध क. तरह इसका उYलेख हुआ है।
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन—2,

तं -सू — व:ध—02

जब वास नीचे से ऊपर क" और मुड़ती है, और 6फर जब वास ऊपर से नीचे क" और मुड़ती है—इन दो मोड़2 के Gवारा
उपलबध् हो।

व ान भैरव तं ;;;;तं -सू — व ध—02 ( ओशो)

थोड़े फक के साथ यह वह व ध है; और अब अंतराल पर न होकर मोड़ पर है। बाहर जाने वाल और अंदर जाने वाल Rवास
एक वतुल बनाती है। याद रहे, वे समांतर रेखाओं क. तरह नह ं है। हम सदा सोचते है 0क आने वाल Rवास और जाने वाल
Rवास दो समातं र रेखाओं क. तरह है। मगर वे ऐसी है नह ं। भीतर आने वाल Rवास आधा वतुल बनाती है। और शषे आधा
वतुल बाहर जाने वाल Rवास बनाती है।
इस'लए पहले यह समझ लो 0क Rवास और ;Rवास 'मलकर एक वतुल बनाती है। और वे समातं र रेखाएं नह ं है; +य-0क
समातं र रेखाएं कह नह ं 'मलती है। दसू र यह 0क आने वाल और जाने वाल Rवास दो नह ं है। वे एक है। वह Rवास भीतर
आती है, बहार भी जाती है। इस'लए भीतर उसका कोई मोड़ अवशय् होगा। वह कह ं जMर मुड़ती होगी। कोई Bबदं ु होगा, जहां
आने वाल Rवास जाने वाल Rवास बन जाती होगी।
ले0कन मोड़ पर इतना जोर क्य- है?

+य-0क 'शव कहते है, ‘’जब Rवास नीचे से ऊपर क. और मुड़ती है, और 0फर जब Rवास ऊपर से नीचे क. और मुड़ती है—इन
दो मोड़- के Cवारा उपलबध् हो।‘’

बहुत सरल है। ले0कन 'शव कहते है 0क मोड़- को ;ापत् कर लो। और आ<मा को उपलबध् हो जाओग।े ले0कन मोड़ +य-?

अगर तुम कार चलाना जानते हो तो तुZह4 गयर का पता होगा। हर गयर बदलते हो तो तुZह4 Gयूoल गयर से गजु रना पड़ता
है जो 0क गयर Bबलकु ल नह ं है। तुम पहले गयर से दसू रे गयर म4 जाते हो और दसू रे से तीसरे गयर म4। ले0कन सदा तुZह4
Gयूoल गयर से होकर जाना पड़ता है। वह Gयूoल गयर घुमाव का Bबदं ु है। मोड़ है। उस मोड़ पर पहला गयर दसू रा गयर
बन जाता है। और दसू रा तीसर बन जाता है।

वैसे ह जब तुZहार Rवास भीतर जाती है और घूमने लगती है तो उस वक्त वह Gयूoल गयर म4 होती है। नह ं तो वह नह ं
धूम सकती। उसे तटसथ् Qे से गजु रना पड़ता है।

उस तटसथ् Qे म4 तुम न तो शर र हो और न मन ह हो; न शार Pरक हो, न मान'सक हो। +य-0क शर र तुZहारे अि9ततव् का
एक गयर है और मन उसका दसू रा गयर है। तुम एक गयर से दसू रे गयर म4 ग त करते हो, इस 'लए तुZह4 एक Gयूoल
गयर क. जMरत है जो न शर र हो और न मन हो। उस तटसथ् Qे म4 तुम मा हो, मा अि9ततव् –शु , सरल, अशर र और
मन से मुक्त। यह कारण है 0क घुमाव Bबदं ु पर, मोड़ पर इतना जोर है।

मनुषय् एक यं है—बड़ा और बहुत जVटल यं । तुZहारे शर र और मन म4 भी अनेक गयर है। तुZह4 उस महान यं रचना का
बोध नह ं है। ले0कन तुम एक महान यं हो। और अfछा है 0क तुZह4 उसका बोध नह ं है। अGयथा तुम पागल हो जाओग।े
शर र ऐसा वशाल यं है 0क वै ा नक कहते है, अगर हम4 शर र के समातं र एक कारखाना न'मत करना पड़े तो उसे चार वग
'मल जमीन क. जMरत होगी। और उसका शोरगलु इतना भार होगा 0क उससे सौ वग मील भू'म ;भा वत होगी।

शर र एक वशाल याBं क रचना है— वशालतम। उसमे लाख--लाख- को'शकांए है, और ;<येक को'शका जी वत है। तुम सात
करोड़ को'शकाओं के एक वशाल नगर म4 हो; तुZहारे भी तर सात करोड़ नागPरक बसते है; और सारा नगर बहुत शां त और
>यव9था से चल रहा है। ; तQण यं -रचना काम कर रह है। और वह बहुत जVटल है।

कई 9थल- पर इन व धय- का तुZहारे शर र और मन क. एक यं -रचना के साथ वा9ता पड़गे ा। ले0कन याद रखो। 0क सदा ह
जोर उन Bबदं ओु ं पर रहेगा जहां तुम अचानक यं -रचना के अंग नह ं रह जाते हो। जब एकाएक तुम यं रचना के अंग नह ं रहे
तो ये ह Qण है जब तुम गयर बदलते हो।

उदाहरण के 'लए, रात जब तुम नीदं म4 उतरते हो तो तुZह4 गयर बदलना पड़ता है। कारण यह है 0क Vदन म4 जागी हुई चेतना
के 'लए दसू रे ढंग क. यं रचना क. जMरत रहती है। तब मन का भी एक दसू रा भाग काम करता है। और जब तुम नींद म4
उतरते हो तो वह भाग निO2य हो जाता है। और अनय् भाग स02य होता है। उस Qण वहां एक अंतराल, एक मोड़ आता है।
एक गयर बदला। 0फर सुबह जब तुम जागते हो तो गयर बदलता है।

तुम चुपचाप बैठे हो और अचानक कोई कु छ कह देता है, और तुम 2ु हो जाते हो। तब तुम 'भनन् गयर म4 चले गए। यह
कारण है 0क सब कु छ बदल जाता है। तुम 2ोध म4 हुए Rवास 02या बदल जायेगी। वह अ9त>यसत् हो जायेगी। तुZहार Rवास
02या म4 कं पन आ जाएगा। 0कसी चीज को चूर-चूर कर देना चाहेगा, ता0क यह घुटन जाए। तुZहार Rवास 02या बदल
जाएगी, तुZहारे खून क. लय दसु र होगी। शर र म4 और ह तरह का रस ?वय् स02य होगा। परू *ं थ >यव9था ह बदल
जाएगी। 2ोध म4 तुम दसू रे ह आदमी हो जाते हो।

एक कार खड़ी है, तुम उसे 9टाट करो। उसे 0कसी गयर म4 न डालकर Gयूoल गयर म4 छोड़ दो। गाड़ी Vहलेगी, कांपगे ी, ले0कन
चलेगी नह ।ं वह गरम हो जाएगी। इसी तरह 2ोध म4 नह ं कु छ कर पाने के कारण तुम गरम हो जाते हो। यं रचना तो कु छ
करने के 'लए स02य है और तुम उसे कु छ करने नह ं देते तो उसका गरम हो जाना 9वाभा वक है। तुम एक यं -रचना हो,
ले0कन मा यं -रचना नह ं हो। उससे कु छ अ धक हो। उस अ धक को खोजना है। जब तुम गयर बदलते हो तो भीतर सब
कु छ बदल जाता है। जब तुम गयर बदलते हो तो एक मोड़ आता है।

'शव कहते है, ‘’जब Rवास नीचे से ऊपर क. और मुड़ती है, और 0फर जब Rवास ऊपर से नीचे क. और मुड़ती है। इन दो मोड़- के
Cवारा उपलबध् हो जाओ।‘’

मोड़ पर सावधान हो जाओ, सजग हो जाओ। ले0कन यह मोड़ बहुत सूQ्म है और उसके 'लए बहुत सूQ्म नर Qण क.
जMरत पड़गे ी। हमार नर Qण क. Qमता नह ं के बराबर है; हम कु छ देख ह नह ं सकत।े अगर म_ तुZह4 कहूं 0क इस फू ल को
देखो—इस फू ल को जो तुZह4 म_ देता हूं। तो तुम उसे नह ं देख पाओग।े एक Qण को तुम उसे देखोग4 और 0फर 0कसी और चीज
के संबधं म4 सोचने लगोगे। वह सोचना फू ल के वषय म4 हो सकता है। ले0कन वह फू ल नह ं हो सकता। तुम फू ल के बारे म4
सोच सकते हो। 0क देखो वह 0कतना सुंदर है। ले0कन तब तुम फू ल से दरू हट गए। अब फू ल तुZहारे नर Qण Qे म4 नह ं
रहा। Qे बदल गया। तुम कहोगे 0क यह लाल है, नीला है, ले0कन तुम उस फू ल से दरू चले गए।

नर Qण का अथ होता है: 0कसी शबद् या शािcदकता के साथ, भीतर क. बदलाहट के साथ न रहकर मा फू ल के साथ रहना।
अगर तुम फू ल के साथ ऐसे तीन 'मनट रह जाओ, िजसमे मन कोई ग त न करे, तो kेयस ् घट जाएगा। तुम उपलबध् हो
जाओग।े

ले0कन हम नर Qण Bबलकु ल नह ं जानते है। हम सावधान नह ं है, सतक नह ं है, हम 0कसी भी चीज को अपना अवधान नह ं
दे पाते है। हम ता यहा-ं वहां उछलते रहत है। वह हमार वंशगत वरासत है, बदं र-वशं क. वरासत। बंदर के मन से ह मनुषय्
का मन वक'सत हुआ है। बंदर शातं नह ं बैठ सकता। इसी'लए बु Bबना हलन-चलन के बैठने पर, मा बठै ने पर इतना जौर
देते है। +य-0क तब बंदर-मन का अपनी राह चलना बदं हो जाता है।

जापान म4 एक खास तरह का Lयान चलता है िजसे वे झा झेन कहते है। झा झेन शबद् का जापानी म4 अथ होता है, मातर्
बठै ना और कु छ भी नह ं करना। कु छ भी हलचल नह ं करनी है, मू त क. तरह वष[ बैठे रहना है—मतृ वत,् अचल। ले0कन मू त
क. तरह वष[ बठै ने क. जMरत +या है? अगर तुम अपने Rवास के घुमाव को अचल मन से देख सको तो तुम ;वेश पा
जाओगे? तुम 9वयं म4 ;वेश पा जाओगे। अंतर के भी पार ;वशे पा जाओगे। ले0कन ये मोड़ इतने मह<वपूण +य- है?

वे मह<वपणू है, +य-0क मोड़ पर दसू र Vदशा म4 घूमने के 'लए Rवास तुZह4 छोड़ देती है। जब वह भीतर आ रह थी तो तुZहारे
साथ थी; 0फर जब वह बाहर जाएगी तो तुZहारे साथ होगा। ले0कन घुमाव-Bबदं ु पर न वह तुZहारे साथ है और न तुम उसके
साथ हो। उस Qण म4 Rवास तुमसे 'भनन् है और तुम उससे 'भनन् हो। अगर Rवास 02या ह जीवन है तो तब तुम मतृ हो।
अगर Rवास-02या तुZहारा मन है तो उस Qण तुम अ-मन हो।

तुZह4 पता हो या न हो, अगर तुम अपनी Rवास को ठहरा दो तो मन अचानक ठहर जाता है। अगर तुम अपनी Rवास को ठहरा
दो तो तुZहारा मन अभी और अचानक ठहर जाएगा; मन चल नह ं सकता। Rवास का अचानक ठहरना मन को ठहरा देता है।
+य-? +य-0क वे पथृ क हो जाते है। के वल चलती हुई Rवास मन से शर र से जुड़ी होती है। अचल Rवास अलग हो जाती है। और
जब तुम Gयूoल गयर म4 होते हो।

कार चालू है, ऊजा भाग रह है, कार शोर मचा रह है। वह आगे जाने को तैयार है। ले0कन वह गयर म4 ह नह ं है। इस'लए
कार का शर र और कार का यं -रचना, दोन- अलग-अलग है। कार दो Vह9स- म4 बटं है। वह चलने को तैयार है, ले0कन ग त
का यं उससे अलग है।

वह बात तब होती है जब Rवास मोड़ लेती है। उस समय तुम उसे नह ं जुड़े हो। और उस Qण तुम आसानी से जान सकते हो
0क म_ कौन हूं, यह होना +या है, उस समय तुम जान सकते हो 0क शर र Mपी घर के भीतर कौन है, इस घर का 9वामी कौन
है। म_ मा घर हूं या वहां कोई 9वामी भी है, म_ मा यं रचना हूं, या उसके परे भी कु छ है। और 'शव कहते है 0क उस घुमाव
Bबदं ु पर उपलबध् हो। वे कहते है, उस मोड़ के ; त बोधपणू हो जाओ और तुम आ<मोपलबध् हो।

ओशो
व ान भैरव तं

)वचन-2( तं -सू —भाग-1)

तं -सू — व:ध—03

या जब कभी अंत: वास और ब=ह वास एक दसू रे म0 वल%न होती है, उस Iण म0 ऊजार=हत, ऊजापू(रत क0 1 को Jपश करो।

व ान भैरव तं –धय् ान व ध–03–ओशो

हम क4 ? और पPर ध म4 वभािजत है। शर र पPर ध है। हम शर र को, पPर ध को जानते है। ले0कन हम यह नह ं जानते 0क
कहां क4 ? है। जब बVहRवास अंत:Rवास म4 वल न होती है। जब वे एक हो जाती है। जब तुम यह नह ं कह सकते 0क यह
अंत:Rवास है 0क बVहRवास, जब यह बताना कVठन हो 0क Rवास भीतर जा रह है 0क बाहर जा रह है। जब Rवास भी तर ;वेश
0क बाहर क. तरफ मुड़ने लगती है, तभी वलय का Qण है। तब Rवास जाती है और न भीतर आती है। Rवास ग तह न है। जब
वह बहार जाती है, ग तमान है, जब वह भीतर आती है, ग तमान है। और जब वह दोन- म4 कु छ भी नह ं करती है। तब वह
मौन है, अचल है। और तब तुम क4 ? के नकट हो। आने वाल और जाने वाल Rवास- का यह वलय वदं ु तुZहारा क4 ? है।
इसे इस तरह देखो। जब Rवास भीतर जाती है तो कहां जाती है? वह तुZहारे क4 ? को जाती है। और जब वह बाहर जाती है तो
कहां जाती है? क4 ? से बाहर जाती है। इसी क4 ? को 9पश करना है। यह कारण हे 0क ताओ वाद संत और झेन संत कहते है 0क
'सर तुZहारा क4 ? नह ं है, ना'भ तुZहारा क4 ? है। Rवास ना'भ-क4 ? को जाती है, 0फर वहां से लौटती है, 0फर उसक. या ा करती
है।

जैसा मन_ े कहा, Rवास तुZहारे और तुZहारे शर र के बीच सेतु है। तुम शर र को तो जानते हो, ले0कन यह नह ं जानते 0क क4 ?
कहां है। Rवास नरंतर क4 ? को जा रह है। और वहां से लौट रह है। ले0कन हम पयापत् Rवास नह ं लेते है। इस कारण से
साधारण: वह क4 ? तक नह ं पहुंच पाती है। खासकर आधु नक समय म4 तो वह क4 ? तक नह ं जाती। और नतीजा यह है 0क
हरेक >यि+त वक4 V?त अनुभव करता है। अपने को क4 ? से fयूत महसूस करता है। परू े आधु नक संसार म4 जो लोग भी थोड़ा
सोच- वचार करते है। वे महसूस करते है 0क उनका क4 ? खो गया है।

एक सोए हुए बfचे को देखो, उसक. Rवास का नर Qण करो। जब उसक. Rवास भीतर जाती है तो उसका पेट ऊपर उठता है।
उसक. छाती अ;भा वत रहती है। यह वजह है 0क बfच- के छाती नह ं होती। उनके के वल पटे होते है। जीवंत पटे । Rवास
;Rवास के साथ उनका पेट ऊपर नीचे होता है। उनका पेट ऊपर-नीचे होता है और बfचे अपने क4 ? पर होते है, क4 ? म4 होते है,
और यह कारण है 0क बfचे इतने सुखी है, इतने आनंदमगन् है। इतनी ऊजा से भरे है 0क कभी थकते नह ं और ओवर
pलोइंग है। वे सदा वतमान Qण म4 होते है। न उनका अतीत है न भ वषय् ।

एक बfचा 2ोध कर सकता है। जब वह 2ोध करता है तो सम*ता से 2ोध करता है। वह 2ोध ह हो जाता है। और तब उसका
2ोध भी 0कतना संुदर लगता है। जब कोई सम*ता से 2ोध ह हो जाता है। तो उसके 2ोध का भी अपना सqदय है। +य-0क
सम*ता सदा संुदर होती है।

तुम 2ोधी और सुंदर नह ं हो सकत।े 2ोध म4 तुम कु Mप लगोगे। +य-0क खंड सदा कु Mप होता है। 2ोध के साथ ह ऐसा नह ं
है। तुम ;मे भी करते हो तो कु Mप लगते हो। +य-0क उसमे भी तुम खंWडत हो, बंटे-बंटे हो। जब तुम 0कसी को ;मे कर रहे हो,
जब तुम संभोग म4 उतर रहे हो तो अपने चहे रे को देखो। आईने के सामने ;ेम करो और अपना चेहरा देखो। वह कु Mप और
पशुवत होगा।

;मे म4 भी तुZहारा Mप कु Mप हो जाता है। +य-? तुZहारे ;मे म4 भी CवंCव है, तुम कु छ बचाकर रख रहे हो, कु छ रोक रहे हो;
तुम बहुत कं जूसी से दे रहे हो। तुम अपने ;ेम म4 भी सम* नह ं हो। तुम सम*ता से, परू े-परू े दे भी नह ं पात।े

और बfचा 2ोध और Vहसं ा से भी सम* होता है। उसका मुखड़ा द पत् और संुदर हो उठता है। वह यहां और अभी होता है।
उसके 2ोध का न 0कसी अतीत से कु छ लेना-देना है और न 0कसी भ वषय् से; वह Vहसाब नह ं रखता है। वह मा 2ु है।
बfचा अपने क4 ? पर है। और जब तुम क4 ? पर होते हो तो सदा सम* होते हो। तब तुम तो कु छ करते हो वह सम* होता है।
भला या बरु ा, वह सम* होता है। और जब खंWडत होते हो, क4 ? से fयुत होते हो तो तुZहारा हरेक काम भी खंWडत होता है।
+य-0क उसमे तुZहारा खंड ह होता है। उसमे तुZहारा सम* संवेVदत नह ं होता है। खंड सम* के lखलाफ जाता है। और वह
कु Mपता पदै ा करता है।

कभी हम सब बfचो थे। +या बात है 0क जैसे-जैसे हम बड़े होते है हमार Rवास 02या उथल हो जाती है। तब Rवास पेट तक
कभी नह ं जाती है, ना'भ क4 ? को नह ं छू ती है। अगर वह जय् ादा से `यादा नीचे जाएगी तो वह कम से कम उथल रहेगी।
ले0कन व तो सीने को छू कर लौट आती है। वह क4 ? तक नह ं जाती है। तुम क4 ? से डरते हो, +य-0क क4 ? पर जाने से तुम
सम* हो जाओगे। अगर तुम खंWडत रहना चाहो तो खंWडत रहने क. यह ;02या है।

तुम ;मे करते हो, अगर तुम क4 ? से Rवास लो तो तुम ;ेम म4 परू े बहोगे। तुम डरे हुए हो। तुम दसू रे के ; त, 0कसी के भी ; त
खुल होने से, असुरmQत और संवदे नशील होने से डरते हो। तुम उसे अपना ;मे ी कहो 0क ;े'मका कहो, तुम डरे हुए हो। वह
दसू रा है, और अगर तुम परू तरह खुले हो, असुरmQत हो तो तुम नह ं जानते 0क +या होने जा रहा है। तब तुम हो, सम*ता से
हो—दसू रे अथ[ म4। तुम पूर तरह दसू रे म4 खो जाने से डरते हो। इस'लए तुम गहर Rवास नह ं ले सकत।े तुम अपनी Rवास को

'श थल और ढ ला नह ं कर सकते हो। +य-0क वह क4 ? तक चल जायगे ी। +य-0क िजस Qण Rवास क4 ? पर पहुँचेगी, तुZहारा
कृ तय् अ धका धक सम* होने लगगे ा।

+य-0क तुम सम* होने से डरते हो, तुम उथल Rवास लेते हो। तुम अलप् तम Rवास लेते हो। अ धकतम नह ं। यह कारण है
0क जीवन इतना जीवनह न लगता है। अगर तुम Gयूनतम Rवास लोगे तो जीवन जीवनह न ह होगा। तुम जीते भी Gयूनतम
हो, अ धकतम नह ।ं तुम अ धकतम िजयो तो जीवन अ तशय हो जाए। ले0कन तब कVठनाई होगी। यVद जीवन अ तशय हो
तो तुम न प त हो सकते हो और न प<नी। सब कु छ कVठन हो जाएगी। अगर जीवन अ तशय हो तो ;ेम अ तशय होगा। तब
तुम एक से ह बंधे नह ं रह सकत।े तब तुम सब तरफ ;वाVहत होने लगोगे। सभी आयाम म4 तुम भर जाओगे। और उस हालत
म4 मन खतरा महसूस करता है; इस'लए जी वत ह नह ं रहना उसे मंजूर है।

तुम िजतने मतृ होग4 उतने सुरmQत होग4। िजतने मतृ होग4 उतना ह सब कु छ नयं ण म4 होगा। तुम नयं ण करते हो तो
तुम मा'लक हो, +य-0क नयं ण करते हो इस'लए अपने को मा'लक समझते हो। तुम अपने 2ोध पर, अपने ;ेम पर, सब
कु छ पर नयं ण कर सकते हो। ले0कन यह नयं ण ऊजा के Gयूनतम तक पर ह संभव है।

कभी न कभी हर आदमी ने यह अनुभव 0कया है 0क वह अचानक Gयूनतम से अ धकतम तल पर पहुंच गया। तुम 0कसी
पहाड़ पर चले जाओ। अचानक तुम शहर से, उसक. कै द से बाहर हो जाओ। अब तुम मुक्त हो। वराट आकाश है, हरा जंगल
है, बादल- को छू ता 'शखर है। अचानक तुम गहर Rवास लेते हो। हो सकता है, उस पर तुZहारा Lयान न को छू ता 'शखर है।
अचानक तुम गहर Rवास लेते हो। हो सकता है, उस पर तुZहारा Lयान न गया हो। अब जब पहाड़ जाओ तो इसका rयाल
रखना। के वल पहाड़ के कारण बदलाहट नह ं मालूम होती, Rवास के कारण मालूम होती है। तुम गहर Rवास लेते हो और
कहते हो, अहा, तुमने क4 ? छू 'लया, Qण भर के 'लए तुम सम* हो गए। और सब कु छ आनंदपूण है। वह आनंद पहाड़ से नह ,ं
तुZहारे क4 ? से आ रहा है। तुमने अचानक उसे छू जो 'लया।

