1 अजंता राजभाषा िवभाग राजभाषा ͪवभाग मÚय रेल भ ुसावल वष - 2023 ᭅ
2 अजंता राजभाषा िवभाग ®ीमती इित पाÁडेय मंडल रेल ÿबंधक Smt. Iti Pandey Divisional Railway Manager मÅ य रेल, भुसावल Central Railway,Bhusawal ‘संदशे ’ यह अ यंत हषªका िवषय हैिक भुसावल मंडल पर मंडल कì गहृ पिýका “अजंता” का ÿकाशन िकया जा रहा ह।ै पिýकाएं पाठकŌ म¤लेखन łिच को िवकिसत करनेम¤ सहायक िसÅद होती ह।ै ÿकाशन का मु´ य उĥेÔय िहंदी के ÿचार-ÿसार के साथ-साथ रेल किमªयŌ कì रचना मक, सजृ ना मक ÿितभाओं को ÿो साहन एवं ÿगित के पथ पर नए आयाम के साथ जोड़नेका एक ÿयास ह।ैआज िहंदी का कायª±ेý भारत म¤ ही सीिमत न हो कर िवÔ व Ö तर पर भी Ó यापक हो गया ह।ैलोगŌ केमन म¤ इस भाषा केÿित अगाध ÿेम बढ़ रहा ह।ै मुझेआशा हैिक “अजंता” पिýका म¤शािमल राजभाषा सेसंबंिधत जानकारी एवं अÆ य मह वपणूª जानकारी सेसभी पाठकŌ को लाभ होगा। म पि § ýका केसफल ÿकाशन हेतुसंपादक मंडल तथा पिýका ÿकाशन सेजुड़ेसभी कमªचाåरयŌ को म§अपनी ओर सेहािदªक बधाई देती हóं। हािदªक शुभकामनाओंसिहत। ( इित पाÁडेय ) मंडल रेल ÿबंधक मÅ य रेल, भुसावल
3 अजंता राजभाषा िवभाग सुनील कुमार सुमन अपर मंडल रेल ÿबंधक (ÿशासन) Sunil Kumar Suman Addl. Divi. Railway Manager (Admin.) मÅ य रेल, भुसावल Central Railway,Bhusawal ‘संदशे ’ मुझेयह सिूचत करतेहòए यह ÿसÆनता हो रही हैिक भुसावल मंडल Ĭारा राजभाषा िवभाग कì गहृ पिýका अजंता का ÿकाशन िकया जा रहा ह।ै मंडल पर महाÿबंधक महोदय के वािषªक िनरी±ण केअवसर पर िहंदी केसफल ÿचार एवं ÿसार तथा पिýका ÿकाशन के साथ ही राजभाषा ÿदशªनी का आयोजन िकया गया। इससेअिधकाåरयŌ एवं कमªचाåरयŌ म¤ राजभाषा िहंदी को ÿयोग-ÿसार केिलए एक पोषक वातावरण बन गया ह।ैिहंदी हमारी राजभाषा हैइसका ÿयोग-ÿसार िकसी एक Ó यिĉ या िकसी एक िवभाग सेसंभव नहé ह।ैयह एक ऐसी भाषा हैिजसेबहòसं´ य कमªचारी समझतेह। § मुझेपरूा िवÔवास हैिक यह पिýका पाठकŌ केिलए लाभÿद िसÅ द होगी। म मंगल कामना करता § हóं िक “अजंता” अपनेउĥेशŌ म¤सफल रहेगी। म पि § ýका ÿकाशन सेजुड़ेअिधकारी एवं कमªचाåरयŌ को पिýका केसफल ÿकाशन हेतुहािदªक बधाई देता हóं। ( सुनील कुमार सुमन ) अपर मंडल रेल ÿबंधक (ÿशासन) मÅ य रेल, भुसावल
4 अजंता राजभाषा िवभाग सुनील शमाª राजभाषा अिधकारी Suneel Sharma Rajbhasha Adhikari मÅ य रेल, भुसावल Central Railway,Bhusawal ‘संदशे ’ अजंता पिýका का संÖ करण आपके हाथ म¤ सŏपतेहòए मुझेअपार हषªहो रहा ह।ैअिधकाåरयŌ एवं कमªचाåरयŌ तथा उनके पåरवारजनŌ के भाषामयी ²ान को बढ़ानेके उĥेÔय सेराजभाषा पिýका का ÿकाशन िकया जाता ह।ैराजभाषा िहंदी को परूी तरह लागूकरनेकेिलए अनुकूल वातावरण बनानेम¤ राजभाषा पिýका सश³ त माÅ यम ह।ैइसी को Å यान म¤रखतेहòए मंडल कì ओर सेपिýका का ÿकाशन िनरंतर करनेका ÿयास िकया जा रहा ह।ै आज राजभाषा िहंदी संपणूªदेश म¤ संचार का माÅ यम बनी हòई हैऔर रेल म¤तो इसकेिबना कायª संपादन करना किठन-सा हो गया ह।ै सचूना øांित केदौर म¤ िहंदी अपना उिचत Ö थान ÿाÈ त करनेके िलए ŀढ़ łप सेखड़ी ह।ैइसकì पणूªत: व²ै ािनक िलिप इसकì ÿबल सहयोगी ह।ैयह ÿसÆ नता कì बात हैिक िहंदी कì लोकिÿयता िवÔ वÖ तर पर बढ़ रही ह।ै भुसावल मंडल नेराजभाषा के ÿयोग-ÿसार म¤ जागłकता तो ह, साथ- ै साथ िनरं तर साथªक ÿयासŌ से शत-ÿितशत लà यŌ को ÿाÈ त करनेम¤ सफलता ÿाÈ त कर ली ह।ै ÿÖतुत अंक आपको कैसा लगा अपनी ÿितिøया सेहम¤अवगत करानेका कĶ कर¤ तािक भिवÕ य म¤उसेऔर अिधक बेहतर बनानेका ÿयास िकया जा सके। अंत म¤ म उन सभी रचनाकार § Ō के ÿित कृत²ता ²ािपत करता हóं िजÆ हŌनेअपनी रचनाओंसेपिýका कì गåरमा बढ़ाई ह।ै शुभकामनाओंसिहत। ( सुनील शमाª ) राजभाषा अिधकारी(ÿभारी) मÅ य रेल, भुसावल
5 अजंता राजभाषा िवभाग अजंता मÅय रेल राजभाषा िवभाग भुसावल मंडल संर±ण : ®ीमती इित पाÁडये मंडल रेल ÿबंधक मागªदशªन : ®ी सुनील कुमार सुमन अपर मंडल रेल ÿबंधक एवं अपर म´ु य राजभाषा अिधकारी संपादक : ®ी सुनील शमाª मंडल िसगनल एवं दूरसंचार इंजीिनयर एवं राजभाषा अिधकारी (ÿभारी ) सहयोग : ®ी लीलाधर िसंह, वåरķ अनवुादक ®ी एन.पी.सोनार, किनķ अनवुादक ®ी रमशे कुमार यादव किनķ अनवुादक संपकª : राजभाषा अिधकारी, राजभाषा िवभाग, मंडल रेल ÿबंधक कायाªलय, मÅय रेल, भसु ावल. फोन : 011– 55015 ई-मले पता : [email protected] इस अंक म¤ ÿकािशत रचनाओं म¤ लखे कŌ और किवयŌ के अपन-ेअपने िवचार ह।§उसेभारत सरकार अथवा रेल मंýालय का िवचार न समझा जाए। रचना कì मौिलकता के िलए रचनाकार ÖवयंिजÌमेदार ह।ै ø. सं. रचनाएं रचनाकार (सवª®ी) प. ृ सं. 1. िहंदी केÿयोग को कैसेबढ़ाएं लीलाधर िसंह 9 2. याद¤ ®ीमती नहेा जनै 11 3. सतीश कौिशक (एक मशहóर िनदशक और कलाकार ¥ ) िकरण मयूर जोशी 12 4. कोरोना वाइरस 2019 मयूर जोशी 14 5. रेल कì अनसुनी िवशषेताएं एन. पी. सोनार 15 6. सोशल मीिडया और मानवीय Öवभाव नहेा िनितन सोनार 22 7. मÅय रेलवेभसु ावल मंडल ²ानĵे र गोकुळ िपसे 24 8. िमशन जीरो सुसाइड भावना अजय झा 26 9. िहंदी केÿयोग केिलए वषª2023- 24 का वािषªक कायªøम राजभाषा िवभाग 28 10. राजभाषा ÿijो°री राजभाषा िवभाग 31
6 अजंता राजभाषा िवभाग ˢतंũता िदवस समारोह की कु छ िविशʿ झलिकयां
7 अजंता राजभाषा िवभाग राजभाषा सɑाह
8 अजंता राजभाषा िवभाग िहȽी कायŊशाला
