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Published by nagasaibaba009, 2017-12-21 00:29:13

ePATRIKA17-18

ePATRIKA17-18

VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Uploaded By Mr. S. K. Malakar, PGT(CS)


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Mrs. P.B.S. Usha


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

सपं ादकीय

कु छ नमा, कु छ अरग कय ददखाने मा ददखने की रारसा भनषु ्म की ऐसी भनोवतृ ्तत है
त्जसने आज भानव सभ्मता को इस भकु ाभ ऩय ऩहुॉचामा है जहाॉ एक से फढ़कय एक ववस्भमकायी
वऻै ाननक उऩरत्धधमाॉ हभाये साभने हंै | तजे ी से फदरती इस दनु नमा भें कु छ बी त्स्थय नहीॊ है –
ऩरयवतनत औय वववतनत का अतॊ हीन ससरससरा साभने है | ऐसी त्स्थनत भें ववद्मारम ऩत्रिका अऩने नए
करेवय औय स्वरुऩ की भाॉग कयती हो तो मह स्वाबाववक ही है |ववद्मारम की सभस्त
क्रिमाशीरताओॊ की सिू धारयणी प्राचामात डॉ. सभु नरता ने जफ इस फाय ववद्मारम ऩत्रिका का ई-
ससॊ ्कयण प्रकासशत कयने का ननणमत सरमा तो सऩॊ ादक भडॊ र के साभने एक नई चनु ौती ऩेश थीॊ |
चनु ौनतमाॉ क्रकॊ चचत ् हतप्रब बी कयती हैं ऩय फरु दॊ हौसरे के साथ चुनौनतमों का साभना कयने का भज़ा
ही कु छ औय है|

कॊ प्मटू य औय भोफाइर पोन जफ से छाि-छािाओॊ के सरए ऻानाजनत औय खरे के साधन
फने ह,ैं तफ से ववद्मारमों की दनु नमा कापी तजे ी से फदरी है| नई ऩीढ़ी के सशऺक औय छाि दोनों ही
कॊ प्मटू य औय भोफाइर के ऩयभ बक्त फने फठै े है,ं ऩय ऩयु ानी ऩीढ़ी के सशऺकों भें वसै ी बत्क्त जाग्रत
नहीॊ हो ऩामी है| प्रमतन जायी है| हभ होंगे काभमाफ एक ददन |

भोफाइर पोन औय कॊ प्मटू य के प्रनत अनतशम आसत्क्त क्रकशोयावस्था के सरए असबशाऩ न
फन जाए इसके सरए हभें प्रनतऩर सजग यहने की जरुयत है| क्रकशोय भन चचॊ र औय राऩयवाह होता
है| इस उम्र भंे दयू दसशतत ा बी कु छ कभ ही होती है| मही कायण है क्रक फच्चे अतॊ जातर की दनु नमा भंे
पॉ स जाते ह|ैं कॊ प्मटू य औय इॊटयनेट रूऩी ससक्के के दो ऩहरू हंै -ऩहरा राबदामक है तो दसू या
हाननकायक | ववद्मारम के फच्चो को चादहए क्रक वे इटॊ यनेट मा भोफाइर का दरु ुऩमोग न कयंे | कीभती
वक्त फफातद कय, ऩढ़ाई की उऩेऺा कय सभिों से व्मथत फातंे कयते यहना , सदॊ ेशों का आदान-प्रदान कयते
यहना फवु िभानी नहीॊ है| इस फात की सशकामतें सभरती हंै क्रक फच्चे देय यात जागते तो हैं ऩय ऩढ़ाई से
ज्मादा वे भोफाइर मा कप्मटू य का दरु ुऩमोग कयते यहते हैं |

अऩनी इस ई -ऩत्रिका के प्रकाशन भें सभस्त ववद्मारम ऩरयवाय का मोगदान यहा है|
कॊ प्मटू य सशऺकों तथा चचिकरा सशऺक श्री एस.एस. भखु जी के फहुभलू ्म मोगदान के त्रफना ऩत्रिका का
मह रूऩ कतई सबॊ व न था | सऩॊ ादक भडॊ र ऩत्रिका के प्रकाशन भंे सहमोगी फने सभस्त छाि –छािाओॊ
औय सशऺक-सशक्षऺकाओॊ के प्रनत आबाय प्रकट कयता है |

सबु भस्तु !

-डॉ. प्रकाश ठाकु र


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

स्वच्छता

आऱोक कु मार )ीट सामािजक ावऻाट.जज.ीट(

‘स्वच्छता’ क्रकसी सभ्म सभदु ाम की ऩहचान होती है। स्वच्छता जहाॊ त्जतनी अचधक ददखती है, वह
देश उतना ही अचधक सरु ुचच सम्ऩन्न औय सदुॊ य भाना जाता है। गदॊ गी मानी अस्वच्छता नयक का
ऩमातम है। मह हभायी जीवन शरै ी की ऩरयचामक है। स्वच्छ ऩरयवशे भंे ही ईश्वय का ननवास होता है।
ससपत भदॊ दय, भत्स्जद, गयु द्वाया औय चगयजाघय को साप सथु या यख कय हभ नहीॊ कह सकते क्रक हभ
स्वच्छता प्रेभी हंै। हभें अऩने घयद्वाय-, ऩासऩोोस-, गाॉवशहय की हय गरी औय सोक को साप सथु या -

यखना चादहए।

स्वच्छता के प्रनत हभायी स्वाबाववक आसत्क्त हो तबी हभ अऩने देश को सदुॊ य फना सकते है।ं अऩने
ही देश भें ससत्क्कभ एक ऐसा प्रदेश है, जहाॊ हय जगह स्वच्छता के दशनत होते ह।ैं वहाॉ के ननवासी
स्वच्छता के आग्रही ही नहीॊ, स्वच्छता के ऩजु ायी हंै। अऩने देश भें अन्म प्रदेशों के गावॉ शहय साप
सथु ये नहीॊ है तो इसका कायण मह है क्रक हभ स्वच्छता के भाभरे भंे गबॊ ीय नहीॊ हैं। अगय प्रतमेक
व्मत्क्त ननश्चम कय रे क्रक हभ गदॊ गी नहीॊ पै राएगॉ े तो अऩने आऩ चायों ओय सपाई ददखने रगगे ी।

अऩने ऩरयवेश को स्वच्छ यखना हभाया कतवत ्म होना चादहए। अगय हभ स्कू रछाि हैं तो कॉरेज के -
हभें मह पमान यखना चादहए क्रक हभ अऩनी कऺा औय ऩयू े ववद्म् ारम प्राॊगण को साप सथु या यखेंग।े
कू ोा कचया मिसथु या यखना के वर सपाई कभी का काभ नहीॊ -ति नहीॊ पे कें गे। ववद्मारम को साप-
हीॊ तो स्वच्छता अऩने आऩ हंै। मह सभस्त ववद्मारम ऩरयवाय का दनमतव है। हभ गदॊ गी पै राएॉ ही न
फनी यहेगी। इसके सरए जगह जगह कू ोदे ान यखे जाएॉ औय सकॊ ल्ऩ क्रकमा जाए क्रक कू ोा ककत ट कू ोदे ान
भें ही डारंेग।े महाॉ वहाॉ नहीॊ पें कंे ग।े -

त्जस सभदु ाम भें सौन्दमत फोध त्जतना अचधक होता है, वह सभदु ाम उतना ही अचधक सदुॊ य
होता है। जहाॊ सौन्दमत है वहाॉ स्वास््म है। हभ स्वस्थ तबी यह सकंे गे , जफ हभ स्वच्छ ऩरयवशे भंे
यहंेगे। नाना प्रकाय की फीभारयमाॊ गदॊ गी के कायण पै रती हंै। गदॊ गी के कायण भक्खीभच्छय ऩनऩते -
औय फढ़ते हंै। ऩरयवेश भंे दगु धा पै रती है औय हभाया जीना दबू य हो जाता है। फीभाय ऩोकय फीभायी
कयाएॊ का इराज, इससे फेहतय है क्रक हभ फीभाय ही न ऩोे।ं अनके फीभारयमाॉ तो गदॊ गी के कायण
पै रती है।ं गदॊ गी के कायण सिॊ भण फढ़ता है। गदॊ गी ऩय फठै ने वारे भक्खी-भच्छय औय दसू ये छश्म-
ववषाणु हभंे फीभाय फनाने का कभ कयते हं।ै इनके कायण सिॊ भण पै रता है।-अछश्म जीवाणु