शहर म4 तुम भयभीत थ।े सव दसू रा मौजूद था और तुम अपने को काबू म4 0कए रहते थे। न रो सकते थे, न हंस सकते थे।
कै से दभु ागय् , तुम सड़क पर गा नह ं सकते थे। नाच नह ं सकते थे। तुम डरे-डरे थे। कह ं 'सपाह खड़ा था, कह ं परु ोVहत, कह ं
जज खड़ा था। कह ं राजनी त , कह ं नी तवाद । कोई न कोई था 0क तुम नाच नह ं सकते थे।

बosड रसेल न कह ं कहा है 0क म_ स\यता से ;ेम करता हूं, ले0कन हमने यह स\यता भार क.मत चुका कर हा'सल क. है।

तुम सड़क पर नह ं नाच सकते, ले0कन पहाड़ चले जाओ और वहां अचानक नाच सकते हो। तुम आकाश के साथ अके ले हो
और आकाश कारागहृ नह ं है। वह खुलता ह जाता है, खुलता ह जाता है। अंनत तक खुलता ह जाता है। एकाएक तुम एक
गहर Rवास लेते हो; क4 ? छू जाता है; और तब आनंद ह आनंद है।

ले0कन वह लंबे समय तक Vटकने वाला नह ं है। घंटे दो घंटे म4 पहाड़ वदा हो जाएगा। तुम वहां रह सकते हो, ले0कन पहाड़
वदा हो जाएगा। तुमह् ार चतं ाएं लौट आएगँ ी। तुम शहर देखना चाहोगे, प<नी को प 'लखने क. सोचोगे या सोचोगे 0क तीन
Vदन बाद वापस जाना है तो उसक. तैयार शुM कर4। अभी तुम आए हो और जाने क. तैयार होने लगी। 0फर तुम वापस आ
गए। वह गहर Rवास सच म4 तुमसे नह ं आई थी। वह अचानक घVटत हुई थी, बदल पPरि9थ त के कारण गयर बदल गया
था। नई पPरि9थ त म4 तुम परु ाने ढंग से Rवास नह ं ले सकते थ।े इस'लए Qण भर को एक नयी Rवास आ गई, उसने क4 ? छू
'लया और तुम आनंVदत थ।े

'शव कहते है, तुम ;<येक Qण क4 ? को 9पश कर रहे हो, या यVद नह ं 9पश कर रहे हो तो कर सकते हो। गहर , धीमी Rवास
लो और क4 ? को 9पश करो। छाती से Rवास मत लो। वह एक चाल है; स\यता, 'शQा और नै तकता ने हम4 उथल Rवास
'सखा द है। क4 ? म4 गहरे उतरना जMर है, अGयथा तुम गहर Rवास नह ं ले सकत।े

जब तक मनुषय् समाज कामवासना के ; त गरै -दमन क. aिOट नह ं अपनाता, तब तक वह सच म4 Rवास नह ं ले सकता।
अगर Rवास पेट तक गहर जाए तो वह काम क4 ? को ऊजा देती है। वह काम क4 ? को छू ती है। उसक. भीतर से मा'लश करती
है। तब काम-क4 ? अ धक स02य, अ धक जीवतं हो उठता है। और स\यता कामवासना से भयभीत है।

हम अपने बfच- को जनन4V?य छू ने नह ं देते है। हम कहते है, tको, उGह4 छु ओ मत। जब बfचा पहल बार जनन4V?य छू ता है
तो उसे देखो; और कहो, tको; और तब उसक. Rवास 02या को देखो। जब तुम कहते हो, tको, जनन4V?य मत छु ओ। तो
उसक. Rवास तुरंत उथल हो जायेगी। +य-0क उसका हाथ ह काम क4 ? को नह ं छू रहा। गहरे म4 उसक. Rवास भी उसे छू रह
है। अगर Rवास उसे छू ती रहे तो हाथ को रोकना कVठन है। और अगर हाथ tकता है तो बु नयाद तौर से जMर हो जाता है 0क
Rवास गहर न होकर उथल रहे।

हम काम से भयभीत है। शर र का नचला Vह9सा शार Pरक तल पर ह नह ं मूलय् के तल पर भी नचला हो गया है। वह
नचला कहकर नVं दत है। इस'लए गहर Rवास नह ,ं उथल Rवास लो। दभु ागय् क. बात है 0क Rवास नीचे को ह जाती है।
अगर उपदेशक क. चलती तो वह पूर यं रचना को बदल देता। वह 'सफ ऊपर क. और, 'सर म4 Rवास लेने क. इजाजत देता।
और तब कामवासना Bबलकु ल अनुभव नह ं होती।

अगर काम वह न मनुषय् को जनम् देना है तो Rवास-;णाल को Bबलकु ल बदल देना होगा। तब Rवास को 'सर म4 सह9 ार म4
भेजना होगा। और वहां से मुंह म4 वापस लाना होगा। मंुह से सह9 ार उसका माग होगा। उसे नीचे गहरे म4 नह ं जाने देना
होगा। +य-0क वहां खतरा है। िजतने गहरे उतरोगे उतने ह जै वक. के गहरे तल- पर पहुंचोग।े तब तुम क4 ? पर पहुंचोग।े और
वह क4 ? काम क4 ? के पास ह है। ठUक भी है, +य-0क काम ह जीवन है।

इसे इस तरह देखो। Rवास ऊपर से नीचे को जाने वाला जीवन है। काम ठUक दसू र Vदशा से नीचे से ऊपर को जाने वाला जीवन
है। काम-ऊजा बह रह है। और Rवास ऊजा बह रह है। Rवास का रा9ता ऊपर शर र म4 है और काम का रा9ता नमन् शर र म4
है। और जब Rवास और काम 'मलते है। जीवन को जनम् देते है। इस 'लए अगर तुम काम से डरते हो, तो दोन- के बीच दरू
बनाओ। उGह4 'मलने मत दो। सच तो यह है 0क सभय् आदमी ब धया 0कया हुआ आदमी है। यह कारण है 0क हम Rवास के
संबधं म4 नह जानत,े और हम4 यह सू समझना कVठन है।

'शव कहते है: जब कभी अंत:Rवास और बVहRवास एक दसू रे म4 वल न होती है। उस Qण म4 ऊजारVहत, ऊजापPू रत क4 ? को
9पश कर-।

'शव परसप् र वरोधी शcदावल का उपयोग करते है। ऊजारVहत, ऊजापPू रत। वह ऊजारVहत है, +य-0क तुZहारे शर र, तुZहारे
मन उसे ऊजा नह ं दे सकते। तुZहारे शर र क. ऊजा और मन क. ऊजा वहां नह ं है। इस'लए जहां तक तुZहारे तादा<Zय का
संबधं है, वह ऊजारVहत है। ले0कन वह ऊजापूPरत है, +य-0क उसे ऊजा का जाग तक 9 ोत उपलबध् है।

तुZहारे शर र क. ऊजा को uधन है—पoे ोल जैसी। तुम कु छ खाते-पीते हो उससे ऊजा बनती है। खाना पीना बंद कर दो और
शर र मतृ हो जाएगा। तुरंत नह ं कम से कम तीन मह ने लग4ग।े +य-0क तुZहारे पास पoे ोल का एक खजाना भी है। तुमने
बहुत ऊजा जमा क. हुई है, जो कम से कम तीन मह ने काम दे सकती है। शर र चलेगा, उसके पास जमा ऊजा थी। और 0कसी
आप<काल म4 उसका उपयोग हो सकता है। इस'लए शर र ऊजा-uधन ऊजा है।

क4 ? को uधन-ऊजा नह ं 'मलती है। यह कारण है 0क 'शव उसे ऊजारVहत कहते है। वह तुZहारे खाने पीने पर नभर नह ं है।
वह जाग तक 9 ोत से जुड़ा हुआ है, वह जाग तक ऊजा है। इस'लए 'शव उसे ‘’ऊजारVहत, ऊजापPू रत क4 ? कहते है। िजस
Qण तुम उस क4 ? को अनुभव करोगे जहां से Rवास जाती-आती है, जहां Rवास वल न होती है, उस Qण तुम आ<मोपलबध्
हुए।
ओशो
व ान भैरव तं ,
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-2

तं -सू — व:ध-05

भकृ ु =टय2 के बीच अवधान को िJथर कर वचार को मन के सामने करो। 6फर सहJ ार तक प को वास-ततव् से, )ाण से
भरने दो। वहां वह )काश क" तरह बरसेगा।

Shira तं -सू — व ध-05 ( व ान भरै व तं –ओशो)

यह व ध पाइथागोरस को द गई थी। पाइथागोरस इसे लेकर यूनान वापस गए। और वह पिRचम के समसत् रह9यवाद के
आधार बन गए। पिRचम म4 अLया<मवाद के वे पता है। यह व ध बहुत गहर व धय- म4 ऐ एक है। इसे समझने क. को'शश
करो।
‘’भकृ ु Vटय- के बीच अवधान को ि9थर करो।‘’
आधु नक शर र-श9 कहता है, वै ा नक शोध कहती है 0क दो भकृ ु Vटय- के बीच म4 *ं थ है वह शर र का सबसे रह9यपूण
भाग है। िजसका नाम पाइ नयल *ं थ है। यह तcब तय- क. तीसर आँख है। और यह है 'शव का ने । तं के 'शव का
B ने । दो आंख- के बीच एक तीसर आँख भी है। ले0कन यह स02य नह ं है। यह है, और यह 0कसी भी समय स02य हो
सकती है। नसगत: यह स02य नह ं है। इसको स02य करने के 'लए संबंध म4 तुम को कु छ करना पड़गे ा। यह अंधी नह ं है,
'सफ बदं है। यह व ध तीसर आँख को खोलने क. व ध है।
‘’भकृ ु Vटय- के बीच अवधान को ि9थर कर…..।‘’

आंखे बंद कर लो और 0फर दोन- आंख- को बंद रखते हुए भqह- के बीच म4 aिOट को ि9थर करो—मानो 0क दोन- आंख- से तुम
देख रहे हो। और सम* अवधान को वह लगा दो।

यह व ध एका* होने क. सबसे सरल व धय- म4 से एक है। शर र के 0कसी दसू रे भाग म4 इतनी आसानी से तुम अवधान को
नह ं उपलबध् हो सकत।े यह *ं थ अवधान को अपने म4 समाVहत करने म4 कु शल है। यVद तुम इस पर अवधान दोगे तो
तुZहार दोन- आंखे तीसर आँख से सZमोVहत हो जाएगं ी। वे थर हो जाएगं ी, वे वहां से नह ं Vहल सक4 गी। यVद तुम शर र के
0कसी दसू रे Vह9से पर अवधान दो तो वहां कVठनाई होगी। तीसर आँख अवधान को पकड़ लेती है। अवधान को खींच लेती है।
अवधान के 'लए वह चुंबक का काम करती है।

इस'लए दु नया भी क. सभी व धय- म4 इसका समावेश 0कया गया है। अवधान को ;'शmQत करने म4 यह सरलतम है,
+य-0क इसमे तुम ह चेOटा नह करते, यह *ं थ भी तुZहार मदद करती है। यह चंुबक.य है। तुZहारे अवधान को यह
बलपूवक खींच लेती है।

तं के परु ाने *ंथ- म4 कहा गया है 0क अवधान तीसर आँख का भोजन है। यह भूखी है; जGम--जGम- से भूखी है। जब तुम इसे
अवधान देते हो यह जी वत हो उठती है। इसे भोजन 'मल गया है। और जब तुम जान लोगे 0क अवधान इसका भोजन है,
जान लोगे 0क तुZहारे अवधान को यह चुंबक क. तरह खींच लेती है। तब अवधान कVठन नह ं रह जाएगा। 'सफ सह Bबदं ु को
जानना है।

इस 'लए आँख बंद कर लो, और अवधान को दोन- आंख- के बीच म4 घूमने दो और उस Bबदं ू को अनुभव करो। जब तुम उस
Bबदं ु के कर ब होग4। अचानक तुZहार आंखे थर हो जाएगं ी। और जब उGह4 Vहलाना कVठन हो जाए तब जानो 0क सह Bबदं ु
'मल गया।

‘’भकृ ु Vटय- के बीच अवधान को ि9थर कर वचार को मन के सामने रखो।‘’

अगर यह अवधान ;ापत् हो जाए तो पहल बार एक अvुत बात तुZहारे अनुभव म4 आएगी। पहल बार तुम देखोग4 0क तुZहारे
वचार तुZहारे सामने चल रहे है, तुम साQी हो जाओग।े जैसे 0क 'सनमे ा के पदw पर aशय् देखते हो, वसै े ह तुम देखोग4 0क
वचार आ रहे है, और तुम साQी हो। एक बार तुZहारा अवधान B ने -क4 ? पर ि9थर हो जाए तुम तुरंत वचार- के साQी हो
जाओग।े

आमतौर से तुम साQी नह ं होते, तुम वचार- के साथ तादा<Zय कर लेते हो। यVद 2ोध है तो तुम 2ोध हो जाते हो। यVद एक
वचार चलता है तो उसके साQी होने क. बजाएं तुम वचार के साथ एक हो जाते हो। उससे तादा<मय् करके साथ-साथ चलने
लगते हो। तुम वचार ह बन जाते हो, वचार का Mप ले लेते हो, जब 2ोध उठता है तो तुम 2ोध बन जाते हो। और जब लोभ
उठता है तब लोभ बन जाते हो। कोई भी वचार तुZहारे साथ एकातम् हो जाता है। और उसके ओर तुZहारे बीच दरू नह ं
रहती।

ले0कन तीसर आँख पर ि9थर होते ह तुम एकाएक साQी हो जाते हो। तीसर आँख के जPरए तुम साQी बनते हो। इस
'शवने के Cवारा तुम वचार- को वैसे ह चलता देख सकते हो जैसे आसमान पर तैरते बादल- को, या रहा पर चलते लोगो को
देखते हो।

जब तुम अपनी lखड़क. से आकाश कोया रहा चलते लोग- को देखते हो तब तुम उनसे तादा<मय् नह ं करते। तब तुम अलग
होते हो, मा दशक रहते हो—Bबलकु ल अलग। वसै े ह अब जब 2ोध आता है तब तुम उसे एक वषय क. तरह देखते हो। अब

तुम यह नह ं सोचते 0क मुझे 2ोध हुआ। तुम यह अनुभव करते हो 0क तुम 2ोध से घरे हो। 2ोध क. एक बदल तुZहारे चारो
और घर गई। और जब तुम खुद 2ोध नह ं रहे तब 2ोध नापुंसग हो जाता है। तब वह तुमको नह ं ;भा वत कर सकता। तब
तुम अ9प'शत रह जाते हो। 2ोध आता है और चला जाता है। और तुम अपने म4 क4 V?त रहते हो।

यह पाचँ वीं व ध साmQतव् को ;ापत् करने क. व ध है।

‘’भकृ ु Vटय- के बीच अवधान को ि9थर कर वचार को मन के सामने करो।‘’

अब अपने वचार- को देखो, वचार- का साQा<कार करो।

‘’0फर सह9 ार तक Mप को Rवास ततव् से ;ाण से भरने दो। वहां वह ;काश क. तरह बरसेगा।‘’

जब अवधान भकृ ु Vटय- के बीच 'शवने के क4 ? पर ि9थर होता है। तब दो चीज4 घVटत होती है।

और यह चीज दो ढंग- से हो सकती है। एक, तुम साQी हो जाओ तो तुम तीसर आँख पर थर हो जाते हो। साQी हो जाओ, जो
भी हो रहा हो उसके साQी हो जाओ। तुम बीमार हो, शर र म4 पीड़ा है, तुम को दःु ख और संताप है, जो भी हो, तुम उसके साQी
रहो, जो भी हो, उससे तादा<मय् न करो। बस साQी रहो—दशक भर। और यVद साmQ<व संभव हो जाए, तो तुम तीसरे ने पर
ि9थर हो जाओगे।

इससे उलटा भी हो सकता है। यVद तुम तीसर आँख पर ि9थर हो जाओ, तो साQी हो जाओग।े । ये दोन- एक ह बात है।

इस'लए पहल बात: तीसर आँख पर क4 V?त होते ह साQी आ<मा का उदय होगा। अब तुम अपने वचार- का सामना कर
सकते हो। और दसू र बात: और अब तुम Rवास-;Rवास क. सूQ्म और कोमल तरंग- को भी अनुभव कर सकते हो। अब तुम
शव् सन के Mप को ह नह ,ं उसके ततव् को , सार को, ;ाण को भी समझ सकते हो।

पहले तो यह समझने क. को'शश कर4 0क ‘’Mप’’ और ‘’Rवास-ततव् ’’ का +या अथ है। जब तुम Rवास लेते हो, तब 'सफ वायु
क. ह Rवास नह ं लेते। वै ा नक तो यह कहते है 0क तुम वायु क. ह Rवास लेते हो। िजसम4 आ+सीजन, हाइxोजन तथा
अनय् ततव् रहते है। वे कहते है 0क तुम वायु क. Rवास लेते हो।

ले0कन तं कहता है 0क हवा तो मा वाहन है, असल चीज नह ं है। असल म4 तुम ;ाण क. Rवास लेते हो। हवा तो माधय् म
भर है। ;ाण उसका सतव् है, सार है। तुम न 'सफ हवा क., बिYक ;ाण क. Rवास लेते हो।

आधु नक व ान अभी नह ं जान सका है 0क ;ाण जैसी कोई व9तु भी है। ले0कन कु छ शोधकताओं ने कु छ रह9यमयी चीज
का अनुभव 0कया है। Rवास म4 'सफ हवा हम नह ं लेत,े वह बहुत से आधु नक शोधकताओं ने अनुभव 0कया है। वशषे कर एक
नाम उYलेखनीय है। वह है जमन मनोवै ा नक वलहेम रेख का। िजसने इसे आगन एनजy या जै वक ऊजा का नाम Vदया
है। वह ;ाण ह है। वह कहता है 0क जब आप Rवास लेते है, तब हवा तो मा आधार है, पा है, िजसके भीतर एक रह9यपणू
ततव् है, िजसे आगन या ;ाण या एलेन वाइटल कह सकते है। ले0कन वह बहुत सूnम है। वासत् व म4 वह भौ तक नह ं है।
पदाथ गत नह ं है। हवा भौ तक है, पा भौ तक है; ले0कन उसके भीतर से कु छ सूQ्म, अलौ0कक ततव् चल रहा है।

इसका ;भाव अनुभव 0कया जा सकता है। जब तुम 0कसी ;ाणवान >यि+त के पास होते हो, तो तुम अपने भीतर 0कसी
शि+त को उगते देखते हो। और जब 0कसी बीमार के पास होते हो, तो तुमको लगता है 0क तुम चूसे जा रहे हो। तुZहारे भीतर

से कु छ नकाला जा रहा है। जब तुम अ9पताल जाते हो, तब थके -थके +य- अनुभव करते हो? वहां चार- ओर से तुम चूसे जाते
हो। अ9पताल का परू ा माहौल बीमार होता है और वहां सब 0कसी को अ धक ;ाण क., अ धक एलेन वाइटल क. जMरत है।
इस'लए वहां जाकर अचानक तुZहारा ;ाण तुमसे बहने लगता है। जब तुम भीड़ म4 होते हो, तो तुम घुटन महसूस +य- करते
हो। इस'लए 0क वहां तुZहारा ;ाण चूसा जाने लगता है। और जब तुम ;ात: काल अके ले आकाश के नीचे या वQृ - के बीच होते
हो, तब 0फर अचानक तुम अपने म4 0कसी शि+त का, ;ाण का उदय अनुभव करते हो। ;<येक का एक खास 9पेस क. जMरत
है। और जब वह 9पेस नह ं 'मलता है तो तुमको घुटन महसूस होती है।

वलहेम रेख ने कई ;योग 0कए। ले0कन उसे पागल समझा गया। व ान के भी अपने अंध वRवास है। और व ान बहुत
MVढ़वाद होता है। व ान अभी भी नह ं समझता है 0क हवा से बढ़कर कु छ है; वह ;ाण है। ले0कन भारत सVदय- से उस पर
;योग कर रहा है।

तुमने सुना होगा—शायद देखा भी हो—0क कोई >यि+त कई Vदन- के 'लए भू'मगत समा ध म4 ;वेश कर गया। जहां हवा का
कोई ;वेश नह ं था। 1880 म4 'म9 म4 एक आदमी चाल स वष[ के 'लए समा ध म4 चला गया था। िजGह-ने उसे गाड़ा था वे
सभी मर गए। +य-0क वह 1920 म4 समा ध से बहार आने वाला था।

1920 म4 0कसी को भरोसा नह ं था 0क वह जी वत 'मलेगा। ले0कन वह जी वत था और उसके बाद भी वह दस वष[ तक
जी वत रहा। वह Bबलकु ल पीला पड़ गया था, परंतु जी वत था। और उसको हवा 'मलने क. कोई संभावना नह ं थी।

डॉ+टर- ने तथा दसू र- ने उससे पूछा 0क इसका रहसय् +या है? उसने कहां हम नह ं जानत;े हम इतना ह जानते है 0क ;ाण
कह भी ;वेश कर सकता है। और वह है। हवा वहां नह ं ;वेश कर सकती, ले0कन ;ाण कर सकता है।

एक बार तुम जान जाओ 0क Rवास के Bबना भी कै से तुम ;ाण को सीधे *हण कर सकते हो, तो तुम सVदय- तक के 'लए भी
समा ध म4 जा सकते हो।

तीसर आँख पर क4 V?त होकर तुम Rवास के सार ततव् को, Rवास को नह ,ं Rवास के सार ततव् ;ाण को देख सके त हो। और
अगर तुम ;ाण को देख सके , तो तुम उस Bबदं ु पर पहुंच गए जहां से छलांग लग सकती है, 2ां त घVटत हो सकती है।

सू कहता है: ‘’सह9 ार तक Mप को ;ाण से भरने दो।‘’

और जब तुम को ;ाण का एहसास हो, तब कYपना करो 0क तुZहारा 'सर ;ाण से भर गया है। 'सफ कYपना करो, 0कसी
;यतन् क. जMरत नह ं है। और म_ बताऊं गा 0क कYपना कै से काम करती है। तब तुम B ने -Bबदं ु पर ि9थर हो जाओ तब
कYपना करो, और चीज4 आप ह और तुरंत घVटत होने लगती है।

अभी तुZहार कYपना भी नपंुसक है। तुम कYपना 0कए जाते हो और कु छ भी नह ं होता। ले0कन कभी-कभी अनजाने
साधारण िजंदगी म4 भी चीज4 घVटत होती है। तुम अपने 'म क. सोच रहे हो और अचानक दरवाजे पर दसत् क होती है। तुम
कहते हो 0क सांयो गक था 0क 'म आ गया। कभी तुZहार कYपना संयोग क. तरह भी काम करती है।