9 अजंता राजभाषा िवभाग िहंदी के Ůयोग को कै से बढ़ाएं रेल कायाŊलयोंमŐ सरकारी कामकाज मŐ िहंदी के Ůयोग करने के िलए समय-समय पर िविभɄ Ůकार के आदेश िनकाले गए हœ, इन आदेशोंका कायाŊलय मŐ पयाŊɑ ŝप सेअनुपालन नहींहो पाता है तो अिधकारी के मन मŐ िनराशा का भाव उȋɄ होना ˢाभािवक है इस İ̾थित का िनवारण कु छ और आदेश िनकाल देनेसेनहीं होगा बİʋ इस Ůकार के मानिसक अवरोध है िजनके कारण राजभाषा की Ůगित संतोषजनक ŝप मŐिदखाई नहींपड़ती तथा मनोवैǒािनक पहलुओं को भी ȯान मŐ रखने की आवʴकता है। कभी-कभी िहंदी मŐ काम करने का िनʮय करने वाले ʩİƅ यह संकʙ लेते हœ िक वह अपना शत Ůितशत काम िहंदी मŐ ही करŐगे ऐसा संकʙ करना कोई बुरी बात नहीं है, उस संकʙ को िनभाना असंभव भी नहींहैिहंदी मŐ सभी Ůकार का तथा सभी िवषयों का काम आसानी सेिकया जा सकता है िफर भी कु छ ऐसी मामले हो सकते हœ िजɎŐ िहंदी मŐ िनपटाने मŐ कु छ किठनाइयां िदखाई पड़े, हो सकता है िक िलखने वाले को कोई किठनाई न हो िकं तु िजन-िजन अिधकाįरयों के पास मसौदा Ůˑुत होने पड़तŐ हœ यिद उनमŐ कु छ को किठनाई महसूस होती है तो ऐसी İ̾थित मŐ अपेƗाकृत थोड़ेही मामलों मŐ उȋɄ होती है। ŝटीन Ůकार के कामों मŐ िहंदी मŐ ही हो सकती है और छोटी-छोटी िटɔिणयाँ तथा छोटे-छोटे पũ भी मूल ŝप से िहंदी मŐ िलखे जा सकते हœ, इस तरह से लगभग 80 से 90% काम आसानी से िहंदी मŐ हो सकता है। िजन िवषयोंमŐ ऊपर के अिधकाįरयों को िहंदी मŐ कोई िवशेष किठनाइयां िदखाई पड़े तो कु छ समय अंŤेजी मŐŮˑुत िकया जा सकता है और धीरे-धीरे जब अिधकारीगण िविभɄ िवषयों की िटɔिणयाँ िहंदी मŐŮाɑ करने के अɷास हो जाएं गे तब अɊ कायŘ मŐ भी िहंदी का ही Ůयोग करने मŐकोई किठनाई नहींिदखाई पड़ेगी। वतŊमान मŐ टेƋोलॉजी के Ůयोग से आज 100% कायŊ कं ɗूटरों Ȫारा िकया जाता है िजससे कई िवषयोंके पũ अनेक ʩİƅयों को या कायाŊलय को लगभग एक जैसे पũ भेजे जाते हœ। यहां िवशेष शɨ का Ůयोग हो रहा हो तो दूसरोंकी सुिवधा के िलए ऐसेशɨोंके आगेउनके अंŤेजी पयाŊय िलखना चािहए। िहंदी मŐ इन मानक मसौदे का उपयोग अिधकतम िकया जाना चािहए । इनका उपयोग करने से सभी कायाŊलय मŐ िहंदी के Ůयोग की उपयोिगता काफी बढ़ सकती है िजन फाइलों पर अभी तक कारŊवाई अंŤेजी मŐ होती रही है वहां सामाɊतः उन पर आगे की कारŊवाई भी अंŤेजी मŐ जारी रखी जाती है नई फाइल पर इसिलए िहंदी मŐनहींिलखा जाता िक यिद उस पर आगे चलकर कभी िकसी िवशेष İ̾थित मŐ अंŤेजी िलखने की आवʴकता पड़ गई तब Ɛा िकया जाएगा । इसमŐ दुिवधा मŐपड़नेकी कोई बात नहींहैिकसी फाइल मŐ यिद अब तक कारŊवाई अंŤेजी मŐ होती रही है तो उस पर आगे की कारŊवाई अब िहंदी मŐ की जा सकती है और करनी चािहए यिद आगे िकसी िवशेष İ̾थित मŐ अंŤेजी मŐ िलखने का आवʴकता पड़े तो उस समय उतना काम अंŤेजी मŐ कर िलया जाए और पुनः आगे की कारŊवाई पर िहंदी मŐ की जाए कमŊचाįरयोंको यह समझा िदया जाए िक इस Ůकार एक ही फाइल पर िहंदी और अंŤेजी दोनों का िमली -जुली भाषा रह सकता है एक बार िहंदी मŐ काम करने की शुŜआत कीिजए और मन मŐ िहंदी मŐ काम करने की बात ठान लीिजए तो अवʴ ही िहंदी के मागŊ िनरंतर आगे बढ़ती जाएगी। कायाŊलय मŐ ऐसे कमŊचारी भी िमलते हœ जो उȖाहपूवŊक िहंदी मŐ कायŊ करना चाहते हœ िकं तु शुŜआत करते हœकिठन मामलों सेजो तकनीकी या िविधक Ůकृ ित के होते हœ। वह सोचते हœ िक यिद िहंदी िलखने की शुŜआत करनी हैतो वह साधारण मामलोंसेƐोंकी जाए इसेिहंदी का महȕ घटेगा वह िहंदी का महȕ बढ़ाने और अपना पांिडȑ िदखाने के िलए सवŊŮथम पेचीदा वाले मामले को चुन ले बैठते हœ । िजन पर काफी लंबा िलखने की आवʴकता पड़ती है और िफर उनकी
10 अजंता राजभाषा िवभाग कोिशश होती है िक उसमŐ िहंदी के अलावा अɊ िकसी भी भाषा का कोई शɨ न आने दे चाहे वह शɨ मातृभाषा की हो या िफर बोलचाल की भाषा हो राǛों की राजभाषा Ɛों न आ गया हो इस İ̾थित मŐ वे अपना अिधक समय शɨोंके पयाŊय ढूंढने मŐ लगा देते हœ िजससे उनकी ˢाभािवक ŝप से सोचने की ŮिŢया मŐŜकावट पड़ती है वाˑव मŐ वह अंŤेजी मŐ सोचकर उसका अनुवाद िहंदी मŐ करने का Ůयास करते हœ, उनकी यह भाषा अनेक अिधकाįरयों या सािथयों के बीच समझ मŐनहीं आती है उस सभी को परेशानी होती है यिद शुŝ मŐही आसान िवषयोंसेकी जाए और अɊ भाषाओं के जो शɨ खूब Ůचिलत हœ उɎŐ अपने से परहेज न िकया जाए तो सभी कायाŊलय मŐ काफी काम मूल ŝप से िहंदी मŐ िकया जा सकता है। कई बार कमŊचारी सोचते हœ िक पहले उनके उDŽ अिधकारी िहंदी मŐ काम शुŝ करŐ और अिधकारी सोचते हœ िक यह शुŜआत नीचे से हो वाˑव मŐ िहंदी मŐ काम की शुŜआत सभी ˑरोंपर सामाɊ ŝप से होनी चािहए चाहे ऊपर से भी और नीचे से भी। अिधकांशत पũों के मसौदेनीचेसे तैयार िकए जाते हœ यिद फाइल पर छोटे-छोटे िटɔिणयां नीचे ˑर से िहंदी मŐ िलखी जाए तो ऊपर के अिधकारी उन पर आदेश आमतौर से िहंदी मŐ ही देते हœ हां ऊपर के अिधकारी को भी पहल करनी चािहए उनकी ओर से यिद थोड़ी भी पंİƅयां िहंदी मŐ िलखी जाए तो उसे नीचे की कमŊचाįरयों को ŮोȖािहत िमलता है फाइल पर यिद नीचे से अंŤेजी मŐ िलखी गई है तो ऊपर का अिधकारी उसे पर अपनी िटɔिणयां या आदेश िहंदी मŐ िलख सकता है िहंदी मŐ काम करने की पहल करने के अवसर पर हर संभव यह Ůयास होना चािहए िक अिधकांश कायŊ िहंदी मŐ िकया जाए जैसा िक पहले भी कहा गया है यिद िकसी िवभाग के अिधकारी या कमŊचारी अनुवाद पर ही आिŵत रहे तो वहां िहंदी का Ůयोग बढ़ पाना किठन होगा Ůयास यही होना चािहए िक अिधकतम, ʩİƅ अपना अिधकतम कायŊ मूल ŝप से िहंदी मŐ ही करŐ। लीलाधर िसंह वįरʿ अनुवादक