हभायी वतभत ान कंे ्र सयकाय स्वच्छता असबमान चरा कय देशवाससमों भें स्वच्छता के प्रनत जागरूकता
ऩदै ा कयने की कोसशश कय यही है। सयकायी धन से शहयों की सपाई, नदीनारों की सपाई का -
असबमान सचभचु एक प्रशसॊ नीम कदभ है। गगॊ ा की सपाई के सरए तो अरग से यासश आवदॊ टत हुई
बी सपाई असबमान चर यहा है। खरु े भें शौच न कयने की सराह दी जा यही है है। गाॊवों भें। सयकाय


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

शौचारम फनवाने के सरए आचथकत सहामता तक दे यही है। अबी कु छ ददनों ऩहरे अखवायों भें खफय
छऩी क्रक त्रफहाय के कु छ त्जरों भंे प्रशासन खुरे भंे शौच कयते ऩकोे जाने वारों को चगयफ्ताय कय यही
है। उतसाही मवु ा त्जरा अचधकायी ने प्रखण्ड स्तय ऩय ग्राभीणों ऩय इस सदॊ बत भंे नज़य यखने के सरए
ननगयानी ससभनतमाॊ तक फना दी ह।ैं ननश्चम ही इस असबमान से रोगों भें स्वच्छता के प्रनत
जागरूकता फढ़ेगी। रोगों की आदतों भें ऩरयवतनत होगा।

सरए बी सयकायी दफाव फनामा जाएगा फोा सवार मह है क्रक क्मा स्वच्छता के ? क्मा काननू ी
फत्न्दशों के त्रफना हभ गदॊ गी पै राते ही यहेंगे? हभभंे स्वच्छता के प्रनत स्वत् जागनृ त क्मों नहीॊ ऩदै ा
होती? सच तो मह है क्रक जफतक स्वच्छता के प्रनत हभ भन से तमै ाय नहीॊ होंगे तफ तक फाहयी दफाव
से देश स्वच्छ नहीॊ होगा। गदॊ गी फाहय नही,ॊ हभाये भन भे है। हभ मिति थकू ते है। फचे खाद्म -
ऩदाय्थ् इधयउधय पंे क देते ह।ैं गदॊ गी के उचचत प्रफधॊ न के सरए हभने कबी सोचा ही नहीॊ-, इसी
सरए हभ चायों तयप गदॊ गी देखते ह।ैं आजकर प्रात्स्टक के ऩकै े ट भें येडीभडे खाद्म ऩदाथत सफ जगह
सभरते हं।ै हभ खाद्म ऩदाथत खाने के फाद प्रात्स्टक का ऩकै े ट वही पे क देते हैं। कू ोदे ान भें पें कने की
आदत ही नहीॊ है। ववदेशों भंे फच्चों भंे मह आदत डार दी जाती है क्रक खाने के फाद प्रात्स्टक का
ऩकै े ट मा डधफा अऩने ऩास यखंे औय कू ोदे ान सभरने ऩय उसभंे डारंे। चॉकरटे के ऊऩय सरऩटा
प्रात्स्टक अगय हभ अऩनी जेफ भें ही यखें औय कू ोदे ान सभरने ऩय उसभे डारंे तो हभ अऩने घय औय
ववद्मारम को साप सथु या यखने भंे सहमोग कय सकते हं।ै

गदॊ गी पै राने के फाये भंे भहातभा गाधॊ ी अतॊ ययाष्रीम दहन्दी ववश्वववद्मारम वधात के कु रऩनत ने
एकफाय सरखा क्रक गदॊ गी हभाये ससॊ ्कृ नत भंे ह।ंै बायत भें रोग धभत के नाभ ऩय गदॊ गी पै राते ह।ैं ऩजू ा
भें प्रमकु ्त पू र एवॊ अन्म वस्तएु ॉ स्वच्छ ताराफ भें डारते हैं, ताराफ को गदॊ ा कयते ह।ंै ऩजू ा की
साभग्री साप जर भंे पे क कय उसे गदॊ ा फनाते हंै। भदु ों को जराकय उसके अवसशष्ट नदी भंे प्रवादहत
कयते ह।ैं नदी के जर को दवू षत कयना क्रकतनी गरत ऩयॊऩया है। ऐसी ऩयॊऩयाओॊ को ऩाखडॊ ी औय
धभाधा रोग प्रश्रम देते है।ं प्रतमके व्मत्क्त अगय व्मत्क्तगत स्तय ऩय गदॊ गी न पै राने का सकॊ ल्ऩ कये
तो मह देश सदुॊ य हो सकता है। अफ्रीका के कु छ अतमतॊ गयीफ देशों भें बी नागरयक खुरे भें शौच नहीॊ
कयत।े गयीफ होने के फावजूद उनके महाॉ शौचारम का प्रफधॊ है। हभाये देश की भहानता भें तफ तक
फट्टा रगता यहेगा जफतक हभ स्वच्छता के सरए सकॊ ल्ऩ ऩवू कत काभ नहीॊ कयंेगे।


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

ककताबें

श्रेष्ठा मखु जी

कऺा ( 21 –माटावकी)

क्रकताफें हभायी त्ज़ॊदगी भे एक भहतवऩणू त बसू भका ननबाती ह।ंै कहा जाता है क्रक क्रकताफंे हभायी श्रेष्ठ
साथी होती है। मह फात वास्तववक अथत भंे सच है। वे हभसे क्रकसी चीज की भागॊ नहीॊ कयतीॊ औय
ऊऩय से ऻानदान के सरए हभेशा तमै ाय यहती हैं। हभंे उनसे फहुत कु छ सीखने को बी सभरता है। वे
हभको कल्ऩना की एक दसू यी दनु नमा भंे रे जाती हैं।

एक क्रकताफ रेखक की रफॊ ी साधना की उऩरत्धध होती है। मों तो वे बौनतक स्वरूऩ भंे
प्रकासशत होती है अथवा प्रद्मोचगकी की भदद से आजकर वे इरेक्रॉननक रूऩ भंे बी प्रकासशत होती
है।ं

अच्छी क्रकताफें हभाये जीवन स्तय को सधु यती है, वे हभाये फौविक स्वाद को ठीक कय हभायी आउटरकु
को औय बी ज्मादा व्माऩक कयने भंै भदद कयती है।ं जफ हभ उदास होते हैं तो वे हभें तो वे हभें
प्रसन्नता देती ह।ंै

क्रकताफंे हभें प्रोतसादहत कयती हंै जफ हभ त्ज़दॊ गी भंे ऩयात्जत हो जाते हैं मे हभको कोी भहे नत कयने
को प्ररे यत कयती हैं औय हभको आशा एवॊ साहस से बय देती ह।ंै वे हभायी अऻानता को हटती हैं औय
हभाये ऻानकोश को फढ़ाती ह।ैं क्रकताफें हभाये अनबु वों को सभिृ कय हभायी फवु ि को तीक्ष्ण फनाने भें
भदत कयती ह।ैं इस प्रकाय एक अच्छी क्रकताफ हभायी सच्ची सभि होती हं।ै

एक आदभी को ननम्नस्तय की क्रकताफें ऩढ़ने से फचना चादहए, वे हभायी त्ज़दॊ गी को दखु ी फना दे
सकती ह।ैं हभंे इन्हीॊ फयु ी क्रकताफों की वजह से कबी बगु तना ऩढ़ सकता है। वे हभाये अदॊ य फयु ी आदतें
ववकाससत कय देती हंै। फयु ी क्रकताफें हभायी फवु ि को फफातद कय देती ह।ैं वे हभायी अच्छी एवॊ गबॊ ीय
क्रकताफें ऩढ़ने की छह को नष्ट कय देती ह।ंै हभंे ऐसी ननम्नस्तयीम क्रकताफंे ऩढ़ने से फचना चादहए
क्मोंक्रक वे हभाया कीभती सभम एवॊ शायीरयक ऊजात को फेकाय कय देती हंै।

हभें क्रकताफंे ऩढ़ने की एक स्वस्थ आदत अऩने अदॊ य ववकससत कय रेनी चादहए। हभंे इन क्रकताफों को
फोी सावधानी एवॊ सावधानी से चुनना चादहए। हभंे के वर अच्छी क्रकताफंे ही ऩढ़नी चादहए। अच्छी
क्रकताफें ऩढ़ने के फहुत साये पामदे हंै। हभंे फच्चों औय मवु कों को के वर अच्छी क्रकताफें ऩढ़ने की
अनभु नत देनी चादहए। उनको इन क्रकताफों से प्राप्त सशऺा को अऩने ऊऩय चरयताथत कयनी चादहए। एक
अच्छी क्रकताफ हभायी दोस्त, दाशनत नक एवॊ भागदत शकत होती है।