ले0कन जब भी ऐसा हो, तो याद रखने क. चOे टा करो और पूर चीज का वRलेषण करो। जब भी लगे 0क तुZहार कYपना सच
हुई है। तुम भीतर जाओ और देखो। कह ं न कह ं तुZहारा अवधान तीसरे ने के पास रहा होगा। दरअसल यह संयोग नह ं था।
यह वैसा Vदखता है; +य-0क गु{म व ान का तुमको पता नह ं है। अनजाने ह तुZहारा मन B ने क4 ? के पास चला गया
होगा। और अवधान यVद तीसर आँख पर है तो 0कसी घटना के सजृ न के 'लए उसक. कYपना काफ. है।

यह सू कहता है 0क जब तुम भकृ ु Vटय- के बीच ि9थर हो और ;ाण को अनुभव करते हो, तब Mप को भरने दो। अब कYपना
करो 0क ;ाण तुZहारे पूरे मि9तषक् को भर रहे है। वशेषकर सह9 ार को जो सव|चच् मनस क4 ? है। उस Qण तुम कYपना
करो। और वह भर जाएगा। कYपना करो 0क वह ;ाण तुZहारे सह9 ार से ;काश क. तरह बरसेगा। और वह बरसने लगेगा।
और उस ;काश क. वषा म4 तुम ताजा हो जाओगे। तुZहारा पुनजनम् हो जाएगा। तुम Bबलकु ल नए हो जाओग।े आंतPरक
जनम् का यह अथ है।

यहां दो बात4 है। एक, तीसर आँख पर क4 V?त होकर तुZहार कYपना पसंु तव् को, शु को उपलबध् हो जाती है। यह कारण है
0क शु ता पर, प व ता पर इतना बल Vदया गया है। इस साधना म4 उतरने के पहले शु बने।

तं के 'लए शु कोई नै तक धारणा नह ं हे। शु इस'लए अथपूण है 0क यVद तुम तीसर आँख पर ि9थर हुए और तुZहारा
मन अशु रहा, तो तुZहार कYपना खतरनाक 'स हो सकती है—तुZहारे 'लए भी और दसू र4 के 'लए भी। यVद तुम 0कसी क.
ह<या करने क. सोच रहे हो, उसका महज वचार भी मन म4 है। तो 'सफ कYपना से उस आदमी क. म<ृ यु घVटत हो जाएगी।
यह कारण है 0क शु ता पर इतना जोर Vदया जाता है।

पाइथागोरस को वशेष उपवास और ;ाणायाम से गुजरने को कहा गया; +य-0क यहां बहुत खतरनाक भू'म से या ी गुजरता
है। जहां भी शि+त है, वहां खतरा है। यVद मन अशु है तो शि+त 'मलने पर आपके अशु वचार शि+त पर हावी हो जाएंग।े

कई बार तुमने ह<या करने क. सोची है; ले0कन भागय् से वहां कYपना न काम नह ं 0कया। यVद वह काम करे, यVद वह तुरंत
वा9त वक हो जाए तो वह दसू र- के 'लए ह नह ं तुZहारे 'लए भी खतरनाक 'स हो सकती है। +य-0क 0कतनी ह बार तुमने
आतम् ह<या क. सोची है। अगर मन तीसर आँख पर क4 V?त है तो आ<मह<या का वचार भी आ<मह<या बन जाएगा। तुमको
वचार बदलने का समय भी नह ं 'मलेगा। वह तुरंत घVटत हो जाएगी।

तुमने 0कसी को सZमोVहत होते देखा है। जब कोई सZमोVहत 0कया जाता है, तब सZमोहन वद जो भी कहता है, सZमोVहत
>यि+त तुरंत उसका पालन करता है। आदेश 0कतना ह बहे ूदा हो तकह न हो असंभव ह +या न हो। सZमोVहत >यि+त
उसका पालन करता है। +या होता है?

यह पाचं वी व ध सब सZमोह न क. जड़ म4 है। जब कोई सZमोVहत 0कया जाता है, तब उसे एक वशषे Bबदं ू पर, 0कसी ;काश
पर या द वार पर लगे 0कसी चनह् पर या 0कसी भी चीज पर या सZमोहक क. आँख पर ह अपनी aिOट क4 V?त करने को कहा
जाता है। और जब तुम 0कसी खास Bबदं ू पर aिOट क4 V?त करते हो, उसके तीन 'मनट के अंदर तुZहारा आंतPरक अवधान
तीसर आँख क. और बहने लगता है। तुZहारे चेहरे क. मु?ा बदलने लगती है। और सZमोहन वद जानता है 0क कब तुZहारा
चहे रा बदलने लगा। एकाएक चहे रे से सार शि+त गायब हो जाती है। वह मतृ वत हो जाता है। मान- गहर तं?ा म4 पड़े हो। जब
ऐसा होता है, सZमोहक को उसका पता हो जाता है। उसका अथ हुआ 0क तीसर आँख अवधान को पी रह है। आपका चेहरा
पीला पड़ गया है। पूर ऊजा B ने क4 ? क. और बह रह है।

अब सZमोVहत करने वाला तुरंत जान जाता है। 0क जो भी कहा जाएगा। वह घVटत होगा। वह कहता है 0क अब तुम गहर
नीदं म4 जा रहे हो, और तुम तुरंत सो जाते हो। वह कहता है 0क अब तुम बेहोश हो रहे हो और तुम बेहोश हो जाते हो। अब कु छ
भी 0कया जा सकता है। अब अगर वह कहे 0क तुम नपे ो'लयन या Vहटलर हो गए हो तो तुम हो जाओगे। तुZहार मु?ा बदल
जायेगी। आदेश पाकर तुZहारा अचते न उसका वा9त वक बना देता है। अगर तुम 0कसी रोग से पीWडत हो तो रोग को हटने का
आदेश देगा, और मजदे ार बात रोग दरू हो जायेगा। या कोई नया रोग भी पदै ा 0कया जा सकता है।

यह नह ,ं सड़क पर से एक कं कड़ उठा कर अगर सZमोहन वद तुZहार हथले पर रख दे और कहे 0क यह अंगारा है तो तुम
तेज गमy महसूस करोगे और तुZहार हथेल जल जाएगी—मान'सक तल पर नह ,ं वासत् व म4 ह । वासत् व म4 तुZहार चमड़ी
जब लायेगी और तुZह4 जलन महसूस होगी। +या होता है? अंगारा नह ,ं बस एक मामूल कं कड़ है वह भी ठं डा, 0फर भी जलना
ह नह ं हाथ पर फफोले तक उगा देता है।

तुम तीसर आँख पर क4 V?त हो और सZमोहन वद तुमको सुझाव देता है और वह सुझाव वा9त वक हो जाता है। यVद
सZमोहन वद कहे 0क अब तुम मर गए, तो तुम तुरंत मर जाओग।े तुZहार }दय ग त Mक जायेगी। Mक ह जाएगी।

यह होता है B ने के चलते। B ने के 'लए कYपना और वा9त वकता दो चीज4 नह ं है। कYपना ह तथय् है। कYपना कर4 और
वैसा ह जाएगा। 9वपन् और यथाथ म4 फासला नह ं है। 9वपन् देखो और सच हो जायेगा।

यह कारण है 0क शंकर ने कहा 0क यह संसार परमा<मा के 9वपन् के 'सवाय और कु छ नह ं है—यह परमा<मा क. माया है।
यह इस'लए 0क परमा<मा तीसर आँख म4 बसता है—सदा, सनातन से। इस'लए परमा<मा जी 9वपन् देखता है वह सच हो
जाता है। और यVद तुम भी तीसर आँख म4 थर हो जाओ तो तुZहारे 9वपन् भी सच होने लग4गे।

साPरपु बु के पास आया। उसने गहरा धान 0कया। तब बहुत चीज4 घVटत होने लगीं, बहुत तरह के aशय् उसे Vदखाई देने
लग।े जो भी Lयान क. गहराई म4 जाता है। उसे यह सब Vदखाई देने लगता है। 9वग और नरक; देवता और दानव, सब उसे
Vदखाई देने लगे। और वह ऐसे वा9त वक थे 0क साPरपु बु के पास दौड़ा आया। और बोला 0क ऐसे-ऐसे aशय् Vदखाई देते है।
बु ने कहा, वे कु छ नह ं है। मा 9वपन् है।

ले0कन साPरपु ने कहा 0क वे इतने वा9त वक है 0क म_ कै से उGह4 9वपन् कहूं? जब एक फू ल Vदखाई पड़ता है, वह फू ल 0कसी
भी फू ल से अ धक वा9त वक मालूम पड़ता है। उसमे सुगधं है। उसे म_ छू सकता हूं। अभी जो म_ आपको देखता हूं वह उतना
वा9त वक नह ं है; आप िजतना वा9त वक मेरे सामने है, वह फू ल उससे अ धक वा9त वक है। इस'लए कै से म_ भेद कMं 0क
कौन सच है, और कौन सव् पन् ।

बु ने कहा, अब चंू0क तुम तीसर आँख म4 क4 V?त हो, इस'लए 9वपन् और यथाथ एक हो गए है। जो भी 9वपन् तुम देखोग4
सच हो जाएगा।

और उससे ठUक उलटा भी घVटत हो सकता है। जो B ने पर थर हो गया, उसके 'लए 9वपन् यथाथ हो जाएगा। और यथाथ
9वपन् हो जाएगा। +य-0क जब तुZहारा 9वपन् सच हो जाता है तब तुम जानते हो 0क 9वपन् और यथाथ म4 बु नयाद भेद
नह ं है।

इस'लए जब शंकर कहते है 0क सब संसार माया है, परमा<मा का 9वपन् है, तब यह कोई सै ां तक ;9तावना या कोई
मीमांसक व+तवय् नह ं है। यह उस >यि+त का आंतPरक अनुभव है जो 'शवने म4 थर हो गया है।

अंत: जब तुम तीसरे नेतर् पर क4 V?त हो जाओ तब कYपना करो 0क सह9 ार से ;ाण बरस रहा है; जैसे 0क तुम 0कसी वQृ के
नीचे बठै े हो और फू ल बरस रहे है, या तुम आकाश के नीचे हो और कोई बदल बरसने लगी। या सुबह तुम बठै े हो और सूरज
उग रहा है और उसक. 0करण4 बरसने लगी है। कYपना करो और तुरंत तुZहारे सह9 ार से ;काश क. वषा होने लगगे ी। यह
वषा मनुषय् को पुन न'मत करती है, उसका नया जनम् दे जाती है। तब उसका पुनजनम् हो जाता है।

ओशो

व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-5

तं -सू — व:ध-06

सासं (रक काम2 म0 लगे हुए, अवधान को दो वास2 के बीच =टकाओ। इस अNयास से थोड़े ह% =दन म0 नया जनम् होगा।

व ध-6 व ान भैरव तं (तं -सू —भाग-1)osho

‘’सासं Pरक काम- म4 लगे हुए, अवधान को दो Rवास- के बीच Vटकाओ…।‘’
Rवास- को भूल जाओं और उनके बीच म4 अवधान को लगाओ। एक Rवास भी तर आती है। इसके पहले 0क वह लौट जाए, उसे
बाहर छोड़ा जाए, वहां एक अंतराल होता है।
‘’सांसाPरक काम- म4 लगे हुए।‘’ यह छठU व ध नरंतर करने क. है। इस'लए कहा गया है, ‘’सासं ाPरक काम- म4 लगे हुए….’’
जो भी तुम कर रहे हो, उसमे अवधान को दो Rवास- के अंतराल म4 थर रखो। ले0कन काम-काज म4 लगे हुए ह इसे साधना है।
ठUक ऐसी ह एक दसू र व ध क. चचा हम कर चुके है। अब फक इतना है 0क इसे सासं ाPरक काम- म4 लगे हुए ह करना है।
उससे अलग होकर इसे मत करो। यह साधना ह तब करो जब तुम कु छ और काम कर रहे हो।
तुम भोजन कर रहे हो, भोजन करते जाओ और अंतराल पर अवधान रखो। तुम चल रहे हो, चलते जाओ और अवधान को
अंतराल पर Vटकाओ। तुम सोने जा रहे हो, लेटो और नीदं को आने दो। ले0कन तुम अंतराल के ; त सजग रहो।
पर काम-काज म4 +य-? +य-0क काम-काज मन को डावं ाडोल करता है। काम-काज म4 तुZहारे अवधान को बार-बार भुलाना
पड़ता है। तो डांवाडोल न ह-; अंतराल म4 थर रह4। काम-काज भी न Mके , चलता रहे। तब तुZहारे अि9ततव् के दो तल हो
जाएगं ।े करना ओर होना। अि9ततव् के दो तल ओ गए; एक करने का जगत और दसू रा होने का जगत। एक पPर ध है और
दसू रा क4 ?। पPर ध पर काम करते रहो, Mको नह ;ं ले0कन क4 ? पर भी सावधानी से काम करते रहो। +या होगा?

तुZहारा काम-काज तब अ'भनय हो जाएगा। मान- तुम कोई पाट अदा कर रहे हो। उदाहरण के 'लए, तुम 0कसी नाटक म पाट
कर रहे हो। तुम राम बने हो या 2ाइसट् बने हो। यCय प तुम राम या 2ाइसट् का अ'भनय करते हो, तो भी तुम 9वयं बने
रहते हो। क4 ? पर तुम जानते हो 0क तुम कौन हो और पPर ध पर तुम राम या 2ाइसट् का या 0कसी का पाट अदा करते हो।
तुम जानते हो 0क तुम राम नह ं हो, राम का अ'भनय भर कर रहे हो। तुम कौन हो तुमको मालूम है। तुZहारा अवधान तुमम4
क4 V?य है। और तुZहारा काम पPर ध पर जार है।

यVद इस व ध का अ\यास हो तो परू ा जीवन एक लंबा नाटक बन जाएगा। तुम एक अ'भनते ा होग4। अ'भनय भी करोगे और
सदा अंतराल म4 क4 V?त रहोगे। जब तुम अंतराल को भूल जाओगे, तब तुम अ'भनते ा नह ं रहोगे, तब तुम कता हो जाओग।े
तब वह नाटक नह ं रहेगा। उसे तुम भूल से जीवन समझ लोगे।

यह हम सबने 0कया है। हर आदमी सोचता है 0क वह जीवन जी रहा है। यह जीवन नह ं है। यह तो एक रोल है, एक पाट है, जो
समाज ने, पPरि9थ तय- न,े सं9कृ त न,े देश क. परंपरा ने तुमको थमा Vदया है। और तुम अ'भनय कर रहे हो। और तुम इस
अ'भनय के साथ तादा<मय् भी कर बैठे हो। उसी तादा<मय् को तोड़ने के 'लए यह व ध है।

कृ षण् के अनेक नाम है, कृ षण् सबसे कु शल अ'भनते ाओं म4 से एक है। वे सदा अपने म4 थर है और खेल कर रहे है। ल ला कर
रहे है, Bबलकु ल गरै -गंभीर है। गंभीरता तादा<मय् से पैदा होती है।

यVद नाटक म4 तुम सच ह राम हो जाओ तो अवशय् सम9याएं खड़ी होगी। जब-जब सीता क. चोर होगी, तो तुमको Vदल का
दौरा पड़ सकता है। और पूरा नाटक बंद हो जाना भी निRचत है। ले0कन अगर तुम बस अ'भनय कर रहे हो तो सीता क. चोर
से तुमको कु छ भी नह ं होता है। तुम अपने घर लौटोगे। और चैन से सो जाओगे। सपने म4 भी rयाल न आएगा। क. सीता क.
चोर हुई।

जब सचमुच सीता चोर गई थी तब राम 9वयं रो रहे थ।े चीख रहे थे और वQृ - से पछू रहे थे 0क सीता कहां है? कौन उसे ले
गया? ले0कन यह समझने जैसी बात है। अगर राम सच म4 रो रहे है और पेड़- से पूछ रहे है, तब तो वे तादाZतयता कर बठै े ,
तब वे राम न रहे, ईशव् र न रहे, अवतार न रहे। यह सम् रण रखना चाVहए। 0क राम के 'लए उनका वा9त वक जीवन भी
अ'भनय ह था। जैसे दसू रे अ'भनते ाओं को तुमने राम का अ'भनय करते देखा है, वसै े ह राम भी अ'भनय कर रहे थे—
न:संदेह एक बड़े रंग मंच पर।

इस संबंध म4 भारत के पास एक खुबसूरत कथा है। मेर aिOट म4 यह कथा अvुत है। संसार के 0कसी भी भाग म4 ऐसी कथा नह ं
'मलेगी। कहते है 0क वाYमी0क ने राम के जनम् से पहले ह रामायण 'लख द । राम को के वल उसका अनुगमन करना था।
इस'लए वासत् व म4 राम का पहला कृ तय् भी अ'भनय ह था। उनके जनम् के पहले ह कथा 'लख द गई थी, इस'लए उGह4
के वल उसका अनुगमन करना पडा। वे और +या कर सकते थ।े वाYमी0क जैसा >यि+त जब कथा 'लखता है, तब राम को
अनुगमन करना होगा। इस'लए एक तरह से सब कु छ नयम था। सीता क. चोर होनी थी। और यु का लड़ा जाना था।

यVद यह तुम समझ सको तो भागय् के 'स ातं को भी समझ सकते हो। इसका बड़ा गहरा अथ है। और अथ यह है 0क यVद
तुम समझ जाते हो 0क तुZहारे 'लए यह सब कु छ नयम है तो जीवन नाटक हो जाता है। अब यVद तुमको राम का अ'भनय
करना है। तो तुम कै से बदल सकते हो। सब कु छ नयत है, यहां तक 0क तुZहारा संवाद भी, डायलाग भी। अगर तुम सीता से
कु छ कहते हो तो वह 0कसी नीयत वचन का दोहराना भर है।

यVद जीवन नयत है, तो तुम उसे बदल नह ं सकते। उदाहरण के 'लए, एक वशेष Vदन को तुZहार म<ृ यु होने वाल है। यह
नयत है। और तुम जब मरोगे तब रो रहे होग4; यह भी निRचत है। और फलां-फलां लोग तुZहारे पास ह-ग।े यह भी तय है।

और यVद सब कु छ नीयत है, तय है, तब सब कु छ नाटक हो जाता है। यVद सब कु छ निRचत है तो उसका अथ हुआ 0क तुम
के वल उसे अंजाम देने वाले हो। तुमको उसे जीना नह ं है। उसका अ'भनय करना है।
यह व ध, छठU व ध , तुमको एक साइकोxामा, एक खेल बना देती है। तुम दो Rवास- के अंतराल म4 थर हो और जीवन
पPर ध पर चल रहा है। यVद तुZहारा अवधान क4 ? पर है, तो तुZहारा अवधान पPर ध पर नह ं है। पPर ध पर जो है वह
उपावधान है, वह कह ं तुZहारे अवधान के पास घVटत होता है। तुम उसे अनुभव कर सकते हो, उसे जान सकते हो, पर वह
मह<वपूण नह ं है। यह ऐसा है जैसे तुमको नह ं घVटत हो रहा है।
म_ इसे दोहराता हूं, यVद तुम इस छठU व ध क. साधना करो तो तुZहारा समूचा जीवन ऐसा हो जाएगा जैसे वह तुमको न
घVटत होकर 0कसी दसू रे >यि+त को घVटत हो रहा है।
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-5

तं -सू — व:ध-07

सातवीं वास व:ध:

shira तं -सू — व:ध-07 –ओशो

ललाट के मधय् म0 सूI्म वास ()ाण) को =टकाओ। जब वह सोने के Iण म0 Oदय तक पहुंचगे ा तब Jवपन् और Jवयं मPृ यु
पर अ:धकार हो जाएगा।
तुम अ धकाPरक गहर पत[ म4 ;वेश कर रहे हो।
‘’ललाट के मधय् म4 सूQ्म Rवास (;ाण) को Vटकाओ।‘’
अगर तुम तीसर आँख को जान गए हो तो तुम ललाट के मधय् म4 ि9थर सूQ्म Rवास को, अaशय् ;ाण को जान गए, और
तुम यह भी जान गए 0क वह उजा, वह ;काश बरसता है।

‘’जब वह सोन के Qण म4 }दय तक पहुंचगे ा—जब वह वषा तुZहारे }दय तक पहुँचेगी—‘’तब 9वपन् और 9वयं म<ृ यु पर
अ धकार हो जाएगा।‘’
इस व ध को तीन Vह9स- म4 लो। एक, Rवास के भीतर जो ;ाण है, जो उसका सूQ्म, अaषय् , अपा थव अंश है, उसे तुमको
अनुभव करना होगा। यह तब होता है, जब तुम भकृ ु Vटय- के बीच अवधान को थर रखते हो। तब यह आसानी से घVटत होता
है। अगर तुम अवधान को अंतराल म4 Vटकाते हो, तो भी घVटत होता है, मगर उतनी आसानी से नह ं। यVद तुम ना'भ क4 ? के
; त सजग हो, जहां Rवास आती है। और छू कर चल जाती है। तो भी यह घVटत होता है, पर कम आसानी से। उस सूQ्म ;ाण
को जानने का सबसे सुगम माग है, तीसर आँख म4 थर होना। वसै े तुम जहां भी क4 V?त होग4। वह घVटत होगा। तुम ;ाण को
;भा वत होते अनुभव करोगे।

यVद तुम ;ाण को अपने भीतर ;वाVहत होता अनुभव कर सको तो तुम यह भी जान सकते हो 0क कब तुZहार म<ृ यु होगी।
यVद तुम सूQ्म Rवास को, ;ाण को महसूस करने लगे। तो मरने के छह मह ने पहले से तुम अपनी आसनन् म<ृ यु को जानने
लगते हो। कै से इतने संत अपनी म<ृ यु क. त थ बना देते है? यह आसान है। +य-0क यVद तुम ;ाण के ;वाह को जानते हो तो
जब उसक. ग त उलट जाएगी। तब उसको भी तुम जान लोग।े म<ृ यु के छह मह ने पहले ;02या उलट जाती है। ;ाण तुZहार
बाहर जाने लगता है। तब Rवास इसे भीतर नह ं ले जाती, बिYक उलटे बाहर ले जाने लगती है—वह Rवास।

तुम इसे जान पाते हो, +य-0क तुम उसके अaशय् भाग को नह ं देखते, के वल वाहन को ह देखते हो। और वाहन तो एक ह
रहेगा। अभी Rवास ;ाण को भीतर ले जाती है और वहां छोड़ देती है। 0फर वाहन बाहर खाल वापस जाता है। और ;ाण से पुन:
भरकर भीतर जाता है। इस'लए याद रखो 0क भीतर आने वाल Rवास और बाहर जाने वाल Rवास, दोन- एक नह ं है। वाहन के
Mप म4 तो परू क Rवास और रेचक Rवास एक ह है, ले0कन जहां परू क ;ाण से भरा होता है। वह ं रेचक उससे Pरक्त रहता है।
तुमने ;ाण को पी 'लया और Rवास खाल हो गई।