11 अजंता राजभाषा िवभाग यादŐ कु छ याद Ɛोंनहींआता, कोई पास Ɛोंनहींआता Ɛूँ है खुमार हर व˫ उसका, मुझे अब करार Ɛोंनहींआता| तेरी कमी है हर सांस मŐ, इस सवाल का जवाब नहींआता घूम रहा šँ राˑे पर , सफ़र मŐ खाȏा कभी नहींआता| मœने देखा है जाते Šए उसे, रोकना उसे मुझे Ɛोंनहींआता व˫ बीत जाता है खुमारी मŐ, न बुलाओ तो कोई पलट कर Ɛूँनहींआता| तɎाई है तो करो दोˑी उससे, उसके िबना शाम मŐमजा नहींआता पहले रहा जो अब ख़ȏ Šआ , गुजरा Šआ व˫ दुवारा वापस नहींआता| चल रहा है जो वो देखŐ तो देखे कै से , कोई Ŝलाकर िफर हंसाने Ɛोंनहींआता यिद छोड़कर चले जाते हœ वो हर दफा, कʆƅ सारे तोफे वो जाते Šए जलाकर Ɛोंनहींजाता| ŵीमती नेहा जैन ŵी वैभव िसंघई( Sr.ALP BSL) की पȉी
12 अजंता राजभाषा िवभाग सतीश कौिशक (एक मशšर िनदőशक और कलाकार) सतीश जी के जɉ ̾थल का नाम था महŐūगढ़, हįरयाणा, जहां पर था इनका बŠत ही सुंदर और ɗारा सा आिशयाना । सतीश जी की पȉी का नाम था शिश, िजनके साथ वे रहते थे बŠत ही हसी खुशी । िमːर इंिडया िफʝ मे ये बने थे कै लŐडर, और इनकी कलाकारी के आगे िफʝ के सभी िकरदारोंनेकर िदया था सरŐडर । िफʝ दीवाना मˑाना मŐ ये बने थे पɔू पेजर, और इɎेदेखकर िकसी की नहींहटी इनपर सेनजर । राम लखन िफʝ मे ये बने थे कांशीराम, इस िफʝ मे बŠत ही सुंदर िकया इɎोने काम । बतौर िनदőशक इɎोने एक िफʝ बनाई थी “तेरे नाम”, और उस िफʝ का आज भी लोग लेते है नाम, सुबह और शाम । िफʝ िनमाŊता, लेखक और िनदőशक सभी Ɨेũोंमेरहेआप, और इन सभी Ɨेũोंमेआपनेछोड़ी अपनी छाप ।
13 अजंता राजभाषा िवभाग आपने हर िफʝ मŐ अलग-अलग िकरदार िनभाए, आपके सभी िकरदार हमŐभायेऔर सभी िकरदारोंमेआप पूरी तरह सेछाये। हर कोई चाहता है है िक, सतीश जी की तरह उनका भी हो नाम, सतीश जी आज हमारेबीच नहींहœ , लेिकन सतीश जी को आज पुरी दुिनया करती है सलाम सतीश जी आप इस दुिनया सेगए है, लेिकन हमारेिदलो सेकभी नहींजाएंगे, और आपके Ȫारा िफʝोंमŐ िनभाए गए िकरदार हमे बŠत याद आएं गे । सतीश जी की िफʝ के हर Ɨेũ मŐ उपलİɩयोंको देखर हर ʩİƅ उनको याद करेगा, भले ही सतीश जी आज इस दुिनया मŐनहींहै, लेिकन उनका नाम इितहास मŐ अमर रहेगा । िकरण मयूर जोशी
14 अजंता राजभाषा िवभाग कोरोना वाइरस 2019 भारत मे 100 वषŖ के बाद आई एक महामारी, िजसके आगे पूरी दुिनया कु छ समय के िलए हारी । महामारी का नाम था कोरोना वाइरस या कहे कोिवड 19 इस महामारी ने बŠत से लोगो की जाने ली िछन । कोिवड 19 महामारी के कारण कु छ समय के िलए पूरी दुिनया हो गई थी थम और बŠत से लोगी की िजंदगी मे ला िदया था इसने गम । इस महामारी के समय एक नारा बŠत चला था, पहिनए माˋ और बनाइये दो गज की दू री । कु छ लोगो के िलए यह बना िजंदगी को बचाने का तरीका लेिकन कु छ के िलए बन गया था मजबूरी । महामारी के समय चाहे हो दुकान, तीथŊ̾थल या पयŊटन ̾थल हर जगह लग गए थे ताले, लेिकन सभी नेठान रखा था िक वह नहींइससेहार माननेवाले। इस महामारी सेकोई नहींबच पाया चाहेवह बDŽा हो, बुढ़ा हो या हो जवान, इस महामारी ने ली बŠत से लोगो की जान, लेिकन िफर भी इसे हराने के िलए हर ʩİƅ खड़ा था सीना तान । इस महामारी मे भारतीय रेलवे ने नागįरकोंकी जान बचानेके िलए एक रेल चलाई िजसका नाम था ऑİƛजन एƟेस, भारतीय रेलवे के इस फै सले से भारत का हर नागįरक हो गया इंŮेस । इस महामारी से लोगो की जान बचाने के िलए भारत ने बनाई Covishieldऔर Covaxin िजससे बच गई बŠत से लोगो की जान और बज गई इस महामारी की बीन । इस महामारी के समय बŠत से लोग आगे आए िजɎे नाम िदया गया कोरोना वौįरयर , इन कोरोना वौįरयर ने बचा िलया बŠत से लोगो का कैįरयर । इस महामारी ने दुिनया के Ůȑेक नागįरक को अपनी चपेट मे िलया और िकया उɎे तंग, लेिकन महामारी का सभी नागįरकोंनेडटकर सामना िकया और जीत ली इस महामारी सेजंग । *******धɊवाद ******** मयूर जोशी टŌैक मŐटेनर III संरƗा कायाŊलय
15 अजंता राजभाषा िवभाग :: रेल की अनसुनी िवशेषताएं :: भारत मŐरेलोंकी शुŜआत 16 अŮैल 1853 मŐअंŤेजोंȪारा अपनी Ůशासिनक सुिवधा के िलए की गयी थी परंतु आज भारत के पįरवहन का एक सˑा और मुƥ साधन बन चुकी है। सन् 1853 मŐ शुŝआत जब पहली टŌेन िसंध, सािहब और सुलतान इंजनोंके साथ मुंबई सेठाणेतक चली थी। वह भारतीय रेल आज एक िवशाल नेटवकŊ मŐ िवकिसत हो चुका है। भारतीय रेल दुिनया का दुसरा दू सरा और एिशया का सबसे बड़ा रेल नेटवकŊ है। यह 150 वषŘ से भी अिधक समय तक भारत के पįरवहन Ɨेũ का मुƥ संघटक रहा है। यह न के वल देश की मूल संरचनाȏक आवʴकताओं को पूरा करने मŐ महȕपूणŊ भूिमका िनभाता है अिपतु िबखरे Šए Ɨेũों को एक साथ जोड़नेमŐ और देश की रा̽ टŌीय अखंडता का भी संवधŊन करता है। राʼŌीय आपात İ̾थित के दौरान आपदाŤˑ ƗेũोंमŐ राहत सामŤी पŠंचाने मŐ भारतीय रेलवे अŤणी रहा है। अथŊʩ̾था मŐ अंतरदेशीय पįरवहन का रेल एक मुƥ माȯम है। बड़ी माũा मŐ वˑुओंको लानेलेजानेतथा लंबी दूरी की याũा के िलए अȑंत उपयुƅ है। यह देश की जीवन धारा है और इसके सामािजक संˋृ ित का िवकास करने मŐ इसका महȕपूणŊ योगदान है। सु̾थािपत रेल Ůणाली देश के दू र̾थ ̾थानोंसेलोगोंको एक साथ िमलाती हैऔर ʩापार करना, ̊ʴ दशŊन, तीथŊ और िशƗा संभव बनाती है। यह जीवन ˑर सुधारती है और इस Ůकार से उȨोग और कृ िष का िवकास करने मŐ सहायता करता है। रेलवे पįरवहन यािũयों और माल पįरवहन के िलए इस के Ȫारा बनाई गई िवशेष रेल पटįरयों पर चलती है। दुिनया का पहला रेलवे का सबूत ई.स.