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

हय एक को त्ज़दॊ गी भंे सखु चादहए, आदभी को सखु ऩाने के सरए धन एवॊ सतता की चाहत होती ह।ंै
उसको अच्छी सेहत की अवश्कता होती हंै ताक्रक वे अऩनी त्ज़दॊ गी भंे खफू भौज भस्ती कय सके ,
आनदॊ भना सके । आधुननक मगु भें आदभी हय जगह सखु ऩाने की कोसशश कयता है। क्रकन्तु असरी
सखु तो क्रकताफें ऩढ़ने भंे है, सादहतम के यसास्वादन से फढ़कय ससॊ ाय भें कोई आनदॊ नहीॊ है। हभंे
खरे कू द एवॊ क्रपल्भ देखने भें सखु का अनबु व होता है क्रकन्तु क्रकताफंे हभको त्ज़दॊ गी का असरी सखु
देती हं।ै जफ हभ एक अच्छी क्रकताफ को ऩढ़ते है तफ हभ स्वमॊ को बी बरू जाते हं।ै क्रकताफें रोगो
को एक सदुॊ य कल्ऩना रोक भंे ऩहुॊचा देती है। इससरए क्रकताफंे त्ज़ॊदगी भें भहानतभ आनदॊ का साधन
हंै।


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

चाहत बटाम महे टत

जैसे – जैसे अऩनी त्जदॊ गी का एक सार कभ कयते हुए एक नई कऺा भंे ऩहुॊचते हंै ऩढ़ने की
साभग्री फढ़ती जाती है – सबी फोे | फजु गु त कहने रगते हंै “ ,भहे नत कयोतबी ,भहे नत कयो ,
” | सपरता सभरेगीऩय क्मा होता है मह भेहनत कयना क्मा सपरता प्रात्प्त के सरए सचभचु ?
´भहे नत´ जसै ी कोई चीज है मा आऩ फेहोश हुए जा यहे है क्मा आऩको ऩसीना चू यहा ?है? ऩय
मह सफ तो हभे हो नहीॊ यहा न ऩसीना चू यहा न फहे ोश हो यहे |हैं तो क्मा हभ भेहनत नहीॊ |
कय यहे है भेयी ?छत्ष्ट भें भहे नत असर चीज नहीॊ होती है असर चीज है ,चाहत त्जसके होने से
चभतकाय होते हैं अगय आऩ क्रकसी चीज को चाहंे तो भेहनत | कफ हो जाएगी इसका ऩता बी नहीॊ
चरता आऩ उस चीज भंे |इतने यभ जाएॊगे क्रक आऩने कफ इतनी सायी चीजें कय री मह ऩता बी
न चरगे ा भेहनत कयते सभम हभ सोचते |हअैं ये क्रकतनी सायी चीजें फा “ – की हंै कयने को |

इतनी सायी चीजें | क्रकतना सभम फचा हैआज कय ऩाऊॊ गा क्रक नहीॊ ” |मे सफ खमार तफ आते
हैं जफ हभ फाकामदा ´ नतभहे ‘ कयने फठै ते हरैं के ्रकन जफ हभ उस चीज को चाहने रगते हैं |

तफ मे सफ सवार भनभैं नहीॊ आते |
मह चाहना क्मा है कु छ ऩा ?नमे े चाहना अगय सकायातभक | कु छ कय गजु यने की इच्छा ,

क्मा बाई क्मा ‘ त्जससे बी ऩछू ो ,वयना आज ,सोच के साथ है तो जीवन भें खुशी है औय अथत है
– हार चार है´ ? तो अचधकतय जवाफ कु छ इस तयह के सनु ने को सभरते हाॉ माय फस चर “ –
– फस टेंशन बयी नघसी ... यहा है वऩटी त्जदॊ गी " ....वगयै ह वगयै ह।
अफ आऩ ही फताएॊ इन कथनों भें से कोई बी सकायातभक सोच से ताल्रकु यखता है ? ऐसे रोगों
को फस मही रगता है क्रक अगय चीजें उनके दहसाफ से नहीॊ हंै तो दनु नमा खयाफ है, त्ज़दॊ गी खयाफ
है। भेये दहसाफ से मदद आऩ के ऩास यहने के सरए घय, खाने को बोजन औय एक ऩरयवाय जो
आऩका खमार कयता हो, औय कु छ एक प्माये दोस्त हो तो आऩके ऩास खशु होने के सरए ऩमापत ्त
साधन है। अगय हभ पमान से अऩने चायों तयप देखें तो ऩाएॊग,े क्रकतनी खुशी है हभाये चायों ओय।
फस हभ आखंे खोर कय उन्हें ऩहचानते नहीॊ हंै। हभ क्रकसी एक चीज़ को रे कय चचतॊ ा भें डू फे
यहते हंै । अगॉ ्रेजी भें एक कथन है –‘Worrying is the interest paid before its due’॰ क्मों
हभ उस चीज को रके य चचतॊ ा भें यहें जो अफ तक घटी ही नहीॊ है। जरूयत है खदु ऩय ववश्वास
कयने की। जहाॊ दनु नमा क्रकसी चीज के फाये भें फोर यही है क्रक मह तो फहुत कदठन है, मह कयना
तो असबॊ व है, उतने ही इस फात को काटने के सरए हभ जसै े रोगों द्वाया चभतकाय हो यहंे हं।ै
त्जसे दनु नमा नाभभु क्रकन भानती है उसे ही कु छ रोग ससि कय ददखाते हं।ै क्मोंक्रक “Big the
belief, greater is the change of exception”, औय मह चभतकाय, नाभभु क्रकन को भभु क्रकन
कय ददखाता है, फस चाहत औय अच्छी सोच से ही आती है सपरता। तो जरूयत है फस अऩना
नज़रयमा फदरने की।

--आयषु ज कु मार, कऺा - 21 (वाणिज्य(


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

टारट तमु हो सबकी आशा

क्रकन शधदों भंे दॉ ू ऩरयबाषा

नायी तभु हो सफकी आशा

सयस्वती का स्वरूऩ हो तभु

रक्ष्भी का स्वरुऩ हो तभु

फढ़ जाए जफ अतमाचाय

दगु ात | कारी का रूऩ हो तभु –

क्रकन शधदों भंे दॉ ू ऩरयबाषा

नायी तभु हो सफकी आशा

खुसशमों का ससॊ ाय हो तभु

प्रेभ का आगाय हो तभु

घय आॉगन को योशन कयती –

सयू ज की दभकाय हो तभु |

क्रकन शधदों भंे दॉ ू ऩरयबाषा

नायी तभु हो सफकी आशा

भभता का सम्भान हो तभु

ससॊ ्कायों की जान हो तभु

प्रेभ तमाग औय सखु की ,

इकरौती ऩहचान हो तभु |

क्रकन शधदों भें दॉ ू ऩरयबाषा

नायी तभु हो सफकी आशा

तू कबी पू र गरु ाफसी-

नायी तये े रूऩ अनके

तू ईश्वय के चभतकाय सी |

____नटककता कु मारट, कऺा – टवजं ‘ब’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

मरे े प्यारे पापा
भेये प्माये ऩाऩा
आऩने ही भझु े त्जन्दगी दी
आऩने ही भझु े ऩढ़ामा सरखामा
आऩने ही भझु े नाभ ददमा
आऩने ही भझु े सही यास्ता ददखामा
आऩने भये े हय कदठन यास्ते ऩे भेया साथ ददमा
भै रोखोाई ऩय आऩ भये ा सहाया फने
हाॉअऩने भझु े भये ी गरनतमों ऩय डाटॊ ा ,
ऩयभझु े उसभें बी आऩका प्माय सभरा ,
भंै आऩकी आखॉ ों का ताया हूॉ
औय मह ताया आऩका नाभ जरुय योशन| कयेगा ---
भै आऩकी उम्भीद ऩय खया हो कय ददखाऊॉ गी
हय कोई जनता है भंै आऩकी फेटी हूॉ
औय भझु े मह सनु कय अच्छा रगता है क्रक आऩ भेये ऩाऩा हैं |
भैं आऩसे फहुत प्माय कयती हूॉ औय आऩ
ही भये ी दनु नमा हंै |
भेये प्माये ऩाऩा |

___प्रकृ नत पडं डत, कऺा - सात ‘द’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

समाज की उन्टनत

सभाज भें दो प्रकाय के रोग होते हंैजो ,जो सभाज का बरा चाहते हैं औय दसू ये वे ,ऩहरे तो वे ,

तो सभाज की बराई के सरए मा तो फयु | सभाज का फयु ा चाहते हैं्ाइमों को हटाओ मा तो फयु े रोगों

को हटाओ ए क्मोंक्रक ऊॉ ची मह इससर ,कई नीच जानत के रोग सभाज भंे ननकरने से डयते हैं |

भंे इसी सोच को तो फदरना है औय सभाज भंे सबी को एक | जानतके रोग उन्हंे नीचा ददखाते हैं