जब तुम म<ृ यु के कर ब होते हो, तब उलट ;02या चालू होती है। भीतर आने वाल Rवास ;ाण वह न आती है। Pरक्त आती
है। +य-0क तुZहारा शर र अि9ततव् से ;ाण को *हण करने म4 असमथ हो जाता है। तुम मरने वाले हो, तुZहार जMरत न
रह । पूर ;02या उलट जाती है। अब जब Rवास बाहर जाती है, जब ;ाण को साथ 'लए बाहर जाती है।

इस'लए िजसने सूQ्म ;ाण को जान 'लए वह अपनी म<ृ यु का Vदन भी तुरंत जान सकता है। छह मह ने पहले ;02या उलट
हो जाती है।

यह सू बहुत-बहुत मह<वपूण है।

‘’ललाट के मधय् म4 सूQ्म Rवास (;ाण) को Vटकाओ। जब सोने के Qण म4 वह }दय तक पहुंचेगा। तब 9वपन् और 9वयं
म<ृ यु पर अ धकार हो जाएगा।‘’

जब तुम नीदं म4 उतर रहे हो, तभी इस व ध को साधना है, अनय् समय म4 नह ं। ठUक सोने का समय इस व ध के अ\यास के
'लए उपयुक् त समय है।

तुम नींद म4 उतर रहे हो, धीरे-धीर नींद तुम पर हावी हो रह है। कु छ ह Qण- म4 भीतर तुZहार चते ना लुपत् होगी। तुम अचते
हो जाओग।े उस Qण के आने के पहले तुम अपनी Rवास और उसके सूQ्म अंश ;ाण के ; त सजग हो जाओ। और उसे }दय
तक जाते हुए अनुभव करो। अनुभव करते जाओ 0क वह }दय तक आ रहा है। }दय तक आ रहा है। ;ाण }दय से होकर
तुZहारे शर र म4 ;वेश करता है, इस'लए यह अनुभव करते ह जाओ। 0क ;ाण }दय तक आ रहा है। और इस नरंतर अनुभव
के बीच ह नीदं को आने दो। तुम अनुभव करते जाओ और नीदं को आने दो; नीदं को तुमको अपने म4 समेट लेने दो।

यVद यह संभव हो जाए 0क तुम अaशय् ;ाण को }दय तक जाते देखो और नीदं को भी, तो तुम अपने सपन- के ; त भी
सजग हो जाओग।े तब तुमको बोध रहेगा 0क तुम सपना देखते हो तो तुम समझते हो 0क यह यथाथ ह है। वह भी तीसर
आँख के कारण ह संभव होता है। +या तुमने 0कसी को नींद म4 देखा है। उसक. आंखे ऊपर चल जाती है, और तीसर आँख म4
ि9थर हो जाती है। यVद नह ं देखा तो देखो।

तुZहारा बfचा सोया है, उसक. आंखे खोलकर देखो 0क उसक. आंखे कहां है। उसक. आँख क. पतु 'लयाँ ऊपर को चढ़ है। और
B ने पर क4 V?त है। म_ कहता हूं 0क बfच- को देखो, सयान- को नह ं। सयाने भरोसे योगय् नह ं है। +य-0क उनक. नींद गहर
नह ं है। वे सोचते भर है 0क सोये है। बfच- को देखो। उनक. आंख4 ऊपर को चढ़ जाती है।

इसी तीसर आँख म4 थरता के कारण तुम अपने सपन- को सच मानते हो। तुम यह नह ं समझ सकते क. वे सपने है। वह तुम
तब जान-ग,े जब सुबह जागोगे। तब तुम जान-गे 0क यह 9वपन् है। यVद समझ जाओ तो दो तल हो गए—9वपन् है और तुम
सजग हो, जागMक हो। जो नींद म4 9वपन् के ; त जाग सके , उसके 'लए यह सू चम<काPरक है।

यह सू कहता है: ‘’9वपन् पर और 9वयं म<ृ यु पर अ धकार हो जाएगा।‘’

यVद तुम 9वपन् के ; त जागMक हो जाओ तो तुम दो काम कर सकते हो। एक 0क तुम 9वपन् पदै ा कर सकते हो। आमतौर
से तुम 9वपन् नह ं पदै ा कर सकत।े आदमी 0कतना नपसंु क है। तुम 9वपन् भी नह ं पदै ा कर सकते। अगर तुम कोई खास
9वपन् देखना चाहो तो नह ं देख सकते; यह तुZहारे हाथ म4 नह ं है। मनुषय् 0कतना शि+तह न है। 9वपन् भी उससे नह ं
न'मत 0कए जा सकते। तुम 9व]न- के 'शकार भर हो। उनके 9 Oटा नह ।ं 9वपन् तुम म4 घVटत होता है। तुम कु छ नह ं कर
सकते हो। न तुम उसे रोक सकते हो, न उसे पैदा कर सकते हो।

ले0कन अगर तुम यह देखते हुए नीदं म4 उतरो 0क }दय ;ाण से भर रहा है। नरंतर हर Rवास म4 ;ाण से 9प'शत हो रहा है तो
तुम अपने 9व]न- के मा'लक हो जाओग।े और यह मल0कयत बहुत अनूठU है, दलु भ है। तब तुम जो भी 9वपन् देखना चाहते
हो, तुम वह 9वपन् देख सकते हो। और सोत समय कहो 0क म_ फलां 9वपन् देखना चाहता हूं और वह 9वपन् कभी तुZहारे
मन म4 ;वेश नह ं कर सके गा।

ले0कन अपने 9व]न- के मा'लक बनने का +या ;योजन है। +या यह >यथ नह ं है? नह ,ं यह >यथ नह ं है। एक बार तुम
9वपन् के मा'लक हो गए तो दबु ारा तुम कभी 9वपन् नह ं देखोग4। वह >यथ हो गया। जMरत नह ं रह । जैसे ह तुम अपने
9व]न- के मा'लक होते हो, 9वपन् बंद हो जाते है। उनक. जMरत नह ं रहती। और जब 9वपन् बदं हो जाते है, तब तुZहार
नींद का गणु धम ह और होता है। वह गुणधम वह है, जो म<ृ यु का है।

म<ृ यु गहन नींद है। अगर तुZहार नीदं म<ृ यु क. तरह गहर हो जाए तो उसका अथ है 0क सपने वदा हो गए। सपने नींद को
उथला करते है। सपन- के चलते तुम सतह पर ह घूमते रहते हो। सपन- म4 उलझे रहने के कारण तुZहार नीदं उथल हो जाती
है। और जब सपने नह ं रहते, तब तुम नीदं के सागर म4 उतर जाते हो। उसक. गहराई छू लेते है। वह म<ृ यु है।

इस'लए भारत न सदा कहा है 0क नीदं छोट म<ृ यु है। और म<ृ यु लंबी नीदं है। गुणातम् क Mप से दोन- समान है। नींद Vदन-
Vदन क. म<ृ यु है, म<ृ यु जीवन-जीवन क. नीदं है। ; तVदन तुम थक जाते हो, तुम सो जाते हो, और दसू र सुबह तुम 0फर
अपनी शि+त और अपनी जीवतं ता को वापस पा लेते हो। तुम मानो 0फर से जनम् लेते हो। वसै े ह सतत् र या अ9सी वष के
जीवन के बाद तुम परू तरह थक जाते हो। अब छोट अ व ध क. म<ृ यु से काम नह ं चलेगा, अब तुमको बड़ी म<ृ यु क. जMरत
है। उस बड़ी म<ृ यु या नीदं के बाद तुम Bबलकु ल नए शर र के साथ पुनजनम् लेते हो।

और एक बार यVद तुम 9वपन् -शुनय् नींद को जान जाओ और उसमे बोध पवू क रहो तो 0फर म<ृ यु का भय जाता रहता है।
कोई कभी नह ं मर सकता। म<ृ यु असंभव है, अभी एक Vदन पहले म_ कहता था 0क के वल म<ृ यु निRचत है। और अब कहता हूं
0क म<ृ यु असंभव है। कोई कभी नह ं मरा है। कोई कभी मर नह ं सकता। संसार म4 यVद कु छ असंभव है तो वह म<ृ यु है।
+य-0क अि9ततव् जीवन है। तुम 0फर-0फर जGमते हो। ले0कन नींद ऐसी गहर है 0क परु ानी पहचान भूल जाते हो। तुZहारे
मन से 9मृ तयां प-छ द जाती है।

इसे इस तरह सोचो। मान लो 0क आज तुम सोने जा रहे हो, और कोई ऐसा यं बन गया है—शी~ ह बनने वाला है—जो 0क
जैसे टेपPरकाडर के फ.ते से आवाज प-छ द जाती है, वसै े ह मन से 9मृ त को प-छ डालता है। +य-0क 9मृ त भी एक गहर
PरकाWडगJ है। देर-अबरे हम ऐसा यं नकाल ल4ग।े जो तुZहारे 0फर म4 लगा Vदया जाएगा। और जो तुZहारे Vदमाग को प-छकर
Bबलकु ल साफ कर देगा। तो कल सुबह तुम वह आदमी नह ं रहोगे जो सोने गया था। +य-0क तुमको याद नह ं रहेगा 0क कौन
सोने गया था। तब तुZहार नींद म<ृ यु जैसी हो जाएगी। एक गपै आ जाएगा। तुमको याद नह ं रहेगा। 0क कौन सोया था। यह
चीज 9वाभा वक ढंग से घट रह है। जब तुम मरते हो ओर 0फर जनम् लेते हो तब तुमको याद नह ं रहता है 0क कौन मरा।
तुम 0फर से शुM करते हो।

इस व ध के Cवारा पहले तो तुम 9व]न- के मा'लक हो जाओगे। उसका अथ हुआ 0क सपने आना बदं हो जाएगं े। या यVद तुम
खुद सपने देखना चाहोगे तो सपना देख भी सकते हो। ले0कन तब वह ऐिfछक सपना होगा। वह अ नवाय नह ं रहेगा। वह
तुम पर लादा नह ं जाएगा। तुम उसके 'शकार नह ं ह-ग।े और तब तुZहार नींद का गणु धम ठUक म<ृ यु जैसा हो जाएगा। तब
तुम जानोगे 0क म<ृ यु भी नींद है।

इस'लए यह सू कहता है: ‘’9वपन् और 9वयं म<ृ यु पर अ धकार हो जाएगा।‘’

तब तुम जान-गे 0क म<ृ यु एक लंबी नींद है—और सहयोगी है, और संुदर है। +य-0क वह तुमको नव जीवन देती है। वह तुमको
सब कु छ नया देती है, 0फर तो म<ृ यु भी समापत् हो जाती है। 9वपन् के शेष होते ह म<ृ यु समापत् हो जाती है।

म<ृ यु पर नयं ण पान,े अ धकार पाने का दसू रा अथ भी है। अगर तुम समझ लो 0क म<ृ यु नीदं है तो तुम उसको Vदशा दे
सकते हो। अगर तुम अपने सपन- को Vदशा दे सकते हो। तो म<ृ यु को भी दे सकते हो। तब तुम चुनाव कर सकते हो, 0क कहां
पैदा हो? कब पैदा हो, 0कससे पैदा हो, और 0कस Mप म4 पैदा हो, तब तुम अपने जीवन के मा'लक होते हो।

बु क. म<ृ यु हुई, म_ उनके अं तम जनम् के पूव के जनम् क. चचा कर रहा हूं। जब वे बु नह ं थे। मरने के पूव उGह-ने कहा:
‘’म_ अमुक मां बाप से पदै ा होऊं गा, ऐसी मेर मां होगी, ऐसे मेरे पता ह-गे, और मेर मां मेरे जनम् के बाद ह मर जायेगी। और
जब म_ जनमुगां तो मेर मां ऐसे-ऐसे सपने देखगे ी। न तुमको 'सफ अपने सपन- पर अ धकार होगा दसू रे के 9व]न- पर भी
अ धकार हो जायेगा। सो बु ने उदाहरण के तौर पर बताया 0क जब म_ मां के पटे म4 होऊं गा, तब मेर मां ये-ये 9वपन् देखेगी।
और जब कोई इस 2म से इन 9व]न- को देखे, तब तुम समझ जाना क. म_ जनम् लेने वाला हूं।

और ऐसा ह हुआ। बु क. माता ने उसी 2म से सपने देखे। वह 2म सारे भारत को पता था। वशेषकर उनको जो धम म4,
जीवन क. गहन चीज- म4 और उसके गु{म पथ- म4 उतस् ुक थे। पता था, इस'लए उन 9व]न- क. >याrया हुई। 9व]न- क.
>याrया करने वाला पहला आदमी •ायड नह ं था। और न उसक. >याrया म4 गहराई थी। पला वह के वल पिRचम के 'लए था।

तो बु के पता ने 9व]न- के >याrयाकार- को, उस जमाने के •ायड- और जुंग- को तुरंत बलु वाया और उनसे पछू ा, इस 2म
का +या अथ है। मुझे डर लगता है, ये सपने अvतु है। और एक ह 2म से आ रहे है, एक ह तरह के सपने, बार -बार से आ
रहे है। मान- कोई एक ह 0फलम् को बार-बार देखता हो। +या हो रहा है।

और >याrयाकार- ने बताया 0क आप एक महान आ<मा के पता होने जा रहे है। वह बु होने वाला है। ले0कन आपक. प<नी
को संकट है। +य-0क जब ऐसे बु जनम् लेते है, तब मां का जीना कVठन हो जाता है। बु के पता ने कारण पछू ा।
>याrयाकार- ने कहा 0क हम यह नह ं बता सकत।े ले0कन जो आ<मा पैदा होने वाल है, उसका ह व+तवय् है 0क उसके जनम्
लेने पर उसक. मां क. म<ृ यु हो जायेगी।

बाद म4 बु से पछू ा गया 0क आपक. माता क. म<ृ यु तुरंत +यो हुई? उGह-ने कहा 0क एक बु को जनम् देना इतनी बड़ी घटना
है 0क उसके बाद और सब कु छ >यथ हो जाता है। इस'लए मां जी वत नह ं रह सकती। उसे नया जीवन शुM करने के 'लए 0फर
से जनम् लेना होगा। एक बु को जनम् देना परम अनुभव है। ऐसा 'शखर है 0क मां उसके बाद नह ं बची रह सकती। इस'लए
मां क. म<ृ यु हुई।

बु ने अपने पछले जनम् म4 कहा था 0क म_ उस समय जनम् लूंगा, जब मेर मां एक ताड़ वQृ के नीचे खड़ी होगी। और वह
हुआ। बु का जब जनम् हुआ तब उनका मां ताड़ वQृ के नीचे खड़ी थी। और बु ने यह भी कहां क.। जनम् लेने के बाद म4
तुरंत सात कदम चलूंगा। यह-यह पहचान होगी। जो बताए देता हूं, ता0क तुम जान सको 0क बु का जनम् हो गया। और बु
ने सब कु छ का इं गत 0कया।

और यह के वल बु के 'लए ह सह नह ं है। यह जीसस के 'लए सह है, यह महावीर के 'लए सह है। यह और भी कई अGय-
के 'लए सह है। ;<येक जैन तीथकJ र ने अपने पछले जनम् म4 भ वOयवाणी क. थी 0क उनका जनम् 0कस तरह होगा। उGह-ने
भी 9व]न- के 2म बताए थे। उGह-ने भी ;तीक बताए थे, और कहा था 0क 0कस तरह सब कु छ घVटत होने वाला है।

तुम Vदशा दे सकते हो, एक बार तुम अपने 9व]न- को Vदशा देने लगो तो सब कु छ को Vदशा दे सकते हो। +य-0क यह संसार
सव् ]न- का ह बना हुआ है। और 9व]न- का ह यह जीवन बना है। इस'लए जब तुZहारा अ धकार सपने पर हुआ तब सब कु छ
पर हो गया।

यह सू कहता है: ‘’9वयं म<ृ यु पर।‘’

तब कोई >यि+त अपने को एक वशेष तरह का जनम् भी दे सकता है। वशषे तरह का जीवन भी दे सकता है।

हम लोग तो 'शकार है। हम नह ं जानते है 0क +य- जGमते है, +य- मरते है। कौन हम4 चलाता है और +य-? काई कारण नह ं
Vदखाई देता है। सब कु छ अराजकता, संयोग जैसा है। ऐसा इस'लए है 0क हम मा'लक नह ं है। एक बार मा'लक हो जाएं तो
0फर ऐसा नह ं रहेगा।

ओशो
व ान भैरव तं

(तं -सू —भाग-1)

)वचन-5

तं -सू — व:ध-08 ाता को जान लो।

आठवीं वास व:ध:
आPयं9तक भि त पूवक वास के दो सं:ध-Jथल2 पर क0 =1त होकर

Lord Shiva तं -सू –ओशो

इन व धय- के बीच जरा-जरा से है, तो भी तुZहारे 'लए वे भेद बहुत हो सकते है। एक अके ला शबद् बहुत फक पैदा करता है।

‘’आPयं9तक भि त पूवक वास के दो सं:ध-Jथल2 पर क0 =1त होकर…..।‘’
भीतर आने वाल Rवास को एक सं ध सथ् ल है। जहां वह मुड़ती है। इन दो सं ध-9थल-—िजसक. चचा हम कर चुके है—के
साथ यहां जरा सा भेद 0कया गया है। हाला0ं क यह भेद व ध म4 तो जरा सा ह है, ले0कन साधक के 'लए बड़ा भेद हो सकता है।
के वल एक शत जोड़ द गई है—‘’आ<यं तक भि+त पूवक’’, और परू व ध बदल गयी।
इसके ;थम Mप म4 भि+त का सवाल नह ं था। वह मा वै ा नक व ध थी। तुम ;योग करो और वह काम करेगी। ले0कन
लोग है जो ऐसी शुषक् वै ा नक व धय- पर काम नह ं कर4ग।े इस'लए जो }दय क. और झुके है। जो भि+त के जगत के है,
उनके 'लए जरा सा भेद 0कया गया है: आ<यं तक भि+त पूवक Rवास के दो सं ध-9थल- पर क4 V?त होकर ाता को जान लो।‘’

अगर तुम वै ा नक tझान के नह ं हो, अगर तुZहारा मन वै ा नक नह ं है, तो तुम इस व ध को ;योग म4 लाओ।

आ<यं तक भि+त पवू क—;मे k ा के साथ—Rवास के दो सं ध 9थल- पर क4 V?त होकर ाता को जान लो।‘’

यह कै से संभव होगा।

भि+त तो 0कसी के ; त होती है। चाहे वे कृ षण् ह- या 2ाइसट् । ले0कन तुZहारे 9वयं के ; त, Rवास के दो सं ध-9थल- के ; त
भि+त कै सी होगी। यह ततव् तो गैर भि+त वाला है। ले0कन >यि+त->यि+त पर नभर है।

तं का कहना है 0क शर र मंVदर है। तुZहारा शर र परमा<मा का मंVदर है, उसका नवास 9थान है। इस'लए इसे मा अपना
शर र या एक व9तु न मानो। यह प व है, धा'मक है। जब तुम एक Rवास भीतर ले रहे हो तब तुम ह Rवास नह ं ले रहे हो,
तुZहारे भीतर परमा<मा भी Rवास ले रहा है। तुम चलते 0फरते हो—इसे इस तरह देखो—तुम नह ,ं 9वयं परमा<मा तुमम4 चल
रहा है। तब सब चीज4 पूर तरह भि+त हो जाती है।

अनके संत- के बारे म4 कहा जाता है 0क वे अपने शर र को ;ेम करते थे, वे उसके साथ ऐसा >यवहार करते थ।े मानो वे शर र
उनक. ;'े मकाओं के रहे ह-।
तुम भी अपने शर र को यह >यवहार दे सकते हो। उसके साथ यं वत >यवहार भी कर सकते हो। वह भी एक Mझान है, एक
aिOट है। तुम इसे अपराधपूण पाप भरा और गदं ा भी मान सकते हो। और इसे चम<कार भी समझ सकते हो, परमा<मा का
घर भी समझ सकते है, यह तुम पर नभर है।
यVद तुम अपने शर र को मंVदर मान सको तो यह व ध तुZहारे काम आ सकती है, ‘’आ<यं तक भि+त पूवक….।‘’ इसका
;योग करो। जब तुम भोजन कर रहे हो तब इसका ;योग करो। यह न सोचो 0क तुम भोजन कर रहे हो, सोचो 0क परमा<मा
तुमम4 भोजन कर रहा है। और तब पPरवतन को देखो। तुम वह चीज खा रहे हो। ले0कन तुरंत सब कु छ बदल जाता है। अब
तुम परमा<मा को भोजन दे रहे हो। तुम 9नान कर रहे हो। 0कतना मामूल सा काम है। ले0कन aिOट बदल दो, अनुभव करो
0क तुम अपने म4 परमा<मा को 9नान करा रहे हो, तब यह व ध आसान होगी।
‘’आ<यं तक भि+त पूवक Rवास के दो सं ध 9थल- पर क4 V?त होकर ाता को जान लो।
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-5

तं -सू — व:ध-09

नौवीं व:ध:

ओशो
व ान भरै व तं
(तं -सू —भाग-1)

)वचन-5

मतृ वत लेटे रहो। !ोध म0 Iुबध् होकर उसमे ठहरे रहो। या पुत;लय2 को घुमाएं ,बना एकटक घूरते रहो। या कु छ चुसो और
चूसना बन जाओ।

‘’मतृ वत लेटे रहो।‘’
;योग करो 0क तुम एकाएक मर गए हो। शर र को छोड़ दो, +य-0क तुम मर गए हो। बस कYपना करो 0क मतृ हूं, म_ शर र
नह ं हूं, शर र को नह ं Vहला सकता। आँख भी नह ं Vहला सकता। म_ चीख- चYला भी नह ं सकता। न ह म_ रो सकता हूं, कु छ
भी नह ं कर सकता। +य-0क म_ मरा हुआ हूं। और तब देखो तुZह4 कै सा लगता है। ले0कन अपने को धोखा मत दो। तुम शर र
को थोड़ा Vहला सकते हो, नह ,ं Vहलाओ नह ।ं ले0कन मचछ् र भी आ जाये, तो भी शर र को मतृ समझो। यह सबसे अ धक
उपयोग क. गई व ध है।
रमण मह ष इसी व ध से ान को उपलबध् हुए थे। ले0कन यह उनके इस जनम् क. व ध नह ं थी। इस जनम् म4 तो
अचानक सहज ह यह उGह4 घVटत हो गई। ले0कन जMर उGह-ने 0कसी पछले जनम् म4 इसक. सतत सधाना क. होगी।
अGयथा सहज कु छ भी घVटत नह ं होता। ;<येक चीज का काय-कारण संबधं रहता है।