पूवŊ छठी शताɨी मŐŤीस मŐ पाया जाता है पर तब वाहनों के िलए इंजन के अलावा मानव का उपयोग िकया जाता था। सोलहवींसदी मŐ नैरो गेज रेलवेका कोयला खदानों सेकोयला िनकालनेहेतुउपयोग िकया जाता था। िजसमŐ लकड़ी की रेल पटįरयोंका उपयोग िकया जाता था। अठारहवींसदी मŐ इंƸœड मŐ भाप के इंजन का आिवʺार िकया गया और खोज होने के बाद रेल के िलए बŠत बडी Ţांित Šई। िजसका योगदान औȨोिगक Ţांित मŐ बŠत ही महȕपूणŊ था। रेलवे पįरवहन के कारण माल पįरवहन सˑा, तेज और सुलभ हो गया है। सन 1830 मŐ दुिनया की पहली रेल मैनचेːर और िलवरपूल ːेशनोंके बीच चली थी। नई ŮौȨोिगकी अनुसंधान और नवनवीन तंũǒान के कारण दुिनया मŐभारी और वजनदार भाप के इंजनोंका उपयोग लगभग पूरी तरह से वतŊमान िवʷ से कम ही हो गया है। आज की रेल के इंजन िबजली या डीजल पर मुƥ ŝप से चलाए जा रहŐ है। कालानुŜप ˙ीड टŌेनों की गित बढ़ रही है। दुिनया के कई देशों मŐ इसका Ůयोग भी हो रहा है िजसमŐ से जापान जैसे देश के िशंकांसेन और जमŊनी की इंटरिसटी एƛŮेस के िलए अलग से रेल पटįरयोंको आरिƗत िकया गया है। िवʷ मŐ कु छ ऎसे देश भी हœ, जो अपने अजीबो-गरीब रेलवे टŌैक की वजह से सुİखŊयोंमŐ रहते हœ। इनमŐ से कोई रेलवे टŌैक भरे बाजार से होकर गुजरता है, तो कु छ रेलवे टŌैक हवाई अǭे, गहरे टनल, समुū और निदयों मŐ बने अजीबो-गरीब िŰज, टेढे-मेढेपहाडों सेहोकर गुजरतŐ हœ। पहली नजर मŐ इनको देखकर इनकी िवʷसनीयता पर यकीन करना मुİʭल हो जाता है। लेिकन आपको बता दŐ िक इनके अनोखेपन के कारण ये रेलवे टŌैक लोगोंका ȯान अपनी ओर खूब खीचं तेहœ। शायद
16 अजंता राजभाषा िवभाग यही वजह हैिक कई लोगों मŐ इन टŌैƛ को देखने की उȖुकता बनी रहती है। इस लेख मŐ हम आपको दुिनया के कु छ ऐसे ही अमेिजंग रेलवे टŌैक के बारे मŐ बताने जा रहे हœ :- 1. नेिपयर रेलवे िज˜ॉनŊ – Ɋूजीलœड (Napier- Gisborne Railway, New Zealand ) नेिपयर से िज˜ॉनŊ का रेलवे टŌैक अनूठा है। यहां पर ɘेन और टŌेन का एक साथ संचालन होता है। Ɛोिंक यह िज˜ॉनŊ हवाई अǭे के मुƥ रनवे से होकर गुजरता है। यह Ɋूजीलœड के नाथŊ आइलœड के पास İ̾थत है। टŌेनों को इस रनवेपर बनी पटरी सेगुजरनेसेपहलेएयर टŌैिफक कं टŌोल ŝम से अनुमित लेनी होती है। िदन भर ɘेन की लœिडंग और टŌेन का संचालन अिधकाįरयो के िलए बŠत मुİʭल भरा काम रहता है। इस एअरपोटŊ से 60 से अिधक घरेलु उड़ाने संचािलत होती है और इसमŐ लगभग 15 लाख याũी सालभर मŐ सफ़र करते है। फोटो मŐ हवाई अǭे के रनवे के बीच से ːीम टŌेन गुजरती िदख रही है। यहाँ सुबह 06:30 से लेकर रात 20:30 बजे तक रेल मागŊऔर रनवेदोनों ही ʩˑ रहते है। रात 8. 30 बजे बाद रनवे बंद कर िदया जाता है। 2. मैकलॉ̢ग माकőट रेलवे, थाईलœड ( Maeklong Market Railway, Thailand) आप सभी लोगो ने सड़को के िकनारे फु टपाथ पर लगे Šए ऐसेबाज़ार तो देखेहोगं ेजो िक सड़को को आधा कवर कर लेते है पर Ɛा आपने कभी ऐसे माकőट के बारे मŐ सुना है जो की रेलवे टŌैक पर लगता है और िजस टŌैक पर से िदन मŐ कई बार टŌेन गुजरती है। रेलवे टŌैक पर बना Šआ थाईलœड का मैकलॉ̢ग माकőट िकसी आʮयŊ सेकम नहीं है। इस माकőट मŐ पटįरयों पर लोग दुकानŐ लगाकर
17 अजंता राजभाषा िवभाग सामान बेचते हœ। यह माकőट इतना तंग है िक कोई भी याũी टŌेन मŐ से फल और सɥी उठा सकता है। जैसे ही टŌेन आती है सभी अपना सामान समेट लेते हœ। टŌेन के गुजर जाने के बाद यह माकőट िफर से सज जाता है। ऐसा िदन मŐ कई बार होता है। यहां के ʩापारी रेलवे पटरी पर सİɥयां मछली, अंडे और अɊ सामान बेचने का काम करते हœ। दुकानदारों को टŌेनों के टाइम टेबल का पता हैइसिलए जेसे ही टŌेन के आने का टाइम होता है वेसे ही दुकानदार अपना पूरा सामान टŌैक पे से हटा लेते है और टŌेन के जाते ही वापस लगा देते है। ऐसा पुरे िदन मŐ8 बार होता है। माकőट इतना अिधक लोकिŮय हो चूका है िक यहाँ पर आने वाले पयŊटकोंकी संƥा यहाँ पर आने वाले कːमरों सेअिधक होती है। यह माकőट बœकॉक से 72 िकलोमीटर दू र साउथ मŐ है। यह बœकॉक का एक धीमा रेलवे टŌैक है यहाँ पर टŌेन 30 िकलोमीटर एवरेज ˙ीड से चलती है। इस टŌैक पर कोई िसưल भी नहींहै। अिधकतर लोग इस टŌैक की तुलना एक मूवी सेट से करते है। इस माकőट को घुमने का सही समय टŌेन आने के तुरंत पहले का होता है। जैसे ही टŌेन के आने का समय होता है माकőट का समेटना शुŝ हो जाता है और टŌेन के जाते ही माकőट वापस पहले जैसा हो जाता है। यहाँ पर टŌेन भी िबना िकसी हॉनŊ के ही आती है। 3. टŌेन ए लास Ɋूɵ, अजŒटीना ( Tren a las Nubes – Train to the Clouds, Argentina) टŌेन ए लास Ɋूɵ एक पयŊटक टŌेन हैजो बादलोंके ऊपर चलती Šई साʐ ŮोिवɌ, अजŒटीना मŐ अपनी सेवाएं देती है। इस रेलमागŊ का िनमाŊण सन 1920 मŐŠआ था, अजŒटीना मŐ समुū तल से चार हजार मीटर की ऊं चाई पर एं डीज पवŊत ŵृंखला से एक ऐसी टŌेन गुजरती है िजसे ‘टŌेन टू द Ƒाउड’ कहा जाता है। यह टŌेन जब कुछ खास इलाकोंसेगुजरती हैतो ऐसा मालूम पड़ता हैिक यह बादलों को चीर कर आगे बढ़ रही है। असल मŐतब रेलवेलाइन के दोनोंतरफ भारी बादल होतेहœ। यह सेवा फे रोकेįरल जनरल मैनुअल बेलŤोन के सी-14 लाइन पर दी जाती है। यह टŌेन िजस िŰज से होकर गुजरती है वह 4220 मीटर की ऊं चाई से होकर गुजरती है। इसे दुिनया का तीसरा सबसे ऊं चा रेलवे टŌैक कहा जाता है। अब यह िवरासत के ŝप मŐ पयŊटकों के आकषŊण का कŐ ū है। यह टŌेन 16 घंटे के सफर मŐ217 िकमी की याũा करती है, इस रेलवे लाइन पर 29 िŰज, 21 टनल, 13 पुल, 2 ˙ाइरल और 2 िजगजैग है। यह रेल लाइन दुिनया के