सभाज के रोगों क | तबी तो बायत कहराएगा भहान | सभान देखना है्ो ऩता नहीॊ क्मा हो गमा है

भये ी | न्हंे शाॊनत सभरेगीतबी जाके उ ,वहाॉ ऩय ही कचोा पे कंे गे ,जहाॉ देखेंगे कचोा पंे कना भना है |

आखॉ ों भें तो जो रोग गदॊ गी पै राते हंैआजकर तो सभाज भंे ननकरना | वे ही सफसे फोे गदॊ े हैं ,

इतना भतु ्श्कर हो गमा है क्रक क्मा फताएॉ हय तयह |खनू नशा की साभग्री ,फारूद-जआु ,खयाफा -

न जाने कफ औय कौन इसे सु | आदद चीजें पै री हुई हंधै ायेगा औय सभाज की उन्ननत हो ऩामगे ी न |

तफ तो बग | अगय इसी तयह सफ कु छ चरता यहा ,जाने क्मा होगावान की दी हुई सऩनों की मह

दनु नमा चटु क्रकमों भें नष्ट हो जाएगी |

--- अपिप मण्डऱ, कऺा – 20वज,ं ‘द’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

बेीट यहट हन पहचाट मेरट :
ऩरकंे बीगी कयके जफ भंै
इस दनु नमा भैं आई थी
फटे ी मही था नाभ भये ा ,
मही ऩहचान फनाई थी |

कइमों ने तो फोे प्माय से
भझु को ऩारा – ऩोसा है
ऩय कइमों ने ̔फटे ी̓̔ ̓̔ कहकय
भझु ऩे ताना कोसा है |

कइमों ने तो प्रभे बाव से
भझु को अन्न खखरामा है
ऩय कइमों ने कठोयता से
भझु को जहय वऩरामा है |

हभ नहीॊ कहते फटे े फयु े हंै

कबी नहीॊ कहते ऐसा

ऩय फदे टमों को बी तो भानो

एक स्वणत फटे े जसै ा !

______ अटन्या पाऱ, कऺा – 7वजं ‘अ’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

बीे ट बचाओ, बेीट पढ़ाओ
फेटी फचाओ, फटे ी ऩढ़ाओ,
फेदटमों को आगे फढ़ाओ।
फटे ी त्रफना देश अचर,
फटे ी त्रफना जग असपर।
फेटी है तो घय की रक्ष्भी,
फदे टमाॉ तो हैं ससॊ ाय की सतृ ्ष्ट,
रके ्रकन देखते हैं फेदटमों को
आगे फढ्ने से योका जाता है।
भ्रणू भें ही फदे टमों को भाय ददमा जाता है,
भ्रणू भें ही फदे टमाॉ योती हंै ।
चचल्रा चचल्रा कय भम्भी को कहती ह,ंै
भम्भी भझु े भत भायो, भत भायो भझु ।े
भझु े फचाओ, भझु े फचाओ, भझु े फचाओ भम्भी,
रेक्रकन भम्भी कहाॉ सनु ती हैं?
भम्भी बी तो ऩयाधीन ह,ैं
वऩता के अधीन है।ं
ससॊ ाय भंे अगय झाॉके आऩ
सददमों से देखें देश का इनतहास
आऩ देखंेगे रीरावती, भिै मे ी, गागी
झाॉसी यानी, दगु ातवती,
कल्ऩना चावरा, साननमा सभज़ात, साइना नेहवार


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

ऩीउषा.टी., फछंे ्र ी ऩार, भेयी कोभ, ऩजू ा ठाकु य, सनु ीता ववसरमम्स
इतनी सायी रोक्रकमों ने क्रकमा फोे ा ऩाय
औय क्रकतनी सायी रोक्रकमाॊ हो यही है तमै ाय।
चरो, हभ सफ सभरकय रड,ंे नाया रगाएॉ,
फटे ी फचाए,ॊ फेदटमों की खसु शमाॉ वाऩस राए,ॉ
फदे टमों को आगे फढ़ाएॉ
कोई क्रकसी को नीचा न ददखाए।
नयनायी दोनों सभरकय कये साकाय-
फेटी फचाओ, फेटी ऩढ़ाओ
फदे टमों को आगे फढ़ाओ।।

-- डॉ)प्रााकमक कशमऺका(मादवज ऱता दास .


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

अस्पताऱ की सरन

कबी अस्ऩतार गए हो? खुदा न खास्ता कबी अगय जाने का भौका सभरे तो भौत से जगॊ जीतनवे ारों
को ही नहीॊ, भौत से जझू ते प्राखणमों औय उनके ऩरयवाय वारों को देखना। क्रकतने फवे स औय राचाय
होते ह।ैं

फचऩन से भझु े ससखामा गमा क्रक जफ बी खुदको कभजोय मा दखु ी अनबु व कयो तो अऩनी तरु ना
गयीफों से कयना। उनके ऩास क्मा नहीॊ है औय तमु ्हाये ऩास क्मा है – इसकी जाॊच कयना । ऩयॊतु
अस्ऩतार के गसरमायों का कहना कु छ औय है। मे भझु े कहती हंै क्रक जफ जफ तमु ्हाया भन कभजोय
हो, जफजफ तमु ्हंे मह त्ज़ॊदगी फेभतरफ रग-े , भेयी शयण भंे आओ। भेये भतु ात्रफक भदॊ दय से ज़्मादा
बत्क्त औय आस्था का स्थान तो अस्ऩतार है क्मोंक्रक इसकी दीवायों ने ददर से ननकारने वारी सच्ची
प्राथनत ाओॊ को अनबु व क्रकमा है।

अस्ऩतार भंे ववसबन्न प्रकाय के रोग सभरंेगे, त्जनक सभस्माएॉ बी ववसबन्न होंगी। कोई चर नहीॊ
सकता तो कोई फोर नहीॊ सकता, कोई फोर तो सकता है ऩय अऩने ऩरयवाय को ऩहचान नही सकता,
कोई अऩने ऩरयवाय की याह ताकता फठै ा है ऩय ऩरयवाय सभरने नही आता, क्रकसी के ऩास ऩसै े न होने
से इराज भें रुकावट तो क्रकसी के ऩास ढेयों ऩसै े हैं रटु ाने को ऩय ननमनत को कु छ औय ही भजॊ ूय है।
वहाॉ जाओ तो रोगों के इतने दखु औय ददत आऩ देखंेगे क्रक अऩना दखु बरू जाएॊग।े

त्ज़ॊदगी कबी फभे तरफ नहीॊ होती, हय त्ज़दॊ गी की एक भतॊ ्ज़र तम होती है औय मदद कबी त्ज़ॊदगी
फेभतरफ रगे तो अस्ऩतार की सयै कय आना। कभ से कभ उऩकायी तो फन ही जाओगे।

--काजऱ कमकप ार, कऺा ( 21वाणिज्य)


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

पहेकऱयाँा
1) हभ इसे फढ़ा सकते ह,ंै

हभ इसे काट सकते ह,ंै
हभ इसे यॊग सकते ह,ंै
हभ इसे फाजाय से खयीदकय रगा सकते ह,ंै
हभ इसे ऐसे बी यख सकते हैं,
मह क्मा है?

उततय नाखून :

2) तभु भझु े ऩानी भें देख सकते हो
ऩय भैं कबी बी बीगता नहीॊ हूॉ ,
फोरो तो भैं कौन हूॉ ?

उततय ऩयछामीॊ :

3) ऩेो के ऊऩय यहता हूॉ, ऩय भैं ऩऺीयाज नही,ॊ
छार के वस्ि ऩहनता हूॉ ऩय भंै साधु सतॊ नही,ॊ
तीन आखॉ ें हंै भेयी ऩय भें त्रिरोचन सशव नही
तो फोरो भंै कौन हूॉ?