जो जब वे के वल चौदह या पं?ह वष के थे, एक रात अचानक रमण को लगा 0क म_ मरने वाला हूं, उनके मन म4 यक बात बैठ
गई 0क म<ृ यु आ गई है। वे अपना शर र भी नह ं Vहला सकते थे। उGह4 लगा 0क मुझे लकवा मार गया है। 0फर उGह4 अचानक
घुटन महसूस हुई और वे जान गए 0क उनक. }दय-ग त बंद होने वाल है। और वे चYला भी नह ं सके , बोल भी नह ं सके 0क
म_ मर रहा हूं।

कभी-कभी 0कसी द9ु व]न म4 ऐसा होता है 0क जब तुम न चYला पाते हो और न Vहल पाते हो। जागने पर भी कु छ Qण- तक
तुम कु छ नह ं कर पाते हो। यह हुआ रमण को अपनी चेतना पर तो परू ा अ धकार था। पर अपने शर र पर Bबलकु ल नह ं। वे
जानते थे 0क म_ हूं, चेतना हूं, सजग हूं, ले0कन म_ मरने वाला हूं। और यह नशच् य इतना घना था 0क कोई वकलप् भी नह ं
था। इस'लए उGह-ने सब ;यतन् छोड़ Vदया। उGह-ने आंखे बद कर ल और म<ृ यु क. ;तीQा करने लग।े

धीरे-धीरे उनका शर र सखत् हो गया। शर र मर गया। ले0कन एक सम9या उठ खड़ी हुई। वे जान रहे थे 0क शर र नह ं हूं।
ले0कन म_ तो हूं, वे जान रहे थे 0क म_ जी वत हूं, और शर र मर गया है। 0फर वे उस ि9थ त से वापस आए। सुबह म4 शर र
9वासथ् था। ले0कन वह आदमी नह ं लौटा था जो म<ृ यु के पूव था। +य-0क उसने म<ृ यु को जान 'लया था।

अब रमण ने एक नए लोक को देख 'लया था। चते ना के एक नए आयाम को जान 'लया था। उGह-ने घर छोड़ Vदया। उस म<ृ यु
के अनुभव ने उGह4 पूर तरह बदल Vदया। और वे इस यूग के बहुत थोड़े से ;बु पMु ष- म4 हुए।

और यह ं व ध है जो रमण को सहज घVटत हुई। ले0कन तुमको यह सहज ह नह ं घVटत होने वाल । ले0कन ;योग करो तो
0कसी जीवन म4 यह सहज हो सकती है। ;योग करते हुए भी यह घVटत हो सकती है। और यVद नह ं घVटत हुई तो भी ;यतन्
कभी >यथ नह ं जाता है। यह ;यतन् तुम म4 रहेगा। तुZहारे भीतर बीज बनकर रहेगा। कभी जब उपयुक्त समय होगा और
वषा होगी, यह बीज अंकु Pरत हो जाएगा।

सब सहजता क. यह कहानी है। 0कसी काल म4 बीज बो Vदया गया था। ले0कन ठUक समय नह ं आया था। और वषा नह ं हुई
थी। 0कसी दसू रे जनम् और जीवन म4 समय तैयार होता है, तुम अ धक ;ौढ़, अ धक अनुभवी होते हो। और संसार म4 उतने ह
नराश होते हो, तब 0कसी वशेष ि9थ त म4 वषा होती है और बीज फू ट नकलता है।

‘’मतृ वत लेटे रहो। 2ोध म4 Qुबध् होकर उसम4 ठहरे रहो।‘’

नशच् य ह जब तुम मर रहे हो तो वह कोई सुख का Qण नह ं होगा। वह आनंदपूण नह ं हो सकता। जब तुम देखते हो 0क तुम
मर रहे हो। भय पकड़गे ा। मन म4 2ोध उठे गा, या वषाद, उदासी, शोक, संताप, कु छ भी पकड़ सकता है। >यि+त->यि+त म4
फक है।

सू कहता है—‘’2ोध म4 Qबु ध् होकर उसमे ठहरे रहो, ि9थत रहो।‘’

अगर तुमको 2ोध घेरे तो उसमे ह ि9थत रहो। अगर उदासी घेरे तो उसमे भी। भय, चतं ा, कु छ भी हो, उसम4 ह ठहरे रहो, डटे
रहो, जो भी मन म4 हो, उसे वैसा ह रहने दो, +य-0क शर र तो मर चुका है।

यह ठहरना बहुत सुंदर है। अगर तुम कु छ 'मनट- के 'लए भी ठहर गए तो पाओगे 0क सब कु छ बदल गया। ले0कन हम Vहलने
लगते है। यVद मन म4 कोई आवगे उठता है तो शर र Vहलने लगता है। उदासी आती है, तो भी शर र Vहलता है। इसे आवगे
इसी'लए कहते है 0क यह शर र म4 वेग पैदा करता है। मतृ वत महसूस करो—और आवगे - को शर र Vहलाने इजाजत मत दो। वे
भी वहां रहे और तुम भी वहां रहो। ि9थर, मतृ वत। कु छ भी हो, पर हलचल नह ं हो, ग त नह ं हो। बस ठहरे रहो।

‘’या पुत'लय- को घुमाएं Bबना एकटक घूरते रहो।‘’

यह—या पतु 'लय- को घुमाएं Bबना एकटक घूरते रहो। मेहर बाबा क. व ध थी। वष| वे अपने कमरे क. छत को घूरते रहे,
नरंतर ताकते रहे। वष| वह जमीन पर मतृ वत पड़े रहे और पतु 'लय- को, आंख- को Vहलाए Bबना छत को एक टक देखते रहे।
ऐसा वे लगातार घंटो Bबना कु छ 0कए घूरते रहते थ।े टकटक. लगाकर देखते रहते थे।

आंख- से घूरना अfछा है। +य-0क उससे तुम 0फर तीसर आँख म_ ि9थत हो जाते हो। और एक बार तुम तीसर आँख म4 थर
हो गए तो चाहने पर भी तुम पतु 'लय- को नह ं घूमा सकते हो। वे भी थर हो जाती है—अचल।

मेहर बाबा इसी घूरने के जPरए उपलबध् हो गए। और तुम कहते हो 0क इन छोटे-छोटे अ\यास- से +या होगा। ले0कन मेहर
बाबा लगातार तीन वष[ तक Bबना कु छ 0कए छत को घूरते रहे थे। तुम 'सफ तीन 'मनट के 'लए ऐसी टकटक. लगाओ और
तुमको लगेगा 0क तीन वष गजु र गये। तीन 'मनट भी बहुत लमब् समय मालूम होगा। तुZह4 लगगे ा क. समय ठहर गया है।
और घड़ी बंद हो गई है। ले0कन मेहर बाबा घूरते रहे, घूरते रह, धीरे-धीरे वचार 'मट गए। और ग त बंद हो गई। मेहर बाबा
मा चेतना रह गए। वे मा घूरना बन गए। टकटक. बन गए। और तब वे आजीवन मौन रह गए। टकटक. के Cवारा वे अपने
भीतर इतने शांत हो गए 0क उनके 'लए 0फर शबद् रचना असंभव हो गई।

मेहर बाबा अमेPरका म4 थे। वहां एक आदमी था जो दसू र- के वचार को, मन को पढ़ना जानता था। और वासत् व म4 वह आमी
दलु भ था—मन के पाठक के Mप म4। वह तुZहारे सामने बैठता, आँख बंद कर लेता और कु छ ह Qण- म4 वह तुZहारे साथ ऐसा
लयव हो जाता 0क तुम जो भी मन म4 सोचत,े वह उसे 'लख डालता था। हजार- बार उसक. पर Qा ल गई। और वह सदा
सह साBबत हुआ। तो कोई उसे मेहर बाबा के पास ले गया। वह बठै ा और वफल रहा। और यह उसक. िजंदगी क. पहल
वफलता थी। और एक ह । और 0फर हम यह भी कै से कह4 0क यह उसक. वफलता हुई।

वह आदमी घूरता रहा, घूरता रहा, और तब उसे पसीना आने लगा। ले0कन एक शबद् उसके हाथ नह ं लगा। हाथ म4 कलम
'लए बठै ा रहा और 0फर बोला—0कसी 0कसम् का आदमी है। यह, म_ नह ं पढ़ पाता हूं, +य-0क पढ़ने के 'लए कु छ है ह नह ं।
यह आदमी तो Bबलकु ल खाल है। मुझे यह भी याद नह ं रहता क. यहां कोई बैठा है। आँख बंद करने के बाद मुझे बार-बार
आँख खोल कर देखना पड़ता है 0क यह >यि+त यहां है 0क नह ं। या यहां से हट गया है। मेरे 'लए एका* होना भी कVठन हो
गया है। +य-0क `य- ह म_ आँख बदं करता हूं 0क मुझे लगता है 0क धोखा Vदया जा रहा है। वह >यि+त यहां से हट जाता है।
मेरे सामने कोई भी नह ं है। और जब म_ आँख खोलता हूं तो उसको सामने ह पाता हूं। वह तो कु छ भी नह ं सोच रहा है।

उस टकटक. ने, सतत टकटक. ने मेहर बाबा के मन को परू तरह वसिजत कर Vदया था।

‘’या पुत'लय- को घुमाएं Bबना एकटक घूरते रहो। या कु छ चुसो और चूसना बन जाओ।‘’

यहां जरा सा Mपांतरण है। कु छ भी काम दे देगा। तुम मर गए, यह काफ. है।

‘’2ोध म4 Qबु ध् होकर उसमे ठहरे रहो।‘’

के वल यह अंश भी एक व ध बन सकता है। तुम 2ोध म4 हो; लेटे रहो और 2ोध म4 ि9थत रहो। पड़े रहो। इससे हटो नह ,ं कु छ
करो नह ,ं ि9थर पड़4 रहो।

कृ Oणामू त इसी क. चचा 0कए चले जा रहे थे। उनक. परू व ध इस एक चीज पर नभर है: 2ोध से Qबु ध् होकर उसमे ठहरे
रहो।‘’ यVद तुम 2ु हो तो 2ु होओ और 2ु रहो। उससे Vहलो नह ,ं हटो नह ं। और अगर तुम वसै े ठहर सको तो 2ोध चला
जाता है। और तुम दसू रे आदमी बन जाते हो। और एक बार तुम 2ोध को उससे आंदो'लत हुए Bबना देख लो तो तुम उसके
मा'लक हो गए।

‘’या पुत'लय- को घुमाएं Bबना एक टक घूरते रहो। या कु छ चुसो और चूसना बन जाओ।‘’

यह अं तम व ध शार Pरक है। और ;योग म4 सुगम है। +य-0क चूसना पहला काम है, जो 0क कोई बfचा करता है। चूसना
जीवन का पहला कृ तय् है। बfचा जब पदै ा होता है, तब वह पहले रोता है। तुमने यह जानने क. को'शश नह ं क. होगी 0क
बfचा +य- रोता है। सच म4 वह रोता नह ं है। वह रोता हुआ मालूम होता है। वह 'सफ हवा का पी रहा है। चूर रहा है। अगर वह
नह ं र-ए तो 'मनट- के भीतर मर जाए। +य-0क रोना हवा लेने का पहला ;यतन् है। जब वह पेट म4 था, बfचा 9वास नह ं लेता
है। Bबना 9वास 'लए वह जीता था। वह वह ं ;02या कर रहा था। जो भू'मगत समा ध लेने पर योगी जन करते है। वह Bबना
Rवास 'लए ;ाण को *हण कर रहा था—मां से शु ;ाण ह *हण कर रहा था।

यह कारण है 0क मां और बfचे के बीच जो ;मे है, वह और ;ेम से सवथा 'भनन् होता है। +य-0क शु तम ;ाण दोन- को
जोड़ता है। अब ऐसा 0फर कभी नह ं होगा। उनके बीच एक सूQ्म ;ाणमय संबंध था। मां बfचे को ;ाण देती थी। बfचा Rवास
तक नह ं लेता था।

ले0कन जब वह जनम् लेता है, तब वह मां के गभ से उठाकर एक Bबलकु ल अनजानी दु नया म4 फ4 क Vदया जाता है। अब उसे
;ाण या ऊजा उस आसानी से उपलबध् नह ं होगी। उसे 9वयं ह Rवास लेनी होगी। उसक. पहल चीख चूसने का पहला ;यतन्
है। उसके बाद वह मां के सत् न से दधू चूसता है। ये बु नयाद कृ तय् है जो तुम करते हो। बाक. सब काम बाद म4 आते है।
जीवन के वे बु नयाद कृ तय् है, और ;थम कृ तय् उसका अ\यास भी 0कया जा सकता है।

यह सू कहता है: ‘’या कु छ चुसो और चूसना बन जाओ।‘’

0कसी भी चीज को चुसो , हवा को ह चुसो, ले0कन तब हवा को भूल जाओ और चूसना ह बन जाओ। इसका अथ +या हुआ?
तुम कु छ चूस रहे हो, इसम4 तुम चूसने वाले हो, चोषण नह ं। तुम चोषण के पीछे खड़े हो। यह सू कहता है 0क पीछे मत खड़े
रहो, कृ तय् म4 भी सिZम'लत हो जाओ और चोषण बने जाओ।

0कसी भी चीज से तुम ;योग कर सकते हो, अगर तुम दौड़ रहे हो तो दौड़ना ह बन जाओ और दौड़ने वाले न रहो। दौड़ना बन
जाओ। दौड़ बन जाओ और दौड़ने वाले को भूल जाओ। अनुभव करो 0क भीतर कोई दौड़ने वाला नह ं है। मा दौड़ने क.
;02या है। वह ;02या तुम हो—सPरता जैसी ;02या। भीतर कोई नह ं है। भीतर सब शातं है। और के वल यह ;02या है।

चूसना, चोषण अfछा है। ले0कन तुमको यह कVठन मालूम पड़गे ा। +य-0क हम इसे Bबलकु ल भूल गए है। यह कहना भी ठUक
नह ं है 0क Bबलकु ल भूल गए है। +य-0क उसका वकलप् तो नकालते ह रहते है। मां के सत् न क. जगह 'सगरेट ले लेती है।
और तुम उसे चूसते रहते हो। यह सत् न ह है, मां का सत् न, मां का चूचुक। और गम धुआँ नकलता है, वह मां का दधू ।

इस'लए छु टपन म4 िजनको मां के सत् न के पास उतना नह ं रहने Vदया गया, िजतना वे चाहते थे, वे पीछे चलकर धू€पान
करने लगते है। यह Bबलकु ल भूल गए है, और वकलप् से भी काम चल जाएगा। इस'लए अगर तुम 'सगरेट पीते हो तो
धु€पान ह बन जाओ। 'सगरेट को भूल जाओ, पीने वाले को भूल जाओ और धू€पान ह बने रहो।

एक वषय है िजसे तुम चूसते हो, एक वषयी है जो चूसता है। और उनके बीच चूसने क., चोषण क. ;02या है। तुम चोषण
बन जाओ ;02या बन जाओ। इसे ;योग करो। पहले कई चीज- से ;योग करना होगा और तब तुम जान-गे 0क तुZहारे 'लए
+या चीज सह है।

तुम पानी पी रहे हो। ठं डा पानी भीतर जा रहा है। तुम पानी बन जाओ। पानी न पीओ। पानी को भूल जाओ। अपने को भूल
जाओ, अपनी ]यास को भी, और मा पानी बन जाओ। ;02या म4 ठं डक है, 9पश है, ;वेश है, और पानी है—वह सब बने रहो।

+य- नह ?ं +या होगा? यVद तुम चोषण बन जाओ तो +या होगा?

यVद तुम चोषण बन जाओ तो तुम नद|ष हो जाओगे—ठUक वैसे जैसे ;थम Vदन जGमा हुआ 'शशु होता है। +य-0क वह ;थम
;02या है। एक तरह से आप पीछे क. और या ा कर4ग।े ले0कन उसक. ललक, लालसा भी तो है। आदमी का परू ा अि9ततव्
उस 9तन पान के 'लए तड़पता है। उसके 'लए वह कई ;योग करता है, ले0कन कु छ भी काम नह ं आता। +य-0क वह Bबदं ु ह
खो गया है। जब तक तुम चूसना नह ं बन जाते, तब तक कु छ भी काम नह ं आएगा। इस'लए इसे ;योग म4 लाओ।

एक आदमी को मन_ े यह व ध द थी। उसने कई व धयां ;योग क. थी। तब वह मेरे पास आया। उससे मन_ े कहा, यVद म_
समूचे संसार से के वल एक चीज ह तुZह4 चुनने को दँ ू तो तुम +या चुनोगे? और मन_ े तुरंत उसे यह भी कहा 0क आँख बंद करो
और इस पर तुम कु छ भी सोचे Bबना मुझे बताओ। वह डरने लगा, lझझकने लगा। तो मन_ े कहा, न डर- और न lझझाको। मुझे
9पषट् बताओ। उसने कहा, यह तो बहे ूदा मालूम पड़ता है। ले0कन मेरे सामने एक सत् न उभर रहा है। और यह कहकर वह
अपराध भाव अनुभव करने लगा। तो मन_ े कहा, मत अपराध भाव अनुभव करो। सत् न म4 गलत +या है ? सवा धक संुदर
चीज- म4 सत् न एक है, 0फर अपराध भाव +य-?

ले0कन उस आदमी ने कहा, यह चीज तो मेरे 'लए *9तता बन गई है। इस'लए अपनी व ध बताने के पहले आप कृ पा कर
यक बताएं 0क म_ +य- ि9 य- के 9तन- म4 इतना उ<सुक हूं? जब भी म_ 0कसी 9 ी को देखता हुं, पहले उसका सत् न ह मुझे
Vदखाई देता है। शषे शर र उतने महतव् का नह रहता।

और यह बात के वल उसके साथ ह लागू नह ं है। ;<येक के साथ, ;ात: ;<येक के साथ लागू है। और यह Bबलकु ल 9वाभा वक
है। +य-0क मां का सत् न क. जगत के साथ आदमी का पहला पPरचय बनता है। यह बु नयाद है। जगत के साथ पहला संपक
मां के सत् न बनता है। यह कारण है 0क सत् न म4 इतना आकषण है, सत् न इतना संुदर लगता है। उसमे एक चुंबक.य शि+त
है।

इस'लए मन_ े उस >यि+त से कहा 0क अब म_ तुमको व ध दँगू ा। और यह व ध थी जो मन_ े उसे द : 0कसी चीज को चुसो और
चूसना बन जाओ। मन_ े बताया 0क आंख4 बदं कर लो और अपनी मां का सत् न याद करो या और कोई सत् न जो तुZह4 पंसद हो,
कYपना करो और ऐसे चूसना शुM करो 0क यह असल सत् न है। शुM करो।

उसने चूसना शुM 0कया। तीन Vदन के अंदर वह इतनी तेजी से, पागलपन के साथ चूसने लगा। और वह इसके साथ इतना मं
मु•ध हो गया 0क उसने एक Vदन आकर मुझसे कहा, यह तो सम9या बन गई है। सात Vदन म4 चूसता ह रहा हूं। और यह
इतना संुदर है और इसमे ऐसी गहर शां त पैदा होती है।‘’ और तीन मह ने के अंदर उसका चोषण एक मौन मु?ा बन गया।
तुम ह-ठ- से समझ नह ं सकते 0क वह कु छ कर रहा है। ले0कन अंदर से चूसना जार था। सारा समय वह चूसता रहता। यह
जब बन गया।

तीन मह ने बाद उसके मुझसे कहा, ‘’कु छ अनूठा मेरे साथ घVटत हो रहा है। नरंतर कु छ मीठU ?व 'सर से मेर जीभ पर
बरसता है। और यह इतना मीठा और शि+तदायक है। 0क मुझे 0कसी और भोजन क. जMरत नह ं रह । भूख समापत् हो गई
है। और भोजन मा औपचाPरत हो गया। पPरवार म4 सम9या न बने, इस'लए म_ दधू लेता हूं। ले0कन कु छ मुझे 'मल रहा है जो
बहुत मीठा है। बहुत जीवनदायी है।‘’

मन_ े उसे यह व ध जार रखने को कहा।

तीन मह ने और। और वह एक Vदन नाचता हुआ, पागल सा मेरे पास आया। और बोला, चूसना तो चला गया, ले0कन अब म_
दसू रा ह आदमी हो गया हूं। अब म_ वह नह ं रहा हूं। जो पहले था। मरे 'लए कोई Cवार खुल गया है। कु छ टू ट गया है। और
कोई आकाQं ा शषे नह ं रह । अब म_ कु छ भी नह ं चाहता हूं, न परमा<मा। न मोQ, अब जो है, जैसा है, ठUक है। म_ उसे
9वीकारता हूं और आनंVदत हूं।‘’

इसे ;योग म4 लाओ। 0कसी चीज को चुसो और चूसना बन जाओ। यह बहुत- के 'लए उपयोगी होगा। +य-0क यह इतना
आधारभूत है।

ओशो
व ान भैरव तं

(तं -सू —भाग-1)

)वचन-5

तं -सू — व:ध-10

;श:थल होने क" पहल% व:ध:

तं -सू — व:ध-10 व ान भैरव तं –ओशो

)य देवी, )ेम 6कए जाने के Iण म0 )मे म0 ऐसे )वशे करो जैसे 6क वह 9नतय् जीवन हो।
'शव ;मे से शुM करते है। पहल व ध ;मे से संबं धत है। +य-0क तुZहारे 'श थल होने के अनुभव म4 ;ेम का अनुभव
नकटतम है। अगर तुम ;मे नह ं कर सकते हो तो तुम 'श थल भी नह ं हो सकते हो। और अगर तुम 'श थल हो सके तो
तुZहारा जीवन ;मे पणू हो जाएगा।
एक तनाव*सत् आदमी ;मे नह ं कर सकता। +य-? +य-0क तनाव*सत् आदमी सदा उ‚शे य् से, ;योजन से जीता है। वह
धन कमा सकता है। ले0कन ;मे नह ं कर सकता। +य-0क ;ेम ;योजन-रVहत है। ;ेम कोई व9तु नह ं है। तुम उसे सं*ह त
नह ं कर सकत,े तुम उसे बक_ खाते म4 नह ं डाल सकते। तुम उससे अपने अहंकार क. पुिOट नह ं कर सकत।े सच तो यह है 0क
;मे सब से अथह न काम है; उससे आगे उसका कोई अथ नह ं है। उससे आगे उसका कोई ;योजन नह ं है। ;ेम अपने आप म4
जीता है। 0कसी अनय् चीज के 'लए नह ं।

तुम धन कमाते हो—0कसी ;योजन से। वह एक साधन नह ं है। तुम मकान बनाते हो—0कसी के रहने के 'लए। वह भी एक
साधन है। ;मे साधन नह ं है। तुम +य- ;ेम करते हो? 0कस 'लए ;मे करते हो?