18 अजंता राजभाषा िवभाग सबसे ऊं चे रेल ŝटों मŐ से एक है। इस रेल ŝट की शुŜआत अजŒटीना की िसटी ऑफ साʐा से होती है। इसकी ऊं चाई 1,187 मीटर है। यह रेलमागŊ वैली डी लेमाŊ से गुजरते Šए ƓेŰेडा डेल टोरो से ला पोʢोįरला िवयाडƃ 4200 मीटर पर खȏ होता है। इस Ůोजेƃ के हेड अमेįरकी इंजीिनयर įरचडŊ फोȴेन मरे थे। 4. टŌांस-सैबेįरयन रेलवे, Ŝस (Trans-Siberian, World’s Longest Railway, Russia) टŌांस-साइबेįरयन रेलवे टŌैक माˋो से लेकर ŝस और जापान के समुū को जोड़ता है। इसे दुिनया की सबसे लंबी रेलवे लाइन कहा जाता है। यह लाइन मंगोिलया, चीन और उȅर कोįरया की लाइनोंसेभी जुड़ा है। इसे1916 मŐ माˋो को ʪािदवोˑोक से जोड़ा गया था और अभी भी इसका िवˑार हो रहा है। साइबेįरयन रेलवे लाइन का िनमाŊण 1891 मŐ शुŝ Šआ था। 5. लœड वासर िवडƃ, İˢट्जरलœड (The Landwasser Viaduct, Switzerland) İˢट्जरलœड का लœड वासर िवडƃ टŌैक रेलवे िŰज लœड वासर नदी पर बना है, जो अब एक िवʷ धरोहर है। इसकी सबसे खास बात यह है िक टŌेन िŰज के बाद सीधे सुरंग मŐŮवेश कर जाती है। एक ओर गहराई तो दू सरी ओर घुɔ अंधेरे से भरा यह सफर 63 िकलोमीटर का है। आिकŊटेƃ्स की अनोखी िमसाल मानी जाने वाली इस िŰज मŐ6 कवŊ हœ, जो सफर को रोमांचक बना देते हœ। टŌेन जब िŰज से होकर गुजरती है तो इस दौरान एक ओर गहरी नदी तो दू सरी ओर पहाड़ी िदखाई देती है। 213 फीट ऊं ची और 446 फीट लंबे इस िŰज का िनमाŊण 102 साल पहले 1902 मŐŠआ था। İˢट्जरलœड के शहर िशमटन से िफिलसुर को जोड़ने वाले इस िŰज को अलेƂŐडर अकाटोस ने िडजाइन िकया था। वहींरहेिटअन रेलवेके िलए इस िŰज को मूलर और िजरलेडर की देख-रेख मŐ बनाया गया था।
19 अजंता राजभाषा िवभाग 6. जॉजŊटाउन लूप रेल , यूएसए (Georgetown Loop Railroad, USA) कोलोराडो का जॉजŊटाउन लूप रेलरोड यहां आनेवालेलोगों के िलए आकषŊण का कŐ ū रहता है। इस टŌैक का िनमाŊण कायŊ1884 मŐ पूरा कर िलया गया था। जॉजŊ टाउन और िसʢर ɘम क˜ों की संिकणŊपहािड़यों सेहोकर यह टŌैक गुजरता है। इन दोनों जगहों को जोड़नेके िलए टŌैक की ऊं चाई 600 फीट है। इस टŌैक पर चार पुल है, िजसमŐ से एक पुलडेिवल गेट हाई िŰज कहलाता है। कोलोराडो और दिƗण रेलवे की इस लाइन का उपयोग सन 1899-1938 के दौरान यािũयों और माल ढुलाई के िलए िकया जाता था। 1973 मŐ कोलोराडो ऐितहािसक सोसायटी ने 978 एकड़ जॉजŊटाउन लूप को िहːोįरक माइिनंग और रेल पाकŊ के िहˣे के ŝप मŐ संजोया गया है। 1984 मŐ इस पुल की 100वींवषŊगांठ मनाई गई थी। 7. द डेथ रेलवे, थाईलœड (The Death Railway, Thailand) द बमाŊ रेलवे टŌैक को डेथ रेलवे भी कहा जाता है। यह बœकॉक, थाईलœड और रंगून, बमाŊ के बीच 415 िकलोमीटर का टŌैक है। इस रेलवे टŌैक को बनाते समय 90,000 से अिधक कमŊचाįरयोंऔर 16,000 एलाइड कैिदयोंकी पुल िनमाŊण के दौरान नदी मŐ िगर जाने से मौत हो गई थी। अब यह ŝट काफी पॉपुलर हो चुका है और लोग यहां के सफर का आनंद उठाते हœ।
20 अजंता राजभाषा िवभाग 8. गेओनƹा ːेशन, दिƗण कोįरया (Gyeonghwa Station, South Korea) दिƗण कोįरया के जीनहे Ɨेũ मŐ3,40,000 चेरी के पेड़ हœ। यहां के पेड़ोंसेफूल िगरतेहœ और जमीन पर िबछ जाते हœ। गेओनƹा ːेशन भी इसी Ɨेũ मŐ हœ और यह पयŊटकोंके आकषŊण का कŐ ū है। 9. टनल ऑफ लव, यूŢे न (Tunnel of Love, Ukraine) यूŢे न का टनल ऑफ लव एक ऐसी जगह है िजसकी एक झलक पाने के बाद कोई भी वहां जाने के बारे मŐ जŝर सोचेगा। टनल ऑफ लव यूŢे न के Ƒेवान शहर से 7 िकलोमीटर की दू री पर İ̾थत है। यह 3 िकलोमीटर के दायरे मŐ फै ला Ůाइवेट रेलवे टŌैक हैजो पेड़ोंसेइस कदर ढका Šआ है िक यह पूरे राˑे को Ťीन टनल का ŝप देते हœ। बता दŐ िक यह टŌैक एक फायर बोडŊ फैƃŌी का है। एक टŌेन िदन मŐ3 बार उस फैƃŌी को वुड सɘाई करती है बाकी टाइम ये टŌैक कपʤ और नेचर लिवंग लोगोंके काम आता है। वहींयह सुरंग साल मŐ3 बार अपना रंग बदलती है। जब बसंत आता है ये टनल पूरी हरी हो जाती है और गिमŊयों मŐ ये टनल हʋी भूरी हो जाती है, जबिक सिदŊयों के मौसम मŐ ये टनल सफे द बफŊ की चादर ओढ़ लती है।
21 अजंता राजभाषा िवभाग 10. हœिगंग टŌेन, जमŊनी : जमŊनी मŐ एक ऐसी रेल सेवा है िजसकी टŌेनŐ लटक के चलती हœ। यह रेल सेवा काफी पुरानी है और इसकी शुŜआत 1901 मŐ ही हो गई थी। इस टŌेन के हœिगंग होने की वजह यह है िक वुɔटŊल शहर 19वींशताɨी के अंत तक अपने औȨौिगक िवकास के चरम पर पŠंच गया था। सड़कŐ तो थी, लेिकन सामान ढोनेके िलए और पैदल चलनेवालेलोगोंके िलए वहां पर जमीन पर चलनेवाली टŌामŐ चलानी मुİʭल थी। पहाड़ी इलाका होने की वजह से अंडरŤाउंड रेल भी नहींचलाई जा सकती थी। इसी İ̾थित मŐकुछ इंजीिनयरों सेहœिगंग टŌेन चलाने का फै सला िकया। इसे दुिनया की सबसे पुरानी मोनो रेल मŐ से एक भी माना जाता है। जमŊनी के वुɔटŊल शहर मŐ चलाई जाने वाली इन टŌेनोंमŐ रोज करीब 82 हजार लोग टŌैवल करते हœ। िदलच˙ ये है िक पİɰक टŌांसपोटŊ के िलए इस टŌेन की िकसी दू सरे देश या शहर मŐनकल नहींकी गई। हœिगंग टŌेन के टŌैक की लंबाई 13.3 िकलोमीटर है और यह नदी से 39 फीट ऊपर चलती है। टŌेन के Ŝकने के िलए 20 ːेशन बनाए गए हœ। इस तरह िवʷ की कुछ खास रेलोंकी रोचक और रंजक जानकारी जानतेŠए भारतीय रेल के सफर का इितहास और भी महान लगने लगता है Ɛोिंक िवʷ मŐ हमारा रेल नेटवकŊ आज भी दुसरे ̾थान पर कायŊरत है। िनितन पंिडत सोनार, वįरʿ अनुवादक, िहंदी सेल, भुसावल. * * * * *
22 अजंता राजभाषा िवभाग :: सोशल मीिडया और मानवीय ˢभाव :: आजकल फे सबुक या युǨूब जैसेसोशल मीिडया के चैनलों पर कई गुमराह करनेवाले वीिडयो Ůसाįरत होते हœ। िववादा˙द लेख, मटेįरयल या वीिडयो पर न िलखते Šए मœ सामािजक वीिडयो की बात रखना चाŠंगी। एक वीिडयो िजसमŐ तकरीबन 60-65 वषŊ का एक उŲदराज आदमी करीब-करीब 300-350 अडों की भुजŎ बनाकर उसे शहर के उन इɌानों को खानेके िलए देता हैजो बेसहारा है, बेघर है, िभखारी है या राˑे के चौराहे पर भीख मांगतेअपािहज लोग है। इसी तरह वो सैकडों तरबुजों का Ǜूस और ढेर सारी िचकन िबरयानी बनाकर उन लोगों मŐ बांटता है। इस पुरी ŮिŢया को शुŜआती तैयारी से लेकर बनाने की िविध और एक खास तरह की पैिकं ग और इसके बाद िवतरण तक बाįरिकयों सेवीिडयो के अंदर िदखाया जाता हैऔर वीिडयो खȏ होते-होते İˌन पर हेिडंग आता है िक िहʃत है तो इस दįरयािदली को लाईक करो और हम भी भावनामय होकर उसे लाईक करतŐ है। देखा जाए तो इस तरह के पुरे पįर̊ʴ के पीछे कोई जनजागृती नहींबİʋ सरासर िबजनस