उततय नारयमर :

 अनासभका तारकु दाय, कऺा – 9वी,ॊ ‘फ’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

भ्रष्ीाचार

सभर गमी आज़ादी ऩय इन्कराफ जायी है

नए बायत की त्जम्भवे ायी अफ हभायी है,

हय तयप कारा धॊधा, कारा ऩसै ा,

ऩयू े बायत भंे चर यहा है ऐसा

मह आसानी से न होगा कभ,

जफ तक हभ नई ऩीढ़ी न रगाएगॊ े दभ।

आज भैं भ्रष्टाचाय ऩय पमान आकवषतत कयते हुए कु छ कहना चाहता हूॉ। ऩहरे मह फताना ज़रूयी है क्रक
मह भ्रष्टाचाय चीज क्मा है? आजकर मह शधद साभान्म है। अननै तक साधनों का इस्तभे ार कय
दसू यों से कु छ पामदा प्राप्त कयना भ्रष्टाचाय कहराता है। देश औय व्मत्क्त के ववचाय भंे मह अवयोध
का एक फोा कायण फनता जा यहा है। भ्रष्टाचाय से व्मत्क्त सावजत ननक सऩॊ त्तत, शत्क्त औय सतता का
गरत इस्तभे ार अऩनी सतॊ तु ्ष्ट औय ननजी स्वाथत की प्रात्प्त के सरए कयता है, हभ सफ भ्रष्टाचाय से
अच्छी तयह वाक्रकह ह।ैं मह सफ कु छ कोई नमी फात नही है, हभाये सभाज भें हय स्तय ऩय पै र यहे
भ्रष्टाचाय की व्माऩकता भें ननयॊतय ववृ ि हो यही है। भ्रष्टाचाय के ववसबन्न रूऩ यॊग है औय इसी प्रकाय
नाभ बी अनके ह,ंै जसै े रयश्वत रने ा, सभरावट कयना, वस्तएु ॊ ऊॊ चे दाभों भंे फेचना अचधक राब के
सरए जभाखोयी कयना अथवा कारा फाजायी कयना आदद ववसबन्न प्रकाय के भ्रष्टाचाय ह।ंै आजकर
क्रकसी बी कामत के सरए रयश्वत देनी ऩोती है। अगय हभें कोई हाइर एक भज़े से दसू यी भेज़ तक
ऩहॊ ुचानी है तो अपसयों के हाथ गयभ कयने ऩोते हंै। फहुत से रोग अऩना ननधारत यत टैक्स जभा न
कयके आभदनी नछऩाते हंै, इसी कायण टैक्स के रूऩ भें ऩसै ा सयकाय के ऩास नहीॊ आता, इसे ही कारा
धन कहते हंै।

अफ फताना ज़रूयी है क्रक भ्रष्टाचाय कै से क्रकसी देश को खा जाता है, जफ रोग कारा धन अऩने ऩास
नछऩा कय यखते हैं तफ वह ऩसै ा सयकाय को नहीॊ सभरता। इसी कायण देश उन्ननत नही कय ऩा यहा
है। हभाये देश भें गयीफी फढ़ यही है, हजायों रोग भय यहे है, दसू यी ओय जफ रोग सभरावट कयते है मा
ऊॊ चे दाभों भंे चीजे फेचते हंै तफ बी भ्रष्टाचाय पै रता है औय हजायों गयीफ भयते हंै।

भ्रष्टाचाय को खतभ कयना फहुत ज़रूयी है। इसके सरए भ्रष्टाचाय सफॊ धॊ ी ननमभ औय कोे हो
जाएॉ औय भ्रष्टाचाय भें सरप्त रोगों को कोी से कोी सज़ा सभर।े इस सभस्मा की सभाधान के सरए
के वर सयकाय प्रमास कये, मह कापी नहीॊ है, इसके सरए सबी धासभकत , साभात्जक व स्वमसॊ ेवी
सगॊ ठनों को एकजटु होना होगा। भ्रष्टाचाय के ववयोध भें याष्रीम जनजागनृ त ही याष्र को भ्रष्टाचाय -


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

000 जसै ी कु यीनत से भकु ्त कय सकती है। हभने देखा क्रक हभाये भाननीम प्रधानभिॊ ी श्री नयें्र भोदी ने
के नोट ऩय योक रगाकय एक फहुत फोा कदभ उठामा है 1000 औय। जसै ा क्रक वह कहते हैं क्रक
। इसीसरए हभ सफको एकसाथ ”अगय हभ चाहंे तो ऐसी कोई शत्क्त नही जो बायत को गदॊ ा कय सके “
सभरकय इस गदॊ ी चीज को जो से उखाोना होगा।
अतॊ भंे भंै कहना चाहूॉगा क्रक :
भ्रष्टाचाय है एक कारा दाग“
जो कय यहा देश को फफादत
ऩय हभ क्रपय बी नहीॊ उठा यहे कदभ
इसको सभटाना नही अके रे की फात
जफ तक सफ न रोेंगे एकजुट होकय
औय सभराएगॊ े हाथों से हाथ।“

--- साकल्य कमत्र, कऺा द 20 –


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

कमत्रता

सभिता अनभोर धन हंै भोती मा सोने – हीये | इसकी तरु ना क्रकसी से बी नहीॊ की जा सकती |
आचथकत औय ,सी बी कायण चाहे वह साभात्जकसच्ची सभिता भें क्रक | चाॉदी से बी नहीॊ –
| व्मवधान नहीॊ आ सकता,साॊस्कृ नतक ही क्मों न हो
फाइफर भे कहा गमा है क्रक एक सच्चा सभि ववश्व की सवशत ्रेष्ठ दवा है सच्ची सभिता को |
ववबीषण औय ,अजनुत औय कृ ष्ण ,कृ ष्ण औय सदु ाभा | प्रसगॊ सभरते ह-ंै ददखाने वारे अनके प्रेयक
|मे सभिता के अनोखे उदाहयण हंै ,सगु ्रीव की याभ से सभिता

भिै ी की भदहभा फहुत फोी हैं सच्चा सभि सखु औय दखु भें | सभान बाव से
भिै ी ननबाता है वह | सच्चा सभि जीवन की कोी धूऩ भें शीतर छाॉव की बाॉनत होता है |
|सही भागदत शनत कयता हैं आवश्मकता ऩोने ऩय अऩने सभि का

सच्ची सभिता की फस एक ऩहचान हंै औय वह है ववचायों की सभानता सभिता |
कहा गमा है क्रक याजद्वाय से रेकय श्भशान तक औय ऩयभ सखु | का प्राचीन कार से अत्स्तव हैं
| न का सवशत ्रेष्ठ अनबु व हैंसभिता जीव | वही सच्चा सभि है ,से रके य चयभ दखु तक जो साथ है
-इसका भलू ्म रुऩमे | त्जसंे गहये सागय भें डू फकय ही ऩामा जा सकता हंै ,मह एक ऐसा भोती हंै
| ऩसै े से नहीॊ चकु ामा जा सकता

सच्ची सभिता जीवन का वयदान हंै सच्चा सभि भनषु ्म के क्रकस्भत को जगा |
सभिता | ह ददखा सकता हंैबटके को सही या-सकता है औय बरू कयना बी एक करा हैं इसके |
सच्ची सभिता भें अभीय | फातों भें भधयु ता व दम से सयर होना चादहए ,सरए चहे ये ऩय भसु ्कान
| फोा आदद ननम्न स्तयीम फातों का कोई स्थान नहीॊ होता – छोटा ,गयीफ –

__ सोहम मखु जी, कऺा – 10 वजं ‘स’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

ापता

| भाॉ का प्माय तो सफ जानते हंै “रके ्रकन आज कर के मगु भें वऩता के प्माय को कोई अहसभमत नहीॊ
देता |एक फात फता दॊू क्रक वऩता बी हभंे उतना ही प्माय कयते हैं त्जतना हभायी भाॉ हभसे प्माय कयती
ह।ैं फस हभें मह प्रभे इसी सरए नहीॊ ददखता क्मों क्रक वे साये ददन घय से फाहय कठोय ऩरयश्रभ कयते
हैं |औय वह ऩरयश्रभ बी क्रकसी औय के सरए नहीॊ फत्ल्क हभाये सरएहभाये बववष्म के र ,त््ए कयते हैं
|क्रकसी ने सच ही कहा था क्रक कोई बी आदभी हय सभम सही नहीॊ होता है रके ्रकन एक वऩता अऩने
फच्चे के भाभरे भें कबी गरत नहीॊ होता है |वऩता के मोगदान को हभ कबी नहीॊ सभझ ऩाएगॉ े क्मोंक्रक
वे अऩना ऩेट काट कय हभाया ऩेट बयते हैं | अऩनी जरूयतों को ऩयू ा न कयके हभायी जरूयतों को ऩयू ा
कयते हैं | आखखय भंे भंै फस मही कहूॉगा क्रक हभाये वऩता हभंे उतना ही प्माय कयते हंै त्जतना हभायी
भाॉ |

--हषत यॉम, कऺा – 9वी,ॊ ‘फ’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

सफऱता का रहस्य

 सयं मइतना भत खाओ की ससु ्ती आए जाए -I
 चपु ्पजऐसी कोई चीज़ न फोरे त्जससे दसू यो -्ॊ को मा आऩकोराबन हो यहा हो, पारतू की

चचात से फचे।
 व्यवस्ााआऩकी सबी चीज़े सही जगह ऩय यहें।आऩके जीवन के हय दहस्से का अऩना सभम -

तम हो।
 सकं ल्पवह कयने का सकॊ ल्ऩ कये जो आऩको कयना चादहए। हय वह काभ कयें त्जसका -