;मे अपना लQ्य आप है। यह कारण है 0क Vहसाब 0कताब रखने वाला मन, ता0कक मन, ;योजन क. भाषा म4 सोचने वाला
मन ;मे नह ं कर सकता। और जो मन ;योजन क. भाषा म4 सोचता है। वह तनाव*सत् होगा। +य-0क ;योजन भ वषय् म4 ह
पूरा 0कया जा सकता है। यहां और अभी नह ।ं

तुम एक मकान बना रहे हो। तुम उसम4 अभी ह नह ं रह सकत।े पहले बनाना होगा। तुम भ वषय् म4 उसमे रह सकते हो; अभी
नह ।ं तुम धन कमाते हो। बक_ बलै 4स भ वषय् म4 बनगे ा, अभी नह ।ं अभी साधन का उपयोग कर सकते हो, साधय् भ वषय् म4
आएगँ ।े

;मे सदा यहां है और अभी है। ;मे का कोई भ वषय् नह ं है। यह वजह है 0क ;मे Lयान के इतने कर ब है। यह वजह है 0क
म<ृ यु भी Lयान के इतने कर ब है। +य-0क म<ृ यु भी यहां और अभी है, वह भ वषय् म4 नह ं घटती।

+या तुम भ वषय् म4 मर सकते हो? वतमान म4 ह मर सकते हो। कोई कभी भ वषय् म4 नह ं मरा। भ वषय् म4 कै से मर सकते
हो? या अतीत म4 कै से मर सकते हो। अतीत जा चुका वह अब नह ं है। इस'लए अतीत म4 नह ं मर सकते। और भ वषय् अभी
आया नह ं है। इस'लए उसमे कै से मरोगे?

म<ृ यु सदा वतमान म4 होती है। म<ृ यु ;ेम और Lयान सब वतमान म4 घVटत होते है। इस'लए अगर तुम म<ृ यु से डरते हो तो
तुम ;ेम नह ं कर सकत।े अगर तुम म<ृ यु से भयभीत हो तो तुम Lयान नह ं कर सकते। और अगर तुम Lयान से डरे हो तो
तुZहारा जीवन >यरथ् होगा। 0कसी ;योजन के अथ म4 जीवन >यथ नह ं होगा। वह >यथ इस अथ म4 होगा 0क तुZह4 उसम4
0कसी आनंद क. अनुभू त नह ं होगी। जीवन अथह न होगा।

इन तीन- को—;मे , Lयान और म<ृ यु को—एक साथ रखना अजीब मालूम पड़गे ा। वह अजीब है नह ।ं वे समान अनुभव है।
इस'लए अगर तुम एक म4 ;वेश कर गए तो शषे दो म4 भी ;वेश पा जाओग।े

'शव ;मे से शुM करते है: ‘’ ;य देवी, ;मे 0कए जाने के Qण म4 ;ेम म4 ऐसे ;वशे करो जैसे 0क वह नतय् जीवन है।‘’

इसका +या अथ है? कई चीज4, एक जब तुZह4 ;मे 0कया जाता है तो अतीत समापत् हो जाता है। और भ वषय् भी नह ं बचता।
तुम वतमान के आयाम म4 ग त कर जाते हो। तुम अब म4 ;वेश कर जाते हो। +या तुमने कभी 0कसी को ;ेम 0कया है? यVद
कभी 0कया है तो जानते हो 0क उस Qण मन नह ं होता है।

यह कारण है 0क तथाक थत बु मान कहते है 0क ;ेम अंधे होते है, मन: शूGय और पागल होते है। व9तुत: वे सच कहते है।
;ेमी इस अथ म4 अंधे होते है। 0क भ वषय् पर अपने 0कए का Vहसाब रखने वाल आँख उनके पास नह ं होती। वे अंधे है,
+य-0क वे अतीत को नह ं देख पाते। ;े'मय- को +या हो जाता है?

वे अभी और यह म4 सरक आते है, अतीत और भ वषय् क. चतं ा नह ं करते, +या होगा इसक. चतं ा नह ं लेते। इस कारण वे
अंधे कहे जाते है। वे है। जो गlणत करते है, उनके 'लए वे अंधे है, और जो गlणत नह ं करते उनके 'लए आँख वाले है। जो
Vहसाबी नह ं है वे देख ल4गे 0क ;ेम ह असल आँख है, वा9त वक aिOट है।

इस'लए पहल चीज के ;ेम के Qण म4 अतीत और भ वषय् नह ं होते है। तब एक नाजुम Bबदं ु समझने जैसा है। जब अतीत
और भ वषय् नह ं रहते तब +या तुम इस Qण को वतमान कह सकते हो? यह वतमान है दो के बीच, अतीत और भ वषय् के
बीच; यह सापेQ है। अगर अतीत और भ वषय् नह ं रहे तो इसे वतमान कहते म4 +या तुक है। वह अथह न है। इसी'लए 'शव
वतमान शबद् का >यवहार नह ं करते। वे कहते है, नतय् जीवन। उनका मतलब शाशव् त से है—शाशव् त म4 ;वेश करो।

हम समय को तीन Vह9स- म4 बाटं ते है—भूत, भ वषय् और वतमान। यह वभाजन गलत है। सवथा गलत है। के वल भूत और
भ वषय् समय है, वतमान समय का Vह9सा नह ं है। वतमान शाशव् त का Vह9सा है। जो बीत गया वह समय है। जो आने
वाला है समय है।

ले0कन जो है वह समय नह ं है। +य-0क वह कभी बीतता नह ं है। वह सदा है। अब सदा है। वह सदा है। यह अब शाशव् त है।

अगर तुम अतीत से चलो तो तुम कभी वतमान म4 नह ं आते। अतीत से तुम सदा भ वषय् म4 या ा करते हो। उसमे कोई Qण
नह ं आता जो वतमान हो। तुम अतीत से सदा भ वषय् म4 ग त करते रहते हो। आकर वतमान से तुम और वतमान म4 गहरे
उतरते हो, अ धका धक वतमान म4। यह नतय् जीवन है।

इसे हम इस तरह भी कह सकते है। अतीत से भ वषय् तक समय है। समय का अथ है 0क तुम समतल भू'म पर और सीधी
रेखा म4 ग त करते हो। या हम उसे Qै तज कह सकते है। और िजस Qण तुम वतमान म4 होते हो, आयाम बदल जाता है।
तुZहार ग त ऊLवाधर ऊपर-नीचे हो जाती है। तुम ऊपर, ऊँ चाई क. और जाते हो या नीचे गहराई क. और जाते हो। ले0कन
तब तुZहार ग त Qै तज या समतल नह ं होती है।

बु और 'शव शाशव् त म4 रहते है, समय म4 नह ।ं

जीसस से पछू ा गया 0क आपके ;भु के राजय् म4 +या होगा? जो पछू रहा था वह समय के बारे म4 नह ं पछू रहा था। वह जानना
चाहता था 0क वहां उसक. वासनाओं का +या होगा। वे कै से पूर ह-गी? वह पछू रहा था 0क +या वहां अनंत जीवन होगा या
वहां म<ृ यु भी होगी। +या वहां दःु ख भी रहेगा। और छोटे और बड़े लोग भी ह-ग।े जब उसने पूछा 0क आपके ;भु के राजय् म4
+या होगा। तब वह इसी दु नया क. बात पछू रहा था।

और जीसस ने उतत् र Vदया—यह उतत् र झेन संत के उतत् र जैसा है—‘’वहां समय नह ं होगा।‘’ िजस >यि+त को यह उतत् र
Vदया गया था उसने कु छ नह ं समझा होगा। जीसस ने इतना ह कहा—वहां समय नह ं होगा। +य-? +य-0क समय Qै तज है,
और ;भु का राजय् ऊLवगामी है। वह शाशव् त है। वह सदा यहां है। उसमे ;वशे के 'लए तुZह4 समय से हट भर जाना है।

तो ;ेम पहला Cवारा है। इसके Cवारा तुम समय के बाहर नकल सकते हो। यह कारण है 0क हर आदमी ;ेम चाहता है, हर
आदमी ;ेम करना चाहता है। और कोई नह ं जानता है 0क ;ेम को इतनी मVहमा +य- द जाती है? ;मे के 'लए इतनी गहर
चाह +य- है? और जब तक तुम यह ठUक से न समझ लो, तुम ने ;ेम कर सकते हो और न पा सकते हो। +य-0क इस धरती पर
;ेम गहन से गहन घटना है।

हम सोचते है 0क हर आदमी, जैसा वह है, ;ेम करने को सQम है। वह बात नह ं है। और इसी कारण से तुम ;मे म4 नराशा
होते हो। ;मे एक और ह आयाम है। यVद तुमने 0कसी को समय के भीतर ;ेम करने क. को'शश क. तो तुZहार को'शश
हारेगी। समय के रहते ;मे संभव नह ं है।

मुझे एक कथा याद आती है। मीरा कृ षण् के ;ेम म4 थी। वह गVृ हणी थी—एक राजकु मार क. प<नी। राजा को कृ षण् से ईOया
होने लगी। कृ षण् थे नह ं। वे शर र से उपि9थत नह ं थे। कृ षण् और मीरा क. शार Pरक मौजूदगी म4 पाचँ हजार वष[ का
फासला था। इस'लए यथाथ म4 मीरा कृ षण् के ;मे म4 कै से हो सकती थी। समय का अंतराल इतना लंबा था।

एक Vदन राणा ने मीरा से पछू ा, तुम अपने ;ेम क. बात 0कए जाती हो, तुम कृ षण् के आसपास नाचती-गाती हो। ले0कन
कृ षण् है कहां? तुम 0कसके ;मे म4 हो? 0कससे सतत बात4 0कए जाती हो?

मीरा ने कहां: कृ षण् यहां है, तुम नह ं हो। +य-0क कृ षण् शाशव् त है। तुम नह ं हो, वे यहां सदा ह-गे। सदा थे। वे यहां है, तुम
यहां नह ं हो। एक Vदन तुम यहां नह ं थे, 0कसी Vदन 0फर यहां नह ं होओगे। इस'लए म_ कै से वRवास कु M 0क इन दो
अनि9ततव् के बीच तुम हो। दो अनि9त<व के बीच अि9ततव् +या संभव है?

राणा समय म4 है और कृ षण् शाशव् त म4 है। तुम राणा के नकट हो सकते हो। ले0कन दरू नह ं 'मटाई जा सकती। तुम दरू ह
रहोग।े और समय म4 तुम कृ षण् से बहुत दरू हो सकते हो, तो भी तुम उनके नकट हो सकते हो। यह आयाम ह और है।

म_ आपने सामने देखता हूं वहां द वार है। 0फर म_ अपनी आंख- को आगे बढ़ाता हूं और वहां आकाश है। जब तुम समय म4
देखते हो तो वहां द वार है। और जब तुम समय के पार देखते हो तो वहां खुला आकाश है, अनंत आकाश।

;मे अनंत का Cवार खोल सकता है। अि9ततव् क. शाRवतता का Cवार। इस'लए अगर तुमने कभी सच म4 ;मे 0कया है तो
;ेम को Lयान क. व ध बनाया जा सकता है। यह वहां व ध है: ‘’ ;य देवी ;मे 0कए जाने के Qण म4 ;मे म4 ऐसे ;वशे करो
जैसे 0क यह नतय् जीवन हो।‘’

बाहर-बाहर रहकर ;मे ी मत बनो, ;ेमपणू होकर शाशव् त म4 ;वेश करो। जब तुम 0कसी को ;ेम करते हो तो +या तुम वहां
;ेमी क. तरह होते हो? अगर होते हो तो समय म4 हो, और तुZहारा ;ेम झूठा है। नकल है, अगर तुम अब भी वहां हो और
कहते हो 0क म_ हूं तो शार Pरक Mप से नजद क होकर भी आLयाि<मक Mप से तुZहारे बीच दो ~ुव- क. दरू कायम रहती है।

;मे म4 तुम न रहो, 'सफ ;मे रहे; इस'लए ;मे ह हो जाओ। अपने ;मे ी या ;े'मका को दलु ार करते समय दलु ार ह हो जाओ।
चंुबन लेते समय चूसने वाले या चूमे जाने वाले मत रहो, चुंबन ह बन जाओ। अहंकार को Bबलकु ल भूल जाओ। ;मे के कृ तय्
म4 धुल-'मल जाओ। कृ तय् म4 इतनी गहरे समा जाओ 0क कता न रहे।

और अगर तुम ;ेम म4 नह ं गहरे उतर सकते तो खाने और चलने म4 गहरे उतरना कVठन होगा। बहुत कVठन होगा। +य-0क
अहंकार को वसिजत करने के 'लए ;ेम सब से सरल माग है। इसी वजह से अहंकार लोग ;मे नह ं कर पाते। वे ;ेम के बारे म4
बात4 कर सकते है। गीत गा सकते है। 'लख सकते है; ले0कन वे ;मे नह ं कर सकते। अहंकार ;मे नह ं कर सकता है।

'शव कहते है, ;ेम ह हो जाओ। जब आ'लगं न म4 हो तो आ'लगं न हो जाओ। चुंबन लेते समय चुंबन हो जाओ। अपने को इस
परू तरह भूल जाओ 0क तुम कह सको 0क म_ अब नह ं हूं, के वल ;मे है। तब }दय नह ं धड़कता है, ;मे क. धड़कता है। तब
खून नह ं दौड़ता है, ;मे ह दौड़ता है। तब आंखे नह ं देखती है, ;मे ह देखता है। तब हाथ छू ने को नह ं बढ़ते है, ;ेम ह छू ने को
बढ़ता है। ;ेम बन जाओ और शाशव् त जीवन म4 ;वेश करो।

;ेम अचानक तुZहारे आयाम को बदल देता है। तुम समय से बाहर फ4 क Vदये जाते हो। तुम शाशव् त के आमने-सामने खड़े हो
जाते हो। ;ेम गहरा Lयान बन सकता है—गहरे से गहरा। और कभी-कभी ;'े मय- ने वह जाना है जो संत- न भी नह ं जाना।
कभी-कभी ;े'मय- ने उस क4 ? को छु आ है जो अनेक यो गय- ने नह ं छु आ।

'शव को अपनी ;या देवी के साथ देखो। उGह4 Lयान से देखो। वे दो नह ं मालूम होते। वे एक ह है। यह एकातं इतना गहरा है।
हम सबने 'शव 'लगं देखे है। ये ल_ गक ;तीक है। 'शव के 'लगं का ;तीक है। ले0कन वह अके ला नह ं है, वह देवी क. यो न म4
ि9थत है। परु ाने Vदन- के Vहदं ू बड़े साहसी थे। अब जब तुम 'शव'लगं देखते हो तो याद नह रहता 0क यह एक ल_ गक ;तीक है।
हम भूल गए है। हमने चOे टा पूवक इसे पूर तरह भुला Vदया है।

;'स मनोवै ा नक जुंग ने अपनी आतम् कथा म4, अपने सं9मरण- म4 एक मजदे ार घटना का उYलेख 0कया है। वह भारत
आया और कोणाक देखने को गया। कोणाक के मंVदर म4 'शव'लगं है। जो पंWडत उसे समझाता था उसने 'शव'लगं के 'सवाय
सब कु छ समझाया। और वे इतने थे 0क उनसे बचना मुिRकल था। जंुग तो सब जानता था, ले0कन पंWडत को 'सफ चढ़ाने के
'लए पछू ता रहा क. ये +या है? तो पWं डत ने आlखर जंुग के कान म4 कहा 0क मुझे यहां मत पू छये, म_ पीछे आपको बताऊं गा।
यह गोपनीय है।

जंुग मन ह मन हंसा होगा। ये है आज के Vहदं ।ू 0फरा बहार आकर पंWडत ने कहा 0क दसू र- के सामने आपका पछू ना उ चत न
था। अब म4 बताता हूं। यह गपु त् चीज है। और तब 0फर उसने जंुग के कान म4 कहा ये हमारे ग]ु तांग है।

जंुग जब यहां से वापस गया तो वहां वह एक महान वCवान से 'मला। पवू yय चतं न 'मथक और दशन के वCवान, हेनPरख
िजमर से। जुंग ने यह 0क9सा िजमर को सुनाया। िजमर उन थोड़े से मनी षय- म4 था िजGह-ने भारतीय चतं न म4 डू बने क.

चOे टा क. थी। और वह भारत का उसक. वचारणा का, जीवन के ; त उसके अता0कक रह9यवाद aिOट वाद aिOटकोण का
;ेमी था। जब उसने जुंग से यह सूना तो वह हंसा और बोला, बदलाहट के 'लए अfछा है। मन_ े बु , कृ षण् , महावीर जैसे महान
भारतीय- के बारे म4 सुना है। तुम तो सुना रहे हो वह 0कसी महान भारतीय के संबंध म4 नह ,ं भारतीय- के संबधं म4 कु छ कहता
है।

'शव के 'लए ;ेम महाCवार है। और उनके 'लए कामवासना नदं नीय नह ं है। उनके 'लए काम बीज है और ;मे उसका फू ल
है। और अगर तुम बीज क. नदं ा करते हो तो फू ल क. भी नदं ा अपने आप हो जाती है। काम ;ेम बन सकता है। और अगर
वह कभी ;मे नह ं बनता है तो वह पगं ु हो जाता है। पंगुता क. नदं ा करो, काम क. नह ं। ;ेम को lखलना चाVहए। उसको ;मे
बनना चाVहए। और अगर यह नह ं होता है तो यह काम दोष नह ं है, यह दोष तुZहारा है।

काम को काम नह ं रहना है। यह ं तं क. 'शQा है। उसे ;ेम म4 Mपातं Pरत होना ह चाVहए। और ;मे को भी ;ेम ह नह ं रहना
है। उसे ;काश म4 , Lयान के अनुभव म4 अं तम, परम रह9यवाद 'शखर म4 MपांतPरत होना चाVहए। ;ेम को Mपातं Pरत कै से
0कया जाए?

कृ तय् हो जाओ और कता को भूल जाओ। ;ेम करते हुए ;मे , महज ;मे हो जाओ। तब यह तुZहारा ;मे मेरा ;मे या 0कसी
अनय् का ;ेम नह ं है। तब यह मा ;मे है, जब 0क तुम नह ं हो, जब 0क तुम परम 9 ोत या धारा के हाथ म4 हो। तब 0क तुम
;ेम म4 हो तुम ;मे म4 नह ं हो, ;ेम न ह तुZह4 आ<मसात कर 'लया है। तुम तो अंतधान हो गए हो। मा ;वाहमान ऊजा
बनकर रह गए हो।

इस यूग का एक महान सजृ नातम् क मनीषी डी. एच. लॉर4स, जाने अनजाने त वद था। पिRचम म4 व परू तरह नVं दत
हुआ। उसक. 0कताब4 जबत् हुई। उस पर अदालत- म4 अनके मुकदमे चले, 'सफ इस'लए 0क उसने कहा 0क काम ऊजा एक
मा ऊजा है। और अगर तुम उसक. नदं ा करते हो, दमन करते हो, तो तुम जगत के lखलाफ हो। और तब तुम कभी भी इस
ऊजा क. परम lखलावट को नह ं जान पाओगे। और द'मत होने पर यह कु Mप हो जाती है। और यह द9ु च2 है।

पुरोVहत, नी तवाद , तथाक थत धा'मक लोग, पोप, शंकराचाय, और दसू रे लोग काम क. सतत नदं ा करते है। वे कहते है 0क
यह एक कु Mप चीज है। और तुम इसका दमन करते होत तो यह सचमचु कु Mप हो जाती है। तब वे कहते है 0क देखो, जो हम
कहते थे वह सच नकला। तुमने ह इसे 'स कर Vदया। तुम जो भी कर रहे हो वह कु Mप है, और तुम जानते हो 0क वह कु Mप
है।

ले0कन काम 9वयं म4 कु Mप नह ं है। परु ोVहत- ने उसे कु Mप कर Vदया है। और जब वे इसे कु Mप कर चूकते है तब वे सह साBबत
होते है। ओर जब वे सह साBबत होते है तो तुम उसे कु Mप से कु Mप तर 0कए देते हो। काम तो नद|ष ऊजा है। तुम म4 ;वाVहत
होता जीवन है, जीवंत अि9ततव् है। उसे पगं ु मत बनाओ। उसे उसके 'शखर- क. या ा करने दो। उसका अथ है 0क काम को
;मे बनना चाVहए। फक +या है?