23 अजंता राजभाषा िवभाग माईंड है। जो आजकल इंटरनेट पर इस तरह सेउपयोग मŐ लाया जाता है। हालांिक कोई यह िबजनस चला रहा है या इसके पीछे और कु छ कारण है इससे हमŐऔर कोई सरोकार नहीं होना चािहए Ɛोिंक आजकल सोशल मीिडया पर हमŐ ऐसे कई गुमराह करनेवाले वीिडयो िमल जाएं गे। पर सवाल यह Ůˑुत होता है िक Ɛा हमŐ अपने अंदर की मानवीयता जागृत करने के िलए ऐसे ʩापारी वीिडयों की जŜरत है? और हम इस तरह के वीिडयो से जागृत भी होते हœ, तो Ɛा? अपनी नीिज िजंदगी मŐ हम मानवीयता के Ůित संवेदनामय आचरण रखतŐ है? िमũों हम मानवता के महान परंपरा के धनी है। हमारे यहां ऐसे महान चįरũ पुŜष एवं मिहलाएं Šई है िजɎोनं ेमानवीय मूʞोंकी जतन की िशƗा हमŐ उनके आचरण से की है अगर हम पीछे मुड़कर उनसे थोड़ी से भी सीख लŐ सके तो अपनी िजंदगी मŐ थोड़ी बŠत समाजसेवा कर ही सकतŐ हœ । आजकल हम सभी मŐ जो उिȪưता, गुˣा और िदखावी घमंड बढ़ता जा रहा है। वह हमारी मानवीयता के िलए हािनकारक है। आज के समाज की जŜरत है िक हम िकसी भी जात-पात, धमŊ, अमीर-गरीबी के भेदभाव के िबना मानवीय मूʞोंका जतन करŐ। मानव को मानव समझŐ। एक दुसरों के Ůित सʃान-सȥाव तथा परोपकार की भावना रखŐ और उसी तरह आचरण भी करŐ और सDŽे जŜरत मंदो की िदलसे मदत करŐ। इसी तरह हम हमारे समाज मŐ मानवी मूʞों का जतन कर सकŐगे और एक खुशहाल मानवी समाज और उɄत मानवीय समाज की और अŤेसर रहŐगे। ȯान मŐ रखŐ की हम खास है Ɛोिंक हम ‘मानव’ है और मानव की पहचान मानवी मूʞों सेहोनी है। जो िकसी सोशल वीिडयो को िसफŊ लाईक करनेसेनहींबİʋ अपने संवेदनापुणŊ आचरण से ही बढ़नी चािहए। नेहा िनितन सोनार भुसावल * * * * *
24 अजंता राजभाषा िवभाग मȯ रेलवे भुसावल मंडल भुसावळ मंडळाला आहे संɔɄ Ůगितचा वारसा.... अवƽा भारतीय रेलवेचा जणू आहे हा आरसा ! खानदेशात भुसावल शोभे कोिहनूर िहरा..... भरीत भाकरीljा चवीनं घमघमतोय इथला कोपरा न् कोपरा ! नािशकljा ūाƗाची अिवट गोडी.... संˋृ ती अन् परंपरेने समृȠ झालीय हरेक रेलगाडी ! 'मॅके िनकल' यांिũक िवभागाljा जोरावर धावतात नवीन टŌेन... 'ऑपरेटीगं ' िवभाग करतो ŵमाचं अचूक मॅनेजमŐट... 'ईलेƃŌीक िवभागाचा 'Ůकाश' लखलखतोयं... 'ईटीएल' िवभागाचा 'िदवा 'सतत उजळू न येतों...! ईथला Ůȑेक कमŊचारी आहे अनमोल िहरा ... वाˑवाljा पįरİ̾थतीवर तुʉी फƅ पारखत चला! 'इंिजिनयरीगं ' िवभाग करते'टŌक' चा रखरखाव ... आयुˈाljा वाटेवरही जो सरळ चालतो तोच खातो भाव ! 'टीआरडी' गुंफते टŌॅƕन वायरचे जाळे... तसा Ůȑेक िवभाग राबतो ते Ůगतीवŝन कळे! 'कािमŊक' साजरे करतात अिभमानाचे Ɨण... िवकास आिण कʼाने उजवून आलयं भुसावल मंडल Ůागण ! 'कमőिशयल' िवभागाचा महसूल सदा आमचा वाढतोयं.. Ůवाʴांljा सेवेसाठी हरेक िवभाग राũन्िदवस लढतों! S&T चा िसưल आमचा असतो सदा ही िहरवा... ईथʞा Ůȑेक िवभागाला काळजात िमरवा ! IOW चा िवभाग बांधतोय् आपुलकीljा िभंती... आʉाला अिभमान वाटतो नेहमी राजभाषा िवभागावरती !
25 अजंता राजभाषा िवभाग 'सफाई कामगार' आमचा ईथला आदशŊ आहे.. आरोƶ जपणारा ' मेडीकल' ːाफ आरोƶदू त आहे..! भारतीय रेलवे साठी सदैव राš अŤेसर... कतŊʩ, ŵम आिण सेवा या िũसूũीचा करावा वायर ! सदा सवŊदा घूमत राहील भुसावल मंडलचा आवाज... नवी उमेद.. नवा उɉेष.. पुɎा बहारदार नवा आगाज ! ******* कवी ǒानेʷर गोकु ळ िपसे एमसीएम। सी एं ड डɲू । मनमाड
26 अजंता राजभाषा िवभाग िमशन जीरो सुसाइड “ रिहमन िनज मन की ʩथा मन ही राखो गोय, सुिन अिठलैहŐ लोग सब बांट न लेहœ कोई। " अथाŊत यिद अपने मन मŐकोई दुख हैतो उसको िकसी को बताइयेनहींबİʋ छु पा कर रİखए, अपने मन मŐ ही रİखए Ɛोिंक यिद आप िकसी सेइस बात को साझा करŐगे तो वह आपकी बात का मजाक ही बनाएगा ना िक आपका दुख को बांटेगा । जैसा िक हम सभी जानते हœ िक पįरवतŊन Ůकृ ित का िनयम है, बदलते समय के साथ मानव जीवन से जुड़ी अɊ बातŐ भी बदली हœ। वह बीते समय िक बात हो गयी है, जब रहीम जी ने इस बात को कहा था। यह बात उसे समय की है जब ʩİƅ अपने पįरवार और अपने समाज के साथ बŠत गहरे संबंध रखता था। ǒात- अǒात िकसी भी धमŊ मŐ मानव के जीवन को सवŖDŽ Ůाथिमकता दी गई है । साथ ही िहंदू धमŊ के अनुसार 84 लाख योिनयों मŐ भटकने के बाद मानव जीवन िमलता है और इसका हमŐ अिधकतम सदुपयोग करना चािहए यह बात मानव जीवन की हो रही , ˓ी, पुŜष, वणŊ, िलंग, जाित, धमŊ से बŠत ऊपर उठकर ʩİƅ मानव के जीवन की बात हो रही है और जीवन अनमोल है, बŠमूʞ है । मनुˈ एक सामािजक Ůाणी है लेिकन समय के अनुसार यह पįरभाषाएं बदली है के वल उसका पįरवार नहींहैउसका काम, उसके दोˑ वह सब भी उसका एक पįरवार का िहˣा होता है। Ůाɑ आंकड़ों के अनुसार िदनों िदन आȏहȑा के मामले बढ़ते जा रहे है, उसी Ůकार हमारे रेलवे के Ůितʿान मŐ भी िमशन जीरो सुसाइड के नाम से एक डŌाइव चलाई जा रही है। बदलते पįरवेश मŐ िनराशा, अके लापन, अवसाद के मामले भी बढ़े हœ। बŠत सारे सामािजक संगठन इस संबंध मे कायŊ कर रहे है। मनोवैǒािनक आंकड़ों के अनुसार यिद कोई ʩİƅ आȏहȑा करने के बारे मŐिवचार करता हैतो येएक िदन मेनहीं होता, ये िदन ब िदन मन मİˑʺ मे, असंƥ नकाराȏक िवचारों के इकǪा होने से होता है और जब ʩİƅ इसे िŢया ŝप देने जात है, जब उɉाद के 30 सेकं ड मŐ यिद उसे बचा िलया जाए तो एक बŠमूʞ मानव जीवन को बचाया जा सकता है। आज इंटरनेट के काल मे कोई भी बात िजतनी