आऩने सकॊ ल्ऩ क्रकमा है।
 कमतव्ययतादसु यो की तथा अऩनी ब - राई कयने के अनतरयक्त क्रकसी चीज़ ऩय ऩसै े न खचत

कयंे, कु छ बी फफादत न कयंे।
 मेहटतसभम व्मथत न कयंे - , हभेशा क्रकसी उऩमोगी काभ भें रगे यहंे। सबी अनावश्मक

गनतववचधमों को फदॊ कय दंे।
 नटष्कपीतानकु सान ऩहुॉचने वारे धोखों का प्रमोग न कयें। ननष्कऩटता तथा ईभानदायी से -

सोचे औय अगय आऩ फोरे तो इसी फात को पमान भें यख कय फोर।े
 न्यायक्रकसी को चोट न ऩहुॉचाए तथा ऐसे राब देना न छोोे त्जन्हें देना आऩका कततवत ्म -

हं।ै
 मध्यमागअप नत कयने से ऩयहेज़ कयें क्मों - क्रक अनत हय छत्ष्टकोण से हाननकायक होती हैं।
 स्वच्छताशयीय - , कऩोे मा येहनसहे न भंे गदॊ गी फदातश्त न कयंे।-
 दजरताभान्म दघु टत नाओॊ मा अवश्मबॊ ावी घटनाओॊ से ववचसरत न हों।भोटी फातें मा स-छोटी -
 पावत्रताभन भें फयु े ववचाय न राए - ्।ॉ
 ावटम्रताअऩनी फातें नम्रताऩयू ् - वक दसू यों के सभऺ यखें।

हहन्दऱ दास ,ग्यारहवज-ं 'स'


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दनु टया की सच्चाई
मह दनु नमा फोी अजीफ है।
जफ चरना नहीॊ सीखा था
तो रोग चगयने नहीॊ देते थे
औय जफसे चरना सीखा है
तफसे रोग कदभ कदभ ऩय चगयाना चाहते है।
जफ जफ हभ चुऩ यहकय
सफ वयदाश्त कय रते े हैं तो
दनु नमा को फहुत अच्छे रगते हंै
ऩय एक फाय बी हकीकत फमान कय दे तो
सफसे फयु े फन जाते हंै
मदद आऩकी छत्ष्ट सदुॊ य है तो
आऩको दनु नमा अच्छी रगगे ी
औय मदद आऩकी जुफान सदुॊ य हंै तो
आऩ दनु नमा को अच्छे रगेंगे
त्ज़दॊ गी का अऩना ही यॊग है
दखु वारी यात भंे सोमा नहीॊ जाता
औय खशु ी वारी यात सोने नहीॊ देती।
त्ज़ॊदगी भें दो चीज़ंे कबी भत कीत्जए
झठू े आदभी के साथ प्रभे औय सच्चे आदभी के साथ गेभ
यास्ते ऩय कॊ को ही कॊ को हो
तो कु छ कदभ चर ऩाना बी भतु ्श्कर हो जाता है।


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

भतरफ मह क्रक हभ फाहय की चुनौनतमों से नहीॊ
अऩने अदॊ य के कभजोरयमों से हायते हैं
अऩनी बरू कु फरू कयने भंे कबी देय भत कयना
क्मोंक्रक मह त्जतना रफॊ ा होता जाएगा
वह उतना ही भतु ्श्कर होता जाएगा।
सभट्टी नयभ होकय खते फन जाती है
रोहा नयभ होकय औज़ाय फन जाता है
आटा नयभ होकय योटी फन जाता है
ठीक उसी प्रकाय मदद इॊसान नयभ हो जाए
तो सफके ददरों भंे जगह फना रते ा है।

- अकमत महतो
कऺा – 21 )माटावकी(


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मातभृ कू मिः

“जननी जन्भबसू भश्च स्वगादत वऩ गयीमसी।”
मा भातबृ सू भ् जन्भत् आयभ्म भतृ मऩु मनत ्तभ ् अस्भाकॊ यऺणॊ ऩोषणॊ च कयोनततस्मा् ,
स्वच्छताववधानभ ् अस्भाकभ ् अवश्मकतवत ्मॊ मत् स्वच्छतामाॊ ईश्वयस्म ननवास् इनत सव् ऻामत।े मथा
गहृ े भाता वन्दनीमा तथवै देशभातकृ ा अवऩ सव् नयै् सेववतव्मा नास्तमि सशॊ म्। अत् मेन के न
प्रकायेण भातबृ भू ्े यऺणॊ ऩोषणॊ सौन्दमसत ाधनञ्च कयणीमभ।्

जके ु न्दैव नाचचमाय .
कऺा )अ(नवी -


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सॊकसरत -श्रोकिमभ ्
ववद्माऽववद्मास्वरूऩणे भोऺफन्धप्रदानमनीभ।्

हॊसत्स्थताॊ त्स्भतभखु ीॊ फन्दे वाचाभधीश्वयीभ॥्
(ब्र भसिू बाष्म)

हभ, अववद्मारूऩी फन्धन तथा ववद्मारूऩी भोऺ
प्रदान कयनवे ारी ,हॊस ऩय अचधत्ष्ठता त्स्भतानना
वाणी की अचधश्वयी वाग्देवी की फन्दना कयते ह।ंै

ननतमोऽननतमानाॊ चते नश्चेतनाना-
भके ो फहूनाॊ मो ववदधानत काभान।्

तभातभस्थॊ मऽे नऩु श्मत्न्त धीया-
स्तषे ाॊ शात्न्त् शाश्वती नेतयेषाभ॥् (कठोऩननषद्)
जो अननतम ऩदाथों भंे ननतमस्वरूऩ तथा ब्र भा आदद चते नों भंे चेतन है औय
जो अके रा ही अनेकों की काभनाएॉ ऩणू त कयता है ,अऩनी फवु ि भंे त्स्थत
उस आतभा को जो वववके ी ऩरु ुष देखते हंै उन्हीकॊ ो ननतम शात्न्त प्राप्त होती
है ,औयों को नही।

म् सवऻत ् सववत वद्मस्म ऻानभमॊ तऩ्।
तस्भादेतद् ब्र भ नाभ रूऩभन्नॊ च जामत॥े )भणु ्डकोऩननषद्(
जो सफको )साभान्मरूऩ स(े जाननेवारा औय
सफका ववशषे ऻ है तथा त्जसका ऻानभम तऩ
है उस)अऺयब्र भ( से ही मह ब्र भ )दहयण्मगब(त ,
नाभ, रूऩ औय अन्न उतऩन्न होता है॥


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॥स्वच्छभारताकभयाटम॥्

‘स्वच्छबायतासबमानभ’् इतमाख्मॊ भहासबमानॊ बायतगणयाज्मस्म प्रधानभत्न्िणा श्री नयेन््र भोदी
भहाबागेन उद्घोवषतभ।् २०१४तभवषसत ्म अक्तफू यभासस्म द्ववतीमे ददनाद्के स्वच्छबायतासबमानस्म -
ऩवू पत ्रधानभत्न्िण् रार फहादयु शास्िी ,शबु ायम्ब् अबवत।् बायतस्म याष्रवऩत्ु गान्धीभहातभन्
भहोदमस्म जन्भददवसतवने २इनत अत्स्भन्नवे ववशषे े ददवसे तमो् भहाऩरु ुषद्वमो् ससॊ ्भयणाथा १०/
तासबमानस्म आयम्ब् कृ त्।स्वच्छबाय

२०१४तभवषसत ्म अगस्तभासस्म-

ऩञ्चदशददनाद्के स्वतन्िताददन-

ऩवखत ण प्रधानभत्न्िणा

श्री नयेन््र भोदी भहाबागेन

उद्घोषणा कृ ता मत ् ’स्वच्छबायतासबमानभ’्
ददनाद्कात ् भहातभाजमन्तीऩवदत दवसात ् १०/२
रयते ऩरयग्रहीतव्मसभनत। तदनन्तयॊ ऩवू नत नधात
तभवषसत ्म अक्तफू यभासस्म -२०१४ददवसे
भहानगयत्स्थते -द्ववतीमे ददनाद्के नवदेहरी
याजघाटे प्रधानभन्िी श्री नयेन््र भोदी बायतॊ
” ,न्मवेदमतस् वे स्वच्छबायतासबमाने मोगदानॊ कु वनत ्त”ु इनत। तत्स्भन ् ददने स्वमॊ प्रधानभन्िी स्वहस्तने
सम्भाजनत ीॊ धतृ वा नवदेहरी भहानगयस्म भत्न्दयभागे स्वच्छताकामा प्रायधधवान।् -

सौनक भण्डर

कऺा )अ(नवीॊ -


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

The Good Boy Paradox

-By Rajdeep Ghosh

I am 14.This is that unnervingly crucial time when you have to be a good boy on all lines for
everybody (It hurts the ego if someone passes the ridiculous you’re-not-up-to-the-mark comment and
egoism is sacred!). Let me brief you on a usual school day:

First period means superb pomp and show for the teacher.