जब तुZहारा मन कामुक होता है तो तुम दसू रे का शोषण कर रहे हो। दसू रा मा एक यं होता है। िजसे इ9तेमाल करके फ4 क
देना है। और जब काम ;मे बनता है तब दसू रा यं नह ं होता, दसू रे का शोषण नह ं 0कया जाता, दसू रा सच म4 दसू रा नह ं
होता। तब तुम ;ेम करते हो तो यह सव् -क4 V?त नह ं है। उस हालत म4 तो दसू रा ह मह<वपूण होता है। अनूठा होता है। तब तुम
एक दसू रे का शोषण नह ं करते, तब दोन- एक गहरे अनुभव म4 सिZम'लत हो जाते हो। साझीदार हो जाते हो। तुम शोषक और
शो षत न होकर एक दसू रे को ;मे क. और ह दु नया म4 या ा करने म4 सहायता करते हो। काम शोषण है, ;ेम एक 'भनन्
जगत म4 या ा है।

अगर यह या ा Qlणक न रहे, अगर यह या ा Lयान पणू हो जाए, अथात अगर तुम अपने को Bबलकु ल भूल जाओ और ;मे ी
;े'मका वल न हो जाएं और के वल ;मे ;वाVहत होता रहे, तो 'शव कहते है—‘’शाशव् त जीवन तुZहारा है।‘’
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-7

तं -सू — व:ध-11

;श:थल होने क" दसू र% व:ध:

तं -सू — व:ध-11 व ान भैरव तं -ओशो

जब चींट% के र0गने क" अनुभू9त हो तो इं=1य2 के Gवार बदं कर दो। तब।
यह बहुत सरल Vदखता है। ले0कन उतना सरल है नह ।ं म_ इसे 0फर से पढ़ता हूं, ‘’ जब चींट के र4गने क. अनुभू त हो तो इंV?य-
के Cवार बदं कर दो। तब।‘’ यक एक उदाहरण मा है। 0कसी भी चीज से काम चलेगा। इंV?य- के Cवार बंद कर दो जब चीटं
के र4गने क. अनुभू त हो। और तब—तब घटना घट जाएगी। 'शव कह +या रहे है?
तुZहारे पाँव म4 कांटा गड़ा है। वह दद देता है, तुम तकल फ म4 हो। या तुZहारे पावँ पर एक चीटं र4ग रह है। तुZह4 उसका र4गना
महसूस होता है। और तुम अचानक उसे हटाना चाहते हो। 0कसी भी अनुभव को ले सकते है। तुZह4 धाव है जो दखु ता है।
तुZहारे 'सर म4 दद है, या कह ं शर र म4 दद है। वषय के Mप म4 0कसी से भी काम चलेगा। चीटं का र4गना उदाहरण भर है।
'शव कहते है: ‘’जब चीटं के र4गने क. अनुभू त हो तो इंV?य- के Cवारा बंद कर दो।‘’
जो भी अनुभव हो, इंV?य- के सब Cवार बदं कर दो करना +या है? आंख4 बंद कर लो और सोचो 0क म_ अंधा हूं और देख नह ं
सकता। अपने कान बंद कर लो और सोचो 0क म_ सुन नह ं सकता। पाँच इंV?याँ है, उन सब को बदं कर लो। ले0कन उGह4 बदं
कै से करोगे।
यह आसान नह ं है। Qण भर के 'लए Rवास लेना बंद कर दो, और तुZहार सब इंV?याँ बंद हो जायेगी। और जब Rवास tक. है
और इंV?याँ बदं है, तो र4गना कहां है? चींट कहां है? अचानक तुम दरू , बहुत दरू हो जाते हो।

मरे एक 'म है, वृ है। वे एक बार सीढ़ से गर पड़।े और डॉ+टर- ने कहा 0क अब वे तीन मह न- तक खाट से नह ं Vहल
सक4 गे। तीन मह ने वkाम म4 रहना है। और वे बहुत अशांत >यि+त थ।े पड़े रहना उनके 'लए कVठन था। म_ उGह4 देखने गया।
उGह-ने कहा 0क मेरे 'लए ;ाथना कर4 और मुझे आशीष द4 0क म4 मर जाऊं । +य-0क तीन मह ने पड़े रहना मौत से भी बदतर है।
म_ पतथ् र क. तरह कै से पडा रह सकता हूं। और सब कहते है 0क Vह'लए मत।

मन_ े उनसे कहा, यह अfछा मौका है। आंख4 बदं कर4 और सोच4 0क म_ पतथ् र हूं, मू तवत। अब आप Vहल नह ं सकते। आlखर
कै से Vहल4गे। आँख बदं कर4 और पतथ् र क. मू त हो जाए।ं उGह-ने पूछा 0क उससे +या होगा। मन_ े कहा क. ;योग तो कर4। म_
यहां बैठा हूं। और कु छ 0कया भी नह ं जा सकता। जैसे भी हो आपको तो यहां तीन मह ने पड़े रहना है। इस'लए ;योग कर4।

वैसे तो वे ;योग करने वाले जीव नह ं थ।े ले0कन उनक. यह ि9थ त ह इतनी असंभव थी 0क उGह-ने कहा 0क अfछा म_ ;योग
कMं गा। शायद कु छ हो। वसै े मुझे भरोसा नह ं आता 0क 'सफ यह सोचने से 0क म_ पतथ् रवत हूं, कु छ होने वाला है। ले0कन म_
;योग कMं गा। और उGह-ने 0कया।

मुझे भी भरोसा नह ं था 0क कु छ होने वाला है। +य-0क वे आदमी ह ऐसे थ।े ले0कन कभी-कभी जब तुम असंभव और नराश
ि9थ त म4 होते हो तो चीज4 घVटत होने लगती है। उGह-ने आंख4 बंद कर ल । म_ सोचता था 0क दो तीन 'मनट म4 वे आंखे
खोल4ग।े और कह4गे 0क कु छ नह ं हुआ। ले0कन उGह-ने आंख4 नह ं खोल । तीस 'मनट गुजर गए। और म_ देख सका 0क वे
पतथ् र हो गए है। उनके माथे पर से सभी तनाव वल न हो गए। उनका चेहरा बदल गया। मुझे कह और जाना था, ले0कन वे
आंखे बदं 0कए पड़े थे। और वे इतने शांत थे मानो मर गए है। उनक. Rवास शातं हो चल थी। ले0कन +य-0क मुझे जाना था,
इस'लए मन_ े उनसे कहा 0क अब आंखे खोल4 और बताएं 0क +या हुआ।

उGह-ने जब आंखे खोल तब वे एक दसू रे ह आदमी थे। उGह-ने कहा, यह तो चम<कार है। आपने मेरे साथ +या 0कया, मन_ े
कु छ भी नह ं 0कया। उGह-ने 0फर कहा 0क आपने जMर कु छ 0कया, +य-0क यह तो चम<कार है। जब मन_ े सोचना शुM 0कया
0क म_ पतथ् र जैसा हूं तो अचानक यह भाव आया 0क यVद म_ अपने हाथ Vहलाना भी चाहता हूं तो उGह4 Vहलाना भी असंभव है।
मन_ े कइ बार अपनी आंख4 खोलनी चाह , ले0कन वे पतथ् र जैसी हो गई थी। और नह ं खुल पा रह थी। और उGह-ने कहा, म_
चं तत भी होने लगा 0क आप +या कह4गे, इतनी देर हुई जाती है, ले0कन म_ असमथ था। म_ तीस 'मनट तक Vहल नह ं सका।
और जब सब ग त बंद हो गई तो अचानक संसार वल न हो गया। और म_ अके ला रह गया। अपने आप म4 गहरे चला गया।
और उसके साथ दद भी जाता रहा।

उGह4 भार दद था। रात को o_ि+वलाइजर के Bबना उGह4 नींद नह ं आती थी। और वसै ा दद चला गया। मन_ े उनसे पछू ा 0क जब
दद वल न हो रहा था तो उGह4 कै सा अनुभव हो रहा था। उGह-ने कहा 0क पहले तो लगा 0क दद है, पर कह ं दरू पर है, 0कसी
और को हो रहा है। और धीरे-धीरे वह दरू और दरू होता गया। और 0फर एक दम से ला पता हो गया। कोई दस 'मनट तक दद
नह ं था। पतथ् र के शर र को दद कै से हो सकता है।

यह व ध कहती है: ‘’इंV?य- के Cवारा बदं कर दो।‘’

पतथ् र क. तरह हो जाओ। जब तुम सच म4 संसार के 'लए बदं हो जाते हो तो तुम अपने शर र के ; त भी बदं हो जाते हो।
+य-0क तुZहारा शर र तुZहारा Vह9सा न होकर संसार का Vह9सा है। जब तुम संसार के ; त Bबलकु ल बदं हो जाते हो तो अपने
शर र के ; त भी बंद हो गए। और तब 'शव कहते है, तब घटना घटेगी।

इस'लए शर र के साथ इसका ;योग करो। 0कसी भी चीज से काम चल जाएगा। र4गती चीटं ह जMर नह ं है। नह ं तो तुम
सोचोगे 0क जब चीटं र4गगे ी तो Lयान कर4ग।े और ऐसी सहायता करने वाल चीVं टयाँ आसानी से नह ं 'मलती। इस'लए 0कसी

सी भी चलेगा। तुम अपने Bबसत् र पर पड़े हो और ठं डी चादर महसूस हो रह है। उसी Qण मतृ हो जाओ। अचानक चादर दरू
होने लगेगी। वल न हो जाएगी। तुम बंद हो, मतृ हो, पतथ् र जैसे हो, िजसमे कोई भी रं~ नह ं है, तुम Vहल नह ं सकते।
और जब तुम Vहल नह ं सकते तो तुम अपने पर फ4 क Vदये जाते हो। अपने म4 क4 V?त हो जाते हो। और तब पहल बार तुम
अपने क4 ? से देख सकते हो। और एक बार जब अपने क4 ? से देख 'लया तो 0फर तुम वह >यि+त नह ं रह जाओगे जो थ।े
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-7

तं -सू — व:ध-12

;श:थल होने क" तीसर% व:ध:

तं -सू — व:ध-12 , व ान भरै व तं –ओशो

जब 6कसी ,बसत् र या आसमान पर हो तो अपने को वजनशूनय् हो जाने दो—मन के पार।
तुम यहां बैठे हो; बस भाव करो 0क तुम वजनशूनय् हो गए हो। तुZहारा वज़न न रहा। तुZह4 पहले लगेगा 0क कह ं यहां वज़न
है। वजनशूनय् होने का भाव जार रखो। वह आता है। एक Qण आता है। जब तुम समझोगे 0क तुम वज़न शूनय् हो। वज़न
नह ं है। और जब वज़न शूनय् नह ं रहा तो तुम शर र नह ं रहे। +य-0क वज़न शर र का है; तुZहारा नह ,ं तुम तो वज़न शूनय्
हो।
इस संबधं म4 बहुत ;योग 0कए गये है। कोई मरता है तो संसार भर म4 अनके वै ा नक- ने मरते हुए >यि+त का वज़न लेने क.
को'शश क. है। अगर कु छ फक हुआ, अगर कु छ चीज शर र के बहार नकल है, कोई आ<मा या कु छ अब वहां नह ं है। +य-0क
व ान के 'लए कु छ भी Bबना वज़न के नह ं है।
सब पदाथ के 'लए वज़न बु नयाद है। सूय क. 0करण- का भी वज़न है। वह अ<यंत कम है, Gयून है, उसको मापना भी कVठन
है; ले0कन वै ा नक- ने उसे भी मापा है। अगर तुम पाँच वग मील के Qे पर फै ल सब सूय 0करण- को इकƒा कर सको तो
उनका वज़न एक बाल के वज़न के बराबर होगा। सूय 0करण- का भी वज़न है। वे तौल जा सकती है। व ान के 'लए कु छ भी
वज़न के Bबना नह ं है। और अगर कोई चीज वज़न के Bबना है तो वह पदाथ नह ,ं उप पदाथ। और व ान पछले बीस पfचीस

वष| तक वRवास करता था 0क पदाथ के अ तPरक्त कु छ नह ं है। इस'लए जब कोई मरता है और कोई चीज शर र से
नकलती है तो वज़न म4 फक पड़ना चाVहए।

ले0कन यह फक कभी न पडा, वज़न वह का वह रहा। कभी-कभी थोड़ा बढ़ा ह है। और वह सम9या है। िजंदा आदमी का
वज़न कम हुआ, मुदा का `यादा। उसमे उलझने बढ़ , +य-0क वै ा नक तो यह पता लेने चले थे 0क मरने पर वज़न घटता है।
तभी तो वे कह सकते है 0क कु छ चीज बाहर गई। ले0कन वहां तो लगता है। 0क कु छ चीज अंदर ह आई। आlखर हुआ +या।

वज़न पदाथ का है, ले0कन तुम पदाथ नह ं हो। अगर वजन शूGयता क. हम व ध का ;योग करना है तो तुZह4 सोचना चाVहए।
सोचना ह नह ,ं भाव करना चाVहए 0क तुZहारा शर र वजनशूGय हो गया है। अगर तुम भाव करते ह गए। भाव करते ह गए।
तो तुम वजनशूGय हो, तो एक Qण आता है 0क तुम अचानक अनुभव करते हो 0क तुम वज़न शुनय् हो गये। तुम वजनशूGय
ह हो। इस'लए तुम 0कसी समय भी अनुभव कर सकते हो। 'सफ एक ि9थ त पदै ा करनी है। िजसम4 तुम 0फर अनुभव करो
0क तुम वजनशूनय् हो। तुZह4 अपने को सZमोहन मुक्त करना है।

तुZहारा सZमोहन +या है? सZमोह न यह है 0क तुमने वRवास 0कया है 0क म_ शर र हूं, और इस'लए वज़न अनुभव करते हो।
अगर तुम 0फर से भाव कर-, वRवास करो 0क म_ शर र नह ं हूं, तो तुम वज़न अनुभव नह ं करोगे। यह सZमोहन मुि+त है 0क
जब तुम वज़न अनुभव नह ं करते तो तुम मन के पार चले गए।

'शव कहते है: ‘’जब 0कसी Bबसत् र या आसन पर हो तो अपने को वजनशूनय् हो जाने दो—मन के पार।‘’ तब बात घटती है।

मन का भी वज़न है। ;<येक आदमी के मन का वज़न है। एक समय कहा जाता था 0क िजतना वज़नी मि9तषक् हो उतना
बु मान होता है। और आमतौर से यह बात सह है। ले0कन हमेशा सह नह ं है। +य-0क कभी-कभी छोटे मि9तषक् के भी
महान >यि+त हुए है। और महा मूख मि9तषक् भी वज़नी होते है।

कु छ बात4। कभी-कभी मुद| का वज़न +य- बढ़ जाता है। `य- ह चते ना शर र को छोड़ती है 0क शर र असुरmQत हो जाता है।
बहुत सी चीज4 उसम4 ;वशे कर जा सकती है। तुZहारे कारण वे ;वशे नह ं कर सकती है। एक 'शव म4 उनके तरंग4 ;वेश कर
सकती है। तुमम4 नह ं कर सकती है। तुम यहां थे, शर र जी वत था। वह अनेक चीज- से बचाव कर सकता था। यह कारण है
0क तुम एक बार बीमार पड़े 0क यह एक लंबा 'सल'सला हो जाता है। एक के बाद दसू र बीमार आती चल जाती है। एक बार
बीमार होकर तुम असुरmQत हो जाते हो। हमले के ; त खुल जाते हो। ; तरोध जाता रहता है। तब कु छ भी ;वेश कर सकता
है। तुZहार उपि9थ त शर र क. रQा करती है। इस'लए कभी-कभी मतृ शर र का वज़न बढ़ सकता है। +य-0क िजस Qण तुम
उससे हटते हो, उसमे कु छ भी ;वशे कर सकता है।

दसू र बात है 0क जब तुम सुखी होते हो तो तुम वजनशूनय् अनुभव करते हो। और दःु खी होते हो तो वज़न अनुभव करते हो।
लगता है 0क कु छ तुZह4 नीचे को खींच रहा है। तब गुt<वाकषण बहुत बढ़ जाता है। दःु ख क. हालत म4 वज़न बढ़ जाता है। जब
तुम सुखी होते हो तो हलके होते हो, तुम ऐसा अनुभव करते हो। +य-? +य-0क जब तुम सुखी हो, जब तुम आनंद का Qण
अनुभव करते हो। तो तुम शर र को Bबलकु ल भूल जाते हो। और जब उदास होते हो, दःु खी होते हो तब, शर र के अ त नकट
आ जाते हो। उसे भूल नह ं पाते। उससे जूड़ जाते हो। तब तुम भार अनुभव करते हो। ये भार तुZहारा नह ं है, तुZहारे शर र से
चपकने का है, शर र का है। वह तुZह4 नीचे क. और खींच रहा है। जमीन क. तरफ खींचता है, मान- तुम जमीन म4 गड़े जा रहे
हो। सुख म4 तुम नभार होते हो। शोक म4, वषाद म4 वज़नी हो जाते हो।

इस'लए गहरे Lयान म4, जब तुम अपने शर र को Bबलकु ल भूल जाते हो, तुम जमीन से ऊपर हवा म4 उठ सकते हो। तुZहारे
साथ तुZहारा शर र भी ऊपर उठ सकता है। कई बार ऐसा होता है।

बो'ल वया म4 वै ा नक एक 9 ी का नर Qण कर रहे है। Lयान करते हुए वह जमीन से चार फ.ट ऊपर उठ जाती है। अब तो
यह वै ा नक नर Qण क. बात है। उसके अनेक फोटो और 0फलम् 'लए जा चुके हे। हजार- दशक- के सामने वह 9 ी
अचानक ऊपर उठ जाती है। उसके 'लए गtु <वाकषण >यथ हो जाता है। अब तक इस बात क. सह >याrया नह ं क. जा सक.
है 0क +य- होता है। ले0कन वह 9 ी गरै -Lयान क. अव9था म4 ऊपर नह ं उठ सकती। या अगर उसके Lयान म4 बाधा हो जाए
तो भी वह ऊपर से झट नीचे आ जाती है। +या होता है?

Lयान क. गहराई म4 तुम अपने शर र को Bबलकु ल भूल जाते हो। तादा<मय् टू ट जाता है। शर र बहुत छोट चीज है और तुम
बहुत बड़े हो। तुZहार शि+त अपPरसीम है। तुZहारे मुकाबले म4 शर र तो कु छ भी नह ं है। यह तो ऐसा ह है 0क जैसे एक
स€ाट ने अपने गुलाम के साथ तादा<मय् 9था पत कर 'लया है। इस'लए जैसे गलु ाम भीख मांगता है। वैसे ह स€ाट भी भीख
मांगता है। जैसे गलु ाम रोता है। वसै े ह स€ाट भी रोता है। और जब गलु ाम कहता है 0क म_ ना कु छ हूं तो स€ाट भी कहता है।
म_ ना कु छ हूं ले0कन एक बार स€ाट अपने अि9ततव् को पहचान ले, पहचान ले 0क वह स€ाट है और गलु ाम बस गलु ाम है, से
कु छ बदल जाएगा। अचानक बदल जाएगा।

तुम वह अपPरसीम शि+त हो जो Qु? शर र से एकातम् हो गई है। एक बार यह पहचान हो जाए, तुम अपने सव् को जान लो,
तो तुZहार वजन शूGयता बढ़ेगी। और शर र का वज़न घटेगा। तब तुम हवा म_ उठ सकते हो, शर र ऊपर जा सकता है।

ऐसी अनेक घटनाएं है जो अभी साBबत नह ं क. जा सकती। ले0कन वे साBबत ह-गी। +य-0क जब एक 9 ी चार फ.ट ऊपर उठ
सकती है। तो 0फर बाधा नह ।ं दसू रा हजार फ.ट ऊपर उठ सकता है। तीसरा अनंत अंतPरQ म4 पूर तरह जा सकता है।
सै ां तक Mप से यह काई सम9या नह ं है। चार फ.ट ऊपर उठे 0क चार सौ फ.ट 0क चार हजार फ.ट, इससे +या फक पड़ता है।

राम तथा कई अनय् के बारे म4 कथाएं है 0क वे शर र वल न हो गए थे। अनेक मतृ शर र इस धरती पर कह ं नह ं पाए गए।
मोहमम् द Bबलकु ल वल न हो गए थ।े शर र ह नह ं आपने घोड़ के साथ। वे कहा नयां असंभव मालूम पड़ती है। पौराlणक
मालूम पड़ती है। ले0कन जMर नह ं है 0क वे 'मथक ह ह-। एक बार तुम वज़न शूनय् शि+त को जान जाओ। तो तुम
गtु <वाकषण के मा'लक हो गए। तुम उसका उपयोग भी कर सकते हो, यह तुम पर नभर करता हे। तुम सशर र अंतPरQ म4
वल न हो सकत हो।

ले0कन हमारे 'लए वज़न शूGयता सम9या रहेगी। 'सCघासन क. व ध है। िजस म4 बु बठै ते है, वजनशूनय् होने क. सव|तम
व ध है। जमीन पर बठै ो, 0कसी कु सy या अनय् आसन पर नह ।ं मा जमीन पर बैठो। अfछा हो 0क उस पर सीम4ट या कोई
कृ B मता नह ं हो। जमीन पर बठै ो 0क तुम ;कृ त के नकटतम रहो। और अfछा हो 0क तुम नंगे बठै ो। जमीन पर नंगे बठै ो—
बु ासन म4, 'सCघासन म4।

वज़न शूनय् होने के 'लए 'सCघासन सवkेषठ् आसन है। +य-? +य-0क जब तुZहारा शर र इधर-उधर झुका होता है तो तुम
`यादा वज़न अनुभव करते हो। तब तुZहारे शर र को गुt<वाकषण से ;भा वत होने के 'लए `यादा Qे है। यVद म_ इस कु सy
पर बठै ा हूं तो मेरे शर र का बड़ा Qे गुt<वाकषण से ;भा वत होता है। जब तुम खड़े हो तो ;भा वत Qे कम हो जाता है।
ले0कन बहुत देर तक खड़ा नह ं रहा जा सकता है। महावीर सदा खड़-े खड़े Lयान करते थ,े +य-0क उस हालत म4 गtु <वाकषण
का Gयूनतम Qे घेरता है। तुZहारे पैर भर जमीन को छू ते है। जब पाँव पर खड़े हो तो गtु <वाकषण तुम पर Gयूनतम ;भाव
करता है। और गुt<वाकषण क. वज़न है।

पाँव- और हाथ- को बांधकर 'सCघासन म4 बैठना `यादा कारगर होता है। +य-0क तब तुZहार आंतPरक वCयुत एक वतुल
बन जाती है। र ढ़ सीधी रखो। अब तुम समझ सकते हो 0क सीधी र ढ़ रखने पर इतना जोर +या Vदया जाता है। +य-0क सीधी
र ढ़ से कम से कम जगह घेर जाती है। तब गुt<वाकषण का ;भाव कम रहता है। आंखे बंद रखते हुए अपने को पूर तरह

संतु'लत कर लो, अपने को क4 V?त कर लो। पहले दाई और झुककर गुt<वाकषण का अनुभव करो। 0फर बाई और झुककर
गुt<वाकषण का अनुभव करो। तब उस क4 ? को खोज- जहां गुt<वाकषण या वज़न कम से कम अनुभव होता है। और उस
ि9थ त म4 थर हो जाओ।
और तब शर र को भूल जाओ और भाव करो 0क तुम वज़न नह ं हो। तुम वज़न शूनय् हो। 0फर इस वज़न शूGयता का अनुभव
करते रहो। अचानक तुम वज़न शूनय् हो जाते हो। अचानक तुम शर र नह ं रह जाते हो, अचानक तुम शर र शूGयता के एक
दसू रे ह संसार म4 होते हो।
वज़न शूGयता शर र शूGयता है। तब तुम मन का भी अ त2मण कर जाते हो। मन भी शर र का Vह9सा है, पदाथ का Vह9सा
है। पदाथ का वज़न होता है। तुZहारा कोई वज़न नह ं है। इस व ध का यह आधार है।
0कसी भी एक व ध को ;योग म4 लाओ। ले0कन कु छ Vदन- तक उसमे लगे रहो। ता0क तुZह4 पता हो क वह तुZहारे 'लए
कारगर है या नह ।ं
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-7

तं -सू — व:ध-13

‘’या कCपना करो 6क मयूर पछूं के पंचरंगे वतुल 9नJसीम अंत(रI म0 तुRहार% पाँच इं=1याँ है।

SHIVA व ान भैरव तं (तं -सू — व:ध-13 ओशो

अब उनके सTदय को भीतर ह% घुलने दो। उसी )कार शूUय म0 या द%वार पर 6कसी ,बदं ु के साथ कCपना करो, जब तक 6क वह
,बदं ु वल%न न हो जाए। तब दसू रे के ;लए तुRहार% कामना सच हो जाती है।‘’

ये सारे सू , भीतर के क4 ? को कै से पाया जाए, उससे संबं धत है। उसके 'लए जो बु नयाद तरक.ब, जो बु नयाद व ध काम
म4 लायी गयी है, वह यह है 0क तुम अगर बाहर कह ं भी, मन म4, }दय म4 या बाहर क. 0कसी द वार म4 एक क4 ? बना सके और
उस पर सम*ता से अपने अवधान को क4 V?त कर सके और उस बीच समूचे संसारा को भूल सके और एक वह ं Bबदं ू तुZहार
चेतना म4 रह जाए। तो तुम अचानक अपने आंतPरक क4 ? पर फ4 क Vदए जाओग।े यह कै से काम करता है, इसे समझो। तुZहारा
मन एक भगोड़ा है, एक भाग दौड़ ह है। वह कभी एक Bबदं ु पर नह ं Vटकता है। वह नरंतर कह ं जा रहा है। ग त कर रहा है।
पहूंच रहा है। ले0कन वह कभी एक Bबदं ू पर नह ं Vटकता है। वह एक वचार से दसू रे वचार क. और, अ से ब क. और या ा
करता रहता है। ले0कन कभी वह अ पर नह ं Vटकता है, कभी वह ब पर नह ं Vटकता है। वह नरंतर ग तमान है।
यह याद रहे 0क मन सदा चलायमान है। वह कह ं पहुंचने क. आशा तो करता है, ले0कन कह ं पहुंचता नह ं है। वह पहुंच नह ं
सकता। मन क. संरचना ह गी तमय है। मन के वल ग त करता है। वह मन का अंतभूत 9वभाव है। ग त ह उसक. ;02या
है। अ से ब को, ब से अ को, वह चलता ह जाता है।