तेज़ी से फै लती है, उतनी ही तेज़ी से पुरानी भी हो जाती है। Ůबंधन के Ůमुख िसȠांतोंमŐसेएक हैअDžे ŵोता बनŐ/Be a good listener। आज हमारे आसपास जो माहौल है िजसमŐ लोग अके ले हœ, उनमे बेचैनी है, िनराशा है, अवसाद है । इसके Ůभाव मŐ आकर ʩİƅ आȏहȑा जैसे गंभीर िनणŊय लेता है और ऐसे ही किठन समय मŐ यिद उसकी कोई सुनने वाला िमल जाए तो उसे अितįरƅ समय िमल जाता है और शायद उसकी जान बच सकती है । हम देखते हœलोगोंके भीतर इतनी बेचैनी हैिक हर कोई ʩİƅ बोलना चाहता है, उसके पास कोई अपनी बातŐसाझा करनेके िलए कोई नहींहै। एक दोˑ िजसके साथ हम अपनी बात साझा कर सकŐ, वह नहीं है िजसके फलˢŝप वह धीरे-धीरे घोर बेचैनी, िनराशा, अके लापन और अवसाद के राˑे से होते Šए आȏहȑा तक पŠंचता है। खुद को हािन पŠंचाने िक Ůवृित घातक व गंभीर पįरणाम देती है। इससे न के वल ˢयं िक हािन होती है, बİʋ समाज और राʼŌ िक भी हािन होती है। यह Ůȑेक ʩİƅ का ʩİƅगत उȅरदाियȕ है िक एक दू सरे का ƥाल रखा जाए।
27 अजंता राजभाषा िवभाग संƗेप मे कहा जाए तो िवपरीत पįरİ̾थितयों मŐ भी मनोबल बनाए रखना एक िवलƗण Ůितभा है । िनɻ बातोंका ȯान रखकर इस मुİʭल कायŊ को िकया जा सकता है : 1. सबसे पहले तो खुद से ɗार करŐ, ˢयं को Ůाथिमकता दŐ। 2. ʩˑ समय मŐ से अपनी सेहत के िलए कु छ समय ज़ŝर िनकालŐ। एक तंदुŜˑी, हज़ार िनयामत। 3. दैिनक कामोंजैसेिक घर, पįरवार, कायŊ̾थल आिद मे कायŊ को समान ŝप से िवतįरत करŐ। 4. सारे काम खुद करके हीरो बनने की कोिशश ना करŐ। 5. अपने शौक को िज़ंदा रİखए, जो भी हॉबी है, उसके िलए समय ज़ŝर िनकालŐ। 6. सबसे बड़ा रोग, Ɛा कहŐगे लोग, इस मूल मंũ को ȯान रİखए । हम सबको एक साथ खुश नहींरख सकते। 7. अपने जीवन का उȞेʴ ढूंिढए। हर वो काम कįरए, िजससे खुशी िमलती है। 8. अपने आस पास िजतने भी महापुŜषोंिक कहािनयाँहमनेपढ़ी हœ उनमŐ एक एक बात खास थी िक उनमे एक जुनून था, एक भूख थी, अपने जीवन के उȞेʴ को Ůाɑ करने की ʩİƅ वही सफल है िजसने अपने जीने का मकसद ढूंढ िलया है। 9. जीवन एक खूबसूरत राˑा है, न िक मंिजल है। इसेइस तरह िजएँजैसेिक येदोबारा नहीं िमलेगा। “सब ठाठ पड़ा रह जाएगा, जब लाद चलेगा बंजारा।“ भावना अजय झा वįर कायाŊȯयन िनरीƗक
28 अजंता राजभाषा िवभाग िहंदी के Ůयोग के िलए वषŊ 2023-24 का वािषŊक कायŊŢम Ţ.सं. कायŊ िववरण ''क'' Ɨेũ ''ख'' Ɨेũ ''ग'' Ɨेũ 1. िहंदी मŐ मूल पũाचार 1.क Ɨेũ से क Ɨेũ को 100% 1.ख Ɨेũ से क Ɨेũ को 90% 1. ग Ɨेũ से क Ɨेũको 55 (ई-मेल सिहत) 2. क Ɨेũ से ख Ɨेũ को 100% 2.ख Ɨेũ से ख Ɨेũ को 90% 2.ग Ɨेũ से ख Ɨेũ को 55% 3. क Ɨेũ से ग Ɨेũ को 65% 3.ख Ɨेũ से ग Ɨेũ को 55% 3.ग Ɨेũ से ग Ɨेũ को 55% 4. क Ɨेũ से क व ख Ɨेũ को 100% 4.ख Ɨेũ से क व ख Ɨेũ को 90% 4.ग Ɨेũ से क व से ख Ɨेũ को55% के रा̕ य /संघ रा̕ य Ɨेũ के के रा̕ य /संघ रा̕ य Ɨेũ के के रा̕ य /संघ रा̕ य Ɨेũ के कायाŊलय /̺ यİƅ कायाŊलय /̺ यİƅ कायाŊलय /̺ यİƅ 2. िहंदी मŐŮा̪ त पũोंका उȅर 100% 100% 100% िहंदी मŐ िदया जाना 3. िहंदी मŐ िट̪ पण 75% 50% 30% 4. िहंदी मा̡ यम से ŮिशƗण 70% 60% 30% कायŊŢम 5. िहंदी टंकण करने वाले कमŊचारी 80% 70% 40% एवं आशुिलिप की भतŎ 6. िहंदी मŐ िड̋ टेशन /की बोडŊ पर 65% 55% 30% सीधे टंकन 7. िहŐदी ŮिशƗण (भाषा, टंकन, 100% 100% 100% आशुिलिप) 8. िȪभाषी ŮिशƗण सामŤी 100% 100% 100% तैयार करना 9. जनŊल और मानक संदभŊ पु̾ तकों 50% 50% 50% को छोड़कर पु̾ तकालय के कु ल अनुदान मŐ से िडिजटल सामŤी अथाŊत् िहंदी ई-पु̾ तक,सीडी/ डीवीडी, पैनडृाइव तथा अंŤजी और Ɨेũीय भाषाओंसेिहंदी मŐ अनुवाद पर ̺ यय की गई रािश सिहत िहंदी पु̾ तकोंकी खरीद पर िकया गया ̺ यय।
29 अजंता राजभाषा िवभाग 10. कं ̪ यूटर सिहत सभी Ůकार के 100% 100% 100% इले̋टृॉिनक उपकरणोंकी िȪभाषी ŝप से खरीद 11. वेबसाइट िȪभाषी हो 100% 100% 100% 12. नागįरक चाटŊर तथा जन सूचना 100% 100% 100% बोडŖ आिद का ŮदशŊन िȪभाषी हो 13. (i) मंũालयों/िवभागोंऔर 25%(̢ यूनतम) 25%(̢ यूनतम) 25%(̢ यूनतम) कायाŊलयोंतथा राजभाषा िवभाग के अिधकाįरयों(उ.स./िनदे/सं.स.) Ȫारा अपने मु̏ यालय से बाहर İ̾थत कायाŊलयोंका िनरीƗण (कायाŊलयोंका Ůितशत) (ii) मु̏ यालय मŐİ̾थत अनुभागो 25%(̢ यूनतम) 25%(̢ यूनतम) 25%(̢ यूनतम) का िन रीƗण (iii) िवदेश मŐİ̾थत कŐ ū सरकार के ̾ वािम̝ व एवं िनयंũण के अधीन कायाŊलयों/उपŢमोंका वषŊ मŐ कम से कम एक िनरीƗण संबंिधत अिधकाįरयोंतथा राजभाषा िवभाग के अिधकाįरयों Ȫारा संयु̋ त िनरीƗण 14. राजभाषा संबंधी बैठकŐ (क) िहंदी सलाहकार सिमित वषŊ मŐ2 बœठकŐ (ख) नगर राजभाषा कायाŊ̢ वयन सिमित वषŊ मŐ2 बœठकŐ(Ůित छमाही एक बैठक) (ग) राजभाषा कायाŊ̢ वयन सिमित वषŊ मŐ4 बœठकŐ(Ůित ितमाही एक बैठक) 15. कोड, मैनुअल, फॉमŊ, ŮिŢया 100% 100% 100% सािह̝ य का िहंदी अनुवाद 16. मंũालयों/िवभागों/कायाŊलयों/बœकों/ 40% 30% 20% अपŢमोंके ऐसेअनुभाग जहां संपूणŊ कायŊ िहंदी मŐहो।ं (̢ यनतम अनुभाग) सावŊजिनक Ɨेũ के उन उपŢमों/िनगमोंआिद, जहां अनुभाग जैसी कोई अवधारणा न हीं है, “क” Ɨेũ मŐ कु ल कायŊ का 40% “ ख” Ɨेũ मŐ25% और“ग” Ɨेũ मŐ15% कायŊ िहंदी मŐ िकया
30 अजंता राजभाषा िवभाग िवदेशोंमŐİ̾थत भारतीय कायाŊलयोंके िलए कायŊŢम 1. िहंदी मŐ पũाचार 50% (भारत/िवदेश मŐİ̾थत कŐ ūीय सरकार के कायाŊलयोंके साथ) 2. फाइलोंपर िहंदी मŐ िट̪ पण 50% 3. वषŊके दौरान नराकास की बैठकोंकी सं̏ या (नराकास का गठन िकसी नगर मŐ के̢ū सरकार के Ů̝ येक वषŊ मŐ एक बैठक 7 कायाŊलय या अिधक होने की İ̾थित मŐ िकया जाए) 4. वषŊ के दौरान िवराकास (िवभागीय राजभाषा Ů̝ येक ितमाही मŐ एक बैठक कायाŊ̢ वयन सिमित) की बैठकोंकी सं̏ या (िवराकास का गठन कायाŊलय-अ̡ यƗ की अ̡ यƗता मŐ िकया जाए) 5. कं ̪यूटरोंसिहत सभी Ůकार के इले̋ टॉिनक 100% उपकरणोंकी िȪभाषी उपल̭ धता 6. िहंदी टंकन करने वाले कमŊचारी/आशुिलिपक Ů̝ येक कायाŊलय मŐ कम से कम एक 7. दुभािषए की ̺ यव̾ था Ů̝ येक िमशन/दूतावास मŐ̾ थानीय भाषा से िहंदी मŐ और िहंदी से ̾ थानीय भाषा मŐ अनुवाद के िलए दुभािषए की ̺ यव̾ था की जाए।