Second period means painful reminiscence and nostalgia of the days when we could do our home
works a week after it was assigned.

Third period means maximum effort in clearing backlogged work (Even if that means sitting at the
last bench and not paying a grain of attention to what the teacher is blabbering on about. It is
elementary!)

Fourth period marks off the stage of a typical savage hunger. So savage, that you could eat the teacher
whole.

Recess means eating half the lunch and attacking on the homework given that day.

Fifth, sixth, seventh and eighth periods simply trigger extreme distress, fatigue and homesickness
resulting in pain in: head, collar bone, chest, stomach and knees, giving the impression that your body
will disintegrate into sand the next moment.

Only after taking this much pain can you establish yourself as a good boy. One of my friends asked
me some time ago-“Why does one need to be a good boy?” I consider this question as the deepest
philosophical problems which can give even Aristotle and Plato a run for their money.

Now after a 6 hour 10 minute infinite marathon in the school, when you are supposed to be rude to
everyone (you are a teen! It’s your job to be rude), you have to play the good boy back at home as
well. Go to your tuitions, come back home and study for as long as your body doesn’t disintegrate
into sand again.

This was the Good Boy regime. You might wonder who invented this. I too had that question and all
my answers (which included the Greeks, Babylonians and even the Mayans) were as non-existent and
meaningless as three-horned unicorns. Though if you ever stumble upon the answer, slap the person
right across his face to let him know about the number of innocent student lives he has ruined.(slap
him one from me too, will you?)


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

MEMORIES

A few days ago, I went to the attic in search of some old books when I suddenly came across a
small cardboard box stuffed with all my childhood belongings. I did not pay much attention to it and
was pushing it aside when an old photo album popped out of the box.

I saw that it was a compilation of class photographs given to the students of our school in its
golden jubilee year. As curiosity always gets over me, I leafed through the photos to have a look at
my younger self and my childhood friends. I finally found myself in a photo, dressed in fancy attire,
squeezed between two pupils. I also recognized the younger versions of my old friends and the
pictures brought back long-forgotten memories of my girlhood years-the petty fights and eventual
reconciliations, the camaraderie, the silly games, the picnics and the sharing of tiffin. The long past
made me want to relive them, but harsh reality reminded me that it was not possible.

Soon, I was fumbling through the dust-laden contents of the box, desperately looking for a piece
of writing, a memento or anything that would link me to the old days. It was then that I found some
handmade cards given to me by old friends, a few coveted presents and a farewell diary. While
reading the diary entries, I felt as if I had been transported back in time and could see everything
happening in front of eyes. As I read on, I remembered the close friends with whom I had lost touch
soon after passing out of school. We had all promised never to forget one another and never to lose
touch but our friendship and the pledges wore out against the cruelty of time. I was in a trance as I
thought of these things and it was only some time later that I realized that my childhood days, the
memories of which had come back to me, had been the best days of my life.

Ritorni Dutta

Class- IX B

Roll no- 25


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Language of Friendship
PHYSICS: Don’t negatively charge your ideas about periodically otherwise the equation of friendship
would get disturbed.
NEWTON’S LAW: A true friendship is always created but never destroyed until and unless trust is
there.
CHEMISTRY: If two friends have different ways of thinking, the result is always jealousy and hatred,
but if the two show equal mentality, the product is love and affection.
COMPUTER: Be perfect towards your friendship otherwise you will get system error. Even a small
virus can make a friendship harsh.
BUSINESS MATHS: Pay for your friendship at any cost but don’t pay for your enmity at the least cost.
MATHEMATICS:-
Add- Friends
Subtract- Enemies
Multiply- Friendship
Divide- Enmity
Hindal Das, XI-‘C’


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Illusion
- Soumya Sandilya XC

Cast out entirely this time around.
There's a beautiful world waiting,
But it's easy to be blinded by what you think is beautiful in a beautiful world.

In the dark for so long.
The retina I own captured false images
Of what I once believed in.
So much effort stored in a mirage,
lodged in doubtful recollections.

I want no sympathy,
I can only evolve through the chasing of symphonies.
Villainous, aren't you?
The conflict is the enemy.

I'll do away with this blame game,
You're just so awfully gifted at how you play.
I was the warm hearted prey

Fooled into what appears to be defeat,
Due to stupidity.
I saw what I wanted to see,
And clearly my vision was wrong.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

PROPHYLAXIS AGAINST DENGUE FEVER (DO’S & DONT’S)- ADVISORY

EMERGENCY FOLLOW UP FOR THE STUDENTS, STAFF MEMBERS AND PARENTS DATED: 28-07-17

Q1. WHAT IS DENGUE?

ANS. Dengue is a life threatening hemorrhagic fever which is a mosquito-borne tropical disease
caused by the dengue virus. Symptoms typically begin three to fourteen days after infection.

Q2. What causes DENGUE?

ANS. Dengue fever is transmitted by the bite of an Aedes aegypti mosquito infected with a dengue
virus. The mosquito becomes infected when it bites a person with dengue virus in their blood. It
can’t be spread directly from one person to another person.

Q3. AT WHAT CONDITIONS DOES DENGUE MOSQUITO BREED?

ANS. Temperatures in the range of 22 to 31 degrees C, relative humidity of 70% to 90%, and rainfall,
provided a suitable environment for breeding and abundance of Aedes mosquito species. This
increases the risk of dengue in monsoon months till November.

Q4. WHEN DO AEDES AEGYOTI MOSQUITO BITE?

ANS. Aedes aegypti mosquito is a day biting mosquito. That means the mosquito is most active
during daylight, for approximately two hours after sunrise and several hours before sunset. The
mosquito rests indoors, in closets and other dark places. Outside, they rest where it is cool and
shaded.

Q5. WHERE DO AEDES AEGYOTI MOSQUITO LIVE (BREED)?

ANS. The female mosquito lays eggs in containers with clean water and plants near the home. It
bites people and animals.

Q6. WHAT ARE THE SYMPTOMS OF DENGUE?

ANS. (i) High fever, possibly as high as 105˚F(40˚C).
(ii) Pain behind the eyes and in the joints, muscles and/or bones.
(iii) Severe headache.
(iv) Rash over most of the body.
(v) Mild bleeding from the nose or gums.

Q7. HOW TO PREVENT MOSQUITO BITE ?

ANS. (i) Apply mosquito repellent, ideally one containing DEET(N,N- Diethyl-meta-toluamide). Apply
it to exposed skin and/or clothing, using enough to cover the entire area.

(ii) Wear long-sleeves and long pants to cover your arms and legs.
(iii) Use mosquito nets while sleeping.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Q8. HOW TO PREVENT BREEDING OF MOSQUITOES?
ANS. (i) Eliminating Standing Water.

(ii) Change water collection pans for plant pots weekly.
(iii) Keep the rain gutters and the drains clean.
(iv) Eliminate or fill nooks, crannies and holes.
(v) Plant some mosquito-repelling flowers and herbs, especially near areas that are prone to
collect

water.
Herbs, such as: basil, lavender, rosemary and peppermint.
Flowers, such as: geranium, marigold and pennyroyal. Other plants, such as : catnip,
citronella,
lemon balm and garlic.
(vi) Adding some mosquito-eating fish, such as minnows or mosquito fish in drain.
(vii) Make use of larvicides to kill mosquito larvae.
(viii) Encourage other mosquito predators to visit your yard.
Q9. HOW CAN WE CURE DENGUE?
ANS. (i) The infected patient should be hospitalized urgently and kept under expert medical
supervision.
(ii) There is no specific medicine or antibiotic to treat it.
(iii) Rest and fluid intake for adequate hydration is important.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Importance of Public Speaking
Public speaking (also called oratory or oration) is the process or act of performing a speech to a live
audience. Now this is a bookish definition. What I feel and believe is that public speaking is about
three general purposes: To inform, to persuade and to entertain. Fun fact is 70% of all the jobs
involved some form of public speaking. So, the reason why a student should have confidence in
public speaking is clear and well known. But for a country like India, education system is lagging
behind in giving a boost to the students for public speaking. Matter of the fact is not language but
your self ability. If a student can speak well to an audience, he/she has achieved self confidence at
his/her best. Public speaking has many forms : speech, debates, elocution, extempore etc. If a
student is good at any of these, has half the ability of the perfect student needs. A teacher never
dislikes a student who gives good, constructive replies. A person who yearns to be the best in
business, has to work his brain in two ways simultaneously. One which creates his thought and one
which frames that into his speech. Addressing an audience can be tough but once overcoming that
fear, there is everyone who can beat you. As it is said , “ Always speak your heart out “. So whenever
you say something, make that thing heard to an audience.