अगर तुम अ या ब या 0कसी Bबदं ु पर ठहर गए, तो मन तुमसे संघष करेगा। वह कहेगा 0क आगे चलो। क्य-0क अगर तुम Mक
गए, मन तुरंत मर जायेगा। वह ग त म4 रहकर ह जीता है। मन का अथ ह ;02या है। अगर तुमने ग त नह ं क. तुम Mक गये
तो मन अचानक समापत् हो जायगे ा। वह नह ं बचेगा। के वल चेतना बचगे ी।

चेतना तुZहार 9वभाव है। मन तुZहारा कम है। चलने जैसा। इसे समझना कVठन है। +य-0क हम समझते है 0क मन कोई
ठोस वा9त वक व9तु है। वह नह ं है। मन महज एक 02या है। यह कहना बेहतर होगा 0क यह मन नह ,ं मनन है। चलने क.
तरह यह एक ;02या है। चलना ;02या है; अगर तुम Mक जाओ, तो चलना समापत् हो जायेगा। तुम तब नह ं कह सकते 0क
चलना बैठना है। तुम Mक जाओ, तो चलना समापत् है। तुम Mक जाओ तो चलना कहां है। चलना बदं । परै है, पर चलना नह ं
है। पैर चल सकते है। ले0कन अगर तुम Mक जाओ तो, चलना नह ं होगा।

चेतना पैर जैसी है, वह तुZहारा 9वभाव है। मन चलने जैसा है, वह एक ;02या है। जब चेतना एक जगह से दसू र जगह जाती
है तब वह ;02या मन है। जब चेतना अ से ब और ब से स को जाती है तब यह ग त मन है। अगर तुम ग त को बंद कर दो, तो
मन नह ं रहेगा। तुम चते न हो, ले0कन मन नह ं है। जैसे परै तो है, ले0कन चलना नह ं है। चलना 02या है। कम है; मन भी
02या है, कम है।

अगर तुम कह ं Mक जाओ तो मन संघष करेगा, मन कहेगा, बढ़े चलो। मन हर तरह से तुZह4 आगे या पीछे या कह ं भी धकाने
क. चेOटा करेगा। कह ं भी सह , ले0कन चलते रहो। अगर तुम जी‚ करो, अगर तुम मन क. नह ं मानना चाह-, तो वह कVठन
होगा। कVठन होगा, +य-0क तुमने सदा मन का हुक् म माना है। तुमने कभी मन पर हुक्म नह ं 0कया है। तुम कभी उसके
मा'लक नह ं रहे हो। तुम हो नह ं सकते, +य-0क तुमने कभी अपने को मन से तादा<Zय रVहत नह ं 0कया है। तुम सोचते हो
0क तुम मन ह हो। यह भूल 0क तुम मन ह हो मन को पूर 9वतं ता Vदए देती है। +य-0क तब उस पर मल0कयत करने
वाला, उसे नयं ण म4 रखने वाला कोई न रहा। तब कोई रहा ह नह ,ं मन ह मा'लक रह जाता है।

ले0कन मन क. यह मल0कयत तथाक थत है। वह 9वा'मतव् झूठा है। एक बार ;योग करो और तुम उसके 9वा'मतव् को
नषट् कर सकते हो। वह झूठा है। मन महज गुलाम है जो मा'लक होने का दावा करता है। ले0कन उसक. यह दावेदार इतनी
पुरानी है, इतने जGम- से है 0क वह अपने को मा'लक मानने लगा है। गलु ाम मा'लक हो गया है। वह एक महज वRवास है,
धारणा है। तुम उसके वपर त ;योग करके देखो और तुZह4 पता चलेगा। 0क यह धारणा सवथा नराधार थी।

यह पहला सू कहता है: ‘’या कYपना करो 0क मोर क. पूछं के पंचरंगे वतुल न9सीम अंतPरQ म4 तुZहार पाचँ इंV?याँ है। अब
उनके सqदय को भीतर ह घुलने दो।‘’

भाव करो क. तुZहार पाँच इंV?याँ पाँच रंग है। और वे पाचँ रंग समसत् अंतPरQ को भर रहे है। 'सफ कYपना करो 0क तुZहार
पचं 4V?यां पाँच रंग है। सुंदर-संुदर रंग। सजीव रंग और वे अनंत आकाश म4 फै ले है। और तब उन रंग- के बीच Sमण करो,
उनके बीच ग त करो और भाव करो 0क तुZहारे भीतर एक क4 ? है, जहां ये रंग 'मलते है। यह मा कYपना है, ले0कन यह
सहयोगी है। भाव करो 0क ये पाचं - रंग तुZहारे भीतर ;वेश कर रहे है और 0कसी Bबदं ु पर 'मल रहे है।

ये पाँच रंग सच ह 0कसी Bबदं ु पर 'मल4गे और सारा जगत वल न हो जाएगा। तुZहार कYपना म4 पाँच ह रंग है। और तुZहार
कYपना के रंग आकाश को भर द4गे। तुZहारे भीतर गहरे उतर जाएगं े, 0कसी Bबदं ु पर 'मल जाएंग।े

0कसी भी Bबदं ु से काम चलेगा। ले0कन हारा बेहतर रहेगा। भाव करो 0क सारा जगत रंग ह रंग हो गया है। और वे रंग तुZहारे
ना'भ क4 ? पर, तुZहारे हारा क4 Cर-Bबदं ु पर 'मल रहे है। उस Bबदं ु को देखो, उस Bबदं ु पर अवधान को एका* करो और तब एका*
करो तब त वह Bबदं ु वल न न हो जाए। वह वल न हो जाता है। +य-0क वह भी कYपना है। याद रहे 0क जो कु छ भी हमने
0कया है सब कYपना है। अगर तुम उस पर एका* होओ, तो तुम अपने क4 ? पर ि9थर हो जाओग।े तब संसार वल न हो
जायेगा। तुZहारे 'लए संसार नह ं रहेगा।

इस Lयान म4 के वल रंग है। तुम समूचे संसार को भूल गये हो। तुम सारे वषय- को भूल गए हो। तुमने के वल पाचँ रंग चुने है।
कोई पाचँ रंग चून जो। ये Lयान उन लोग- के 'लए है िजनक. aिOट पनै ी है, िजनक. रंग क. संवदे ना गहर है। यह सबके 'लए
नह ं है। ये उGह4 लोग- के 'लए सहयोगी है, िजसके पास च कार क. नजर हो। यVद तुZह4 हरे रंग एक हजार हरे नजर नह ं
आते तो तुम भूल जाओ इस Lयान को और आगे बढ़ो। ये काम उनके काम का है, जो च कार क. पनै नगाह रखते है।

और जो आदमी रंग के ; त संवदे नशील है उसको तुम कहो 0क समूचे आकाश को रंग से भरा होने क. कYपना करो, तो वह
यह कYपना नह ं कर पाएगा। वह यVद कYपना करने क. को'शश भी करेगा। वह लाल रंग क. सोचगे ा। तो लाल शबद् को
देखेगा, ले0कन उसे कYपना म4 लाल रंग Vदखाई नह ं पड़गे ा। वह हरा शबद् तो कहेगा। शबद् भी वहां होगा, ले0कन हPरयाल
वहां नह ं होगी।

तो तुम अगर रंग के ; त संवदे नशील हो, तो इस व ध का ;योग करो। पाँच रंग है। समूचा जगत पाचँ रंग है। और वे रंग
तुमम4 'मल रहे है। तुZहारे भीतर कह गहरे म4 वे पांच- रंग 'मल रहे है। उस Bबदं ु पर चत को एका* करो और एका* करो।
उससे हटो नह ,ं उस पर डटे रहो। मन को मत आने दो। रंग- के संबधं म4 हरे। लाल और पीले रंग- के बारे म4 वचार मत करो।
सोचो। ह मत। बस, उनह् 4 अपने भीतर 'मलते हुए देखो उनके बारे म4 वचार मत करो। अगर तुम वचार 0कया, तो मन ;वेश
कर गया। 'सफ रंग- के भर जाओ। उन रंग- को अपने भीतर 'मलने दो और तब उस 'मलन Bबदं ु पर अवधान को क4 V?त करो।
सोचो मत। एका*ता सोचना नह ं है। वचारणा नह ं है। मनन नह ं है।

तुम अगर सचमुच रंग- से भर जाओ और तुम एक इं?धनुष एक मोर ह बन जाओ और तुZहारा आकाश रंगमय हो जाए, तो
उसम4 तुZह4 एक सqदय-बोध होगा। गहरा, गहरा सqदय बोध। ले0कन उसके संबधं म4 वचार मत करो। यह मत कहो 0क यह
सुंदर है। वचारणा म4 मत चले जाओ। उस Bबदं ु पर एका* होओ जहां, ये रंग 'मल रहे है। और एका*ता। को बढ़ाते जाओ,
गहराते हो, तो कYपना नह ं Vटक सकती। वह वल न हो जाएगी।

संसार पहले ह वल न हो चुका है। 'सफ रंग रह गए थे। वे रंग तुZहार कYपना थे और वे काYप नक रंग एक Bबदं ु पर 'मल
रहे है। वह Bबदं ु भी काYप नक था। अब गहर एका*ता से वह Bबदं ु भी वल न हो जाएगा। अब तुम कहां रहोग।े अब तुम कहां
हो। तुम अपने क4 ? म4 ि9थत हो जाओगे।

इस 'लए सू कहता है: ‘’शूनय् म4 या द वार म4 0कसी Bबदं ू पर…….।

यह सहयोगी होगा। अगर तुम रंग- क. कYपना नह ं कर सकत,े तो द वार पर 0कसी Bबदं ु से काम चलेगा। काई भी चीज
एका*ता के वषय के Mप म4 ले लो। अगर वह आंतPरक हो, अंतस का हो तो बहे तर।

ले0कन 0फर दो तरह के >यि+ततव् होते है। जो लोग अंतमुखी है उनके 'लए उनके भीतर ह सब रंग- के 'मलने क. धारण
आसान है। ले0कन जो बVहमुखी लोग है वे भीतर क. धारणा नह ं बना सकत।े वे बाहर क. ह कYपना कर सकते है। उनक.
चत बाहर ह या ा करता है। वे भीतर नह ं ग त कर सकते उनके भीतर कोई आंतPरकता नह ं है।

अं*ेज दाश नक डे वड {मूम ने कहा है, जब भी म_ भीतर जाता हूं वहां मुझे कोई आ<मा नह ं 'मलती। जो भी 'मलता है वह
बाहर के ; तBबबं है—कोई वचार, कोई भाव। कभी 0कसी आंतPरकता का दशन नह ं होता। सदा बाहर जगत ह वहां
; तBबBं बत 'मलता है। यह kेषठ् तम बVहमुखी चत है। और डे वड {मूम सवा धक बVहमुखी चत वाल- से एक है।

इस'लए अगर तुZह4 भी तर कु छ धारणा के 'लए न 'मले और तुZहारा मन पूछे 0क यह आंतPरकता +या है। तो अfछा है 0क
द वार पर 0कसी Bबदं ु का ;योग करो।

लोग मेरे पास आते है और पूछते है 0क भीतर कै से जाया जाए। उनके 'लए यह सम9या है। +य-0क अगर तुम बVहगा'मता ह
जानते हो, तुZह4 अगर बाहर-बाहर ग त करना ह आता है। तो तुZहारे 'लए भीतर जाना कVठन होगा। और अगर तुम
बVहमुखी हो, तो भीतर इस Bबदं ु का ;योग मत करो। उसे बाहर करो। नतीजा वह होगा। द वार पर एक Bबदं ु बनाओ और उस
पर चत को एका* करो। ले0कन तब खुल आँख से एका*ता साधनी होगी। अगर तुम भीतर क4 ? बनाते हो, तो बदं आँखो से
एका*ता साधनी है।

द वार पर Bबदं ु बनाओ और उस पर एका* होओ। असल बात एका*ता के कारण घटती है। Bबदं ु के कारण नह ।ं बाहर है या
भीतर यक ;ासं गक नह ं है। यह तुम पर नभर है। अगर द वार पर देख रहे हो, एका* हो रहे हो, तो तब तक एका*ता साधो
जब तक वह Bबदं ु वल न न हो जाए।

इस बात को rयाल म4 रख लो: जब तक Bबदं ु वल न न हो जाए।‘’

पलक- को बंद मत करो। +य-0क उससे मन को 0फर ग त करने के 'लए जगह 'मल जाती है। इस'लए अपलक देखते रहो।
+य-0क पलक के गरने से मन वचार म4 संलगन् हो जाता है। पलक के गराने से अंतराल पैदा होता है। और एका*ता नषट्
हो जाती है। इस'लए पलक झपकना नह ं है।

तुमने बो धधम के वषय म4 सुना होगा। मनुषय् के पूरे इ तहास म4 जो बड़े Lयानी हुए है वह उनम4 से एक था। उसके संबधं म4
एक ;ी तकर कथा कह जाती है। वह बाहर क. 0कसी व9तु पर Lयान कर रहा था। उसक. आंख4 झपक जाती थी। और Lयान
टू ट-टू ट जाता था। तो उसने अपनी पलक- को उखाड़कर फ4 क Vदया। बहुत संुदर कथा है 0क उसने अपनी पलक- को उखाड़कर
फ4 क Vदया और 0फर Lयान करना शुM 0कया। कु छ हpत- के बाद उसने देखा 0क जहां उसक. पलक4 गर थी उस 9थान पर
कोई पौधे उग आए थे।

यह घटना चीन के एक पहाड़ पर घVटत हुई थी। उस पहाड़ का नाम टा था। इस'लए जो पौधे वहां उग आए थे उनका नाम ट
पडा। और यह कारण है 0क चाय जागरण म4 सहयोगी होती है। इस'लए जब तुZहार पलक4 झपकने लग4 और तुम नींद म4
उतरने लगो, तो एक ]याल चाय पी लो। वे बो धधम क. पलक4 है। इसी वजह से झने संत चाय को प व मानते है। चाय कोई
मामूल चीज नह ं है। वह प व है, बो धधम क. आँख क. पलक है।

जापान म4 तो वे चायोतस् व करते है। ;<येक पPरवार म4 एक चायघर होता है। जहां धा'मक अनुOठान के साथ चाय पी जाती
है। यह प व है। और बहुत ह Lयान पूण मु?ा म4 चाय पी जाती है। जापान ने चाय के इद- गद बड़े सुंदर अनुOठान न'मत
0कये है। वे चाय घर म4 ऐसे ;वशे करते है जैसे वे 0कसी मंVदर म4 ;वेश करते हो। तब चाय तैयार क. जाएगी। और हरेक
>यि+त मौन होकर बैठे गा। और समोवार के उबलते सव् र को सुनेगा। उबलती चाय का, उसके वाषप् का गीत सब सुन4ग।े वह
कोई अदना व9तु नह ं है। बो धधम क. आँख क. पलक है। और चूं0क बो धधम खुल आंख- से जागने क. को'शश म4 लगा था।
इस'लए चाय सहयोगी है। और चंू0क यह कथा टा परव् त पर घVटत हुई इस'लए वह ट कहलाती है।

सच हो या न हो, यह कहानी संुदर है। अगर तुम बाहर एका*ता साध रहे हो, तो अपलक देखना जMर है। समझो 0क तुZहारे
पलक4 नह ं है। पलक- को उखाड़ फ4 कने का यह अथ है। तुZह4 आंख4 तो है, ले0कन उनके ऊपर झपकने को पलक4 नह ं है। और
तब एका*ता साधो जब तक Bबदं ु वल न नह ं हो जाता।

Bबदं ु वल न हो जाता है। अगर तुम लगे रहे, अगर तुमने संकलप् के साथ मन को चलायमान नह ं होने Vदया। तो Bबदं ु वल न
हो जाता है। अगर तुम उस Bबदं ु पर एका* थे और तुZहारे 'लए संसार म4 इस Bबदं ु के अलावा कु छ भी नह ं था। अगर सारा
संसार पहले ह वल न हो चुका था और वह ं Bबदं ु बचा था और यह Bबदं ु भी वदा हो गया। तो अब चते ना कह ं और ग त नह ं
कर सकती। उसके 'लए जाने को कह ं न रहा; सारे आयाम बदं हो गए। अब चत अपने ऊपर फ4 क Vदया जाता है। अब चते ना
अपने आप म4 लौट आती है। और तब तुम क4 ? म4 ; वषट् हो गए।

तो चाहे भीतर हो या बाहर, तब तक एका*ता साधो जब तक Bबदं ु वसिजत नह ं होता। यह Bबदं ु दो कारण- से वसिजत
होगा। अगर वह भीतर है, तो काYप नक है और इस'लए वल न हो जाएगा। और अगर यह बाहर है, तो वह काYप नक नह ं
असल है। तुमने द वार पर Bबदं ु बनाया है और उस पर अवधान को एका* 0कया है। तो यह Bबदं ु +य- वल न होगा। भीतर के
Bबदं ु का वल न होना तो समझा जा सकता है। क्य-0क वह वहां था नह ।ं तुमने उसे किYपत कर 'लया था। ले0कन द वार पर
तो वह है। वह +य- वल न होगा।

वह एक वशषे कारण से वल न होता है। अगर तुम 0कसी Bबदं ु पर चत को एका* करते हो, तो यथाथ म4 वह Bबदं ु वसिजत
नह ं होता है। तुZहारा मन ह वसिजत होता है। अगर तुम 0कसी ब{म Bबदं ु पर एका* हो रहे हो, तो मन क. ग त बदं हो जाती
है। और मन ग त के Bबना जी नह ं सकता। वह Mक जाता है। वह मर जाता है। और जब मन Mक जाता है। तुम बाहर क.
0कसी भी चीज के साथ संबं धत नह ं हो सकते हो। तब अचानक सभी सेतु टू ट जाते है, +य-0क मन ह तो सेतु है।

जब तुम द वार पर, 0कसी Bबदं ु पर मन को एका* कर रहे हो, तो तुZहारा मन +या करता है। वह नरंतर तुमसे Bबदं ु तक और
Bबदं ु से तुम तक उछलकू द करता रहता है। एक सतत उछलकू द क. ;02या चलती है। जब मन वच'लत होता है, तो तुम Bबदं ु
को नह ं देख सकते। +य-0क तुम यथाथ आँख म4 से नह ं मन से और आँख से Bबदं ु को देखते हो। अगर मन वहां न रहे, तो
आंख4 काम नह ं कर सकती। तुम द वार को घूरते रह सकते हो। ले0कन Bबदं ु नह ं Vदखाई पड़गे ा। +य-0क मन न रहा, सेतु टू ट
गया। Bबदं ु तो सच है, वह है। इस'लए जब मन लौट आएगा। तो 0फर उसे देख सकोग।े ले0कन अभी नह ं देख सकते, अभी
तुम बाहर ग त नह ं कर सकते। अचानक तुम अपने क4 Cर पर हो।

यह क4 ?9थता तुZह4 तुZहारे अि9ततव् गत आधार के ; त जागMक बना देगी। तब तुम जान-गे 0क कहां से तुम अि9ततव् के
साथ संयुक्त हो, जुड़े हो। तुZहारे भीतर ह वह Bबदं ु है जो समसत् अि9ततव् के साथ जुड़ा हुआ है। जो उसके साथ एक है। और
जब एक बार इस क4 ? को जान गए। तो तुम घर आ गए। तब यह संसार परदेश नह ं रहा। और तुम परदेशी नह ं रहे। तब जान
गए। तो तुम घर आ गए। तब तुम संसार के हो गए। तब 0कसी संघष क., 0कसी लड़ाई क. जMरत नह ं रह । तब तुZहारे और
अि9ततव् के बीच श तु ा न रह , अि9ततव् तुZहार मां हो गई।

यह अि9ततव् ह है जो तुZहारे भीतर ; वषट् हुआ और बोधपूण हुआ है। यह अि9ततव् ह है जो तुZहारे भीतर ;9फु Vटत हुआ
है। यह अनुभू त, यह ;ती त, यह घटना और 0फर दःु ख नह ं रहेगा। तब आनंद कोई घटना नह ं है—ऐसी घटना, जो आती है।
और चल जाती है। तब आनंद तुZहारा 9वभाव है। जब कोई अपने क4 ? म4 ि9थत होता है। तो आनंद 9वाभा वक है। तब कोई
आनंदपूण हो जाता है।
0फर धीरे-धीरे उसे यह बोध भी जाता रहता है 0क वह आनंदपूण है। +य-0क बोध के 'लए वपर त का होना जMर है। अगर
तुम दःु खी हो, तो आनंVदत होने पर तुZह4 आनंद क. अनुभू त होगी। ले0कन जब दःु ख नह ं है। तो धीरे-धीरे तुम दःु ख को पूर
तरह भूल जाते हो। और तब तुम अपने आनंद को भी भूल जाते हो। और जब तुम अपने आनंद को भी भूलते हो तभी तुम सच
म4 आनंVदत हो। तब वह 9वाभा वक है। जैसे तारे चमकते है, नVदया बहती है। वसै े ह तुम आनंदपणू हो। तुZहारा होना ह
आनंदमय है। तब यह कोई घटना नह ं है। तब तुम ह आनंद हो।
ओशो
व ान भैरव तं
(तं -सू —भाग-1)
)वचन-9

तं -सू — व:ध-14

दसू रे सू के साथ भी यह% तरक"ब, वह% वै ा9नक आधार, यह% )6!या काम करती है:

ShivaParvati तं -सू — व:ध-14 ( व ान भैरव तं ; ओशो

अपने पूरे अवधान को अपने मेVदंड के मधय् म0 कमल-तंतु सी कोमल Jनायु म0 िJथत करो। और इसमे पातं (रत हो जाओ।
इस सू के 'लए, Lयान क. इस व ध के 'लए तुZह4 अपनी आंखे बंद कर लेनी चाVहए। और अपने मेtदंड को, अपनी र ढ़ क.
ह„डी को देखना चाVहए, देखने का भाव करना चाVहए। अfछा हो 0क 0कसी शर र शा9 क. पसु त् क म4 या 0कसी
च0क<सालय या मेWडकल कालेज म4 जाकर शर र क. संरचना को देखो-समझ लो, तब आंखे बदं करो और मेtदंड पर


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