31 अजंता राजभाषा िवभाग राजभाषा Ůʲोȅरी 1. अंडमान एवं िनकोबार Ȫीप समूह राजभाषा की ̊िʼ से िकस Ɨेũ मŐ आता है? क. “ख” Ɨेũ ख. “ग” Ɨेũ ग. “क” Ɨेũ घ. इनमŐसेकोई नहीं 2. संिवधान की अ̽ टम अनुसूची मŐ कु ल िकतनी भाषाएं हœ? क. 18 भाषाएं ख. 22 भाषाएं ग. 15 भाषाएं घ. 20 भाषाएं 3. िवभागीय पदो̢नित परीƗा मŐकुल अंकोंका िकतनेŮितशत का Ů̻ न राजभाषा से संबंिधत होना अपेिƗत है ? क. 20 Ůितशत ख. 10 Ůितशत ग. 15 Ůितशत घ. 25 Ůितशत 4. संसदीय राजभाषा सिमित मŐ कु ल िकतने सद̾ य होते है ? क. 30 ख. 25 ग. 40 घ. 20 5. के̢ūीय िहंदी सिमित के अ̡ यƗ कौन होते हœ? क. रेल मंũी ख. गृह मंũी ग. Ůधान मंũी घ. रा̽ टŌपित 6. राजभाषा की ̊िʼ से भारत को िकतने ƗेũोंमŐ बांटा गया है ? क. 03 ख. 05 ग. 04 घ. 02 7. रेल मंũालय के अधीन̾थ कायाŊलयोंका िनरीƗण संसदीय राजभाषा सिमित की कौन-सी उप सिमित करती है ? क. पहली उप सिमित ख. दू सरी उप सिमित ग. तीसरी उप सिमित घ. इनमŐसेकोई नहीं 8. िकस महान सािहȑकार को उपɊास सŲाट के नाम से जाना जाता है ? क. मुंशी Ůेमचंद ख. बाबू देवकीनंदन खũी ग. आचायŊ रामचंū शुƑ घ. भगवितचरण वमाŊ 9. राजभाषा िनयम 1976 िकस रा̕ य मŐलागूनहींहै? क. आंŬ Ůदेश ख. के रल ग. पिʮम बंगाल घ. तिमलनाडु 10. राजभाषा आयोग का गठन िकस वषŊ िकया गया ? क. 1955 ख. 1950 ग. 1963 घ. 1952 11. राजभाषा का वािषŊक कायŊŢम कौनसा मंũालय बनाता है ? क. गृह मंũालय ख. कृ िष मंũालय ग. रेल मंũालय घ. िशƗा मंũालय 12. राजभाषा अिधिनयम कब पाįरत Šआ ? क. 1949 ख. 1950 ग. 1963 घ. 1965 13. िũपुरा की राजभाषा ̋ या है ? क. िहंदी ख. कोकं णी ग. सं̾ कृत घ. बांगला 14. राजभाषा आयोग का गठन पहली बार िकसकी अȯƗता मŐ Šआ था ? क. बाल गंगाधार ितलक ख. बाल गंगाधर खेर ग. सी. राजगोपालाचारी घ. जुगल िकशोर शुƑ 15. संसदीय राजभाषा सिमित का अȯƗ कौन होता है? क. संसदीय कायŊमंũी ख. गृहमंũी ग. िशƗामंũी घ. िवȅमंũी 16. राजभाषा अिधिनयम 1963 मŐ कु ल िकतनी धाराएँ हœ? क. कु ल 9 धाराएँ ख. कु ल 11 धाराएँ ग. कु ल 10 धाराएँ घ. कु ल 12 धाराएँ 17 . राजभाषा अिधिनयम 1963 की धारा चार (4) का संबंध िकससे है ? क. राजभाषा के संबंध मŐ सिमित ख. राजभाषा के संबंध मŐ िनयम ग. राजभाषा के संबंध मŐŮिशƗण घ. राजभाषा के संबंध मŐ कायाŊɋयन 18. राजभाषा अिधिनयम 1963 की धारा 3 (3) को कब से लागू िकया गया था ? क. 26 जुलाई 1965 से ख. 26 जनवरी 1963 से ग. 26 जनवरी 1965 से घ. 26 जनवरी 1976 से
32 अजंता राजभाषा िवभाग 19. डोगरी भाषा िकस राǛ मŐ बोली जाती है? क. असम ख. जʃू कʳीर ग. िबहार घ. महाराʼŌ 20. सभी नामपǥ, सूचनापǥ, पũशीषŊऔर िलफाफोंपर उ̝ कीणŊ लेख एवं लेखन सामŤी की अ̢य मदŐ िहंदी और अंŤेजी मŐ ही हों, इसका उʟेख िकस िनयम मŐ है? क. िनयम 8 ख. िनयम 9 ग. िनयम 10 घ. िनयम 11 21 . नागालœड की राजभाषा कौनसी है? क. अंŤेजी ख. उदूŊ ग.भोजपुरी घ. मराठी 22. Ůȑेक वषŊ िवʷ िहंदी िदवस िकस ितिथ को मनाया जाता है ? क. 10 जनवरी को ख. 10 जुलाई को ग. 14 िसतंबर को घ. 14 िदसंबर को 23. राजभाषा िहंदी के कायाŊɋयन के िलए वािषŊक कायŊŢम हर वषŊ कŐ ū सरकार के िकस मंũालय Ȫारा जारी िकया जाता है? क. मानव संसाधन िवकास मंũालय ख. िशƗा मंũालय ग. समाज कʞाण मंũालय घ. गृह मंũालय 24. कŐ ūीय सरकार के कायाŊलयोंमŐ रबड की मुहरे बनवाने की भाषांए कौनसी होती है? क. मराठी, िहंदी ख. िहंदी के वल ग. मराठी, अंŤेजी घ. िहंदी, अंŤेजी 25. मंडल पर İ̾थत बुरहानपुर ːेशन कौनसे Ɨेũ मŐ आता है ? क. “क” Ɨेũ ख. “ख” Ɨेũ ग. . ग” Ɨेũ घ. इनमŐसेकोई नहीं 26. भुसावल मंडल भाषा के आधार पर िकतने ƗेũोंमŐ बांटा गया है ? क. 2 ƗेũोंमŐ ख.3 ƗेũोंमŐ ग. 1 ƗेũोंमŐ घ. इनमŐसेकोई नहीं 27. िहंदी मŐ पहला ǒानपीठ पुरˋार िकसे Ůाɑ Šआ है ? क. महादेवी वमाŊ ख. सुिमũानंदन पंत ग. मैũेयी पु˃ा घ. रामधारी िसंह िदनकर 28. . भाषा की ̊िʼ से ‘क ‘ Ɨेũ मे आने वाला राǛ इनमŐ से कौनसा है ? क. महाराʼŌ ख. उȅर Ůदेश ग. तािमलनाडु घ.गोवा 29. Approval का िहंदी पयाŊय Ɛा है ? क. मंजूर ख. अनुमोदन ग. सहमत घ.िसफाįरश 30. रेल याũा वृतांत पुरˋार योजना मŐ भाग ले सकते है ? क. रेल कमŎ ख. सभी भारतीय नागįरक ग. रेल कमŎ और उनका पįरवार घ. 18 वषŊ से अिधक आयु वाले नागįरक 31. Acquisition का िहंदी पयाŊय ̋ या है ? क. आŢमण ख. िन̾ तारण ग. ̾ प̽ टीकरण घ. अिधŤहण 32. सन् 1967 मŐ संिवधान की आठवींअनुसूची मŐ कौन-सी भाषा सİʃिलत की गई ? क. िसंधी भाषा ख. कोकं णी भाषा ग. कʳीरी भाषा घ. नेपाली भाषा 33. संसदीय राजभाषा सिमित मŐ लोकसभा से कु ल िकतने सद̾ य होते है ? क. 30 ख. 10 ग. 40 घ. 20 34. भाषा की ̊िʼ से ‘क ‘ Ɨेũ मे आने वाला राǛ इनमŐ से कौनसा है ? क. महाराʼŌ ख. छȅीसगढ़ ग.चंडीगढ़ घ. तेलंगाना 35. िहȽी संघ की --------------- भाषा है ? क. राʼŌभाषा ख. राजभाषा ग. क और ख दोनों घ उपयुŊƅ मŐ से कोई नहीं उȅर कंुजी 1-ग, 2-ख, 3-ख , 4-क, 5-ग , 6-क, 7-ख , 8-क , 9-घ ,10-क, 11-क, 12-ग , 13-घ , 14-ख, 15-ख , 16-क , 17-क ,18-ग, 19-ख , 20-घ , 21-क, 22-क ,23-घ ,24-घ ,25-क , 26-क ,27-ख ,28-ख 29-ख ,30-ख ,31-घ ,32-क, 33-घ , 34-ख ,35-ख