- Joy Banerjee
Class – ‘X A’
Roll : 37


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

‘ CHEMYSTERY ’

The football shaped carbon cluster C60 has been called “the most beautiful molecule” & if you have an eye for
symmetry it’s easy to understand why. But if you have ever liked chemistry “You know that chemistry goes
beyond beauty like physics, there is an inherent romance to chemistry that stems from truth” rather than
classic aesthetic features Chemistry is a fascinating science, full of unusual trivia. Hopefully, these quick
chemistry facts & habits will speak your interest in this most noble science.

 The rarest naturally occurring element in the Earth’s crust is Astatine.
 DNA is a flame retardant ; when cotton cloth coated with it is heated, the phosphate from DNA

produces Phosphoric Acid which replaces the water in cotton fibers as a flame retardant residue.
The bases which contain Nitrogen react to produce ammonia which inhibits combustion.
 1 inch of rain is equal to 10 inches of snow.
 A rubber tire is technically one single giant polymerised molecule . Some molecules can be very big
but most are still microscopic. Not the vulcanized tire though; it’s one, big molecule. Basically it’s all
made of large polymers chains that have been cross linked together with covalent bonds.
 Your car’s airbags are packed with salt Sodium Oxide which is very toxic!
But when a collision takes place, the car’s sensors trigger an electrical impulse which in fraction of a
second dramatically raises the temperature of the salts. These then decompose into harmless
nitrogen gas, rapidly expanding the airbag.
 Famous chemist Glenn Seaborg was the only person who could write his address in chemical
elements. He would write Sg, Lr, Bk, Cf, Am, That’s Seaborgium (Sg); Lawrencium (Lr); Beskelin (Bk);
Califorium (CF); Amercicium (Am).
 The only two non-silvery metals are gold and copper.
 Although O2 is colourless gas, the liquid and solid forms of oxygen is blue.
 The human body contains enough carbon to provide lead for about 9000 pencils.
 Approximately 20% of the oxygen in atmosphere was produced by Amazon rainforest.
 One bucket full of water contains more atoms than there are buckets of water in the Atlantic Ocean.
 Hydrofluoric Acid is so corrosive that it dissolves glass although it’s considered to be “weak acid”.
 Bee stings are acidic, while wasp stings are alkaline.
 Hot peppers get their heat from molecule called capsaicin. While the molecule acts as irritant to
mammals including humans, birds lack the receptor responsible for the effect and are immune to the
burning sensation from exposure.
 Lipstick contains Lead Acetate or sugar of Lead. This toxic compound of lead makes lipstick taste
sweet.
 Cocacola originally contained Cocaine.
 If you expose a glass of water to space, it would boil rather than freeze. However, the water vapour
would crystallize into ice afterwards.
 Hot water freeze faster than cold water!

___ Medhakriti Debnath.
Class XII C Roll -13.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

SCIENCE – A BLESSING OR A CURSE ?

Science has revolutionized the human existence. Much of the progress that mankind has made in different
fields right from the stone age to modern age due to the progress made in the field of science. Not only the
material progress but also the mental outlook of man has been influenced by it. It has made man’s life
happier and more comfortable .
Electricity is one of the greatest wonders of modern science. It is a source of energy. It can run any type of
machinery. With the help of electricity we can light our rooms, run buses and trains and lift water for
irrigation. The discovery and development of a large number of powerful energy sources coal, petroleum,
natural gas, etc. have enabled the humanity to conquer the barriers of nature. All this has facilitated the
growth of fast modes of transports and communication which in turn has changed the world into a global
village. Science has given man the means of travelling cars, trains, ships, etc. Man has even travelled to the
moon.

________ Indranil Maity
Class - X C.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

Exam Stress, and How to Overcome it

- Siddhant Arya

“Rest is best before the test”. Many of us had heard this proverb which tells the importance of rest
at the time of exams and there are many other things which are needed to be considered before
appearing for the tests or exams.

Stress and anxiety is a very common problem in students as they are having a challenge standing
against them, i.e., the board exams, each and every student is trying his best to achieve good marks,
but in midst of this they are developing a serious lag which might be dangerous for the student, I am
talking about stress and anxiety. Some measures can be taken to reduce stress which will be very
useful for the students.

So, how can a student overcome stress and anxiety? There are many points, but the most important
ones are:-

I. Proper sleep
II. Good time management
III. Healthy diet
IV. Exercise
V. Meditation

If you will have a look at these five points, you will realize that the absence of any one of them may
be hazardous. Thereby, it is important to look after each of them and if all the work will be done in a
systematic manner, it will benefit the student.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

The last and the most important is proper study and if study is not there, achieving good marks will
be like finding a needle from hay. So, we have to take care of ourselves to study. The mechanism is
like the functioning of the organs of the body, if anyone of them fails or stop working, the effort of
every other organ will not at all be useful, similarly if any of the activities will not be performed, all
the other will go in vain.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

DOWN MEMORY LANE

By Chirantana Chakraborty

(XII – C)

I still have glimpses in my mind of how my first day in this school was, dressed in the earlier white
shirt – blue skirt uniform nervously clutching my elder brother’s hand as he escorted me to my new
class – I D. A whole new atmosphere was surrounding me, and the anonymity of all it scared me.
Moreover, I had no clue as to how to interact with others for my shy nature.

Presently, my class is adjacent to the then class I D, but more than a decade has passed since then
and the class board reads XII C.

With time not only did I become a part of this school but this school became a part of me. This is not
merely a school, but a feeling – a familiar feeling of homeliness.

Now that there are just a few months left before I pass out , I take out some time to relive this
journey. No school in a few months time is definitely difficult to assume. No more waking up at 6.15,
compromising proper neat plaits for a few minutes sleep, getting late for the school bus. No matter
how much I dislike standing for long in the morning assembly, I bet I will miss standing there with
you all, the feeling of familiarity and comfort somehow brightening up my start to a day.

I will miss my teachers, who constantly encouraged me to do better, praised me when I did good and
guided me in every way possible. I will miss sharing our tiffins everyday(yes, sharing is just a modest
way of putting it !). I will miss how we laugh out loud at the silliest of jokes and how we foolishly
used to wish each other ‘Happy Independence Day’ after the exams were over. This whole journey
was full of bitter sweet experiences with its own share of hitches. But I made some friends for life
here, who made this journey easier and memorable.

I remember the first time I was chosen to read in the class, that was in 2nd standard, how I
was all jittery and how the teacher comforted me. I remember the first time I had to present news in
the morning assembly – it was in the class 4th and how I had practised many times the day before in
front of the mirror. More than anything else, this place gave me confidence to believe in myself and
to perform fearlessly.

Every root and corner of this place has been the witness of each and every intricate feeling
of my being from the childish exuberance to the teenaged precociousness; from happiness of
achievements to disappointment of dejections and everything in between.

Sadly, it is time to move on but this school will forever hold a special place in my heart
because it is not just the school, it is my school – my ‘alma mater’.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

THE MAGNETISING BEACH

Palm trees are growing
And a warm breeze is blowing
Walking down the shore
As the sun goes down
The endless sky above
Painted in dusty pink and soft lavenders
The evening fresh waves
Wash up on the beach
Washing away my footprints
And tickling my feet
Sand creatures cause the sand to bristle
Seagulls gliding in the air
With screams and whistles
Kids building stormy sand castles
And I’m too restless to sit
Lost in my own thing
Looking for beach glasses and shells
And some buried treasure
Maybe it is the memories
The change of pace that brings us there
The sense of holiday
Maybe the aura of the place
So fresh, so serene.

________ Rimjhim Class – XII D Roll no- 24


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

WOMEN PIONEERS

 MARIA MONTESSORI -
Maria Montessori has her name immortalized in the Montessori schools which teach
young children all over the world. She laid stress on individual talent development and
came to be known as the mother of modern Primary Education. Her insights into
children’s psyche gave us an excellent teaching method.

 HELLEN KELLER – Helen keller has been called a Visionary. Nearly two centuries ago,
Helen Keller proved that loss of sight, speech and sound would never be able to hold her
down. She learnt lip reading by pressing fingertips to the speaker’s lips. she published
many books and articles and was a traveller who went to many countries showing the
light to others like her.

 AGATHA CHRISTIE –
Agatha Christie has been called ‘Mistress of Mystery’. No one has been able to dethrone
her from her esteemed place as the ‘Empress of Crime Writing’. She was lonely and
unhappy during her married life. so, she chose novels to pass her time and bring
adventure into it. Miss Marple and Hercule Poirot are popular yet untypical characters
she created.


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18

20 CGPA


VIDYALAYA PATRIKA 2017-18


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12/22/2017 ISSUE 51